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Flex Fuel की क्रांति आ गई...जानिए हरदीप पुरी ने क्यों कही ये बात और क्या होता है Flex Fuel?
सरकार Flex Fuel पर तेजी से काम कर रही है. Flex Fuel ईंधन (ई10, ई20, ई100) देश में कई जगह मिल रहा है. वहीं, गाड़ी बनाने वाली कंपनियों ने भी इसके लिए इंजन में बदलाव किए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और इस पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार की तैयारी जोरों पर है. वह दिन अब दूर नहीं जब देश में ऐसी गाड़ियां तेजी से दौड़ती नजर आएंगी, जिनमें पेट्रोल या डीजल का इस्तेमाल नहीं होगा. सरकार इस समय फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) पर तेजी से काम कर रही है. देश में फ्लेक्स फ्यूल मिलना भी शुरू हो गया है. इसे ई10, ई20, ई100 आदि के नाम से जानते हैं. मंगलवार यानी 21 जनवरी, 2025 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी दिल्ली में चल रहे भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (X) पर फ्लेक्स फ्यूल को लेकर एक पोस्ट शेयर की और लिखा कि अब फ्लेक्स फ्यूल की क्रांति आ गई है. तो आइए जानते हैं आखिर ये फ्लेक्स फ्यूल क्या है और ये कैसे बनता है?
हरदीप पुरी ने X पर शेयर की पोस्ट
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मंगलवार को दिल्ली में चल रहे भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने फ्लेक्स फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट की. इसमें उन्होंने लिखा कि फ्लेक्स फ्यूल की क्रांति आ गई है. पुरी ने अपनी पोस्ट में बताया कि 85% तक इथेनॉल पर चलने वाले मोटरबाइक, ऑटो और कार सहित 19 वाहन भारतीय मोबिलिटी परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार हैं. उन्होंने इसे भारत की ग्रीन एनर्जी में भी बड़ा बदलाव बताया. उन्होंने लिखा, 'भारत ने जून 2022 में 5 महीने पहले ही 10% इथेनॉल मिश्रण हासिल कर लिया है. हम पहले ही 19% इथेनॉल मिश्रण हासिल कर चुके हैं. ई20 ईंधन अब से कुछ महीनों में पूरे देश में उपलब्ध होगा. यह साल 2030 के लक्ष्य से बहुत आगे है. ई100 ईंधन पूरे देश में 400 आउटलेट पर मौजूद है. क्लीन, ग्रीन और उभरती हुई मोबिलिटी की दुनिया में आपका स्वागत है!'
क्या होता है फ्लैक्स फ्यूल?
फ्लेक्स फ्यूल को इथेनॉल (एथिल एल्कोहॉल) से तैयार किया जाता है. वहीं, इथेनॉल को गन्ने से तैयार किया जाता है. इसके अलावा इसे शर्करा वाली फसलों जैसे चुकंदर, फल, जौ, मक्का, गेहूं, खजूर और नारियल से भी तैयार किया जाता है. साथ ही इसे कृषि अवशेषों से भी तैयार किया जा सकता है. देश में इस समय ऐसी गाड़ियां चल रही हैं जिनमें ई10, ई20, ई100 आदि ईंधन इस्तेमाल होता है. यहां ई का मतलब इथेनॉल और इसके बाद आने वाले नंबर (10, 20 या 100) का मतलब ईंधन में मौजूद इथेनॉल के प्रतिशत से होता है. बात अगर ई20 फ्यूल यानी ईंधन की करें तो इसका मतलब हुआ कि उस ईंधन में 20 प्रतिशत इथेनॉल और बाकी पेट्रोल है. ऐसा ईंधन ही फ्लेक्स फ्यूल कहलाता है. इस फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों के इंजन में बदलाव किए जाते हैं. हालांकि इस ईंधन को हर गाड़ी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. इसके लिए कंपनियां भी गाड़ियों के इंजन को डेवलप कर नई गाड़ियां लॉन्च कर रही हैं. ई कैटेगरी के ईंधन से चलने वाली गाड़ियों में साधारण पेट्रोल भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
फ्लेक्स फ्यूल इस्तेमाल करने के फायदे
फ्लेक्स फ्यूल के कई फायदे होते हैं. पहला, यह आम पेट्रोल के मुकाबले कुछ सस्ता होता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पेट्रोल की मात्रा कम हो जाती है. पेट्रोल की मात्रा कम होगी तो सरकार को भी कच्चा तेल कम मंगाना होगा और डॉलर भी बचेंगे. वहीं दूसरा फायदा यह कि फ्लेक्स फ्यूल के चलने वाली गाड़ियों से वायु प्रदूषण कम होता है. इस फ्यूल से चलने वाली गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड का कम उत्सर्जन करती हैं.
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