वैश्विक वित्तीय बाजार बड़े बदलावों से गुजर रहे हैं, और वोलाटिलिटी (उतार-चढ़ाव) अब असामान्य नहीं बल्कि आम बात हो गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
सिंगापुर में हुए एक हालिया पैनल डिस्कशन में NSE के MD & CEO, आशीष कुमार चौहान ने ग्लोबल बाजारों की बदलती ताकत, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की बदलती भूमिका और टेक्नोलॉजी द्वारा पूंजीवाद (Capitalism) के नए रूप पर अपनी राय रखी.
प्रगति की पहचान है वॉलटिलिटी (उथल-पुथल)
चौहान ने बताया कि बाजार में होने वाली तेजी-गिरावट (वॉलटिलिटी) कोई खराबी नहीं, बल्कि आर्थिक जीवन का हिस्सा है. उन्होंने इसे दिल की धड़कन से जोड़ा—अगर धड़कन रुक जाए, तो जीवन भी रुक जाएगा. इसी तरह, अगर बाजार पूरी तरह स्थिर हो जाए, तो विकास भी रुक जाएगा.
बाजार में उथल-पुथल तब ज्यादा होती है जब उम्मीदें हकीकत से ज्यादा आगे निकल जाती हैं. जब लोग ज्यादा उम्मीदें लगा लेते हैं और सच्चाई अलग होती है, तो करेक्शन (सुधार) बहुत तेज और दर्दनाक हो सकता है. चौहान ने कहा, "बाजार लोगों, समाजों और देशों के आपसी संबंधों से चलता है." आजकल पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों से ज्यादा असर राजनीतिक घटनाओं (Geopolitics) का पड़ता है. उन्होंने चेतावनी दी—"अब भू-राजनीति (Geopolitics) ही अर्थव्यवस्था (Economy) को कंट्रोल कर रही है."
'W' वाली संस्थाओं का पतन
चौहान का सबसे चौंकाने वाला बयान यह था कि बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन अब कमजोर हो रहे हैं. उन्होंने कहा—"UN खत्म, WTO खत्म, WHO खत्म. जो भी 'W' से शुरू होता है, वह खत्म हो रहा है." मतलब, दुनिया अब नियमों से नहीं, बल्कि आपसी समझौतों से चल रही है.
अमेरिका, जो पहले इन वैश्विक संस्थाओं को संभालता था, अब खुद पहचान के संकट से जूझ रहा है. पहले अमेरिका दुनिया की अर्थव्यवस्था को संभालता था, लेकिन अब वह पीछे हट रहा है. ऐसे में चीन और भारत जैसी उभरती शक्तियों को आगे आना होगा. लेकिन चौहान ने यह भी चेताया कि यह बदलाव आसान नहीं होगा और इसमें कई उतार-चढ़ाव आएंगे.
‘कैपिटल के बिना कैपिटलिज्म’ का नया दौर
चौहान ने एक नया और दिलचस्प विचार पेश किया: "कैपिटल के बिना कैपिटलिज्म". पारंपरिक रूप से, आर्थिक विकास के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती थी. प्रसिद्ध दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने कहा था कि पूंजी (कैपिटल) से और ज्यादा पूंजी बनती है, लेकिन अब तकनीक ने इस सोच को बदल दिया है.
चौहान ने कहा, "आज आपको संपत्ति (वेल्थ) बनाने के लिए बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं है." उन्होंने बताया कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ब्लॉकचेन और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे नए तकनीकी साधन कंपनियों को बहुत कम निवेश में तेजी से आगे बढ़ने का मौका देते हैं. उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का उदाहरण दिया, जहां पिछले एक साल में NSE पर 200 से ज्यादा छोटे IPO (माइक्रो-IPO) लिस्ट हुए हैं. यह दिखाता है कि अब आर्थिक विकास के लिए पारंपरिक बड़े निवेश की उतनी जरूरत नहीं रही.
लंबी अवधि के लिए बाजार में हैं भारतीय निवेशक
चौहान ने यह गलत धारणा दूर करने की कोशिश की कि भारत का स्टॉक मार्केट सिर्फ शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स से भरा हुआ है. उन्होंने बताया, "110 मिलियन (11 करोड़) बाजार भागीदारों में से केवल 2% ही डेरिवेटिव्स में सक्रिय रूप से ट्रेडिंग करते हैं. बाकी अधिकांश निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं."
इस लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मानसिकता का एक बड़ा आधार SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) है. इसमें लाखों छोटे निवेशक हर महीने नियमित रूप से पैसा लगाते हैं. भारत में 50 मिलियन (5 करोड़) से ज्यादा लोग SIP के जरिए निवेश कर रहे हैं. SIP ने भारतीय बाजार को स्थिर बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है और यह दिखाता है कि देश में अनुशासित निवेश (Disciplined Investing) की संस्कृति तेजी से बढ़ रही है.
साइबर युद्ध और डिजिटल युद्ध का मैदान
जैसे-जैसे वित्तीय बाजार डिजिटल होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे वे बड़े साइबर खतरों का सामना कर रहे हैं. चौहान ने खुलासा किया कि केवल NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) ही हर दिन 40 से 100 मिलियन साइबर हमलों का सामना करता है. उन्होंने चेतावनी दी, "हमलावरों को सिर्फ दस साल में एक बार सफल होना होता है, लेकिन हमें हर दिन सफल होना जरूरी है."
इन चुनौतियों को और बढ़ा रहा है डीपफेक टेक्नोलॉजी, चौहान ने अपना एक अनुभव साझा किया, जहां उनका डीपफेक वीडियो बनाया गया था, जिसमें ऐसा दिखाया गया कि वे WhatsApp ग्रुप्स में स्टॉक टिप्स दे रहे हैं. इस तरह की गलत जानकारी (misinformation) का तेजी से फैलना वित्तीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. इससे निपटने के लिए नियामकों (regulators) और वित्तीय संस्थानों को लगातार सतर्क रहना जरूरी है.
अमेरिकी डॉलर का भविष्य
क्या अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्रा बना रहेगा? इस सवाल पर चौहान को नहीं लगा कि इसका कोई मजबूत विकल्प मौजूद है. उन्होंने कहा, "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अमेरिका ने बहुत सोच-समझकर खुद को ब्रिटिश पाउंड की जगह वैश्विक रिजर्व मुद्रा (reserve currency) के रूप में स्थापित किया. आज कोई और देश इस भूमिका के लिए तैयार नहीं है."
चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद, वहां वैश्विक रिजर्व मुद्रा के लिए जरूरी वित्तीय पारदर्शिता नहीं है. जब तक कोई और देश मजबूत आर्थिक और राजनीतिक ढांचा तैयार नहीं करता, तब तक डॉलर अपनी स्थिति बनाए रखेगा—योजना के तहत नहीं, बल्कि किसी और विकल्प के न होने की वजह से.
बदलाव के दौर में दुनिया
पैनल चर्चा में चौहान ने दुनिया की एक साफ तस्वीर पेश की, जो बदलाव के दौर से गुजर रही है. पुरानी ताकतें कमजोर हो रही हैं और तकनीक वित्तीय मॉडल को पूरी तरह बदल रही है, जिससे पूंजी बाजार (capital markets) का भविष्य पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है. लेकिन उन्होंने निवेशकों को याद दिलाया कि वोलाटिलिटी (बाजार में उतार-चढ़ाव) प्रगति की कीमत है.
इस उथल-पुथल से निकलने का तरीका है अनुकूलता (adaptability). चौहान ने कहा कि वित्तीय दुनिया उन लोगों की नहीं है जो बदलाव का विरोध करते हैं, बल्कि उनकी है जो इसे पहले से समझते हैं और खुद को ढाल लेते हैं. इतिहास गवाह है कि जो लोग बदलाव को अपनाते हैं, वही भविष्य का निर्माण करते हैं.
रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर असर की आशंका के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर आई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि भारत में किसी भी आवश्यक वस्तु की कमी नहीं होगी और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
IGoM बैठक के बाद सरकार का आश्वासन
रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ काम कर रही है, ताकि देश में सप्लाई चेन पर कोई असर न पड़े.
सप्लाई चेन और जरूरी वस्तुओं पर फोकस
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसी भी परिस्थिति में देश में जरूरी सामानों की उपलब्धता बनी रहे. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं को लेकर जनता को किसी भी तरह की चिंता या घबराहट नहीं करनी चाहिए और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी.
पीएम मोदी की अपील: सोना और ईंधन पर संयम जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया आर्थिक अपील से भी जोड़ा जा रहा है. पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में संयम रखें. उन्होंने कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी.
विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने पर जोर
सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का आधार होता है. सोने के आयात और ईंधन खपत को नियंत्रित कर देश की आर्थिक स्थिति को और स्थिर किया जा सकता है.
पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट बयान
पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सप्लाई बाधित होने या ‘ड्राई आउट’ जैसी कोई स्थिति नहीं है. उन्होंने भी नागरिकों से ईंधन की खपत में संयम बरतने की अपील की है.
सरकार ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए केवल नीतिगत कदम ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है. ऊर्जा की बचत और अनावश्यक खर्चों में कटौती से देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी और संकट के समय स्थिरता बनी रहेगी.
नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी क्षेत्र के केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 9.9 प्रतिशत घटकर ₹4,505 करोड़ रह गया है. पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ने ₹5,002 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था. नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
तिमाही नतीजों के बाद केनरा बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 3.62 प्रतिशत टूटकर ₹129.48 पर ट्रेड करता दिखाई दिया. इस साल अब तक बैंक का शेयर लगभग 15 प्रतिशत कमजोर हो चुका है.
प्रॉफिट में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
केनरा बैंक का मुनाफा घटने की सबसे बड़ी वजह दूसरी आय (Other Income) में आई तेज गिरावट रही. मार्च तिमाही में बैंक की दूसरी आय घटकर ₹4,824 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹6,350 करोड़ थी. हालांकि टैक्स खर्च और प्रावधानों (Provision) में कमी आई, लेकिन इससे मुनाफे में गिरावट को पूरी तरह संतुलित नहीं किया जा सका.
प्रावधानों में आई बड़ी कमी
बैंक के प्रावधान दिसंबर तिमाही के ₹2,414 करोड़ से घटकर मार्च तिमाही में ₹992 करोड़ रह गए. इसके बावजूद नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि आय के दूसरे स्रोतों पर दबाव बना हुआ है.
नेट इंटरेस्ट इनकम में हल्की बढ़ोतरी
केनरा बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी मुख्य आय में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. मार्च तिमाही में बैंक की NII बढ़कर ₹9,809 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹9,442 करोड़ थी. इससे बैंक की कोर बैंकिंग गतिविधियों में स्थिरता का संकेत मिलता है.
एसेट क्वालिटी में सुधार जारी
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. मार्च 2026 के अंत तक बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 1.84 प्रतिशत रह गया, जो दिसंबर तिमाही में 2.08 प्रतिशत था. वहीं नेट NPA भी 0.45 प्रतिशत से घटकर 0.43 प्रतिशत पर आ गया.
ग्रॉस NPA में ₹2,000 करोड़ से ज्यादा की कमी
एब्सोल्यूट आधार पर देखें तो बैंक का ग्रॉस NPA दिसंबर तिमाही के ₹24,832 करोड़ से घटकर ₹22,740 करोड़ रह गया. वहीं, नेट NPA में मामूली कमी आई और यह ₹5,322 करोड़ से घटकर ₹5,209 करोड़ पर पहुंच गया.
स्लिपेज बढ़ने से बढ़ी चिंता
हालांकि एसेट क्वालिटी में सुधार के बावजूद बैंक के स्लिपेज बढ़े हैं. मार्च तिमाही में स्लिपेज ₹2,000 करोड़ के पार पहुंच गए, जबकि दिसंबर तिमाही में यह करीब ₹1,900 करोड़ थे. बढ़ते स्लिपेज को लेकर बाजार में सतर्कता देखने को मिली.
आगे कैसी रहेगी नजर?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में कमजोरी निकट अवधि में दबाव बनाए रख सकती है. अब निवेशकों की नजर बैंक की क्रेडिट ग्रोथ, रिकवरी और आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की स्थिरता पर रहेगी.
Neopolis Brands का उद्देश्य भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को लोकल जरूरतों के अनुसार ढालकर उन्हें बड़े स्तर पर स्थापित करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फैशन रिटेल इंडस्ट्री के अनुभवी दिग्गज शैलेश चतुर्वेदी ने अपने नए वेंचर निओपोलिस ब्रांड्स (Neopolis Brands Private Limited) की शुरुआत की है. कंपनी ने शुरुआती चरण में ही 90 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटा ली है, जो देश के कई प्रमुख निवेशकों और रणनीतिक पार्टनर्स से आई है. यह कंपनी भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को मजबूत करने और उन्हें बड़े पैमाने पर विस्तार देने के उद्देश्य से बनाई गई है.
ग्लोबल ब्रांड्स को भारत में मजबूत बनाने की रणनीति
निओपोलिस ब्रांड्स का फोकस उन अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड्स पर है जो अपने घरेलू बाजारों में पहले से ही लीडर हैं. कंपनी का लक्ष्य ऐसे ब्रांड्स को भारत में भी उसी स्तर की सफलता दिलाना और उन्हें तेजी से स्केल करना है. इसके लिए कंपनी मल्टी-चैनल विस्तार यानी स्टोर्स और ई-कॉमर्स दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है.
शुरुआती फंडिंग में बड़े निवेशकों की भागीदारी
कंपनी को मिली 90 करोड़ रुपये की शुरुआती फंडिंग में कई बड़े नाम शामिल हैं. इनमें आशीष कचोलिया, लशित सांघवी (Alchemy Capital), ब्रांडिक्स श्रीलंका और मणिपाल टेक्नोलॉजी जैसे निवेशक और पार्टनर्स शामिल हैं. यह निवेश कंपनी की रणनीति और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं पर मजबूत भरोसे को दर्शाता है.
अनुभवी टीम के साथ मजबूत शुरुआत
निओपोलिस ब्रांड्स ने अपनी टीम में अनुभवी पेशेवरों को शामिल किया है, जिन्होंने पहले भी शैलेश चतुर्वेदी के साथ काम किया है. कंपनी के सीएफओ के रूप में अंकुश त्रिवेदी को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे फाइनेंशियल और ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके.
100 स्टोर्स और मल्टी-चैनल विस्तार का लक्ष्य
शैलेश चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी ब्रांड की सफलता के लिए स्केलिंग बेहद जरूरी है. निओपोलिस का लक्ष्य भारत में ऐसे कई बड़े ब्रांड बनाना है जिनके कम से कम 100 स्टोर्स हों और जिनकी ई-कॉमर्स में भी मजबूत मौजूदगी हो. कंपनी 40 से 50 शहरों तक अपने ब्रांड्स को पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है.
निवेशकों का भरोसा और बाजार की संभावनाएं
निवेशक अशीष कचोलिया का मानना है कि भारत में महिलाओं के फैशन और एक्सेसरीज सेगमेंट में अभी भी बड़ा अनछुआ अवसर मौजूद है. उनके अनुसार, इस क्षेत्र में डिमांड मजबूत है लेकिन संगठित ब्रांड्स की हिस्सेदारी अभी सीमित है, जो नए खिलाड़ियों के लिए बड़ा मौका बनाता है.
वहीं लषित सांघवी ने कहा कि शैलेश चतुर्वेदी के पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने पहले भी कई ग्लोबल ब्रांड्स को सफलतापूर्वक स्केल किया है, जिससे निओपोलिस को मजबूत दिशा मिलने की उम्मीद है.
भारत का फैशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है
भारत का प्रीमियम फैशन और लाइफस्टाइल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. बढ़ती आय, प्रीमियम लाइफस्टाइल की ओर झुकाव और फैशन अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति इस ग्रोथ के मुख्य कारण हैं.
कुल बाजार का आकार लगभग ₹20,000 करोड़ आंका गया है, जिसमें संगठित सेक्टर करीब ₹7,000 करोड़ का है. यह दर्शाता है कि अभी भी ब्रांड-लेड ग्रोथ के लिए बड़ा अवसर मौजूद है.
निवेश का उपयोग और विस्तार योजना
कंपनी द्वारा जुटाई गई पूंजी का उपयोग संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, ब्रांड्स के विस्तार, सप्लाई चेन विकास और डिजिटल क्षमताओं को बढ़ाने में किया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी नए बाजारों और बिक्री चैनलों में आक्रामक विस्तार की योजना पर काम करेगी.
नियोपोलिस ब्रांड्स का उद्देश्य भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को लोकल जरूरतों के अनुसार ढालकर उन्हें बड़े स्तर पर स्थापित करना है. कंपनी डेटा-ड्रिवन और ओमनीचैनल रणनीति के जरिए प्रीमियम फैशन सेगमेंट में मजबूत नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
सोने की खरीद टालने की अपील से बाजार में मचा हड़कंप, ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने और सोने की खरीद टालने की अपील का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया है. सोमवार को ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें टाइटन, सैंको गोल्ड और अन्य प्रमुख कंपनियों के स्टॉक्स 10 प्रतिशत तक टूट गए. निवेशकों में बढ़ी चिंता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच इस बयान ने ज्वेलरी सेक्टर में तेज बिकवाली को जन्म दिया.
टाइटन समेत प्रमुख ज्वेलरी शेयरों में तेज गिरावट
सुबह के कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर करीब 7 प्रतिशत तक टूट गए और निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हो गए. खबर लिखे जाने के दौरान यह शेयर 6.22 प्रतिशत की गिरावट क साथ 4,232.70 रुपये पर कारोबार कर रहा था. यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कंपनी ने हाल ही में मजबूत तिमाही नतीजों के बाद अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ था. इसी तरह कल्याण ज्वेलर्स, सैंको गोल्ड और पीसी ज्वेलर्स जैसे शेयरों में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की तेज गिरावट देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल कंपनी के फंडामेंटल्स नहीं बल्कि नीतिगत संकेतों और उपभोक्ता मांग को लेकर बनी अनिश्चितता का नतीजा है.
पीएम मोदी की अपील से बढ़ी बाजार की संवेदनशीलता
प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश से अपील की थी कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सोने की खरीद और अनावश्यक विदेशी यात्राओं को एक साल तक टाला जाए. उन्होंने कहा कि देश को विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल, खाद और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है.
इस बयान के बाद निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों में सतर्कता बढ़ गई, जिसका सीधा असर ज्वेलरी और ट्रैवल सेक्टर पर देखा गया.
बाजार पर व्यापक दबाव, सभी सेक्टर लाल निशान में
सुबह के कारोबार में शेयर बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स करीब 1,045 अंक गिरकर 76,282 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 300 अंक से अधिक टूटकर 23,877 के नीचे आ गया. सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. खासकर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी असर
सोने के साथ-साथ अनावश्यक विदेशी यात्रा कम करने की अपील का असर ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी पड़ा है. IRCTC और अन्य ट्रैवल से जुड़े स्टॉक्स में भी बिकवाली का दबाव देखा गया. विश्लेषकों का कहना है कि यह असर अल्पकालिक भावनात्मक प्रतिक्रिया भी हो सकता है, लेकिन निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.
किन सेक्टरों पर दिखेगा असर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, इस तरह के नीतिगत संकेतों का असर कुछ सेक्टरों पर अधिक दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि ज्वेलरी, फ्यूल, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है. वहीं फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं.
आगे क्या रह सकता है रुझान?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट भावनात्मक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी मुद्रा स्थिति आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी. निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार की नीतियां और वैश्विक परिस्थितियां आगे बाजार को किस दिशा में ले जाती हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत कुल 2,996 जलवायु-लचीली फसल किस्में जारी की गईं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार ने कहा है कि देश ने पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरों से बचाने के लिए लगभग 3,000 जलवायु-लचीली फसल किस्में विकसित और जारी की हैं. यह पहल किसानों को सूखा, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और अन्य जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से की गई है.
2014 से 2025 के बीच जारी हुईं 2,996 नई किस्में
सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture) संबंधी आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत कुल 2,996 जलवायु-लचीली फसल किस्में जारी की गईं.
टिकाऊ खेती के लिए नई कृषि तकनीकों पर जोर
बयान में कहा गया है कि नई बीज किस्मों के साथ-साथ वैज्ञानिकों ने जलवायु जोखिम कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कृषि पद्धतियों को भी विकसित और प्रोत्साहित किया है. इनमें डायरेक्ट-सीडेड राइस, जीरो-टिलेज गेहूं, तनाव-सहिष्णु फसलों को अपनाना और फसल अवशेष प्रबंधन में सुधार जैसी तकनीकें शामिल हैं.
ICAR का कार्यक्रम बना जलवायु अनुकूलन का आधार
भारत की कृषि क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन रणनीति का मुख्य आधार ICAR द्वारा वर्ष 2011 में शुरू किया गया “नेशनल इनोवेशंस ऑन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर” कार्यक्रम है. यह कार्यक्रम स्थानीय जलवायु चुनौतियों के अनुरूप तकनीकों के विकास और प्रसार पर केंद्रित है.
सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत किसानों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण और फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई है.
सूखा, बाढ़ और हीटवेव से निपटने पर फोकस
इस पहल के तहत खेती प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है ताकि वे सूखा, बाढ़ और हीटवेव जैसी चरम मौसम घटनाओं का बेहतर सामना कर सकें. बयान में बताया गया कि इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के प्रोटोकॉल के अनुसार देश के 651 कृषि जिलों में जलवायु संवेदनशीलता का आकलन किया गया. इनमें से 310 जिलों को अत्यधिक या बहुत अधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया.
448 गांव बने जलवायु-लचीले मॉडल गांव
शोध को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सरकार ने 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 151 संवेदनशील जिलों में 448 गांवों को “जलवायु-लचीले गांव” के रूप में विकसित किया है. इन गांवों में नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है ताकि उन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके.
जल संरक्षण और मिट्टी की सेहत सुधारने पर जोर
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन का उद्देश्य जल उपयोग दक्षता बढ़ाने, मिट्टी के स्वास्थ्य को मजबूत करने और अधिक टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देकर इन प्रयासों का विस्तार करना है.
CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में निजी निवेश का माहौल तेजी से मजबूत होता दिखाई दे रहा है. सितंबर 2025 तक देश का प्राइवेट कैपेक्स 67 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी के साथ 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. एक साल पहले यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने इसे देश की निवेश साइकिल में बड़े बदलाव का संकेत बताया है. संगठन का कहना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता निवेश न सिर्फ औद्योगिक विस्तार को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, निर्यात और आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच CII ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए 5-पॉइंट एक्शन प्लान भी पेश किया है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन
CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया. इस सेक्टर में करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो कुल प्राइवेट कैपेक्स का लगभग आधा हिस्सा है. मेटल, ऑटोमोबाइल और केमिकल सेक्टर निवेश के प्रमुख केंद्र रहे.
वहीं सर्विस सेक्टर का योगदान करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें ट्रेड, कम्युनिकेशन और आईटी-आईटीईएस सेक्टर की अहम भूमिका रही.
निवेश चक्र में आया बड़ा बदलाव
CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि प्राइवेट कैपेक्स में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस बात का सबसे मजबूत संकेत है कि भारत का निवेश चक्र निर्णायक रूप से बदल चुका है. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 74.3 प्रतिशत से बढ़कर 75.6 प्रतिशत हो गया.
इसके अलावा नए ऑर्डर बुक में सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंक क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हाफ में करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गई.
CII ने पेश किया 5-पॉइंट एक्शन प्लान
अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और निवेश की रफ्तार बनाए रखने के लिए CII ने पांच बड़े सुझाव दिए हैं.
1. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में राहत
CII ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की केंद्रीय एक्साइज कटौती को अगले 6 से 9 महीनों में धीरे-धीरे वापस लिया जाए, जैसे-जैसे कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हों.
2. ऊर्जा बचत पर उद्योगों का फोकस
उद्योग संगठन ने सदस्य कंपनियों से अगले दो तिमाहियों में फ्यूल और बिजली की खपत में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी लाने का प्रस्ताव रखा है.
3. MSME के लिए 45 दिन पेमेंट गारंटी
छोटे और मझोले उद्योगों पर दबाव कम करने के लिए TReDS और सप्लाई-चेन फाइनेंस के जरिए 45 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.
4. सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने पर जोर
CII ने इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए स्पेशलिटी केमिकल्स और कैपिटल गुड्स सेक्टर में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही है.
5. निवेश और इंटर्नशिप को बढ़ावा
मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में वित्त वर्ष 2027 के निवेश को पहले शुरू करने और PMIS योजना के तहत इंटर्नशिप बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है.
सरकार की नीतियों से मिला निवेश को बढ़ावा
चंद्रजीत बनर्जी ने निजी निवेश में तेजी का श्रेय सरकार की नीतियों को दिया. उन्होंने कहा कि लगातार सरकारी पूंजीगत खर्च, राजकोषीय अनुशासन, आधुनिक टैक्स ढांचा, PLI योजनाएं और मुक्त व्यापार समझौते निवेश बढ़ाने में अहम साबित हुए हैं.
उन्होंने कहा कि भारत अब उस स्थिति में पहुंच चुका है जहां उद्योगों को इस सकारात्मक माहौल को बड़े पैमाने पर उत्पादन, रोजगार और निर्यात में बदलना होगा.
GDP ग्रोथ और एक्सपोर्ट को लेकर बड़ी उम्मीद
CII को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.6 प्रतिशत से अधिक रह सकती है. संगठन का अनुमान है कि देश का निर्यात 863 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर के पार जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि निजी निवेश में आई यह तेजी भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. सोमवार को बाजार खुलते ही क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे भारत समेत दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है और तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर दिख सकता है.
1 अरब बैरल कच्चा तेल संकट की भेंट
सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल ईरान संकट की वजह से प्रभावित हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य हो जाए, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर होने में लंबा समय लग सकता है.
केप्लर (Kpler) के शिपिंग डेटा के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में केवल दो तेल टैंकर ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल पाए. बताया जा रहा है कि ईरानी हमलों से बचने के लिए कई जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम तक बंद कर दिए.
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है. मौजूदा हालात में यही देखने को मिल रहा है.
कच्चे तेल की कीमत में जोरदार उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.32 प्रतिशत बढ़कर 104.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 3.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. शुक्रवार को भी तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई थी और नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भी तेजी के साथ हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा डर सप्लाई संकट को लेकर है.
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा तैयार किए गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के जवाब को खारिज कर दिया. इससे पिछले 10 हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह चीन यात्रा पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट और तेल सप्लाई को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का ईरान पर प्रभाव होने के कारण यह बैठक वैश्विक बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?
फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
सरकार ने यह भी कहा है कि भारत में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कई देशों में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं.
आने वाले दिनों में क्या बढ़ सकती है महंगाई?
जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हर बड़ी तेजी सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के बजट को प्रभावित करती है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका, ईरान और चीन के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.
शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत चढ़कर 77,328.19, जबकि NSE निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत मजबूत होकर 24,176.15 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला. वैश्विक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा. हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन देश की कई दिग्गज कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट दर्ज की गई.
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत चढ़कर 77,328.19, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत मजबूत होकर 24,176.15 पर बंद हुआ था. इसके बावजूद टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से चार कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण 1.09 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया. सबसे अधिक नुकसान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हुआ. दूसरी ओर छह कंपनियों ने मिलकर 46,685 करोड़ रुपये का बाजार मूल्य जोड़ा.
वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया. विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में भी सतर्कता देखने को मिली, जिसके कारण बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की खास नजर
सोमवार के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियों से जुड़े निवेश, डील, कॉरपोरेट अपडेट और तिमाही नतीजों के कारण बाजार में जोरदार एक्शन देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर खास तौर पर Lenskart, PB Fintech, Coal India, Flipkart और CMS Info Systems जैसी कंपनियों पर बनी रहेगी. दरअसल, Lenskart Solutions में बड़ा निवेश देखने को मिला है. करीब 82 निवेशकों ने कंपनी के 11.22 करोड़ शेयर खरीदे हैं, जो कंपनी की लगभग 6.46 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है. इस डील का कुल मूल्य करीब 5,313.6 करोड़ रुपये बताया जा रहा है.
PB Fintech में Tencent Holdings की यूरोपीय यूनिट ने अपनी 1.05 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दी है, यह सौदा लगभग 805 करोड़ रुपये में हुआ. ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart छोटे शहरों के व्यापारियों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स पर तेजी से काम कर रही है. Flipkart ने हिंदी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में AI डैशबोर्ड लॉन्च किए हैं.
CMS Info Systems को HDFC Bank से पांच साल का बड़ा आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट मिला है. करीब 400 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ATM मैनेजमेंट, कैश फोरकास्टिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध कराएगी.
वहीं, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में अशोक कुमार पांडा ने 9 मई से चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार संभाल लिया है. कंपनी के नेतृत्व में यह बदलाव निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है. RateGain Travel Technologies के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) रोहन मित्तल ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने फिलहाल अंकित अग्रवाल को अंतरिम CFO की जिम्मेदारी सौंपी है.
Coal India ने 2030-31 तक करीब 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई है. कंपनी यह निवेश माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल गैसीफिकेशन, पावर प्रोजेक्ट्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर में करेगी. कंपनी के मुताबिक, हर साल 18,000 करोड़ से 25,000 करोड़ रुपये तक का कैपेक्स खर्च किया जा सकता है. इस घोषणा के बाद Coal India के शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे.
आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे
आज कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी. इनमें UPL, Canara Bank, Indian Hotels Company, Abbott India, JSW Energy, PVR Inox, GE Power India, JB Chemicals, Shyam Metalics और Nuvama Wealth Management शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इन कंपनियों के नतीजे बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में सेक्टर-आधारित हलचल अधिक देखने को मिल सकती है. मजबूत कॉरपोरेट अपडेट और अच्छे तिमाही नतीजे वाले शेयरों में तेजी संभव है, जबकि वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को रिलायंस एडीए ग्रुप () की कंपनियों से जुड़े तीन मामलों में 17 ठिकानों पर छापेमारी की. ये मामले रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को कुल ₹27,337 करोड़ का कथित नुकसान हुआ है.
निदेशकों के घरों और कंपनियों के दफ्तरों में तलाशी
सीबीआई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि तलाशी अभियान कंपनियों के निदेशकों के आवासों और उन मध्यस्थ कंपनियों के कार्यालयों में चलाया गया, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक फंड्स के डायवर्जन के लिए किया गया था.
मामले में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियां जांच के दायरे में हैं. हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
विशेष अदालत से मिला था तलाशी वारंट
सीबीआई ने शुक्रवार, 8 मई को मुंबई की विशेष अदालत से तलाशी वारंट हासिल किया था. अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी के दौरान कई अहम और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जांच एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान यह भी सामने आया कि कई मध्यस्थ कंपनियां एक ही पते से संचालित हो रही थीं. मामले की जांच अभी जारी है.
रिलायंस ग्रुप के खिलाफ दर्ज हैं सात मामले
सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है. एजेंसी इससे पहले भी पिछले कुछ महीनों में 14 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है.
RCom के दो वरिष्ठ अधिकारी पहले ही गिरफ्तार
इससे पहले सीबीआई ने ₹2,929 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने 24 अप्रैल को RCom के दो वरिष्ठ अधिकारियों, संयुक्त अध्यक्ष डी. विश्वनाथ और उपाध्यक्ष अनिल काल्या को गिरफ्तार किया था. CBI के अनुसार डी. विश्वनाथ समूह के बैंकिंग संचालन की समग्र जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अनिल काल्या बैंकिंग संचालन, भुगतान और फंड उपयोग में उनकी सहायता कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच
CBI ने कहा कि दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है.
सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ग्रुप (Citigroup) ने भारत को अपनी ग्लोबल एसेट एलोकेशन में “अंडरवेट” कर दिया है. यह फैसला लगातार बने मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स को देखते हुए लिया गया है.
ब्रोकरेज ने Nifty 50 के लिए साल के अंत का लक्ष्य 27,000 तय किया है, जो मौजूदा स्तर 24,176 से लगभग 11.7% की बढ़त दर्शाता है. हालांकि, सिटी ने स्पष्ट किया कि कमाई के आउटलुक में जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं.
ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता
सिटी के नोट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए उनके अर्निंग्स ग्रोथ अनुमान अभी तक ईरान युद्ध के संभावित प्रभाव को पूरी तरह शामिल नहीं करते. अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या ऊर्जा कीमतों में और तेजी आती है, तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.
भारत पर मॉडल में कमजोर रेटिंग, लेकिन पोजिशनिंग हल्की
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पिछले कुछ समय से उनके मॉडल में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, निवेशकों की पोजिशनिंग भारतीय बाजार में अभी हल्की है और अर्निंग्स को लेकर अपेक्षाएँ कई अन्य बाजारों की तुलना में अधिक संतुलित हैं.
सेक्टर वाइज नजरिया
सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.
भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी बाजारों में अस्थिरता देखी गई है. निवेशक वैश्विक विकास चिंताओं, भू-राजनीतिक जोखिमों और कॉर्पोरेट अर्निंग्स के रुझानों के बीच घरेलू मजबूत बुनियादों का मूल्यांकन कर रहे हैं.