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EaseMyTrip के सीईओ निशांत पिट्टी ने कर्ज में डूबी Go First को लेकर क्यों बदला मन?

गो फर्स्ट एयरलाइन के विमानों ने आखिरी उड़ान पिछले साल मई में भरी थी, उसके बाद से वो जमीन पर खड़े हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

गो फर्स्ट एयरलाइन (Go First Airline) के विमान पिछले एक साल से जमीन पर खड़े हैं. कर्ज के बोझ में दबी इस एयरलाइन को खरीदने के लिए ईजमाईट्रिप (EaseMyTrip) के को-फाउंडर और CEO निशांत पिट्टी (Nishant Pitti) ने दिलचस्पी दिखाई थी. लेकिन अब उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए हैं. पिट्टी के अपना मन बदलने से गो फर्स्ट के विमानों को फिर से हवा में उड़ते देखने की आस टूट गई है. मालदीव विवाद के दौरान सुर्खियों में आए पिट्टी का कहना है कि सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद उन्होंने Go First की बोली से हटने का फैसला किया है.

अजय सिंह के साथ लगाई थी बोली
निशांत पिट्टी के मेजॉरिटी स्टेक वाली कंपनी 'बिजी बी' ने कुछ वक्त पहले गो फर्स्ट में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा दिखाई थी. इसके लिए फरवरी 2024 में कंपनी ने स्पाइसजेट एयरलाइन के MD और चेयरमैन अजय सिंह के साथ मिलकर बोली लगाई थी. लेकिन अब निशांत पिट्टी इस डील से पीछे हट गए हैं. हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि क्या अजय सिंह अकेले गो फर्स्ट को खरीदने की कोशिश करेंगे या फिर निशांत की तरह उन्होंने भी आगे नहीं बढ़ने का निर्णय लिया है. बता दें कि बिजी बी एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड निशांत पिट्टी और अजय सिंह का एक जॉइंट वेंचर है.

इस वजह से पीछे खींचे कदम
एक्सपर्ट्स का मानना है कि निशांत पिट्टी ने एविएशन सेक्टर में बढ़ती प्रतियोगिता के चलते यह निर्णय लिया है. इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी कंपनियां पहले से ही मौजूद हैं. इंडिगो देश की नंबर वन एयरलाइन है. टाटा समूह के हाथों में आने के बाद से एयर इंडिया भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है. दिवंगत निवेशक राकेश झुनझुनवाला की एयरलाइन अकासा एयर ने थोड़े समय में काफी कुछ हासिल किया है. स्पाइसजेट भले ही तमाम संकटों में उलझी हो, लेकिन उड़ान भर रही है. इसके अलावा, जेट एयरवेज भी पुन: वापसी की कोशिश में है. ऐसे में Go First के लिए मजबूती से पैर जमाना उतना आसान नहीं होगा. एक्सपर्ट्स के अनुसार, उड़ान शुरू करने के बाद भी गो फर्स्ट के लिए बड़े पैमाने पर नकदी की जरूरत होगी, यानी ईंधन की तरफ उसमें लगातार पैसा लगाना होगा, इसके बाद ही कहीं जाकर प्रॉफिट की संभावना बनेगी. इसलिए पुट्टी ने कदम पीछे खींचने में ही भलाई समझी है. 

54 विमानों का रजिस्ट्रेशन रद्द  
संकट में घिरी गो फर्स्ट के खिलाफ एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 मई को उसके 54 विमानों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था. दरअसल, 26 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने गो फर्स्ट की ओर से लीज पर लिए गए विमानों को डी-रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा था. इसके बाद DGCA ने यह कार्रवाई की. पेमब्रोक एविएशन, एक्सिपिटर इनवेस्टमेंट्स एयरक्राफ्ट्स 2 लिमिटेड, EOS एविएशन और SMBC एविएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन विमानों को रिलीज करने की मांग की थी, जो उन्होंने गो फर्स्ट को लीज पर दिए गए थे. बता दें कि एयरलाइन इस समय दिवालिया प्रक्रिया के गुजर रही है.

एयरलाइन पर भारी भरकम है कर्जा 
गो फर्स्ट ने पिछले साल 2 मई को बताया था कि वो 3, 4 और 5 मई की अपनी सभी फ्लाइट कैंसिल कर रही है. इसके बाद से गो फर्स्ट से विमान आज तक उड़ान नहीं भर पाए हैं. गो फर्स्ट को 6,521 करोड़ रुपए का कर्जा चुकाना है. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को एयरलाइन से सबसे ज्यादा 1,987 करोड़ रुपए लेना है. बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,430 करोड़ रुपए, डॉयचे बैंक का 1,320 करोड़ रुपए और IDBI बैंक का एयरलाइन पर 58 करोड़ रुपए बकाया है. एयरलाइन ने दावा किया था कि इंजनों की सप्लाई नहीं होने के चलते उसकी स्थिति खराब होती गई. 

वाडिया समूह की है गो फर्स्ट  
Go फर्स्ट वाडिया ग्रुप की बजट एयरलाइन है. 29 अप्रैल 2004 को गो फर्स्ट की शुरुआत हुई थी. इस एयरलाइन के बेड़े में 59 विमान शामिल हैं. गो फर्स्ट 35 डेस्टिनेशन के लिए फ्लाइट ऑपरेट करती थी. इसमें से 27 घरेलू और 8 अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन शामिल थे. एयरलाइन ने साल 2021 में अपने ब्रैंडनेम  को Go Air से बदलकर गो फर्स्ट कर दिया था. 


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