कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी ग्रोथ रणनीति स्पष्ट कर दी है. आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि कंपनी अगले वित्त वर्ष में नेटवर्क विस्तार, ग्राहक अनुभव में सुधार और राजस्व बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी. उनका कहना है कि वित्त वर्ष 2026 चुनौतियों से उबरने का साल था, जबकि FY27 विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने का वर्ष होगा.
वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 जारी करते हुए शेयरधारकों को संबोधित करते हुए बिड़ला ने कहा कि कंपनी के सामने मौजूद अधिकांश बड़ी चुनौतियां अब पीछे छूट चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वोडाफोन-आइडिया को अपने प्रमोटर्स का पूरा समर्थन मिल रहा है, वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट है और कंपनी के पास निवेश करने की बेहतर क्षमता भी है. यही कारक आने वाले वर्षों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देंगे.
नियमित टैरिफ बढ़ोतरी की वकालत
कुमार मंगलम बिड़ला ने दूरसंचार क्षेत्र में समय-समय पर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, नेटवर्क में निवेश बनाए रखने और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विस्तार के लिए टेलीकॉम कंपनियों के पास पर्याप्त संसाधन होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय संचार नेटवर्क भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए बेहद अहम होंगे.
AGR विवाद में मिली राहत
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 वोडाफोन-आइडिया के लिए महत्वपूर्ण रहा. इस दौरान कंपनी ने समायोजित सकल राजस्व (AGR) से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर प्रगति हासिल की. दूरसंचार विभाग (DoT) की समिति ने कंपनी का बकाया 64,046 करोड़ रुपये तय किया, जो पहले के अनुमान से कम है. साथ ही, इसके भुगतान के लिए दीर्घकालिक पुनर्भुगतान योजना भी तैयार की गई है.
FY26 में बढ़ा राजस्व और EBITDA
वित्त वर्ष 2026 में वोडाफोन-आइडिया का कुल राजस्व 3 फीसदी बढ़कर 44,873 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 43,571 करोड़ रुपये था. वहीं EBITDA 4.8 फीसदी बढ़कर 19,003 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 41.6 फीसदी से बढ़कर 43.1 फीसदी हो गया, जो बेहतर लागत प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि का संकेत देता है.
कंपनी को उम्मीद है कि नेटवर्क में निवेश, बेहतर ग्राहक अनुभव और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर वह आने वाले वर्षों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगी.
ग्लोबल बैंक HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अब थमती दिखाई दे रही है. HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल फंड मैनेजर अब AI-प्रधान एशियाई बाजारों में बढ़ती अस्थिरता से निकलकर भारत जैसे मजबूत आर्थिक बुनियाद वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड भारत में अपनी हिस्सेदारी को केवल 'न्यूट्रल' स्तर तक भी बढ़ाते हैं, तो भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आ सकता है.
80% से ज्यादा ग्लोबल फंड भारत में हैं अंडरवेट
HSBC के रणनीतिकार प्रेरणा गर्ग, हेराल्ड वैन डेर लिंडे और योगेश अग्रवाल के मुताबिक, 80 फीसदी से अधिक एक्टिव ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड फिलहाल भारत में 'अंडरवेट' यानी अपेक्षाकृत कम निवेश किए हुए हैं. उनका कहना है कि केवल इस स्थिति के सामान्य होने भर से भारतीय बाजार में 25 अरब डॉलर तक की नई विदेशी पूंजी आ सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI थीम के चलते विदेशी निवेश का जो रोटेशन हुआ था, उसका बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है.
भारत क्यों बन रहा है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद?
HSBC का मानना है कि AI आधारित बाजारों में तेजी से बढ़े वैल्यूएशन और अस्थिरता के कारण निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं. ऐसे में भारत मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिरता और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार, जून के मध्य से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3.6 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार में करीब 6 फीसदी की तेजी भी दर्ज की गई.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा आया निवेश?
15 जून से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और हेल्थकेयर सेक्टर में किया. वहीं, दक्षिण कोरिया और ताइवान में पहले से भारी निवेश रखने वाले ग्लोबल फंड अब भारत और मुख्यभूमि चीन में भी अपना एक्सपोजर बढ़ाने लगे हैं.
HSBC का कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के मुकाबले भारत का बाजार अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है. इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारत की तुलना में लगभग चार गुना अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
घरेलू मांग और बेहतर नतीजों से मिल रहा सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और म्यूचुअल फंड के जरिए लगातार हो रहा SIP निवेश भारतीय बाजार को मजबूती दे रहा है. जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट निवेश भी बढ़ा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का बड़ा योगदान रहा.
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली करीब 73 फीसदी कंपनियों ने बाजार की उम्मीदों के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत मिले हैं.
EPS ग्रोथ और वैल्यूएशन पर क्या है नजरिया?
HSBC के मुताबिक, जून में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.3 फीसदी पहुंच गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग भी उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. बैंक ने कमोडिटी, फाइनेंशियल, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर के लिए आय के अनुमान बढ़ाए हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का वैल्यूएशन अभी भी अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले ऊंचा है, लेकिन ऐतिहासिक आधार पर यह अब अपने निचले दायरे के करीब पहुंच चुका है. खासकर फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक हो गए हैं.
HSBC को किन सेक्टर्स और शेयरों पर भरोसा?
HSBC ने भारत की रेटिंग को 'न्यूट्रल' किया है और घरेलू मांग पर आधारित उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी है. बैंक की पसंद में फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, रिटेल, सर्विस, हॉस्पिटल, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिफिकेशन और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं.
HSBC के पसंदीदा शेयरों में ICICI बैंक, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, फीनिक्स मिल्स, फोर्टिस हेल्थकेयर, कमिंस इंडिया, सिरमा SGS टेक्नोलॉजी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं.
बुधवार को BSE सेंसेक्स 152.05 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 78,581 पर बंद हुआ था, जबकि NSE एनएसई निफ्टी 9.75 अंक की मामूली तेजी के साथ 24,624.65 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में आज निवेशकों की नजर पिछले कारोबारी सत्र की तेजी को आगे बढ़ने पर रहेगी. बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंत में सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए. ऐसे में आज के कारोबार में वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल, कंपनियों के तिमाही नतीजों और चुनिंदा शेयरों में होने वाली हलचल पर बाजार की नजर रहेगी.
RBI के फैसले के बाद बाजार ने दिखाई मजबूती
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 152.05 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 78,581 पर बंद हुआ था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 9.75 अंक की मामूली तेजी के साथ 24,624.65 के स्तर पर बंद हुआ. डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ और 95.1175 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.3775 पर था.
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा खरीदारी
पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के 30 में से 18 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. अल्ट्राटेक सीमेंट में 2% से अधिक की तेजी रही. इसके अलावा एनटीपीसी, एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, लार्सन एंड टुब्रो, इन्फोसिस और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर टीसीएस, एचसीएल टेक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और सन फार्मा के शेयर दबाव में रहे.
निफ्टी में किन सेक्टरों ने दिखाया दम?
निफ्टी-50 में बुधवार को श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू स्टील सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे. वहीं व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 0.18% और निफ्टी स्मॉलकैप 0.70% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में मेटल, रियल्टी और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि प्राइवेट बैंक और बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोरी रही.
आज किन ट्रिगर्स पर रहेगी बाजार की नजर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिलने वाले संकेत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और घरेलू कॉरपोरेट अपडेट पर भी रहेगी.
इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
विशेषज्ञों ने बताया कि आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं. डाबर इंडिया पर USFDA के चेतावनी पत्र का असर देखने को मिल सकता है, जबकि भारती एयरटेल अपने टैरिफ बढ़ाने के संकेत और मजबूत जून तिमाही नतीजों के चलते चर्चा में रहेगी. इसके अलावा Cohance Lifesciences, Indian Bank, Meenakshi India और Sapphire Foods के शेयर भी बड़े निवेश, ब्लॉक डील और कारोबारी अपडेट के कारण निवेशकों के रडार पर रहेंगे. वहीं Alphabet (Google) में AI नेतृत्व से जुड़े बड़े बदलावों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी, जिसका असर टेक सेक्टर की धारणा पर पड़ सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार का कहना है कि इन निवेशों से राज्य में बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण होगा और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. बजट 2026 में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 1 लाख रुपये तक की राज्य सब्सिडी देने का ऐलान किया गया है. इस योजना के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह सब्सिडी केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता के अतिरिक्त होगी. इसके साथ ही बैटरी एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी हजारों करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है.
रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़ाने पर जोर
सरकार का लक्ष्य राज्य में रूफटॉप सोलर को तेजी से बढ़ावा देना है. जुलाई 2026 तक तमिलनाडु में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 316 मेगावाट रही, जबकि 1,03,004 घरों में 87,039 सोलर इंस्टॉलेशन किए जा चुके हैं. राज्य सरकार का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी क्षमता होने के बावजूद तमिलनाडु इस क्षेत्र में कई बड़े राज्यों से पीछे है.
बैटरी स्टोरेज के लिए नई नीति
बजट में बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रमोशन पॉलिसी लाने की घोषणा की गई है. इसका उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी.
स्मार्ट मीटर और बिजली नेटवर्क होगा मजबूत
सरकार चेन्नई के सभी बिजली उपभोक्ताओं के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में करीब 50 लाख औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना भी लागू करेगी. इसके अलावा, दक्षिण तमिलनाडु से नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर ट्रांसमिशन के लिए 1,187 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण पर काम शुरू किया जाएगा.
बिजली उत्पादन क्षमता में होगा इजाफा
सरकार उदनगुडी स्टेज-1 और एन्नोर SEZ थर्मल पावर परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाएगी. इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में 2,640 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी.
ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क पर हजारों करोड़ का निवेश
बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार 1,543 करोड़ रुपये की लागत से 178 नए सबस्टेशन बनाएगी. साथ ही चरणबद्ध तरीके से 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर 40,000 पुराने ट्रांसफॉर्मर बदले जाएंगे. इसके अलावा, कोयंबटूर और अरियालुर के बीच ट्रांसमिशन लाइन के लिए 4,000 करोड़ रुपये तथा विरुधुनगर-कोयंबटूर ट्रांसमिशन परियोजना के लिए 1,640 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
सरकार का कहना है कि इन निवेशों से राज्य में बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण होगा और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
सर्वे के अनुसार, ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ने, नए पूछताछ (Enquiries) घटने और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सर्विस सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार में तेज गिरावट आई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जुलाई 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार सुस्त पड़ गई. HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून के 57.4 से गिरकर 53.3 पर आ गया, जो पिछले चार साल से अधिक समय का सबसे निचला स्तर है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी 50 के ऊपर है, जो गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है. 50 से नीचे का स्तर कारोबार में गिरावट को दर्शाता है. कमजोर घरेलू मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कारोबारी गतिविधियों और नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी रही, हालांकि निर्यात मांग और रोजगार में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया.
निजी क्षेत्र की रफ्तार भी हुई धीमी
ताजा PMI सर्वे के मुताबिक, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ पूरे निजी क्षेत्र की विकास दर भी कमजोर हुई. कारोबारी गतिविधियां, नए ऑर्डर और कारोबारी भरोसा सभी में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निर्यात मांग और रोजगार में बढ़ोतरी ने कुछ हद तक स्थिति को संभाले रखा. अंतिम PMI आंकड़ा शुरुआती अनुमान 53.1 से थोड़ा बेहतर रहा.
कमजोर मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर
सर्वे के अनुसार, ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ने, नए पूछताछ (Enquiries) घटने और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सर्विस सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार में तेज गिरावट आई. घरेलू मांग कमजोर रहने से नए कारोबार (New Business) की वृद्धि फरवरी 2022 के बाद सबसे धीमी रही. हालांकि, विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर मजबूत बने रहे. कंपनियों ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन (UK) और अमेरिका (US) जैसे प्रमुख बाजारों से निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली.
रोजगार में जारी रही बढ़ोतरी
कारोबारी गतिविधियों में सुस्ती के बावजूद सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने जुलाई में नई भर्तियां जारी रखीं. जून की तुलना में रोजगार वृद्धि में सुधार हुआ. कंपनियों ने मौजूदा कार्यभार संभालने और भविष्य की मांग को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई.
लागत का दबाव घटा, कीमतों में बढ़ोतरी जारी
जुलाई में इनपुट लागत (Input Cost) महंगाई जनवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई, जिससे कंपनियों को कुछ राहत मिली. इसके बावजूद सर्विस कंपनियों ने अपनी सेवाओं की कीमतों में अप्रैल के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी की.
सात महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कारोबारी भरोसा
जुलाई में कंपनियों का कारोबारी भरोसा (Business Confidence) घटकर सात महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया. निकट भविष्य में मांग को लेकर कंपनियां पहले के मुकाबले अधिक सतर्क नजर आईं. हालांकि, सर्वे में शामिल कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार की स्थिति में सुधार और ग्राहकों की बढ़ती मांग के चलते अगले एक साल में कारोबार की रफ्तार फिर मजबूत हो सकती है.
कंपनी की कुल आय पहली बार 58,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, जो बाजार के अनुमान से बेहतर रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 11.5 फीसदी बढ़कर 8,167 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि यह बाजार के 8,374 करोड़ रुपये के अनुमान से थोड़ा कम रहा, लेकिन कंपनी की आय उम्मीदों से बेहतर रही.
तिमाही के दौरान एयरटेल का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5.7 फीसदी बढ़कर 58,539 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि बाजार को 57,054 करोड़ रुपये की उम्मीद थी. वहीं EBITDA 6.7 फीसदी की बढ़त के साथ 33,599 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन बढ़कर 57.4 फीसदी पर पहुंच गया.
रिकॉर्ड संख्या में जुड़े पोस्टपेड ग्राहक
जून तिमाही एयरटेल के लिए ग्राहक जोड़ने के लिहाज से भी ऐतिहासिक रही. कंपनी ने सिर्फ तीन महीनों में 10 लाख नए पोस्टपेड ग्राहक जोड़े, जो किसी एक तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा है. इसके अलावा 50 लाख नए स्मार्टफोन यूजर भी एयरटेल नेटवर्क से जुड़े.
अब कंपनी के कुल मोबाइल ग्राहकों में करीब 80 फीसदी स्मार्टफोन यूजर हैं. इसी का असर प्रति ग्राहक औसत आय (ARPU) पर भी दिखा, जो एक साल पहले के 250 रुपये से बढ़कर 264 रुपये हो गई. वहीं प्रति ग्राहक मासिक डेटा खपत 36 फीसदी बढ़कर 34.4 GB तक पहुंच गई.
ब्रॉडबैंड और अफ्रीका कारोबार ने भी दिखाई मजबूती
मोबाइल सेवाओं के अलावा एयरटेल का होम ब्रॉडबैंड कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है. इस सेगमेंट का रेवेन्यू 4.4 फीसदी बढ़ा. पिछले एक साल में कंपनी ने 37 लाख नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े, जिनमें से 4.73 लाख ग्राहक सिर्फ जून तिमाही में जुड़े.
एयरटेल बिजनेस की आय में 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं अफ्रीका कारोबार ने स्थिर मुद्रा के आधार पर 5.7 फीसदी की ग्रोथ हासिल की. हाल ही में शेयर स्वैप डील के बाद कंपनी ने अफ्रीका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 79 फीसदी से अधिक कर ली है.
नेटवर्क विस्तार पर 13,386 करोड़ रुपये का निवेश
नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए एयरटेल ने जून तिमाही में 13,386 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश (Capex) किया. इसमें से 9,698 करोड़ रुपये केवल भारत में खर्च किए गए, जिससे 4G और 5G नेटवर्क विस्तार को गति मिली.
25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और भारत के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा का करियर वैश्विक अनुभव और ग्राहक-केंद्रित सोच का अनूठा उदाहरण है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में वेल्थ मैनेजमेंट और प्रीमियम बैंकिंग को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा आज यानी 05 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और वैश्विक वित्तीय बाजारों की गहरी समझ रखने वाले बत्रा ने अपने करियर में भारत की बढ़ती संपदा को दुनिया के वित्तीय अवसरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है. उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए जानते हैं उनके अब तक के पेशेवर सफर और नेतृत्व की खास बातें.
संदीप बत्रा का बैंकिंग करियर देशों, संस्कृतियों और जटिल वित्तीय बाजारों के बीच लगातार आगे बढ़ने की कहानी है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह रही है कि उन्होंने हर बाजार में ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए भविष्य के अवसरों को समय रहते पहचाना और उसी के अनुरूप कारोबार को आगे बढ़ाया.
वर्तमान में वह HSBC इंडिया में मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग के रूप में कार्यरत हैं. ऐसे समय में जब भारत तेजी से संपन्न अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और नए निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, बत्रा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. आज भारत के संपन्न ग्राहक पहले की तुलना में अधिक युवा, वैश्विक सोच रखने वाले और निवेश के प्रति जागरूक हैं. ऐसे ग्राहकों को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से जोड़ने के लिए सिर्फ बैंकिंग उत्पाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बदलती आर्थिक जरूरतों की समझ भी जरूरी है.
25 साल का अनुभव, 12 शहर और 5 देशों में नेतृत्व
संदीप बत्रा के पास बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. इस दौरान उन्होंने 12 शहरों और पांच देशों में काम किया, जिनमें से लगभग 18 वर्ष उन्होंने भारत से बाहर बिताए. वह स्वयं अपने मुंबई स्थित वर्तमान घर को अपना 25वां निवास बताते हैं, जो उनके वैश्विक करियर की व्यापकता को दर्शाता है.
भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु के पूर्व छात्र बत्रा ने HSBC से जुड़ने से पहले 15 वर्षों से अधिक समय तक सिटी (Citi) के साथ काम किया. अगस्त 2022 में उन्होंने HSBC इंडिया का कार्यभार संभाला.
रूस और थाईलैंड में निभाई अहम जिम्मेदारियां
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान संदीप बत्रा ने रूस में सिटीबैंक के कंज्यूमर बैंकिंग कारोबार का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने तेजी से बदलते आर्थिक माहौल में व्यवसाय को आगे बढ़ाया. इसके अलावा थाईलैंड में उन्होंने कार्ड्स और लेंडिंग बिजनेस का नेतृत्व किया.
थाईलैंड में उन्होंने पारंपरिक बैंकिंग और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों और डिजिटल वॉलेट्स के साथ साझेदारियां विकसित कीं. इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि तकनीक, सुविधा और ग्राहकों की बदलती जीवनशैली किस तरह बैंकिंग सेवाओं को नया स्वरूप दे रही है.
भारत की बढ़ती वेल्थ इकोनॉमी पर HSBC का बड़ा दांव
HSBC इंडिया में संदीप बत्रा के नेतृत्व में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, क्रेडिट कार्ड, होम लोन, पर्सनल लोन, एसेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसे कई महत्वपूर्ण कारोबार आते हैं.
उनके कार्यकाल में HSBC ने भारत के संपन्न और वैश्विक ग्राहकों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है. वर्ष 2025 में बैंक को 20 नए शहरों में शाखाएं खोलने की नियामकीय मंजूरी मिली. इससे HSBC का नेटवर्क 14 शहरों में 26 शाखाओं से बढ़कर 46 शाखाओं तक पहुंचने की संभावना है.
यह विस्तार सिर्फ शाखाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के उभरते आर्थिक केंद्रों तक वैश्विक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना भी है.
ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई पहल
संदीप बत्रा की अगुवाई में HSBC ने ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई नई पहल की हैं. इनमें HSBC Premier सेवाओं को मजबूत करना, रिवॉर्ड्स मार्केटप्लेस को अपग्रेड करना और संपन्न भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप नई साझेदारियां विकसित करना शामिल है.
आज प्रीमियम बैंकिंग सिर्फ निवेश उत्पादों तक सीमित नहीं रह गई है. ग्राहक डिजिटल सुविधा, वैश्विक बैंकिंग एक्सेस, व्यक्तिगत वित्तीय सलाह और बेहतर लाइफस्टाइल सेवाओं की भी अपेक्षा करते हैं. बत्रा की रणनीति इन्हीं बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
तकनीक के साथ मानवीय नेतृत्व पर भी जोर
तकनीकी बदलावों के दौर में भी संदीप बत्रा लोगों को केंद्र में रखने वाले नेतृत्व में विश्वास करते हैं. उन्हें सहयोगी और समावेशी कार्य संस्कृति विकसित करने तथा बैंकिंग क्षेत्र के भविष्य के नेताओं को तैयार करने के लिए जाना जाता है.
उनका मानना है कि बैंकिंग भले ही तेजी से डिजिटल होती जा रही हो, लेकिन ग्राहकों का भरोसा, उनकी वित्तीय सुरक्षा और जीवन के बड़े फैसले आज भी मानवीय समझ और संवेदनशीलता पर ही आधारित होते हैं.
वैश्विक अनुभव और स्थानीय समझ का संतुलन
संदीप बत्रा का करियर यह दिखाता है कि अलग-अलग देशों में सफल नेतृत्व के लिए एक ही मॉडल हर जगह काम नहीं करता. इसके लिए स्थानीय संस्कृति, ग्राहकों की जरूरतों और आर्थिक परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है. भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है. ऐसे समय में बत्रा जैसे नेतृत्वकर्ता, जो अंतरराष्ट्रीय अनुभव को भारतीय बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ सकें, भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक का अनुभव, कई वैश्विक बाजारों में नेतृत्व और भारत में HSBC की वेल्थ बैंकिंग रणनीति को नई दिशा देने में उनकी भूमिका उन्हें देश के प्रमुख बैंकिंग नेताओं में शामिल करती है. उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह वैश्विक सोच के साथ ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ते हैं.
उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके अब तक के सफर को सलाम करते हुए यही कामना है कि वे आने वाले वर्षों में भी बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते रहें.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उम्मीद के अनुरूप है, जबकि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इसे निवेश, मांग और विकास के लिहाज से सकारात्मक बताया है.
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रितु राणा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखते हुए 'न्यूट्रल' रुख कायम रखा है. साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जबकि महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. RBI का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते सतर्कता जरूरी है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उम्मीद के अनुरूप है, जबकि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इसे निवेश, मांग और विकास के लिहाज से सकारात्मक बताया है.
रेपो रेट पर यथास्थिति, सभी प्रमुख दरें भी बरकरार
तीन से पांच अगस्त तक चली MPC बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया. इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि समिति ने घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई, वृद्धि और वित्तीय बाजारों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है.
GDP पर भरोसा, महंगाई पर सतर्कता
RBI ने FY27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. वहीं CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा गया है. गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है. मैन्युफैक्चरिंग, निजी खपत और विवेकाधीन खर्च में मजबूती देखने को मिली है. हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण आगे भी सतर्क रहने की जरूरत है. RBI का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें नरमी आएगी.
रियल एस्टेट सेक्टर ने फैसले को बताया 'डिमांड बूस्टर'
RBI के फैसले का सबसे सकारात्मक असर रियल एस्टेट सेक्टर ने देखा. M3M इंडिया के निदेशक यतीश वहाल ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों से होम लोन की लागत में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और एंड-यूजर डिमांड मजबूत होगी. वहीं डेवलपर्स को निवेश और परियोजनाओं की योजना बेहतर तरीके से बनाने में मदद मिलेगी.
लोहिया वर्ल्डस्पेस के प्रबंध निदेशक पीयूष लोहिया का कहना है कि RBI ने विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलित रुख अपनाया है. उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में नरमी आने की उम्मीद रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. इससे मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मांग को बल मिलेगा.
डेवलपर्स बोले- खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार
अनहद डेवलपर्स के CEO आदिल अल्ताफ ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदना आसान होगा और डेवलपर्स को लागत में अचानक बदलाव की चिंता नहीं रहेगी. इससे परियोजनाओं की बेहतर प्लानिंग और समय पर डिलीवरी संभव होगी.
पायनियर अर्बन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों और बेहतर लिक्विडिटी से डेवलपर्स के लिए नई परियोजनाएं शुरू करना आसान होगा, जबकि खरीदारों का भरोसा भी मजबूत रहेगा.
वहीं, रॉयल ग्रीन रियल्टी के प्रबंध निदेशक यशांक वासन ने कहा कि EMI में स्थिरता से घर खरीदने का विश्वास बढ़ेगा और डेवलपर्स को नई परियोजनाओं की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी.
बाजार में भरोसा और निवेश दोनों बढ़ेंगे
जिंदल रियल्टी के CEO एवं प्रेसिडेंट अभय मिश्रा का कहना है कि स्थिर ब्याज दरें रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत हैं. यदि आगे भी सरकार की नीतियों का समर्थन और पर्याप्त लिक्विडिटी मिलती रही तो निवेश और मांग दोनों में तेजी आएगी.
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी ने कहा कि यह फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने का संकेत है. आज खरीदार सिर्फ घर नहीं बल्कि बेहतर जीवनशैली, भविष्य में मूल्य वृद्धि और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं. ऐसे में स्थिर ब्याज दरें उनके भरोसे को मजबूत करेंगी.
ट्राइडेंट रियल्टी के CEO परविंदर सिंह के अनुसार, स्थिर मौद्रिक नीति डेवलपर्स की वित्तीय योजना को आसान बनाती है और उभरते बाजारों में आवासीय मांग को बनाए रखने में मदद करती है.
आराइज ग्रुप के एमडी एवं संस्थापक अमन शर्मा ने कहा, "रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिर ब्याज दरें बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे घर खरीदारों और डेवलपर्स को लंबे समय की योजनाएं बनाने में भरोसा मिलता है. हमें उम्मीद है कि इससे घर खरीदने की मांग बढ़ेगी और डेवलपर्स भी निवेश तथा परियोजनाओं की रफ्तार बनाए रख सकेंगे."
HCBS डेवलपमेंट्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ सहारन ने कहा कि RBI का फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर उसके भरोसे को दर्शाता है. इससे घर खरीदारों को ब्याज दरों में अचानक बदलाव की चिंता नहीं रहेगी, जबकि डेवलपर्स लंबे समय की निवेश योजनाओं पर अधिक विश्वास के साथ काम कर सकेंगे.
बॉन्ड मार्केट को मिला सहारा, लेकिन आगे भी रहेगी सतर्कता
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के हेड-फिक्स्ड इनकम पुनीत पाल ने कहा कि RBI का फैसला उम्मीदों के अनुरूप रहा और इसमें नरम (Dovish) रुख देखने को मिला. उनके मुताबिक, GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाना और महंगाई का अनुमान घटाना अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेत हैं. हालांकि, उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में 50-75 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.
वहीं, कोटक महिंद्रा AMC के CIO-डेट दीपक अग्रवाल ने कहा कि RBI का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा और इसमें हल्का डोविश रुख दिखाई दिया. उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों में नरमी आई है, जिससे महंगाई के अनुमान में कमी आई है. साथ ही मजबूत निर्यात, निजी खपत, हाल के व्यापार समझौतों और RBI के विदेशी मुद्रा एवं पूंजी प्रवाह से जुड़े उपायों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि RBI का डेटा आधारित रुख सही है और इसी कारण नीति की घोषणा के बाद 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 3 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.78% पर आ गई. हालांकि, बाजार अगले 6 से 12 महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को अभी भी ध्यान में रख रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स को मिलेगा समर्थन
ACE-एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के CFO राजन लूथरा का कहना है कि रेपो रेट को स्थिर रखने और GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाने से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. उन्होंने कहा कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश पर लगातार फोकस देश की विकास यात्रा को गति दे रहा है. स्थिर ब्याज दरों से फाइनेंसिंग आसान होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे कंपनियां लंबी अवधि की रणनीति और इनोवेशन पर अधिक भरोसे के साथ काम कर सकेंगी.
'वेट एंड वॉच' की रणनीति पर कायम RBI
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने फिलहाल विकास को समर्थन देने और महंगाई पर नजर बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. केंद्रीय बैंक का रुख संकेत देता है कि आगे के फैसले महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे. फिलहाल रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला बॉन्ड बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग और रियल एस्टेट सेक्टर, तीनों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.
केंद्रीय बैंक ने फिलहाल कोई नया लिक्विडिटी बूस्टर नहीं दिया, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाती रहेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. हालांकि इस बार बाजार की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी (लिक्विडिटी) को लेकर RBI के रुख पर भी थी. केंद्रीय बैंक ने फिलहाल कोई नया लिक्विडिटी बूस्टर नहीं दिया, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाती रहेगी.
रेपो रेट के साथ सभी प्रमुख दरें यथावत
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया. इसके साथ ही RBI ने मौद्रिक नीति का 'न्यूट्रल' रुख भी कायम रखा. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए हैं. समिति का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है.
लिक्विडिटी पर क्या बोला RBI?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI यह सुनिश्चित करेगा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे. इसका उद्देश्य यह है कि बैंकों के पास कर्ज देने और रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें. हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस बैठक में नकदी बढ़ाने के लिए किसी नए कदम का ऐलान नहीं किया.
फिलहाल नहीं मिला कोई बड़ा लिक्विडिटी बूस्टर
बाजार को उम्मीद थी कि RBI कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में कटौती, ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) या किसी अन्य विशेष लिक्विडिटी उपाय की घोषणा कर सकता है. लेकिन केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं लिया. RBI ने संकेत दिया कि मौजूदा समय में सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर वह उचित कदम उठाने के लिए तैयार है.
बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विभिन्न सेक्टरों में कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है और बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ व्यापक आधार पर जारी है. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुछ कम हुआ है, लेकिन बैंकिंग प्रणाली मजबूत स्थिति में है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखी जाएगी, जिससे कर्ज वितरण की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी.
बॉन्ड और मनी मार्केट में दिखी नरमी
RBI के मुताबिक जुलाई के दौरान शॉर्ट टर्म मनी मार्केट की ब्याज दरों में नरमी देखने को मिली है. इसके अलावा जून और जुलाई में विभिन्न अवधि वाले सरकारी बॉन्ड (G-Sec) की यील्ड भी घटी है. इससे संकेत मिलता है कि वित्तीय बाजारों में फंडिंग की स्थिति पहले के मुकाबले अधिक सहज हुई है और फिलहाल नकदी का कोई बड़ा दबाव नहीं है.
सहकारी बैंकों के लिए दो बड़े ऐलान
केंद्रीय बैंक ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए दो अहम घोषणाएं भी की हैं. RBI जल्द ही शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks) की लाइसेंसिंग दोबारा शुरू करने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करेगा. इसके अलावा ग्रामीण सहकारी बैंकों (Rural Cooperative Banks) के लिए भी नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश लाए जाएंगे. RBI का मानना है कि इन कदमों से सहकारी बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण तथा छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बेहतर बनेगी.
महंगाई और वैश्विक जोखिमों पर बनी हुई है नजर
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई अभी भी RBI के लक्ष्य से ऊपर है और खाद्य व ईंधन की कीमतों का दबाव बना हुआ है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अल नीनो और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं भी जोखिम पैदा कर रही हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक फिलहाल कोई आक्रामक कदम उठाने के बजाय आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना चाहता है.
फिलहाल 'वेट एंड वॉच' मोड में RBI
पूरी मौद्रिक नीति समीक्षा का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि RBI फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति पर काम कर रहा है. एक ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, बैंकिंग सेक्टर मजबूत है और वित्तीय बाजारों में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है. वहीं दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं और महंगाई से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के रुख का आकलन करने के बाद ही किसी बड़े नीतिगत बदलाव पर फैसला करेगा.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.
रेपो रेट और पॉलिसी रुख में कोई बदलाव नहीं
तीन से पांच अगस्त तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में छहों सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया. समिति ने मौद्रिक नीति का 'न्यूट्रल' रुख भी कायम रखा. इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए हैं.
GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. केंद्रीय बैंक के अनुसार पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा, जिसके चलते पूरे साल के विकास अनुमान में संशोधन किया गया. RBI का अनुमान है कि पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7%, दूसरी तिमाही में 6.4%, तीसरी तिमाही में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहेगी.
घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग बनी ताकत
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं. निजी खपत मजबूत बनी हुई है और विवेकाधीन खर्च में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. घरेलू मांग के दम पर सेवा क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.
महंगाई के मोर्चे पर राहत
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. गवर्नर ने बताया कि पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई RBI के अनुमान से थोड़ी कम रही, क्योंकि लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं तक सीमित रहा. उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई पर दबाव बना हुआ है, लेकिन कोर महंगाई अब भी नियंत्रण में है. RBI का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में महंगाई 4.7%, तीसरी तिमाही में 5.9% और चौथी तिमाही में 5.5% रह सकती है. तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है.
वैश्विक जोखिमों पर RBI की नजर
RBI ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं अभी भी चिंता का विषय हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार नीतियों में अनिश्चितता और मौसम संबंधी जोखिम आगे महंगाई और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं. गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले महंगाई के रुख और आर्थिक आंकड़ों में अधिक स्पष्टता का इंतजार करेगा. इसलिए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
इस साझेदारी का उद्देश्य भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत निजी क्षेत्र का रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है. कंपनियों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारतीय रेलवे और निजी ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में रेलवे विनिर्माण को नई रफ्तार देने के लिए जुपिटर वैगन्स (Jupiter Wagons) ने इटली की Lucchini RS Holding S.p.A. और इटली सरकार समर्थित वित्तीय संस्था SIMEST S.p.A. के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. इस समझौते के तहत भारत में रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट के लिए एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और भारत की वैश्विक रेलवे सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी.
जुपिटर वैगन्स (JWL) ने मंगलवार को बताया कि इस बाध्यकारी समझौते (Binding Agreement) के तहत Lucchini RS, Jupiter Tatravagonka Railwheel Factory Private Limited (JTRWF) में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि SIMEST अतिरिक्त 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी. दोनों का संयुक्त 25 प्रतिशत निवेश लगभग 2.8 करोड़ यूरो (28 मिलियन यूरो) का होगा.
देश का पहला एकीकृत निजी रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म
इस साझेदारी का उद्देश्य भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत निजी क्षेत्र का रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है. यहां रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट का निर्माण कच्चे माल की प्रोसेसिंग, फोर्जिंग, मशीनिंग से लेकर अंतिम असेंबली तक एक ही प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा. इससे पूरे उत्पादन चक्र का संचालन भारत में ही संभव होगा.
ओडिशा में बनेगा नया प्लांट
वर्तमान में JTRWF की छत्रपति संभाजीनगर स्थित यूनिट मशीनिंग और व्हीलसेट असेंबली का काम करती है. इसे ओडिशा में विकसित किए जा रहे ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स से जोड़ा जाएगा. ओडिशा प्लांट में फोर्जिंग, मेटलर्जी और रेलव्हील निर्माण जैसी क्षमताएं विकसित की जाएंगी, जिससे पूरी उत्पादन श्रृंखला एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी हो सकेगी.
घरेलू जरूरतों के साथ निर्यात पर भी रहेगा फोकस
कंपनियों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारतीय रेलवे और निजी ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा. साथ ही, इसका लक्ष्य वैश्विक बाजारों में भी रेल उत्पादों का निर्यात बढ़ाना है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय रेलवे सप्लाई चेन में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर सके.
इटली की कंपनी देगी तकनीकी सहयोग
Lucchini RS इस परियोजना के विकास और कमीशनिंग के दौरान अत्याधुनिक तकनीक, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और औद्योगिक सहयोग उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा, सभी साझेदार मिलकर नए उत्पादों के विकास और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रेलवे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी काम करेंगे.
जुपिटर वैगन्स का कहना है कि उसके मौजूदा वैगन निर्माण कारोबार से व्हीलसेट की लगातार मांग बनी रहेगी, जिससे इस संयुक्त उद्यम की व्यावसायिक व्यवहार्यता मजबूत होगी. साथ ही, इससे तकनीक हस्तांतरण में तेजी आएगी और भारत की रेलवे विनिर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलेगी.
इटली सरकार का भी मिला समर्थन
इस निवेश को इटली सरकार ने Sistema Italia फ्रेमवर्क के तहत समर्थन दिया है. SIMEST की इक्विटी भागीदारी के अलावा इटली की डेवलपमेंट फाइनेंस संस्था CDP, Lucchini RS को वित्तीय और सलाहकार सहयोग प्रदान करेगी. भारत में इटली के दूतावास ने भी इस पहल का समर्थन किया है.
क्या बोले कंपनी के अधिकारी?
जुपिटर वैगन्स के प्रबंध निदेशक विवेक लोहिया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की विनिर्माण क्षमता और Lucchini RS की तकनीक व इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को एक साथ लाएगी. इससे भारत में एकीकृत रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित होगा, देश की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और भारत वैश्विक रेलवे विनिर्माण हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा.
वहीं, Lucchini RS के चेयरमैन ग्यूसेप्पे लुकीनी ने कहा कि यह निवेश कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे कंपनी को भारत जैसे बड़े बाजार में एक मजबूत स्थानीय साझेदार के साथ दीर्घकालिक अवसर मिलेंगे और भारतीय तथा वैश्विक रेलवे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी.