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क्या अमेरिका के सहयोग से बदल जाएगी भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री?
मौजूदा समय में भारत एक ओर जहां सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री मे तेजी से आगे बढ़ने को तैयार है वहीं अमेरिका के साथ हुए इस सहयोग से उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अब इसमें और तेजी से आगे बढ़ पाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
शुक्रवार को भारत में अमेरिका की सेक्रेट्री ऑफ कॉमर्स और कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल के बीच सेमीकंडक्टर तकनीक में सहयोग देने को लेकर हुए एक एमओयू को इस इंडस्ट्री के जानकार भारत के लिहाज से महत्वपूर्ण डेवलपमेंट के तौर पर देख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि अगर ये एमओयू आगे सफल रहता है तो सेमीकंडक्टर के जिस बाजार में भारत अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा है वहां आने वाले दिनों में उसके लिए ये एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है.
भारत अमेरिका के बीच साइन हुआ एमओयू
शुक्रवार को अमेरिका की सेक्रेटी ऑफ कॉमर्स जीना एम रायमोंडो और भारत के कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल के बीच एक एमओयू साइन हुआ है. इस एमओयू के बारे में जानकारी देते हुए कॉमर्स मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर की तकनीक पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच एमओयू साइन किया गया है. इसके तहत अमेरिका भारत को सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी देने में मदद करेगा. शुक्रवार को दोनों देशों के बीच ये समझौता हुआ.
भारत सेमीकंडक्टर को लेकर तेजी से कर रहा है काम
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री दुनिया में तो लंबे समय से चल रही है लेकिन भारत ने इस पर कुछ ही सालों से काम करना शुरू किया है, ऐसे में इस समझौते को भारत की इस इंडस्ट्री के लिहाज के बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन अमेरिका के चिप्स और विज्ञान अधिनियम और भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के मद्देनजर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के लचीलापन और विविधीकरण के लिए एक सहयोगी तंत्र स्थापित करना चाहता है.
दुनिया में इस वक्त सेमीकंडक्टर चिप्स की है बड़ी मांग
मौजूदा समय में जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है तब से दुनिया में सेमीकंडक्टर की आपूर्ति बूरी तरह से प्रभावित हुई है. इस आपूर्ति के बाधित होने का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ा है. वहां हालात ये हैं कि कई गाडि़यों की चिप्स की उपलब्धता न होने के कारण उनका वेटिंग पीरियड एक साल से भी लंबा हो रहा है, जिसके कारण उनकी आपूर्ति में परेशानी पैदा हो रही है. अगर भारत के सेमीकंडक्टर उत्पादन में अमेरिका आने वाले दिनों में टेक्नोलॉजी से लेकर दूसरी तरह की मदद देता है तो इससे भारत की ये इंडस्ट्री ट्रैक पर आ सकती है जो देश में हजारों लोगों को नए अवसर देने का तो काम करेगी ही लेकिन दुनिया से भी चिप्स की कमी को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है.
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