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नई लॉजिस्टिक पॉलिसी में क्या है 'यूलिप'? यह ट्रांसपोर्टर्स के लिए कैसे करेगा काम?

इसमें तीन तरह के सिस्‍टम बनाए गए हैं, जिसमें एप्‍लीकेशन, गवर्नेंस और प्रजेंटेशन को शामिल किया गया है. एप्‍लीकेशन लेयर डाटा सोर्स और उसके इस्‍तेमाल के बीच में ब्रिज की तरह काम करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

भारत सरकार ने दो दिन पहले जिस नई लॉजिस्टिक पॉलिसी को लॉन्‍च किया है उससे कोई भी ट्रांसपोर्टर्स या इस सेक्‍टर से जुड़ा कोई आदमी कैसे जुड़ सकता है. सरकार ने इसके लिए इस नई पॉलिसी में एक नया पोर्टल बनाया है. जिसके जरिए लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने वाले ट्रांसपोर्टर्स और दूसरे स्‍टेक होल्‍डरों के लिए कई तरह की सुविधाओं को दिया गया है. आइए आज समझते हैं कि आखिर कैसे यूलिप ट्रांसपोर्ट सेक्‍टर से जुड़े लोगों के लिए फायदेमंद है.


क्‍या है यूलिप
यूलिप का पूरा नाम है यूनीफाइड लॉजिस्टिक इंटरफेस प्‍लेटफॉर्म. ये एक तरह का ओपन सोर्स प्‍लेटफॉर्म है जो रिक्‍वेस्‍ट और रिसपांस सिस्‍टम पर काम करेगा. ये इस सेक्‍टर के अलग-अलग स्‍टेकहोल्‍डरों से जुड़ा होगा.  इसमें तीन तरह के सिस्‍टम बनाए गए हैं, जिसमें एप्‍लीकेशन, गवर्नेंस और प्रजेंटेशन को शामिल किया गया है. एप्‍लीकेशन लेयर डाटा सोर्स और उसके इस्‍तेमाल के बीच में ब्रिज की तरह काम करेगा. इस यूलिप के साथ 7मंत्रालयों के 30 लॉजिस्टिक सिस्‍टम को जोड़ा गया है. यही नहीं 1600 क्षेत्रों को कवर करने वाले विभागों को भी इससे जोड़ा गया है. इसे सरकार ने बिल्‍कुल यूपीआई की तरह डिजाइन किया है, जिससे हर एक ट्रांजेक्‍शन या मूवमेंट पर नजर रखी जा सके.


यूलिप से हर स्‍टेकहोल्‍डर को कैसे होगा फायदा
सरकार को इस यूलिप के जरिए भविष्‍य की नीतियों को बनाने के लिए बेहतर आंकड़े और दूसरी जानकारी मिल पाएगी. अंतराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा में आने के लिए सरकार इस सिस्‍टम को भविष्‍य में और बेहतर बना सकती है. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए सरकार को मंत्रालयों और विभागों के बीच में सही सामंजस्‍य बन पाएगा.


शिपिंग सेक्‍टर को कैसे मिलेगा फायदा
यूलिप के जरिए शिपिंग सेक्‍टर में काम करने वाले और अलग-अलग कंसाइनमेंट पर काम करने वाले लोगों को कार्गो मूवमेंट की रियल टाइम मॉनिटरिंग एक ही प्‍लेटफॉर्म पर मिल पाएगी. यही नहीं उन्‍हें सस्‍ते लॉजिस्टिक साधनों की भी जानकारी इस यूलिप पर आसानी से मिल जाएगी.


ट्रकर्स को क्‍या मिलेगा फायदा
इस यूलिप के जरिए ट्रकर्स सेक्‍टर को अलग अलग तरह की जानकारी मिल पाएगी, जिसमें ट्रांसपोर्ट की जानकारी के साथ डिमांड की भी जानकारी मिल पाएगी, ये सब एक ही पोर्टल पर मिलेगा. पूरी तरह से ऑनलाइन होने के कारण ये पूरा सिस्‍टम ट्रांसपेरेंट बना रहेगा और रियल टाइम जानकारी से उन्‍हें ये भी जानकारी मिल पाएगी कि कहां कौन सा ऑर्डर उपलब्‍ध है. जिससे उनकी खाली मूवमेंट भी खत्‍म हो जाएगी. इससे उनकी ऑपरेशन कॉस्‍ट और मेंटीनेंस कॉस्‍ट भी कम होगी.


लॉजिस्टिक ट्रक ऑपरेटरों सेक्‍टर का कितने करोड़ का है टर्नओवर 
रोड ट्रक ऑपरेटरों का सालाना टर्नओवर एक आंकड़े के अनुसार 2021 में 209 बिलियन डॉलर था। जिसके 2025 तक 330 बिलियन डॉलर पहुंचने की उम्‍मीद है. सरकार ने अपनी इस नई पॉलिसी के जरिए इसकी लागत को 13 प्रतिशत से 7 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है.


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