बेल्जियम की कंपनी प्रॉक्सिमस ग्रुप (Proximus Group) भारत की मोबाइल कंपनी Route Mobile में 50 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी खरीदने जा रही है. ये सौदा पूरी तरह से नकद में होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
बेल्जियम का प्रॉक्सिमस ग्रुप (Proximus Group) अपनी अनुषंगी कंपनी के जरिए भारत की मोबाइल कंपनी के 57 प्रतिशत से ज्यादा शेयर खरीदने जा रही है. भारत की मोबाइल कंपनी का नाम है रूट मोबाइल (Route Mobile). एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार इस खरीददारी के बाद प्रॉक्सिमस ग्रुप (Proximus Group) की रूट मोबाइल (Route Mobile) में हिस्सेदारी बढ़कर 75 प्रतिशत तक जा पहुंचेगी. सबसे दिलचस्प बात ये है कि ये सौदा पूरी तरह से नकद में होगा.
26 प्रतिशत की खुलेबाजार में होगी नीलामी
एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार नियामक नियमों के तहत रूट मोबाइल के 26 प्रतिशत शेयरों को खुले बाजार में पेशकश के लिए लाया जाएगा. इस पूरे सौदे के बाद रूट मोबाइल (Route Mobile) में प्रॉक्सिमस (Proximus) की हिस्सेदारी बढ़कर 75 प्रतिशत तक जा पहुंचेगी. इस खरीददारी में कंपनी का प्रत्येक शेयर 1626.40 रुपये के भाव से बेचा जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सौदा 5922.40 करोड़ रुपये में तय हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूट मोबाइल (Route Mobile) के कुछ संस्थापक शेयरधारक प्रॉक्सिमस ओपल में छोटी हिस्सेदारी के लिए निवेश भी करेंगे.
आज क्या रहा शेयरों का हाल
रूट मोबाइल के शेयरों के भाव को अगर सोमवार को देखें तो उसमें गिरावट देखने को मिली. कंपनी के शेयर 9 प्रतिशत तक गिर गए. आज कंपनी का शेयर 1494. 65 पर बंद हुआ. इस साल में शेयर ने 22.87 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है. वहीं पिछले एक साल में इसने 11.63 प्रतिशत और पांच साल में कोई 60 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है.
क्वार्टर-3 के नतीजों के बाद बढ़े थे शेयरों के दाम
इस साल जनवरी में तीसरी क्वार्टर के बेहतरीन नतीजों के बाद रूट मोबाइल (Route Mobile) कंपनी के शेयरों की कीमत में इजाफा देखने को मिला था. ये इजाफा भी 13 प्रतिशत तक का हुआ था. कंपनी का शुद्ध लाभ 84.40 प्रतिशत बढ़कर 85.36 करोड़ रुपये हो गया था. जबकि संचालन से राजस्व 75.16 प्रतिशत बढ़कर Q3 985 करोड़ रुपये हो गया था. वहीं अगर दूसरी तिमाही के नतीजों को तीसरी तिमाही से तुलता करें तो तीसरी में 17.53 प्रतिशत का इजाफा हुआ था. जबकि शुद्ध बिक्री 16.54 प्रतिशत बढ़ी थी.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी के चलते आयात 31% उछल गया. हालांकि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान की मजबूत मांग के दम पर निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ सकता है.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था. इस दौरान वस्तु आयात (Merchandise Imports) 31% बढ़कर 70.84 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि निर्यात 16% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा.
कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
जून में भारत का कच्चे तेल का आयात 40% बढ़कर 19.33 अरब डॉलर हो गया. वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 59% बढ़कर 13.36 अरब डॉलर और सोने का आयात 7% बढ़कर 1.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इन वस्तुओं की ऊंची कीमतें और बढ़ती मांग आयात बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
सरकार द्वारा कच्चे कपास के आयात पर शुल्क में छूट दिए जाने के बाद इसका आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया. वहीं उर्वरक (Fertilizer) का आयात भी जून में तीन गुना बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया.
निर्यात में भी रही मजबूत बढ़ोतरी
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत का निर्यात मजबूत बना रहा. जून में इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 21% बढ़कर 11.48 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 19% बढ़कर 4.93 अरब डॉलर और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 9% बढ़कर 4.87 अरब डॉलर रहा.
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस क्षेत्र में भारत का निर्यात 7% बढ़कर 5 अरब डॉलर पहुंच गया. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, हालांकि वहां निर्यात मामूली घटकर 8.17 अरब डॉलर रह गया.
सेवा क्षेत्र से मिली राहत
वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के अनुसार, जून में सेवा निर्यात 3% बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 13% बढ़कर 17.92 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे सेवा क्षेत्र में भारत को 15.11 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) मिला. अंतिम आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस महीने के अंत में जारी करेगा.
चीन से आयात में बड़ा उछाल
जून में चीन से भारत का आयात 40% बढ़कर 13.34 अरब डॉलर हो गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा. वहीं चीन को भारत का निर्यात भी करीब 32% बढ़कर 1.81 अरब डॉलर पहुंच गया.
पहली तिमाही में भी बढ़ा व्यापार घाटा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल वस्तु निर्यात 16% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 20% बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पहुंच गया. इस दौरान देश का व्यापार घाटा 86.86 अरब डॉलर दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) जीडीपी के कम से कम 1% तक पहुंच सकता है. जून में व्यापार घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ा हुआ आयात है. उनका कहना है कि फिलहाल निर्यात मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो चालू खाते के घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, RBI के विदेशी मुद्रा प्रबंधन उपाय इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं.
इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी डील्स में से एक पर मुहर लगा दी है. दरअसल, ग्रुप की कंपनी Aditya Birla Renewables ने 17,200 करोड़ रुपये (करीब 1.8 अरब डॉलर) में Sprng Energy के अधिग्रहण का ऐलान किया है. इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी. जानकारों के अनुसार, इस डील से इस सेक्टर में पहले से मजबूत मौजूदगी रखने वाले अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी कड़ी चुनौती मिल सकती है.
9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी क्षमता
इस अधिग्रहण के बाद Aditya Birla Renewables की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर करीब 9.3 गीगावाट-पीक (GWp) हो जाएगी. इसमें 3.3 गीगावाट की चालू परियोजनाएं और 1.7 गीगावाट निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाकर 20 गीगावाट-पीक से अधिक करना है.
कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से होगी फंडिंग
कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के लिए फंडिंग Grasim Industries और BlackRock समर्थित Global Infrastructure Partners द्वारा प्रबंधित फंड्स के जरिए कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से की जाएगी. Shell Overseas को मिलने वाली अंतिम राशि का निर्धारण कर्ज, नकदी और अन्य वित्तीय समायोजनों के बाद किया जाएगा.
साल के अंत तक पूरी हो सकती है डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अधिग्रहण आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और अन्य औपचारिकताओं के अधीन है. कंपनी को उम्मीद है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद यह सौदा 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा.
क्या होगा इस डील का फायदा?
इस अधिग्रहण के जरिए Aditya Birla Renewables के कमर्शियल एवं इंडस्ट्रियल (C&I) कारोबार को Sprng Energy के यूटिलिटी-स्केल सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ा जाएगा. इससे परियोजनाओं के विकास, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण और एसेट मैनेजमेंट में बेहतर तालमेल बनेगा और परिचालन क्षमता बढ़ेगी.
आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि समूह ने हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर के कारोबार खड़े किए हैं और भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) को भी उसी सोच के साथ देखता है. उनके मुताबिक यह अधिग्रहण देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को गति देने के साथ आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.
ग्रुप के निदेशक आर्यमान विक्रम बिड़ला ने इसे कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. वहीं ABREL के बिजनेस हेड जयंत दुआ ने कहा कि दोनों कंपनियों के एकीकरण से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और भविष्य की परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आएगी.
जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है. नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला लागू होने के बाद यह पहली बार है जब महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से आगे निकली है. ईंधन की बढ़ती कीमतों, परिवहन लागत और खाद्य महंगाई में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में RBI फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा.
इतनी बढ़ गई महंगाई
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में 3.93% रही खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% हो गई. जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है. बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण परिवहन, खाद्य और रेस्तरां सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ, जिससे महंगाई दर में तेजी आई.
खाद्य महंगाई ने बढ़ाया दबाव
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर जून में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% हो गई, जो मई में 4.78% थी. अदरक की कीमतों में 50.41% और टमाटर में 31.92% की बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को ऊपर पहुंचाया. खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई भी 5.05% रही, जो नई CPI श्रृंखला में पहली बार 5% के पार पहुंची है.
ईंधन महंगा होने से बढ़ी परिवहन और सेवाओं की लागत
मई के मध्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर जून के आंकड़ों में देखने को मिला. परिवहन क्षेत्र में महंगाई मई के 1.75% से बढ़कर जून में 4.31% हो गई. वहीं रेस्तरां और होटल सेवाओं में महंगाई 6.91% तथा पान एवं तंबाकू श्रेणी में 6.89% दर्ज की गई.
ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा
जून में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई 4.74% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.92% दर्ज की गई. इससे साफ है कि महंगाई का असर गांवों में शहरों की तुलना में अधिक देखने को मिला.
क्या बढ़ेगी ब्याज दर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 5 अगस्त को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल कम है. इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि अप्रैल के मुकाबले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दरें बढ़ाने का दबाव कम हुआ है. हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मानसून की स्थिति पर RBI की नजर बनी रहेगी.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई?
राज्यों की बात करें तो जून में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना में 6.36% दर्ज की गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश (5.39%), तमिलनाडु (5.24%), ओडिशा (5.15%) और मध्य प्रदेश (5.09%) का स्थान रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन राज्यों में खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
आगे क्या है अनुमान?
DBS Bank, ICRA, Crisil और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई संस्थानों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. क्रिसिल ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत खुदरा महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है, जबकि इक्रा का अनुमान है कि जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 4.6% तक पहुंच सकती है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य वस्तुओं के दाम आगे महंगाई की दिशा तय करेंगे.
मजबूत तिमाही नतीजों के साथ HCL Tech के बोर्ड ने निवेशकों के लिए 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी HCL Technologies ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 20% बढ़कर 4,624 करोड़ रुपये पहुंच गया. बेहतर प्रदर्शन के साथ कंपनी ने निवेशकों के लिए 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है. इसके अलावा AI कारोबार पर बड़ा दांव लगाते हुए HCL Tech ने 3,500 करोड़ रुपये के निवेश से AI डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना भी पेश की है.
HCL Technologies ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 20.3% बढ़कर 4,624 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 3,843 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. वहीं कंपनी की परिचालन आय 14% बढ़कर 34,579 करोड़ रुपये पर पहुंच गई.
12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान
मजबूत तिमाही नतीजों के साथ HCL Tech के बोर्ड ने निवेशकों के लिए 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. कंपनी ने 17 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट और 27 जुलाई 2026 को डिविडेंड भुगतान की तारीख तय की है.
पूरे साल के लिए ग्रोथ गाइडेंस बरकरार
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान (Revenue Guidance) में कोई बदलाव नहीं किया है. HCL Tech ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 1% से 4% राजस्व वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है.
AI और नई तकनीकों पर रहेगा फोकस
HCL Tech की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी अपने विविध पोर्टफोलियो के जरिए ग्राहकों को नई तकनीकों को अपनाने में मदद कर रही है. उन्होंने कहा कि HCL Tech कर्मचारियों को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित करने और पूरे संगठन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर लगातार निवेश कर रही है.
वहीं कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी को 2.4 अरब डॉलर के नए ऑर्डर मिले हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा तिमाही ऑर्डर बुक है.
AI डेटा सेंटर पर 3,500 करोड़ रुपये का निवेश
HCL Tech ने AI कारोबार को विस्तार देने के लिए भारत में AI आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की है. कंपनी का बोर्ड इस परियोजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दे चुका है.
यह निवेश नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के जरिए किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य AI डेटा सेंटर की क्षमता को 50 मेगावॉट तक विकसित करना है. HCL Tech का कहना है कि यह निवेश डेटा सेंटर डिजाइन, AI क्लाउड ऑपरेशन और सॉफ्टवेयर सेवाओं के साथ मिलकर ग्राहकों को एंड-टू-एंड AI समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
कर्मचारियों की संख्या में आई गिरावट
तिमाही के दौरान HCL Tech के कर्मचारियों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या 3,292 घटकर 2,23,889 रह गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2,27,181 था.
वहीं, पिछले 12 महीनों (LTM) के आधार पर कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (Attrition Rate) 12.7% रही, जो मार्च 2026 तिमाही में 12.5% थी. इससे संकेत मिलता है कि आईटी सेक्टर में कर्मचारियों के पलायन की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
सोमवार को सेंसेक्स 47.01 अंक यानी 0.06% की बढ़त के साथ 77,616.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 4.10 अंक चढ़कर 24,211 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने बेहद उतार-चढ़ाव भरा सत्र देखा. कारोबार की शुरुआत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के करीब फिसल गया था. हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी लौटने से बाजार ने शानदार वापसी की और दोनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 47.01 अंक यानी 0.06% की बढ़त के साथ 77,616.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 4.10 अंक चढ़कर 24,211 पर बंद हुआ. बाजार की इस रिकवरी में आईटी सेक्टर की अहम भूमिका रही.
TCS और HCL Tech ने संभाली बाजार की कमान
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 13 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी TCS में देखने को मिली, जिसका शेयर 5.43% चढ़ गया. इसके अलावा HCL Tech में 5.02%, Tech Mahindra में 3.34% और Infosys में 3.17% की तेजी दर्ज की गई. NTPC और Kotak Mahindra Bank भी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर Tata Steel, Eternal, UltraTech Cement, InterGlobe Aviation (IndiGo), Maruti Suzuki और Bharat Electronics (BEL) के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही मजबूती
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट ने भी सकारात्मक रुख दिखाया. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.01% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.03% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे बड़ा गेनर रहा, जबकि एफएमसीजी और मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा.
क्यों टूटा था बाजार?
सोमवार को शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा. दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई की खबरों और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 4% से ज्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल और ट्रेड बैलेंस पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी, जिसका असर बाजार की शुरुआती कमजोरी के रूप में देखने को मिला. हालांकि बाद में आईटी शेयरों में खरीदारी और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार ने नुकसान की भरपाई कर ली.
आज बाजार की नजर किन संकेतों पर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों की चाल और जारी तिमाही नतीजों पर रहेगी. सोमवार की मजबूत रिकवरी यह संकेत देती है कि गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है.
इन शेयरों पर रखें नजर
आज घरेलू शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. निवेशक Emcure Pharmaceuticals, Welspun Enterprises, HCL Technologies, Fino Payments Bank, Grasim Industries, Zee Entertainment, Biocon और SBI Funds Management पर नजर बनाए रखेंगे. HCL Tech ने भारत में AI डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है, जबकि SBI Funds Management का 9,813 करोड़ रुपये का आईपीओ आज निवेशकों के लिए खुल गया है. वहीं Grasim की सहायक कंपनी ने 17,200 करोड़ रुपये में Solenergi Power के अधिग्रहण को मंजूरी दी है. इसके अलावा Zee Entertainment को FCCB से जुड़े प्रस्ताव पर RBI की मंजूरी मिली है, जबकि Biocon में Mylan की हिस्सेदारी बिक्री की खबर भी चर्चा में है. दूसरी ओर Emcure, Welspun और Fino Payments Bank से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट भी निवेशकों का ध्यान खींचेंगे. आज L&T Technology Services, Tata Elxsi, Anand Rathi Share and Stock Brokers, Aditya Birla Money, Jindal Saw और अन्य कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे भी जारी करेंगी, जिससे इन शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
संशोधित नियमों के तहत निवेश, वित्तीय खुलासे, नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े प्रावधान पहले के मुकाबले अधिक सख्त कर दिए गए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के सेवा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से निवेश, नई नौकरी, उपहार स्वीकार करने और वित्तीय खुलासों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारी दो साल तक सेबी के समक्ष किसी भी व्यक्ति या संस्था का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगे.
परिवार और आश्रित की परिभाषा का दायरा बढ़ा
नए नियमों के तहत 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा को पहले से अधिक व्यापक बनाया गया है. अब इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से काफी हद तक निर्भर हैं. इस बदलाव के बाद निवेश और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नियम इन सभी लोगों पर भी लागू होंगे.
नौकरी छोड़ने के बाद दो साल तक नहीं कर सकेंगे प्रतिनिधित्व
SEBI ने पूर्व कर्मचारियों के लिए दो साल की अनिवार्य 'कूलिंग-ऑफ' अवधि लागू कर दी है. इसका मतलब है कि नौकरी छोड़ने के बाद अगले दो वर्षों तक कोई भी पूर्व कर्मचारी किसी व्यक्ति, कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष लंबित मामलों, सेटलमेंट, मंजूरी या अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) कार्यवाही में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा. इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी नई नौकरी के लिए किसी कंपनी से बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा.
निवेश नियमों में भी सख्ती
संशोधित नियमों के तहत कर्मचारियों के लिए 'अनुमत' और 'प्रतिबंधित' निवेश की स्पष्ट श्रेणियां तय की गई हैं. अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य सेवा अवधि के दौरान सीधे शेयरों, इक्विटी में बदलने वाले वित्तीय साधनों और डेरिवेटिव्स में नया निवेश नहीं कर सकेंगे. हालांकि म्यूचुअल फंड, REITs और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश माध्यमों में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी.
कुछ निवेश उत्पादों पर तय हुई सीमा
SEBI ने कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है. नए नियमों के अनुसार, ऐसे निवेश कर्मचारी के कुल निवेश का 25% से अधिक नहीं हो सकेंगे. हालांकि जीवनसाथी को मिलने वाले Employee Stock Options (ESOPs) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन जैसी कुछ श्रेणियों को सीमित छूट दी गई है.
गिफ्ट स्वीकार करने के नियम भी बदले
SEBI ने उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है. अब कर्मचारियों को 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के किसी भी उपहार की जानकारी देना अनिवार्य होगा. पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले सामान्य उपहार किन परिस्थितियों में स्वीकार किए जा सकते हैं.
इस समझौते के तहत TCS ABB के ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशंस को AI आधारित तकनीक से आधुनिक बनाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ग्रुप की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली. ABB के साथ हुई बहु-वर्षीय रणनीतिक डील की घोषणा के बाद कंपनी का शेयर करीब 6% तक चढ़ गया. दोपहर में खबर लिखे जाने तक TCS का शेयर 5.56% की बढ़त के साथ 2,184.00 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इस खबर का असर पूरे आईटी सेक्टर पर भी दिखा और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 4% की तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया. कंपनी ने इसके साथ ही संगठन में बड़े बदलावों का भी ऐलान किया है, जिसे भविष्य की ग्रोथ रणनीति का अहम कदम माना जा रहा है.
ABB के लिए संभालेगी ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशंस
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, इस समझौते के तहत TCS, ABB के वैश्विक नेटवर्क ऑपरेशंस की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. कंपनी सिर्फ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लिकेशन मैनेजमेंट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि Network-as-a-Service (NaaS) मॉडल के जरिए एंड-टू-एंड नेटवर्क ऑपरेशंस का संचालन करेगी.
इस प्रोजेक्ट के तहत ABB के नेटवर्क को AI आधारित, सुरक्षित और आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदला जाएगा. इससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा, परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ेगी और साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी.
AI रणनीति पर बड़ा दांव
TCS के मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के प्रेसिडेंट अनुपम सिंघल ने कहा कि कंपनी AI की मदद से ऐसा स्मार्ट नेटवर्क तैयार करेगी, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सके, बदलावों को समझ सके और समय के साथ लगातार बेहतर होता रहे. उनका कहना है कि यह पहल ABB को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल नेटवर्क उपलब्ध कराएगी.
कंपनी में हुआ बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
ABB डील के साथ ही TCS ने अपने संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने पांच नए बिजनेस ग्रुप बनाए हैं, जिनमें ServiceNow, Travel & Transport, Energy & Utilities, US West Coast और Global Autonomous Business शामिल हैं. इसके अलावा बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी, लाइफ साइंसेज, कम्युनिकेशन और मीडिया जैसे प्रमुख कारोबारों के लिए नए बिजनेस लीडर्स की नियुक्ति भी की गई है.
बैंकिंग कारोबार पर रहेगा विशेष फोकस
TCS के कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से आता है, जबकि उत्तर अमेरिका कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है, जहां से करीब आधी कमाई होती है. इसी रणनीति के तहत कंपनी ने अमेरिकी बैंकिंग कारोबार को US East और US West दो हिस्सों में बांट दिया है, ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकें.
जून तिमाही के नतीजों ने भी बढ़ाया भरोसा
पिछले सप्ताह जारी जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया था. बैंकिंग सेक्टर से मजबूत मांग और रुपये में कमजोरी का फायदा कंपनी को मिला. अब ABB के साथ हुई नई डील और संगठनात्मक बदलाव को कंपनी की AI-केंद्रित रणनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कच्चे तेल में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है. अमेरिका ने एक सप्ताह के भीतर ईरान पर चौथी सैन्य कार्रवाई की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज होने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4% की जोरदार तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 74 डॉलर के पार निकल गया. वहीं, पर्याप्त सप्लाई और कमजोर मांग की उम्मीद के चलते अमेरिकी प्राकृतिक गैस सात हफ्तों के निचले स्तर पर फिसल गई.
पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4% की तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 74 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता दिखा.
अमेरिका-ईरान टकराव से सप्लाई पर बढ़ी चिंता
कच्चे तेल में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है. अमेरिका ने एक सप्ताह के भीतर ईरान पर चौथी सैन्य कार्रवाई की. यह हमला ईरान की ओर से साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के जवाब में किया गया.
इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अगली सूचना तक बंद कर दिया है. हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज किया है, लेकिन निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी चिंता ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया.
शांति वार्ता की उम्मीदों को झटका
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की खबरों के बाद कच्चे तेल में कुछ नरमी देखने को मिली थी. लेकिन ताजा सैन्य घटनाक्रम ने उस राहत को खत्म कर दिया. अब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना भी कमजोर पड़ती नजर आ रही है. ईरान का कहना है कि आगे किसी भी वार्ता से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल निर्यात से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति जरूरी होगी.
ब्रेंट और WTI दोनों में जोरदार उछाल
सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 3.93% की तेजी के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 3.98% चढ़कर 74.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.
सात हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंची प्राकृतिक गैस
एक ओर जहां कच्चे तेल में तेजी देखने को मिली, वहीं अमेरिकी प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गईं. प्राकृतिक गैस का भाव घटकर 2.90 डॉलर प्रति MMBtu रह गया है.
इस गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका में आने वाले दिनों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहने का अनुमान है, जिससे एयर कंडीशनिंग की मांग कम होने और गैस आधारित बिजली उत्पादन घटने की उम्मीद है. इसके अलावा फ्रीपोर्ट LNG ने 10 जुलाई से अगस्त के आखिर तक अपने प्लांट में रखरखाव (मेंटेनेंस) का काम शुरू किया है, जिससे अस्थायी रूप से गैस की खपत भी कम होगी.
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 3 जुलाई तक देश में प्राकृतिक गैस का भंडार पिछले पांच वर्षों के औसत से 6.6% अधिक है. पर्याप्त सप्लाई और कमजोर मांग के अनुमान के कारण फिलहाल प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
मंत्रालय का कहना है कि पोर्टल को बैंकिंग सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से इंटीग्रेट करने और प्रोसेसिंग तेज करने से अधिक योग्य आवेदकों तक समय पर कर्ज पहुंचाया जा सकेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी योजनाओं के तहत आसान और तेज कर्ज उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए जनसमर्थ पोर्टल पर बड़ी संख्या में लोन आवेदन खारिज होने के बाद वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को सख्त निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे जनसमर्थ पोर्टल को अपने लोन मैनेजमेंट सिस्टम से जल्द जोड़ें, आवेदन निपटाने की प्रक्रिया तेज करें और वित्त वर्ष 2026 में 43.2 फीसदी तक पहुंची रिजेक्शन दर को कम करने के लिए जरूरी सुधार लागू करें.
जनसमर्थ पोर्टल पर लोग अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और कई सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं के तहत डिजिटल मंजूरी भी प्राप्त कर सकते हैं. मंत्रालय और संबंधित विभाग इसी प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने पाया कि बड़ी संख्या में आवेदन अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद भी आवेदकों द्वारा प्रक्रिया बीच में छोड़ देने के कारण अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच पाते. इसी वजह से बैंकों को अपनी डिजिटल लेंडिंग प्रक्रिया और आवेदन सत्यापन प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.
कन्वर्जन रेट बढ़ाने पर जोर
मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने बिजनेस रूल इंजन को नियमित रूप से अपडेट करें ताकि डिजिटल मंजूरी के बाद आवेदन बीच में छोड़ने (ड्रॉप-ऑफ) की घटनाएं कम हों. इसके अलावा सभी पंजीकृत शाखाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) के जरिए ग्राहकों की मदद बढ़ाने, बैंक शाखाओं, वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर पोर्टल का प्रचार करने तथा बैंक अधिकारियों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, जनसमर्थ पोर्टल को बैंकों के लेंडिंग मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने पर आवेदन से लेकर अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी, जिससे लोन मंजूरी का समय काफी कम हो सकता है.
तीन गुना बढ़ी मंजूरियां
वित्त वर्ष 2026 में जनसमर्थ पोर्टल के जरिए करीब 1.31 करोड़ (13.1 मिलियन) लोन आवेदनों को मंजूरी मिली, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या करीब 40 लाख थी. यानी एक साल में मंजूरियों की संख्या तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई.
हालांकि, बैंक अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मंजूरी मिलने के बावजूद कई आवेदन अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाते. इसकी प्रमुख वजह अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और आवेदकों का बाद में लोन नहीं लेने का फैसला करना है.
जनसमर्थ का बढ़ा दायरा
फरवरी में सरकार ने जनसमर्थ पोर्टल का दायरा बढ़ाते हुए इसमें CGTMSE और ECLGS 5.0 जैसी योजनाओं को भी शामिल किया. इसके साथ ही MSME के लिए नया क्रेडिट असेसमेंट मॉडल और महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा गुजरात की कई राज्य सरकारों की योजनाएं भी जोड़ी जा रही हैं.
फिलहाल जनसमर्थ पोर्टल पर 46 सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाएं उपलब्ध हैं. इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, पीएमईजीपी, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, DAY-NRLM, स्टार्टअप लोन, रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग, फिशरीज किसान क्रेडिट कार्ड, होम लोन योजनाएं, SRMS, बुनकर मुद्रा योजना, ECLGS 5.0 और MSME माइक्रो क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं शामिल हैं.
आवेदन की गुणवत्ता भी अहम
BLS E-Services के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) लोकनाथ पांडा के अनुसार, केवल लोन प्रोसेसिंग का समय कम करना पर्याप्त नहीं है. आवेदन की गुणवत्ता में सुधार भी उतना ही जरूरी है. उनका कहना है कि अधिकतर आवेदन पात्रता के अभाव में नहीं, बल्कि अधूरे दस्तावेज या गलत जानकारी के कारण खारिज होते हैं.
उन्होंने कहा कि यदि बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स आवेदकों को दस्तावेज तैयार करने, जानकारी सत्यापित कराने और सरकारी योजनाओं के बारे में सही मार्गदर्शन देने में मदद करें, तो रिजेक्शन दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में.
विशेषज्ञों के अनुसार मंत्रालय के निर्देश प्रभावी ढंग से लागू होने पर डिजिटल लेंडिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. उनके अनुसार, बैंकिंग सिस्टम से पूर्ण इंटीग्रेशन होने पर आवेदन तेजी से प्रोसेस होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स की भूमिका भी और मजबूत होगी.
करीब ₹1,500 करोड़ की इस संभावित डील के लिए कंपनी दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया में पहुंच चुकी है. अगर यह सौदा पूरा होता है तो देश में तेजी से बढ़ रहे स्मार्ट मीटर बाजार में अडानी ग्रुप की स्थिति और मजबूत हो जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में अपनी बादशाहत मजबूत करने की दिशा में गौतम अडानी के नेतृत्व में अडानी ग्रुप (Adani Group) एक और बड़ा कदम उठा सकता है. IntelliSmart Infrastructure का ₹3,050 करोड़ में अधिग्रहण करने के कुछ ही हफ्तों बाद अब समूह की कंपनी Adani Energy Solutions की नजर Polaris Smart Metering पर है. करीब ₹1,500 करोड़ की इस संभावित डील के लिए कंपनी दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया में पहुंच चुकी है. यदि यह सौदा पूरा होता है तो देश में तेजी से बढ़ रहे स्मार्ट मीटर बाजार में अडानी ग्रुप की स्थिति और मजबूत हो जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Polaris Smart Metering की बिक्री प्रक्रिया चला रही I Squared Capital ने दूसरे चरण के लिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें Adani Energy Solutions के अलावा APRAAVA Energy और प्राइवेट इक्विटी फंड Actis भी शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगस्त की शुरुआत तक बाइंडिंग बिड्स मिलने की उम्मीद है. इस डील की संभावित वैल्यूएशन करीब ₹1,500 करोड़ आंकी जा रही है.
I Squared Capital करना चाहती है एग्जिट
Polaris Smart Metering घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक ग्राहकों के लिए स्मार्ट बिजली और गैस मीटर उपलब्ध कराती है. I Squared Capital ने फरवरी 2023 में अपने ISQ Growth Markets Infrastructure Fund के जरिए कंपनी में लगभग 100 मिलियन डॉलर का निवेश कर कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी थी. अब फंड इस निवेश से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है.
हालांकि, Adani Energy Solutions और APRAAVA Energy ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि I Squared Capital और Actis की ओर से भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला.
यूपी और पश्चिम बंगाल में बड़े प्रोजेक्ट
Polaris Smart Metering को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने के ठेके मिले हैं. कंपनी लखनऊ और अयोध्या क्लस्टर में 51 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना पर काम कर रही है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी उसे 22 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला हुआ है. मजबूत ऑर्डर बुक और तेजी से बढ़ते कारोबार की वजह से कंपनी निवेशकों के लिए आकर्षक बनी हुई है.
2027 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 2027 तक देशभर में 25 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा है. इस योजना पर करीब ₹1.35 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है. CareEdge की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी केवल 5-6% उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट मीटर हैं, जबकि जापान में यह आंकड़ा 100%, अमेरिका में 73% और वैश्विक औसत 43% है. ऐसे में आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में तेज विस्तार की उम्मीद है.
पहले ही कर चुका है बड़ा अधिग्रहण
Adani Energy Solutions ने हाल ही में IntelliSmart Infrastructure का ₹3,050 करोड़ में अधिग्रहण किया था. यह देश की शीर्ष तीन स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में शामिल है और उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा असम में करीब 2.2 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित कर चुकी है. Polaris Smart Metering का संभावित अधिग्रहण अडानी ग्रुप की इसी विस्तार रणनीति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.