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भारत-जर्मनी साझेदारी से मिलेगी स्वच्छ ऊर्जा और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को गति
भारत-जर्मन विशेषज्ञों ने भारत की प्रतिस्पर्धात्मक वृद्धि के लिए EU मुक्त व्यापार समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारत और जर्मनी के उद्योग विशेषज्ञों ने मंगलवार यानी 28 अगस्त को कहा कि भारत को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने, लॉजिस्टिक्स सेक्टर को आधुनिक बनाने और यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को शीघ्रता से अंतिम रूप देने की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बनाए रखा जा सके. पैनलिस्टों का मानना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भारत को समावेशी विकास और सुदृढ़ आधारभूत संरचना की दिशा में आगे बढ़ा सकता है.
साइमेंस एनर्जी इंडिया की संगमित्रा जयंत विश्वास ने कहा कि यदि भारत को विकास बनाए रखते हुए अपने डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करना है, तो स्वच्छ तकनीकों को तेजी से बढ़ाना होगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जर्मनी की नवीकरणीय तकनीकों में विशेषज्ञता और भारत का विशाल बाजार, ऊर्जा सहयोग में एक प्राकृतिक पूरकता बनाते हैं.
ईडैग इंडिया के बिपिन चंद्रा ने हरित आधारभूत संरचना के निर्माण में उन्नत डिजिटल और इंजीनियरिंग समाधानों की भूमिका पर प्रकाश डाला. वहीं टीयूवी एसयूडी इंडिया के दीपक जाडे ने नवीकरणीय परियोजनाओं में विश्वास सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की आवश्यकता को रेखांकित किया.
केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के स्टीफन क्लीश ने कहा कि जर्मनी ने भारत में सौर, पवन और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को लगातार समर्थन दिया है. उन्होंने जोर दिया कि रियायती ऋण और ब्लेंडेड फाइनेंस जैसी वित्तीय रणनीतियाँ बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने में अहम हैं.
डीएचएल एक्सप्रेस इंडिया के आर.एस. सुब्रमणियन ने कहा कि लॉजिस्टिक्स लागत सीधे भारत की ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को प्रभावित करती है. उन्होंने डेटा-आधारित प्रणालियों को व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया. रेनस लॉजिस्टिक्स के सीईओ विवेक आर्य ने सहयोगात्मक आपूर्ति शृंखलाओं और मानकीकृत बुनियादी ढांचे की जरूरत बताई, जबकि लुफ्थांसा कार्गो के शंकर अय्यर ने ऑटोमेशन और उन्नत तकनीक के ज़रिए स्किल गैप को भरने की बात कही.
पैनलिस्टों ने यह भी कहा कि यदि सरकार और निजी क्षेत्र समन्वित सुधार करें, तो भारत 2030 तक अपने लॉजिस्टिक्स लक्ष्यों को हासिल कर सकता है और इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित कर सकता है.
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेस इन इंडिया की वारदा तनेजा ने कहा कि EU-भारत मुक्त व्यापार समझौता टैरिफ और नियामकीय बाधाओं को कम कर सकता है और फार्मा, डिजिटल सेवाओं और हरित तकनीकों में नई संभावनाएं खोल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते का रणनीतिक महत्व सप्लाई चेन की स्थिरता और भारत-EU आर्थिक सहयोग को गहरा करने में है.
सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आकार और स्थिरता को कैसे संतुलित करता है. इसमें भारत-जर्मनी सहयोग तकनीक, वित्त और व्यापार नीति के क्षेत्र में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
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