✕

होम / बिजनेस / क्या हैं अंबानी और अडानी के बीच हुए No-Poaching Agreement के मायने, यहां समझें

क्या हैं अंबानी और अडानी के बीच हुए No-Poaching Agreement के मायने, यहां समझें

अंबानी और अडानी समूह में यह समझौता इस साल मई में किया जा चुका है और दोनों समूहों के सभी व्यवसायों पर लागू होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

देश दो बड़े उद्योग घरानों के बीच 'नो पोचिंग' एग्रीमेंट हुआ है. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्री और गौतम अडानी के अडानी समूह के बीच यह एग्रीमेंट हुआ है. दोनों ने यह समझौता इसलिए किया है, ताकि उनके बीच टैलेंट वॉर को रोका जा सके. भले ही दोनों इससे इनकार करते आए हों कि उनका एक-दूसरे से कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन बीते कुछ समय में जिस तरह से अंबानी और अडानी ने एक-दूसरे के सेक्टर में प्रवेश किया है, उससे दोनों के बीच सीधी टक्कर तय है. ऐसे में यह एग्रीमेंट उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

नया नहीं है ये एग्रीमेंट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंबानी और अडानी समूह में यह समझौता इस साल मई में किया जा चुका है और दोनों समूहों के सभी व्यवसायों पर लागू होगा. वैसे, 'नो-पोचिंग' की अवधारणा भारतीय कारोबार के लिए नई नहीं है. कई संगठनों ने एक-दूसरे के टैलेंट को नहीं लेने के लिए अनौपचारिक समझौते कर रखे हैं. ह्यूमन रिसोर्स कंसलटेंट इसे एक 'अंतर्निहित समझ' करार देते हैं, जिसे पेप्सी और कोका-कोला, इंफोसिस और विप्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC के बीच हमेशा मौजूद रही है. 

इसलिए ज़रूरी है करार
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अंबानी और अडानी विभिन्न क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश के साथ-साथ कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रहे हैं, ऐसे में उनके लिए प्रतिभाशाली कर्मचारियों को अपने साथ रोके रखना बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, रिलायंस और अडानी समूह कई ऐसे सेक्टर्स में भी प्रवेश कर चुके हैं, जहां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स की हमेशा से कमी रही है, ऐसी स्थिति में एक कंपनी के टैलेंट का दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनी में जाने का मतलब है नुकसान. इसके अलावा, गोपनीयता भी प्रमुख मुद्दा रहती है. 

इस बात की है आशंका
विभिन्न सेक्टर्स पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही अधिकांश क्षेत्रों में दोनों उद्योग घरानों के बीच प्रत्यक्ष मुकाबला नहीं है, लेकिन फिर भी वो टैलेंट वॉर से बचना चाहते हैं. दरअसल, उन्हें अहसास है कि डिमांड के हिसाब से पर्याप्त टैलेंट उपलब्ध नहीं है. ऐसे में यदि उनका कोई प्रतिभाशाली कर्मचारी दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनी में चला जाता है, तो संतुलन गड़बड़ा जाएगा. यही वजह है कि दोनों ने 'नो पोचिंग' एग्रीमेंट किया है. 

क्या है पोचिंग एग्रीमेंट?
पोचिंग का मतलब है शिकार. आमतौर पर कंपनियों की नज़र प्रतियोगी कंपनी ने टैलेंटेड स्टाफ पर रहती है. हर कोई अपनी टीम में सबसे योग्य सदस्य चाहता है और इसी चाहत में कर्मचारियों को अपने खेमे में लाने की कोशिश होती है. इसके अलावा, कर्मचारी भी बेहतर विकल्प की तलाश में दूसरी प्रतियोगी कंपनियों का रुख कर लेते हैं. इस व्यवस्था को रोकने के लिए होने वाले समझौते को 'नो पोचिंग' एग्रीमेंट कहा जाता है. अडानी-रिलायंस समूह के बीच मई से लागू हुए इस समझौते के बाद अब ये दोनों कंपनियां एक-दूसरे के कर्मचारियों को नौकरी नहीं देंगी.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दूसरी तिमाही में मुनाफे में आई शिपरॉकेट, ₹0.6 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज; रेवेन्यू 34.7% बढ़ा

शिपरॉकेट का ऑपरेटिंग रेवेन्यू सालाना आधार पर 34.7 फीसदी बढ़कर 673.6 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 500.2 करोड़ रुपये था.

8 hours ago

CenturyPly का दूसरी तिमाही का राजस्व 28.5% बढ़कर 1,780 करोड़ रुपये पहुंचा

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अब तक का सबसे अधिक तिमाही राजस्व दर्ज किया. प्लाईवुड, एमडीएफ, लैमिनेट्स और लॉजिस्टिक्स कारोबार में मजबूत वृद्धि से कंपनी के प्रदर्शन को सहारा मिला.

10 hours ago

“अगर बोर्ड बंटा हुआ है, तो सभी की ब्रांड वैल्यू घटती है”

रवि राजन एंड कंपनी के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर और BSE के पूर्व चेयरमैन एस रवि ने BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा के साथ इस बातचीत में उत्तराधिकारियों के मूल्यांकन, सार्वजनिक विवादों से कारोबार को बचाने और संपत्ति सृजन में कॉरपोरेट गवर्नेंस की अहमियत पर चर्चा की.

11 hours ago

सेबी का जापानी समझौता: ऐसे नुकसान का निपटारा, जो अब अस्तित्व में ही नहीं है

एक पूर्णकालिक सदस्य ने निप्पॉन से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. दूसरे सदस्य अभी फैसला नहीं कर पाए हैं. बॉन्ड फिर से जीवित हो गए हैं. और सेबी चेयरमैन की डायरी बार-बार निप्पॉन से टकरा रही है.

12 hours ago

वेदांता की पूर्व डिप्टी CFO स्वाति चौहान ने शुरू की अपनी कंपनी, निवेशक संबंधों पर करेगी काम

गुरुग्राम की Vaydha Advisory स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों को निवेशक संबंध (Investor Relations), IPO की तैयारी, कंपनियों के विभाजन और अधिग्रहण से जुड़ी सलाह देगी.

12 hours ago


बड़ी खबरें

“अगर बोर्ड बंटा हुआ है, तो सभी की ब्रांड वैल्यू घटती है”

रवि राजन एंड कंपनी के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर और BSE के पूर्व चेयरमैन एस रवि ने BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा के साथ इस बातचीत में उत्तराधिकारियों के मूल्यांकन, सार्वजनिक विवादों से कारोबार को बचाने और संपत्ति सृजन में कॉरपोरेट गवर्नेंस की अहमियत पर चर्चा की.

11 hours ago

विश्व बैंक: भारत ने रचा इतिहास

भारत में गरीबी में आई भारी कमी एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस प्रगति को बनाए रखने के लिए बेहतर रोजगार और कम ध्रुवीकृत राजनीतिक व्यवस्था जरूरी है.

8 hours ago

ZEE5 में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-क्रिएटिव नियुक्त हुए प्रिंस मिश्रा

प्राइम वीडियो में काम कर चुके प्रिंस मिश्रा के पास फिल्म, विज्ञापन, टेलीविजन, रेडियो और ओटीटी क्षेत्र में 14 साल से अधिक का अनुभव है. ZEE5 में वह ब्रांड की पहचान मजबूत करने और दर्शकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर काम करेंगे.

10 hours ago

CenturyPly का दूसरी तिमाही का राजस्व 28.5% बढ़कर 1,780 करोड़ रुपये पहुंचा

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अब तक का सबसे अधिक तिमाही राजस्व दर्ज किया. प्लाईवुड, एमडीएफ, लैमिनेट्स और लॉजिस्टिक्स कारोबार में मजबूत वृद्धि से कंपनी के प्रदर्शन को सहारा मिला.

10 hours ago

सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए शुरू की नेट सेटलमेंट की सुविधा, 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नियम

सेबी ने म्यूचुअल फंड स्कीमों को शेयरों की खरीद और बिक्री से मिलने वाली रकम को आपस में एडजस्ट करने की अनुमति दी है.

13 hours ago