आप Israel-Hamas War के पीछे मौजूद सीक्रेट पाइपलाइन के बारे में जानते हैं?

Israel-Hamas War को लेकर मीडिया द्वारा सुनाई गई कहानी को तो लोगों ने मान लिया है पर क्या आपको युद्ध की हकीकत पता है?

Last Modified:
Saturday, 18 November, 2023
Israel Secret pipeline

Levina Neythiri, रणनीतिक मामलों की एक्सपर्ट एवं रक्षा विशेषज्ञ

हमास के आतंकवादियों ने कैसे इजराइल-गाजा (Israel-Gaza) सीमा पर मौजूद नेगेव रेगिस्तान में एक रेव पार्टी पर हमला किया और सैकड़ों निर्दोष लोगों को मारकर, कई लोगों को बंधक बना लिया, ये कहानी तो सभी लोगों को पता है. लेकिन क्या आप इजराइल-हमास युद्ध (Israel Hamas War) के पीछे मौजूद प्रमुख कारण को जानते हैं? गाजा पट्टी के करीब मौजूद नेगेव रेगिस्तान के विशाल विस्तार से होकर एक गुप्त तेल पाइपलाइन गुजरती है, जो न केवल इजराइल राज्य के लिए एक जीवन रेखा है, बल्कि सुएज नहर (Suez Canal) की संभावित प्रतिद्वंद्वी भी है. सुएज नहर यूरोप और एशिया के बीच मौजूद केवल दो ट्रांजिट पॉइंट्स में से एक है और एशिया से हर दिन अरबों डॉलर मूल्य का कच्चा तेल ले जाने वाली शिपिंग लाइनें भी इसी नहर से होकर जाती हैं. 158 मील लंबी ये पाइपलाइन, लाल सागर पर मौजूद इजरायली तट को देश की तेल रिफाइनरियों से जोड़ती है. आमतौर पर, कुछ ऐसा जो इजरायली अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है, वह हमास और हौथिस जैसे आतंकवादी समूहों के लिए एक कैंसरग्रस्त घाव की तरह है, जो अब इजरायल में पाइपलाइन को बंद कर पाने वाले बिंदुओं को अपना लक्ष्य बना रहे हैं.

कौन करता है इस पाइपलाइन की देखरेख?
इस पाइपलाइन को इजराइल की सरकारी कंपनी इलियट एशकेलोन पाइपलाइन कंपनी (EAPC) के द्वारा नियंत्रित किया जाता है. कुछ सालों पहले तक यह इजरायल का सबसे बड़ा राष्ट्रीय रहस्य था लेकिन एक घातक तेल रिसाव की बदौलत इसका खुलासा हो गया. फिर भी पूरी संभावना है कि भविष्य में EAPC दुनिया की अग्रणी तेल परिवहन प्रणाली बन जाएगी. ये इजराइल को सिर्फ तेल की आपूर्ति नहीं करती है, बल्कि मध्य पूर्व से यूरोप और एशिया के अधिकांश हिस्सों में अरबों बैरल तेल को सुरक्षित रूप से ले जाने में भी इसकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. सऊदी के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबार, द अरब न्यूज ने जून 2021 की एक समाचार रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि UAE (संयुक्त अरब अमीरात) ने अक्टूबर 2020 में इजरायल की सरकारी कंपनी के साथ एक समझौता करने के बाद इजरायली पाइपलाइन के माध्यम से यूरोप में तेल पहुंचाना शुरू कर दिया है. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि 2021 में अमीराती जहाजों द्वारा देश के दक्षिणी हिस्से में इलियट बंदरगाह (वर्तमान में हमास के भारी हमलों का सामना कर रहे क्षेत्र) पर तेल ले जाना शुरू कर दिया था. इसके बाद इजरायली सार्वजनिक प्रसारक ने इलियट-एशकेलोन पाइपलाइन से जुड़े तेल टैंकरों की तस्वीरें भी दिखाई थीं, जिनमें पाइपलाइन के द्वारा तेल की आपूर्ति हो रही थी. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस महीने इस्लामिक-अरब शिखर सम्मेलन में टेल-अवीव के साथ सभी राजनयिक और आर्थिक संबंधों को खत्म करने और अरब हवाई क्षेत्र में इजराइल के विमानों को प्रवेश देने से इनकार करने के प्रस्ताव को रोक दिया था. इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि तेल का उत्पादन करने वाले मध्य पूर्वी देशों को गाजा में युद्धविराम की स्थिति प्राप्त करने के लिए "साधन के रूप में तेल का उपयोग करने की धमकी देनी चाहिए". 

हमास का हमला- पागलपन में इस्तेमाल किया गया तरीका
यूरोप जाने वाले ईरानी जहाज, लाल सागर के किनारे इजराइल के सबसे दक्षिणी सिरे पर स्थित इलियट बंदरगाह तक तेल पहुंचाएंगे. वहां से तेल को उत्तरी गाजा के सिरे से लगभग 5 किलोमीटर उत्तर में भूमध्यसागरीय तट पर स्थित एक शहर अश्कलोन तक पहुंचाया जाता था. पाइपलाइन का मार्ग सिनाई द्वीप से होकर गुजरता है, जो 200 किलोमीटर चौड़ा है, जो इसे प्रभावी रूप से मिस्र की सुएज नहर से अलग करता है. हालांकि 1979 में ईरानी क्रांति के साथ यह कोलैबरेशन समाप्त हो गया, जिसने इजराइल और ईरान के बीच गतिशीलता को काफी हद तक बदलकर रख दिया था. क्रांति के बाद, ईरान और इजराइल कट्टर विरोधी बन गए. फिर भी, क्रांति के बाद कुछ समय के लिए, इजराइल ने विवेकपूर्वक ईरानी तेल को पाइपलाइन के माध्यम से प्रवाहित करने की अनुमति दी.

EAPC ने खींचा लोगों का ध्यान
2014 में जब पाइपलाइन के टूटने से इजराइल में सबसे खराब पर्यावरणीय संकट पैदा हुआ तब EAPC कुछ समय के लिए कुछ लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब रही थी. संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल और बहरीन से जुड़े अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर होने तक EAPC पाइपलाइन फिर से अस्पष्टता में बदल गई थी. इसके बाद, EAPC तेल पाइपलाइन के संबंध में इजराइल और यूएई के बीच चर्चा हुई, जो लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है. इजरायली अधिकारियों ने विशेष रूप से इस पाइपलाइन के संचालन के संबंध में उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखी. इन ट्रेड कॉरिडोर्स का महत्व आर्थिक जीवन शक्ति से कहीं अधिक है. वे अक्सर भविष्य के संघर्षों और कभी-कभी युद्ध की धुरी के रूप में काम करते हैं. ऐतिहासिक उदाहरण के तौर पर आप ये समझिये कि जैसे सोवियत-अफगान संघर्ष, अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता और रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे तनाव, और इजराइल-हमास युद्ध (Israel Hamas War), सभी असाधारण महत्व वाले इन ट्रेड कॉरिडोर्स में घटित हुए. इनमें से अधिकांश कॉरिडोर्स, दुनिया भर में मौजूद 7 चोक पॉइंट्स को पार करते हैं. युद्ध और संघर्षों को समझने के लिए केवल मतभेद वाले पक्षों की सतही स्तर की धारणा से परे जाने की आवश्यकता है. सैन्य रणनीतिक बनाने वालों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह भूगोल और उनमें मौजूद व्यापारिक हितों का मिश्रण है जो अक्सर युद्ध को बढ़ावा देता है. अंतर्राष्ट्रीय साजिशों और भू-राजनीति की दुनिया ऐसी कहानियों से भरी पड़ी है जो अक्सर सतह के नीचे छिपी रहती हैं और सामने आने का इंतजार करती हैं. इस हमले के पीछे की रणनीति क्या है और बेखौफ आतंकी किसके हाथ में खेल रहे हैं? ईरान, कतर, रूस और चीन, इजरायल की तेल पाइपलाइन और उसकी इलियट परियोजना को नष्ट होते देख सबसे ज्यादा खुश होंगे, क्योंकि इसके अस्तित्व से ही इन देशों को मुख्य रूप से क्षेत्रीय कॉरिडोर्स पर नियंत्रण स्थापित करने के युद्ध का खतरा है.

EAPC कैसे बदल सकती है तेल परिवहन का परिदृश्य?
EAPC की प्रतिदिन क्षमता 600,000 बैरल जितनी प्रभावशाली है और इसके साथ ही एक विशाल भंडारण स्थान भी है जो लगभग 23 मिलियन बैरल को इकट्ठा करने में सक्षम है. अब आप इसकी तुलना इसके पड़ोसी सुएज नहर से करें. खाड़ी से यूरोप तक पहुंचाए जाने वाले तेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा या तो सुएज नहर या मिस्र की सुमेद पाइपलाइन के माध्यम से गुजरता है, जिसकी क्षमता 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है. सम्मिलित पाइपलाइन की क्षमता EAPC की व्यापक क्षमताओं का लगभग 1/10वां हिस्सा है. EAPC की बहुत सी असाधारण विशेषताओं में से एक VLCC (Very Large Crude Corridor) नामक विशाल सुपरटैंकरों को संभालने की क्षमता में निहित है, जो 2 मिलियन बैरल तक पेट्रोलियम परिवहन करने में सक्षम हैं. इसके उलट 150 साल पहले बनाई गई सुएज नहर (Suez Canal) अपनी गहराई और चौड़ाई से जुड़ी सीमाओं से जूझ रही है, जो इसे वीएलसीसी की केवल आधी क्षमता के साथ सुएजमैक्स के रूप में पहचाने जाने वाले जहाजों को समायोजित करने तक सीमित है. परिणामस्वरूप सुएज नहर से परंपरागत रूप से दो जहाजों को किराए पर लेने वाले तेल व्यापारियों को इजराइल के माध्यम से भेजे जाने वाले एक वीएलसीसी जहाज के लिए भुगतान करना पड़ता है. सुएज के माध्यम से एकतरफा शुल्क अनुमानित $300,000 से $400,000 तक बढ़ने के साथ-साथ EAPC पाइपलाइन अपने ग्राहकों को  लागत पर पर्याप्त लाभ प्रदान कर सकती है. कुछ समय पहले तक उत्तरी इजराइल में मौजूद एशकेलोन में में डॉकिंग करने वाले जहाजों को GCC बंदरगाहों तक पहुंचने से रोक दिया गया था, जिससे EAPC की ग्राहक शिपिंग कंपनियों को अपनी पहचान छिपाने के लिए कई पंजीकरण और अन्य युक्तियों सहित विस्तृत रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया गया था. यही एक कारण है कि इजराइल ने कभी भी EAPC के बारे में बहुत अधिक जानकारी साझा नहीं की, जिससे उसके ग्राहकों को नुकसान होता.

इजराइल ने मुआवजा देने से किया इनकार
EAPC के आसपास गोपनीयता के इस जटिल जाल को एक और वजह से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. इजराइल अपने मुनाफे को ईरान के साथ साझा करता है. 2015 में, एक स्विस अदालत ने फैसला सुनाया कि इजराइल EAPC पाइपलाइन से होने वाले मुनाफे के हिस्से के रूप में ईरान को लगभग 1.1 बिलियन डॉलर का भुगतान करने के लिए बाध्य था. हालांकि, इजराइल ने इस मुआवजे के फैसले का पालन करने से इनकार कर दिया. इजराइल के प्रतिरोध का कारण समझना मुश्किल नहीं है. मौजूदा ईरानी शासन ने इजराइल के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया है जिससे निकट भविष्य में शांति और लाभ के बंटवारे की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

क्षेत्रीय नियंत्रण की लड़ाई
वैश्विक भू-राजनीति के जटिल जाल में सात महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट मौजूद हैं जो दुनिया के रणनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये चोक पॉइंट, अक्सर संकीर्ण मार्ग, बड़े क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण कनेक्टर के रूप में काम करते हैं और इन्हें आमतौर पर जलडमरूमध्य या नहर के रूप में जाना जाता है, जिसके माध्यम से बड़ी मात्रा में समुद्री यातायात प्रभावित होता है. ध्यान देने योग्य बात ये है कि इनमें से तीन महत्वपूर्ण चोक पॉइंट मध्य पूर्व में स्थित हैं, जो इस क्षेत्र की बारहमासी चुनौतियों में जटिलता की एक अतिरिक्त परत जोड़ते हैं. इससे साफ हो जाता है कि मध्य-पूर्व (Middle East) में लगातार उथल-पुथल क्यों देखी जाती है. मध्य-पूर्व की जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता तब स्पष्ट हो जाती है जब कोई इसके भौगोलिक परिदृश्य पर करीब से नजर डालता है. मध्य पूर्व में चोक पॉइंट की तिकड़ी, अर्थात् सुएज नहर, बाब अल मंडेब और होर्मज संकरी राह मौजूद है. ये सभी चोक पॉइंट अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला और माल के समुद्री परिवहन में लिंचपिन के रूप में काम करते हैं. इनमें से दो चोक पॉइंट इजराइल के ठीक बगल में हैं और एक थोड़ा दूर UAE के पास मौजूद है. उल्लेखनीय रूप से, तकनीकी प्रगति वाले इस युग में भी लगभग 80% वैश्विक व्यापार समुद्री शिपिंग मार्गों पर ही निर्भर है. यह तथ्य ऊपर सूचीबद्ध चोक बिंदुओं के महत्व को दर्शाता है. 2020 में सुएज नहर में व्यवधान के बावजूद, मिस्र के सुएज नहर आर्थिक क्षेत्र ने अक्टूबर में चाइना एनर्जी के साथ 6.75 बिलियन डॉलर का एक समझौता पूरा किया था. इसके साथ ही कतर ने मिस्र की अर्थव्यवस्था में 5 अरब डॉलर के बड़े निवेश का वादा किया है. यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि मिस्र ने अपने हालिया इतिहास में शायद ही कभी इतना बड़ा विदेशी निवेश देखा है. सुएज नहर के संचालन में किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित जटिलताओं या असफलताओं की स्थिति में चीन और कतर को बिना किसी संदेह के नतीजों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. सुएज नहर में कारोबार का नुकसान इन दोनों देशों को नुकसान पहुंचाएगा. हाल के दशकों में, मिस्र और इजराइल ने उल्लेखनीय स्तर का सहयोग विकसित किया है और इनकी बदौलत क्षेत्र की भू-राजनीति पर महत्वपूर्ण परिणाम हुए हैं. ईस्टर्न मेडिटेरेनियन पाइपलाइन कंपनी (EAPC) की परिचालन क्षमता में सक्रियता इस साझेदारी को खतरे में डाल देगी. यह प्रयास विवाद से रहित नहीं है, क्योंकि यह सुएज नहर के माध्यम से किए जाने वाले मिस्र के आकर्षक व्यापार का लगभग 10-12% हिस्सा छीनने के लिए तैयार है. संभावित प्रभाव मिस्र की सीमाओं से परे तक फैलते हैं, जिससे चीन और कतर सहित तीसरे पक्ष के हितधारकों के लिए चिंताएं बढ़ जाती हैं. 

इजराइल के लिए नाजुक है स्थिति
अपने पड़ोसी देश इजिप्ट के साथ नाजुक राजनयिक संबंध का त्याग किए बिना इजराइल को इस चुनौती से निपटने की जरूरत है जिसकी वजह से यह स्थिति और ज्यादा जटिल हो गई है. यह इजराइल की ओर से एक संतुलन अधिनियम की मांग करता है, क्योंकि इजराइल क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ अपनी ऊर्जा को भी सुरक्षित करना चाहता है. EAPC के पास अजरबैजान और कजाकिस्तान जैसे उत्पादकों द्वारा भेजे गए जहाजों से अश्कलोन में उतारे गए तेल को अकाबा की खाड़ी में तैनात टैंकरों तक पहुंचाने की जबरदस्त क्षमता मौजूद है. ये टैंकर चीन, दक्षिण कोरिया और एशिया के विभिन्न अन्य क्षेत्रों सहित दूरगामी गंतव्यों के लिए नियत हैं. इस गतिशीलता का महत्व न केवल ऊर्जा व्यापार में बल्कि इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों में भी निहित है. अजरबैजान, इजराइल के साथ अपने बहुमुखी संबंधों के कारण खड़ा है, जिसमें व्यापार और सैन्य सहयोग दोनों ही शामिल हैं. यह बंधन रणनीतिक रूप से लाभकारी होते हुए भी, क्षेत्र में भू-राजनीतिक परिदृश्य को जटिल बनाता है. इसके विपरीत, अजरबैजान के ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वी, आर्मेनिया को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जो मुख्य रूप से उनके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और व्यापार संबंधों की वजह से उपजा है. आर्मेनिया और अजरबैजान दोनों अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो रूस को अजरबैजान के माध्यम से ईरान से जोड़ता है और यह भारत तक फैला हुआ है, जिससे एशिया के अन्य हिस्सों में माल के परिवहन की सुविधा मिलती है. यहां इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि रूस दुनिया में सबसे अधिक स्वीकृत देश है और ईरान, प्रतिबंधों के मुकाबले थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करता है, जिससे INSTC का संरक्षण उनके लिए सर्वोपरि हो जाता है. इन जटिल भू-राजनीतिक हालातों की पृष्ठभूमि में हम भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEU) के उद्भव को देखते हैं. यह गलियारा भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देता है. इस समीकरण में मध्य पूर्व खंड काफी हद तक इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे प्रमुख खिलाड़ियों तक ही सीमित है. IMEC, INSTC का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनने की ओर आगे बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और ज्यादा बढ़ जाएगा. यह भू-राजनीतिक शतरंज की बिसात हमें ध्यान दिलाती है कि कैसे अजरबैजान और आर्मेनिया जैसे संघर्ष पूरे महाद्वीपों में गूंजते हैं, और इजराइल-हमास युद्ध से जुड़े हुए हैं. मध्य पूर्व में चल रहा इजराइल-हमास संघर्ष, क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक भू-राजनीति के बीच जटिल अंतर्संबंध का प्रतीक है जहां हर कदम के परिणाम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जटिल ताने-बाने में फैल जाते हैं.

निष्कर्ष में क्या कहा जा सकता है?
वर्तमान परिदृश्य में, इलियट और एशकेलॉन पाइपलाइन को बाधित करने की ईरान की क्षमता पर खतरा मंडरा रहा है. यदि ईरान इलियट और एशकेलॉन पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने में कामयाब हो जाता है, तो वह EAPC के माध्यम से अपने व्यापार के नुकसान का बदला ले पायेगा जिससे इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब सहित प्रमुख खिलाड़ियों के सामने चुनौतियां बढ़ जाएंगी. इसके साथ ही, इजराइल-हमास संघर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका को कमजोर करने में कामयाब रहा है. अमेरिका की नौसैनिक संपत्ति, सेंटकॉम (सेंट्रल कमांड) क्षेत्र में महत्वपूर्ण एकाग्रता के साथ मध्य पूर्व को कवर करती है. यह रणनीतिक पुनर्गठन, संयुक्त राज्य अमेरिका को अन्य वैश्विक चिंताओं, विशेष रूप से यूक्रेन, पर इजराइल के लिए अपने समर्थन को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर करता है. फोकस में यह बदलाव रूस के हितों के अनुरूप है, जिससे उसे स्थिति का लाभ उठाने की अनुमति मिलती है. अराजकता की इस स्थिति में कतर और चीन नामक दो अपेक्षाकृत शांत लेकिन प्रभावशाली देश भी हैं, जो महत्वपूर्ण नतीजों के लिए तैयार हैं. यदि EAPC अपनी अधिकतम परिचालन क्षमता प्राप्त कर लेता है तो सुएज नहर में उनके पर्याप्त निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इस व्यवधान के आर्थिक प्रभाव कई उद्योगों पर पड़ सकते हैं और मौजूदा भू-राजनीतिक गतिशीलता को और तेज कर सकते हैं. मीडिया के आख्यानों द्वारा इजराइल-हमास युद्ध को एक सभ्यतागत संघर्ष में बदल दिया गया है, लेकिन क्या ऐसा है? यह व्यावसायिक हित हैं जिन्हें प्रत्येक खिलाड़ी सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है. यह युद्ध कॉरिडोर्स का युद्ध है.
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IPO बाजार में हलचल: AGS Health समेत 4 कंपनियों को SEBI की मंजूरी

AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में आईपीओ गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं. बाजार नियामक SEBI ने AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India के पब्लिक इश्यू को मंजूरी दे दी है. इनमें AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.

SEBI ने चार कंपनियों को दी IPO की मंजूरी

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India के आईपीओ प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है. इन कंपनियों के बाजार में उतरने से प्राथमिक बाजार में निवेशकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि AGS Health और PGP Glass ने मार्च 2026 में कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए अपने ड्राफ्ट दस्तावेज जमा किए थे.

AGS Health और PGP Glass जुटाएंगी ₹8,600 करोड़

SEBI की मंजूरी मिलने के बाद AGS Health करीब ₹4,500 करोड़ और PGP Glass लगभग ₹4,100 करोड़ का आईपीओ लाने की तैयारी में है. इस तरह दोनों कंपनियां मिलकर बाजार से लगभग ₹8,600 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती हैं. इन बड़े इश्यूज से प्राथमिक बाजार में गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.

क्या है कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट?**

कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग व्यवस्था कंपनियों को अपने वित्तीय और कारोबारी विवरण सार्वजनिक किए बिना IPO प्रक्रिया आगे बढ़ाने की सुविधा देती है. इस व्यवस्था के तहत कंपनियां संवेदनशील कारोबारी जानकारियां और वित्तीय आंकड़े गोपनीय रख सकती हैं. साथ ही बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपने आईपीओ प्लान में बदलाव या जरूरत पड़ने पर उसे वापस लेने का विकल्प भी उनके पास रहता है. इसके विपरीत, पारंपरिक DRHP फाइलिंग के बाद दस्तावेज सार्वजनिक हो जाते हैं.

Shreni Shares का फोकस विस्तार और पूंजी जरूरतों पर

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी Shreni Shares के आईपीओ में 69 लाख नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 82 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल होगा. कंपनी इस इश्यू से जुटाई गई राशि का उपयोग वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी.

SRIT India जुटाएगी विकास के लिए पूंजी

SRIT India के प्रस्तावित आईपीओ में 1.68 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे और इसमें कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा. कंपनी इस फंड का उपयोग अपने मौजूदा उत्पादों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास, वर्किंग कैपिटल जरूरतों, संभावित अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ और अन्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए करने की योजना बना रही है.

Jio Platforms के मेगा IPO पर टिकी बाजार की नजर

इस बीच Jio Platforms ने भी अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए दस्तावेज SEBI के पास जमा कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग ₹37,700 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. यदि यह इश्यू बाजार में आता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है.

IPO बाजार में बढ़ रही रफ्तार

SEBI की मंजूरी के साथ AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India अब लिस्टिंग की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गई हैं. लगातार बढ़ते आईपीओ और कंपनियों की मजबूत पूंजी जुटाने की योजनाएं यह संकेत देती हैं कि भारतीय प्राथमिक बाजार में निवेशकों और कंपनियों दोनों का भरोसा मजबूत बना हुआ है.
 


IPL सट्टेबाजी से Nasdaq तक: महादेव के पैसे का वैश्विक सफर

महादेव के काले अरबों रुपये वैश्विक वित्तीय प्रणाली के हर प्रहरी को चकमा देने में सफल रहे.

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
BWHindia

पलक शाह 

अगस्त 2024 में, भारत की कंपनी Eraaya Lifespaces ने अमेरिकी दिवालियापन प्रक्रिया के माध्यम से अटलांटा, जॉर्जिया स्थित और NASDAQ में सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी EBIX Inc. की 97.58 प्रतिशत हिस्सेदारी 138.577 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदी.

अब भारत का प्रवर्तन निदेशालय (ED) आरोप लगा रहा है कि इस अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा दुबई से संचालित अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट से आया था.

सिर्फ यह एक लेन-देन ही बताता है कि यह कहानी कितनी दूर तक फैली हुई है.

सौरभ चंद्राकर का पालन-पोषण छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ. वर्ष 2020 तक वह दुबई में थे और जांच एजेंसियों के अनुसार भारत के सबसे परिष्कृत अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों में से एक का निर्माण कर रहे थे. उनके साझेदार रवि उप्पल थे. उनके द्वारा बनाए गए प्लेटफॉर्म का नाम 'महादेव ऑनलाइन बुक' था .

न कोई कार्यालय था. न कोई पंजीकृत संस्था. न कोई ऐसा दस्तावेजी रिकॉर्ड जो सीधे किसी व्यक्ति तक पहुंचता हो. केवल मोबाइल नंबरों का एक नेटवर्क था और हर नंबर के पीछे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खुला बैंक खाता.

अपने चरम पर यह नेटवर्क हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये उत्पन्न कर रहा था. ईडी के आदेश में दर्ज अनुमान के अनुसार महादेव, SkyExchange, Lotus365 और उनसे जुड़े प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त नेटवर्क सालाना 4,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये के बीच कारोबार कर रहा था. यह आंकड़ा किसी मध्यम आकार की वैध कंपनी के टर्नओवर जैसा दिखाई देता है, न कि भूमिगत जुए से होने वाली कमाई जैसा.

इसका संचालन ढांचा बेहद व्यवस्थित था.

चंद्राकर और उप्पल सीधे सट्टेबाजों को नहीं संभालते थे. वे "पैनल" बेचते थे, जो प्रभावी रूप से फ्रेंचाइजी यूनिट्स की तरह काम करते थे. अपने चरम पर लगभग 2,000 पैनल एक साथ संचालित हो रहे थे. प्रत्येक के पास एक सुपरवाइजर, चार कर्मचारी, कई मोबाइल नंबर और ऐसे बैंक खाते थे जो अक्सर उन लोगों के नाम पर खोले गए थे जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी.

छत्तीसगढ़ के एक सब्जी विक्रेता को मोबाइल सिम योजना का प्रस्ताव दिया गया. उसने अपना आधार और पैन विवरण जमा किया. कुछ ही हफ्तों में उसके नाम के खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो गया. उसे इसकी जानकारी तब मिली जब उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया.

एक वेल्डर के पूर्व नियोक्ता ने उसके और उसकी पत्नी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और डेबिट कार्ड तथा मोबाइल नंबर अपने पास रख लिए. बाद में इन खातों का इस्तेमाल सट्टेबाजी लेन-देन में किया गया. दोनों खाते फ्रीज कर दिए गए. दोनों का इस गतिविधि से कोई संबंध नहीं था.

ईडी के आदेश में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं. यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि पूरा कारोबारी मॉडल इसी तरह बनाया गया था.

दुबई में चंद्राकर और उप्पल द्वारा संचालित कॉल सेंटर में छत्तीसगढ़ के पड़ोसी जिलों से आए लगभग एक हजार युवा काम करते थे. इनमें से कई लोग सामान्य बिक्री संबंधी नौकरी की उम्मीद लेकर पहुंचे थे.

इस नेटवर्क में SkyExchange भी शामिल था, जिसे कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर तिबरेवाल अलग से संचालित करते थे. दस्तावेजों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म ने 178 सप्ताह के दौरान प्रति सप्ताह 22 करोड़ रुपये की कमाई की, जो कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये बैठती है.

हर आपराधिक नेटवर्क की तरह एक समय के बाद इनके सामने भी वही समस्या आती है जो वैध व्यवसायों के सामने आती है—संचित पूंजी.

इतनी बड़ी मात्रा में नकदी नकदी के रूप में नहीं रह सकती. उसे कहीं स्थानांतरित करना पड़ता है. उसका रूप बदलना पड़ता है. और इसके लिए एक वित्तीय ढांचे की जरूरत होती है.

तिबरेवाल के पास वही ढांचा मौजूद था.

उनके नेटवर्क ने दुबई, मॉरीशस और ब्रिटेन में शेल कंपनियां बनाई हुई थीं. भारत से पैसा बाहर भेजा जाता, इन संस्थाओं के माध्यम से घुमाया जाता और फिर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, QIP पूंजी या FCCB फंडिंग के रूप में वापस लाया जाता. कागजों पर यह वैध विदेशी निवेश जैसा ही दिखाई देता था.

यह पैसा दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग की कंपनियों, Eraaya Lifespaces, Vikas Lifecare और Vikas Ecotech में पहुंचा. ये सभी सूचीबद्ध कंपनियां हैं, जिनके बोर्ड, वैधानिक ऑडिटर और वार्षिक खुलासे मौजूद हैं.

गर्ग को इस मार्ग से 765.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. ईडी की पूछताछ में गर्ग ने स्वीकार किया कि धन तिबरेवाल के सट्टेबाजी नेटवर्क से आया था. इसके बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार किया.

इसके बाद पैसा एक बार फिर भारत से बाहर गया. यहीं से यह मामला असाधारण बन जाता है.

यह धन अमेरिका पहुंचा, वहां एक दिवालियापन अदालत की जांच प्रक्रिया से गुजरा और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी की नियंत्रक हिस्सेदारी के रूप में सामने आया.

EBIX Inc. की भारत में 25 सहायक कंपनियां थीं, जो बीमा कंपनियों, बैंकों, एयरलाइंस और भुगतान नेटवर्कों को सेवाएं देती थीं. इसके दस्तावेज अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के पास जमा थे और इसके शेयर NASDAQ पर कारोबार करते थे.

अगस्त 2024 में Eraaya Lifespaces ने यह अधिग्रहण पूरा किया. यहीं से यह मामला संगठित अपराध से आगे बढ़कर वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगता है.

भारतीय बैंकों ने लेन-देन को संसाधित किया. विदेशी निवेश संरचनाओं ने धन के मार्ग उपलब्ध कराए. कॉरपोरेट फंड जुटाने के माध्यमों ने पूंजी को समाहित किया. ऑडिटरों ने खुलासों पर हस्ताक्षर किए. विभिन्न देशों के नियामकों को कुछ भी असामान्य नहीं लगा. अमेरिकी दिवालियापन अदालत ने अधिग्रहण को मंजूरी दे दी. और सौदा पूरा होने के बाद ही जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि मूल पूंजी आपराधिक स्रोतों से आई थी.

धन शोधन रोकने वाली प्रणालियां, KYC अनुपालन, सीमा-पार पूंजी निगरानी, प्रतिभूति नियमन, पेशेवर निगरानी तंत्र और अदालत की देखरेख में की गई जांच—ऐसा प्रतीत होता है कि इन सभी को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया.

शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू है.

5 जून 2026 को प्रवर्तन निदेशालय ने अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 जारी किया, जिसके तहत विकास गर्ग से जुड़ी 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली गईं. इनमें EBIX Inc. के 12,84,000 शेयर, अतिरिक्त 2,13,200 शेयर और गोवा, दिल्ली, उत्तराखंड तथा राजस्थान में स्थित 12 अचल संपत्तियां शामिल हैं.

EBIX प्रबंधन को सूचित किया गया कि 893 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता.

रायपुर स्थित ईडी के एक क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी आदेश अब NASDAQ में कारोबार करने वाली कंपनी से जुड़ी संपत्तियों को प्रभावित कर रहा था.

महादेव मामले में यह दसवां ऐसा आदेश था. इससे पहले नौ आदेशों के तहत 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी थीं. कुल कुर्की राशि अब 3,765 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है.

दूसरी ओर, चंद्राकर और उप्पल कई समनों के बावजूद ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं. वे अब भी यूएई में हैं और कथित तौर पर वानुआतु के यात्रा दस्तावेजों का उपयोग कर रहे हैं.

जांचकर्ताओं को मिले सबूतों में सुनील भंडारी के फोन से बरामद एक संदेश भी शामिल था. भंडारी उन लोगों में से एक थे जो तिबरेवाल के धन को वित्तीय प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरित करने में शामिल थे.

इस संदेश में SkyExchange का यूजर आईडी, पासवर्ड और पांच करोड़ सट्टेबाजी अंक मौजूद थे. भंडारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने इन्हीं क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर चैंपियंस ट्रॉफी और IPL मैचों पर अवैध सट्टेबाजी की थी और भुगतान नकदी कुरियर नेटवर्क के जरिए किया था.

जो व्यक्ति धन को इधर-उधर पहुंचाने में मदद कर रहा था, वही उस प्लेटफॉर्म पर सट्टा भी लगा रहा था जो यह धन पैदा कर रहा था.

आज रात भी कहीं न कहीं एक ऐसा क्रिकेट सट्टा लगाया जा रहा होगा जो ऐसे नंबर से जुड़ा होगा जिसका कोई वास्तविक मालिक नहीं है.

अधिकांश लोग अब भी मानते हैं कि अवैध सट्टेबाजी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या है, जुआ, कर चोरी या संगठित अपराध.

लेकिन यह मामला कहीं अधिक गंभीर संकेत देता है.

जांचकर्ताओं का आरोप है कि भारतीय सट्टेबाजी सिंडिकेट से पैदा हुआ धन ऑफशोर शेल कंपनियों के माध्यम से गुजरा, कई देशों की विनियमित वित्तीय प्रणालियों में प्रवेश किया और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी के अधिग्रहण को वित्तपोषित करने में इस्तेमाल हुआ.

सबसे चिंताजनक बात सिर्फ यह नहीं है कि ऐसा हुआ.

बल्कि यह है कि इसे रोकने के लिए बनाई गई लगभग हर प्रणाली इसे होने से रोकने में विफल दिखाई देती है.

और यही एक बड़ा सवाल खड़ा करता है,

वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हर दिन होने वाले कितने ऐसे लेन-देन हैं जो पूरी तरह वैध दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वैध नहीं हैं?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


Gen Z और छोटे शहरों ने बदली ब्यूटी मार्केट की तस्वीर, फ्लिपकार्ट की बिक्री 50% बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं.

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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भारत के ई-कॉमर्स बाजार में ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट तेजी से विस्तार कर रहा है. फ्लिपकार्ट ने ग्लैम अप फेस्ट 2026 के दौरान खुलासा किया कि उसके ब्यूटी और पर्सनल केयर कारोबार में सालाना आधार पर 50% की वृद्धि दर्ज की गई है. इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान Gen Z उपभोक्ताओं और टियर-2 व टियर-3 शहरों के ग्राहकों का रहा है. कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर होने वाली कुल ब्यूटी खरीदारी में करीब 60% हिस्सेदारी Gen Z ग्राहकों की है, जबकि हर तीन में से दो ब्यूटी सर्च गैर-मेट्रो शहरों से आ रही हैं.

 

सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ग्लैम अप फेस्ट 2026 के चौथे संस्करण में 100 से अधिक प्रमुख ब्यूटी ब्रांड्स और 6,000 से ज्यादा क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स तथा सेलिब्रिटीज ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में उद्योग के बदलते रुझानों, उपभोक्ता व्यवहार और नई तकनीकों पर चर्चा की गई.

 

Annual Beauty Trends Report 2.0 में सामने आए नए रुझान

ग्लैम अप फेस्ट के दौरान फ्लिपकार्ट ने Quantum Consumer Solutions के साथ मिलकर तैयार की गई Annual Beauty Trends Report 2.0 भी जारी की. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं. ग्राहक अपनी व्यक्तिगत पहचान और पसंद को दर्शाने के लिए नए प्रयोगों के प्रति अधिक खुले नजर आ रहे हैं.

टेक्नोलॉजी बना रही खरीदारी को आसान

फ्लिपकार्ट का ब्यूटी प्लेटफॉर्म Virtual Try-On और Live Video Commerce जैसी सुविधाओं से लैस है. कंपनी का दावा है कि ये फीचर्स ग्राहकों को अधिक जानकारीपूर्ण और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उत्पाद चयन और खरीदारी का फैसला आसान हो जाता है.

छोटे शहरों से बढ़ रही ब्यूटी बाजार की ताकत

फ्लिपकार्ट के मुताबिक कटक, बर्धमान, गोरखपुर, कोट्टायम, गुंटूर, जामनगर और सांगली जैसे शहर अब देश में ब्यूटी ट्रेंड्स और खरीदारी के पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं. कंपनी का मानना है कि इन शहरों में प्रीमियम और विशेष ब्यूटी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे पूरे सेगमेंट को नई गति मिल रही है.

प्रीमियम ब्यूटी और पुरुष ग्रूमिंग में जबरदस्त उछाल

फ्लिपकार्ट के आंकड़ों के अनुसार प्रीमियम ब्यूटी श्रेणी में सालाना आधार पर 60% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई. वहीं परफ्यूम श्रेणी में 45% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली. पुरुषों की ग्रूमिंग सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनकर उभरा, जहां 65% की वृद्धि दर्ज की गई. "Men’s Sunscreen", "Men’s Facewash" और "Men’s Hair Serum" जैसी श्रेणियों की खोज में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. यह संकेत देता है कि पुरुष उपभोक्ता भी अब व्यक्तिगत देखभाल और वेलनेस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.

हर सेकंड बिक रहे 12 ब्यूटी प्रोडक्ट

फ्लिपकार्ट ने बताया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हर सेकंड 12 ब्यूटी उत्पादों की बिक्री हो रही है. वहीं क्विक कॉमर्स सेवा Flipkart Minutes में ब्यूटी श्रेणी पिछले एक वर्ष में पांच गुना बढ़ी है और यह प्लेटफॉर्म की शीर्ष प्रदर्शन करने वाली तीन श्रेणियों में शामिल हो चुकी है. फ्लिपकार्ट सॉफ्टलाइंस, ग्रोसरी एवं मार्केटप्लेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड साकैत चौधरी ने कहा, भारत में ब्यूटी श्रेणी को Gen Z उपभोक्ता आकार दे रहे हैं. वे अधिक जागरूक हैं, ट्रेंड्स को लेकर सजग हैं और उन्होंने ब्यूटी को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है. साथ ही, हम भारत के विभिन्न शहरों से आने वाले ग्राहकों के बीच मजबूत मांग देख रहे हैं, जहां पारंपरिक श्रेणियों से आगे बढ़कर प्रीमियम, विशेष और वैश्विक प्रेरणा वाले उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ रही है. यह बदलाव ब्रांड्स के लिए ग्राहकों से अधिक प्रभावी तरीके से जुड़ने के नए अवसर पैदा कर रहा है और उत्पाद खोज को खरीदारी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है. फ्लिपकार्ट का ग्लैम अप फेस्ट इन्हीं बदलावों को दर्शाता है, जहां ब्रांड्स, क्रिएटर्स और उपभोक्ता एक मंच पर आकर उभरते ट्रेंड्स और नवाचारों का उत्सव मनाते हैं.

लॉन्च हुआ Global Luxe Beauty Store

कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने फ्लिपकार्ट के नए Global Luxe Beauty Store का उद्घाटन किया. इस स्टोर के जरिए भारतीय ग्राहकों को K-Beauty, डर्मा केयर और अंतरराष्ट्रीय फ्रेगरेंस ब्रांड्स तक पहुंच मिलेगी. इस प्लेटफॉर्म पर Calvin Klein, Gucci, Nautica, Eucerin, Medicube, D'Alba, Cetaphil, CeraVe, Beauty of Joseon, SKIN1004 और Tir Tir जैसे 100 से अधिक वैश्विक ब्रांड उपलब्ध होंगे.

गैर-मेट्रो शहरों तक पहुंचेगा ग्लैम अप फेस्ट

इस ऑफलाइन आयोजन के बाद फ्लिपकार्ट ऐप पर 19 से 27 जून, 2026 तक Glam Up Sale आयोजित की जाएगी. इसमें सीमित समय के ऑफर, चुने हुए कलेक्शंस, नए लॉन्च और ब्यूटी व पर्सनल केयर श्रेणियों में ट्रेंड आधारित सुझाव उपलब्ध होंगे. साथ ही फ्लिपकार्ट ने यह घोषणा भी की है कि वह इस वर्ष ग्लैम अप फेस्ट को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तारित करेगा. इसकी शुरुआत गुवाहटी में आयोजित कार्यक्रम से हुई, जहां 600 से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स ने भाग लिया और प्रमुख ब्यूटी ब्रांड्स के साथ संवाद किया. कंपनी का कहना है कि सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले महीनों में देश के कई अन्य गैर-मेट्रो शहरों में भी ऐसे आयोजन किए जाएंगे.


RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी, एक हफ्ते में निकले 10 अरब डॉलर

एक सप्ताह में करीब 10 अरब डॉलर घटा भारत का फॉरेक्स रिजर्व, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की कमी; विदेशी मुद्रा आस्तियों में हालांकि बढ़ोतरी दर्ज

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक सप्ताह के भीतर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर घटकर 671.63 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट मुख्य रूप से सोने की कीमतों में आई नरमी के कारण हुई है, जिससे RBI के गोल्ड रिजर्व के मूल्य में भारी कमी दर्ज की गई.

एक सप्ताह में 9.98 अरब डॉलर घटा फॉरेक्स रिजर्व

RBI द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 12 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.985 अरब डॉलर घट गया. इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 711 मिलियन डॉलर की कमी आई थी.

इस गिरावट के बाद देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 671.625 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था.

विदेशी मुद्रा आस्तियों में दर्ज हुई बढ़ोतरी

हालांकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के बीच विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में बढ़ोतरी देखने को मिली है. समीक्षा सप्ताह के दौरान FCA में 846 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 544.290 अरब डॉलर पर पहुंच गया. FCA विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है.

सोने के भंडार की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट

विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह गोल्ड रिजर्व का मूल्य कम होना रहा. बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी के चलते RBI के स्वर्ण भंडार की वैल्यू 10.754 अरब डॉलर घट गई.

इसके बाद देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया. मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास 880.52 टन सोना था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7 प्रतिशत हिस्सा है.

SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली कमी

RBI के आंकड़ों के मुताबिक समीक्षा सप्ताह के दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व की वैल्यू भी 11 मिलियन डॉलर घट गई. वर्तमान में IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है.

क्यों महत्वपूर्ण है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की वित्तीय मजबूती का अहम संकेतक माना जाता है. इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट मुख्य रूप से गोल्ड रिजर्व के मूल्यांकन में बदलाव का असर है, जबकि विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.

 


BRICS देशों में यूपी का जलवा, ₹50,000 करोड़ के निर्यात से बनाया नया रिकॉर्ड

BRICS और सहयोगी देशों को उत्तर प्रदेश से 5.36 अरब डॉलर का निर्यात, राज्य के MSME, हस्तशिल्प और चमड़ा उद्योग ने बनाया नया रिकॉर्ड

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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उत्तर प्रदेश ने BRICS देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में 5.36 अरब डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) से अधिक का निर्यात दर्ज किया है. राज्य के हस्तशिल्प, चमड़ा उत्पाद, कालीन, रेडीमेड गारमेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) उत्पादों की BRICS देशों में मजबूत मांग देखने को मिली है. यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर की बढ़ती वैश्विक पहचान और निर्यात क्षमता को दर्शाती है.

BRICS देशों में बढ़ी यूपी के उत्पादों की पहुंच

आगरा में आयोजित BRICS MSME फोरम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के MSME मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि राज्य लगातार BRICS देशों के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को मजबूत कर रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 5.36 अरब डॉलर के निर्यात में से 3.93 अरब डॉलर का निर्यात BRICS सदस्य देशों को और 1.43 अरब डॉलर का निर्यात सहयोगी देशों को किया गया.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से मशीनरी, वस्त्र, चमड़ा उत्पाद, कालीन और कीमती पत्थरों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जिससे राज्य की वैश्विक बाजारों में पकड़ मजबूत हुई है.

96 लाख MSME इकाइयां बनीं अर्थव्यवस्था की ताकत

राज्य सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 96 लाख MSME इकाइयां संचालित हो रही हैं, जो लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं. MSME क्षेत्र राज्य की आर्थिक वृद्धि, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख आधार बनकर उभरा है.

मंत्री ने कहा कि सरकार MSME क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार नई पहल कर रही है, जिससे निर्यात में तेजी आई है और स्थानीय उद्योगों को नए अवसर मिले हैं.

ODOP योजना ने खोले वैश्विक बाजारों के दरवाजे

'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना उत्तर प्रदेश की सबसे सफल योजनाओं में शामिल हो चुकी है. इस पहल ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और पारंपरिक उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ODOP योजना के तहत अब तक 20,000 से अधिक लाभार्थियों को लगभग 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सहायता दी गई है. इससे 3.16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.

पारंपरिक कारीगरों को मिल रहा आधुनिक तकनीक का साथ

राज्य सरकार 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' के जरिए पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है. अब तक 4.41 लाख से अधिक कारीगरों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हुई है.

10 लाख नई माइक्रो यूनिट्स स्थापित करने का लक्ष्य

युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' चला रही है. इसके तहत बिना गारंटी के ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार ने अगले 10 वर्षों में 10 लाख नई माइक्रो यूनिट्स स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है, जिससे रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा.

MSME पार्कों से मिलेगा औद्योगिक विकास को बल

राज्य में PLEDGE योजना के तहत आधुनिक MSME पार्क विकसित किए जा रहे हैं. अब तक 12 जिलों में MSME पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी है. इन पार्कों का उद्देश्य उद्योगों को बेहतर बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना है.

निर्यात और निवेश का नया केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश

BRICS देशों में बढ़ती मांग और MSME सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ODOP, MSME प्रोत्साहन योजनाओं और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में निवेश के चलते आने वाले वर्षों में राज्य का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है.
 


₹1 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य, FMCG में बड़ा दांव; ईशा अंबानी ने RCPL के विस्तार का रोडमैप रखा

फूड पार्क नेटवर्क में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी, कैंपा और इंडिपेंडेंस ब्रांड की तेज बढ़त के दम पर रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बड़ी महत्वाकांक्षा

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता इकाई रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) ने वित्त वर्ष 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य तय किया है. कंपनी का उद्देश्य देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में शामिल होना और वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति बनाना है. रिलायंस रिटेल वेंचर्स की कार्यकारी निदेशक ईशा अंबानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में इस महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया.

FMCG कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी

ईशा अंबानी ने कहा कि RCPL का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत की अग्रणी FMCG कंपनियों में जगह बनाना है. इसके लिए कंपनी उत्पादन क्षमता, वितरण नेटवर्क और ब्रांड पोर्टफोलियो को तेजी से विस्तार दे रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कंपनी उपभोक्ता उत्पादों के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करेगी.

फूड पार्क नेटवर्क पर 30,000 करोड़ रुपये का निवेश

कंपनी ने एशिया के सबसे बड़े एकीकृत फूड पार्क नेटवर्क में से एक विकसित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना बनाई है. यह नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स आधारित आधुनिक तकनीकों से लैस होगा.

ईशा अंबानी के अनुसार, अब तक 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है. कंपनी ने 12 राज्यों में हाई-स्पीड बॉटलिंग लाइनों के जरिए पेय पदार्थों का उत्पादन शुरू कर दिया है. इसके अलावा बिस्कुट, चॉकलेट, मुख्य खाद्य उत्पादों और पैकेज्ड फूड की मल्टी-कैटेगरी उत्पादन इकाइयों का भी विस्तार किया जा रहा है.

30 लाख आउटलेट तक पहुंचा वितरण नेटवर्क

RCPL का वितरण नेटवर्क तेजी से मजबूत हुआ है. कंपनी की पहुंच अब देशभर के 30 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट तक हो गई है. कारोबार शुरू होने के तीन वर्षों के भीतर कंपनी ने 5,000 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स जोड़े हैं. ईशा अंबानी ने कहा कि कंपनी पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य उभरते बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे उसकी पहुंच और मजबूत होगी.

कैंपा और इंडिपेंडेंस ब्रांड बने ग्रोथ इंजन

रिलायंस के FMCG कारोबार को कैंपा और इंडिपेंडेंस जैसे ब्रांडों से मजबूत समर्थन मिल रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कैंपा ने 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की और प्रमुख बाजारों में दो अंकों की बाजार हिस्सेदारी हासिल करते हुए देश का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया. वहीं, दैनिक उपयोग के उत्पादों वाले ब्रांड इंडिपेंडेंस की बिक्री भी 2,600 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है.

क्विक कॉमर्स और किराना कारोबार पर भी फोकस

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि क्विक कॉमर्स भारतीय उपभोक्ताओं की नई आदत बनता जा रहा है और कंपनी इस क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही है. उन्होंने बताया कि जियोमार्ट देश के सबसे बड़े क्विक कॉमर्स नेटवर्क में शामिल हो चुका है. कंपनी के पास 3,100 से अधिक स्टोर हैं, जो 5,100 पिन कोड क्षेत्रों में फैले 1,200 से ज्यादा शहरों को सेवा दे रहे हैं. जियोमार्ट के औसत दैनिक ऑर्डर सालाना आधार पर 3.6 गुना बढ़ रहे हैं.

1,000 स्टोर के पार पहुंचा स्मार्ट बाजार नेटवर्क

मुकेश अंबानी ने बताया कि कंपनी का स्मार्ट बाजार नेटवर्क 1,000 स्टोर का आंकड़ा पार कर चुका है. उन्होंने इसे दुनिया में बड़े पैमाने पर रिटेल नेटवर्क विस्तार के सबसे तेज उदाहरणों में से एक बताया. कंपनी का मानना है कि विनिर्माण, वितरण, ब्रांड निर्माण और डिजिटल कॉमर्स के संयोजन से वह आने वाले वर्षों में भारतीय FMCG बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी.
 


जियो का मेगा IPO लॉन्च के करीब, 4 अरब डॉलर जुटाने के लिए सेबी के पास DRHP दाखिल

जियो का यह इश्यू, देश के सबसे बड़े IPO में से एक होगा, जिसका वैल्यूएशन का अनुमान 100 अरब डॉलर से अधिक है.

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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रिलायंस समूह की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स देश के पूंजी बाजार में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है. कंपनी ने अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास मसौदा दस्तावेज (DRHP) दाखिल कर दिया है. प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 4 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है.

27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी कंपनी

सेबी के पास जमा मसौदे के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. शेयरों की अंतिम कीमत बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से तय की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, IPO के बाद कंपनी की बाजार पूंजी 100 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैल्यूएशन कई प्रमुख भारतीय कंपनियों और हाल ही में प्रस्तावित बड़े IPOs से भी अधिक हो सकता है.

मुकेश अंबानी बोले- यह भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 69वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में जियो IPO को समूह के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया. उन्होंने कहा कि यह केवल रिलायंस ही नहीं, बल्कि लाखों शेयरधारकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है. अंबानी के मुताबिक, जियो की लिस्टिंग भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी.

आकाश, ईशा और अनंत संभाल रहे हैं अगला चरण

अंबानी ने बताया कि IPO प्रक्रिया और जियो के अगले विकास चरण की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के नेतृत्व के हाथों में है. कंपनी के विस्तार और मूल्य सृजन की रणनीति का नेतृत्व आकाश, ईशा और अनंत अंबानी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जियो का भविष्य उज्ज्वल है और यह निवेशकों के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान करेगा.

मेटा और गूगल नहीं बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी

IPO में जियो के मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बिक्री के लिए नहीं रखी जाएगी. 2020 में निवेश करने वाले प्रमुख वैश्विक निवेशकों में Meta, Google, KKR, Silver Lake और General Atlantic शामिल हैं. इन निवेशकों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 30.89 प्रतिशत है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी हुई है.

IPO से जुटी रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगेगा

मसौदा दस्तावेज के अनुसार, IPO से प्राप्त राशि में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग कर्ज भुगतान के लिए किया जाएगा. कंपनी ने इस इश्यू के लिए प्रमुख निवेश बैंकिंग संस्थानों को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया है.

अब आसमान से भी इंटरनेट पहुंचाएगी जियो

AGM में जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कंपनी की भविष्य की रणनीति का भी खुलासा किया. उन्होंने कहा कि जियो निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में अपना स्वदेशी संचार उपग्रह विकसित करने की संभावना पर काम कर रही है. इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और द्वीपों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है.

AI और 5G पर रहेगा बड़ा फोकस

जियो आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाएगी. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपने पूरे ग्राहक आधार को 5G नेटवर्क पर लाना है.

साथ ही, कंपनी इस वर्ष के अंत तक नेटवर्क में सीधे एकीकृत AI एजेंट लॉन्च करने की योजना बना रही है, जो हर भारतीय भाषा में उपलब्ध होंगे और अलग से डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी.

जियो की अगली विकास रणनीति

कंपनी ने भविष्य के लिए पांच प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताएं तय की हैं. इनमें 5G विस्तार, जियोएयर फाइबर के जरिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंच, छोटे व्यवसायों का डिजिटलीकरण, क्लाउड आधारित सेवाओं का विस्तार और AI-संचालित ग्राहक सेवाओं को बढ़ावा देना शामिल है. जियो का यह IPO न केवल रिलायंस समूह के लिए, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है.
 


सरकारी खजाना हुआ मालामाल, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.21 लाख करोड़ रुपये के पार

सरकार ने इस अवधि के दौरान करदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.19 प्रतिशत अधिक है. इसके बावजूद शुद्ध कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
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वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सरकार के लिए उत्साहजनक रही है. 17 जून तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर (Net Direct Tax) संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct tax collection) में यह वृद्धि कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और एडवांस टैक्स कलेक्शन में मजबूत बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई है. इससे सरकार की आय में इजाफा होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत भी मिले हैं.

कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 22.47 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), फर्मों और अन्य संस्थाओं से प्राप्त गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8.40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.94 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

STT से सरकार की कमाई में जोरदार उछाल*

शेयर बाजार में बढ़ती गतिविधियों का असर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह पर भी दिखाई दिया. 17 जून तक STT के जरिए सरकार को 18,856 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 13,013 करोड़ रुपये था. इससे स्पष्ट है कि पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.

टैक्स रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी

सरकार ने इस अवधि के दौरान करदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.19 प्रतिशत अधिक है. इसके बावजूद शुद्ध कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.

सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 6.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा

17 जून तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) 12.46 प्रतिशत बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक वर्ष पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 5.42 लाख करोड़ रुपये था. कुल संग्रह में सकल कॉरपोरेट टैक्स का योगदान 2.77 लाख करोड़ रुपये और गैर-कॉरपोरेट टैक्स का योगदान 3.15 लाख करोड़ रुपये रहा.

एडवांस टैक्स से मिले सकारात्मक संकेत

वित्त वर्ष 2026-27 में एडवांस टैक्स संग्रह 15.3 प्रतिशत बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें कॉरपोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 16.01 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.41 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि गैर-कॉरपोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 12.73 प्रतिशत बढ़कर 37,620 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि एडवांस टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में तेज वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनियों की आय और मुनाफे की स्थिति मजबूत बनी हुई है. साथ ही, करदाताओं की आय में भी सुधार देखने को मिल रहा है. ऐसे में मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को समर्थन मिलने की उम्मीद है.


ग्रोसरी बाजार में बड़ी एंट्री, मीशो ने 202 करोड़ रुपये में खरीदा किराना क्लब

कंपनी का मानना है कि यह सौदा उसे विभिन्न रिटेल सेगमेंट्स में अपने B2B कारोबार का विस्तार करने में मदद करेगा.

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Friday, 19 June, 2026
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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो ने भारत के किराना और जनरल ट्रेड इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कम्युनिटी-आधारित B2B कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘किराना क्लब’ का अधिग्रहण कर लिया है. करीब 202 करोड़ रुपये नकद में हुए इस सौदे से मीशो को देशभर के 41 लाख से अधिक किराना दुकानदारों तक सीधी पहुंच मिलेगी और वह तेजी से बढ़ते ग्रॉसरी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकेगा.

41 लाख से अधिक किराना रिटेलर्स का नेटवर्क मिलेगा

साल 2020 में अंशुल गुप्ता और ऐश्वर्या जैन द्वारा स्थापित किराना क्लब ने भारत के सबसे बड़े डिजिटल किराना समुदायों में से एक का निर्माण किया है. प्लेटफॉर्म पर 41 लाख से अधिक पंजीकृत किराना रिटेलर्स जुड़े हुए हैं.

मोबाइल-फर्स्ट मॉडल पर आधारित यह प्लेटफॉर्म छोटे दुकानदारों को FMCG और ग्रॉसरी उत्पादों की खोज, तुलना और सीधे ब्रांड्स से खरीदारी की सुविधा देता है. इसका विशेष फोकस टियर-3, टियर-4 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों पर रहा है.

650 अरब डॉलर के ग्रॉसरी बाजार में बढ़ेगी पकड़

इस अधिग्रहण से मीशो को भारत के 650 अरब डॉलर से अधिक के ग्रॉसरी बाजार में गहरी पैठ बनाने का अवसर मिलेगा. देश में किराना और जनरल ट्रेड चैनल कुल ग्रॉसरी बिक्री में 90 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं. कंपनी का मानना है कि यह सौदा उसे विभिन्न रिटेल सेगमेंट्स में अपने B2B कारोबार का विस्तार करने में मदद करेगा.

स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा किराना क्लब

अधिग्रहण के बाद भी किराना क्लब मीशो समूह के भीतर स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करता रहेगा. हालांकि, उसे मीशो के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, सप्लायर बेस और मार्केटप्लेस इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा, जिससे वह अपने कारोबार और रिटेलर नेटवर्क का विस्तार कर सकेगा.

क्या बोले मीशो के सीईओ?

मीशो के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विदित आत्रेय ने कहा कि किराना क्लब को अपने इकोसिस्टम में शामिल कर कंपनी कॉमर्स के लोकतंत्रीकरण के अपने विजन को उपभोक्ताओं और उद्यमियों से आगे बढ़ाकर उन रिटेलर्स तक ले जा रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां मिलकर तकनीक आधारित ऐसा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म तैयार करेंगी, जो उत्पाद खोज को बेहतर बनाएगा, सोर्सिंग को अधिक प्रभावी करेगा और देशभर के लाखों किराना कारोबारियों के लिए नए विकास अवसर पैदा करेगा.

छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर

विदित आत्रेय के अनुसार, किराना क्लब ने अपने कम लागत वाले और कम्युनिटी-केंद्रित मॉडल के जरिए छोटे रिटेलर्स के बीच मजबूत भरोसा बनाया है. कंपनी को उम्मीद है कि इस साझेदारी से देश के कम सेवा प्राप्त बाजारों में पारदर्शिता, उत्पादों की उपलब्धता और सोर्सिंग क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा.

किराना क्लब ने क्या कहा?

किराना क्लब के सह-संस्थापक और सीईओ अंशुल गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने समुदाय, स्थानीय समझ और कॉमर्स को जोड़कर किराना दुकानदारों के बीच मजबूत विश्वास कायम किया है. उन्होंने कहा कि मीशो भारत के विशाल उपभोक्ता आधार को अच्छी तरह समझता है और तकनीक के जरिए कम सेवा प्राप्त ग्राहकों तक पहुंच बनाने के उनके विजन को साझा करता है.

1.3 करोड़ किराना दुकानों को डिजिटल बनाने की तैयारी

कंपनी के अनुसार, यह अधिग्रहण इंटरनेट कॉमर्स को अधिक लोकतांत्रिक बनाने और भारत के 1.3 करोड़ से अधिक किराना रिटेलर्स तक डिजिटल कॉमर्स की पहुंच बढ़ाने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है.

मीशो का मानना है कि किराना क्लब के मजबूत रिटेलर नेटवर्क और उसके तकनीक-संचालित मार्केटप्लेस मॉडल का संयोजन छोटे कारोबारियों के लिए उत्पाद खोज, खरीद प्रक्रिया और पारदर्शिता को बेहतर बनाएगा.


भारत फोर्ज की अमेरिकी रक्षा कंपनी से बड़ी डील, मिलकर बनाएंगी 155mm मोबाइल तोप

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.

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Friday, 19 June, 2026
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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारत फोर्ज की रक्षा इकाई कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (KSSL) ने अमेरिकी रक्षा कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. दोनों कंपनियां मिलकर अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी गन सिस्टम विकसित करेंगी, जिसे दुनिया भर की सेनाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा. इस समझौते को भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

पेरिस डिफेंस एक्सपो में हुआ समझौता

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.

AM General ने अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन (MTC) कार्यक्रम के लिए प्रस्ताव भी सौंपा है. इस परियोजना में भारत फोर्ज के MArG (Mounted Artillery Gun) प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए नया हथियार सिस्टम विकसित किया जाएगा. यदि अमेरिकी सेना से मंजूरी मिलती है, तो इसकी आपूर्ति 2027 से शुरू हो सकती है.

40 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता

इस साझेदारी के केंद्र में भारत फोर्ज का MArG प्लेटफॉर्म है, जिसमें 52-कैलिबर की 155mm तोप लगाई गई है. यह सिस्टम 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक उच्च-विस्फोटक गोले दागने में सक्षम है. तोप में अत्याधुनिक सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक, ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम दिया गया है, जिससे हर मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है. यह प्लेटफॉर्म 20 से अधिक गोले और आवश्यक बारूद अपने साथ ले जाने की क्षमता रखता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी.

वैश्विक रक्षा बाजार पर नजर

भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की उन्नत रक्षा तकनीकों पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है. उनके अनुसार, कंपनी ऐसे युद्ध-सिद्ध और आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास पर फोकस कर रही है जो भविष्य की सैन्य जरूरतों को पूरा कर सकें.

वहीं AM General के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन चैडबोर्न ने कहा कि उनकी कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के मोबाइल प्लेटफॉर्म का संयोजन सेनाओं को अधिक प्रभावी और लचीली युद्ध क्षमता प्रदान करेगा.

दोनों कंपनियों की नजर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं है. वे वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की मांग को भी भुनाना चाहती हैं.

भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना अमेरिकी सेना के लिए चयनित होती है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी. इससे न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि रक्षा निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.

निवेशकों की नजर भारत फोर्ज पर

इस बड़े रक्षा समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत फोर्ज के शेयर पर भी बनी हुई है. 18 जून को एनएसई पर कंपनी का शेयर 0.85 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ था. हालांकि लंबी अवधि में स्टॉक का प्रदर्शन मजबूत रहा है.

पिछले एक वर्ष में भारत फोर्ज के शेयर में 43 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, जबकि कुल रिटर्न लगभग 55 प्रतिशत रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 96,670 करोड़ रुपये है.

आगे क्या रहेगा फोकस

बाजार की नजर अब अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन कार्यक्रम पर रहेगी. यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो भारत फोर्ज और KSSL के लिए यह न केवल बड़ा कारोबारी अवसर होगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी दिला सकता है.