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क्या अब बांग्लादेश देने जा रहा है Adani Group को झटका? जानें क्या है पूरा मामला
अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के असर कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अब बांग्लादेश ने एक डील को लेकर ग्रुप को पत्र लिखा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अरबपति कारोबारी गौतम अडानी (Gautam Adani) के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं. पिछले साल जहां अडानी की चर्चा उनकी हर दिन बढ़ती दौलत को लेकर होती थी. वहीं, आज वह हर दिन घटती संपत्ति के लिए खबरों में बने हुए हैं. यह सबकुछ हुआ है हिंडनबर्ग (Hindenburg) की उस एक रिपोर्ट से, जिसमें अडानी समूह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस रिपोर्ट के चलते अब समूह की एक 7 साल पुरानी डील भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है.
क्या है ये डील?
अडानी समूह ने बांग्लादेश के साथ एक डील साइन की थी. अडानी पावर लिमिटेड और बंग्लादेश के बीच 2017 में बिजली खरीद को लेकर समझौता हुआ था, जिस पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बांग्लादेश पावर पर्चेंज एग्रीमेंट यानी PPA में बदलाव चाहता है. उसने अडानी ग्रुप को पत्र लिखकर बिजली खरीद समझौते को संशोधित करने की मांग की है. उसका कहना है कि उसे काफी महंगी बिजली मिल रही है.
महंगी बिजली का हवाला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश का कहना है कि अडानी पावर लिमिटेड और से मिल रही बिजली काफी महंगी है. बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (बीपीडीसी) के एक अधिकारी ने बताया कि हमने समझौते में संशोधन के लिए भारतीय कंपनी से संपर्क किया है. हालांकि, अधिकारी ने इससे ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया. वहीं, बांग्लादेश की निजी समाचार एजेंसी यूएनबी ने एक बीपीडीसी अधिकारी के हवाले से बताया है कि अडानी समूह द्वारा बताई गई कोयले की कीमत (400 डॉलर प्रति टन) बहुत अधिक है. यह 250 डॉलर प्रति टन से कम होनी चाहिए, जो हम अपने दूसरे ताप बिजली संयंत्रों में आयातित कोयले के लिए भुगतान कर रहे हैं.
सरकार ने स्पष्ट किया रुख
वहीं, इस संबंध में सरकार का भी बयान आ गया है. समझौते में संशोधन की बांग्लादेश की मांग के बारे में पूछने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा - यह एक संप्रभु सरकार और एक भारतीय कंपनी के बीच का सौदा है. मैं समझता हूं कि आप एक संप्रभु सरकार और एक भारतीय कंपनी के बीच एक सौदे का जिक्र कर रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि हम इसमें शामिल हैं. क्या यह द्विपक्षीय संबंधों के दायरे में नहीं आता? इस पर उन्होंने कहा कि सरकार व्यापक तौर पर आर्थिक एकीकरण और पड़ोसी देशों के साथ संपर्क जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है.
मौका देखकर की मांग
कुछ जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश की तरफ से समझौते में संशोधन की मांग समय देखकर की गई है. ऐसे वक्त में जब अडानी समूह चौतरफा दबाव का सामना कर रहा है. बांग्लादेश की इस मांग को स्वीकार किए जाने की पूरी संभावना है. समूह पहले से ही भारी नुकसान झेल चुका है. अब यदि ये डील भी कैंसिल हो जाती है, तो उसे एक और झटका लगेगा और यह वो शायद न चाहे. बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड भी इस बात को अच्छे से समझता है और संभवतः इसीलिए मौका देखकर समझौते में संशोधन की मांग की है.
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