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वेदांता का ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव, ₹9,500 करोड़ का निवेश; 2030 तक 2.5 GW का लक्ष्य
रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल 52% बढ़ा, 2030 तक 2.5 GW राउंड-द-क्लॉक ग्रीन पावर क्षमता का लक्ष्य
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने अपने नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिन्यूएबल एनर्जी, कम कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और नई तकनीकों पर 1 अरब डॉलर यानी करीब 9,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया. कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी खपत भी इस दौरान 52 फीसदी बढ़कर 400 करोड़ यूनिट हो गई, जिससे करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली.
2030 तक 2.5 GW ग्रीन एनर्जी क्षमता का लक्ष्य
वेदांता के पास फिलहाल करीब 2,000 मेगावाट यानी 2 GW की इंस्टॉल्ड और कॉन्ट्रैक्टेड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है. कंपनी ने 2030 तक इसे बढ़ाकर 2.5 GW राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता करने का लक्ष्य तय किया है. राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी का मतलब ऐसी हरित बिजली से है, जिसकी उपलब्धता केवल सूरज की रोशनी या मौसम पर निर्भर नहीं रहती. इसके लिए सोलर और विंड जैसे रिन्यूएबल स्रोतों के साथ एनर्जी स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि जरूरत के मुताबिक लगातार बिजली उपलब्ध कराई जा सके.
एक साल में 52% बढ़ा रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वेदांता ने 400 करोड़ यूनिट रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल किया, जो एक साल पहले की तुलना में 52 फीसदी अधिक है. कंपनी के मुताबिक, बिजली की यह मात्रा करीब 3 करोड़ भारतीय परिवारों की सालाना बिजली खपत के बराबर है. वेदांता का कहना है कि रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते इस्तेमाल और अन्य पर्यावरण-अनुकूल पहलों की मदद से कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष उत्सर्जन को रोकने में सफलता हासिल की.
भारत के नेट-जीरो लक्ष्य में अहम भूमिका
भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने और अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 फीसदी रिन्यूएबल स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य रखा है. देश ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का भी लक्ष्य तय किया है.
खनन और धातु क्षेत्र इस ऊर्जा बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. रिन्यूएबल पावर प्लांट, ट्रांसमिशन ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए तांबा, एल्युमीनियम, जस्ता और स्टील जैसी धातुओं की बड़ी मात्रा में जरूरत होती है. ऐसे में वेदांता के लिए ग्रीन एनर्जी में निवेश पर्यावरणीय लक्ष्यों के साथ-साथ भविष्य की औद्योगिक मांग को पूरा करने की रणनीति का भी हिस्सा है.
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