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खुशहाल कौशिक का मिशन: भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने वाली लिसिएंथस टेक की प्रेरक शक्ति
खुशहाल कौशिक के नेतृत्व में लिसिएंथस टेक भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने का मिशन निभा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
लिसिएंथस टेक उस समय आईटी सुरक्षा सेवाओं पर केंद्रित है जब बुनियादी ढांचा और अधिक जटिल और असुरक्षित होता जा रहा है. कंपनी सुरक्षा, अनुपालन, गवर्नेंस और सिस्टम प्रदर्शन से संबंधित जोखिमों को संबोधित करने का कार्य करती है.
एक ऐसे युग में जब डिजिटल परिवर्तन अर्थव्यवस्थाओं को चला रहा है और साइबर खतरों का खतरा बढ़ता जा रहा है, लिसिएंथस टेक के संस्थापक और सीईओ खुशहाल कौशिक भारत को एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर ले जा रहे हैं. उनकी गुरुग्राम स्थित साइबर सुरक्षा फर्म नवाचार का एक आधार बन गई है, जिसे कौशिक की दूरदृष्टि, लचीलापन और भारत की वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थिति को ऊंचा उठाने की अटूट प्रतिबद्धता द्वारा प्रेरित किया जा रहा है.
लिसिएंथस टेक उस समय आईटी सुरक्षा सेवाओं पर केंद्रित है जब बुनियादी ढांचा और अधिक जटिल और असुरक्षित होता जा रहा है. कंपनी सुरक्षा, अनुपालन, गवर्नेंस और सिस्टम प्रदर्शन से संबंधित जोखिमों को संबोधित करने का कार्य करती है. इसके पोर्टफोलियो में प्रशिक्षण और प्रमाणन के साथ-साथ ऑडिट, मूल्यांकन और परामर्श सेवाएं भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य संगठनों को महत्वपूर्ण डेटा और संचालन की सुरक्षा करने में मदद करना है.
राष्ट्र गौरव में निहित एक दृष्टिकोण
कौशिक की यात्रा एक साहसिक निर्णय से शुरू हुई, जब उन्होंने एक शीर्ष इंजीनियरिंग स्कूल से स्नातक होने के बाद उच्च वेतन वाली कॉर्पोरेट नौकरियों को ठुकरा कर लिसिएंथस टेक की स्थापना की। उनका मिशन स्पष्ट था. भारत की साइबर सुरक्षा को लेकर बनी कमजोर छवि को बदल कर इसे एक वैश्विक शक्ति में बदलना, हाल ही में एक उद्योग कार्यक्रम में कौशिक ने कहा, “साइबर सुरक्षा डिजिटल इंडिया की रीढ़ है. हम पीछे नहीं रह सकते.”
उनकी फर्म सुरक्षा ऑडिट और मूल्यांकन से लेकर एथिकल हैकिंग प्रशिक्षण तक विशिष्ट सेवाएं प्रदान करती है, जो संगठनों को उभरते खतरों से आगे रहने में सक्षम बनाती हैं. कौशिक की दृष्टि व्यवसाय से परे जाती है. वह स्कूल पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा शिक्षा को शामिल करने और आत्मनिर्भर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं.
11 जून 2024 को आयोजित “साइबर सुरक्षित भारत” कार्यक्रम में उनकी नेतृत्व भूमिका, जिसमें भारत के G20 शेरपा अमिताभ कांत और मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय शामिल हुए, सामूहिक कार्रवाई की तात्कालिकता को दर्शाती है. साइबर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर आयोजित इस कार्यक्रम में एडवांस्ड परसिस्टेंट थ्रेट्स (APTs) और मजबूत वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया.
वैश्विक मान्यता, स्थानीय प्रभाव
कौशिक का प्रभाव सीमाओं से परे है. 2018 में वह यूनेस्को की वार्षिक पत्रिका में प्रदर्शित होने वाले पहले भारतीय साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बने, और 2021 में उनका दूसरा शोध पत्र प्रकाशित हुआ. उन्होंने इन प्रकाशनों में अपनी भारतीय पहचान को शामिल करने पर जोर दिया ताकि देश की क्षमता को उजागर किया जा सके. “मैं चाहता था कि दुनिया जाने कि भारत साइबर सुरक्षा में एक शक्ति है.”
उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में व्याख्यान देने के आमंत्रण दिलवाए, साथ ही इज़राइल की राष्ट्रीय सूचना सुरक्षा प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख सहित वैश्विक नेताओं से सराहना भी मिली.
अपने देश के करीब, लिसिएंथस टेक ने ठोस प्रभाव डाला है. फर्म ने मध्य प्रदेश के सरदारपुर में एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के हाई-प्रोफाइल ईमेल हैकिंग मामले को 30 मिनट से भी कम समय में सुलझाया, जिससे स्थानीय प्रशासन ने प्रशंसा की. एक अन्य मामला, जिसमें एक नाइजीरियाई हैकर शामिल था, 48 घंटों के भीतर हल किया गया, जिससे नई दिल्ली पुलिस भी प्रभावित हुई.
पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण देने सहित, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ कौशिक के सहयोग ने जमीनी स्तर पर साइबर सुरक्षा को मजबूत किया है.
उच्च-दांव वाले क्षेत्र में लचीलापन
कौशिक का लचीलापन उनकी दृष्टि जितना ही महत्वपूर्ण है. एक ऐसे क्षेत्र में काम करते हुए जहाँ साइबर खतरे प्रतिदिन बदलते हैं, वह एआई-संचालित खतरे की पहचान और व्यापक घटना प्रतिक्रिया योजनाओं जैसी सक्रिय रणनीतियों के पैरोकार हैं. “हमें खतरों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें पहले से पहचानना होगा.”
यही सोच लिसिएंथस टेक को सरकारी निकायों, निगमों और निजी संस्थाओं के लिए एक विश्वसनीय भागीदार बनाने में सहायक रही है.
उनका व्यक्तिगत लचीलापन उनके करियर में स्पष्ट रूप से दिखता है. एक प्रतिस्पर्धी उद्योग में स्टार्टअप शुरू करने के लिए आकर्षक प्रस्तावों को ठुकराना एक साहसिक निर्णय था. उन्हें BRICS CCI में साइबर सुरक्षा सलाहकार और साइबर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे यह स्पष्ट है कि उन्होंने चुनौतियों को अवसरों में बदला है.
भारतीय अचीवर्स फोरम द्वारा 2020 में किरन बेदी जैसे प्रमुख व्यक्तियों के साथ उन्हें *ग्लोरी ऑफ इंडिया अवार्ड* से सम्मानित किया गया, जो उनकी विरासत को और सुदृढ़ करता है.
आगे का मार्ग तय करना
कौशिक की लिसिएंथस टेक के लिए महत्वाकांक्षाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की *डिजिटल इंडिया* की दृष्टि के साथ मेल खाती हैं. वह एआई-संचालित खतरे की पहचान और नीति नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्रीय साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र की परिकल्पना करते हैं.
कौशिक ने 'साइबर शिक्षित भारत' कार्यक्रम में अमिताभ कांत की टिप्पणियों की पुष्टि करते हुए कहा “भारत की डिजिटल वृद्धि अभूतपूर्व है, आज 840 मिलियन से अधिक लोग ऑनलाइन हैं और 2026 तक यह संख्या 1.35 बिलियन तक पहुँच जाएगी,” उनकी स्वदेशी विशेषज्ञता और सख्त डेटा गोपनीयता कानूनों की मांग इस वृद्धि को सुरक्षित करने की दिशा में है.
जैसे-जैसे लिसिएंथस टेक नवाचार करता जा रहा है, कौशिक इसके मिशन के पीछे प्रेरक शक्ति बने हुए हैं. उनकी रणनीतिक दूरदृष्टि, वैश्विक प्रभाव और अटूट संकल्प सिर्फ सिस्टम को सुरक्षित नहीं कर रहे, बल्कि पूरे देश को यह प्रेरणा दे रहे हैं कि साइबर सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है.
कौशिक के नेतृत्व में भारत का डिजिटल भविष्य न केवल आशाजनक है, बल्कि अभेद्य भी है.
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