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क्या कम हो पाएगी आपके घर की EMI? इस बार की RBI बैठक को लेकर ये कह रहे हैं एक्सपर्ट
RBI का प्रमुख काम महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने से लेकर बैंकिंग सेक्टर पर निगरानी रखना है. लेकिन महंगाई दर में कमी तो हुई है लेकिन उतनी नहीं हुई है जिससे रेपो रेट में कमी की जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
इस महीने की 5-7 जून तक आरबीआई की मौद्रिक नीति की समीक्षा एक बार फिर होने जा रही है. हर दो महीने बाद होने वाली ये समीक्षा बैठक दो दिनों तक चलती है. दो दिनों के बाद ही रिजर्व बैंक रेपो रेट की घोषणा करता है. लेकिन महंगाई सहित दूसरे कई कारणों को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार भी ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं है. एक बार फिर आरबीआई रेपो रेट को स्थिर रख सकता है. अगर ऐसा हुआ तो ये आठवां मौका होगा जब आरबीआई ये कदम उठाएगा.
क्या कह रहे हैं महंगाई के आंकड़े?
रेपो रेट को जो तथ्य सबसे ज्यादा प्रभावित करता है वो है महंगाई. महंगाई के फ्रंट पर आरबीआई के स्तर के मुकाबले कोई बहुत बड़ी राहत नहीं मिली है. अप्रैल में महंगाई दर 4,83 प्रतिशत बनी हुई है. हालांकि आंकड़ा 5 प्रतिशत से कम बना हुआ है लेकिन पीएमआई और जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर आंकड़े सकारात्मक बने हुए हैं. यही नहीं पिछले कुछ दिनों में हीट वेव ने फसलों पर विपरीत असर डाला है लेकिन मौसम विभाग ने अच्छे मानसून की संभावना जताई है जिससे फसलों पर अच्छा असर दिख तो सकता है लेकिन उसके लिए इंतजार करना होगा.
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क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?
आरबीआई के द्वारा की जाने वाली रेपो रेट की घोषणा को लेकर मार्केट एक्सपर्ट आकाश जिंदल का कहना है कि मुझे नहीं लगता है कि इस बार किसी तरह का बदलाव होने जा रहा है. उनका कहना है कि एक तो महंगाई दर 4.83 प्रतिशत पर बनी हुई है. वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपने वहां ब्याज दरों में किसी भी तरह की कमी नहीं की है. ऐसे में मुझे किसी भी तरह से कोई गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है जिससे रेपो रेट में कमी हो. बेहतर PMI आंकड़े और जीएसटी के आंकड़ों को लेकर आकाश जिंदल कहते हैं कि जीएसटी के आंकड़े हमेशा ही अप्रैल में बेहतर होते हैं क्योंकि इस महीने में बैक लॉग क्लियर होता है.
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया आरबीआई की एमपीसी बैठक को लेकर कहते हैं कि लगातार बढ़ी हुई खाद्य महंगाई और मजबूत जीडीपी वृद्धि के कारण आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखने की संभावना है. मौसम संबंधी जोखिमों के बीच सतर्क रुख के साथ, 2024 के अंत तक संभावित दर में कटौती का संकेत मिलता है. 'आरबीआई को अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने की उम्मीद है. क्योंकि महंगाई दर आरबीआई के द्वारा तय किए गए टारगेट से ज्यादा है. ऐसे में इस बार भी किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है.
कब होने जा रही है बैठक?
आरबीआई की एमपीसी की बैठक 5 जून से लेकर 7 जून तक होने जा रही है. 7 जून को आरबीआई बैठक के आखिरी दिन इसे लेकर प्रेस कांफ्रेस करेगा और ब्याज दरों का ऐलान करेगा. इससे पहले फरवरी और अप्रैल में भी आरबीआई की ओर से रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. अगर आरबीआई इस बार भी रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करता है तो ये आठवां मौका होगा जब इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होता है.
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