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Zydus Life ने किया Share Buyback का ऐलान, ऐसे फायदा उठा सकते हैं आप

Zydus Lifesciences Limited को पहले Cadila Healthcare Limited के नाम से जाना जाता था. यह मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं का निर्माण करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

फार्मा कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड (Zydus Lifesciences) ने शेयर बायबैक का ऐलान किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी टेंडर ऑफर रूट के जरिए 600 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक करेगी. इसके लिए 1005 रुपए प्रति शेयर का भाव तय किया गया है. वहीं, इस खबर के बीच Zydus Lifesciences के शेयरों में मामूली बढ़त भी दिखाई दी. कारोबार की समाप्ति पर कंपनी के शेयर 0.33% के उछाल के साथ 945.70 रुपए पर पहुंच गए थे. 

अच्छे रहे हैं तिमाही नतीजे
करीब 95 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के मार्केट कैप वाली Zydus Life ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि शेयर बायबैक 29 फरवरी को खुलेगा और 6 मार्च को बंद हो जाएगा. कंपनी ने बताया कि वह टेंडर ऑफर रूट के माध्यम से 1 रुपए फेस वैल्यू वाले 59,70,149 शेयरों को 1005 रुपए प्रति शेयर के भाव पर वापस खरीदेगी. कंपनी के तिमाही नतीजों की बात करें, तो मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27% की उछाल के साथ 790 करोड़ रुपए रहा. वहीं, कंपनी का ऑपरेशन से कुल रिवेन्यु 6 परसेंट बढ़कर 4,505 करोड़ रुपए पहुंच गया. 

क्या होता है शेयर बायबैक?
अब जानते हैं कि आखिर शेयर बायबैक होता क्या है? आमतौर पर शेयर बाजार में हमें जब कोई कंपनी पसंद आती है तो हम उसके शेयर खरीद लेते हैं, तो उसे SHARE BUY करना कहते हैं. लेकिन जब यही प्रक्रिया रिवर्स हो जाए, यानी जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदना शुरू कर दे तो इसे SHARE BUYBACK कहते हैं. बायबैक दो प्रकार के होते हैं. टेंडर ऑफर बायबैक और ओपन ऑफर बायबैक. टेंडर ऑफर बायबैक के तहत कंपनी जब ये तय करती है कि वो शेयरों का बायबैक करेगी, तो एक रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया जाता है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में कंपनी के शेयर मौजूद रहते हैं वो ही निवेशक कंपनी के टेंडर ऑफर बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं. कंपनियां आमतौर पर निवेशकों को बायबैक का ऑफर मार्केट प्राइज से ज्यादा पर करती हैं, ताकि निवेशक अपना फायदा देखकर इस ऑफर में हिस्सा लें. कंपनियों की ओर से टेंडर ऑफर बायबैक के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाता है. इस दौरान शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को ऑफर करने होते हैं. इसके बाद शेयरहोल्डर्स के पास ई-मेल के जरिए ये जानकारी मिलती है कि उनके कितने शेयर बायबैक हुए हैं. क्योंकि कंपनियां अक्सर पूरे शेयरों का बायबैक नहीं करती हैं.  

कैसे होता है फायदा?
इसी तरह, जब कंपनी अपने शेयरों को एक्सचेंज से खरीदती है तो उसे ओपन ऑफर बायबैक कहते हैं, जैसा कि एक आम निवेशक करता है. हालांकि कंपनी पहले से ये तय कर लेती है कि उसे कितने शेयर खरीदने हैं और किस भाव पर खरीदने हैं. कंपनी इस शेयर बायबैक की प्रक्रिया को 6 महीने के दौरान पूरा करती है. इस ऑफर में आम शेयरहोल्डर्स का कोई लेना देना नहीं होता है, क्योंकि कंपनी ओपन मार्केट से शेयर खरीद रही है, ठीक वैसे ही जैसे हम और आप खरीदते हैं. अब बात करते हैं इससे निवेशकों को होने वाले फायदे की. जब कोई कंपनी शेयर बायबैक लेकर आती है, तो अक्सर उसका मकसद अपने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने का होता है. ऐसे में जो निवेशक इस शेयर बायबैक ऑफर में हिस्सा नहीं लेते हैं, उन्हें भी फायदा मिलता है, क्योंकि आमतौर पर शेयरों का प्राइज आगे चलकर बढ़ जाता है. दूसरी तरफ जो निवेशक शेयर बायबैक में हिस्सा लेते हैं उन्हें शेयर की बढ़ी हुई कीमत उसी समय मिल जाती है यानी वो भी फायदे में रहते हैं.


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