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तेज दौड़ के बाद क्या अब फूलेंगी सोने की सांसें या जारी रहेगा तेजी का दौर?
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उछाल जारी है. पिछले कुछ समय में सोने ने निवेशकों ज़बरदस्त रिटर्न दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बीते कुछ समय से सोना निवेशकों की नंबर 1 पसंद बना हुआ है. इसकी वजह है छप्परफाड़ रिटर्न. अक्सर लंबी और तेज दौड़ के बाद सांस फूलने लगती है, ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या सोने में तेजी बनी रहेगी या फिर तेजी पर ब्रेक लग जाएगा? एक्सपर्ट्स की मानें तो सोने में तेजी का सिलसिला बना रहेगा. उनका मानना है कि संवत 2081 में गोल्ड 15 से 18 फीसदी तक का रिटर्न दे सकता है. इसके तमाम कारण हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उथल-पुथल और अस्थिरता प्रमुख है. दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच टेंशन कम होने के बजाये बढ़ती जा रही है. अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर इजरायल पर हमले हुए तो वो चुप नहीं बैठेगा.
इतने चढ़ सकते हैं दाम
दिवाली से शुरू हुए संवत 2081 को लेकर निवेशक उत्साहित हैं. हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह नए वित्त वर्ष की शुरुआत है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने-चांदी का प्रदर्शन पिछले संवत 2080 में मजबूत रहा है और इस साल भी उनमें मजबूती आने की पूरी संभावना है. एक रिपोर्ट में एलकेपी सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के वाइस प्रेसीडेंट के हवाले से बताया गया है कि संवत 2081 में सोने के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं. सोने में कम से कम 10 फीसदी की तेजी देखने को मिल सकती है. यदि आयात शुल्क में कटौती से खरीदारी में तेजी जारी रहती है, तो Gold के दाम 15-18 फीसदी तक चढ़ सकते हैं.
चांदी में भी आएगी चमक
एक्सपर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और वैश्विक ब्याज दर नीतियों में बदलाव से गोल्ड की कीमतों को समर्थन मिला है. दरअसल, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने सोने की जमकर खरीदारी की है, जिसके चलते पिछले साल इसकी कीमतों में 40 फीसदी तक की ग्रोथ हुई. सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी संवत 2080 में जोरदार उछाल देखने को मिला. जानकारों का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी प्रतिबद्धताओं के कारण चांदी की मांग में बढ़ोतरी जारी रह सकती है.
कौन तय करता है Gold Price?
दुनियाभर में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा सोने की कीमत तय की जाती है. वह यूएस डॉलर में सोने की कीमत प्रकाशित करता है। यह कीमत बैंकरों और बुलियन व्यापारियों के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है. भारत में, इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आयात शुल्क और अन्य लागू टैक्स को जोड़कर यह तय करता है कि रिटेल विक्रेताओं को सोना किस दर पर दिया जाएगा.
Bharat यहां से करता है इम्पोर्ट
भारत के लिए स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत है. यहां से हमारे कुल गोल्ड आयात की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात से भारत लगभग 13 फीसदी और दक्षिण अफ्रीका से करीब 10 प्रतिशत सोना आयात करता है. भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Gold कंज्यूमर है. देश में सोने का आयात मुख्य रूप से ज्वैलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है. देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से ज्यादा की है.
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