राजस्थान के शहर उदयपुर में दो स्कूली छात्रों के झगड़े को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई. फिलहाल वहां हालात पूरी तरह सामान्य हैं.
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नीरज नैयर
उदयपुर में स्कूली बच्चों के झगड़े के बाद हुई हिंसा पर काबू पा लिया गया है. पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और लोगों से कानून व्यवस्था को बनाए रखने की अपील की जा रही है. शुक्रवार को शहर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के बीच चाकूबाजी की घटना हुई, इसके बाद पूरे मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश के तहत गाड़ियों को आग के हवाले किया गया. पुलिस-प्रशासन ने चंद ही घंटों में पूरी स्थिति को काबू में कर लिया, लेकिन ये चंद घंटे शहर की टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं.
पिछले साल टूटा रिकॉर्ड
शांत उदयपुर में अशांति की यह घटना शुक्रवार को हुई, ऐसे में वीकेंड यानी शनिवार-रविवार को यहां पहुंचने वाले पर्यटकों में से अधिकांश ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी है. बड़े पैमाने पर होटलों की बुकिंग कैंसिल हुई हैं. झीलों की नगरी उदयपुर देशी-विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है. पिछले साल यहां रिकॉर्डतोड़ 19.90 लाख पर्यटक पहुंचे थे. यह आंकड़ा बीते 14 सालों में सबसे ज्यादा है. उदयपुर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक टूरिज्म पर निर्भर है. ऐसे में यहां होने वाली हर घटना सीधे तौर पर राज्य की आर्थिक सेहत और पर्यटन से जुड़े लोगों को प्रभावित करती है.
बड़ा करके दिखाया गया
कारोबारियों का कहना है कि शुक्रवार की घटना बच्चों के बीच का संघर्ष थी, जिसे बेवजह साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास हुआ. उनका यह भी कहना है कि नेशनल मीडिया में इस घटना को इतना बड़ा करके दिखाया कि बाहर से यहां आने वालों में खौफ निर्मित हो गया. BW हिंदी से बातचीत में उदयपुर होटल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुदर्शन देव कारोही ने कहा कि इस घटना से शहर की टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ है. शनिवार-रविवार के लिए होटलों को काफी बुकिंग मिली थीं, जिनमें से अधिकांश रद्द हो गई हैं.
19 तक पीक सीजन
सुदर्शन देव कारोही ने कहा कि उदयपुर शांत रहता है. पर्यटकों को यहां किसी किस्म का कोई खतरा नहीं है. लेकिन इस तरह की घटनाओं को जिस ढंग से पेश किया जाता है, उससे टूरिस्ट में खौफ पैदा हो जाता है. उन्होंने कहा कि पर्यटन के लिहाज से 19 तारीख तक हमारे लिए पीक सीजन है. इसके अलावा, जन्माष्टमी पर भी पर्यटकों के जमावड़े की उम्मीद है. ऐसे में शुक्रवार की घटना इंडस्ट्री के लिए बड़े झटके से कम नहीं है.
खबर देखकर न बनाएं राय
कारोही ने कहा कि दूसरे राज्यों से यहां आने वाले पर्यटक न्यूज़ चैनलों पर खबर देखकर शहर के बारे में राय कायम कर लेते हैं, जबकि कई बार असलियत काफी अलग होती है. शुक्रवार की घटना को भी काफी बड़ा करके दिखाया गया, जिसका खामियाजा हमें उठाना पड़ रहा है. उदयपुर होटल एसोसिएशन ने पुलिस-प्रशासन से गाड़ियों में आगजनी करके माहौल गर्माने वालों को तुरंत गिरफ्तार करके कड़ी सजा देने की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि शहर की शांत फिजा खराब करने वाले ऐसे असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
2022 में मिले थे गहरे ज़ख्म
इससे पहले, 2022 में उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की तालिबानी स्टाइल में हुई हत्या ने शहर की टूरिज्म इंडस्ट्री को गहरे जख्म दिए थे. इस घटना के बाद होटलों की 60 से 70% बुकिंग रद्द हो गयी थी. केवल होटल इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े हर व्यक्ति को कीमत चुकानी पड़ी थी. हैंडीक्राफ्ट, टूर गाइड, टूर ऑपरेटर से लेकर कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता तक प्रभावित हुए थे. राजस्थान के इस शहर में हर साल बड़ी संख्या में भारतीय और विदेशी सैलानी पहुंचते हैं. उदयपुर टूरिस्ट के साथ-साथ वेडिंग डेस्टिनेशन भी है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त के रूप में ₹17,744.19 करोड़ जारी किए हैं. इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्धता और मजदूरी भुगतान व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है.
समय पर भुगतान और रोजगार उपलब्धता पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि मजदूरी मद के तहत जारी की गई है ताकि काम की मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा सके और भुगतान समय पर किया जा सके. इसके साथ ही प्रशासनिक और सामग्री मद के लिए अब तक ₹3,478 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी जारी किए जा चुके हैं.
नई योजना की ओर बदलाव की तैयारी
सूत्रों ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस योजना को नए नाम से बदला जा सकता है. सरकार “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” यानी विकसित भारत एवं रोजगार आजीविका मिशन (Gramin) लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे संक्षेप में VB-G RAM G भी कहा जा रहा है.
रोजगार में गिरावट पर सरकार का स्पष्टीकरण
हाल ही में मनरेगा रोजगार में लगभग 35.3% मासिक गिरावट दर्ज की गई थी, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना मांग आधारित है. इसलिए रोजगार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. अधिकारियों के अनुसार मौसम, स्थानीय आजीविका के अवसर और क्षेत्रीय जरूरतें रोजगार मांग को प्रभावित करती हैं.
रोजगार बजट में बढ़ोतरी के संकेत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है. यह वित्त वर्ष की पहली छमाही में रोजगार मांग में बढ़ोतरी का संकेत देता है.
नए और पुराने ढांचे का साथ-साथ संचालन
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई योजना पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक MGNREGA जारी रहेगी. बजट में भी दोनों योजनाओं के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं.
वित्त वर्ष 2027 के बजट में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ और मनरेगा के लिए ₹30,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पुराने भुगतान और संक्रमण अवधि के खर्च पूरे किए जा सकें.
कुल मिलाकर सरकार का यह कदम ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को स्थिर रखने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. साथ ही नई रोजगार योजना की तैयारी से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में ग्रामीण विकास मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रैल महीने के दौरान सुधार देखने को मिला है. हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. निर्यात में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया, लेकिन लागत और महंगाई का दबाव भी लगातार बना हुआ है.
PMI में सुधार, लेकिन रफ्तार अब भी धीमी
पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. यह डेटा S&P Global और HSBC की रिपोर्ट में जारी किया गया है. हालांकि यह पिछले महीने के फ्लैश अनुमान 55.9 से कम रहा. PMI का 50 से ऊपर रहना विस्तार (growth) को दर्शाता है. यह लगातार 54वां महीना है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विस्तार के क्षेत्र में बना हुआ है.
पश्चिम एशिया संकट का असर जारी
अर्थशास्त्रियों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब महंगाई और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव बढ़ा है, जिससे उत्पादन लागत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है.
नए ऑर्डर और उत्पादन में हल्का सुधार
अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.
हालांकि, निर्यात ऑर्डर में तेज उछाल देखने को मिला और यह सात महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
लागत और महंगाई में तेज बढ़ोतरी
अप्रैल में एल्यूमिनियम, केमिकल्स, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनपुट कॉस्ट में तेज इजाफा हुआ. सर्वे में इसे सीधे तौर पर पश्चिम एशिया संकट से जोड़ा गया है.
इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी, जबकि आउटपुट कीमतों में भी पिछले छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई.
महंगाई 2022 के बाद उच्चतम स्तर पर
सर्वे के अनुसार कुल महंगाई दर अगस्त 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके चलते कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी की है. उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में लागत में थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन कुल मिलाकर दबाव अभी भी बना हुआ है.
रोजगार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रोजगार सृजन की दर 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. कंपनियां विस्तार योजनाओं के तहत नई भर्ती कर रही हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है.
कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार विस्तार के रास्ते पर बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी महंगाई और लागत का दबाव इसकी रफ्तार को प्रभावित कर रहा है. निर्यात में मजबूती फिलहाल इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है.
ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी अहम खबर में तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक (OPEC+) ने जून महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन लक्ष्य में मामूली बढ़ोतरी पर सहमति जताई है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण इसका वास्तविक सप्लाई पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं होगा.
1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी
ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है. यह लगातार तीसरा महीना है जब समूह उत्पादन बढ़ा रहा है. यह बढ़ोतरी मई में तय किए गए समान स्तर के अनुरूप है, हालांकि इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का हिस्सा शामिल नहीं है, जिसने 1 मई को समूह से अलग होने की घोषणा की थी.
भू-राजनीतिक तनाव से सीमित रहेगा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम दिखाता है कि ओपेक+ मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद सामान्य स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. लेकिन सप्लाई में वास्तविक वृद्धि तब तक सीमित रहेगी जब तक शिपिंग स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं.
ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य, जो खाड़ी देशों के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है, वहां आवागमन बाधित बना हुआ है. इससे अतिरिक्त उत्पादन के बावजूद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ नहीं पा रही है.
सऊदी अरब का उत्पादन लक्ष्य बढ़ा
नई व्यवस्था के तहत प्रमुख उत्पादक देश साउदी अरब का उत्पादन लक्ष्य जून में बढ़कर 10.291 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा. हालांकि वास्तविक उत्पादन इससे काफी कम है. ओपेक के अनुसार, मार्च में सऊदी अरब का वास्तविक उत्पादन लगभग 7.76 मिलियन बैरल प्रतिदिन था.
बाजार को संतुलित रखने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक+ का यह फैसला इस बात का संकेत है कि समूह भविष्य में आपूर्ति तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन फिलहाल स्थिति को संतुलित बनाए रखना चाहता है. साथ ही यह भी संदेश दिया जा रहा है कि हाल के बदलावों के बावजूद समूह की एकजुटता और प्रभाव बरकरार है.
कुल मिलाकर, OPEC+ का यह निर्णय बाजार में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखाता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि भू-राजनीतिक हालात सामान्य होने पर उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक तेल आपूर्ति पर सबसे बड़ा असर डाल रही है.
यह डील भारतीय क्रिकेट और स्पोर्ट्स बिजनेस के इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में से एक मानी जा रही है. इससे न केवल Rajasthan Royals की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि IPL की ब्रांड वैल्यू को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
खेल और कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. मित्तल परिवार ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) की फ्रेंचाइजी राजस्थाैन रॉयल्स (Rajasthan Royals) को खरीदने के लिए अदार पूनावाला के साथ मिलकर लगभग 1.65 अरब डॉलर की डील पर सहमति बना ली है. कंपनी के बयान के अनुसार, यह सौदा नियामकीय मंजूरी के अधीन है और इसके 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.
डील में शामिल फ्रेंचाइज़ियों का बड़ा पोर्टफोलियो
यह सौदा मौजूदा मालिक मनोज बडाले और उनके कंसोर्टियम के साथ किया गया है. इस डील में केवल राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन की बार्बाडोस रॉयल्स जैसी टीमें भी शामिल हैं.
हिस्सेदारी का गणित क्या रहेगा
डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूमावालालगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगे. बाकी करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही रहेगी, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं. बडाले टीम के साथ एक “ब्रिजिंग रोल” में जुड़े रहेंगे, ताकि पुराने और नए मालिकों के बीच संतुलन बना रहे.
मंजूरी के बाद ही पूरी होगी प्रक्रिया
इस डील को पूरा करने के लिए कई अहम संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी, जिनमें बीसीसीआई,सीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल शामिल हैं. सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने के बाद यह सौदा 2026 की तीसरी तिमाही में पूरा होने की उम्मीद है.
बोर्ड में शामिल होंगे बड़े नाम
डील पूरी होने के बाद लक्ष्मी एन मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले, सभी राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे.
लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि उन्हें क्रिकेट से बेहद लगाव है और उनका परिवार राजस्थान से जुड़ा है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स से बेहतर कोई टीम उनके लिए नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि बचपन से ही क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा रहा है और वह टीम के साथ जुड़कर भविष्य की सफलताओं का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं.
टीम की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर
आदित्य मित्तल ने कहा कि IPL बहुत कम समय में दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स में शामिल हो गया है और राजस्थान रॉयल्स इसकी सबसे प्रतिष्ठित टीमों में से एक है. उन्होंने टीम की युवा प्रतिभाओं को निखारने की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई और “हल्ला बोल” के साथ टीम के उज्ज्वल भविष्य की बात कही.
पूनावाला और बडाले की प्रतिक्रिया
अदार पूनावाला ने इस निवेश को लेकर खुशी जताई और आदित्य मित्तल के साथ साझेदारी को लेकर उत्साह व्यक्त किया. वहीं, मनोज बडाले ने नए मालिकों का स्वागत करते हुए कहा कि वह आगे भी टीम का समर्थन करते रहेंगे.
आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों में मजबूती और GIFT निफ्टी में तेज बढ़त से यह उम्मीद जताई जा रही है कि घरेलू बाजार की शुरुआत मजबूत रह सकती है. हालांकि, निवेशकों की नजर आज कई अहम ट्रिगर्स जैसे चुनावी नतीजे, तिमाही नतीजे (Q4) और IPO गतिविधियों पर टिकी हुई है.
GIFT निफ्टी से मजबूत शुरुआत के संकेत
आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया. यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 इंडेक्स हरे निशान में खुल सकता है. निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक है, लेकिन वे वैश्विक संकेतों और घरेलू घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.
चुनावी नतीजों पर टिकी बाजार की नजर
देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में जारी मतगणना का असर बाजार की दिशा तय कर सकता है. राजनीतिक स्थिरता और आने वाली आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है. चुनावी नतीजों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
एशियाई बाजारों में मजबूती
एशिया-प्रशांत बाजारों में आज तेजी का माहौल देखने को मिला. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया और इसमें लगभग 3.5% की उछाल दर्ज हुई. जापान का निक्केई 225 भी करीब 0.38% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. इन सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
US वॉल स्ट्रीट से मिले सकारात्मक संकेत
अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले सत्र में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन कुल मिलाकर माहौल सकारात्मक रहा. S&P 500 और नैस्डैक में बढ़त देखने को मिली. मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का असर सीमित रहा.
कच्चे तेल और कमोडिटी बाजार की चाल
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. शुरुआती गिरावट के बाद यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हुआ. वहीं, सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जो निवेशकों के बदलते रुख को दर्शाती है.
आज आएंगे बड़ी कंपनियों के Q4 नतीजे
आज कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिनमें अंबुजा सीमेंट्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), पेट्रोनेट LNG, गोदरेज प्रॉपर्टीज, टाटा टेक्नोलॉजीज, जिंदल स्टेनलेस, एथर एनर्जी, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एक्साइड इंडस्ट्रीज, सोभा, ज्योति लैब्स और कैश मैनेजमेंट सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों का असर उनके शेयरों की चाल पर साफ देखने को मिल सकता है.
IPO बाजार में बढ़ी हलचल
प्राइमरी मार्केट में भी आज गतिविधि तेज बनी हुई है. OnEMI टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस IPO दूसरे दिन में पहुंच गया है, लेकिन पहले दिन इसे केवल 0.25 गुना सब्सक्रिप्शन मिला और कंपनी करीब 925 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है. Value 360 कम्युनिकेशंस IPO आज सब्सक्रिप्शन का अंतिम दिन है. Bagmane प्राइम ऑफिस IPO आज खुल गया है, जिसका इश्यू साइज करीब 3,405 करोड़ रुपये है. Recode स्टूडियोज IPO भी आज निवेश के लिए खुला है और इसका साइज लगभग 44.59 करोड़ रुपये है.
कुल मिलाकर, आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए कई मायनों में अहम रहने वाला है. GIFT निफ्टी की तेजी और वैश्विक संकेत जहां सकारात्मक माहौल बना रहे हैं, वहीं चुनावी नतीजे और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है.
आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं.
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रितु राणा
प्राइमरी मार्केट में कुछ समय की सुस्ती के बाद अब हलचल तेज होने जा रही है. अगले सप्ताह 3,491 करोड़ रुपए के तीन नए IPO बाजार में दस्तक देने वाले हैं, जिनमें एक बड़ा मेनबोर्ड REIT इश्यू भी शामिल है. हाल के IPO की शानदार लिस्टिंग और निवेशकों के उत्साह को देखते हुए इन इश्यूज को भी मजबूत प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है.
4 से 7 मई के बीच खुलेंगे तीन पब्लिक इश्यू
आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं. कुल मिलाकर कंपनियां इन इश्यूज के जरिए 3,491 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही हैं.
सबसे बड़ा दांव
इस हफ्ते का सबसे बड़ा और प्रमुख इश्यू बैगमेन प्राइम ऑफिस (Bagmane Prime Office REIT) का होगा. इसका सब्सक्रिप्शन 5 मई से 7 मई तक खुला रहेगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 3,405 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है, जिसमें 2,390 करोड़ रुपए का फ्रेश इश्यू और 1,015 करोड़ रुपए का ऑफर फॉर सेल शामिल है. इसकी प्राइस बैंड 95 से 100 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है.
प्रीमियम ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेश का मौका
यह REIT निवेशकों को बेंगलुरु की प्रीमियम कमर्शियल ऑफिस प्रॉपर्टीज में निवेश का अवसर देता है. इसके पोर्टफोलियो में 20.3 मिलियन वर्ग फीट में फैले 6 ग्रे A+ बिजनेस पार्क शामिल हैं, जिनमें जून 2025 तक करीब 97.9 प्रतिशत स्पेस लीज पर दिया जा चुका है. इसके प्रमुख किरायेदारों में गूगल (Google), अमेजन (Amazon) और एनवीडिया (Nvidia) जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती हैं.
कमाई और विस्तार पर फोकस
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में ट्रस्ट ने 829 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जबकि कुल आय 1,960 करोड़ रुपए रही. इस इश्यू से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा नई ऑफिस प्रॉपर्टीज खरीदने में लगाया जाएगा, जिससे किराये से होने वाली आय और स्थिरता बढ़ेगी.
SME सेगमेंट में भी हलचल
मेनबोर्ड के अलावा SME सेगमेंट में भी दो कंपनियां बाजार में उतरेंगी. वैल्यू 360 कम्यूनिकेशन्स (Value 360 Communications) का IPO 4 से 6 मई के बीच खुलेगा. कंपनी 41.7 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है, जिसकी प्राइस बैंड 95-98 रुपए प्रति शेयर है.
इसके बाद रिकोड स्टूडियोज (Recode Studios) का IPO 5 से 7 मई तक खुलेगा. कंपनी 44.6 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है और इसकी प्राइस बैंड 150-158 रुपए प्रति शेयर तय की गई है. दोनों SME इश्यू मिलकर 86 करोड़ रुपए से अधिक की फंडरेजिंग करेंगे.
निवेशकों की नजर मेनबोर्ड इश्यू पर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो स्थिर रिटर्न और नियमित आय प्रदान कर सकें. ऐसे में REIT इश्यू में संस्थागत और खुदरा निवेशकों की खास दिलचस्पी देखने को मिल सकती है.
IPO बाजार में फिर लौट रही रौनक
हालिया IPO की मजबूत लिस्टिंग और बढ़ते निवेशक भरोसे के बीच यह सप्ताह प्राइमरी मार्केट के लिए अहम माना जा रहा है. अगर इन इश्यूज को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो आने वाले महीनों में IPO बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है.
भारत और इक्वाडोर के बीच प्रस्तावित PTA के तहत भारत से दवाओं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात बढ़ेगा, जबकि भारत को इक्वाडोर से कच्चे तेल और कृषि उत्पादों का आयात सस्ता और आसान होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रहा है. दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के साथ प्रस्तावित प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के जरिए दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने और आयात-निर्यात को आसान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इस समझौते के लागू होने पर कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं और नए बाजारों के दरवाजे खुलेंगे.
ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों को फायदा
भारत और इक्वाडोर के बीच प्रस्तावित PTA के तहत चुनिंदा उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की जाएगी. इससे भारत से दवाओं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात बढ़ेगा, जबकि भारत को इक्वाडोर से कच्चे तेल और कृषि उत्पादों का आयात सस्ता और आसान होगा.
विदेश मंत्रियों की बैठक में मजबूत हुई रणनीति
इस दिशा में हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर और इक्वाडोर की विदेश मंत्री गैब्रिएला सोमरफेल्ड रोसेरो के बीच अहम बैठक हुई. इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने पर जोर दिया. दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान इक्वाडोर प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार, निवेश, कृषि, स्वास्थ्य और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
स्वास्थ्य, कृषि और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा
दोनों देशों ने स्वास्थ्य सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई. इसके साथ ही सांस्कृतिक संबंधों, क्षमता निर्माण और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा.
इक्वाडोर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) में शामिल होने का भी निर्णय लिया है, जिससे भारत के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे.
विकास परियोजनाओं के लिए भारत देगा अनुदान
भारत ने इक्वाडोर में ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ (QIPs) के लिए 5 साल में 12 करोड़ रुपये तक की अनुदान सहायता देने का फैसला किया है. इस फंड के जरिए सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ मिलेगा.
व्यापार रोडमैप और सप्लाई चेन पर फोकस
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में PTA के लिए विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की गई. बातचीत में भारतीय दवाओं के निर्यात को बढ़ाने और तांबा व सोना जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में साझेदारी को भी प्राथमिकता दी गई.
स्वास्थ्य सहयोग को मिलेगा नया आयाम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों पर जोर दिया गया. इस दौरान इक्वाडोर द्वारा ‘इंडियन फार्माकोपिया’ को मान्यता देने पर भी चर्चा हुई, जिससे दवाओं के क्षेत्र में सहयोग और आसान होगा.
दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक औपचारिक समझौते पर भी सहमति जताई है.
ग्लोबल ट्रेड में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत और इक्वाडोर के बीच यह संभावित समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को भी मजबूत करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और नए बाजारों तक पहुंच के जरिए भारत आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है.
उद्योग के खुदरा बिक्री आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान यात्री EV बिक्री 69.5 प्रतिशत बढ़कर 79,063 यूनिट रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार मजबूत होती दिख रही है. जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच देश में यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करीब 70 प्रतिशत बढ़कर 79 हजार यूनिट के पार पहुंच गई. खास बात यह रही कि मार्च में रिकॉर्ड तेजी के बाद अप्रैल में भी बाजार लगभग उसी स्तर पर बना रहा. जिससे साफ है कि EV सेगमेंट अब अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी ग्रोथ के दौर में प्रवेश कर चुका है.
जनवरी-अप्रैल में शानदार प्रदर्शन
उद्योग के खुदरा बिक्री आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान यात्री EV बिक्री 69.5 प्रतिशत बढ़कर 79,063 यूनिट रही. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि उपभोक्ताओं का झुकाव तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है.
मार्च 2026 में EV बिक्री 23,097 यूनिट रही थी, जो अप्रैल में मामूली गिरावट के साथ 22,677 यूनिट रही. आमतौर पर मार्च के बाद अप्रैल में मांग कमजोर पड़ती है. लेकिन इस बार बाजार मजबूत बना रहा.
अप्रैल में मामूली गिरावट. मांग बनी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में बिक्री में हल्की कमी का कारण कम कार्य दिवस और मौसमीय बदलाव रहे. इसके बावजूद मांग कमजोर नहीं हुई. यदि बिक्री दिनों के हिसाब से आंकड़ों को समायोजित किया जाए तो EV बाजार स्थिर और मजबूत नजर आता है.
जनवरी में 32 से 34 बिक्री दिन, फरवरी में 27 से 29, मार्च में 28 से 30 और अप्रैल में केवल 26 से 28 बिक्री दिन रहे. यानी कम समय के बावजूद बिक्री मजबूत बनी रही.
टाटा मोटर्स ने कायम रखी बादशाहत
भारतीय EV बाजार में टाटा मोटर्स ने अपनी बढ़त बरकरार रखी. कंपनी ने जनवरी से अप्रैल के दौरान कुल 31,604 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की, जो सालाना आधार पर 65.2 प्रतिशत की वृद्धि है. टाटा की लगातार मजबूत मौजूदगी यह दिखाती है कि कंपनी अभी भी भारत के EV बाजार की सबसे बड़ी खिलाड़ी बनी हुई है.
महिंद्रा ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार
महिंद्रा एंड महिंद्रा इस अवधि की सबसे तेज बढ़ने वाली कंपनी रही. कंपनी की बिक्री जनवरी-अप्रैल 2025 के 6,714 यूनिट से बढ़कर इस साल 18,153 यूनिट पहुंच गई. यह 170.4 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि है.
यह संकेत देता है कि महिंद्रा के नए इलेक्ट्रिक मॉडल्स को ग्राहकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है.
MG Motor दूसरे स्थान पर
एमजी मोटर इंडिया 19,036 यूनिट बिक्री के साथ इस अवधि में दूसरी सबसे बड़ी EV कंपनी रही. हालांकि इसकी सालाना वृद्धि दर 18.9 प्रतिशत रही, जो बाजार की कुल वृद्धि से कम है.
मारुति सुजुकी की एंट्री से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
हाल ही में EV सेगमेंट में कदम रखने वाली मारुति सुजुकी ने भी शुरुआती दौर में अच्छा प्रदर्शन किया. जनवरी में कंपनी की बिक्री 221 यूनिट थी, जो अप्रैल तक बढ़कर 1,200 यूनिट से अधिक पहुंच गई.
EV बिक्री के ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार अब तेज विस्तार के दौर में है. बढ़ती चार्जिंग सुविधाएं, नए मॉडल, बेहतर रेंज और सरकारी समर्थन आने वाले महीनों में इस सेक्टर को और गति दे सकते हैं.
फोर्स मोटर्स ने अपने प्रमुख ट्रैवलर प्लेटफॉर्म के जरिए वैन सेगमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी. यह सेगमेंट कंपनी की मुख्य ताकत बना हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की प्रमुख वैन निर्माता और ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्स मोटर्स (Force Motors Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के नतीजे जारी करते हुए कहा कि यह वर्ष उसके इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है.
सभी सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन
कंपनी के अनुसार, लगातार बेहतर तिमाही प्रदर्शन, मजबूत ऑपरेटिंग लीवरेज और सभी उत्पाद श्रेणियों में व्यापक वृद्धि ने इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है. यह नतीजे कंपनी के अनुशासित और केंद्रित बिजनेस मॉडल को दर्शाते हैं.
घरेलू बाजार में 20% की वृद्धि**
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल थोक बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. घरेलू बाजार में यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत पकड़ और बढ़ती मांग को दर्शाता है.
वैन सेगमेंट में दबदबा कायम
फोर्स मोटर्स ने अपने प्रमुख ट्रैवलर प्लेटफॉर्म के जरिए वैन सेगमेंट में 70 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी. यह सेगमेंट कंपनी की मुख्य ताकत बना हुआ है.
प्रीमियम मोबिलिटी और नए मॉडल्स में तेज ग्रोथ
प्रीमियम पैसेंजर मोबिलिटी सेगमेंट में कंपनी के अर्बानिया मॉडल ने सालाना आधार पर 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की. वहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में ट्रैक्स प्लेटफॉर्म को भी मजबूत प्रतिक्रिया मिली, जिससे इसमें 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई.
संस्थागत और डिफेंस ऑर्डर्स से मजबूती
कंपनी ने संस्थागत और रक्षा क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशेष वाहनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऑर्डर्स सफलतापूर्वक पूरे किए गए.
वित्तीय अनुशासन और जीरो-डेट स्टेटस बरकरार
फोर्स मोटर्स ने अपना “जीरो-डेट” स्टेटस बनाए रखा है, जो मजबूत वित्तीय प्रबंधन और अनुशासित पूंजी आवंटन को दर्शाता है.
कंपनी के प्रबंध निदेशक प्रसन फिरोदिया ने कहा कि फोर्स मोटर्स शुरुआत से ही सेगमेंट क्रिएटर रही है और अब प्रीमियम शेयर्ड मोबिलिटी सेगमेंट में मजबूत स्थिति बना रही है. उन्होंने कहा कि ट्रैवलर और ट्रैक्स जैसे प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर बाजार पहुंच दे रहे हैं, जबकि रक्षा और संस्थागत ग्राहकों के साथ काम कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है.
भविष्य की रणनीति पर फोकस
कंपनी ने कहा कि आने वाले समय में उसका ध्यान अनुशासन के साथ सतत विकास पर रहेगा. ग्राहकों की जरूरतों के साथ जुड़ाव, उत्पाद नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना भविष्य की ग्रोथ का मुख्य आधार होगा.
अप्रैल के दौरान कोल ऑफटेक यानी ग्राहकों को की गई आपूर्ति में भी गिरावट देखने को मिली. यह 2 प्रतिशत घटकर 63.2 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल अप्रैल में 64.5 मिलियन टन थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया (Coal India Ltd) के कोयला उत्पादन में अप्रैल महीने में करीब 9.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब देश में भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है.
उत्पादन में सालाना गिरावट
कंपनी ने अप्रैल में 56.1 मिलियन टन MT कोयला उत्पादन किया, जो पिछले साल इसी महीने के 62.1 मिलियन टन के मुकाबले कम है. यह जानकारी शुक्रवार को बीएसई में दाखिल अंतरिम आंकड़ों में दी गई.
कोयले की बिक्री में भी कमी
अप्रैल के दौरान कोल ऑफटेक यानी ग्राहकों को की गई आपूर्ति में भी गिरावट देखने को मिली. यह 2 प्रतिशत घटकर 63.2 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल अप्रैल में 64.5 मिलियन टन थी.
सहायक कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला
कंपनी की कई सहायक इकाइयों में उत्पादन घटा है, जिनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड शामिल हैं. वहीं, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में उत्पादन बढ़ा है.
बिजली उत्पादन में कोयले की अहम भूमिका
भारत की बिजली व्यवस्था में कोयले की अहम भूमिका बनी हुई है और कुल बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कोयले से आता है. Coal India Ltd देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले का करीब तीन-चौथाई हिस्सा सप्लाई करती है.
बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर के करीब
ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को देश में बिजली की अधिकतम मांग 255.85 गीगावाट GW तक पहुंच गई, जो शनिवार को दर्ज 256.11 GW के सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब है.
भीषण गर्मी बनी मुख्य वजह
देशभर में तेज गर्मी के चलते एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे बिजली की मांग में तेजी आई है. ऐसे में कोयला उत्पादन में गिरावट ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा सकती है.