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केंद्रीय बजट 2026: एमएसएमई और रिटेल सेक्टर को नई उड़ान, 10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड की घोषणा

विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम न केवल आर्थिक विकास को तेज करेंगे, बल्कि रोजगार सृजन, समावेशी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेंगे.

रितु राणा 9 months ago

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026–27 में भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए विशेष तौर पर 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की है. यह कदम छोटे व्यवसायों के लिए पूंजी संकट को कम करने, औद्योगिक क्लस्टर्स को पुनर्जीवित करने और उच्च क्षमता वाले फर्मों को तेजी से बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक नीति पहल है.

एमएसएमई ग्रोथ फंड और छोटे उद्यमों को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार 10,000 करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड स्थापित करेगी. इससे “भविष्य के चैंपियन तैयार किए जाएँगे.” यह छोटे व्यवसायों के लिए हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण लक्षित हस्तक्षेपों में से एक है. इस फंड का उद्देश्य वादायुक्त छोटे और मध्यम उद्यमों को अपनी संचालन क्षमता बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने में मदद करना है. इसे ऐसे प्रोत्साहन ढांचे के साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है जो उच्च उत्पादकता, अधिक औपचारिकरण और निर्यात-तैयारी जैसे मानदंड पूरा करने वाली कंपनियों को इनाम देगा.

पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टर्स का पुनर्जीवन

सरकार 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना शुरू करेगी. ये क्लस्टर्स, जिनमें कई लंबे समय से क्रेडिट तनाव और पुरानी तकनीक से जूझ रहे हैं, अब उन्नत तकनीक और वित्तीय मदद के जरिए रोजगार सृजन और उत्पादन को पुनर्स्थापित करेंगे. सबसे छोटे उद्यमों के लिए, बजट में आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की घोषणा भी की गई है. यह पहल ऐसे माइक्रो उद्यमों के लिए है जो पूंजी की कमी से जूझ रहे हैं और उन्हें अतिरिक्त इक्विटी जैसे समर्थन से अपने संचालन को स्थिर करने का अवसर मिलेगा.

आर्थिक सर्वेक्षण और चुनौतियाँ

उच्च पूंजी लागत और लॉजिस्टिक शुल्क छोटे उद्यमों की मार्जिन पर असर डाल रहे हैं. आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, भारत के एमएसएमई आज भी संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रहे हैं. जबकि अर्थव्यवस्था मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक प्रदर्शन कर रही है, छोटे व्यवसायों के लिए विस्तार अभी भी चुनौतीपूर्ण है. सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि उच्च पूंजी लागत, ऊर्जा और लॉजिस्टिक शुल्क जैसी चुनौतियाँ छोटे उद्यमों की मार्जिन को प्रभावित कर रही हैं.

एमएसएमई और रिटेल में अवसर

कंसोर्टियम गिफ्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव भगत ने कहा “बजट 2026 के साथ भारत का एमएसएमई और रिटेल सेक्टर एक निर्णायक परिवर्तन के दौर में खड़ा है. सरकार द्वारा 10,000 करोड़ के समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड और पूंजीगत व्यय में विस्तार से तरलता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. वैश्विक अस्थिरता के बीच, एमएसएमई अब तेजी से विस्तार और निर्यात-तैयारी की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, विशेषकर तब, जब यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग एक-तिहाई योगदान देता है और 32 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है. रिटेल सेक्टर लगातार दोहरे अंकों की मांग वृद्धि के पथ पर है. भारत का 1.06 ट्रिलियन डॉलर का रिटेल बाजार 2030 तक लगभग दोगुना होने का अनुमान है, और डिजिटल अपनाने की गति ऑनलाइन बिक्री में तेज उछाल ला रही है, जिससे 2027 तक 60 लाख से अधिक एमएसएमई डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं. लक्षित नीतिगत समर्थन और तकनीक-आधारित ओम्नी-चैनल विस्तार ही अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक, समावेशी विकास के नए अवसर खोलने की कुंजी होंगे.”

विनिर्माण और फाइबर सेक्टर में स्थिरता

डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एमडी विनोद कुमार गुप्ता ने कहा “केंद्रीय बजट 2026 ने विनिर्माण क्षेत्र के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं, खासकर एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ की क्रेडिट बढ़ोतरी के रूप में, साथ ही, राष्ट्रीय फाइबर योजना की शुरुआत एक परिवर्तनकारी कदम है, जो प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर दोनों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. यह पहल घरेलू आपूर्ति और Hosiery सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सीधे बढ़ाती है और मूल कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करती है. यह श्रम-प्रधान उद्योग में सतत विकास और मजबूत रोजगार सृजन के लिए ठोस आधार प्रदान करती है.”

संघीय बजट 2026: आर्थिक विकास और उपभोक्ता क्षेत्रों पर प्रभाव

डाक्टर्स’ चॉइस के मार्केटिंग और स्ट्रैटजी हेड शिवम अग्रवाल ने कहा संघीय बजट 2026 आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है. इसमें बुनियादी ढांचे, ग्रामीण खर्च और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर निरंतर ध्यान दिया गया है. ये पहल उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों के लिए रचनात्मक हैं, क्योंकि ये मांग को स्थिर करने, लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने और संचालन में अधिक स्पष्टता प्रदान करने में मदद करती हैं. नीति में निरंतरता, साथ ही विनिर्माण और वितरण के लिए समर्थन, दीर्घकालिक योजना बनाने में मदद करेगा और आवश्यक उत्पादों की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करेगा.
 


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