बिजनेस और पर्यावरण को बदल सकती है ये तकनीक...

जानकारों का मानना है कि टेक-इनेबल्ड बिजनेस सॉल्यूशंस में स्थिरता के साथ-साथ विकास के लिए बिजनेस एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाने की क्षमता है. 

Last Modified:
Monday, 05 June, 2023
Technology In Business

बीते कुछ समय में अगर इंटरनेट के हमारे जीवन पर असर का आंकलन करें तो इसने एक बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है. इसके कारण हमारे जीवन के काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है. हालाँकि, जैसे-जैसे दुनिया तेजी से जुड़ती जा रही है, इंटरनेट के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. जबकि अगर एक ईमेल या इंटरनेट सर्च की बात करें तो उसके लिए इंटरनेट की कम ही ऊर्जा लगती है. लेकिन आज सामूहिक वैश्विक इंटरनेट के उपयोग के कारण CO2 उत्सर्जन बढ़ रहा है और ये ग्‍लोबल वार्मिंग की चुनौतियों को बढ़ा रहा है. लेकिन इस बीच कई तरह की नई तकनीकों ने कई तरह के कारोबार के लिए बेहतर स्थितियां पैदा की हैं. इंडस्‍ट्री 4.0 आज दुनिया के कारोबार के लिए एक सहायक के रूप में काम कर रही है. लेकिन आज हर इंडस्‍ट्री ये जान रही है कि उसे ग्रीन एनर्जी को लेकर काम करना है. ऐसे में हर कोई विकल्‍प तलाश रहा है. 

तेजी से बढ़ रहा है आईओटी का बाजार 
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हरित प्रौद्योगिकी का बाजार अगले पांच वर्षों के दौरान 45-55 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. ग्रीन आईओटी समय की आवश्यकता बन गया है क्योंकि यह संसाधनों की खपत को समय के अनुसार बदल रहा है और कचरे को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल मान्‍यताओं को बढ़ावा देने के लिए डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए जुड़े उपकरणों और सेंसर के उपयोग को बढ़ाता है. व्यापार जगत के नेता भी स्थिरता के प्रयासों को बढ़ाने के लिए हरित IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) प्रौद्योगिकियों का तेजी से लाभ उठाकर अपने संगठन को बढ़ाने के तरीकों की तलाश कर रहे हैं.

क्‍यों समय की आवश्‍यकता है ग्रीन टेक 
IoT इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स के समाधान व्यवसायों, सरकारों और उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा समय में प्रदर्शन को पारदर्शी बनाने का काम कर रहे हैं. इसके जरिए जहां उन्‍हें ट्रैक किया जा सकता है वहीं उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकती है जहां ऊर्जा हानि और खपत को कम किया जा सकता है. यही नहीं कारोबार से निकलने वाले अपशिष्ट उत्पादन, संग्रह और उन्‍हें निपटाने की प्रक्रिया के लिए विभिन्न तरीकों से उनका इस्‍तेमाल किया जा सकता है, यही नहीं इनके जरिए कई तरह का रीयल-टाइम डेटा भी लिया जा सकता है. 
हमारे देश में कारोबारियों को कई इस तरह की समस्‍याओं से भी रूबरू होना पड़ता है जिसमें एक अच्‍छी पॉलिसी के बनाने से लेकर उनके फंड मैनेजमेंट और राज्य-केंद्र के बीच अपर्याप्त समन्वय की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं. इसके कारण हम ग्रीन सेक्‍टर के प्रारंभिक चरण के फंडिंग, प्‍लॉनिंग, पूर्वानुमान और बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को आसानी से समझा जा सकता है. 

सरकार कर चुकी है राष्‍ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की घोषणा 
हालाँकि, भारत सरकार ने पहले ही राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का खुलासा कर दिया है, जिसका उद्देश्य देश भर में हरित प्रौद्योगिकी और स्थिरता समाधान और सेवाओं को अपनाने के साथ ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज़ करना है. सरकार का उद्देश्य भारत में स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत टिकाऊ और टेक्‍नोलॉजी से चलने वाले शहरी केंद्रों को विकसित करना है. स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में संसाधनों की कैपेसिटी और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए ग्रीन टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है.
व्यवसायों को इंटरनेट से जुड़े उपकरणों जैसे सेंसर और प्लेटफार्मों में निवेश करके हरित इंटरनेट को बढ़ावा देने और लागू करने में एक आवश्यक भूमिका निभाने की जरूरत है जो स्थिरता को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं. इसके लिए व्‍यवसायिक संगठनों को आईओटी समाधान प्रदाताओं और स्टार्टअप्स के साथ जुड़ना होगा जो स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हैं और व्यवसाय के स्थिरता लक्ष्यों के साथ संरेखित होने वाले अनुकूलित आईओटी समाधानों को विकसित और आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ सहयोग करते हैं. 

क्‍या हो सकता है भविष्‍य का रास्‍ता 
बिजनेस और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को यह जांच करनी चाहिए कि वे कितनी ऊर्जा का उपयोग करते हैं, वे कितने गैर-बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उपयोग करते हैं, और वे सिस्टम और उत्पादों पर कितना भरोसा करते हैं. उन्‍हें ये भी देखना होगा कि वो कितने खतरनाक और हानिकारक उत्‍पादों को पर्यावरण में छोड़ते हैं. लेकिन एक कंपनी के मौजूदा सिस्‍टम में गैर-IoT से संबंधित प्रणालियों को अपडेट करके जहां वर्कफ़्लो को बढ़ाया जा सकता है वहीं दूसरी ओर ऊर्जा को भी बचाया जा सकता है. टेक-इनेबल्ड बिजनेस सॉल्यूशंस में स्थिरता के साथ-साथ विकास के लिए बिजनेस एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाने की क्षमता है. IoT समाधानों द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के विश्लेषणात्मक उपकरण डेटा कई तरह से बिजनेस की मदद कर सकते हैं. 
 


सोने में 6-8% की गिरावट के बाद आएगी बड़ी तेजी! MOFSL ने 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर का दिया लक्ष्य

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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सोने की कीमतों में निकट भविष्य में 6-8 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है, लेकिन इसके बाद इसमें जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) का अनुमान है कि अगले 12-15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. ब्रोकरेज ने निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी है.

MOFSL ने निवेशकों को दी चरणबद्ध खरीदारी की सलाह

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपनी H1 2026 प्रेशियस मेटल्स आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतों में निकट अवधि में 6-8 फीसदी का करेक्शन देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसके बाद अगले 12-15 महीनों में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को बाजार में निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध (Staggered) तरीके से निवेश करना चाहिए.

क्यों आ सकती है सोने में गिरावट?

MOFSL के मुताबिक, हाल के महीनों में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में बदलाव आया है. पहले भू-राजनीतिक तनाव से सोने में तेजी आती थी, लेकिन अब ऊंची महंगाई की आशंकाएं, वास्तविक ब्याज दरों (Real Interest Rates) में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) वाली मांग को कमजोर किया है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

रिपोर्ट के अनुसार, यदि डॉलर-रुपया विनिमय दर 95.5 रहती है, तो भारतीय निवेशकों के लिए 10 ग्राम सोने का 1.30 लाख से 1.33 लाख रुपये का स्तर खरीदारी के लिए उपयुक्त माना गया है. ब्रोकरेज ने मध्यम अवधि में 10 ग्राम सोने का लक्ष्य 1.68 लाख रुपये और इसके बाद 1.93 लाख रुपये तक रहने का अनुमान जताया है.

लंबी अवधि में क्यों मजबूत है सोने का आउटलुक?

MOFSL का मानना है कि अल्पकालिक कमजोरी के बावजूद सोने की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक साल में अमेरिकी महंगाई का रुख और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे.

ब्रोकरेज का कहना है कि जब तक वास्तविक ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती, तब तक सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, विकसित देशों में बढ़ता राजकोषीय दबाव और मुद्रा के अवमूल्यन (Currency Debasement) के खिलाफ सुरक्षा के रूप में सोने की मांग लंबी अवधि में इसे मजबूती देती रहेगी.

चांदी को लेकर बरतें सतर्कता

रिपोर्ट में चांदी को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. MOFSL के अनुसार, चांदी में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव रहता है क्योंकि इसकी कीमतें सुरक्षित निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग, खासकर वैश्विक इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेंड, से भी प्रभावित होती हैं.
 

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पेटीएम में ₹2,038 करोड़ का सौदा, दो बड़े निवेशकों ने बेची 2.33% हिस्सेदारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ब्लॉक डील डेटा के अनुसार, दोनों निवेशकों ने कुल 1.49 करोड़ (1,49,00,000) शेयर बेचे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशन्स (One 97 Communications) में बुधवार को 2,038 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई. शुरुआती निवेशकों एसएआईएफ पार्टनर्स (SAIF Partners) और एलिवेशन कैपिटल (Elevation Capital) ने ओपन मार्केट के जरिए अपनी संयुक्त 2.33 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी. इस सौदे में कई घरेलू म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और वैश्विक निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी.

Paytm में ₹2,038 करोड़ की ब्लॉक डील

डिजिटल पेमेंट कंपनी Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications में 2,038 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसएआईएफ पार्टनर्स और एलिवेशन कैपिटल ने ओपन मार्केट के जरिए कंपनी में अपनी संयुक्त 2.33 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ब्लॉक डील डेटा के अनुसार, दोनों निवेशकों ने कुल 1.49 करोड़ (1,49,00,000) शेयर बेचे.

किसने कितने शेयर बेचे?

SAIF III Mauritius Company Ltd और SAIF Partners India IV Ltd के जरिए SAIF Partners ने 1,38,79,743 शेयर बेचे. वहीं, Elevation Capital V Ltd ने 10,20,257 शेयरों की बिक्री की. यह सौदा औसतन 1,367.80 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ. इस तरह ब्लॉक डील का कुल आकार 2,038.02 करोड़ रुपये रहा.

किन निवेशकों ने खरीदे शेयर?

इस ब्लॉक डील में कई बड़े घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी. घरेलू खरीदारों में नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट (NPS Trust), सुंदरम म्यूचुअल फंड, महिंद्रा मैनुलाइफ म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस शामिल रहे.

वहीं, विदेशी निवेशकों में गोल्डमैन सैक्स बैंक, घिसालो कैपिटल मैनेजमेंट, सोशल प्रोटेक्शन फंड, सोसाइटी जेनरल, BNP Paribas Financial Markets और Susquehanna International Group ने भी इस सौदे में हिस्सेदारी खरीदी.

शेयर पर क्या रहा असर?

इतनी बड़ी ब्लॉक डील के बाद One 97 Communications का शेयर NSE पर करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 1,400 रुपये पर बंद हुआ था. वहीं आज शेयर में हल्की तेजी दिखाई दे रही है और यह 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,441.20 रुपये पर कारोबार कर रहा है. यह पहली बार नहीं है जब SAIF Partners ने Paytm में अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इससे पहले नवंबर 2025 में भी निवेशक ने ओपन मार्केट के जरिए कंपनी की 1.86 फीसदी हिस्सेदारी 1,556 करोड़ रुपये में बेची थी.


होर्मुज समझौते से संभले कच्चे तेल के दाम, ब्रेंट क्रूड फिर 80 डॉलर के करीब

ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग रूट पर सहमति बनाई है. यह व्यवस्था अगले दो से चार महीने तक लागू रह सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी. ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर हुए अस्थायी समझौते से सप्लाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं. इसके बाद ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में भी आधे फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई.

ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 0.54 फीसदी यानी 0.43 डॉलर की बढ़त के साथ 79.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. कारोबार के दौरान इसका उच्चतम स्तर 80.34 डॉलर और निचला स्तर 78.55 डॉलर प्रति बैरल रहा.

वहीं, सितंबर 2026 डिलीवरी वाला WTI क्रूड 0.52 फीसदी यानी 0.39 डॉलर की तेजी के साथ 75.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. दिन के कारोबार में इसकी कीमत 74.64 डॉलर से 76.02 डॉलर प्रति बैरल के बीच रही.

क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य समझौता?

ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग रूट पर सहमति बनाई है. यह व्यवस्था अगले दो से चार महीने तक लागू रह सकती है. हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया गया है. इस बीच अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के साथ व्यापक समझौते की संभावना बढ़ रही है. हालांकि, निवेशक अब भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.

पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार

सप्लाई को लेकर राहत की खबरों के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को निशाना बनाने का दावा किया है. इसके अलावा लाल सागर से गुजरने वाले अन्य जहाजों को भी चेतावनी दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और शिपिंग पर फिर दबाव बन सकता है.

बाजार की नजर इन ट्रिगर्स पर

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अस्थायी समझौते की अवधि, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात, OPEC+ के फैसलों और वैश्विक तेल मांग पर रहेगी. यही कारक आगे कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे.
 


Voda-Idea की FY27 पर बड़ी रणनीति, नेटवर्क विस्तार से कमाई बढ़ाने तक इन 3 मोर्चों पर रहेगा फोकस

कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी ग्रोथ रणनीति स्पष्ट कर दी है. आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि कंपनी अगले वित्त वर्ष में नेटवर्क विस्तार, ग्राहक अनुभव में सुधार और राजस्व बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी. उनका कहना है कि वित्त वर्ष 2026 चुनौतियों से उबरने का साल था, जबकि FY27 विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने का वर्ष होगा.

वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 जारी करते हुए शेयरधारकों को संबोधित करते हुए बिड़ला ने कहा कि कंपनी के सामने मौजूद अधिकांश बड़ी चुनौतियां अब पीछे छूट चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वोडाफोन-आइडिया को अपने प्रमोटर्स का पूरा समर्थन मिल रहा है, वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट है और कंपनी के पास निवेश करने की बेहतर क्षमता भी है. यही कारक आने वाले वर्षों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देंगे.

नियमित टैरिफ बढ़ोतरी की वकालत

कुमार मंगलम बिड़ला ने दूरसंचार क्षेत्र में समय-समय पर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, नेटवर्क में निवेश बनाए रखने और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विस्तार के लिए टेलीकॉम कंपनियों के पास पर्याप्त संसाधन होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय संचार नेटवर्क भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए बेहद अहम होंगे.

AGR विवाद में मिली राहत

वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 वोडाफोन-आइडिया के लिए महत्वपूर्ण रहा. इस दौरान कंपनी ने समायोजित सकल राजस्व (AGR) से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर प्रगति हासिल की. दूरसंचार विभाग (DoT) की समिति ने कंपनी का बकाया 64,046 करोड़ रुपये तय किया, जो पहले के अनुमान से कम है. साथ ही, इसके भुगतान के लिए दीर्घकालिक पुनर्भुगतान योजना भी तैयार की गई है.

FY26 में बढ़ा राजस्व और EBITDA

वित्त वर्ष 2026 में वोडाफोन-आइडिया का कुल राजस्व 3 फीसदी बढ़कर 44,873 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 43,571 करोड़ रुपये था. वहीं EBITDA 4.8 फीसदी बढ़कर 19,003 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 41.6 फीसदी से बढ़कर 43.1 फीसदी हो गया, जो बेहतर लागत प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि का संकेत देता है.

कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.
 


शेयर बाजार में फिर बढ़ेगा विदेशी निवेश? HSBC ने जताई 25 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद

ग्लोबल बैंक HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 06 August, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अब थमती दिखाई दे रही है. HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड मैनेजर अब AI-प्रधान एशियाई बाजारों में बढ़ती अस्थिरता से निकलकर भारत जैसे मजबूत आर्थिक बुनियाद वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड भारत में अपनी हिस्सेदारी को केवल 'न्यूट्रल' स्तर तक भी बढ़ाते हैं, तो भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आ सकता है.

80% से ज्यादा ग्लोबल फंड भारत में हैं अंडरवेट

HSBC के रणनीतिकार प्रेरणा गर्ग, हेराल्ड वैन डेर लिंडे और योगेश अग्रवाल के मुताबिक, 80 फीसदी से अधिक एक्टिव ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड फिलहाल भारत में 'अंडरवेट' यानी अपेक्षाकृत कम निवेश किए हुए हैं. उनका कहना है कि केवल इस स्थिति के सामान्य होने भर से भारतीय बाजार में 25 अरब डॉलर तक की नई विदेशी पूंजी आ सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI थीम के चलते विदेशी निवेश का जो रोटेशन हुआ था, उसका बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है.

भारत क्यों बन रहा है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद?

HSBC का मानना है कि AI आधारित बाजारों में तेजी से बढ़े वैल्यूएशन और अस्थिरता के कारण निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं. ऐसे में भारत मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिरता और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार, जून के मध्य से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार में करीब 6 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई.

किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा आया निवेश?

15 जून से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और हेल्थकेयर सेक्टर में किया. वहीं, दक्षिण कोरिया और ताइवान में पहले से भारी निवेश रखने वाले ग्लोबल फंड अब भारत और मुख्यभूमि चीन में भी अपना एक्सपोजर बढ़ाने लगे हैं.

HSBC का कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के मुकाबले भारत का बाजार अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है. इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारत की तुलना में लगभग चार गुना अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला.

घरेलू मांग और बेहतर नतीजों से मिल रहा सहारा

रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और म्यूचुअल फंड के जरिए लगातार हो रहा SIP निवेश भारतीय बाजार को मजबूती दे रहा है. जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट निवेश भी बढ़ा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का बड़ा योगदान रहा.

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली करीब 73 फीसदी कंपनियों ने बाजार की उम्मीदों के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत मिले हैं.

EPS ग्रोथ और वैल्यूएशन पर क्या है नजरिया?

HSBC के मुताबिक, जून में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.3 फीसदी पहुंच गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग भी उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. बैंक ने कमोडिटी, फाइनेंशियल, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर के लिए आय के अनुमान बढ़ाए हैं.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का वैल्यूएशन अभी भी अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले ऊंचा है, लेकिन ऐतिहासिक आधार पर यह अब अपने निचले दायरे के करीब पहुंच चुका है. खासकर फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक हो गए हैं.

HSBC को किन सेक्टर्स और शेयरों पर भरोसा?

HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है. बैंक की पसंद में फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, रिटेल, सर्विस, हॉस्पिटल, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिफिकेशन और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं.

HSBC के पसंदीदा शेयरों में ICICI बैंक, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, फीनिक्स मिल्स, फोर्टिस हेल्थकेयर, कमिंस इंडिया, सिरमा SGS टेक्नोलॉजी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं.
 

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RBI के फैसले के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों और ट्रिगर्स पर रखें नजर

बुधवार को BSE सेंसेक्स 152.05 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 78,581 पर बंद हुआ था, जबकि NSE एनएसई निफ्टी 9.75 अंक की मामूली तेजी के साथ 24,624.65 के स्तर पर बंद हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 06 August, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में आज निवेशकों की नजर पिछले कारोबारी सत्र की तेजी को आगे बढ़ने पर रहेगी. बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंत में सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए. ऐसे में आज के कारोबार में वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल, कंपनियों के तिमाही नतीजों और चुनिंदा शेयरों में होने वाली हलचल पर बाजार की नजर रहेगी.

RBI के फैसले के बाद बाजार ने दिखाई मजबूती

बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 152.05 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 78,581 पर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 9.75 अंक की मामूली तेजी के साथ 24,624.65 के स्तर पर बंद हुआ. डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ और 95.1175 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.3775 पर था.

इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा खरीदारी

पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के 30 में से 18 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. अल्ट्राटेक सीमेंट में 2% से अधिक की तेजी रही. इसके अलावा एनटीपीसी, एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, लार्सन एंड टुब्रो, इन्फोसिस और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर टीसीएस, एचसीएल टेक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और सन फार्मा के शेयर दबाव में रहे.

निफ्टी में किन सेक्टरों ने दिखाया दम?

निफ्टी-50 में बुधवार को श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू स्टील सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे. वहीं व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 0.18% और निफ्टी स्मॉलकैप 0.70% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में मेटल, रियल्टी और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि प्राइवेट बैंक और बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोरी रही.

आज किन ट्रिगर्स पर रहेगी बाजार की नजर?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिलने वाले संकेत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और घरेलू कॉरपोरेट अपडेट पर भी रहेगी.

इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

विशेषज्ञों ने बताया कि आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं. डाबर इंडिया पर USFDA के चेतावनी पत्र का असर देखने को मिल सकता है, जबकि भारती एयरटेल अपने टैरिफ बढ़ाने के संकेत और मजबूत जून तिमाही नतीजों के चलते चर्चा में रहेगी. इसके अलावा Cohance Lifesciences, Indian Bank, Meenakshi India और Sapphire Foods के शेयर भी बड़े निवेश, ब्लॉक डील और कारोबारी अपडेट के कारण निवेशकों के रडार पर रहेंगे. वहीं Alphabet (Google) में AI नेतृत्व से जुड़े बड़े बदलावों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी, जिसका असर टेक सेक्टर की धारणा पर पड़ सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


तमिलनाडु बजट 2026: रूफटॉप सोलर लगाने पर ₹1 लाख तक की सब्सिडी, बिजली ढांचे को मजबूत करने पर बड़ा फोकस

सरकार का कहना है कि इन निवेशों से राज्य में बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण होगा और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. बजट 2026 में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 1 लाख रुपये तक की राज्य सब्सिडी देने का ऐलान किया गया है. इस योजना के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह सब्सिडी केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता के अतिरिक्त होगी. इसके साथ ही बैटरी एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी हजारों करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है.

रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़ाने पर जोर

सरकार का लक्ष्य राज्य में रूफटॉप सोलर को तेजी से बढ़ावा देना है. जुलाई 2026 तक तमिलनाडु में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 316 मेगावाट रही, जबकि 1,03,004 घरों में 87,039 सोलर इंस्टॉलेशन किए जा चुके हैं. राज्य सरकार का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी क्षमता होने के बावजूद तमिलनाडु इस क्षेत्र में कई बड़े राज्यों से पीछे है.

बैटरी स्टोरेज के लिए नई नीति

बजट में बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रमोशन पॉलिसी लाने की घोषणा की गई है. इसका उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी.

स्मार्ट मीटर और बिजली नेटवर्क होगा मजबूत

सरकार चेन्नई के सभी बिजली उपभोक्ताओं के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में करीब 50 लाख औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना भी लागू करेगी. इसके अलावा, दक्षिण तमिलनाडु से नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर ट्रांसमिशन के लिए 1,187 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण पर काम शुरू किया जाएगा.

बिजली उत्पादन क्षमता में होगा इजाफा

सरकार उदनगुडी स्टेज-1 और एन्नोर SEZ थर्मल पावर परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाएगी. इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में 2,640 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी.

ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क पर हजारों करोड़ का निवेश

बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार 1,543 करोड़ रुपये की लागत से 178 नए सबस्टेशन बनाएगी. साथ ही चरणबद्ध तरीके से 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर 40,000 पुराने ट्रांसफॉर्मर बदले जाएंगे. इसके अलावा, कोयंबटूर और अरियालुर के बीच ट्रांसमिशन लाइन के लिए 4,000 करोड़ रुपये तथा विरुधुनगर-कोयंबटूर ट्रांसमिशन परियोजना के लिए 1,640 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

सरकार का कहना है कि इन निवेशों से राज्य में बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण होगा और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
 


चार साल में सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ा सर्विस सेक्टर, जुलाई में HSBC सर्विसेज PMI गिरकर 53.3 पर आया

सर्वे के अनुसार, ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ने, नए पूछताछ (Enquiries) घटने और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सर्विस सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार में तेज गिरावट आई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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जुलाई 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार सुस्त पड़ गई. HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून के 57.4 से गिरकर 53.3 पर आ गया, जो पिछले चार साल से अधिक समय का सबसे निचला स्तर है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी 50 के ऊपर है, जो गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है. 50 से नीचे का स्तर कारोबार में गिरावट को दर्शाता है. कमजोर घरेलू मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कारोबारी गतिविधियों और नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी रही, हालांकि निर्यात मांग और रोजगार में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया.

निजी क्षेत्र की रफ्तार भी हुई धीमी

ताजा PMI सर्वे के मुताबिक, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ पूरे निजी क्षेत्र की विकास दर भी कमजोर हुई. कारोबारी गतिविधियां, नए ऑर्डर और कारोबारी भरोसा सभी में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निर्यात मांग और रोजगार में बढ़ोतरी ने कुछ हद तक स्थिति को संभाले रखा. अंतिम PMI आंकड़ा शुरुआती अनुमान 53.1 से थोड़ा बेहतर रहा.

कमजोर मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर

सर्वे के अनुसार, ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ने, नए पूछताछ (Enquiries) घटने और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सर्विस सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार में तेज गिरावट आई. घरेलू मांग कमजोर रहने से नए कारोबार (New Business) की वृद्धि फरवरी 2022 के बाद सबसे धीमी रही. हालांकि, विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर मजबूत बने रहे. कंपनियों ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन (UK) और अमेरिका (US) जैसे प्रमुख बाजारों से निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली.

रोजगार में जारी रही बढ़ोतरी

कारोबारी गतिविधियों में सुस्ती के बावजूद सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने जुलाई में नई भर्तियां जारी रखीं. जून की तुलना में रोजगार वृद्धि में सुधार हुआ. कंपनियों ने मौजूदा कार्यभार संभालने और भविष्य की मांग को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई.

लागत का दबाव घटा, कीमतों में बढ़ोतरी जारी

जुलाई में इनपुट लागत (Input Cost) महंगाई जनवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई, जिससे कंपनियों को कुछ राहत मिली. इसके बावजूद सर्विस कंपनियों ने अपनी सेवाओं की कीमतों में अप्रैल के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी की.

सात महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कारोबारी भरोसा

जुलाई में कंपनियों का कारोबारी भरोसा (Business Confidence) घटकर सात महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया. निकट भविष्य में मांग को लेकर कंपनियां पहले के मुकाबले अधिक सतर्क नजर आईं. हालांकि, सर्वे में शामिल कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार की स्थिति में सुधार और ग्राहकों की बढ़ती मांग के चलते अगले एक साल में कारोबार की रफ्तार फिर मजबूत हो सकती है.
 


जून तिमाही में एयरटेल की दमदार कमाई, मुनाफा ₹8,167 करोड़ पहुंचा, आय ने तोड़े अनुमान

कंपनी की कुल आय पहली बार 58,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, जो बाजार के अनुमान से बेहतर रही.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 11.5 फीसदी बढ़कर 8,167 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि यह बाजार के 8,374 करोड़ रुपये के अनुमान से थोड़ा कम रहा, लेकिन कंपनी की आय उम्मीदों से बेहतर रही.

तिमाही के दौरान एयरटेल का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5.7 फीसदी बढ़कर 58,539 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि बाजार को 57,054 करोड़ रुपये की उम्मीद थी. वहीं EBITDA 6.7 फीसदी की बढ़त के साथ 33,599 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन बढ़कर 57.4 फीसदी पर पहुंच गया.

रिकॉर्ड संख्या में जुड़े पोस्टपेड ग्राहक

जून तिमाही एयरटेल के लिए ग्राहक जोड़ने के लिहाज से भी ऐतिहासिक रही. कंपनी ने सिर्फ तीन महीनों में 10 लाख नए पोस्टपेड ग्राहक जोड़े, जो किसी एक तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा है. इसके अलावा 50 लाख नए स्मार्टफोन यूजर भी एयरटेल नेटवर्क से जुड़े.

अब कंपनी के कुल मोबाइल ग्राहकों में करीब 80 फीसदी स्मार्टफोन यूजर हैं. इसी का असर प्रति ग्राहक औसत आय (ARPU) पर भी दिखा, जो एक साल पहले के 250 रुपये से बढ़कर 264 रुपये हो गई. वहीं प्रति ग्राहक मासिक डेटा खपत 36 फीसदी बढ़कर 34.4 GB तक पहुंच गई.

ब्रॉडबैंड और अफ्रीका कारोबार ने भी दिखाई मजबूती

मोबाइल सेवाओं के अलावा एयरटेल का होम ब्रॉडबैंड कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है. इस सेगमेंट का रेवेन्यू 4.4 फीसदी बढ़ा. पिछले एक साल में कंपनी ने 37 लाख नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े, जिनमें से 4.73 लाख ग्राहक सिर्फ जून तिमाही में जुड़े.

एयरटेल बिजनेस की आय में 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं अफ्रीका कारोबार ने स्थिर मुद्रा के आधार पर 5.7 फीसदी की ग्रोथ हासिल की. हाल ही में शेयर स्वैप डील के बाद कंपनी ने अफ्रीका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 79 फीसदी से अधिक कर ली है.

नेटवर्क विस्तार पर 13,386 करोड़ रुपये का निवेश

नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए एयरटेल ने जून तिमाही में 13,386 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश (Capex) किया. इसमें से 9,698 करोड़ रुपये केवल भारत में खर्च किए गए, जिससे 4G और 5G नेटवर्क विस्तार को गति मिली.

 


संदीप बत्रा का ग्लोबल लीडरशिप मॉडल: कैसे HSBC के जरिए भारत की बढ़ती संपदा को दुनिया से जोड़ रहे हैं बैंकिंग दिग्गज

25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और भारत के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा का करियर वैश्विक अनुभव और ग्राहक-केंद्रित सोच का अनूठा उदाहरण है.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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भारत में वेल्थ मैनेजमेंट और प्रीमियम बैंकिंग को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा आज यानी 05 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और वैश्विक वित्तीय बाजारों की गहरी समझ रखने वाले बत्रा ने अपने करियर में भारत की बढ़ती संपदा को दुनिया के वित्तीय अवसरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है. उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए जानते हैं उनके अब तक के पेशेवर सफर और नेतृत्व की खास बातें.

संदीप बत्रा का बैंकिंग करियर देशों, संस्कृतियों और जटिल वित्तीय बाजारों के बीच लगातार आगे बढ़ने की कहानी है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह रही है कि उन्होंने हर बाजार में ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए भविष्य के अवसरों को समय रहते पहचाना और उसी के अनुरूप कारोबार को आगे बढ़ाया.

वर्तमान में वह HSBC इंडिया में मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग के रूप में कार्यरत हैं. ऐसे समय में जब भारत तेजी से संपन्न अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और नए निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, बत्रा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. आज भारत के संपन्न ग्राहक पहले की तुलना में अधिक युवा, वैश्विक सोच रखने वाले और निवेश के प्रति जागरूक हैं. ऐसे ग्राहकों को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से जोड़ने के लिए सिर्फ बैंकिंग उत्पाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बदलती आर्थिक जरूरतों की समझ भी जरूरी है.

25 साल का अनुभव, 12 शहर और 5 देशों में नेतृत्व

संदीप बत्रा के पास बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. इस दौरान उन्होंने 12 शहरों और पांच देशों में काम किया, जिनमें से लगभग 18 वर्ष उन्होंने भारत से बाहर बिताए. वह स्वयं अपने मुंबई स्थित वर्तमान घर को अपना 25वां निवास बताते हैं, जो उनके वैश्विक करियर की व्यापकता को दर्शाता है.

भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु के पूर्व छात्र बत्रा ने HSBC से जुड़ने से पहले 15 वर्षों से अधिक समय तक सिटी (Citi) के साथ काम किया. अगस्त 2022 में उन्होंने HSBC इंडिया का कार्यभार संभाला.

रूस और थाईलैंड में निभाई अहम जिम्मेदारियां

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान संदीप बत्रा ने रूस में सिटीबैंक के कंज्यूमर बैंकिंग कारोबार का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने तेजी से बदलते आर्थिक माहौल में व्यवसाय को आगे बढ़ाया. इसके अलावा थाईलैंड में उन्होंने कार्ड्स और लेंडिंग बिजनेस का नेतृत्व किया.

थाईलैंड में उन्होंने पारंपरिक बैंकिंग और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों और डिजिटल वॉलेट्स के साथ साझेदारियां विकसित कीं. इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि तकनीक, सुविधा और ग्राहकों की बदलती जीवनशैली किस तरह बैंकिंग सेवाओं को नया स्वरूप दे रही है.

भारत की बढ़ती वेल्थ इकोनॉमी पर HSBC का बड़ा दांव

HSBC इंडिया में संदीप बत्रा के नेतृत्व में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, क्रेडिट कार्ड, होम लोन, पर्सनल लोन, एसेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसे कई महत्वपूर्ण कारोबार आते हैं.

उनके कार्यकाल में HSBC ने भारत के संपन्न और वैश्विक ग्राहकों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है. वर्ष 2025 में बैंक को 20 नए शहरों में शाखाएं खोलने की नियामकीय मंजूरी मिली. इससे HSBC का नेटवर्क 14 शहरों में 26 शाखाओं से बढ़कर 46 शाखाओं तक पहुंचने की संभावना है.

यह विस्तार सिर्फ शाखाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के उभरते आर्थिक केंद्रों तक वैश्विक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना भी है.

ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई पहल

संदीप बत्रा की अगुवाई में HSBC ने ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई नई पहल की हैं. इनमें HSBC Premier सेवाओं को मजबूत करना, रिवॉर्ड्स मार्केटप्लेस को अपग्रेड करना और संपन्न भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप नई साझेदारियां विकसित करना शामिल है.

आज प्रीमियम बैंकिंग सिर्फ निवेश उत्पादों तक सीमित नहीं रह गई है. ग्राहक डिजिटल सुविधा, वैश्विक बैंकिंग एक्सेस, व्यक्तिगत वित्तीय सलाह और बेहतर लाइफस्टाइल सेवाओं की भी अपेक्षा करते हैं. बत्रा की रणनीति इन्हीं बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.

तकनीक के साथ मानवीय नेतृत्व पर भी जोर

तकनीकी बदलावों के दौर में भी संदीप बत्रा लोगों को केंद्र में रखने वाले नेतृत्व में विश्वास करते हैं. उन्हें सहयोगी और समावेशी कार्य संस्कृति विकसित करने तथा बैंकिंग क्षेत्र के भविष्य के नेताओं को तैयार करने के लिए जाना जाता है.

उनका मानना है कि बैंकिंग भले ही तेजी से डिजिटल होती जा रही हो, लेकिन ग्राहकों का भरोसा, उनकी वित्तीय सुरक्षा और जीवन के बड़े फैसले आज भी मानवीय समझ और संवेदनशीलता पर ही आधारित होते हैं.

वैश्विक अनुभव और स्थानीय समझ का संतुलन

संदीप बत्रा का करियर यह दिखाता है कि अलग-अलग देशों में सफल नेतृत्व के लिए एक ही मॉडल हर जगह काम नहीं करता. इसके लिए स्थानीय संस्कृति, ग्राहकों की जरूरतों और आर्थिक परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है. भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है. ऐसे समय में बत्रा जैसे नेतृत्वकर्ता, जो अंतरराष्ट्रीय अनुभव को भारतीय बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ सकें, भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक का अनुभव, कई वैश्विक बाजारों में नेतृत्व और भारत में HSBC की वेल्थ बैंकिंग रणनीति को नई दिशा देने में उनकी भूमिका उन्हें देश के प्रमुख बैंकिंग नेताओं में शामिल करती है. उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह वैश्विक सोच के साथ ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ते हैं.

उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके अब तक के सफर को सलाम करते हुए यही कामना है कि वे आने वाले वर्षों में भी बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते रहें.