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क्या OPS बहाल करने वाली है सरकार, पुरानी पेंशन व्यवस्था से कितनी अलग है नई योजना? 

कर्मचारी संगठनों ने बजट पूर्व बैठक में वित्तमंत्री से एक बार फिर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

मोदी सरकार (Modi Govt) अगले महीने पूर्ण बजट पेश कर सकती है. चूंकि, इस बार सरकार सहयोगियों के कंधों पर खड़ी है, इसलिए पूरी उम्मीद है कि बजट जनता को खुश करने वाला हो सकता है. लोकसभा चुनाव से पहले फरवरी में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जब अंतरिम बजट पेश किया था, तब कोई बड़ी घोषणा नहीं की थी. अब हालात बिल्कुल जुदा हैं, इसलिए बजट के लोकलुभावन होने की पूरी संभावना है. ऐसे में एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या सरकार उन लाखों कर्मचारियों को भी खुश कर सकती है, जो पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग कर रहे हैं? 

संगठनों की ये भी हैं मांगें
श्रमिक संगठनों के नेताओं ने सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट पूर्व चर्चा में OPS का भी मुद्दा उठाया. इसके साथ ही उन्होंने सरकार को 8वें वेतन आयोग का गठन और वेतनभोगी वर्ग के लिए कर छूट में वृद्धि की भी मांग की. श्रमिक संगठनों ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने के साथ ही सरकार को नई पेंशन योजना को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि वेतनभोगी वर्ग के लिए उनके वेतन और ग्रैच्युटी पर आयकर छूट की अधिकतम सीमा को पर्याप्त रूप से बढ़ाना चाहिए. 

इन्होंने लिया बैठक में हिस्सा  
श्रमिक संगठनों का कहना है कि असंगठित श्रमिकों और कृषि श्रमिकों के लिए सरकार द्वारा प्रायोजित सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि उन्हें न्यूनतम 9000 रुपए प्रति माह पेंशन सहित अन्य लाभ मिल सकें. साथ ही उन्होंने मांग की है कि केंद्र के विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में सभी मौजूदा रिक्त पदों को तुरंत भरा जाना चाहिए और अनुबंध-आउटसोर्सिंग की प्रथा को खत्म किया जाना चाहिए. इस बैठक में इंटक, एआईटीयूसी, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी और यूटीयूसी सहित 12 मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. 

क्या तैयार हो सकती है सरकार?
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग पिछले काफी समय से चल रही है. लोकसभा चुनाव से पहले राजधानी दिल्ली में नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के बैनर तले 'पेंशन शंखनाद महारैली' आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे. चलिए जानते हैं कि आखिर नई और पुरानी पेंशन स्कीम में क्या अंतर है और क्या सरकार इसके लिए राजी हो सकती है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि OPS बहाल होना मुश्किल ज़रूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं. मोदी सरकार को इस बार सभी को खुश करना होगा. OPS की मांग पुरानी है और सरकार के सहयोगी भी स्थानीय स्तर इस दबाव को महसूस कर चुके हैं. ऐसे में संभव है कि वह केंद्र पर इसके लिए दबाव बनाएं.       

क्या है Old Pension Scheme?
1950 के दशक में शुरू की गई ओल्ड यानी पुरानी पेंशन स्कीम के तहत रिटायर्ड कर्मचारी को अनिवार्य पेंशन का अधिकार मिलता है, जो रिटायरमेंट के समय मिलने वाले मूल वेतन का 50 फीसदी होता है. दूसरे शब्दों में कहें तो सरकारी कर्मचारी जिस बेसिक-पे पर सेवानिवृत्त होता है, उसका 50% उसे पेंशन के रूप में दिया जाता है. इस स्कीम का एक बड़ा फायदा ये है कि रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारी को लगातार महंगाई भत्ता सहित अन्य भत्तों का लाभ मिलता रहता है. यदि सरकार कर्मचारियों के किसी भत्ते में इजाफा करती है, तो ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत आने वालों का भत्ता भी अपने आप बढ़ जाता है. पुरानी पेंशन को साल 2004 में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने बंद कर दिया था. इसमें जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) का प्रावधान होता है. इसमें 20 लाख रुपए तक ग्रेच्युटी की रकम शामिल है. इसके साथ साथ रिटायर्ड कर्मचारी की मौत पर परिजनों को आधी पेंशन मिलती है. OPS की सबसे अच्छी बात ये है कि इसके लिए कर्मचारियों की सैलरी से पैसा नहीं कटता, यानी पेंशन का भुगतान सरकार के खजाने से होता है.

क्या है New Pension Scheme?
चूंकि न्यू पेंशन स्कीम 2004 में लागू की गई थी, इसलिए उसके बाद के सभी सरकारी कर्मचारी इसी के दायरे में आते हैं. यानी उन्हें पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ नहीं मिलता. NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 10% की कटौती की जाती है. कहने का मतलब है कि कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 10 फीसदी कंट्रीब्यूशन देता है, जिसमें राज्य या केंद्र भी उतना ही योगदान देती है. नई पेंशन स्कीम में GPF की सुविधा उपलब्ध नहीं है. शेयर बाजार (Stock Market) पर आधारित इस स्कीम में पैसा पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा एप्रूव्ड कई पेंशन फंड्स में से एक में निवेश किया जाता है और रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है. इसलिए इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती. इसी को लेकर कर्मचारी सबसे ज्यादा आशंकित हैं. उन्हें लग रहा है कि भविष्य में यदि बाजार डूबता है, तो उनकी मेहनत की कमाई भी डूब जाएगी और उनकी रिटायरमेंट लाइफ मुश्किल में पड़ जाएगी.

किस वजह से नहीं मान रही सरकार?
अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार तमाम विरोध के बावजूद New Pension Scheme पर ही क्यों अड़ गई है? दरअसल, पुरानी पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों की सैलरी से पैसा नहीं कटता, यानी पेंशन का भुगतान सरकार के खजाने से होता है. जिसका मतलब है कि सरकार को भारी बोझ उठाना पड़ता है. सरकार अब इस जिम्मेदारी को उठाने के मूड में नहीं है, इसलिए इसकी संभावना बेहद कम है कि विरोध-प्रदर्शन से उसकी सेहत पर कोई असर पड़ेगा. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की इस स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि Old Pension Scheme को दोबारा अपनाया जाता है, तो पेंशन पर होने वाला खर्च New Pension Scheme के तहत अनुमानित पेंशन खर्च का करीब 4.5 गुना बढ़ जाएगा.


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