रिलायंस जिओ सबसे पहले दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में 5G इंटरनेट सेवा शुरू करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
देश में 5G सर्विस इसी महीने लॉन्च होने वाली हैं. वैसे, तो इस सर्विस को भारतीय कंपनियां ही लोगों तक पहुंचाएंगी, लेकिन इसमें एक विदेशी कंपनी भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी. रिलायंस जिओ और एयरटेल 5G लॉन्च करने की तैयारियों में जुटी हुई हैं. मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जिओ ने दिवाली के मौके पर 5G इंटरनेट सेवाओं की लॉन्चिंग का ऐलान कर रखा है. वहीं, एयरटेल भी इसी महीने सेवाओं की शुरुआत करेगी. वोडाफोन आइडिया इस समय आर्थिक संकट का सामना कर रही है, इसलिए फिलहाल उसने 5G की लॉन्चिंग की तिथि के बारे में कुछ नहीं बताया है.
ये कंपनी देगी उपकरण
अब समझते हैं कि आखिर इस काम में कौनसी विदेशी कंपनी, क्या भूमिका निभा रही है. दरअसल, रिलायंस जिओ और भारती एयरटेल ने 5G इंटरनेट के विस्तार में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के लिए स्वीडन की टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी 'एरिक्सन' के साथ करार किया है. वहीं, वोडाफोन आइडिया ने भी एरिक्सन से साथ उपकरणों के लिए डील कर रखी है. हालांकि, अभी इस बारे में कुछ नहीं पता कि कंपनी 5G सर्विस कब लॉन्च करने वाली है. 5G को अमल में लाने के लिए उपकरणों का समय पर उपलब्ध होना बेहद ज़रूरी है. इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में एरिक्सन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है.
एरिक्सन ने तेज किया काम
एरिक्सन का कहना है कि वह 5G नेटवर्क के लिए जरूरी सभी उपकरणों को समय रहते डिलीवर कर देगी. मीडिया रिपोर्ट्स में भारत में एरिक्सन के नेटवर्क सॉल्यूशन कारोबार के हेड नितिन बंसल के हवाले से बताया गया है कि एरिक्सन टेलीकॉम कंपनियों की मांग को 100 फीसदी पूरा करने के करीब पहुंच चुकी है. इसके लिए कंपनी पुणे में मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी को और बढ़ा रही है. बता दें कि 4G की लॉन्चिंग के लिए भी एरिक्सन से ही उपकरणों की आपूर्ति की गई थी.
एरिक्सन के बारे में
एरिक्सन 1876 में अस्तित्व में आई थी और इसका मुख्यालय Stockholm में है. पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी में कुल 1,01,322 कर्मचारी काम करते हैं. कंपनी 182 देशों में ऑपरेट करती है. टेलीकम्यूनिकेशन डेवलपमेंट में इस कंपनी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब यह भारत में 5G की लॉन्चिंग के लिए सम्बंधित कंपनियों को ज़रूरी सामान उपलब्ध कराएगी. गौरतलब है कि रिलायंस जिओ सबसे पहले दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में 5G इंटरनेट सेवा शुरू करेगी. जबकि भारती एयरटेल की योजना पहले चरण में अहमदाबाद, चंडीगढ़, बेंगलुरु, लखनऊ, चेन्नई, दिल्ली, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, मुंबई, पुणे और गांधीनगर में 5G इंटरनेट सेवा शुरू करने की है.
₹75 करोड़ की यह शुरुआती फंडिंग SEIL की बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य के विस्तार की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है. मजबूत निवेशक भागीदारी और बेहतर कच्चे माल की पहुंच से कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
स्टील सेक्टर की कंपनी स्टील एक्सचेंज इंडिया (Steel Exchange India- SEIL) ने अपने प्रस्तावित ₹350 करोड़ फंडरेज के पहले चरण में ₹75 करोड़ जुटा लिए हैं. यह फंड कन्वर्टिबल वारंट्स के जरिए आया है, जिसका उद्देश्य कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करना, कर्ज घटाना और सप्लाई चेन को बेहतर बनाना है.
₹350 करोड़ फंडरेज का पहला चरण पूरा
कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि यह ₹75 करोड़ की राशि प्रस्तावित ₹350 करोड़ के फंडरेज का पहला हिस्सा है. यह पूरा फंड जुटाव कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है. बोर्ड ने इस इश्यू को 4 मार्च 2026 को मंजूरी दी थी.
IMR ग्रुप से मिला निवेश
इस फंडरेज में निवेश India Coke and Power और IMR Steel द्वारा किया गया है, जो IMR ग्रुप का हिस्सा हैं. यह समूह एक वैश्विक मेटल्स और माइनिंग कॉरपोरेशन है, जिसकी मौजूदगी कई देशों में है. इस निवेश से SEIL को कच्चे माल की सप्लाई और इंटरनेशनल सोर्सिंग नेटवर्क तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है.
कन्वर्टिबल वारंट्स का ढांचा
कंपनी के मुताबिक, यह पूरा फंड कन्वर्टिबल वारंट्स के जरिए जुटाया जा रहा है, जिन्हें 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयरों में बदला जा सकेगा. कुल इश्यू साइज ₹350 करोड़ तक सीमित है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में और भी ट्रांच जारी हो सकते हैं.
फंड का इस्तेमाल कहां होगा
कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में करेगी:
1. ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए
2. कर्ज घटाने (Debt Reduction) के लिए
3. सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए
4. उत्पादन लागत कम करने के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए
कच्चे माल की सप्लाई होगी मजबूत
इस फंडरेज से कंपनी को मेटलर्जिकल कोक, कोकिंग कोल, नॉन-कोकिंग कोल और फेरस स्क्रैप जैसे अहम कच्चे माल तक बेहतर पहुंच मिलेगी. ये सभी स्टील उत्पादन में लागत नियंत्रण और स्थिर सप्लाई के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.
स्टील सेक्टर की मौजूदा स्थिति
यह फंडरेज ऐसे समय में आया है जब भारतीय स्टील कंपनियां अस्थिर कच्चे माल की कीमतों, वैश्विक व्यापार बदलावों और घरेलू मांग में बढ़ोतरी जैसे कारकों का सामना कर रही हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बढ़ती मांग से लंबे स्टील उत्पादों की खपत भी बढ़ रही है.
कंपनी का बिजनेस प्रोफाइल
Steel Exchange India आंध्र प्रदेश में एक इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट संचालित करती है और “सिम्हाद्री TMT” ब्रांड के तहत टीएमटी बार्स बनाती है. कंपनी ने ट्रेडिंग बिजनेस से शुरुआत कर अब स्पंज आयरन, बिलेट्स, रोलिंग मिल्स और कैप्टिव पावर जेनरेशन तक अपना विस्तार किया है.
HCL Tech के नतीजे यह दिखाते हैं कि आईटी सेक्टर में ग्रोथ के बावजूद बाजार की उम्मीदें काफी ऊंची हैं. ऐसे में केवल रेवेन्यू ग्रोथ नहीं, बल्कि मार्जिन और भविष्य की गाइडेंस भी निवेशकों के भरोसे के लिए बेहद अहम हो गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद देश की प्रमुख आईटी कंपनी एचसीएल टेक (HCL Technologies) के शेयरों में आज भारी दबाव देखने को मिला. कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद निवेशकों की उम्मीदों पर प्रदर्शन खरा नहीं उतरा, जिसके चलते शेयर करीब 10% तक गिर गया और कई ब्रोकरेज हाउस ने टारगेट प्राइस घटा दिया.
शेयर में जोरदार गिरावट, 10% तक टूटा स्टॉक
नतीजों के बाद बाजार में HCL Tech के शेयर पर भारी बिकवाली देखने को मिली. एनएसई पर शेयर 9.58% गिरकर 1,303 रुपये तक पहुंच गया, जबकि बीएसई पर यह 1441.55 रुपये से गिरकर 1301.60 रुपये तक आ गया. कारोबार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ 1344.05 रुपये पर हुई थी. शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,770 रुपये और न्यूनतम 1,275.70 रुपये रहा है.
मुनाफा और रेवेन्यू में बढ़ोतरी
कंपनी ने चौथी तिमाही में मजबूत आंकड़े पेश किए. इस दौरान नेट प्रॉफिट 4.2% बढ़कर 4,488 करोड़ रुपये रहा, जबकि रेवेन्यू 12.34% बढ़कर 33,981 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. हालांकि यह प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कमजोर माना गया. तिमाही आधार पर भी कंपनी का नेट प्रॉफिट 10.10% और रेवेन्यू 0.32% बढ़ा.
पूरे वित्त वर्ष का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 4.3% घटकर 16,642 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 17,390 करोड़ रुपये था. हालांकि वार्षिक रेवेन्यू 11.18% बढ़कर 1,30,144 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
मैनेजमेंट का बयान
कंपनी के सीईओ और एमडी C Vijayakumar ने कहा कि कुछ सेक्टर्स में सुस्ती, विवेकाधीन खर्च में कमी और डील्स में देरी के कारण तिमाही प्रदर्शन प्रभावित हुआ. हालांकि एआई आधारित सेवाओं में मजबूत ग्रोथ जारी है.
टारगेट प्राइस में कटौती
नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउस ने स्टॉक को लेकर सतर्क रुख अपनाया है. नोमुरा ने टारगेट 1700 से घटाकर 1600 रुपये कर दिया है, जेपी मॉर्गन ने 1419 से घटाकर 1370 रुपये किया है और न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है. वहीं एचएसबीसी और मोतीलाल ओसवाल ने भी टारगेट प्राइस में कटौती की है.
निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी
मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद मार्जिन दबाव, धीमी डील क्लोजिंग और कमजोर गाइडेंस ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया. इसी वजह से निवेशकों ने मुनाफावसूली की और शेयर पर दबाव बढ़ गया.
HCL Tech के नतीजे यह दिखाते हैं कि आईटी सेक्टर में ग्रोथ के बावजूद बाजार की उम्मीदें काफी ऊंची हैं. ऐसे में केवल रेवेन्यू ग्रोथ नहीं, बल्कि मार्जिन और भविष्य की गाइडेंस भी निवेशकों के भरोसे के लिए बेहद अहम हो गई है.
कंपनी ने अब तक 71 देशों में 1300 से ज्यादा भारी उपकरण सप्लाई किए हैं. इसकी ऑर्डर बुक 12,700 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है, जो भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की सरकारी कंपनी भारत अर्थ मूवर्स (Bharat Earth Movers Limited) एक बार फिर शेयर बाजार में सुर्खियों में है. रक्षा मंत्रालय से करीब ₹590 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिलने के बाद इस मल्टीबैगर स्टॉक में तेजी लौट आई है, जिसने कभी ₹12 के स्तर से शुरुआत कर निवेशकों को 14,000% से ज्यादा का शानदार रिटर्न दिया था.
₹12 से ₹2,400 तक का सफर
BEML का शेयर उन चुनिंदा सरकारी स्टॉक्स में शामिल है जिसने लॉन्ग टर्म निवेशकों को भारी रिटर्न दिया है. कभी ₹12.40 के आसपास कारोबार करने वाला यह स्टॉक अब ₹2,400 के स्तर को पार कर चुका है. लिस्टिंग के बाद से अब तक यह करीब 14,206% का रिटर्न दे चुका है, जो इसे एक मजबूत मल्टीबैगर स्टॉक बनाता है.
नए डिफेंस ऑर्डर की खबर के बाद शेयर में फिर से खरीदारी देखने को मिली और आज बाजार खुलने के बाद खबर लिखे जाने तक ये शेयर 5.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 1862 रुपये पर कारोबार कर रहा था. बीते कुछ समय में भी इस स्टॉक ने अच्छा प्रदर्शन किया है, पिछले 1 महीने में करीब 27% की तेजी और सिर्फ 5 दिनों में लगभग 7% का रिटर्न दिया है.
₹590 करोड़ के ऑर्डर से बढ़ा भरोसा
रक्षा मंत्रालय ने कंपनी को लगभग ₹590 करोड़ का ऑर्डर दिया है, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए ट्रॉल असेंबली की सप्लाई की जाएगी. यह ऑर्डर कंपनी की ऑर्डर बुक और भविष्य की कमाई के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है.
सिर्फ डिफेंस नहीं, मल्टी-सेक्टर बिजनेस
BEML सिर्फ डिफेंस कंपनी नहीं है, बल्कि इसका बिजनेस कई क्षेत्रों में फैला हुआ है.
1. करीब 50% राजस्व माइनिंग और कंस्ट्रक्शन से आता है
2. 27% कमाई रेलवे और मेट्रो प्रोजेक्ट्स से होती है
3. 23% योगदान डिफेंस सेक्टर का है
यह विविधता कंपनी को स्थिर और मजबूत बिजनेस मॉडल देती है.
ग्लोबल मौजूदगी और मजबूत ऑर्डर बुक
कंपनी ने अब तक 71 देशों में 1300 से ज्यादा भारी उपकरण सप्लाई किए हैं. इसकी ऑर्डर बुक 12,700 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है, जो भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करती है.
मेक इन इंडिया से मिला बड़ा फायदा
BEML ‘मेक इन इंडिया’ और डिफेंस इंडिजेनाइजेशन पॉलिसी का बड़ा लाभ उठा रही है. कंपनी अपने लगभग 70% प्रोडक्ट्स इन-हाउस टेक्नोलॉजी से बनाती है, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत हुई हैं.
BEML का यह सफर दिखाता है कि लंबे समय के भरोसे और मजबूत बिजनेस मॉडल के साथ सरकारी कंपनियां भी मल्टीबैगर रिटर्न दे सकती हैं. नए डिफेंस ऑर्डर के बाद एक बार फिर यह स्टॉक निवेशकों की नजरों में आ गया है.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 753.03 अंकों यानी 0.96% की बढ़त के साथ 79,273.33 पर बंद हुआ. वहीं, NSE का निफ्टी50 इंडेक्स भी 211.75 अंक (0.87%) चढ़कर 24,576.60 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बुधवार को शेयर बाजार की शुरुआत के लिए संकेत मजबूत बने हुए हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच मंगलवार को बाजार ने जोरदार तेजी के साथ कारोबार खत्म किया था. बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और आज भी बैंकिंग, एफएमसीजी और रियल्टी सेक्टर के साथ-साथ SBI Life Insurance, Tech Mahindra, Trent और Tata Communications जैसी कंपनियों के नतीजों और खबरों के चलते बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है.
मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए सूचकांक
आज के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स ने जोरदार उछाल दिखाया और 753.03 अंकों यानी 0.96% की बढ़त के साथ 79,273.33 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 इंडेक्स भी 211.75 अंक (0.87%) चढ़कर 24,576.60 के स्तर पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया था, जबकि निफ्टी 24,600 के करीब पहुंच गया था.
कल किन शेयरों ने दिखाई तेजी
सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर हरे निशान में बंद हुए. सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में Hindustan Unilever और Trent शामिल रहे. इनके अलावा बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में भी खरीदारी देखी गई, जहां ICICI Bank, HDFC Bank, Axis Bank और Bajaj Finance के शेयरों में अच्छी तेजी रही.
सेक्टर और ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन
ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिसमें निफ्टी मिडकैप में 0.49% की बढ़त और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.88% की तेजी दर्ज हुई. सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी और रियल्टी सेक्टर ने बढ़त बनाई, जबकि फार्मा सेक्टर दबाव में रहा. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक उम्मीदों ने भारतीय बाजार को मजबूत सहारा दिया है. हालांकि, आगे की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी. निवेशकों को फिलहाल सतर्क आशावाद के साथ बाजार पर नजर बनाए रखने की जरूरत है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
शेयर बाजार में आज कई कंपनियां खबरों के चलते फोकस में रह सकती हैं और निवेशकों की नजर खास तौर पर उन कंपनियों पर रहेगी जहां नतीजे, बड़े फैसले या नए ऑर्डर से जुड़ी अपडेट सामने आई है. आज कई दिग्गज कंपनियां अपने मार्च तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिनमें SBI Life Insurance, Tech Mahindra, Trent, Havells India, L&T Technology Services और Tata Communications शामिल हैं, जिनके नतीजों का असर बाजार की दिशा तय करने में अहम हो सकता है. वहीं HDFC Life Insurance के बोर्ड ने विभा पडलकर को दोबारा मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नियुक्त करने को मंजूरी दी है, जिनका नया कार्यकाल 12 सितंबर 2026 से पांच साल के लिए होगा. PNC Infratech ने 3,483 करोड़ रुपये के दो राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम बोली लगाकर बड़ा ऑर्डर हासिल किया है, जिससे कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलने की उम्मीद है. State Bank of India ने अपने आठ वरिष्ठ अधिकारियों को डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर प्रमोट किया है, जो 21 अप्रैल से प्रभावी है. Hindustan Zinc का बोर्ड 24 अप्रैल को बैठक कर चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2026 के नतीजों के साथ अंतरिम डिविडेंड पर भी विचार करेगा. Shyam Telecom में मेघना अग्रवाल ने करीब 1.09 लाख शेयर खरीदकर लगभग 0.97 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है, जबकि Mayasheel Ventures में कैपेशियस वेल्थ मैनेजमेंट एलएलपी ने 1.11 लाख शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी घटाई है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन, तीन भागों वाले इंटरव्यू के अंतिम हिस्से में बताते हैं कि 21वीं सदी का विश्वविद्यालय कैसा होना चाहिए; भारत के औद्योगिक विकास में इंफोसिस के महत्व पर बात करते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंफोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन कहते हैं कि भारत दुनिया के लिए AI टैलेंट डेस्टिनेशन बन सकता है, जैसे भारत ने आईटी सेवाओं के मामले में नेतृत्व किया था. वे कहते हैं कि इंफोसिस और पूरा आईटी उद्योग भारतीय बिजनेस लीडर्स और उनकी वैश्विक छवि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिनमें से कई लोग दुनिया भर में शीर्ष नेतृत्व पदों पर हैं.
AI और वैश्विक इकोसिस्टम तथा उसमें भारत की स्थिति पर एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा: “हम AI क्रांति की शुरुआत में हैं. व्यवसाय इतनी तेजी से नहीं बदलते. AI बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसके पूरे प्रभाव को महसूस होने में शायद 20 साल, शायद 30 साल लगेंगे. हम तेजी से AI का कंज्यूमर उपयोग देख रहे हैं, उदाहरण के लिए, व्यक्तिगत उत्पादकता कार्यों के लिए. यहां तक कि कोडिंग जैसी चीज भी एक व्यक्तिगत उत्पादकता कार्य है जिसे AI तेज कर रहा है. कोड लिखना और सिस्टम बनाना एक जैसी चीज नहीं है. सिस्टम बनाना बहुत जटिल है और इसे ऐसे वातावरण में काम करना होता है जहां कई अन्य एप्लिकेशन, लेगेसी एप्लिकेशन और मल्टी-जेनरेशन सिस्टम होते हैं. अंततः हमारे जीवन के हर पहलू में AI की भूमिका होगी. लेकिन इसमें 20-25 साल लगेंगे. बड़ी संख्या में एप्लिकेशन लिखे जाएंगे. कई एप्लिकेशन को AI का पूरा लाभ लेने के लिए फिर से सोचना होगा. कई नए रोजगार बनेंगे. प्रशिक्षण, और नए यूजर इंटरफेस बनाने के रूप में नए प्रकार की गतिविधियां बनेंगी."
“AI इंसानों को रिप्लेस नहीं कर रहा है, यह AI प्लस ह्यूमन्स है. तो क्या कुछ नौकरियां खत्म होंगी? हां. इसका जवाब है लोगों को री-ट्रेन करना. हमें हर व्हाइट-कॉलर काम करने वाले व्यक्ति के लिए बड़े पैमाने पर री-ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाना होगा. बाद में हमें हर ब्लू-कॉलर काम करने वाले व्यक्ति के लिए भी ऐसा करना होगा. उत्पादकता बढ़ेगी. अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी. जब मैं 1979 में कंप्यूटर उद्योग से जुड़ा था, तब वैश्विक अर्थव्यवस्था 11 ट्रिलियन डॉलर थी. आज यह 120 ट्रिलियन डॉलर है. मेरे जीवनकाल में यह 10 गुना बढ़ी है. कल्पना कीजिए कि अगले 20-30 वर्षों में यह फिर से 10 गुना बढ़े.”
“भारत में हमें यह सोचना होगा – क्या हम भारत को दुनिया का AI टैलेंट डेस्टिनेशन बना सकते हैं? इसके लिए हमें स्कूलों और कॉलेजों में AI को शामिल करना होगा. हमें अपने शिक्षकों को प्रशिक्षित करना होगा. हमें सभी लोगों को इस नई तकनीक का उपयोग करना सिखाना होगा. अगर हम ऐसा करते हैं, तो मेरा मानना है कि भारत इसका पूरा लाभ उठाएगा, शायद कंप्यूटिंग से भी बेहतर. आज हमारे पास टैलेंट, संसाधन और पैसा है.”
भारत के औद्योगिक विकास में इंफोसिस मॉडल के महत्व पर उन्होंने कहा: “इंफोसिस और हमारे साथियों ने जो किया, उसे संदर्भ में समझना होगा, हमने अपनी कंपनियां बनाईं, हमने एक उद्योग बनाया. लोगों को यह सोचना चाहिए कि एक उद्योग कैसे बनाया जाए, और हम सब मिलकर बड़े पैमाने पर कुछ कैसे बना सकते हैं. इंफोसिस आज लगभग 20 बिलियन डॉलर की कंपनी है; यह उद्योग 300 बिलियन डॉलर का है. यह 5.5 मिलियन लोगों को रोजगार देता है. इसने स्टार्टअप फाउंडर्स की पहली पीढ़ी को जन्म दिया, जिन्होंने आईटी उद्योग में काम करके तकनीकी अनुभव हासिल किया. यह विश्व स्तरीय उद्योग बनाने और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करने का एक शानदार उदाहरण है. हम इतने सफल हुए हैं कि यह दुनिया के लिए डिफॉल्ट मॉडल बन गया है. GCCs को देखें -- वे IT, R&D और इंजीनियरिंग के लिए भारत आ रहे हैं. और भारतीय पेशेवरों की छवि इतनी ऊंची है कि दुनिया भर के कई व्यवसाय उन्हें शीर्ष नेतृत्व और कई मामलों में CEO बना रहे हैं. इसलिए आज भारतीय पेशेवरों का सम्मान किया जाता है. मेरा मानना है कि इंफोसिस और आईटी उद्योग की इसमें भूमिका रही है.”
आधुनिक विश्वविद्यालय पर उन्होंने कहा: “मेरा मानना है कि 21वीं सदी का विश्वविद्यालय आर्थिक विकास का इंजन होना चाहिए. परंपरागत रूप से हम कहते थे कि विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए होता है. विश्वविद्यालय PhDs बनाते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि अब विश्वविद्यालय को उत्पाद और तकनीक बनानी चाहिए, ऐसे स्टार्टअप बनाने चाहिए जो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएं. इसलिए विश्वविद्यालयों के चार स्तंभ होने चाहिए – शिक्षा, शोध, ट्रांसलेशनल रिसर्च जो स्टार्टअप्स तक जाए, और विश्वविद्यालय से निकलने वाले उत्पाद और तकनीक.”
अपने Axilor Ventures के माध्यम से स्टार्टअप्स को मेंटर करने पर उन्होंने कहा: “Axilor Ventures में, किसी भी अन्य VC फंड की तरह, हम अच्छे फाउंडर्स को देखते हैं, उन्हें फंड करते हैं और उनका पोषण करते हैं. हम भारत के पूरे इकोसिस्टम के साथ काम करते हैं, सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं. किसी भी समय हमारे पास लगभग 40 कंपनियों का पोर्टफोलियो होता है जिन्हें हम सपोर्ट करते हैं. यह एक प्रॉप्रायटरी फंड है जो मुख्य रूप से मेरे फैमिली ऑफिस और शिबुलाल के फैमिली ऑफिस से आता है.”
सुमन के झा, BW रिपोर्ट्स
(लेखक BW Businessworld में पूर्व कार्यकारी संपादक और डिप्टी एडिटर हैं.)
ग्लोबल साउथ में बढ़ते हीट संकट से निपटने के लिए अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार, बहु-क्षेत्रीय सहयोग. स्थानीय संदर्भ और मजबूत गवर्नेंस तंत्र ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान दे सकते हैं.
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रितु राणा
दुनिया भर में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसम का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संकट बन चुकी है. नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ग्लोबल हीट व कूलिंग फोरम के दौरान ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क के सहयोग से आयोजित “ग्लोबल साउथ में हीट रेजिलिएंस को मजबूत करने के गवर्नेंस पाथवे” सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हीट संकट से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय और समन्वित दृष्टिकोण अनिवार्य है. सत्र का संचालन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किया गया.
एकल-क्षेत्रीय प्रयास क्यों हैं नाकाफी
सत्र में विशेषज्ञ के रूप में शामिल सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय में हीट स्ट्रेस गाइटलाइन्स एक्सपर्ट पैनल के सदस्य व हीट रेजिलिएंस एंड पर्फॉर्मेंस सेंटर के निदेशक डॉ. जेसन काई वेई ली (Jason Kw Lee) ने बताया कि विभिन्न देशों के हीट एक्शन प्लानों के आकलन से यह सामने आया है कि केवल एक विभाग या एजेंसी के भरोसे इस चुनौती से निपटना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि हीट का प्रभाव इतना व्यापक है कि यह परिवहन, स्वास्थ्य, श्रम, शिक्षा और शहरी विकास जैसे सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है. इसलिए. किसी एक क्षेत्र के नेतृत्व के बावजूद सभी क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है.
हीट गवर्नेंस: एक समन्वित प्रक्रिया
डॉ. जेसन के अनुसार, हीट गवर्नेंस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोग. संस्थाएं और संसाधन एक साथ लाए जाते हैं. इसका उद्देश्य समन्वित तरीके से कार्य कर गर्मी के प्रभाव को कम करना है. इसके लिए न केवल नीतियां बनानी होंगी. बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत तंत्र भी विकसित करना होगा.
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हीट का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. एक फिल्म निर्माता के अनुभव के जरिए यह समझाया गया कि अत्यधिक गर्मी के कारण शूटिंग के समय और उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है. यह साफ संकेत है कि हीट अर्थव्यवस्था और कामकाज के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है.
स्थानीय संदर्भ के अनुसार बनें नीतियां
सत्र में जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन हेतु नीति शोधकर्ता, किंग्स कॉलेज लंदन और सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव आदित्य पिल्लई ने जोर देकर कहा कि हीट से जुड़ी नीतियां बनाते समय “स्थान” सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है. उन्होंने कहा, “विज्ञान और ज्ञान राजा हैं. लेकिन संदर्भ रानी है. दोनों के संतुलन से ही प्रभावी हीट नीति तैयार होती है.” इसलिए, हर क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों को समझकर ही रणनीति बनानी चाहिए.
हीट: सिर्फ स्वास्थ्य नहीं. विकास का भी मुद्दा
आदित्य ने यह भी स्पष्ट किया कि हीट को केवल मृत्यु और बीमारी से जोड़कर देखना अधूरा दृष्टिकोण है. यह मानव जीवन के हर पहलू, खानपान, आराम, शारीरिक गतिविधि और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है. सही निवेश और रणनीति के जरिए हीट स्ट्रेस को कम कर पूरी आबादी की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है.
सरकारों के लिए अवसर भी है यह संकट
आदित्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले सरकारें हीट को सीमित क्षेत्रों की समस्या मानती थीं. लेकिन अब इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे कोविड-19 ने डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया. वैसे ही मौजूदा संकट स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर नीतियों को आगे बढ़ा सकता है.
बेहतर नीति के लिए टूलकिट और आकलन
सत्र में एक विशेष टूलकिट और “मैच्योरिटी मॉडल” भी प्रस्तुत किया गया. जिसमें छह सवालों के जरिए यह आकलन किया जाता है कि किसी क्षेत्र में हीट गवर्नेंस कितना प्रभावी है. इसका उद्देश्य नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को बेहतर समन्वय और ठोस कदम उठाने में मदद करना है.
ग्लोबल साउथ में बढ़ते हीट संकट से निपटने के लिए अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार. बहु-क्षेत्रीय सहयोग. स्थानीय संदर्भ और मजबूत गवर्नेंस तंत्र ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान दे सकते हैं. यह संकट केवल खतरा नहीं. बल्कि एक ऐसा अवसर भी है. जो सही रणनीति के जरिए समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत बना सकता है.
केंद्र सरकार में स्वतंत्र राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, कचरे को धन में बदलने की पहल से स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर खुलेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार सर्कुलर इकोनॉमी (परिपत्र अर्थव्यवस्था) की रणनीति में रीसाइक्लिंग और संसाधन दक्षता को एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित कर रही है. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार अब वेस्ट मैनेजमेंट केवल बड़े औद्योगिक समूहों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक संगठित आर्थिक अवसर के रूप में उभर रहा है.
सरकार बन रही है फैसिलिटेटर
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि रीसाइक्लिंग अब विभिन्न क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण आर्थिक चालक बनती जा रही है. उन्होंने वैश्विक संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि भारत उन क्षेत्रों में भी निजी भागीदारी बढ़ा रहा है जो पहले बड़े उद्योगों के नियंत्रण में थे.
उन्होंने कहा कि सरकार अब मुख्य रूप से एक “सुविधाकर्ता” (facilitator) की भूमिका निभा रही है और उभरते हरित बाजारों में उद्योग आधारित नवाचार को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नीतिगत सुधार किए गए हैं.
कचरे से कमाई: 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व
RECEIC ग्लोबल संगोष्ठी में बोलते हुए उन्होंने बताया कि अब कचरे को आर्थिक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2021 में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के तहत पिछले पाँच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे सहित स्क्रैप के व्यवस्थित निपटान से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है. यह भारत में बेकार सामग्री के मुद्रीकरण (monetisation) की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है.
रीसाइक्लिंग के नए मॉडल: कचरे से बन रहे मूल्य श्रृंखला
उन्होंने यह भी बताया कि प्लास्टिक कचरे और स्टील स्लैग का उपयोग सड़क निर्माण में तथा प्रयुक्त खाना पकाने के तेल को बायोफ्यूल में बदलने जैसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि कैसे एक ही कचरे की धारा से कई मूल्य श्रृंखलाएँ (value chains) बनाई जा सकती हैं जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों लाभ मिलते हैं.
EPR और नियमों में सुधार: डिजिटल निगरानी पर जोर
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव को समर्थन देने के लिए नियामकीय ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. मंत्रालय के संयुक्त सचिव नीलेश साह ने कहा कि 2016 में शुरू और 2022-23 में डिजिटलाइज किए गए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) ढांचे ने भागीदारी को काफी बढ़ाया है. इसके तहत लगभग 75,000 उत्पादक, आयातक और ब्रांड मालिक तथा लगभग 5,000 रीसाइक्लर पंजीकृत हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी 2026 में अधिसूचित और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी संशोधित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में डिजिटल मॉनिटरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को शामिल किया गया है. इसके साथ ही इको-लेबलिंग और LiFE (Lifestyle for Environment) अभियान से जुड़े सतत उपभोग कार्यक्रम भी व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दे रहे हैं.
बायोटेक और सस्टेनेबिलिटी: विकास का नया मॉडल
जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ जितेंद्र कुमार ने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में पहले से ही सर्कुलर इकोनॉमी के तत्व मौजूद थे लेकिन औद्योगीकरण ने इन्हें कमजोर किया. उन्होंने विकास को पुनः परिभाषित करते हुए इसे स्थिरता और सर्कुलरिटी के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने “पॉल्यूटर पेज प्रिंसिपल” (प्रदूषक भुगतान सिद्धांत) को मजबूत करने और अनुपालन के लिए बेहतर तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई. साथ ही उन्होंने BioE3 नीति के तहत रासायनिक-आधारित प्रक्रियाओं की जगह जैव-आधारित विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही जो अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार, तीनों को जोड़ती है. उन्होंने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करने की भी वकालत की.
उद्योग की भागीदारी: 60 सदस्यीय गठबंधन सक्रिय
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी अपने प्रयास साझा किए. RECEIC स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष मनीष शर्मा ने बताया कि 60 सदस्यीय उद्योग गठबंधन पांच प्रमुख क्षेत्रों पैकेजिंग, सामग्री परिवर्तन, उपयोग किए गए तेल की सर्कुलैरिटी, टेक्सटाइल्स एवं परिधान, तथा ड्राई सेल बैटरियों, पर काम कर रहा है. इन क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी के व्यवहारिक और स्केलेबल समाधान विकसित किए जा रहे हैं.
कुल मिलाकर ये सभी पहलें भारत में एक समन्वित नीति और उद्योग आधारित प्रयास की ओर इशारा करती हैं जहां रीसाइक्लिंग को केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं बल्कि स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए एक बड़े व्यावसायिक अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है.
अपर्णा भवाल का KFC India से इस्तीफा उनके करियर का एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. अब उनका फोकस नए बिजनेस मॉडल के जरिए उभरते ब्रांड्स को ग्रोथ दिलाने पर रहेगा, जिससे मार्केटिंग इकोसिस्टम को भी नई दिशा मिल सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अपर्णा भवाल ने केएफसी (KFC India) में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के पद से इस्तीफा दे दिया है. करीब तीन साल तक कंपनी के साथ जुड़ी रहने के बाद अब उन्होंने उद्यमिता की राह पकड़ने का फैसला किया है. वह अब अपने नए वेंचर के जरिए उभरते ब्रांड्स और स्टार्टअप्स के साथ काम करेंगी.
अपर्णा भवाल फिलहाल अपने पद से ट्रांजिशन फेज में हैं और मार्च तक अपनी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. उम्मीद है कि वह मई 2026 तक आधिकारिक रूप से कंपनी से अलग हो जाएंगी.
शुरू किया नया वेंचर AB Advisory Group
अपर्णा भवाल ने अपना नया वेंचर AB Advisory Group लॉन्च किया है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए वह स्टार्टअप्स, फाउंडर्स और ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को स्ट्रक्चर्ड और ग्रोथ-फोकस्ड मार्केटिंग रणनीतियां बनाने में मदद करेंगी. उनका फोकस बिजनेस को स्पष्ट दिशा, बेहतर स्ट्रक्चर और मजबूत मार्केटिंग के जरिए तेजी से आगे बढ़ाने पर रहेगा.
20 साल से ज्यादा का मार्केटिंग अनुभव
अपर्णा भवाल के पास मार्केटिंग क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है. Yum! Brands का हिस्सा रही KFC के अलावा, उन्होंने HT Media में वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग के तौर पर काम किया है. इसके साथ ही Coca-Cola और Procter & Gamble जैसी दिग्गज कंपनियों में भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं.
इंडस्ट्री में भी सक्रिय भूमिका
कॉरपोरेट जिम्मेदारियों के अलावा अपर्णा भवाल इंडस्ट्री संगठनों में भी सक्रिय रही हैं. वह The Advertising Club of India की मैनेजिंग कमेटी (2025-26) की सदस्य हैं और Indian Influencer Governing Council की एडवाइजरी बोर्ड में भी शामिल हैं.
कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं
मार्केटिंग क्षेत्र में उनके योगदान को कई बार सराहा गया है. उन्हें BW की टॉप 100 मार्केटर्स लिस्ट और BW Marketing World की “Most Influential Women” सूची में 2024 और 2025 में लगातार शामिल किया गया.
रीमा भादुरी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में सीनियर एडिटोरियल लीड हैं. वे मुख्य रूप से मार्केटिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और रिटेल पर लिखती हैं. वे BW मार्केटिंग वर्ल्ड के वर्टिकल पर भी नजर रखती हैं.)
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महंगाई दर 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत देता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026 शीर्षक रिपोर्ट में भारत की आर्थिक ताकत को स्वीकार करते हुए 2025 में 7.4% की मजबूत ग्रोथ दर्ज होने की बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण मांग, GST में राहत और निर्यात में तेजी ने इस विकास को मजबूती दी है.
2026 और 2027 के लिए भी मजबूत ग्रोथ का अनुमान
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4% और 2027 में 6.6% की दर से बढ़ सकती है. यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.
क्यों मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण हैं:
1. ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत खपत
2. GST दरों में कटौती से बढ़ी मांग
3. अमेरिकी टैरिफ से पहले निर्यात में उछाल
4. सेवा क्षेत्र की मजबूत भूमिका
हालांकि, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने के बाद निर्यात में गिरावट भी देखी गई.
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत का बड़ा योगदान
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्था 2025 में 5.4% की दर से बढ़ी, जिसमें भारत का अहम योगदान रहा. यह दिखाता है कि क्षेत्रीय विकास में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
FDI और निवेश में भारत बना प्रमुख केंद्र
रिपोर्ट के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट के बावजूद भारत निवेश आकर्षित करने में आगे रहा. 2025 में भारत में करीब 50 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणाएं हुईं, जो इसे निवेशकों के लिए प्रमुख बाजार बनाती हैं.
रोजगार और ग्रीन सेक्टर में बढ़ते मौके
रिपोर्ट में ग्रीन जॉब्स को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं. वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में भारत का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है. सरकार की PLI योजना और हरित ऊर्जा पर जोर से नए रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है.
मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महंगाई दर 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत देता है. संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. निवेश, खपत और नीतिगत सुधारों के दम पर देश आने वाले वर्षों में भी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रख सकता है.
कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹1.75 का दूसरा अंतरिम डिविडेंड मंजूर किया है. यह फेस वैल्यू का करीब 87.5% है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर की कंपनी पतंजलि फूड्स (Patanjali Foods Limited) ने अपने निवेशकों को बड़ी राहत दी है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹1.75 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. इसके लिए 25 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है, यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास शेयर होंगे, वही डिविडेंड के हकदार होंगे. इस ऐलान के बाद शेयर में हल्की तेजी भी देखने को मिली है.
₹1.75 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान
कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹1.75 का दूसरा अंतरिम डिविडेंड मंजूर किया है. यह फेस वैल्यू का करीब 87.5% है. कंपनी के अनुसार डिविडेंड का भुगतान 20 मई 2026 तक या उससे पहले कर दिया जाएगा.
25 अप्रैल तय हुई रिकॉर्ड डेट
डिविडेंड पाने के लिए 25 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है. इसका मतलब है कि इस दिन तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें ही डिविडेंड का लाभ मिलेगा.
कंपनी इससे पहले भी वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹1.75 प्रति शेयर का पहला अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है. यानी इस साल निवेशकों को लगातार दूसरी बार डिविडेंड का फायदा मिल रहा है.
तिमाही नतीजों में जोरदार प्रदर्शन
कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे भी मजबूत रहे हैं. तीसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 60% बढ़कर ₹594 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹371 करोड़ था. वहीं रेवेन्यू 17% बढ़कर ₹10,484 करोड़ पहुंच गया.
शेयर में आई तेजी
डिविडेंड की घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली. कारोबार के दौरान शेयर 1% से ज्यादा चढ़कर करीब ₹465 के स्तर तक पहुंच गया. फिलहाल शेयर में स्थिरता के साथ हल्की मजबूती बनी हुई है.
कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग में सुधार होगा. महंगाई में नरमी, GST सुधार और अच्छी फसल जैसे फैक्टर शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में ग्रोथ को सपोर्ट कर सकते हैं.
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है. इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है. किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.