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फरवरी 2026 से बदलेगा GDP की गिनती का तरीका, ज्यादा सटीक होंगे तिमाही आर्थिक आंकड़े

इस नई QNA सीरीज के लागू होने से भारत के GDP आंकड़े ज्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और नीति-निर्माण के लिए उपयोगी बनेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत में आर्थिक आंकड़ों की गणना के तरीके में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. सरकार फरवरी 2026 से नई तिमाही राष्ट्रीय लेखा (QNA) सीरीज लागू करने जा रही है, जिससे GDP के आंकड़े पहले से ज्यादा सटीक, रियल टाइम और भरोसेमंद बनेंगे. नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है और इसे 27 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा.

ज्यादा डेटा सोर्स, ज्यादा सटीक तस्वीर

नई QNA सीरीज में GDP के आकलन के लिए कई नए डेटा सोर्स जोड़े गए हैं. अब सामान, सेवाओं और बिजनेस के प्रकार के हिसाब से ज्यादा डिटेल्ड आंकड़े जुटाए जाएंगे. इसके अलावा ई-वाहन और प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल से जुड़े डेटा को भी GDP कैलकुलेशन में शामिल किया जाएगा. इससे खास तौर पर उन सेक्टरों की तस्वीर साफ होगी, जहां अब तक तेज और भरोसेमंद आंकड़ों की कमी थी.

बेंचमार्किंग में बदलेगा तरीका, IMF के मानकों से होगा मेल

अब तक 2011-12 बेस ईयर वाली सीरीज में सालाना और तिमाही आंकड़ों के बीच अक्सर असंगति देखने को मिलती थी, जिससे शॉर्ट-टर्म एनालिसिस और मौसमी ट्रेंड समझना मुश्किल हो जाता था. नई सीरीज में IMF के 2017 क्वार्टरली नेशनल अकाउंट्स मैनुअल की सिफारिशों को अपनाया जाएगा. पुरानी प्रो-राटा मेथड की जगह अब प्रोपोर्शनल बेंचमार्किंग लागू होगी.

डेंटन मेथड से घटेगी कृत्रिम अस्थिरता

नई प्रणाली में सेक्टर-वाइज असेसमेंट के आधार पर प्रोपोर्शनल डेंटन मेथड का इस्तेमाल किया जाएगा. यह तकनीक तिमाही या मासिक हाई-फ्रिक्वेंसी डेटा को सालाना आंकड़ों से बेहतर तरीके से जोड़ती है और ग्रोथ रेट की असली चाल को बनाए रखती है. सरकार का कहना है कि इससे तिमाही GDP सीरीज में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम होंगे और इंडिकेटर्स की वास्तविक स्थिति सामने आएगी.

उत्पादन पक्ष में बड़े सुधार

उत्पादन के मोर्चे पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. कृषि क्षेत्र में अब विस्तारित फसल उत्पादन डेटा के आधार पर वॉल्यूम एक्सट्रापोलेशन होगा. मैन्युफैक्चरिंग में आउटपुट और इनपुट के लिए डबल डिफ्लेशन तकनीक अपनाई जाएगी, जो पुराने सिंगल डिफ्लेशन सिस्टम से ज्यादा सटीक मानी जाती है. इसके अलावा वार्षिक उद्योग सर्वे के नए वेट्स को भी शामिल किया जाएगा. बैंकिंग सेक्टर में फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन सर्विसेज का आकलन अब तिमाही लोन और डिपॉजिट रेट्स के आधार पर होगा.

मांग पक्ष और राज्यों के आंकड़ों में भी होगा बदलाव

मांग पक्ष में तिमाही प्राइवेट कंजम्प्शन को अब नीचे से ऊपर की पद्धति से तैयार किया जाएगा. इसमें COICOP 2018 क्लासिफिकेशन, लेटेस्ट कंजम्प्शन सर्वे और बिजली, गैस, रेलवे जैसे सेक्टरों के प्रशासनिक डेटा का इस्तेमाल होगा. वहीं, राज्यों के लिए GSDP गणना में भी ज्यादा डायनामिक अप्रोच अपनाई जाएगी. अब सर्विस सेक्टर में राज्यों की हिस्सेदारी फिक्स्ड रेशियो की जगह रियल टाइम GDP आउटवर्ड सप्लाई डेटा से तय होगी.

निर्माण क्षेत्र में भी बदलेगा आकलन का तरीका

कंस्ट्रक्शन सेक्टर के GVA का आकलन अब HSN और SAC आधारित GDP डेटा से किया जाएगा, जो कंस्ट्रक्शन से जुड़े सामानों और सेवाओं पर आधारित होगा. पुराने सीमेंट और स्टील कंजम्प्शन जैसे कंपोजिट इंडिकेटर्स की जगह यह नया और ज्यादा सटीक तरीका अपनाया जाएगा.

 


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