होम / बिजनेस / घरेलू बचत में म्युचुअल फंडों की हिस्सेदारी बढ़ी, बैंक जमाओं की हिस्सदारी घटी
घरेलू बचत में म्युचुअल फंडों की हिस्सेदारी बढ़ी, बैंक जमाओं की हिस्सदारी घटी
भारत के निवेशक अब बैंक जमा से हटकर बाजार-संबद्ध विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. MF's की AUM में वृद्धि, घरेलू बचत में हिस्सा और डिजिटल पहुँच इस बदलाव के मुख्य कारक हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत में निवेशकों खासतौर पर मध्यवर्ग का रुझान तेजी से म्युचुअल फंडों (Mutual Funds) की ओर बढ़ रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजे आंकड़ों के अनुसार, म्युचुअल फंडों की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ (AUM) और बैंक जमाओं के बीच अनुपात पिछले एक दशक में दोगुना हो गया है. म्युचुअल फंड अब बैंक जमाओं का मजबूत विकल्प बन चुके हैं, और उनकी हिस्सेदारी घरेलू वित्तीय बचत में लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा, बढ़ती वित्तीय जागरूकता, बेहतर डिजिटल पहुंच और इक्विटी बाजार में बढ़ी समझ के कारण म्युचुअल फंड निवेश का भविष्य और भी उज्जवल नजर आता है. आइए आरबीआई की इस रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं.
आरबीआई के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, मार्च 2014 से मार्च 2024 के दशक में म्युचुअल फंडों की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ (AUM) और बैंक जमाओं का अनुपात दोगुना से अधिक होकर 10 % से बढ़कर लगभग 23.8 % हो गया है. मई 2025 में यह अनुपात और भी अधिक था, म्युचुअल फंडों की एयूएम ₹72.2 ट्रिलियन थी, जो बैंक जमाओं का लगभग 31.2 % था.
म्युचुअल फंडों की लोकप्रियता
- रिपोर्ट के अनुसार म्युचुअल फंडों की एयूएम मार्च 2010 में ₹6.1 ट्रिलियन से बढ़कर मार्च 2025 में ₹65.7 ट्रिलियन हो गई है, जो 17.1 % की सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट के अनुरूप है.
- म्युचुअल फंडों का घरेलू वित्तीय बचत में हिस्सा FY12 में केवल 0.9 % था, जो FY23 तक बढ़कर 6 % हो गया है.
- केंद्रीय बैंक के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि म्युचुअल फंड पारंपरिक जमा के मुकाबले बेहतर रिटर्न और जोखिम विभाजन प्रदान कर रहे हैं, खासकर कम FD दरों और निवेशकों में इक्विटी-जागरूकता बढ़ने की वजह से
आगे का परिदृश्य
बढ़ी वित्तीय जागरूकता, इंटरनेट पहुंच और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म्स ने म्युचुअल फंडों में निवेश को आसान बनाया है. एम्फी की मार्केटिंग पहलों ने इसमें विश्वास बढ़ाया है. हालांकि तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी भारत में म्युचुअल फंड की पहुँच विकसित देशों की तुलना में कम है, जिससे वृद्धि के लिए काफी संभावना बनी हुई है. जैसे-जैसे भारत $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है, एक्सपर्ट्स का मानना है कि म्युचुअल फंड घरेलू बचत में दीर्घकालिक पूंजी जुटाने का आधार बन सकते हैं.
टैग्स