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कोर सेक्टर की ग्रोथ मई में 0.7% पर सिमटी, नौ महीनों में सबसे कमजोर प्रदर्शन
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में सिर्फ 0.8% की वृद्धि, चार प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट दर्जस
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश के आठ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों (Core Sector) की वृद्धि दर मई 2025 में घटकर सिर्फ 0.7 प्रतिशत रह गई, जो पिछले नौ महीनों का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले अगस्त 2024 में कोर सेक्टर की ग्रोथ इससे भी कम रही थी.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-मई 2025 की अवधि में इन क्षेत्रों की कुल वृद्धि सिर्फ 0.8 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 6.9 प्रतिशत थी.
किन क्षेत्रों में दर्ज हुई गिरावट?
मई महीने के आंकड़ों से पता चलता है कि चार प्रमुख क्षेत्रों—कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और बिजली उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, रिफाइनरी उत्पादों और सीमेंट उत्पादन में वृद्धि जारी रही, जिससे कुल ग्रोथ में थोड़ी राहत मिली.
विदेशी मुद्रा भंडार में सकारात्मक बढ़ोतरी
देश की आर्थिक तस्वीर के एक अन्य हिस्से में विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर राहत भरी खबर है. 13 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.29 अरब डॉलर बढ़कर 698.95 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह (6 जून को समाप्त) इसमें 5.17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी.
गौरतलब है कि सितंबर 2024 में भारत का फॉरेक्स रिजर्व अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 704.88 अरब डॉलर पर पहुंचा था. इस सप्ताह गोल्ड रिजर्व का मूल्य भी 42.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 86.32 अरब डॉलर हो गया.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार भी हुई धीमी
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से भी धीमी गति की खबर सामने आई है. HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई में गिरकर 57.6 पर आ गया, जो तीन महीनों का निचला स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा 58.2 और मार्च में 58.1 था.
एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित इस सर्वे के मुताबिक, यह गिरावट नए ऑर्डर और उत्पादन वृद्धि में कमी के कारण हुई. हालांकि, 50 से ऊपर का PMI स्कोर अभी भी विस्तार को दर्शाता है, जो इस बात का संकेत है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अभी पूरी तरह मंदी नहीं आई है.
मंद होती ग्रोथ, पर विदेशी मुद्रा और स्थिर PMI से कुछ राहत
देश के आर्थिक संकेतकों में फिलहाल मिश्रित तस्वीर देखने को मिल रही है. जहां कोर सेक्टर की ग्रोथ चिंता का विषय बन रही है, वहीं विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि और PMI का 50 से ऊपर रहना कुछ संतुलन प्रदान करता है.
आर्थिक नीति निर्धारकों के लिए यह संकेत है कि औद्योगिक उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्रों में तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत हो सकती है, ताकि आने वाले महीनों में ग्रोथ को फिर से गति दी जा सके.
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