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कड़े फैसलों पर अड़े रहेंगे मोदी या सुस्त पड़ेगी सुधारों की रफ्तार? पढ़ें, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
नरेंद्र मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में 8 जून को शपथ ले सकते हैं. सरकार को लेकर अब कोई सस्पेंस नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
नई सरकार को लेकर अब लगभग सभी सस्पेंस खत्म हो गए हैं. इंडिया गठबंधन ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वह जोड़तोड़ की कोई कोशिश नहीं करना चाहता. वहीं, TDP प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और JDU चीफ नीतीश कुमार भी स्पष्ट कर चुके हैं कि NDA की सरकार बनवाना उनकी प्राथमिकता है. माना जा रहा है कि 7 जून को NDA सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और 8 जून को मोदी प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. मोदी की ताजपोशी का गवाह बनने के लिए भूटान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और मॉरीशस के प्रमुखों को न्योता दिया गया है.
मोदी ने दिए ये संकेत
इस बीच, कई ब्रोकरेज फर्म ने नई सरकार को लेकर अपने अनुमान जाहिर किए हैं. उनका मानना है कि गठबंधन की सरकार में भी आर्थिक सुधार जारी रहने की संभावना है. मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने भी संकेत दिए थे कि सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधार आगे भी जारी रहेंगे. अपने भाषण में मोदी ने दूसरे कार्यकाल के दौरान आर्थिक उपलब्धियों का भी जिक्र किया. साथ ही कहा कि तीसरे कार्यकाल में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाया जाएगा. बता दें कि मोदी के कार्यकाल में भारत का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता बन गया है और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर भी तेजी से काम हुआ है.
साथ नहीं छोड़ेंगे सहयोगी
एक रिपोर्ट में इक्विटी रिसर्चर Bernstein का कहना है कि भले ही बहुमत नहीं मिलने से भाजपा की अपने सहयोगियों पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन ये सहयोगी पार्टियां चुनाव से पहले तय हुई थीं, सीटों के बंटवारे पर भी सहमति थी, लिहाजा वे NDA का साथ देती रहेंगी. किसी भी तरह के विवाद की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि एनडीए की नीतियों पर आम सहमति रही है. बर्नस्टीन के अनुसार, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल (यूनाइटेड) के विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल होने की संभावना न के बराबर है.
पहली बार समर्थन की सरकार
वहीं, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का भी मानना है कि नई सरकार भी आर्थिक एजेंडे को जारी रखेगी. फर्म को उम्मीद है कि नई मोदी सरकार अपने निवेश-आधारित आर्थिक एजेंडे पर काम करना जारी रखेगी. हालांकि, वो कंजप्शन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकती है. बता दें कि यह पहला मौका है जब नरेंद्र मोदी सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार चलाएंगे. इससे पहले दो बार भाजपा पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब रही थी. इसलिए वह सभी तरह के फैसले लेने के लिए स्वतंत्र थी, लेकिन इस बार गठबंधन की मजबूरियां आड़े आ सकती हैं.
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