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वेदांता ने 17,000 करोड़ रुपये में जेएएल का अधिग्रहण किया, अडानी को भी छोड़ा पीछे
वेदांता का यह अधिग्रहण न केवल जेएएल के पुनरुद्धार की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह वेदांता के लिए रणनीतिक रूप से मजबूत निवेश भी साबित हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण की दौड़ में अडानी ग्रुप को पछाड़ते हुए 17,000 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाई है. लंबे समय से कर्ज में डूबी जेएएल को लेकर यह अधिग्रहण प्रक्रिया दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत संपन्न हुई है. जेपी ग्रुप की कंपनी जेएएल की बिक्री के लिए आयोजित बोली प्रक्रिया में वेदांता और अडानी दो प्रमुख दावेदार थे. हालांकि, अंतिम दौर में वेदांता की बोली न केवल अधिक थी, बल्कि इसका नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) भी 12,505 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जिसने कंपनी को यह अधिग्रहण दिला दिया.
कर्ज में डूबी थी जेपी ग्रुप की यह इकाई
जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है. कंपनी कई बार ऋण भुगतान में चूक कर चुकी थी, जिसके चलते इसे दिवाला कार्यवाही का सामना करना पड़ा. फिलहाल, कंपनी के शेयर की ट्रेडिंग भी बंद है. जेएएल का आखिरी शेयर मूल्य ₹3.61 रहा.
काफी विविध हैं जेएएल की संपत्तियां
जयप्रकाश एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, होटल और औद्योगिक परिसंपत्तियों का बड़ा पोर्टफोलियो है. प्रमुख परियोजनाओं में जेपी ग्रीन्स (ग्रेटर नोएडा), जेपी विशटाउन (नोएडा) और जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी (जेवर एयरपोर्ट के पास) शामिल हैं. इसके अलावा, कंपनी के पास दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में होटल संपत्तियां भी हैं. वहीं, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसके पास चार सीमेंट प्लांट और कुछ चूना पत्थर की खदानें भी हैं हालांकि, फिलहाल ये कारखाने बंद हैं.
क्या है वेदांता की रणनीति?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेएएल के पास मौजूद विविध संपत्तियों के जरिए वेदांता आने वाले समय में अपने रियल एस्टेट और सीमेंट कारोबार में विस्तार कर सकती है. खासकर दिल्ली-एनसीआर और मध्य भारत के बाजार में कंपनी की पकड़ और मजबूत हो सकती है.
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