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आजादी@75: 7 दशकों में भारत में बदली इन सात सेक्टर्स की तस्वीर, अंग्रेज कर गए थे खजाना खाली

एक तरफ जहां 1947 में अंग्रेज भारत को बंटवारे के दंश के साथ ही खजाना खाली कर गए थे, वहीं अब भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः आजादी के 75 साल कल सोमवार को पूरे हो जाएंगे. 15 अगस्त 1947 में जो भारत हमको मिला था और सात दशक बाद आज के भारत में जमीन-आसमान का अंतर है. इकोनॉमी से लेकर के हर सेक्टर में भारत दुनिया में कमाल कर रहा है. एक तरफ जहां 1947 में अंग्रेज भारत को बंटवारे के दंश के साथ ही खजाना खाली कर गए थे, वहीं अब भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. 

भारत के हेल्थ सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार

भारत की इकोनॉमी जो 1947 में एक खस्ताहाल इकोनॉमी थी, लोगों के पास काम नहीं था, अनाज की कमी से लोग भूखे मर रहे थे, हैजा व मलेरिया जैसी बीमारियों से लोग ग्रसित थे, उसने सभी पर काबू पा लिया है. इतना ही नहीं भारत अब हेल्थ सेक्टर में भी झंडे गाढ़ रहा है. भारत में पोलियो, चेचक जैसी बीमारियां न के बराबर हैं, कोविड वैक्सीनेशन किया गया और दुनिया भर में भारतीय कंपनियां दवाइयों का निर्यात करने लगी हैं.पोलियो का समूल नाश करने वाले देशों में भारत सबसे अगली पंक्ति में खड़ा था. देश में चेचक जैसी महामारियों की वजह से लोगों की जान जाना कभी आम बात थी. आज यह खत्म हो चुका है. महामारियां अब भारत में वैसा कहर नहीं बरपा पातीं, जैसा 75 साल पहले था. दुनियाभर के लोग इलाज के लिए भारतीय अस्पतालों में आते हैं, क्योंकि विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं यहां सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं.

भारत आर्थिक शक्ति बनने की ओर

किसी देश का यह कह पाना ही बहुत बड़ी बात है कि वह पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है. आर्थिक शक्ति की बात चलते ही हर देश चीन के बाद भारत की ओर देखने लगता है. महज सात दशक में भूखा, गरीब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आज भारत के नौजवान न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहराए हुए हैं. विश्व की प्रमुख टेक कंपनियों की कमान भी भारतीयों के पास ही है. 

तीन क्रांतियों ने लाया बदलाव

अंग्रेजों ने कृषि व्यवस्था को इस हाल में पहुंचा दिया था कि आजादी के समय देश के पास न तो पर्याप्त अनाज था और न ही अनाज उत्पादन के लिये आधारभूत सुविधाएं थीं. साल 1950-51 में केवल 5 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन होता था जो कि देश की 35 करोड़ जनसंख्या का पेट भरने के लिये पर्याप्त नहीं था. देश में आजादी के बाद हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और औद्योगिक क्रांति लाई गईं, जिससे देश में अनाज व दूध का उत्पादन बढ़ा और उद्योगों का जाल सा बिछ गया. 1965 के भारत-पाक युद्ध के वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने लोगों से व्रत रखने को कहा था ताकि सैनिकों को खाने की कमी ना हो. आज भारत कई अनाजों में दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से है. नतीजा यह हुआ कि आज भारत न सिर्फ अपनी समूची जनसंख्या को खाद्यान्न उपलब्ध करवाता है बल्कि कृषि उत्पादों का निर्यात भी करता है. वर्तमान में भारत खाद्य उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है.

आय में इजाफा, गरीबी भी कम हुई

 इकोनॉमी के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय में भी काफी इजाफा हुआ है. जहां 1947 में एक आदमी की आय मात्र 231 डॉलर थी, वहीं अब यह बढ़कर के 1900 डॉलर से अधिक हो गई है. टाटा-बिरला से शुरू हुआ सफर आज के दौर में मुकेश अंबानी और गौतम अडानी पर आ गया है. अंबानी और अडानी समेत कई भारतीय दुनिया के सबसे धनी लोगों की सूची में हैं. सबसे ज्यादा नए करोड़पति भारत से आ रहे हैं. लेकिन यह उपलब्धि आधी है क्योंकि भारत आज भी अमीर लोगों का गरीब देश है. इतने धनी लोगों के बावजूद भारत में गरीबों की संख्या 75 साल में कम नहीं हुई है. 1947 में 80 प्रतिशत भारतीय गरीब थे, आज 22 प्रतिशत हैं. लेकिन उनकी संख्या लगभग बराबर है.

चांद पर लहराया तिरंगा

भारत में आधुनिक अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक डॉक्टर विक्रम साराभाई को माना जाता है. उन्होंने 15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो; ISRO) की स्थापना की और जल्द ही उसे नई ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया. देश का पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' था जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ द्वारा अंतरिक्ष में छोड़ा गया था. पहले उपग्रह के सफलतापूर्वक प्रक्षेपित होने के बाद भारत ने एक के बाद एक कीर्तिमान स्थापित करने शुरू किए. 7 जून 1979 को भारत का दूसरा उपग्रह 'भास्कर' पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया.

इसके अलावा 22 अक्टूबर 2008 को इसरो द्वारा चंद्रयान-1 भेजा गया जो 14 नवंबर 2008 को चंद्रमा की धरती पर पहुंचा. चंद्रयान-1 ने चांद पर भारतीय तिरंगा लहराकर इतिहास रच दिया और चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया. यह जानकर गर्व होगा कि चंद्रयान-1 ने ही चांद पर पानी की खोज की थी.

शिक्षा और डिजिटल इंडिया 

स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास कर रहा है. भारत की वर्तमान साक्षरता दर 74.04% है. स्वतंत्रता के समय यह मात्र 12% थी. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% है.

आईटी की ताकत

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की बात हो और भारत का जिक्र ना आए, ऐसा दुनिया में कहीं नहीं होता. कहते हैं कि दुनिया में जितने भी सॉफ्टवेयर काम कर रहे हैं, उनमें कहीं ना कहां किसी भारतीय का योगदान जरूर होगा. 

VIDEO: अब दालें तेजी से छू रही आसमान

 


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