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प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों में नरमी के संकेत से चमके इन कंपनियों के शेयर
रिजर्व बैंक द्वारा 3 मई को जारी किए गए ड्राफ्ट में प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के बेहद सख्त नियमों की बात कही गई थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों (Project Financing Rules) में नरमी के संकेत की खबर सामने आते ही कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है. एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार ने RBI से प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों में नरमी बरतने को कहा है. इससे संबंधित ड्राफ्ट पर वित्त मंत्रालय ने अपना सुझाव भी भेज दिया है. इस सुझाव में प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों में नरमी बरतने के साथ ही पब्लिक और प्राइवेट प्रोजेक्टस पर एक जैसे नियमों पर फिर से विचार की बात कही गई है.
इनके लिए बड़ी खबर
इस खबर को प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में शामिल बैंकों, और NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है. इस खबर के सामने आने के बाद Power Finance Corporation और REC जैसी सरकारी कंपनियों के शेयर चढ़ गए हैं. PFC के शेयर करीब 1 प्रतिशत की छलांग के साथ 485.90 रुपए पर कारोबार कर रहे हैं. जबकि REC के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई है. यह फिलहाल 522 रुपए पर ट्रेड कर रहा है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि इससे पहले के 5 सत्रों में ये शेयर 1.41% गिर चुका है.
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ये है RBI का ड्राफ्ट
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 3 मई को प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग को लेकर एक ड्रॉफ्ट जारी किया था. ड्रॉफ्ट में बेहद सख्त नियमों की बात से प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग कंपनियों में घबराहट फैल गई थी. RBI के ड्राफ्ट में कहा गया था कि प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में जो भी आवंटन किया जाएगा उसका 5 प्रतिशत प्रोविजनिंग करना पड़ेगा. इसके अलावा, ड्राफ्ट में पब्लिक और प्राइवेट दोनों तरह के प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के लिए एक तरह के नियम बनाने की बात भी कही गई थी. खबरों के मुताबिक, अब वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में अपनी सिफारिश RBI को भेजी है. मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि निजी और सरकारी प्रोजेक्ट्स में अंतर करने की जरूरत है.
प्रोविजनिंग करें कम
वित्त मंत्रालय ने अपने सुज्गाव में कहा है कि निजी परियोजनाओं में कई कारणों के चलते फेल होने की आशंका बढ़ जाती है. जबकि पब्लिक प्रोजेक्ट में सरकार की गारंटी होती है. इसलिए इन प्रोजेक्ट के विफल होने की संभावना बेहद कम रहती है. लिहाजा पब्लिक और प्राइवेट प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग के लिए नियम भी अगल-अलग होने चाहिए. इसके अलावा मंत्रालय ने 5 प्रतिशत की प्रोविजनिंग पर भी आपत्ति जताई है. उसका कहना है कि इतनी ज्यादा प्रोविजनिंग से कंपनियों की कॉस्ट ऑफ क्रेडिट ज्यादा हो जाएगी. ऐसे में प्रोजेक्ट प्रोविजनिंग 1 से 2 प्रतिशत ही होनी चाहिए.
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