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शेयर बाजार में फिर बढ़ेगा विदेशी निवेश? HSBC ने जताई 25 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद
ग्लोबल बैंक HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 53 minutes ago
भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अब थमती दिखाई दे रही है. HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड मैनेजर अब AI-प्रधान एशियाई बाजारों में बढ़ती अस्थिरता से निकलकर भारत जैसे मजबूत आर्थिक बुनियाद वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड भारत में अपनी हिस्सेदारी को केवल 'न्यूट्रल' स्तर तक भी बढ़ाते हैं, तो भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आ सकता है.
80% से ज्यादा ग्लोबल फंड भारत में हैं अंडरवेट
HSBC के रणनीतिकार प्रेरणा गर्ग, हेराल्ड वैन डेर लिंडे और योगेश अग्रवाल के मुताबिक, 80 फीसदी से अधिक एक्टिव ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड फिलहाल भारत में 'अंडरवेट' यानी अपेक्षाकृत कम निवेश किए हुए हैं. उनका कहना है कि केवल इस स्थिति के सामान्य होने भर से भारतीय बाजार में 25 अरब डॉलर तक की नई विदेशी पूंजी आ सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI थीम के चलते विदेशी निवेश का जो रोटेशन हुआ था, उसका बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है.
भारत क्यों बन रहा है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद?
HSBC का मानना है कि AI आधारित बाजारों में तेजी से बढ़े वैल्यूएशन और अस्थिरता के कारण निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं. ऐसे में भारत मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिरता और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार, जून के मध्य से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार में करीब 6 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा आया निवेश?
15 जून से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और हेल्थकेयर सेक्टर में किया. वहीं, दक्षिण कोरिया और ताइवान में पहले से भारी निवेश रखने वाले ग्लोबल फंड अब भारत और मुख्यभूमि चीन में भी अपना एक्सपोजर बढ़ाने लगे हैं.
HSBC का कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के मुकाबले भारत का बाजार अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है. इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारत की तुलना में लगभग चार गुना अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
घरेलू मांग और बेहतर नतीजों से मिल रहा सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और म्यूचुअल फंड के जरिए लगातार हो रहा SIP निवेश भारतीय बाजार को मजबूती दे रहा है. जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट निवेश भी बढ़ा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का बड़ा योगदान रहा.
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली करीब 73 फीसदी कंपनियों ने बाजार की उम्मीदों के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत मिले हैं.
EPS ग्रोथ और वैल्यूएशन पर क्या है नजरिया?
HSBC के मुताबिक, जून में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.3 फीसदी पहुंच गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग भी उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. बैंक ने कमोडिटी, फाइनेंशियल, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर के लिए आय के अनुमान बढ़ाए हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का वैल्यूएशन अभी भी अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले ऊंचा है, लेकिन ऐतिहासिक आधार पर यह अब अपने निचले दायरे के करीब पहुंच चुका है. खासकर फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक हो गए हैं.
HSBC को किन सेक्टर्स और शेयरों पर भरोसा?
HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है. बैंक की पसंद में फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, रिटेल, सर्विस, हॉस्पिटल, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिफिकेशन और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं.
HSBC के पसंदीदा शेयरों में ICICI बैंक, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, फीनिक्स मिल्स, फोर्टिस हेल्थकेयर, कमिंस इंडिया, सिरमा SGS टेक्नोलॉजी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं.
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