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अडानी ग्रुप की एल्युमिनियम सेक्टर में एंट्री, ओडिशा में 1.1 लाख करोड़ रुपये का मेगा निवेश

अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

सीमेंट और तांबा कारोबार में विस्तार के बाद अब अडानी ग्रुप ने एल्युमिनियम उद्योग में भी बड़ी एंट्री की तैयारी कर ली है. समूह अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए ओडिशा में करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना स्थापित करेगा. यह निवेश भारत के धातु क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल होगा और देश के एल्युमिनियम बाजार में लंबे समय से मजबूत पकड़ रखने वाली हिंडाल्को और वेदांता के लिए नई प्रतिस्पर्धा खड़ी कर सकता है.

IHC के साथ संयुक्त उद्यम में बनेगा मेगा प्रोजेक्ट

अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है. करीब 11.5 अरब डॉलर (लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये) की इस परियोजना में एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किए जाएंगे.

हिंडाल्को और वेदांता के दबदबे वाले बाजार में नई चुनौती

भारत के एल्युमिनियम उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल हिंडाल्को और वेदांता के पास है. ऐसे बाजार में नए खिलाड़ी के लिए प्रवेश आसान नहीं माना जाता, क्योंकि इसके लिए खनन, रिफाइनिंग, बिजली और लॉजिस्टिक्स का मजबूत नेटवर्क जरूरी होता है. अडानी ग्रुप की प्रस्तावित परियोजना पूरी तरह एकीकृत होगी, जिससे उत्पादन लागत और आपूर्ति श्रृंखला दोनों पर बेहतर नियंत्रण रहेगा.

20 लाख टन एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता होगी

परियोजना के तहत सालाना 40 लाख टन क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी, 20 लाख टन क्षमता का एल्युमिनियम स्मेल्टर, 4,000 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट और 10 लाख टन क्षमता का डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा. वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल एल्युमिनियम उत्पादन करीब 42 लाख टन रहा था. ऐसे में अकेले इस परियोजना से देश की उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.

बढ़ती मांग को देखते हुए लगाया जा रहा दांव

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक होने के बावजूद अपनी जरूरतों का एक हिस्सा आयात से पूरा करता है. सरकारी अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में देश में एल्युमिनियम की मांग करीब 55 लाख टन रही, जो 2030 तक 85 लाख टन और 2047 तक 2.8 करोड़ टन तक पहुंच सकती है. वहीं प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम खपत अभी वैश्विक औसत से काफी कम है, जिससे भविष्य में इस धातु की मांग तेज़ी से बढ़ने की संभावना है.

सस्ती बिजली बनेगी सबसे बड़ी ताकत

एल्युमिनियम उत्पादन में ऊर्जा लागत सबसे महत्वपूर्ण होती है. अडानी ग्रुप के पास पहले से बड़ा बिजली उत्पादन पोर्टफोलियो है, जिसका लाभ इस परियोजना को मिलेगा. प्रस्तावित 4,000 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट के साथ 400 मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता भी जोड़ी जाएगी. इससे उत्पादन लागत कम रखने और प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी.

ओडिशा क्यों चुना गया?

इस परियोजना के लिए ओडिशा का चयन रणनीतिक रूप से किया गया है. भारत के आधे से अधिक बॉक्साइट भंडार इसी राज्य में हैं, जो एल्युमिनियम उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है. एल्युमिना रिफाइनरी रायगड़ा जिले में खदानों के निकट स्थापित की जाएगी, जबकि एल्युमिनियम स्मेल्टर सुंदरगढ़ में बनाया जाएगा. परियोजना के लिए कच्चा माल बल्लाडा, कुत्रुमाली समेत अन्य खदानों से आएगा. वहीं तैयार उत्पाद और कच्चे माल के परिवहन के लिए अडानी समूह के धामरा बंदरगाह और विशेष रेल एवं कन्वेयर नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा.

मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ऑटोमोबाइल, बिजली, निर्माण, रक्षा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को घरेलू स्तर पर एल्युमिनियम की बेहतर उपलब्धता मिलेगी. साथ ही, अडानी समूह अपने बंदरगाह, डेटा सेंटर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी इस धातु का उपयोग कर आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत कर सकेगा.
 


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