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चीन+1 रणनीति का भारत को बड़ा फायदा, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 4.15% पर पहुंची: रिपोर्ट

ASSOCHAM की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश, पीएलआई योजना और 'चीन+1' रणनीति के चलते भारत दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

वैश्विक कंपनियों के चीन पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन में विविधता लाने की रणनीति का भारत को बड़ा फायदा मिल रहा है. उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के बाद भारत की विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) वृद्धि वैश्विक औसत से बेहतर रही है. सरकार के नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश, पीएलआई योजना और 'चीन+1' रणनीति के चलते भारत दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है.

महामारी के बाद तेज हुई भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ

एसोचैम की रिपोर्ट 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग अंडरगोइंग स्ट्रैटेजिक रिअलाइनमेंट: इंडिया इमर्जेज ऐज अ की बेनिफिशियरी ऑफ सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन' के अनुसार, वर्ष 2022-25 के दौरान भारत की औसत मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि दर बढ़कर 4.15% हो गई, जबकि 2016-19 के दौरान यह 3.44% थी. इसके विपरीत, महामारी के बाद वैश्विक औसत मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि दर घटकर 2.19% रह गई, जो महामारी से पहले 4.39% थी.

दुनिया के शीर्ष विनिर्माण देशों में मजबूत हुई भारत की स्थिति

रिपोर्ट में दुनिया की 10 सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है, जिनका वैश्विक विनिर्माण उत्पादन में लगभग 65% योगदान है. अध्ययन के अनुसार, भारत अब 'उभरते हुए विनिर्माण नेताओं' (Emerging Manufacturing Leaders) में शामिल हो गया है और वैश्विक औसत की तुलना में उसका प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है.

वैश्विक औसत से ऊपर पहुंचा भारत

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-19 के दौरान भारत की मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि वैश्विक औसत से 0.95 प्रतिशत अंक कम थी. हालांकि, 2022-25 में भारत वैश्विक औसत से 1.96 प्रतिशत अंक ऊपर पहुंच गया. वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्था चीन का प्रदर्शन इस दौरान कमजोर हुआ है. महामारी से पहले चीन की वृद्धि वैश्विक औसत से 2.40 प्रतिशत अंक अधिक थी, लेकिन अब यह वैश्विक औसत से 2.26 प्रतिशत अंक नीचे आ गई है.

चीन+1 रणनीति से मिला भारत को फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद कंपनियां अपनी उत्पादन इकाइयों को केवल चीन तक सीमित रखने के बजाय 'चीन+1', 'नियरशोरिंग' और 'फ्रेंडशोरिंग' जैसी रणनीतियां अपना रही हैं. इसका उद्देश्य सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और विविध बनाना है. इस बदलाव से भारत निवेशकों के लिए एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र बनकर उभरा है.

नीतिगत सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण परिदृश्य में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है. कंपनियां अब केवल लागत और दक्षता पर नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता पर भी ध्यान दे रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत के बेहतर प्रदर्शन के पीछे लगातार किए गए आर्थिक सुधार और निवेशकों का बढ़ता विश्वास प्रमुख कारण हैं.

इन सरकारी पहलों का मिला फायदा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विनिर्माण क्षमता मजबूत होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. इनमें घरेलू मांग में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास, लॉजिस्टिक्स में सुधार, 'चीन+1' रणनीति के तहत बढ़ा विदेशी निवेश, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, पीएम गति शक्ति कार्यक्रम और औद्योगिक गलियारों का विकास शामिल हैं.

आगे किन क्षेत्रों पर देना होगा जोर?

एसोचैम का मानना है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश करना होगा. इसके साथ ही घरेलू सप्लायर नेटवर्क को मजबूत करने, कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को बढ़ावा देने और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का बेहतर उपयोग करने की जरूरत होगी.

निर्मल के. मिंडा ने कहा कि अब अगले चरण में सरकार और उद्योग को मिलकर ऐसे वैश्विक स्तर के विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए, जो भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में और अधिक मजबूत स्थिति दिला सकें.
 


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