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क्या FY24 में IDBI बैंक को निजी हाथों में सौंप पाएगी सरकार? DIPAM सचिव ने दिया जवाब
मोदी सरकार चुनाव में नुकसान की आशंका के चलते विनिवेश पर तेजी से आगे नहीं बढ़ रही है. हालांकि, सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना उसकी प्राथमिकता में शुमार है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मोदी सरकार (Modi Government) काफी समय से IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में लगी है. हालांकि, चुनावी मौसम में सरकार विनिवेश को लेकर थोड़ी सावधानी बरत रही है, ऐसे में सवाल लाजमी है कि क्या बिक्री प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष 2023-24 में पूरी हो पाएगी? डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मॉनेटाइजेशन (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने इसका जवाब दिया है. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक बिक्री अपनी राह पर है, लेकिन अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के उपयुक्त एवं उचित मानदंड जैसे कुछ पहलुओं को पूरा करने की जरूरत है.
मार्च 2024 से पहले मुमकिन नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दीपम सचिव पांडेय ने उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित कार्यक्रम में IDBI में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री पर कहा कि व्यावहारिक रूप से नहीं लगता कि मार्च 2024 से पहले आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया पूरी हो पाएगी. दरअसल, तुहिन कांत पांडेय से पूछा गया था कि क्या विभाग चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 51,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य हासिल कर पाएगा? इस पर उन्होंने कहा कि विनिवेश लक्ष्य काफी हद तक आईडीबीआई बैंक जैसे महत्वपूर्ण सौदों पर निर्भर है और इस बिक्री के मार्च 2024 से पहले पूरा होने की संभावना कम है.
कितनी है सरकार की हिस्सेदारी?
सरकार के पास IDBI बैंक में 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है. इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास भी बैंक की 49.24% हिस्सेदारी है. इस तरह, दोनों के पास IDBI बैंक में संयुक्त रूप से 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे वो बेचना चाहते हैं. IDBI बैंक के पास 11,520 करोड़ रुपए की विलंबित कर एसेट्स हैं. इसके अलावा मुंबई, पुणे और चेन्नई सहित कई शहरों में उसकी 129 संपत्तियां भी हैं. बैंक की मुंबई में 68, पुणे में 20, चेन्नई में 9 और अहमदाबाद में 7 प्रॉपर्टी हैं. इसी तरह, कोलकाता में 6 और दिल्ली में 5 और हैदराबाद में भी 5 संपत्तियां हैं.
चुनाव बाद तेज होगी रफ्तार!
पांडेय ने आगे कहा कि NMDC की शेयर बिक्री को लेकर भी कुछ अनिश्चितता है. इससे 10,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री पर, DIPAM सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक एसेट ट्रांसफर ट्रांजेक्शन पर स्टांप शुल्क में छूट देने का आदेश दिया है. एसेट ट्रांसफर ट्रांजेक्शन, बिक्री से पहले होना है. बता दें कि मोदी सरकार चुनाव में नुकसान की आशंका के चलते विनिवेश पर तेजी से आगे नहीं बढ़ रही है. हालांकि, सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना उसकी प्राथमिकता में शुमार है और चुनावी मौसम बीतने के बाद इसमें तेजी देखने को मिल सकती है.
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