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उबर का नया सब्सक्रिप्शन मॉडल देशभर में लागू, ड्राइवरों को मिलेगी पूरी कमाई
उबर का सब्सक्रिप्शन मॉडल न केवल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा बल्कि भारत में कैब एग्रीगेटर उद्योग की कार्यप्रणाली में भी बड़ा बदलाव लाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
ऑनलाइन कैब सेवा प्रदाता कंपनी उबर (Uber) ने अपने सभी ड्राइवर पार्टनर्स कार, ऑटो रिक्शा और बाइक चालकों के लिए सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल लागू कर दिया है. कंपनी ने इसे दो सप्ताह पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था और अब यह पूरे देश में लागू हो गया है. इस कदम के साथ ही भारत में सभी प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियां उबर, ओला और रैपिडो अब सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रही हैं. उबर ने यह बदलाव बाजार में प्रतिस्पर्धा और टैक्स ढांचे में अस्पष्टता को ध्यान में रखते हुए किया है.
रैपिडो से प्रतिस्पर्धा और जीएसटी पर अस्पष्टता मुख्य कारण
कंपनी ने बताया कि उसे रैपिडो से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिसने सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए कई ड्राइवरों को जोड़ा है. वहीं, कमीशन-आधारित मॉडल पर जीएसटी (GST) की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है, जिससे कंपनियों को परिचालन में कठिनाइयां आ रही हैं. उबर ने कहा, “हम बाजार की बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप सभी कैटेगरी कार, ऑटो और बाइक में सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. जीएसटी के अनिश्चित ढांचे के चलते यह बदलाव ‘SaaS’ (Software as a Service) आधारित सुविधा की दिशा में बड़ा औद्योगिक कदम है.”
ड्राइवरों के लिए राहत: अब पूरी कमाई अपनी जेब में
पहले उबर ड्राइवरों से 15 से 20 फीसदी कमीशन वसूलती थी. इससे ड्राइवरों की आमदनी घट जाती थी. अब नए मॉडल में उन्हें केवल एक निश्चित सब्सक्रिप्शन शुल्क देना होगा और उसके बाद उनकी पूरी कमाई उन्हीं की रहेगी. एक उबर चालक ने बताया, “सब्सक्रिप्शन मॉडल में लगभग पूरी आमदनी हमारी होती है. कंपनी ने फिलहाल दैनिक और मासिक प्लान दोनों शुरू किए हैं.”
जीएसटी संरचना ने बढ़ाई कंपनियों की चिंता
वर्तमान में कैब एग्रीगेटर कंपनियां दो तरह के कारोबारी मॉडल अपनाती हैं.
- कमीशन मॉडल: उबर और ओला जैसी कंपनियां 5% (आईटीसी के बिना) या 12% (आईटीसी के साथ) जीएसटी चुकाती हैं.
- SaaS मॉडल: रैपिडो और नम्मा यात्री जैसे प्लेटफॉर्म 18% जीएसटी लेते हैं, जिसका भुगतान चालक करता है.
यह दोहरी कर व्यवस्था उद्योग में असमानता पैदा कर रही थी. विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक जीएसटी नियम स्पष्ट नहीं होते, कमीशन आधारित प्रणाली व्यवहारिक नहीं रह जाती.
उद्योग पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि उबर का यह कदम ड्राइवरों की आय बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा में बने रहने की दिशा में अहम बदलाव है. साथ ही, यह मॉडल नियमित टैक्स स्ट्रक्चर को भी चुनौती देता है और सरकार को नीति स्पष्ट करने के लिए प्रेरित कर सकता है.
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