टाटा संस में उत्तराधिकार की दौड़ तीन नामों तक सिमटी, टी. वी. नरेंद्रन सबसे आगे

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टी. वी. नरेंद्रन सबसे मजबूत आंतरिक दावेदार हैं, जबकि एनएसई के प्रमुख आशीष चौहान के नाम पर भी विचार किया जा रहा है.

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Saturday, 05 September, 2026
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2.75 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश को तीन नामों तक सीमित कर दिया है. मामले से परिचित लोगों के अनुसार, जिन नामों पर विचार चल रहा है, उनमें टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टी. वी. नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और ग्रुप सीएफओ सौरभ अग्रवाल तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एमडी और सीईओ आशीष चौहान शामिल हैं.

आंतरिक दावेदारों में नरेंद्रन सबसे आगे बताए जा रहे हैं, जबकि अग्रवाल के निवेश बैंकिंग और पूंजी आवंटन से जुड़े अनुभव को देखते हुए उनके नाम पर विचार किया जा रहा है. वहीं, भारत के पूंजी बाजार के अनुभवी और एनएसई की स्थापना में शामिल रहे चौहान इस दौड़ में संभावित ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में उभरे हैं.

उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, अगले चेयरमैन के चयन में टाटा संस का बोर्ड और कंपनी को नियंत्रित करने वाले टाटा ट्रस्ट्स अहम भूमिका निभाएंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने शॉर्टलिस्ट किए गए नामों पर वरिष्ठ सरकारी नेताओं के साथ चर्चा की है. संबंधित पक्षों द्वारा उम्मीदवारों पर विचार किए जाने के बाद फैसला होने की उम्मीद है.

चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और फिलहाल अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में हैं. उन्होंने पिछले महीने घोषणा की थी कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए अन्य नामों में नोएल टाटा का संभावित अंतरिम चेयरमैन के तौर पर नाम, टाटा संस की ग्रुप चीफ डिजिटल ऑफिसर आरती सुब्रमण्यम, टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्रा और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा शामिल हैं.

मामले से परिचित लोगों के अनुसार, तकनीक, पूंजी बाजार, वित्तीय सेवाओं और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में चौहान के अनुभव को देखते हुए वह एक अप्रत्याशित विकल्प के रूप में उभर सकते हैं.

चौहान 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में शामिल अधिकारियों में रहे हैं. इसके बाद उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के एमडी और सीईओ के रूप में काम किया और 2022 में एनएसई के प्रमुख के तौर पर वापस लौटे. वह रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम कर चुके हैं.

चौहान आईआईटी बॉम्बे से स्नातक हैं और उनके पास आईआईएम कलकत्ता से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री है. फिलहाल वह एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ की देखरेख कर रहे हैं, जिसके एक्सचेंज का मूल्यांकन करीब 5 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है.

आंतरिक दावेदारों में नरेंद्रन सबसे आगे

नरेंद्रन को समूह के भीतर सबसे मजबूत परिचालन दावेदार माना जा रहा है. वह तीन दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हैं. उन्होंने 1988 में टाटा स्टील के साथ अपना करियर शुरू किया और एक दशक से अधिक समय से कंपनी के सीईओ और एमडी हैं.

अपने कार्यकाल के दौरान नरेंद्रन ने वैश्विक कमोडिटी चक्रों, बड़े पूंजी निवेश और यूरोपीय कारोबार से जुड़ी चुनौतियों के बीच टाटा स्टील का नेतृत्व किया है. उन्होंने कंपनी के जैविक और अकार्बनिक विस्तार की भी देखरेख की है. इसके अलावा वह वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के चेयरमैन और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष जैसे उद्योग पदों पर भी रह चुके हैं.

टाटा समूह के साथ लंबे जुड़ाव की वजह से उन्हें समूह के कारोबार की गहरी समझ है. हालांकि, चर्चा से परिचित लोगों के अनुसार, उनका अनुभव मुख्य रूप से टाटा स्टील तक केंद्रित रहा है और होल्डिंग कंपनी के स्तर पर उनका अनुभव अपेक्षाकृत सीमित है.

अग्रवाल के पास वित्त और रणनीति का अनुभव

अग्रवाल समूह के भीतर वित्त और रणनीति पर केंद्रित विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं. वह 2017 में चंद्रशेखरन के कार्यकाल में ग्रुप सीएफओ के तौर पर टाटा संस से जुड़े थे और फिलहाल कार्यकारी निदेशक एवं ग्रुप सीएफओ हैं.

उनकी जिम्मेदारियों में समूह के स्तर पर पूंजी आवंटन, निवेश से जुड़े फैसले और पोर्टफोलियो प्रबंधन शामिल हैं. टाटा संस से जुड़ने से पहले अग्रवाल ने टाटा समूह समेत कई बड़ी भारतीय कंपनियों को कारोबारी सौदों में सलाह दी थी. इससे उन्हें वित्तीय बाजारों के साथ-साथ समूह की निवेश संरचना की भी समझ मिली.

वह टाटा स्टील, वोल्टास और टाटा डिजिटल समेत कई टाटा कंपनियों के बोर्ड में रह चुके हैं. इसके अलावा वह टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा 1mg और बिगबास्केट जैसी कंपनियों के चेयरमैन भी हैं.

फिलहाल नरेंद्रन आंतरिक दावेदारों में सबसे आगे हैं, जबकि अग्रवाल वित्त पर केंद्रित विकल्प पेश करते हैं. वहीं, चौहान का तकनीक, वित्तीय बाजार और संस्थान निर्माण से जुड़ा अनुभव उन्हें उत्तराधिकार की दौड़ में संभावित ‘वाइल्ड कार्ड’ बनाता है.

उम्मीद है कि चयन समिति आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया पर विचार-विमर्श जारी रखेगी. चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने के बाद टाटा संस के नए चेयरमैन पदभार संभालेंगे.
 


सुनील सप्रा: कारोबार से आगे, प्रभाव को कई गुना बढ़ाने की कला

जन्मदिन पर साइबर सुरक्षा उद्यमी, ग्रोथ पार्टनर, M&A रणनीतिकार, निवेशक और कवि सुनील सप्रा पर एक नजर, जिनकी कई पहचानें निर्माण, सक्षम बनाने और बदलाव की एक ही प्रवृत्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2026
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Eventus Security के को-फाउंडर और चीफ ग्रोथ ऑफिसर सुनील सप्रा के लिए उद्यमिता सिर्फ नई कंपनी शुरू करने या उसे खड़ा करने तक सीमित नहीं रही है. साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी यात्रा ने उन्हें एक अलग मुकाम दिया है. आज 5 सितंबर को सुनील सप्रा अपना जन्मदिन मना रहे है, और इस खास मौके पर हम उनकी उद्यमशीलता की कहानी पर नजर डालें तो Anlyz और PingSafe में साझा निवेशक के तौर पर उनकी भूमिका खास तौर पर सामने आती है. दोनों कंपनियों का क्रमशः Trend Micro और SentinelOne ने अधिग्रहण किया, जिससे सुनील सप्रा का साइबर सुरक्षा क्षेत्र में प्रभाव और उनकी रणनीतिक समझ दोनों उजागर होती हैं.

सात एग्जिट और 1 अरब डॉलर से अधिक का एंटरप्राइज वैल्यू बनाने के साथ, सप्रा ने अपना करियर संभावनाओं को पहचानने, विकास को कई गुना बढ़ाने और संस्थापकों को महत्वाकांक्षा को परिणामों में बदलने में मदद करने के इर्द-गिर्द बनाया है.

उनकी वास्तविक ताकत यह पहचानने में है कि हर महत्वपूर्ण मोड़ पर किसी कारोबार को किस चीज की जरूरत है, पूंजी, बाजार तक पहुंच, रणनीतिक गठजोड़, बेहतर क्रियान्वयन या कभी-कभी सही एग्जिट.

वर्षों के दौरान, एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में काम करने की इस क्षमता ने उन्हें भारत के साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम में गहराई तक पहुंचाया है, जहां उन्होंने कंपनियों में निवेश किया और उन्हें वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर्स द्वारा किए गए महत्वपूर्ण अधिग्रहणों की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद की.

2023 में Anlyz का Trend Micro ने अधिग्रहण किया और 2024 में PingSafe का SentinelOne ने अधिग्रहण किया. सप्रा दोनों सौदों में साझा निवेशक थे और M&A वैल्यू को अधिकतम करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इससे उन्हें भारत के साइबर सुरक्षा उद्यमिता परिदृश्य में एक विशिष्ट स्थान मिला है, क्योंकि वह भारत से वैश्विक लीडर्स तक लगातार दो साइबर सुरक्षा एग्जिट से जुड़े एकमात्र व्यक्ति हैं.

'फकीरिज्म' की कहानी

हालांकि, सप्रा की यात्रा को खास तौर पर दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि ये एग्जिट उनके कहीं व्यापक उद्यमशीलता करियर के केवल दिखाई देने वाले पड़ाव हैं. वह अपनी भूमिका को एक ग्रोथ पार्टनर, वेंचर बिल्डर और M&A वैल्यू-मैक्सिमाइजेशन एनेबलर के रूप में बताते हैं, जो तब कदम रखते हैं जब संस्थापकों को सेट-अप से लॉन्च, लॉन्च से स्केल और स्केल से एग्जिट की ओर बढ़ने की जरूरत होती है.

प्रोफेशनल जीवन को मापने के कई तरीके हैं. सुनील सप्रा के लिए पारंपरिक पैमाने, बनाई गई कंपनियां, बढ़ाए गए कारोबार, किए गए निवेश और हासिल किए गए एग्जिट, कहानी का केवल एक हिस्सा बताते हैं. दूसरा हिस्सा हिंदी कविता, दर्शन, आत्म-खोज और जिसे वह ‘फकीरिज्म’ कहते हैं, उसमें लिखा गया है.

साइबर सुरक्षा उद्यमी, ग्रोथ पार्टनर और M&A वैल्यू-मैक्सिमाइजेशन विशेषज्ञ सप्रा ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा पर्दे के पीछे काम करते हुए बिताया है. उन्होंने संस्थापकों को सेट-अप और लॉन्च से लेकर स्केल और अंततः एग्जिट तक की जटिल यात्रा में आगे बढ़ने में मदद की है. उनके अनुसार, उन्होंने 30 से अधिक कंपनियों के साथ काम किया है, 1 अरब डॉलर से अधिक की एंटरप्राइज वैल्यू बनाने में योगदान दिया है और सात एग्जिट का हिस्सा रहे हैं.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वह अपनी पहचान की शुरुआत इन आंकड़ों से नहीं करते. उनके LinkedIn प्रोफाइल की शुरुआत इस सवाल से होती है, “Your startup has hit the ceiling and needs a Force Multiplier?” और इसके तुरंत बाद उनके बाबा की कृपा का उल्लेख आता है. शायद यह संयोजन किसी भी पदनाम से बेहतर तरीके से सप्रा की पहचान को दर्शाता है.

वह खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में बताते हैं, जिसे ‘मिडास टच’ देने के लिए चुना गया है और इस यात्रा का श्रेय वह ‘बाबा के जादू’ को देते हैं. इस श्रेय में विनम्रता है, लेकिन साथ ही उनकी विशिष्ट बेबाकी भी है. उनकी पेशेवर शब्दावली ‘MultiX’, ‘फोर्स मल्टीप्लायर’, ‘वैल्यू मैक्सिमाइजेशन के लिए ग्रोथ’ और ‘AAA+ orchestration, Align, Accelerate, Achieve’ जैसे वाक्यांशों से भरी है. वहीं, उनकी व्यक्तिगत शब्दावली ‘फकीरिज्म’, जुनून और अपनी रोशनी खोजने की बात करती है.

पहली नजर में ये दोनों दुनिया विरोधाभासी लगती हैं.

कारोबार बनाने से आगे, वैल्यू निर्माण

सप्रा का सबसे मजबूत पेशेवर जुड़ाव कारोबारों को महत्वपूर्ण मोड़ पर अपनी वैल्यू को अनलॉक करने में मदद करने से रहा है, चाहे इसका मतलब नए भौगोलिक बाजार में प्रवेश करना हो, सही ग्रोथ इंजन तलाशना हो, रणनीतिक गठजोड़ बनाना हो या भविष्य के किसी सौदे के लिए तैयारी करना हो.

साइबर सुरक्षा क्षेत्र में उनका रिकॉर्ड इसका एक खास अध्याय है.

2023 में Anlyz का Trend Micro ने अधिग्रहण किया. इसके एक साल बाद PingSafe का SentinelOne ने अधिग्रहण किया. सप्रा दोनों सौदों में साझा निवेशक थे और M&A वैल्यू-मैक्सिमाइजेशन की यात्रा में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इससे उन्हें एक ऐसी उपलब्धि हासिल होती है, जिस पर वह गर्व करते हैं: भारत से वैश्विक लीडर्स तक लगातार दो साइबर सुरक्षा एग्जिट में निवेशक के तौर पर शामिल होने वाले एकमात्र व्यक्ति होना.

हालांकि, उनका अनुभव केवल एग्जिट तक सीमित नहीं है. उनके पेशेवर सफर में तीन जॉइंट वेंचर, नौ APAC सेट-अप, लॉन्च और स्केल मैंडेट, चार किकस्टार्ट या रिवाइवल के साथ-साथ विभिन्न कंपनियों और क्षेत्रों में सलाहकारी कार्य और निवेश शामिल हैं.

इसलिए उनकी भूमिका शायद ही कभी किसी पारंपरिक कंसल्टेंट जैसी रही हो, जो कारोबार से बाहर बैठकर सलाह देता है. सप्रा खुद को कार्रवाई के ज्यादा करीब रखते हैं, एक ऐसे ग्रोथ पार्टनर के रूप में, जो संस्थापकों के साथ अपने समय और हितों को जोड़ने के लिए तैयार रहता है.

उनका दर्शन स्पष्ट है, “My time follows my money, and my money follows my time.”

संस्थापकों के लिए इसका मतलब एक सरल प्रस्ताव है: वह उन कारोबारों के साथ काम करना चाहते हैं, जहां उन्हें लगता है कि वह कारोबार की दिशा को वास्तविक रूप से बदल सकते हैं और जहां दोनों पक्ष आगे मिलने वाले लाभ में हिस्सेदारी के लिए तैयार हों.

उद्यमी के पीछे छिपा कवि

और फिर सुनील सप्रा का एक दूसरा रूप भी है. वह व्यक्ति जिसने 1,200 से अधिक हिंदी कविताएं लिखी हैं.

वह व्यक्ति जिसने 2017 में ‘फकीरा चल चला चल’ और 2024 में ‘कहत फकीरा सुन मेरे बंधु’ प्रकाशित कीं और जिसकी दो और किताबें फिलहाल निर्माणाधीन हैं.

वह व्यक्ति जो ‘फकीरा’ को जीवन के सवालों की अपनी खोज बताते हैं “FAQs of Life” का मिलन आत्मा से मिलने वाले विचित्र, ऊंचे उठाने वाले, ताजगी भरे और प्रामाणिक जवाबों से.

यह एंटरप्राइज वैल्यू और M&A की भाषा से एक उल्लेखनीय बदलाव है.

लेकिन शायद यह बदलाव है ही नहीं.

सप्रा के लिए कविता शायद उन सवालों को पूछने का एक और तरीका है, जिनका जवाब कारोबार हमेशा नहीं दे सकता: हम जो कर रहे हैं, वह क्यों कर रहे हैं? सफलता का मतलब क्या है? किसी व्यक्ति को किस चीज को पकड़े रखना चाहिए और किसे छोड़ देना चाहिए?

उनके लीडरशिप-कोचिंग फ्रेमवर्क ‘Rubaru’, ‘The Class Act’ और ‘RocK iT’ भी पेशेवर महत्वाकांक्षा को आत्मनिरीक्षण के साथ जोड़ते हैं. इनके विषयों में स्पष्टता, छोड़ देना, विस्तार, सरलीकरण, लचीलापन और बदलाव शामिल हैं.

इसके केंद्र में बार-बार आने वाला उनका निमंत्रण है, “अपने भीतर के फकीरा को जगाएं.”

## ग्रोथ माइंडसेट वाला योद्धा साधु

सप्रा खुद को “Warrior Monk - playfully curious” बताते हैं. यह अपनी पहचान बताने का एक असामान्य तरीका है, लेकिन उनके लिए उपयुक्त भी है.

योद्धा महत्वाकांक्षा, क्रियान्वयन और कठिन समस्याओं से निपटने की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है. साधु चिंतन, वैराग्य और इस समझ का प्रतिनिधित्व करता है कि परिणाम यात्रा का केवल एक हिस्सा हैं.

यही दर्शन इस बात को भी स्पष्ट करता है कि वह इस बात पर जोर क्यों देते हैं कि ग्रोथ का मतलब केवल राजस्व या वैल्यूएशन नहीं होना चाहिए. उनके फ्रेमवर्क में ‘PEG, Profitable Effective Growth’ के साथ संस्कृति और लचीलापन भी शामिल हैं.

उनके लिए किसी कंपनी की वास्तविक परीक्षा केवल यह नहीं है कि वह बढ़ती है या नहीं, बल्कि यह है कि वह प्रभावी और लाभदायक तरीके से बढ़ती है या नहीं और क्या उसके पास लंबे समय तक टिके रहने की संगठनात्मक ताकत है.

शायद यही वजह है कि उनकी पेशेवर पहचान धीरे-धीरे उद्यमी और निवेशक से आगे बढ़कर कुछ ऐसी बन गई है, जिसे परिभाषित करना मुश्किल है: संस्थापकों के लिए एक साउंडिंग बोर्ड, कारोबार के महत्वपूर्ण मोड़ पर एक रणनीतिक ऑपरेटर, एग्जिट की संभावना बनने पर एक M&A एनेबलर और जब सवाल ‘कंपनी के लिए आगे क्या?’ से बदलकर ‘मेरे लिए आगे क्या?’ हो जाए, तब एक कोच.

सफलता, थोड़े वैराग्य के साथ

सप्रा की प्रोफाइल में एक पंक्ति है, जो खास तौर पर उनकी सोच को उजागर करती है, “A cat that dreams of becoming a lion must lose its appetite for rats.”

यह पूरी तरह सप्रा के अंदाज की है, एक साथ उकसाने वाली, चंचल और दार्शनिक.

इसके बाद एक और पंक्ति आती है, “*Sach se badi koi maya nahin Faqeera, aur na maya se bada koi sach.*” इसका अर्थ है: सत्य से बड़ी कोई माया नहीं है और माया से बड़ा कोई सत्य नहीं है.

कोई इस दर्शन से सहमत हो या केवल शब्दों के खेल का आनंद ले, यह उनके पेशेवर उपलब्धियों के पीछे मौजूद व्यक्ति के बारे में कुछ बताता है. सप्रा शायद खुद को किसी एक श्रेणी में व्यवस्थित रूप से फिट करने के बजाय लगातार अपनी खुद की पहचान बनाने में अधिक रुचि रखते हैं.

साइबर सुरक्षा उद्यमी. ग्रोथ पार्टनर. निवेशक. M&A रणनीतिकार. लीडरशिप कोच. कवि. लेखक. फकीरा.

शायद सुनील सप्रा की यात्रा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह इन सभी को अलग-अलग पहचान नहीं मानते. ये सभी एक ही जिज्ञासा की अलग-अलग अभिव्यक्तियां हैं—निर्माण करना, सक्षम बनाना, सवाल करना और अंततः लगातार आगे बढ़ते रहना.

‘चल चला चल’—वह लिखते हैं. चलते रहो.
 


7 सितंबर से खुलेगा IPO बाजार का पिटारा, 15 नए इश्यू के साथ 9 कंपनियों की होगी लिस्टिंग

9 सितंबर को एक साथ 9 IPO खुलेंगे, इनमें Rentomojo का ₹1,255 करोड़ का इश्यू भी शामिल; नए सप्ताह में 3 मेनबोर्ड कंपनियों समेत 9 स्टॉक्स बाजार में करेंगे डेब्यू

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2026
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Saturday, 05 September, 2026
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7 सितंबर से शुरू होने वाला सप्ताह भारतीय प्राथमिक बाजार के लिए बेहद व्यस्त रहने वाला है. इस दौरान कुल 15 नए IPO खुलेंगे, जिनमें 11 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं. सबसे ज्यादा हलचल 9 सितंबर को देखने को मिलेगी, जब एक ही दिन 9 पब्लिक इश्यू खुलेंगे. इनमें फर्नीचर और घरेलू अप्लायंसेज किराए पर देने वाली कंपनी Rentomojo का ₹1,255.57 करोड़ का IPO भी शामिल है. इसके अलावा पहले से खुले Qualiance International IPO में भी निवेश का मौका मिलेगा. वहीं, नए सप्ताह में 9 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी.

7 सितंबर को खुलेंगे दो IPO

Pranav Constructions IPO 7 सितंबर को खुलेगा और 9 सितंबर को बंद होगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹351.03 करोड़ जुटाना चाहती है. IPO का प्राइस बैंड ₹118-124 प्रति शेयर तय किया गया है और लॉट साइज 120 शेयर है. कंपनी के शेयरों की NSE और BSE पर 15 सितंबर को लिस्टिंग हो सकती है. Apana Logistics IPO भी 7 सितंबर को खुलेगा और 9 सितंबर को बंद होगा. इश्यू का साइज ₹34.14 करोड़ है और फाइनल इश्यू प्राइस ₹60 प्रति शेयर तय किया गया है. लॉट साइज 2,000 शेयर है. कंपनी के शेयर BSE SME पर 15 सितंबर को लिस्ट होने की उम्मीद है.

8 सितंबर को तीन बड़े IPO

Kanohar Electricals IPO 8 सितंबर को खुलेगा और 10 सितंबर को बंद होगा. कंपनी इस इश्यू से ₹1,055.74 करोड़ जुटाएगी. IPO का प्राइस बैंड ₹601-632 प्रति शेयर और लॉट साइज 23 शेयर है. शेयरों की NSE और BSE पर 16 सितंबर को लिस्टिंग हो सकती है. Prasol Chemicals IPO भी 8 सितंबर को खुलेगा. ₹500 करोड़ के इस इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹643-676 प्रति शेयर तय किया गया है. लॉट साइज 22 शेयर है और IPO 10 सितंबर को बंद होगा. कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 16 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं.

Glass Wall Systems IPO का इश्यू साइज ₹427.89 करोड़ है. यह IPO 8 सितंबर को खुलेगा और 10 सितंबर को बंद होगा. प्राइस बैंड ₹172-182 प्रति शेयर और लॉट साइज 82 शेयर है. शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 16 सितंबर को होने की उम्मीद है.

9 सितंबर को खुलेंगे 9 IPO

Rentomojo IPO 9 सितंबर को खुलेगा और 11 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ₹1,255.57 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. IPO का प्राइस बैंड ₹384-404 प्रति शेयर और लॉट साइज 37 शेयर है. कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट होने वाले हैं. Asset Reconstruction Company IPO भी 9 सितंबर को खुलेगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹732.97 करोड़ जुटाना चाहती है. प्राइस बैंड ₹132-139 प्रति शेयर और लॉट साइज 107 शेयर है. IPO 11 सितंबर को बंद होगा और शेयर 17 सितंबर को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं.

Manipal Payment & Identity Solutions IPO के जरिए कंपनी ₹805 करोड़ जुटाएगी. IPO 9 सितंबर से 11 सितंबर तक खुला रहेगा. प्राइस बैंड ₹322-339 प्रति शेयर और लॉट साइज 44 शेयर है. शेयरों की NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्टिंग हो सकती है. LCC Projects IPO का साइज ₹427.14 करोड़ है. यह इश्यू 9 सितंबर को खुलेगा और 11 सितंबर को बंद होगा. प्राइस बैंड ₹139-146 प्रति शेयर और लॉट साइज 102 शेयर है. कंपनी के शेयर 17 सितंबर को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं.

Karamtara Engineering IPO ₹875 करोड़ का है. इसमें 9 से 11 सितंबर तक बोली लगाई जा सकेगी. IPO का प्राइस बैंड ₹241-254 प्रति शेयर और लॉट साइज 59 शेयर है. कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट होने की उम्मीद है. Infrax Renewable IPO का साइज ₹40.88 करोड़ है. यह इश्यू 9 सितंबर को खुलेगा और 11 सितंबर को बंद होगा. फाइनल इश्यू प्राइस ₹104 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है. शेयरों की BSE SME पर 17 सितंबर को लिस्टिंग हो सकती है.

Amtech Esters IPO के जरिए कंपनी ₹17.88 करोड़ जुटाएगी. IPO 9 सितंबर को खुलेगा और 11 सितंबर को बंद होगा. प्राइस बैंड ₹71-75 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,600 शेयर है. कंपनी के शेयर BSE SME पर 17 सितंबर को लिस्ट होंगे. Vinod Texworld IPO ₹42.83 करोड़ का है. यह इश्यू 9 सितंबर से 11 सितंबर तक खुला रहेगा. फाइनल इश्यू प्राइस ₹94 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है. कंपनी की NSE SME पर 17 सितंबर को लिस्टिंग होने की उम्मीद है.

Steamhouse IPO भी 9 सितंबर को खुलेगा और 11 सितंबर को बंद होगा. इस इश्यू का साइज ₹414 करोड़ है. हालांकि, कंपनी ने अभी प्राइस बैंड तय नहीं किया है. शेयरों की NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्टिंग हो सकती है.

10 सितंबर को खुलेगा Veegaland Developers IPO

Veegaland Developers IPO 10 सितंबर को खुलेगा और 15 सितंबर को बंद होगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹210 करोड़ जुटाना चाहती है. प्राइस बैंड ₹130-140 प्रति शेयर और लॉट साइज 107 शेयर है. कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 18 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं.

पहले से खुले IPO में भी निवेश का मौका

Qualiance International IPO 4 सितंबर को खुल चुका है और इसमें 8 सितंबर तक निवेश किया जा सकता है. ₹45.11 करोड़ के इस इश्यू का प्राइस बैंड ₹120-127 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,000 शेयर है. IPO अब तक 13.78 गुना सब्सक्राइब हो चुका है. कंपनी के शेयर NSE SME पर 11 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं.

7 सितंबर से 9 कंपनियों की लिस्टिंग

नए सप्ताह में 9 कंपनियां शेयर बाजार में कदम रखेंगी. 7 सितंबर को Purple Style Labs के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होंगे. इसी दिन NSE SME पर Ashutosh Fibre और Shanti Inorganics तथा BSE SME पर Phychem Technologies की लिस्टिंग हो सकती है.

8 सितंबर को Deepa Jewellers और Rays of Belief के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है. इसी दिन BSE SME पर Fly-Hi Maritime Travels और Farm Peace के शेयरों की भी शुरुआत हो सकती है. वहीं, 11 सितंबर को Qualiance International के शेयर NSE SME पर लिस्ट हो सकते हैं.

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

एक ही सप्ताह में इतनी बड़ी संख्या में IPO खुलने और कंपनियों की लिस्टिंग से प्राथमिक बाजार में गतिविधियां तेज रहने की उम्मीद है. खासतौर पर मेनबोर्ड IPO में निवेशकों की दिलचस्पी पर बाजार की नजर रहेगी. हालांकि, किसी भी IPO में निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, इश्यू के उद्देश्य और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना जरूरी है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


Blinkit और Instamart के डार्क स्टोर हुए महंगे, खर्च ₹2.5 करोड़ तक पहुंचा; बड़े स्टोर फॉर्मेट पर जोर

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो साल पहले प्रति डार्क स्टोर अनुमानित ₹1 करोड़ के मुकाबले अब लागत बढ़कर करीब ₹2.5 करोड़ हुई; क्विक कॉमर्स कंपनियां ग्रॉसरी से आगे बढ़ाकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी और अन्य कैटेगरी में बढ़ा रही हैं कारोबार

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Published - Saturday, 05 September, 2026
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Saturday, 05 September, 2026
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क्विक कॉमर्स कंपनियां बड़े फुलफिलमेंट सेंटर और ज्यादा प्रोडक्ट रेंज पर फोकस कर रही हैं, जिससे उनके डार्क स्टोर नेटवर्क में निवेश तेजी से बढ़ रहा है. UBS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal की Blinkit और Swiggy की Instamart ने प्रति डार्क स्टोर अनुमानित पूंजीगत खर्च (Capex) बढ़ाकर करीब ₹2.5 करोड़ कर दिया है, जो करीब दो साल पहले लगभग ₹1 करोड़ आंका गया था.

2,000-3,000 वर्ग फुट से बड़े स्टोर की ओर बढ़ रहीं कंपनियां

UBS के अनुसार, डार्क स्टोर के आकार में यह बदलाव क्विक कॉमर्स सेक्टर की बदलती रणनीति को दिखाता है. पहले 2,000-3,000 वर्ग फुट के पड़ोस आधारित स्टोर इस क्षेत्र में प्रमुख थे, लेकिन अब कंपनियां 5,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र वाले स्टोर खोल रही हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2,500-3,000 वर्ग फुट के डार्क स्टोर की मौजूदा लागत करीब ₹1.4-1.6 करोड़ है. वहीं 5,000 वर्ग फुट की सुविधा पर करीब ₹2.4-2.5 करोड़ और 7,000 वर्ग फुट के स्टोर पर लगभग ₹3 करोड़ खर्च आता है. इसमें संबंधित वेयरहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी शामिल है. UBS ने कहा कि पिछले एक से दो वर्षों में नए डार्क स्टोर का आकार 60-100 प्रतिशत तक बढ़ा है. 5,000 वर्ग फुट से ज्यादा क्षेत्र वाले स्टोर अब तेजी से आम हो रहे हैं.

ज्यादा इन्वेंट्री रखने में मदद

बड़े डार्क स्टोर कंपनियों को ज्यादा रिजर्व इन्वेंट्री रखने और स्थानीय स्तर पर लंबी पूंछ वाले स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स (SKU) की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. इससे वेयरहाउस से बार-बार सामान मंगाने की जरूरत कम हो जाती है. UBS के अनुमान के अनुसार, 2,500-3,000 वर्ग फुट की सुविधा में वेयरहाउस एरिया मल्टीपल करीब 1.0 गुना है. यह 5,000 वर्ग फुट के स्टोर में घटकर 0.8 गुना और 7,000 वर्ग फुट के स्टोर में 0.6 गुना तक आ सकता है.

डार्क स्टोर बन रहे मिनी फुलफिलमेंट सेंटर

बड़े स्टोर फॉर्मेट के साथ डार्क स्टोर की भूमिका भी बदल रही है. अब इन्हें केवल पड़ोस के ग्राहकों के लिए इन्वेंट्री रखने वाली जगह के बजाय मिनी फुलफिलमेंट सेंटर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है.

UBS के मुताबिक, ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ने के साथ कंपनियों को पिकिंग के लिए ज्यादा जगह, पैकिंग स्टेशन, डिलीवरी राइडर्स के लिए हैंडओवर एरिया और ऑर्डर स्टेजिंग स्पेस की जरूरत होती है. इससे स्टोर में भीड़ कम करने और डिलीवरी सर्विस का स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है.

बढ़ सकता है नेटवर्क विस्तार का फंडिंग खर्च

डार्क स्टोर में बढ़ते पूंजी निवेश से क्विक कॉमर्स कंपनियों के नेटवर्क विस्तार के लिए फंडिंग की जरूरत बढ़ सकती है. हालांकि, बड़े स्टोर ज्यादा ऑर्डर संभालने और उपलब्ध क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं. UBS के अनुसार, जैसे-जैसे ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ता है, बड़े फुलफिलमेंट सेंटर कंपनियों की थ्रूपुट और यूटिलाइजेशन बेहतर कर सकते हैं. इससे लंबे समय में क्विक कॉमर्स कंपनियों की यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार की संभावना है.

सिर्फ डिलीवरी स्पीड नहीं, प्रोडक्ट रेंज भी बनी प्रतिस्पर्धा का आधार

UBS ने कहा कि बड़े डार्क स्टोर की ओर बढ़ने की प्रमुख वजह अब सिर्फ तेज डिलीवरी नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट उपलब्ध कराने की प्रतिस्पर्धा भी है. क्विक कॉमर्स कंपनियां अब ग्रॉसरी और रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी और अन्य लॉन्ग-टेल प्रोडक्ट्स जैसी कैटेगरी में विस्तार कर रही हैं. इसके लिए ग्राहकों के नजदीक ज्यादा बड़ी और विविध प्रोडक्ट रेंज रखने की जरूरत पड़ रही है. यही वजह है कि कंपनियां बड़े डार्क स्टोर फॉर्मेट पर तेजी से निवेश कर रही हैं.
 


India-EU FTA: कारोबारियों के लिए खुला 24 ट्रिलियन डॉलर का बाजार, मैन्युफैक्चरिंग से टेक्नोलॉजी तक मिलेंगे बड़े अवसर

पीयूष गोयल ने कहा- 27 देशों के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता सप्लाई चेन को बनाएगा मजबूत; भारत और बेल्जियम के बीच सेमीकंडक्टर, रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन और कृषि क्षेत्र में सहयोग की बड़ी संभावनाएं

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय कारोबारियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं, कृषि, टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्र में बड़े अवसर खोलेगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन में लचीलापन बढ़ाने में भी मदद करेगा.

मुंबई में भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में गोयल ने कहा कि इस समझौते पर बातचीत के दौरान दोनों बाजारों के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया है.

25 साल बाद हुआ समझौता

गोयल ने कहा कि करीब 25 वर्षों की बातचीत के बाद यह व्यापार समझौता पूरा हुआ है. इसके जरिए करीब 24 ट्रिलियन डॉलर के बाजार और लगभग 2 अरब लोगों तक पहुंच का रास्ता खुलेगा. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश समझौते से जुड़ी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर इसे लागू करने के समर्थन में हैं.

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करेगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को सप्लाई चेन में आने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक लचीला बनाएगा. उनके मुताबिक, समझौते के तहत भारत और यूरोप के 95 प्रतिशत से अधिक वस्तु निर्यात पर टैरिफ या तो खत्म किए जाएंगे या उनमें कटौती की जाएगी.

डायमंड, फार्मा और ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग की संभावना

डी वेवर ने कहा कि इस समझौते से डायमंड, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्युटिकल्स, समुद्री सेवाओं, ग्रीन हाइड्रोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को भारत और यूरोप के बीच महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स गेटवे बताया. गोयल ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार लगभग दोगुना होकर करीब 140 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.

सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र पर जोर

गोयल ने भारत और बेल्जियम के बीच सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन, कृषि और फूड प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं बताईं. उन्होंने कहा कि माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च में बेल्जियम की विशेषज्ञता को भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और प्रतिभा के साथ जोड़ा जा सकता है. इससे डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन तक एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी.

गोयल ने बेल्जियम की इंजीनियरिंग कंपनी John Cockerill के साथ काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और प्रिसिजन म्यूनिशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावना भी जताई. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने हाल में इस दिशा में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया है.

एंटवर्प-मुंबई-सूरत के बीच डायमंड सहयोग

जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र में गोयल ने एंटवर्प, मुंबई और सूरत के प्रमुख डायमंड केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया. इसमें लैब-ग्रोउन डायमंड और सर्टिफिकेशन जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी साथ काम कर सकते हैं. भारत की उत्पादन क्षमता को एंटवर्प-ब्रुग्स की बंकरिंग और ग्रीन शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जा सकता है. कृषि और फूड प्रोसेसिंग में आलू प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं.

सेमीकंडक्टर से अंतरिक्ष तक भारत का फोकस

गोयल ने भारत की बढ़ती टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है. उन्होंने बताया कि भारत के दूसरे सेमीकंडक्टर कार्यक्रम Semicon India 2.0 के लिए 14 अरब डॉलर का प्रावधान है, जिससे इस क्षेत्र में करीब 70 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है.

गोयल के मुताबिक, भारत की स्पेस इकोनॉमी फिलहाल करीब 8.5 अरब डॉलर की है और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी से अगले आठ वर्षों में इसके 44 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है. उन्होंने कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता भी खोला है और अगले दो दशकों में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना है.

स्किल और वर्कफोर्स मोबिलिटी पर जोर

गोयल ने भारत और बेल्जियम के बीच वर्कफोर्स मोबिलिटी बढ़ाने, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त कौशल विकास और डुअल-डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. खासकर उन क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया जहां बेल्जियम में कुशल कर्मचारियों की कमी है. उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक और सप्लाई चेन अनिश्चितता के दौर में भारत और बेल्जियम को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक संबंध विकसित करने चाहिए.

गोयल ने कहा कि बेल्जियम की टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और पूंजी को भारत के बड़े बाजार, प्रतिभा और वर्कफोर्स के साथ जोड़कर दोनों देश वैश्विक स्तर पर बेहद मजबूत प्रतिस्पर्धी क्षमता तैयार कर सकते हैं.

यूरोपीय बाजार के लिए भारत के कारोबारियों का गेटवे बनेगा बेल्जियम

गोयल ने कहा कि बेल्जियम यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गेटवे की भूमिका निभा सकता है. एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह सड़क, रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और डीप-वॉटर कनेक्टिविटी के जरिए यूरोप के विभिन्न हिस्सों को जोड़ता है.

उन्होंने बेल्जियम की कंपनियों को भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया. गोयल ने कहा कि भारत में बड़ा बाजार, युवा कार्यबल और तेजी से विस्तार करता औद्योगिक एवं टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम मौजूद है.
 


विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड, $11.47 अरब बढ़कर 740.80 अरब डॉलर पर पहुंचा

लगातार दूसरे सप्ताह जोरदार बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा संपत्ति और सोने के भंडार में भी उछाल; 28 अगस्त तक के आंकड़ों में दिखी मजबूत स्थिति

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 11.47 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इससे पिछले सप्ताह यानी 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 12.422 अरब डॉलर बढ़कर 729.328 अरब डॉलर पर पहुंचा था.

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही बढ़ोतरी से देश की बाहरी वित्तीय स्थिति और विदेशी मुद्रा बाजार में मजबूती का संकेत मिलता है. पिछले कुछ सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में तेज वृद्धि देखने को मिली है, जिससे यह एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

विदेशी मुद्रा संपत्ति में 9.34 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्तियों (FCA) का होता है. 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में FCA 9.337 अरब डॉलर बढ़कर 600.67 अरब डॉलर हो गई. मार्च 2026 के अंत के मुकाबले विदेशी मुद्रा संपत्तियों में अब तक 48.387 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं, एक साल पहले की तुलना में FCA 16.73 अरब डॉलर अधिक है. विदेशी मुद्रा संपत्तियों में बदलाव पर डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी असर पड़ता है.

सोने के भंडार में भी जोरदार बढ़ोतरी

विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के साथ देश के सोने के भंडार में भी इजाफा हुआ है. 28 अगस्त वाले सप्ताह में भारत का गोल्ड रिजर्व 2.191 अरब डॉलर बढ़कर 116.409 अरब डॉलर हो गया. मार्च के अंत के मुकाबले सोने के भंडार में 1.014 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, एक साल पहले की तुलना में इसमें 29.641 अरब डॉलर का बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है.

SDR भंडार में मामूली गिरावट

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत का स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) भंडार 18.81 अरब डॉलर रहा. इसमें पिछले सप्ताह की तुलना में 43 मिलियन डॉलर की कमी आई है. हालांकि, मार्च 2026 के अंत के मुकाबले SDR भंडार 188 मिलियन डॉलर बढ़ा है. इसी तरह, IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.914 अरब डॉलर रह गई. हालांकि, मार्च के अंत के मुकाबले इसमें 106 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है.

विदेशी मुद्रा बाजार पर RBI की नजर

RBI विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रखता है. जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक बाजार में हस्तक्षेप करता है, ताकि विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार व्यवस्थित तरीके से चलता रहे. हालांकि, RBI का उद्देश्य किसी एक निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना नहीं है. केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप मुख्य रूप से बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को नियंत्रित करने पर केंद्रित रहता है.
 


चीनी के दाम घटे, सरकार ने बढ़ाई ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट की डेडलाइन; त्योहारों से पहले राहत

सरकार के कदमों का असर दिखना शुरू, हफ्तेभर में चीनी की खुदरा कीमत करीब ₹2 प्रति किलो घटी; हालांकि एक महीने पहले के मुकाबले अब भी 25% महंगी

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Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे उपायों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है. देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत पिछले एक सप्ताह में करीब 2 रुपये प्रति किलो घट गई है. इसी बीच सरकार ने ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर के आयात के लिए चीनी मिलों को आवेदन करने की समयसीमा भी बढ़ाकर 7 सितंबर कर दी है.

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, चीनी मिलें एडवांस ऑथराइजेशन को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) में बदलने के लिए 7 सितंबर तक आवेदन कर सकती हैं. सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और त्योहारी मांग के दौरान कीमतों पर दबाव को नियंत्रित करना है.

शुक्रवार को ₹61.93 किलो रहा चीनी का औसत भाव

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को देशभर में चीनी का औसत खुदरा भाव 61.93 रुपये प्रति किलो रहा. एक सप्ताह पहले यह कीमत 64.10 रुपये प्रति किलो थी. यानी इस अवधि में चीनी करीब 2.17 रुपये प्रति किलो सस्ती हुई है. हालांकि, एक महीने पहले के मुकाबले चीनी अभी भी काफी महंगी है. एक महीने पहले इसका औसत खुदरा भाव 49.71 रुपये प्रति किलो था. इस लिहाज से मौजूदा कीमत करीब 25 फीसदी ज्यादा है.

सरकार और चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) दोनों का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है. इसके बावजूद त्योहारी मांग और कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार लगातार बाजार की स्थिति पर नजर रख रही है.

10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की मंजूरी

चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 20 अगस्त को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) स्कीम के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी थी. इसके बाद DGFT ने इस कोटे में बचे करीब 2 लाख टन रॉ शुगर के आयात के लिए नए सिरे से आवेदन आमंत्रित किए थे. अब सरकार ने आवेदन की समयसीमा बढ़ाकर 7 सितंबर कर दी है. इससे चीनी मिलों को आयात प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

त्योहारों से पहले कीमतों पर नजर

देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में सरकार के सामने घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के साथ कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है. पिछले कुछ समय में चीनी की कीमतों में तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ाई थी. इसके बाद स्टॉक लिमिट और आयात जैसे कई उपाय किए गए. अब कीमतों में आई शुरुआती नरमी को सरकार के इन कदमों के असर के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, मौजूदा भाव अभी भी एक महीने पहले की तुलना में काफी ऊंचा है. इसलिए आने वाले दिनों में त्योहारी मांग, घरेलू उपलब्धता और आयात की रफ्तार यह तय करेगी कि चीनी की कीमतों में और कितनी नरमी आती है.
 


बैंकिंग सिस्टम में ₹10.3 लाख करोड़ की रिकॉर्ड नकदी, अक्टूबर में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें

अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए RBI 7 लाख करोड़ रुपये की 30-दिन की VRRR नीलामी करेगा; अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर बाजार की नजर

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Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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भारतीय बैंकिंग तंत्र में रिकॉर्ड 10.3 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अगले कदम को लेकर बाजार में हलचल बढ़ गई है. केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा हा कि वह सोमवार को 7 लाख करोड़ रुपये की 30-दिन की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी करेगा. इसके साथ ही 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है.

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी गुरुवार को बढ़कर 10.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि बुधवार को यह 9.7 लाख करोड़ रुपये थी. लिक्विडिटी में इस तेज बढ़ोतरी की प्रमुख वजह विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा यानी FCNR(B) के लिए RBI की रियायती स्वैप विंडो रही. इस विंडो के जरिये बैंकों ने रिकॉर्ड 127.2 अरब डॉलर जुटाए थे. यह सुविधा 31 अगस्त को बंद हो गई.

RBI ने VRRR नीलामी में किया बदलाव

RBI ने सोमवार को होने वाली VRRR नीलामी को बैंकों के लिए ज्यादा लचीला बनाया है. पहली बार बैंकों को नीलामी में जमा की गई रकम को तय अवधि पूरी होने से पहले आंशिक रूप से निकालने की अनुमति दी गई है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि समय से पहले निकासी का अनुरोध मूल निकासी तारीख से कम से कम दो कार्यदिवस पहले किया जा सकता है.

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से VRRR नीलामी में बैंकों की भागीदारी बढ़ सकती है. महीने के अंत में कर भुगतान की जरूरत को देखते हुए बैंक लंबे समय तक अपनी रकम लॉक करने से हिचक रहे थे. ऐसे में समय से पहले रकम निकालने का विकल्प उन्हें नीलामी में अधिक पैसा रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है.

अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना

बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख के मुताबिक, रुपये पर दबाव, ऊंची बॉन्ड यील्ड और बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी के असंतुलन को देखते हुए ब्याज दर बढ़ाना केंद्रीय बैंक के लिए उपयुक्त कदम हो सकता है. बाजार भागीदारों का यह भी मानना है कि VRRR के जरिये अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के कदम से अक्टूबर की MPC बैठक से पहले RBI के रुख का संकेत मिल सकता है.

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा कि आंशिक निकासी की सुविधा से बाजार को राहत मिल सकती है. उनके मुताबिक, इससे बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड में 2-3 आधार अंकों की नरमी देखने को मिल सकती है.

विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर पर

FCNR(B) स्वैप विंडो के कारण बैंकिंग सिस्टम में आई अतिरिक्त लिक्विडिटी का असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया है. 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 740.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पिछले लगातार नौ सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 73.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. यह अप्रैल-जून 2021 के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का सबसे लंबा सिलसिला है. भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा संपत्तियां (FCA) इस सप्ताह 9.34 अरब डॉलर बढ़कर 600 अरब डॉलर पर पहुंच गईं.
 


NSE IPO: ₹30,000 करोड़ के मेगा इश्यू को SEBI की मंजूरी, OFS के जरिए होगी हिस्सेदारी बिक्री

करीब ₹30,000 करोड़ के संभावित इश्यू के साथ NSE का IPO देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है. NSE ने इस साल जून में IPO के लिए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट सेबी के पास दाखिल किया था.

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Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने NSE के ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट को मंजूरी दे दी है. करीब ₹30,000 करोड़ के संभावित इश्यू के साथ NSE का IPO देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है. NSE ने इस साल जून में IPO के लिए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट सेबी के पास दाखिल किया था.

पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल होगा IPO

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, NSE का प्रस्तावित IPO पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा. यानी NSE इस इश्यू के जरिए नई पूंजी नहीं जुटाएगा. मौजूदा बड़े शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे और IPO से मिलने वाली पूरी रकम उन्हीं शेयरधारकों के पास जाएगी. इस इश्यू में ₹1 अंकित मूल्य वाले 14.89 करोड़ तक शेयरों की बिक्री शामिल है. इसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत NSE के अन्य मौजूदा बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं.

लंबे समय से अटका था NSE का IPO

NSE के IPO की प्रक्रिया नई नहीं है. एक्सचेंज ने दिसंबर 2016 में करीब ₹10,000 करोड़ के इश्यू के लिए पहली बार DRHP दाखिल किया था. हालांकि, को-लोकेशन विवाद के बाद IPO की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी. अब सेबी की मंजूरी मिलने के बाद NSE के IPO की लिस्टिंग की दिशा में एक बड़ा कदम पूरा हो गया है. कंपनी संभावित निवेशकों से संपर्क और IPO से पहले की तैयारियों पर भी काम कर रही है.

NSE के बाद Jio Platforms पर भी नजर

शेयर बाजार में NSE के IPO के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेक्नोलॉजी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित IPO पर भी निवेशकों की नजर है. रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स करीब 4 अरब डॉलर का IPO अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में ला सकती है. NSE और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसे बड़े इश्यू आने वाले महीनों में भारतीय IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

 


सेबी का CAS पर बड़ा फैसला, डेरिवेटिव सेटलमेंट कीमत के नियम बदलने की तैयारी

## क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की कीमत और सामान्य कारोबार के भाव में अंतर पर बाजार प्रतिभागियों की चिंता के बाद सेबी ला सकता है नई व्यवस्था

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 04 September, 2026
Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के मौजूदा तरीके में बदलाव की तैयारी कर रहा है. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद क्लोजिंग कीमत और सामान्य कारोबारी घंटों के दौरान चल रहे भाव में अंतर को लेकर बाजार प्रतिभागियों ने चिंता जताई थी. इसी फीडबैक के आधार पर सेबी करीब एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है.

एक्सपायरी पर सेटलमेंट कीमत को लेकर बदलाव

नई व्यवस्था में CAS के जरिए तय होने वाली क्लोजिंग कीमत का इस्तेमाल एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के लिए किया जाता है. बाजार प्रतिभागियों ने खास तौर पर उन मौकों पर चिंता जताई है, जब CAS के दौरान तय कीमत और सामान्य ट्रेडिंग सत्र के भाव में बड़ा अंतर देखने को मिला.

सेबी ने गुरुवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा कि CAS लागू होने के शुरुआती अनुभव और विभिन्न हितधारकों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के तरीके में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं. इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर करीब एक सप्ताह में जारी होने की उम्मीद है.

3 अगस्त से लागू हुआ CAS

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की 20 मिनट की व्यवस्था 3 अगस्त से लागू हुई थी. इसके बाद कई मौकों पर CAS के दौरान कीमतों में अचानक बदलाव और सामान्य ट्रेडिंग के मुकाबले अलग क्लोजिंग प्राइस को लेकर सवाल उठे. एक्सपायरी वाले दिनों में यह अंतर और अधिक स्पष्ट दिखाई दिया.

इसके अलावा, एक्सचेंजों ने CAS से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव किया है. इसके तहत दोपहर 3 बजे से 3:15 बजे के बीच कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) का इस्तेमाल स्टॉक और इंडेक्स फ्यूचर्स की रेफरेंस कीमत तय करने के लिए किया जा सकता है.

सेंसेक्स-निफ्टी की क्लोजिंग में भी दिखा अंतर

CAS लागू होने के बाद पिछले महीने सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग में अंतर देखने को मिला था. सेंसेक्स की एक्सपायरी वाले एक दिन निफ्टी 40 अंक यानी 0.16 फीसदी गिरकर 24,396 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 114 अंक यानी 0.15 फीसदी बढ़कर 78,080 पर बंद हुआ. दोनों सूचकांकों के प्रदर्शन में 0.31 प्रतिशत अंक का अंतर रहा.

बाजार प्रतिभागियों से सेबी ने मांगा फीडबैक

CAS की समीक्षा के लिए सेबी ने बाजार प्रतिभागियों, स्टॉक ब्रोकरों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI), म्यूचुअल फंड और अन्य हितधारकों के साथ कई बैठकें की हैं. इन बैठकों में CAS के शुरुआती प्रभाव और उससे जुड़े मुद्दों पर राय ली गई.

सेबी के मुताबिक, हितधारकों की ओर से उठाए गए प्रमुख मुद्दों में एक्सपायरी पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत तय करने का तरीका भी शामिल है. फिलहाल यह कीमत CAS के जरिए तय होने वाली क्लोजिंग प्राइस के आधार पर निर्धारित की जाती है.

 


सेंसेक्स 76,153 के नीचे, निफ्टी भी कमजोर; 23 शेयरों में गिरावट, आज इन स्टॉक्स पर फोकस

गुरुवार को सेंसेक्स 417.49 अंक यानी 0.55 फीसदी टूटकर 76,152.86 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 41 अंक यानी 0.17 फीसदी की गिरावट के साथ 23,873.45 के स्तर पर रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 04 September, 2026
Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
BWHindia

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की चिंता के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट रही. शुरुआती कारोबार में मजबूती के बावजूद बिकवाली हावी होने से सेंसेक्स 417.49 अंक यानी 0.55 फीसदी टूटकर 76,152.86 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 41 अंक यानी 0.17 फीसदी की गिरावट के साथ 23,873.45 के स्तर पर रहा. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 23 गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 7 शेयरों में तेजी रही. टाइटन सबसे ज्यादा 2.17 फीसदी टूटा, जबकि एक्सिस बैंक 0.89 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में रहा.

शुरुआत में बाजार में दिखी थी तेजी

गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी. सेंसेक्स करीब 278 अंक यानी 0.36 फीसदी की तेजी के साथ 76,848.98 के स्तर पर खुला था. वहीं, निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 23,978.85 के स्तर तक पहुंचा. हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ा और बाजार अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर लाल निशान में बंद हुआ.

टाइटन समेत इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 23 में गिरावट रही. टाइटन 2.17 फीसदी टूटकर 4,960 रुपये के स्तर पर बंद हुआ. इसके अलावा ट्रेंट में 1.93 फीसदी, आईटीसी में 1.63 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.62 फीसदी, बजाज फिनसर्व में 1.61 फीसदी, एचसीएल टेक में 1.55 फीसदी, टेक महिंद्रा में 1.54 फीसदी, सन फार्मा में 1.50 फीसदी, टीसीएस में 1.41 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 1.13 फीसदी, इंडिगो में 1.04 फीसदी, इन्फोसिस में 0.98 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.92 फीसदी और इटरनल में 0.05 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

एक्सिस बैंक समेत 7 शेयरों में तेजी

इसके उलट सेंसेक्स के 7 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. एक्सिस बैंक 0.89 फीसदी की तेजी के साथ 1,266.15 रुपये पर पहुंचा. अडानी पोर्ट्स में 0.82 फीसदी, एशियन पेंट्स में 0.53 फीसदी, एचडीएफसी बैंक में 0.44 फीसदी, भारती एयरटेल में 0.23 फीसदी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में 0.04 फीसदी और टाटा स्टील में 0.03 फीसदी की बढ़त रही.

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता

बाजार में दबाव की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा. क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में महंगे कच्चे तेल से महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है.

विदेशी और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से मिला सहारा

हालांकि, बाजार में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से कुछ सहारा मिला. बुधवार को घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹2,813 करोड़ की खरीदारी की थी, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹6,688 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की. इसी खरीदारी के चलते गुरुवार को बाजार की शुरुआत मजबूत रही, लेकिन बाद में बिकवाली के दबाव के सामने यह बढ़त टिक नहीं सकी.

इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज शेयर बाजार में पावर ग्रिड, आरवीएनएल, सिप्ला समेत 10 शेयर खबरों और बड़े कारोबारी अपडेट के चलते फोकस में रहेंगे. पावर ग्रिड कॉरपोरेशन को गुजरात में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ा बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट मिला है, जिसका सालाना ट्रांसमिशन शुल्क ₹1,152.49 करोड़ है. सिप्ला की इकाई इनवाजेन फार्मास्युटिकल्स ने चीन की किलू फार्मास्युटिकल के साथ कैंसर की दवा कीट्रूडा के बायोसिमिलर क्यूएल2107 को लेकर साझेदारी की है. अल्ट्राटेक सीमेंट के तहत आदित्य बिड़ला समूह वायर और केबल कारोबार में उतर रहा है और इसके लिए करीब ₹1,800 करोड़ का निवेश किया जाएगा. स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज के निदेशक मंडल ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए करीब ₹3,000 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है, जिससे क्षमता करीब 50 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है. भारत फोर्ज की इकाई कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स ने बेल्जियम की एफएन हर्स्टल के साथ भारत में उत्पादन केंद्र स्थापित करने और छोटे हथियारों व ड्रोन रोधी प्रणालियों समेत रक्षा उपकरणों पर काम करने के लिए समझौता किया है. इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर अगस्त में बिजली कारोबार सालाना आधार पर 20.2 फीसदी बढ़कर 13.94 अरब यूनिट पहुंच गया, जबकि रियल टाइम बाजार में कारोबार 10.6 फीसदी बढ़ा. ग्लैंड फार्मा में प्रवर्तक फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी लगभग ₹2,279.5 करोड़ में बेच सकती है. आरबीएल बैंक को करीब ₹164.14 करोड़ का जीएसटी कारण बताओ नोटिस मिला है, जो मुख्य रूप से अलग-अलग रिटर्न के आंकड़ों में अंतर से जुड़ा है. मैक्स हेल्थकेयर अपनी इकाई कलिंगा हॉस्पिटल में ₹87.87 करोड़ का निवेश करेगी. वहीं, रामको सिस्टम्स ने सफ्रान हेलीकॉप्टर इंजन्स के साथ समझौता किया है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)