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इन सेक्‍टरों को वित्‍त मंत्री से ये है उम्‍मीद….क्‍या पूरा कर पाएंगी वित्‍त मंत्री? 

इंश्‍योरेंस सेक्‍टर जहां जीएसटी में कमी की मांग कर रहा है तो वहीं रियल स्‍टेट सेक्‍टर ब्‍याज दरों में कमी की मांग कर रहा है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

जिन सेक्‍टरों को इस बजट से बड़ी उम्‍मीद है उनके अनुसार आने वाली 1 फरवरी को वित्‍त मंत्री बजट पेश करने जा रही हैं. वित्‍त मंत्री का बजट एक ऐसा दस्‍तावेज है जिससे देश के हर आम से लेकर खास को सरोकार रहता है. जहां घर की गृहणी चाहती है कि उसका घर का बजट कम हो तो वहीं देश के कारोबारी चाहते हैं कि बजट में ऐसे प्रावधान हो जिससे उनकी लागत कम हो. आज इसी कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अलग-अलग सेक्‍टर के लोग वित्‍त मंत्री से क्‍या चाह रहे हैं. 

इंश्‍योरेंस सेक्‍टर की क्‍या है मांग? 
पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर- लाइफ इंश्योरेंस संतोष अग्रवाल बताते हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसी पर मिलने वाला टैक्स डिस्काउंट इंश्योरेंस को अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का काम करता रहा है, साथ ही इससे 2047 तक पूरे भारत के लोगों द्वारा इंश्योरेंस अपनाने के IRDAI के लक्ष्‍य को पूरा करने में भी मदद मिलेगी. वो कहते हैं कि उचित संतुलन खोजने के लिए संपूर्ण बीमा श्रेणी के टैक्स पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है. धारा 80 सी के तहत 1,50,000 रुपये की अधिकतम डिडक्टिबल लिमिट पीपीएफ, लोन इत्यादि जैसे अन्य स्वीकार्य खर्चों के कारण समाप्त हो जाती है.इस अंतर को भरने के लिए केवल टर्म इंश्योरेंस के लिए एक छूट श्रेणी घोषित करने की जरूरत है. इससे करदाताओं को अधिक कवरेज वाला टर्म प्लान चुनने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही 18% की जीएसटी दर पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है, जिससे इसका लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे और अधिक लोगों को लाइफ इंश्योरेंस में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

क्‍या चाहता है रियल स्‍टेट सेक्‍टर? 
रियल स्‍टेट सेक्‍टर में पिछले कुछ सालों के मुकाबले 2023 में खासी पॉजिटिव प्रोग्रेस देखने को मिलती है. लेकिन बावजूद इसके रियल स्‍टेट को इंडस्‍ट्री का दर्जा देने की मांग काफी लंबी है बावजूद इसके इस साल के बजट से जो इन्‍हें उम्‍मीदें हैं उन्‍हें लेकर क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष और गौड़ ग्रुप के सीएमडी मनोज गौड़ कहते हैं कि आगामी अंतरिम बजट से कई सारी उम्मीदें हैं. वो कहते हैं कि इस बार के बजट में होम लोन के टैक्स दायरे को बढ़ाने के साथ-साथ इस सेक्टर को उद्योग का भी दर्जा मिलने की उम्मीद है. गौड़ के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट का हमेशा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वे इस बजट से होम बॉयर्स और डेवलपर्स के लिए मांग को प्रोत्साहित करने, बाजार में लिक्विडिटी संबंधी चिंताओं को दूर करने और नियमों को सरल बनाने के लिए उपाय की उम्मीद कर रहे हैं. इस बजट से कई उम्मीदें हैं जो भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूत करेंगे. 

ब्‍याज दरों में होनी चाहिए कमी
मौजूदा ब्याज दरों को लेकर कहते हैं कि ये निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण चुनौती है. देखा जाय तो 2024 की दूसरी तिमाही तक रेपो दर में कटौती की संभावना नहीं है. ऐसे में होम लोन के टैक्स दायरे को बढ़ाने की जरूरत है. रेपो रेट में हालिया उछाल दरों के कारण होम लोन की ब्याज दरों में लगातार वृद्धि हो रही है और जब तक सरकार टैक्स में छूट नहीं देती तब तक इस सेक्टर में तेजी नहीं आ पाएगी. 

स्‍वास्‍थ्‍य बजट में होना चाहिए इजाफा

स्‍वास्‍थ्‍य एक अहम क्षेत्र है जिसे लेकर हर आदमी की उम्‍मीद होती है कि आखिर सरकार क्‍या कर रही है. इस सेक्‍टर में काम करने वालों की भी सरकार से बड़ी उम्‍मीदें होती हैं. एशियन हॉस्पिटल फ़रीदाबाद  के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, डॉ. एन के पांडे,ने कहा कि  2024 के आगामी भारतीय केंद्रीय बजट में, हम एक मजबूत नीतिगत बदलाव देखने की उम्मीद कर रहे हैं जो पारंपरिक सीमाओं से परे है. हमारी बजट अपेक्षाओं में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के आवंटन में बढ़़ोतरी की संभावना है,  जो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.साथ ही मुझे लगता है कि सरकार को सामूहिक स्वास्थ्य प्रगति की भावना के अनुरूप स्वास्थ्य देखभाल की प्रगति के लिए वैश्विक विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सुविधा के लिए भी कदम उठाने चाहिए. इसके अलावा हम स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बढ़ाने के लिए पर्याप्त फोकस देखने की उम्मीद करते हैं. बेहतर बुनियादी ढांचे और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाओं के साथ भारत के ग्रामीण और छोटे शहरों में सेवाएं इसमें शामिल हैं. हम आयुष के बढ़ते एकीकरण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की भी उम्मीद करते हैं, क्योंकि समग्र स्वास्थ्य देखभाल में पारंपरिक चिकित्सा की स्वीकार्यता बढ़ रही है.

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