अकेले कपिल शर्मा ही ऐसे नहीं रहे जिन्हें इंडिगो में परेशानी का सामना करना पड़ा उनसे पहले द कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को भी ऐसे ही अनुभव से गुजरना पड़ा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
वैसे तो कई बार एयरलाइनों में अव्यवस्था के मामले सामने आते ही रहते हैं, लेकिन इस बार मामला देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (Indigo) से जुड़ा हुआ है. इसमें अव्यवस्था का सामना इस बार किसी आम आदमी को नहीं बल्कि मशहूर हास्य अभिनेता कपिल शर्मा को करना पड़ गया. इसके बाद कपिल शर्मा ने इंडिगो की अव्यवस्था को लेकर एक्स(पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात कहते हुए सारी समस्या को साझा किया और नाराजगी जाहिर की. हालांकि बाद में इंडिगो ने उन्हें हुई असुविधा के लिए माफी मांगने में देरी नहीं लगाई.
इंडिगो पर क्यों भड़के कपिल शर्मा?
दरअसल ‘द कपिल शर्मा शो’ के होस्ट कपिल शर्मा को इंडिगो की फ्लाइट में सफर करने के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा, जिससे उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने इंडिगो की अव्यवस्थाओं को लेकर कंपनी को टैग करते हुए एक ट्वीट लिख दिया. कपिल शर्मा अपने ट्वीट में लिखते हैं कि
प्रिय @IndiGo6E पहले आपने हमें 50 मिनट तक बस में इंतजार कराया और अब आपकी टीम कह रही है कि पायलट ट्रैफिक में फंस गया है, क्या? वास्तव में ? हमें रात 8 बजे तक उड़ान भरनी थी और 9:20 बज चुके हैं, अभी भी कॉकपिट में कोई पायलट नहीं है, क्या आपको लगता है कि ये 180 यात्री फिर से इंडिगो में उड़ान भरेंगे? कभी नहीं #इंडिगो 6ई 5149 #बेशर्म
Dear @IndiGo6E first you made us wait in the bus for 50 minz, and now your team is saying pilot is stuck in traffic, what ? Really ? we supposed to take off by 8 pm n it’s 9:20, still there is no pilot in cockpit, do you think these 180 passengers will fly in indigo again ? Never…
— Kapil Sharma (@KapilSharmaK9) November 29, 2023
कपिल शर्मा ने फिर किया एक और ट्वीट
कपिल शर्मा पहले ट्वीट के बाद ही नहीं रुके. जब उन्हें इंडिगो की ओर से कहा गया कि आपको दूसरे विमान से भेजा जाएगा तो इस पर भी कपिल शर्मा ने कंपनी पर निशाना साधने में देरी नहीं लगाई. उन्होंने अगला ट्वीट करते हुए लिखा कि
‘अब वे सभी यात्रियों को विमान से उतार रहे हैं और कह रहे हैं कि हम आपको दूसरे विमान से भेजेंगे लेकिन फिर से हमें सुरक्षा जांच के लिए टर्मिनल पर वापस जाना होगा’
Now they r de boarding all the passengers n saying we will send you in another aircraft but again we have to go back to terminal for security check ????? #indigo? pic.twitter.com/NdqbG0xByt
— Kapil Sharma (@KapilSharmaK9) November 29, 2023
बुजुर्गों की समस्या पर बोले कपिल
‘द कपिल शर्मा शो’ के होस्ट कपिल शर्मा इस ट्वीट के बाद भी नहीं रुके. उन्होंने एक ट्वीट और किया और फ्लाइट में मौजूद बुजुर्ग यात्रियों की समस्या पर अपनी बात रखते हुए कहा कि, लोग आपकी वजह से पीड़ित हैं, @IndiGo6E झूठ, झूठ और झूठ, व्हील चेयर पर कुछ बुजुर्ग यात्री हैं, जिनका स्वास्थ्य बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है. तुम्हें शर्म आनी चाहिए #इंडिगो
People r suffering bcoz of you @IndiGo6E lying lying n lying, there r some old passengers on wheel chairs, not in a very good health condition. Shame on you #indigo ? pic.twitter.com/87OZGcUlPU
— Kapil Sharma (@KapilSharmaK9) November 29, 2023
Indigo ने मांगी माफी
इस पूरे वाकये के बाद इंडिगो ने भी माफी मांगने में देरी नहीं लगाई. इंडिगो ने ऑपरेशनल परेशानी का हवाला देकर अपना ट्वीट करते हुए कहा कि
इंडिगो में स्निगधा की ओर से किए गए इस ट्वीट में कहा गया, सर हमारे हवाईअड्डा प्रबंधक से बात करने के लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद. हमें चेन्नई हवाई अड्डे पर परिचालन कारणों से हुई देरी के लिए वास्तव में खेद है. आपकी समझ की अत्यधिक सराहना की जाती है, और हम अगली बार आपको बेहतर सेवा देने के लिए उत्सुक हैं.
Thank you for taking the time to speak with our airport manager, Sir. We truly regret the delay due to operational reasons at Chennai airport. Your understanding is highly appreciated, and we are eager to serve to you better the next time. ~Snigdha
— IndiGo (@IndiGo6E) November 29, 2023
विवेक अग्निहोत्री ने भी उठाई थी समस्या
कपिल शर्मा से कुछ घंटे पहले इंडिगो फ्लाइट की समस्या को लेकर ‘द कश्मीर फाइल’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को भी समस्या का सामना करना पड़ा. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा- सुबह 11.10 बजे विमान में सवार हुए और अब 12.40 बजे हैं. 1.30 घंटे और कप्तान या क्रू से कोई जानकारी नहीं मिली. दुनिया भर में उड़ानों में देरी होती है लेकिन यात्रियों के प्रति ऐसी उदासीनता एक अनोखा गुण है.
@IndiGo6E के पास, क्या देरी जानने का कोई तरीका नहीं है? ये सभी अत्यधिक उन्नत AI सॉफ्टवेयर किस लिए हैं? परेशान और भटके हुए दल के साथ यात्रियों को एसी वाली सुरंग में क्यों बंद कर दिया जाए? शौचालय पूरे फर्श पर टिशू पेपर से गंदे हैं. लोग पानी के लिए चिल्ला रहे हैं. प्रत्येक परिचारिका इसे दूसरे को दे रही है. मैं शायद ही कभी इंडिगो से उड़ान भरता हूं और मुझे हमेशा उनका क्रू-फ्लायर इंटरैक्शन दयनीय लगता है. फ़्लायर्स का नाराज़ होना उनकी गलती नहीं है. एयरलाइंस और उनके चालक दल की उदासीनता के कारण नाराजगी बढ़ रही है. यदि उड़ानों में 30 मिनट से अधिक की देरी होती है, तो क्या एयरलाइंस को हवाई किराए का एक हिस्सा वापस नहीं करना चाहिए? कृपया आपके विचार?
Boarded the aircraft at 11.10 AM. It’s 12.40. 1.30 hrs and not a word of information from the captain or crew. Flights get delayed all over the world but such indifference to passengers is a unique quality that @IndiGo6E possesses. Also, isn’t there a way to know the delay? What…
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) November 29, 2023
इंडिगो ने उनसे भी मांगी माफी
इंडिगो ने विवेक से भी मांगी माफी और एक के बाद दो ट्वीट करते हुए लिखा कि
मिस्टर अगिन्होत्री कॉल पर हमें अपनी परेशानी से रूबरू कराने के लिए हम आपके आभारी हैं. हम इस देरी के लिए माफी मांगते हैं जो मुंबई एयरपोर्ट पर एटीसी कंजेशन के कारण हुई है. इंडिगो ने इसके बाद एक और ट्वीट किया और लिखा, इसके अलावा, हमने आपका फीडबैक नोट कर लिया है जिसे संबंधित टीम को भेज दिया जाएगा. हम हमारे साथ आपकी अगली यात्रा पर एक सकारात्मक अनुभव प्रदान करने के लिए तत्पर हैं.
Further, we have duly noted your feedback which will be relayed to the concerned team. We look forward to providing a positive experience on your next travel with us. ~Linda (2/2)
— IndiGo (@IndiGo6E) November 29, 2023
नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल 28 अक्टूबर को लॉन्च हो सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसके प्रोडक्ट और बिजनेस मॉडल को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
Eternal के वाइस चेयरमैन दीपिंदर गोयल ने बुधवार, 21 अक्टूबर को अपनी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल Dark.ai का संकेत दिया. Zomato और Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal की यह पहल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और कदम मानी जा रही है. कंपनी ने संकेत दिया है कि यह वेंचर जल्द ही लॉन्च होगा.
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब गोयल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार की संभावनाएं तलाश रहे हैं. हालांकि, Eternal ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि Dark.ai के तहत कौन-सा प्रोडक्ट या सेवा पेश की जाएगी, इसके संभावित ग्राहक कौन होंगे और कंपनी इससे कमाई कैसे करेगी. ऐसे में समूह के कारोबार में इसकी भूमिका फिलहाल स्पष्ट नहीं है.
Dark.ai: अब तक क्या पता चला है?
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नई पहल की जानकारी दी. उन्होंने इसे “Eternal के घर से” बताते हुए लिखा, “Coming soon”. पोस्ट में कंप्यूटर मॉनिटर और लैपटॉप पर “DARK BY ETERNAL” की ब्रांडिंग दिखाई गई, लेकिन इसके पीछे की तकनीक या संभावित इस्तेमाल के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai एक AI मॉडल होगा, सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट होगा, उपभोक्ताओं के लिए कोई सेवा होगी या कंपनियों के इस्तेमाल के लिए टेक्नोलॉजी समाधान होगा. Eternal ने इस वेंचर में निवेश, इसके नेतृत्व या बिजनेस मॉडल से जुड़ी जानकारी भी साझा नहीं की है.
डिलीवरी से आगे गोयल के टेक्नोलॉजी निवेश
Dark.ai, गोयल की टेक्नोलॉजी से जुड़ी पहल Temple के बाद सामने आया है. Temple एक हेल्थ-टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट है, जिसके तहत मस्तिष्क में रक्त प्रवाह (सेरेब्रल ब्लड फ्लो) की निगरानी करने वाला एक पहनने योग्य डिवाइस विकसित किया जा रहा है. यह पहल Temple Private Limited के माध्यम से विकसित की जा रही है और Eternal के मुख्य उपभोक्ता कारोबार से अलग है.
Eternal के अंतर्गत Zomato, Blinkit, Hyperpure और District जैसे कारोबार आते हैं. Dark.ai की लॉन्चिंग से समूह के टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो का विस्तार हो सकता है, लेकिन इसका मौजूदा कारोबार से क्या संबंध होगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.
यह भी स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai Eternal के मौजूदा कारोबार को तकनीकी सहायता देने के लिए विकसित किया जाएगा या इसे एक स्वतंत्र प्रोडक्ट के रूप में पेश किया जाएगा.
Eternal के तिमाही नतीजों के दिन आया ऐलान
Dark.ai को लेकर यह संकेत ऐसे दिन आया है, जब Eternal को 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं. कंपनी के लिए यह पहल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने की दिशा में एक और कदम हो सकती है. हालांकि, इसके वास्तविक कारोबारी प्रभाव का आकलन प्रोडक्ट, बिजनेस मॉडल और कंपनी की आगे की योजनाओं की जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा.
इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 92.3% बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 65 करोड़ रुपये था. हालांकि, कंपनी का मुनाफा बाजार के 304 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा.
कंपनी का परिचालन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 77.6% बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 13,590 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA भी बढ़कर 752 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 239 करोड़ रुपये था.
हालांकि, कंपनी के कुल खर्च में भी तेज बढ़ोतरी हुई. दूसरी तिमाही में कुल खर्च 75% बढ़कर 24,166 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 13,813 करोड़ रुपये था.
Eternal के क्विक कॉमर्स कारोबार Blinkit का रेवेन्यू तिमाही के दौरान लगभग दोगुना हो गया. इसके एडजस्टेड EBITDA में भी सुधार हुआ और यह 156 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया.
फूड डिलीवरी कारोबार की ग्रोथ 21.5% रही
Eternal के फूड डिलीवरी कारोबार Zomato ने दूसरी तिमाही में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में सालाना आधार पर 21.5% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 11,445 करोड़ रुपये हो गई. कंपनी के मुताबिक, लगातार पांच तिमाहियों से इस कारोबार की ग्रोथ में तेजी आ रही है.
इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.
कंपनी के औसत मासिक लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या सालाना आधार पर 16% बढ़कर 2.8 करोड़ हो गई. कंपनी के संस्थापक और CEO दीपिंदर गोयल ने कहा कि हालिया ग्रोथ की मुख्य वजह अधिक ग्राहकों का खाना ऑर्डर करना और मौजूदा ग्राहकों द्वारा ज्यादा बार ऑर्डर देना है.
गोयल ने फूड डिलीवरी कारोबार में सालाना 20% से अधिक ग्रोथ की कंपनी की दीर्घकालिक उम्मीद को दोहराया. उन्होंने कहा कि इस कारोबार की NOV वित्त वर्ष 2021-22 के 18,160 करोड़ रुपये से दोगुने से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 37,993 करोड़ रुपये हो गई. इस दौरान इसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 20% रही.
Blinkit मुनाफे में आया
Eternal के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 79.3% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 20,940 करोड़ रुपये हो गई. पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 22.2% की वृद्धि हुई. कंपनी ने तिमाही के दौरान 308 नए स्टोर जोड़े. इसके साथ ही Blinkit के कुल स्टोर की संख्या बढ़कर 2,751 हो गई.
Blinkit का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन लगातार छठी तिमाही में बेहतर हुआ और NOV का 0.9% रहा. इसका एडजस्टेड EBITDA 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में 156 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.
District और Hyperpure के प्रदर्शन में सुधार
Eternal के आउटिंग कारोबार District ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 58% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 3,259 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले इसकी ग्रोथ 1.3% तक सीमित रही.
District का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के लगभग बराबर 64 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -3.1% से सुधरकर NOV का -2% हो गया.
Eternal के बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सप्लाई कारोबार Hyperpure ने 1,154 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. समान आधार पर इसमें 22.7% की वृद्धि हुई. Hyperpure का एडजस्टेड EBITDA भी 5 करोड़ रुपये के नुकसान से सुधरकर 10 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया. इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -0.5% से सुधरकर 0.9% हो गया.
ग्रोथ के लिए निवेश जारी रखेगी कंपनी
Eternal के अन्य कारोबारों, जिनमें Bistro और Nugget शामिल हैं, ने 132 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह 95 करोड़ रुपये था. इन कारोबारों का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के 94 करोड़ रुपये से घटकर 91 करोड़ रुपये रह गया.
दीपिंदर गोयल ने कहा कि कंपनी अपने प्रदर्शन का आकलन करते समय किसी एक तिमाही के नतीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देती. उन्होंने कहा कि ऐप खुलने की संख्या, नए ग्राहकों को जोड़ने और बाजार हिस्सेदारी जैसे संकेतक सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. गोयल के मुताबिक, कंपनी उन क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी, जहां उसे आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक की व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने का आरोप
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गोपनीय व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संभावित संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के प्रमुख कारोबार और कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले इन अधिकारियों ने बाहरी पक्षों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी. हालांकि, दोनों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने संभावित सूचना लीक को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद यह जांच शुरू की गई. HDFC बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि साझा की गई जानकारी का बाद में किसी ने गलत इस्तेमाल तो नहीं किया. जांच अभी जारी है.
HDFC बैंक ने आंतरिक समीक्षा जारी होने की पुष्टि की है, लेकिन जांच में सामने आए कथित निष्कर्षों या संबंधित अधिकारियों के बारे में टिप्पणी नहीं की है. बैंक ने कहा है कि वह मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन कर रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई करेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जांच के निष्कर्ष बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड के कुछ सदस्यों के सामने रखे गए थे. दोनों अधिकारियों को भी इन निष्कर्षों के बारे में औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है. हालांकि, उनके खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
HDFC बैंक में नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव
यह जांच ऐसे समय में सामने आई है, जब HDFC बैंक के शीर्ष नेतृत्व में बड़े बदलाव हो रहे हैं. ICICI समूह के अनुभवी अधिकारी अनूप बागची 27 अक्टूबर को बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद संभालने वाले हैं.
मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन छह साल तक इस पद पर रहने के बाद पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया है. बैंक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों में शामिल डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा ने भी दिसंबर के अंत में पद छोड़ने की इच्छा जताई है.
इस साल की शुरुआत में तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने व्यक्तिगत मूल्यों और बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों के बीच मतभेदों का हवाला दिया था. इसके बाद HDFC बैंक की ओर से कराई गई स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पाया गया कि उनकी चिंताओं की पुष्टि नहीं हुई.
बाजार में बैंक की स्थिति पर भी नजर
ये घटनाक्रम भारत के बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़े बैंक के लिए महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं. HDFC बैंक का बाजार पूंजीकरण लगभग 115 अरब डॉलर है. बैंक ने ऐतिहासिक रूप से अपने सतर्क प्रबंधन, मजबूत आंतरिक नियंत्रण और लगातार लाभप्रदता के आधार पर अपनी पहचान बनाई है. हालांकि, इस साल अब तक बैंक के शेयरों में लगभग 28% की गिरावट आई है.
1994 में भारत के वित्तीय क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद स्थापित HDFC बैंक आज देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है. अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी यह बैंक एक प्रमुख निवेश विकल्प रहा है, जो भारत के उपभोक्ता और ऋण बाजारों में निवेश करना चाहते हैं.
कुनाल ललानी, के. श्रीनिवास और प्रियंका चटर्जी संभालेंगे उत्तर, दक्षिण और पूर्वी क्षेत्र की कमान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडवरटाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने विज्ञापन क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर, दक्षिण और पूर्वी भारत में तीन नए क्षेत्रीय चैप्टर शुरू किए हैं. इनका उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विज्ञापन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप काम करना और स्थानीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है.
इन क्षेत्रीय चैप्टर का नेतृत्व विज्ञापन एजेंसियों के CEO करेंगे. इन सभी को ब्रांड निर्माण और विज्ञापन सेवाओं के क्षेत्र में कई दशकों का अनुभव है. उन्होंने सरकार, वित्तीय संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और विभिन्न क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं के लिए काम किया है.
प्रत्येक चैप्टर अपने क्षेत्र के बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्यशालाओं, विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्रों और सहकर्मियों के बीच सीखने-सिखाने के कार्यक्रमों का आयोजन करेगा.
तीनों क्षेत्रीय चैप्टर की जिम्मेदारी किसे मिली?
उत्तर भारत के चैप्टर की अध्यक्षता क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड के कुनाल ललानी करेंगे. इसके सह-अध्यक्ष इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के संतोष कुमार और पैम एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के सुनील छाबड़ा होंगे.
दक्षिण भारत के चैप्टर की जिम्मेदारी स्लोका एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के के. श्रीनिवास को अध्यक्ष के रूप में सौंपी गई है. मैत्री एडवरटाइजिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के सी. मुथु सह-अध्यक्ष होंगे. पूर्वी भारत के चैप्टर की अध्यक्षता स्टैंडर्ड पब्लिसिटी प्राइवेट लिमिटेड की प्रियंका चटर्जी करेंगी.
राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन उद्योग को मजबूत करने की पहल
AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि भारत में विज्ञापन उद्योग को अधिक मजबूत और आपस में बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ बनाने के लिए क्षेत्रीय चैप्टर महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, "कुनाल, संतोष, सुनील, सी. मुथु, के. श्रीनिवास और प्रियंका के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्थानीय अनुभव और प्रतिभाएं राष्ट्रीय मानकों को आकार दें. इसका उद्देश्य एजेंसियों के नेतृत्वकर्ताओं को उन महत्वपूर्ण चर्चाओं के करीब लाना है, जो उद्योग के भविष्य को प्रभावित करती हैं."
ये क्षेत्रीय चैप्टर AAAI के राष्ट्रीय ढांचे के तहत काम करेंगे, लेकिन उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की स्वायत्तता भी होगी.
यस बैंक के AT-1 बॉन्ड को बहाल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से SEBI की रिलायंस म्यूचुअल फंड जांच की मुख्य धारणा कमजोर पड़ गई है. इस मामले में यह माना गया था कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने जिन बॉन्ड में निवेश किया था, वे बेकार हो चुके थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
सुप्रीम कोर्ट के यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को बहाल करने के फैसले ने SEBI के म्यूचुअल फंड से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक की मुख्य धारणा को कमजोर कर दिया है. इस मामले में माना गया था कि रिलायंस म्यूचुअल फंड द्वारा खरीदे गए बॉन्ड बेकार हो चुके थे.
15 अक्टूबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यस बैंक, उसके पूर्व प्रशासक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो मार्च 2020 में बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने का फैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने प्रशासक की कार्रवाई को "पूरी तरह अवैध और अमान्य" बताया और निर्देश दिया कि बॉन्ड की मूल शर्तों के अनुसार कूपन भुगतान किया जाए.
अदालत ने पाया कि 13 मार्च, 2020 को अधिसूचित अंतिम पुनर्गठन योजना में जानबूझकर उस प्रावधान को हटा दिया गया था, जो मसौदा योजना में बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने की अनुमति देता था. इसके बावजूद प्रशासक ने अगले ही दिन बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डाल दिया. यह कार्रवाई बहुत देर से की गई, क्योंकि नियमों के अनुसार योजना लागू होने से पहले ऐसा करना जरूरी था. इसके अलावा, यह प्रशासक के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर था, क्योंकि यह विकल्प RBI के पास था और उसने इसका इस्तेमाल नहीं किया था. अदालत ने RBI, प्रशासक और यस बैंक के आचरण को "संदेहास्पद" बताया.
इस फैसले का सीधा असर SEBI की 30 अगस्त, 2024 की कारण बताओ नोटिस पर पड़ता है. इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने 2016 और 2017 में यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,150 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि यस बैंक ने रिलायंस कैपिटल समूह की कंपनियों को लगभग 3,400 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. SEBI का कहना है कि यह लेनदेन बदले में लाभ पहुंचाने की व्यवस्था थी, जिसके जरिए फंड के अपने प्रायोजक समूह की कंपनियों की निजी तौर पर जारी प्रतिभूतियों में निवेश पर लगी रोक को दरकिनार किया गया.
इस नोटिस में अनिल अंबानी, जय अनमोल अंबानी, राणा कपूर, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC), जो अब निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट है, इसके पूर्व CEO संदीप सिक्का, फिक्स्ड इनकम प्रमुख अमित त्रिपाठी और मुख्य जोखिम अधिकारी मिलिंद नेसरिकर के नाम शामिल हैं. इन आरोपों को चुनौती दी गई है और अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है.
नोटिस में छह योजनाओं के पास बचे बॉन्ड का मूल्य शून्य आंका गया था, क्योंकि ये बॉन्ड "पूरी तरह बट्टे खाते में डाल दिए गए थे". इसमें निवेशकों को 1,828.70 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था. SEBI ने प्रमोटरों से यह रकम वापस योजनाओं में जमा कराने और AMC से प्रबंधन शुल्क के रूप में प्राप्त 88.59 करोड़ रुपये लौटाने की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन बॉन्ड की पूरी कीमत बहाल हो जाती है. छह से सात वर्षों के 9% से 9.5% की दर से बकाया कूपन भुगतान से लगभग 1,040 करोड़ से 1,150 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं. इस तरह संबंधित योजनाएं SEBI द्वारा आंके गए नुकसान की तुलना में लगभग 2,900 करोड़ रुपये की वसूली कर सकती हैं. हालांकि, अदालत ने देरी से किए जाने वाले कूपन भुगतान पर ब्याज देने का आदेश नहीं दिया है. जिन यूनिटधारकों ने बॉन्ड की रकम बट्टे खाते में डाले जाने के बाद अपनी यूनिट भुना ली थीं, उन्हें इसका लाभ शायद नहीं मिले.
नोटिस पाने वाले पक्षों के वकीलों से यह तर्क देने की उम्मीद है कि इस फैसले के बाद नोटिस का मूल आधार समाप्त हो गया है. उनका कहना होगा कि जिन योजनाओं को पूरा पैसा वापस मिल रहा है, उनमें 1,828.70 करोड़ रुपये दोबारा जमा कराने का निर्देश दोहरी वसूली के समान होगा. वे यह भी तर्क दे सकते हैं कि SEBI पूरक नोटिस जारी किए बिना नुकसान के किसी नए सिद्धांत पर भरोसा नहीं कर सकता.
हालांकि, SEBI के पास भी अपने तर्क हैं. उसके धोखाधड़ी रोधी नियम ऐसे आचरण पर लागू होते हैं, "चाहे कोई गलत लाभ हुआ हो या किसी नुकसान से बचा गया हो या नहीं". सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों की व्यापक व्याख्या की है. इस दृष्टिकोण के अनुसार, बॉन्ड के साथ आगे क्या हुआ, इससे अलग कथित व्यवस्था नियमों का उल्लंघन हो सकती है. फैसले में यह भी कहा गया है कि अदालत की टिप्पणियों का लंबित कार्यवाहियों पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. नोटिस में AMC पर अपनी आंतरिक निवेश सीमा का उल्लंघन करने का अलग आरोप भी है. यह सीमा एक समय 88.92% तक पहुंच गई थी. यह आरोप नुकसान होने या न होने पर निर्भर नहीं करता.
समय भी महत्वपूर्ण है. SEBI के नए निपटान नियम नवंबर में लागू होंगे. इनके तहत उन पक्षों को एक बार 90 दिन का अवसर मिलेगा, जिनके पहले के निपटान आवेदन खारिज कर दिए गए थे, ताकि वे दोबारा आवेदन कर सकें. हालांकि, इन नियमों के तहत जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों और आर्थिक अपराध कर फरार हुए लोगों के लिए निपटान की अनुमति नहीं है.
SEBI, निप्पॉन लाइफ इंडिया AMC और नोटिस में नामित व्यक्तियों ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री पुस्तक के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के शेयर बाजार घोटाले और उन लोगों के गठजोड़ को उजागर करती है, जो कथित तौर पर बिना किसी कार्रवाई के बच निकले. मुंबई में लगभग दो दशक की जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान पलक ने वित्तीय बाजारों में धन, सत्ता और नियमन के बीच संबंधों की पड़ताल की है. उनके लेख द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेसलाइन जैसे प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित होने के बाद पलक ने महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई के गैंगवार की जगह कॉरपोरेट कार्यालयों में संचालित सफेदपोश अपराधों ने ले ली है. इसके बाद उन्होंने वित्तीय पत्रकारिता की ओर रुख किया और शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक के मामलों की पड़ताल की. उनका काम वित्तीय बाजारों की चमकदार सतह के पीछे छिपे गठजोड़ को सामने लाने पर केंद्रित है.)
IDBI बैंक को 81 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदने के एक दिन बाद, प्रेम वत्स का समूह Go Digit और IIFL में 18,500 करोड़ रुपये की अपनी हिस्सेदारी बैंक को पूरी बाजार कीमत पर बेचने की योजना बना रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
फेयरफैक्स ने सरकार और LIC से बैंक सस्ते में खरीदा.
अब अपनी हिस्सेदारी बैंक में पूरी कीमत पर डालने की तैयारी.
फेयरफैक्स को 6,100 करोड़ रुपये की छूट, क्या इसकी कीमत IDBI चुकाएगा?
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की योजना अपनी दो भारतीय वित्तीय कंपनियों में हिस्सेदारी को पूरी बाजार कीमत पर IDBI बैंक में स्थानांतरित करने की है. यह घोषणा सरकार द्वारा बैंक का नियंत्रण उसे बाजार मूल्यांकन से कम कीमत पर बेचने पर सहमति जताने के एक दिन बाद आई.
14 अक्टूबर को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने फेयरफैक्स की एक सहायक कंपनी को IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचने की मंजूरी दी. इस सौदे का कुल मूल्य लगभग 52,878 करोड़ रुपये है. सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेच रही है, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगा. इसके बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बच जाएगी.
उस दिन IDBI बैंक के शेयर 90.39 रुपये पर बंद हुए थे. इस लिहाज से बिक्री मूल्य बाजार भाव से लगभग 10% कम है. कुल 652.8 करोड़ शेयरों के आधार पर कीमत का यह अंतर लगभग 6,100 करोड़ रुपये बैठता है.
अगले दिन फेयरफैक्स के चेयरमैन प्रेम वत्स ने कहा कि समूह बीमा कंपनी Go Digit में अपनी लगभग 57% हिस्सेदारी और फेयरफैक्स इंडिया की ब्रोकिंग कंपनी IIFL Capital में 30.5% हिस्सेदारी IDBI बैंक में स्थानांतरित करेगा. इनका मूल्यांकन "उनकी संबंधित बाजार कीमतों" पर किया जाएगा. 19 अक्टूबर को बाजार बंद होने के भाव के अनुसार, इन हिस्सेदारियों का मूल्य लगभग 18,500 करोड़ रुपये था, जो फेयरफैक्स द्वारा बैंक खरीदने के लिए चुकाई जा रही रकम का लगभग एक-तिहाई है.
इस तरह फेयरफैक्स बैंक को छूट पर खरीद रहा है, जबकि अपनी कंपनियों की हिस्सेदारी उसी बैंक में पूरी कीमत पर डालने की योजना बना रहा है.
नकद या शेयर?
फेयरफैक्स ने यह नहीं बताया है कि IDBI बैंक इस हिस्सेदारी के लिए भुगतान कैसे करेगा. अभी तक कोई बाध्यकारी समझौता भी नहीं हुआ है.
अगर IDBI नकद भुगतान करता है, तो यह पैसा बैंक की पूंजी से आएगा, जिसका आधार आम जमाकर्ताओं की बचत है. फेयरफैक्स पहले ही कह चुका है कि वह IDBI को खरीदने के लिए "उपलब्ध नकदी, मौजूदा क्रेडिट सुविधाओं और संभावित परिसंपत्ति बिक्री" से धन जुटाएगा. IDBI से फेयरफैक्स के अपने कारोबारों के लिए मिलने वाला पैसा बैंक खरीदने की लागत चुकाने में उसकी मदद कर सकता है.
अगर IDBI नए शेयर जारी करके भुगतान करता है, तो फेयरफैक्स की हिस्सेदारी 60.72% से ऊपर चली जाएगी और सरकार तथा LIC की बची हुई कुल 34% हिस्सेदारी का अनुपात घट जाएगा.
इस योजना के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा बीमा नियामक IRDAI की मंजूरी जरूरी है. सरकार ने यह नहीं बताया है कि यह योजना फेयरफैक्स की बोली का हिस्सा थी या नहीं, और क्या सरकार के मूल्यांकनकर्ताओं ने इसे ध्यान में रखा था.
बोली के मुताबिक घटाई गई कीमत
2025-26 में बोली के पहले दौर के दौरान सरकार ने प्रति शेयर 94.42 रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया था. बोलियां इस स्तर तक नहीं पहुंच सकीं और उन्हें मंजूरी नहीं दी गई.
अक्टूबर तक सरकार का बेंचमार्क घटकर 75.99 रुपये रह गया, जो पहले से लगभग 20% कम था. यह उन एजेंसियों के दो मूल्यांकनों का औसत था, जिनके नाम सरकार ने सार्वजनिक नहीं किए हैं. उनकी रिपोर्ट भी प्रकाशित नहीं की गई है. फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की बोली इस बार तय सीमा से ऊपर रही.
इस सौदे में प्रतिस्पर्धा भी बहुत कम रह गई थी. कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा है कि उसने कभी वित्तीय बोली लगाई ही नहीं थी. जुलाई में रॉयटर्स ने खबर दी थी कि एमिरेट्स NBD "सौदे को सक्रिय रूप से आगे नहीं बढ़ा रहा था" और सबसे आगे चल रहा फेयरफैक्स "सरकार के साथ बातचीत कर रहा था".
8 सितंबर को फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की खबरें सामने आई थीं, जबकि किसी फैसले की घोषणा होने में अभी कई सप्ताह बाकी थे. उस दिन IDBI के शेयर 10.56% गिरकर 81.12 रुपये पर आ गए थे.
2003 का वादा
बैंक यूनियनें दिसंबर 2003 की ओर ध्यान दिलाती हैं, जब IDBI एक कंपनी बना था. द वायर के मुताबिक, तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने संसद में कहा था कि सरकार "हर परिस्थिति में" बैंक में कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखेगी. 2019 में LIC के नियंत्रण संभालने के बाद सरकार की अपनी हिस्सेदारी 51% से नीचे आ गई थी. मौजूदा बिक्री से बैंक पर सार्वजनिक क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.
वत्स का प्रभाव
नवंबर 2014 में प्रेम वत्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. यह मुलाकात फेयरफैक्स इंडिया की शुरुआत से कुछ समय पहले हुई थी. उसी महीने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "श्री मोदी भारत के ली कुआन यू हैं." बिक्री को मंजूरी देने वाली समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं. हालांकि, ऐसा कोई सार्वजनिक साक्ष्य नहीं है कि इस मुलाकात का फैसले पर कोई असर पड़ा. आलोचकों का कहना है कि इस वजह से पूरी जानकारी सार्वजनिक करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि 81 रुपये प्रति शेयर की कीमत दोनों मूल्यांकनों से अधिक थी. एक मूल्यांकन में IDBI की तुलना दूसरे बैंकों से की गई थी, जबकि दूसरे में जमीन और संपत्ति सहित उसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किया गया था. सरकार का कहना है कि उसने बाजार मूल्य को अलग रखा, क्योंकि शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव बैंक के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाता था. IDBI के केवल लगभग 5% शेयरों का ही सार्वजनिक बाजार में कारोबार होता है.
अधिकारियों ने इसे भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश बताया है. फेयरफैक्स का कहना है कि वह "भारत से दुनिया का बेहतरीन वित्तीय संस्थान" बनाना चाहता है.
16 अक्टूबर को बैंक यूनियनों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था. मंजूरी मिलने के बाद के दो दिनों में IDBI के शेयर 7% से अधिक गिर गए.
वे सवाल जिनके जवाब अभी बाकी हैं
- क्या Go Digit और IIFL में हिस्सेदारी स्थानांतरित करने की योजना फेयरफैक्स की बोली का हिस्सा थी और क्या कैबिनेट को इसकी जानकारी थी?
- IDBI भुगतान नकद में करेगा या शेयरों के जरिए?
- फेयरफैक्स की कंपनियों का मूल्यांकन कौन करेगा और क्या सरकार तथा LIC को इस पर मतदान करने का अधिकार मिलेगा?
- क्या सौदा पूरा होने से पहले मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के सामने रखी जाएंगी?
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार नए नियम लाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत आपात स्थिति या किसी खास रूट पर अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में सरकार किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकती है. हालांकि, सरकार का इरादा सभी उड़ानों के किराये को नियमित रूप से नियंत्रित करने का नहीं है. नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अलग-अलग रूट पर वसूले जाने वाले किराये का ब्योरा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा.
हवाई यात्रियों को महंगे टिकटों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा हवाई मार्गों पर किराये की सीमा तय करने का अधिकार अपने पास रखने पर विचार कर रही है. प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का उद्देश्य आपात स्थिति और अचानक बढ़ती मांग के दौरान एयरलाइंस की ओर से मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाना है.
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है. अदालत ने सरकार को 16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश दिया है.
हर रूट के किराये पर रखी जाएगी नजर
प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपने किराये की संरचना का ब्योरा समय-समय पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा. इसमें अलग-अलग हवाई मार्गों पर वसूले जाने वाले किराये की सीमा भी शामिल होगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस नियामक के सामने घोषित अधिकतम किराये से ज्यादा वसूली न करें. इसके अलावा, किसी असाधारण परिस्थिति में किसी खास रूट पर मांग अचानक बढ़ने और टिकटों की कीमतों में अनुचित उछाल आने पर सरकार अस्थायी रूप से हस्तक्षेप कर सकेगी.
सरकार का प्रयास यात्रियों को अत्यधिक महंगे टिकटों से बचाने और एयरलाइंस को कारोबारी स्वतंत्रता देने के बीच संतुलन बनाने का है. सरकार सभी उड़ानों के किराये पर नियमित नियंत्रण लगाने के पक्ष में नहीं है. विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पहले से अधिक होने के कारण व्यापक स्तर पर किराया नियंत्रण से बचने की कोशिश की जा रही है.
त्योहारों के दौरान हवाई किराये में बढ़ोतरी से चिंता
त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस साल 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच कुछ प्रमुख रूट पर औसत एकतरफा हवाई किराये में भारी वृद्धि दर्ज की गई.
दिल्ली-हैदराबाद रूट पर औसत किराया 68 फीसदी, मुंबई-कोलकाता रूट पर 51 फीसदी और दिल्ली-गोवा रूट पर 39 फीसदी बढ़ा.
किराये में इस तरह की बढ़ोतरी से हवाई यात्रा की किफायत को लेकर चिंता बढ़ी है. इसका असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ता है, जिन्हें आपात स्थिति में या छुट्टियों के व्यस्त समय में अचानक यात्रा करनी पड़ती है.
ऐसे यात्रियों के पास यात्रा की तारीख बदलने या पहले से टिकट बुक करने का विकल्प सीमित होता है. ऐसे में उन्हें अधिक मांग के समय ऊंची कीमत पर टिकट खरीदना पड़ सकता है.
हवाई किराये पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
हवाई टिकटों की मनमानी कीमतों और अतिरिक्त शुल्कों पर नियंत्रण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान अदालत ने एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से वसूले जाने वाले किराये में अंतर का मुद्दा उठाया और यात्रियों को राहत देने की जरूरत पर जोर दिया.
याचिका में दलील दी गई है कि डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण उन यात्रियों को अधिक परेशानी होती है, जिनके पास यात्रा की तारीख और समय बदलने की सुविधा नहीं होती. मांग अधिक होने पर उन्हें महंगे टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
सरकार का प्रस्तावित नियामकीय ढांचा इसी तरह की परिस्थितियों में हस्तक्षेप का विकल्प उपलब्ध करा सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर नियमों में तय शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.
एयरलाइंस की लागत और मुनाफे का भी रखना होगा ध्यान
हवाई किराये पर नियंत्रण की व्यवस्था तैयार करते समय सरकार को विमानन क्षेत्र की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना होगा. एयरलाइंस को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), विमान लीज, रखरखाव और एयरपोर्ट शुल्क जैसी कई बड़ी लागतों का सामना करना पड़ता है.
इसके अलावा, किसी रूट पर उड़ानों की सीमित उपलब्धता और यात्रियों की अचानक बढ़ती मांग से भी टिकटों की कीमतों में तेजी आ सकती है.
ऐसे में सभी रूट पर एक समान किराया सीमा लागू करने से एयरलाइंस की परिचालन लागत के अनुरूप कीमतें तय करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापक किराया नियंत्रण के बजाय असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा रूट पर सीमित अवधि के लिए हस्तक्षेप पर जोर दिया जा रहा है.
इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार असाधारण परिस्थितियों की परिभाषा कैसे तय करती है, एयरलाइंस की ओर से दिए गए किराये के ब्योरे की निगरानी कैसे होती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर किस तरह कार्रवाई की जाती है.
16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है. अदालत में चल रही सुनवाई के कारण सरकार के लिए हवाई किराये में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है.
यदि प्रस्तावित नियम अधिसूचित होते हैं, तो घरेलू हवाई टिकटों की कीमतों की निगरानी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है. अभी तक किराये मुख्य रूप से बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होते रहे हैं.
हालांकि, नियमों की औपचारिक अधिसूचना होने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि सरकार किन परिस्थितियों में किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी और यात्रियों को राहत देने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे.
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित मुलापेटा पोर्ट को राज्य सरकार ग्रीनफील्ड मल्टीपर्पज पोर्ट के रूप में विकसित कर रही है. परियोजना के पहले चरण पर करीब 3,670 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से विकसित किए जा रहे मुलापेटा पोर्ट में 49-50 फीसदी हिस्सेदारी लेने की योजना बना रही है. इसके लिए प्राधिकरण ने पोर्ट की विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) में इक्विटी निवेश के साथ पहले और दूसरे चरण में दो-दो बर्थ आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है. इस पहल का उद्देश्य कोयला और लौह अयस्क जैसे बल्क कार्गो का संचालन विशाखापत्तनम से मुलापेटा स्थानांतरित करना और मौजूदा पोर्ट पर भीड़ कम करना है.
विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) आंध्र प्रदेश में समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में मुलापेटा पोर्ट में बड़ी हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रही है. प्राधिकरण ने राज्य सरकार के सामने पोर्ट में 49-50 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी लेने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ ही पहले चरण में दो और दूसरे चरण में दो बर्थ आवंटित करने की मांग भी की गई है.
इस प्रस्ताव से मुलापेटा पोर्ट की व्यावसायिक व्यवहार्यता मजबूत होने की उम्मीद है. वहीं, विशाखापत्तनम पोर्ट पर बढ़ते कार्गो दबाव को कम करने और अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है.
राज्य सरकार करेगी प्रस्ताव की समीक्षा
आंध्र प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव के तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है. इसके लिए वित्त मंत्री पय्यावुला केशव, निवेश मंत्री बीसी जनार्दन रेड्डी और पर्यटन मंत्री कंडुला दुर्गेश की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह (GoM) गठित किया गया है.
यह समूह प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगा और दोनों पक्षों के बीच सहमति से शर्तें तय करने की दिशा में काम करेगा. इसके बाद अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा.
VPA ने पोर्ट की विशेष प्रयोजन कंपनी को हस्तांतरित की जाने वाली नमक भूमि के उचित मूल्यांकन की मांग भी की है. भूमि हस्तांतरण और इक्विटी हिस्सेदारी से जुड़ी शर्तें परियोजना की कुल वित्तीय संरचना तथा केंद्र और राज्य सरकारों की भागीदारी तय करने में अहम होंगी.
बल्क कार्गो का संचालन स्थानांतरित करने की योजना
मुलापेटा पोर्ट में निवेश की योजना का प्रमुख उद्देश्य कोयले और लौह अयस्क जैसे बल्क कार्गो के संचालन को विशाखापत्तनम से मुलापेटा स्थानांतरित करना है. इससे मौजूदा पोर्ट पर माल ढुलाई का दबाव कम होने और जहाजों के आने-जाने तथा माल लोडिंग-अनलोडिंग में लगने वाले समय में सुधार होने की उम्मीद है.
पोर्ट पर भीड़ कम होने से शिपिंग कंपनियों की डेमरेज लागत यानी जहाजों के निर्धारित समय से अधिक रुकने पर लगने वाला शुल्क भी घट सकता है. इसके अलावा, शहर के आसपास धूल पैदा करने वाले कार्गो के संचालन से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है.
VPA के लिए मुलापेटा पोर्ट में हिस्सेदारी से अतिरिक्त कार्गो क्षमता उपलब्ध होगी. इससे प्राधिकरण बढ़ती माल ढुलाई जरूरतों को पूरा करने के साथ विशाखापत्तनम पोर्ट के परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा सकेगा.
राज्य सरकार को उम्मीद है कि बल्क कार्गो का संचालन मुलापेटा स्थानांतरित होने से पोर्ट की व्यावसायिक गतिविधियों को शुरुआती दौर से ही मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है.
मुलापेटा पोर्ट की क्षमता 2.35 करोड़ टन होगी
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित मुलापेटा पोर्ट को राज्य सरकार ग्रीनफील्ड मल्टीपर्पज पोर्ट के रूप में विकसित कर रही है. परियोजना के पहले चरण पर करीब 3,670 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
पहले चरण में पोर्ट की सालाना कार्गो हैंडलिंग क्षमता 2.35 करोड़ टन निर्धारित की गई है. इस चरण में कुल चार बर्थ विकसित करने की योजना है, जिनमें तीन सामान्य कार्गो के लिए और एक कोयले की हैंडलिंग के लिए होगी.
VPA ने परियोजना के दूसरे चरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की है. इसके जरिए पोर्ट की क्षमता को आगे बढ़ाने की योजना है. प्राधिकरण पहले भी मुलापेटा को बड़े पोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये के निवेश में रुचि दिखा चुका है. इसके साथ ही पोर्ट आधारित औद्योगिक केंद्र विकसित करने के लिए आसपास की जमीन हासिल करने की योजना भी सामने आई थी.
प्रस्तावित इक्विटी साझेदारी और बर्थ आवंटन से पोर्ट के विकास को VPA की कार्गो हैंडलिंग रणनीति के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, निवेश और संचालन से जुड़ी अंतिम शर्तें राज्य सरकार की समीक्षा और मंजूरी पर निर्भर करेंगी.
आंध्र प्रदेश के समुद्री क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
मुलापेटा पोर्ट में प्रस्तावित निवेश आंध्र प्रदेश के समुद्री बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में राज्य की भूमिका मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है.
पोर्ट की क्षमता बढ़ने से औद्योगिक वस्तुओं की आवाजाही आसान हो सकती है. साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी और पोर्ट आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
हालांकि, परियोजना की दीर्घकालिक सफलता काफी हद तक सड़क और रेल कनेक्टिविटी के समय पर विकास, जमीन की उपलब्धता और प्रस्तावित स्वामित्व ढांचे पर सहमति बनने पर निर्भर करेगी.
राज्य सरकार की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट होगा कि मुलापेटा पोर्ट में VPA की कितनी हिस्सेदारी होगी और पोर्ट के विकास तथा संचालन की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच किस तरह साझा की जाएगी.
SP ग्रुप की टाटा संस में करीब 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है, जो स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन और साइरस इन्वेस्टमेंट्स के माध्यम से रखी गई है. ग्रुप अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को भुनाकर वित्तीय स्थिति मजबूत करना चाहता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्ज के बोझ से जूझ रहा शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप टाटा संस में अपनी करीब 18.4 फीसदी हिस्सेदारी के एक हिस्से को भुनाकर फंड जुटाना चाहता है. इसके लिए ग्रुप ने टाटा संस से लगभग 25,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक प्रस्ताव को अगली बोर्ड बैठक में प्राथमिकता देने की मांग की है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टाटा संस की लिस्टिंग से जुड़े रुख के बीच यह प्रस्ताव अहम हो गया है.
कर्ज के बोझ से जूझ रहे शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप ने टाटा संस से करीब 25,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक प्रस्ताव पर जल्द विचार करने का आग्रह किया है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, ग्रुप चाहता है कि टाटा संस की अगली बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जाए. इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जा सकता है.
इस प्रस्ताव को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस की पिछली बोर्ड बैठक में रखा था. फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है. SP ग्रुप की टाटा संस में करीब 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है, जो स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन और साइरस इन्वेस्टमेंट्स के माध्यम से रखी गई है. ग्रुप अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को भुनाकर वित्तीय स्थिति मजबूत करना चाहता है.
SP ग्रुप को फंड की तत्काल जरूरत
प्रस्तावित लेनदेन के तहत 18 महीने की अवधि में टाटा संस की शेयर पूंजी में चुनिंदा कटौती की योजना पर विचार किया जा रहा है. इससे SP ग्रुप को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये की कुल रकम मिल सकती है. शेयरों का मूल्यांकन लागू आयकर नियमों के तहत निर्धारित उचित बाजार मूल्य के आधार पर किए जाने का प्रस्ताव है.
SP ग्रुप लंबे समय से टाटा संस में अपने निवेश को भुनाने के विकल्प तलाश रहा है. इसका उद्देश्य बैलेंस शीट को मजबूत करना और कर्ज का बोझ कम करना है. टाटा संस में ग्रुप की हिस्सेदारी कर्ज के बदले गिरवी रखी गई है, इसलिए यह निवेश उसके लिए फंड जुटाने का एक अहम संभावित स्रोत है.
ग्रुप ने जुलाई में 21,500 करोड़ रुपये की रीफाइनेंसिंग प्रक्रिया पूरी की थी. इसके बाद करीब 3,500 करोड़ रुपये के बॉन्ड का भुगतान भी किया गया, जिससे तत्काल नकदी संबंधी दबाव कुछ कम हुआ. हालांकि, कर्ज की अन्य देनदारियों को पूरा करने और वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए ग्रुप को अतिरिक्त फंड की जरूरत बनी हुई है.
शेयर पूंजी में चुनिंदा कटौती का प्रस्ताव इसी दिशा में एक विकल्प है. हालांकि, इस लेनदेन की अंतिम संरचना, शेयरों का मूल्यांकन और फंड जुटाने का तरीका अभी चर्चा और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा.
RBI के लिस्टिंग निर्देश से बढ़ी चुनौती
यह घटनाक्रम टाटा संस के भविष्य के स्वामित्व ढांचे को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच सामने आया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस के अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था.
RBI के नियमों के तहत अपर-लेयर NBFC को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने इक्विटी शेयर किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराने होते हैं. इस निर्देश के बाद टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है. अब सवाल यह है कि कंपनी निजी स्वामित्व में बनी रहेगी या शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ेगी.
SP ग्रुप ने टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर RBI के रुख का समर्थन किया है. ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री पहले भी पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के लिहाज से लिस्टिंग के पक्ष में अपनी राय रख चुके हैं.
हालांकि, ग्रुप की तत्काल वित्तीय जरूरतों के कारण वह लिस्टिंग का इंतजार किए बिना अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को भुनाने का विकल्प भी तलाश रहा है.
दूसरी ओर, टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स सार्वजनिक लिस्टिंग का विरोध करते रहे हैं. उनका तर्क है कि मौजूदा स्वामित्व ढांचे को बनाए रखने से समूह की परोपकारी गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलेगी. इन गतिविधियों के लिए कुछ हद तक टाटा कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड का इस्तेमाल किया जाता है.
शेयर बायबैक प्रस्ताव के सामने कानूनी अड़चनें
प्रस्ताव को लागू करने के लिए कानूनी और नियामकीय प्रावधानों पर विचार करना होगा. कंपनी के शेयरों की चुनिंदा पूंजी कटौती सामान्य शेयर बायबैक से अलग प्रक्रिया है. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 66 के तहत इस तरह की चुनिंदा पूंजी कटौती के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की मंजूरी जरूरी होती है.
इसके अलावा, शेयरों के मूल्यांकन, सभी शेयरधारकों के हितों की निष्पक्षता और टाटा संस के फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं. कंपनी को अपनी भविष्य की निवेश जरूरतों और संभावित लिस्टिंग को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव का आकलन करना होगा.
टाटा संस को इस प्रस्ताव पर फैसला लेते समय अपनी पूंजी संबंधी जरूरतों, शेयरधारकों के हितों और नियामकीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाना होगा. लेनदेन की संरचना और समयसीमा को लेकर होने वाला फैसला SP ग्रुप की वित्तीय स्थिति के साथ-साथ टाटा संस के दीर्घकालिक स्वामित्व ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है.
मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक के दौरान यह जानकारी दी. दोनों देशों के बीच 2022 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू होने के बाद व्यापारिक संबंधों में तेजी आई है.
बैठक में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात, खाड़ी क्षेत्र में तनाव, क्षेत्रीय शांति और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई. जयशंकर ने क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत पर जोर दिया.
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है. जयशंकर ने व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों की निर्बाध, सुरक्षित और सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया.
भारत-UAE व्यापार 100 अरब डॉलर के पार
जयशंकर ने कहा कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है. दोनों देशों के बीच निवेश भी लगातार बढ़ रहा है.
CEPA एक मई 2022 से लागू हुआ था. इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना है. इसके बाद भारत और UAE के बीच वस्तुओं, सेवाओं और बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ा है.
दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद दोनों देश व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना चाहते हैं. बढ़ते कारोबारी भरोसे से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच निवेश को भी समर्थन मिल रहा है.
ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रही. पश्चिम एशिया में तनाव से महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ने और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों से पूरा करता है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है. इन मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा से तेल और गैस के अलावा उर्वरकों तथा अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है.
जयशंकर ने क्षेत्र में शांति बहाल करने और कूटनीतिक बातचीत को बढ़ावा देने वाली पहलों के प्रति भारत का समर्थन दोहराया. उन्होंने UAE में रह रहे भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए वहां के नेतृत्व का आभार भी जताया.
दोनों देशों के बीच हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और व्यापारिक आपूर्ति को सुरक्षित रखना दोनों के साझा हित में है.
रक्षा और तकनीक में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और UAE व्यापार तथा ऊर्जा के अलावा रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं. हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों का रणनीतिक महत्व बढ़ा है. जयशंकर के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीक संबंधी सहयोग अब रणनीतिक आयाम ले रहा है. इसके साथ आर्थिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है. सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने भी दोनों देशों की साझेदारी को व्यापक बनाने में भूमिका निभाई है.
UAE में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं. यह समुदाय रोजगार, धन प्रेषण, कारोबारी नेटवर्क और पारिवारिक संबंधों के जरिए दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है. शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की यात्रा से दोनों देशों को अपनी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने और क्षेत्रीय चुनौतियों पर आपसी तालमेल बढ़ाने का अवसर मिला है. पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के बीच भारत और UAE के संबंधों का महत्व व्यापार, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से लगातार बढ़ रहा है.