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नौकरीपेशा की वित्त मंत्री से है ये उम्मीद, क्या अंतरिम बजट में इसे मिलेगी मंजूरी?
नौकरीपेशा ज्यादातर लोग उन निवेश योजनाओं को लेते हैं जिनमें उन्हें 80 सी के तहत छूट मिलती है. सरकार को कुछ प्रावधान ऐसे करने चाहिए जिससे न्यू टैक्स पॉलिसी को बढ़ावा मिले.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
वित्त मंत्री के बजट पेश करने में अब 24 घंटे से भी कम का समय रह गया है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर एक नौकरीपेशा देश की वित्त मंत्री से क्या उम्मीदें लगाए बैठा है.क्योंकि ये चुनावी साल है तो ऐसे में हर वर्ग की उम्मीदें बढ़ गई हैं. हर वर्ग यही सोच रहा है कि वित्त मंत्री आखिर क्या करने जा रही हैं. आइए हम आपको बताने जा रहे हैं देश के उस तपके की उम्मीदें जो वित्त मंत्री से कुछ बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है.
बीमा पॉलिसियों से जीएसटी हटाएं
मौजूदा समय में अगर आप कोई भी पॉलिसी लेते हैं तो उस प्रीमियम पर जीएसटी लगता है. किसी भी प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है. इस जीएसटी के कारण होता ये है कि हर बीमा का वन टाइम प्रीमियम बहुत महंगा हो जाता है. खुद बीमा इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार इस जीएसटी को कम करती है तो इसका फायदा आम आदमी को बड़े स्तर पर मिल सकता है. इससे बीमा कारोबार तो बढ़ेगा ही सुरक्षा का दायरा भी बढ़ता जाएगा.
टैक्स स्लैब में हो बदलाव
करदाताओं की सबसे बड़ी मांग यही होती है कि उन्हें इनकम टैक्स में लाभ मिले. दुनिया भर में बढ़ी महंगाई ने भारत में भी अपना असर दिखाया है. ऐसे में सबसे बेहद जरूरी बात ये है कि मीडिल क्लास आदमी उम्मीद कर रहा है कि टैक्स स्लैब में इजाफा हो जाएगा. जिससे उसकी बचत में इजाफा हो सके. पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में पैदा हुए हालातों के बाद सभी देशों ने अपने करों में बदलाव किया है जिससे व्यवसाय चलते रहें और रोजगार बना रहे. लेकिन भारत में ये बदलाव नहीं हुए हैं. ऐसे में जानकार मान रहे हैं कि सरकार को इसमें इजाफा करना चाहिए. नौकरीपेशा आदमी स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी 50 हजार से 75 हजार किए जाने की उम्मीद कर रहा है.
न्यू टैक्स स्लैब में सुधार
जानकार ये भी मान रहे हैं कि सरकार ने जो न्यू टैक्स सुधार लागू किए हैं उसके अनुसार मौजूदा समय में वो सभी हिंदू अविभाजित परिवारों और व्यक्तियों के संघो पर लागू होता है. आयकर स्लैब को पहले से घटाकर 7 से 6 कर दिया गया है. बजट 2024 को लेकर जानकारों का मानना है कि इसमें और सुधार किया जाना चाहिए. ज्यादातर भारतीय वहां निवेश करते हैं जहां उन्हें 80 सी के तहत छूट मिलती है. ऐसे निवेश 150000 रुपये तक की कटौती प्रदान करते हैं. इसके अलावा सैलरीड एचआरए एलटीए जैसे फायदों को भी शामिल करता है. नई कर व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार को कुछ कदम और उठाए जाने की जरूरत है. इनमें पीएफ कटौती को धारा 80 सी के तहत लाने की जरूरत है जबकि एनपीएस में कर्मचारी योगदान को 80 सीसीडी के तहत लाने की जरूरत है.
उम्मीदों की कड़ी में शामिल है कैपिटल गेन टैक्स
मौजूदा समय में अगर आप कोई निवेश करते हैं तो वो दो तरह का होता है. इसमें शॉर्ट टर्म निवेश भी शामिल होता है और लॉन्ग टर्म निवेश भी शामिल होता है. केन्द्र सरकार ने लॉन्ग टर्म पर अलग और शॉर्ट टर्म पर अलग टैक्स लगाया है. जानकारों का मानना है कि इस पूरे कैपिटल गेन टैक्स सिस्टम के ओवरहॉल की जरूरत है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले बजट में इन्हें तर्कसंगत और मानकीकृत किया जा सकता है. सरकार सभी तरह की ब्याज दरों में एकरूपता ला सकती है, जिससे इसका स्वरूप बदल सके. सरकार इसमें ऐसे बदलाव भी कर सकती है जिससे सभी निवेशकों को उत्साह मिले.
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