कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स 203.22 अंक की गिरावट के साथ 75,735.96 अंक पर बंद हुआ. वहीं एनएसई का वाला इंडेक्स, निफ्टी 19.75 अंक 22,913.15 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय शेयर बाजार कल यानि 20 फरवरी को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए. कल निफ्टी 22,900 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा. आईटी और बैंकों को छोड़कर सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली. ब्रॉडर इंडेक्सों में खरीदारी ने भी इंट्राडे नुकसान की भरपाई करने में मदद की. कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 203.22 अंक या 0.27 फीसदी की गिरावट के साथ 75.735.96 पर और निफ्टी 19.75 अंक या 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ 22,913.15 पर बंद हुआ.
एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टाटा कंज्यूमर निफ्टी के टॉप लूजरों में रहे. जबकि श्रीराम फाइनेंस, एनटीपीसी, अदानी पोर्ट्स, एमएंडएम, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली. बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में 1-1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
इन शेयरों में दिख रही खरीददारी
चलिए जानते हैं कि उन शेयरों के बारे में जानते हैं जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. उनमें Godrej Industries, Rajesh Exports, Netweb Technologies, Piramal Pharma, Radico Khaitan, Archean Chemical और AmaraRaja Batteries शामिल हैं. दरअसल, इन शेयरों ने अपना 52 वीक का हाई लेवल पार कर लिया है, जो इनमें तेजी के संकेत देता है. इसलिए आज इन शेयरों पर भी नज़र बनाए रखें.
इन स्टॉक्स में मंदी के संकेत
चलिए अब जानते हैं कि मोमेंटम इंडिकेटर, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) ने आज के लिए क्या संकेत दिए हैं. एमएसीडी (MACD) ने Godfrey Phillips, JBM Auto, Ajanta Pharma, Aegis Logistics, Newgen Software, India Cements और Jyothy Labs के शेयर में मंदी का संकेत दिया है. इसका मतलब है कि अब इन शेयरों में गिरावट शुरू हो गई है.
इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन
आज यानी 21 फरवरी 2025 को कुछ शेयर (Stocks in News) एक्शन दिखाने को तैयार हैं. पॉजिटिव ट्रिगर के चलते ये शेयर आज बाजार में फोकस (Stocks to Watch) में रह सकते हैं. अगर इंट्राडे में बेहतर शेयरों की तलाश है तो इन पर नजर (Stock in Focus) रख सकते हैं. आज की इस लिस्ट में JM Financial, NTPC Green Energy, Narayana Hrudayalaya, Tata Steel, Kotak Mahindra Bank, ITI Ltd, Samvardhana Motherson, CIE Automotive, Grindwell Norton, Keystone Realtors, Sanofi Consumer Healthcare, Religare Enterprises, Indian Overseas Bank जैसे नाम शामिल हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है).
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों की फंड जुटाने की रफ्तार तेज रही. इस दौरान 78 कंपनियों ने ₹94,205 करोड़ जुटाए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 35 फीसदी अधिक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है. अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 78 कंपनियों ने मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कुल ₹94,205 करोड़ जुटाए. पिछले साल की समान अवधि में 65 कंपनियों ने ₹69,533 करोड़ जुटाए थे. इस तरह इस साल पहली छमाही में आईपीओ के जरिए जुटाई गई रकम में करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
अगस्त-सितंबर में तेज हुई आईपीओ की रफ्तार
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आईपीओ बाजार की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही. अप्रैल से जून के बीच कंपनियां सिर्फ ₹3,794 करोड़ जुटा सकीं. हालांकि, इसके बाद बाजार में तेजी लौटी.
अगस्त में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए ₹20,000 करोड़ से ज्यादा जुटाए, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा ₹40,000 करोड़ के पार पहुंच गया. इस तेजी का असर सार्वजनिक इक्विटी के जरिए कुल फंड जुटाने पर भी पड़ा. पहली छमाही में पब्लिक इक्विटी फंडरेजिंग 75 फीसदी बढ़कर ₹2.43 लाख करोड़ हो गई.
इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ₹22,563 करोड़ का आईपीओ सबसे बड़ा रहा. इसके बाद एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने ₹9,795 करोड़ और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने ₹9,275 करोड़ जुटाए. कंपनियों के औसत आईपीओ आकार में भी बढ़ोतरी हुई है. यह पिछले साल की पहली छमाही के ₹1,070 करोड़ से बढ़कर इस साल ₹1,208 करोड़ हो गया.
रिटेल निवेशकों की बढ़ी भागीदारी
आईपीओ बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी इस दौरान बढ़ी है. कुल 64 आईपीओ में से 42 को 10 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला, जबकि 25 आईपीओ 50 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुए. इसके अलावा 9 आईपीओ को 3 गुना से अधिक बोलियां मिलीं.
रिटेल निवेशकों के आवेदनों की औसत संख्या भी बढ़कर 17.71 लाख प्रति आईपीओ हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 12.69 लाख थी. छोटे निवेशकों ने कुल ₹2.47 लाख करोड़ के शेयरों के लिए आवेदन किया. हालांकि, उन्हें अंततः ₹25,944 करोड़ के शेयर ही आवंटित हुए.
आईपीओ की लिस्टिंग पर औसत 19% रिटर्न
आईपीओ बाजार में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी की एक वजह इस साल लिस्टिंग के बाद मिला रिटर्न भी रहा है. 29 सितंबर तक लिस्ट हुए 64 आईपीओ का औसत लिस्टिंग गेन 19 फीसदी रहा. पिछले साल की पहली छमाही में यह औसत सिर्फ 7 फीसदी था.
29 सितंबर तक 64 में से 46 आईपीओ अपने इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार कर रहे थे. यानी करीब 72 फीसदी सूचीबद्ध आईपीओ अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले ऊंचे स्तर पर थे.
प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भी प्राइमरी मार्केट में मजबूत भागीदारी रही. आंकड़ों के मुताबिक, जहां विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट में ₹1.64 लाख करोड़ की बिकवाली की, वहीं प्राइमरी मार्केट में उन्होंने ₹44,960 करोड़ का निवेश किया.
आईपीओ के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनियां अलग-अलग जरूरतों के लिए कर रही हैं. मुख्य आईपीओ के जरिए जुटाई गई कुल रकम में 41 फीसदी यानी ₹38,510 करोड़ फ्रेश कैपिटल था. इसमें से कंपनियों ने करीब 42 फीसदी रकम पुराने कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल की. वहीं, प्राइवेट प्रमोटर्स ने ₹26,048 करोड़ के शेयरों की बिक्री की.
आईपीओ की बड़ी पाइपलाइन तैयार
प्राइमरी मार्केट में आगे भी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है. फिलहाल 145 कंपनियों को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से आईपीओ की मंजूरी मिल चुकी है. ये कंपनियां करीब ₹2.78 लाख करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं.
इसके अलावा 102 कंपनियां करीब ₹1.87 लाख करोड़ जुटाने के लिए सेबी की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं. इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भी आईपीओ बाजार में कंपनियों की फंड जुटाने की गतिविधियां जारी रह सकती हैं.
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के परिवार की कंपनी कर्नाटक में 330 करोड़ रुपये के औद्योगिक पार्क की योजना बना रही है. यहां टीवीएस मोटर और उसके टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं के लिए ऑटो कंपोनेंट्स बनाए जाने हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी हन्नो वन वेयरहाउसिंग कर्नाटक में 330 करोड़ रुपये की लागत से एक औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पार्क में टीवीएस मोटर कंपनी और उसके टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं के लिए ऑटो कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है.
रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव के स्वामित्व वाली हन्नो वन वेयरहाउसिंग ने नवंबर 2025 में कर्नाटक की लैंड ऑडिट कमेटी के समक्ष जमीन के लिए आवेदन किया था. कंपनी ने मैसूर से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण में स्थित राज्य सरकार के इम्मावु औद्योगिक क्षेत्र में 35 एकड़ जमीन की मांग की थी.
प्रस्तावित परियोजना को ऑटो कंपोनेंट्स के निर्माण और टीवीएस मोटर तथा उसके टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं को इनकी आपूर्ति के लिए औद्योगिक पार्क के रूप में पेश किया गया था.
कर्नाटक में करीब 27 करोड़ रुपये में मिली जमीन
हन्नो के हालिया वित्तीय विवरणों के अनुसार, कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) ने कंपनी को जमीन आवंटित कर दी है. इसके लिए करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी ने जमीन के लिए 7.91 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
यह कर्नाटक परियोजना हन्नो और टीवीएस मोटर के बीच दूसरा रिपोर्टेड कारोबारी संबंध है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले टीवीएस मोटर ने तमिलनाडु में हन्नो को जमीन लीज पर दी थी.
पहले हुए टीवीएस समझौते पर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, एन. चंद्रशेखरन और टीवीएस मोटर के चेयरमैन-एमेरिटस वेंणु श्रीनिवासन ने इस कारोबारी संबंध की जानकारी टाटा संस के बोर्ड को नहीं दी थी. टाटा संस ने पहले कहा था कि इन लेनदेन को बोर्ड के समक्ष रखने की जरूरत नहीं थी.
वेंणु श्रीनिवासन टाटा ट्रस्ट्स के नामित सदस्य के तौर पर टाटा संस के बोर्ड में शामिल हैं. वह बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति के सदस्य भी हैं. यह समिति चंद्रशेखरन के प्रदर्शन और पारिश्रमिक का मूल्यांकन करती है. ऐसे में हन्नो और टीवीएस मोटर के बीच कारोबारी संबंध दोनों की टाटा समूह में भूमिकाओं के संदर्भ में सामने आए हैं.
टाटा संस के पुनर्गठन के बीच सामने आया मामला
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव विचाराधीन है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और ट्रस्ट्स ने होल्डिंग कंपनी की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव दिया है.
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में विलय करने का प्रस्ताव दिया है. इसका उद्देश्य टाटा संस की नियामकीय श्रेणी में बदलाव करना है, जबकि कंपनी को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखना है.
ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित विलय के बाद टाटा संस को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) की श्रेणियों से बाहर लाने में मदद मिलेगी. ट्रस्ट्स का कहना है कि अतिरिक्त परिचालन आय से कंपनी एनबीएफसी पर लागू मुख्य कारोबार संबंधी मानदंडों के दायरे से बाहर आ सकेगी.
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित पुनर्गठन से टाटा संस के समूह की कंपनियों में निवेश भी सीआईसी के लिए लागू सीमा से नीचे आ जाएगा. यह प्रस्ताव सोमवार को प्रस्तुत किया गया था.
टाटा ट्रस्ट्स ने इतिहास का दिया हवाला
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि प्रस्तावित पुनर्गठन से टाटा संस उस परिचालन मॉडल की ओर लौट सकेगी, जिसे उसने अपने इतिहास के बड़े हिस्से में अपनाया था. ट्रस्ट्स के अनुसार, अपने 100 साल के इतिहास में करीब 80 वर्षों तक टाटा संस के पास परिचालन कारोबार और उससे होने वाला राजस्व था.
ट्रस्ट्स ने कहा कि इन कारोबारों से होने वाली आय का इस्तेमाल टाटा संस नए कारोबारी उपक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए करती थी. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भी 2004 में अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग होने से पहले टाटा संस का एक कारोबारी प्रभाग थी.
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, टाटा संस के पास पहले भी कई अन्य परिचालन कारोबार थे, जिन्हें बाद में अलग कर दिया गया. प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद टाटा संस के पास अपने परिचालन और राजस्व का स्रोत होगा और वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी के रूप में भी बनी रहेगी.
टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी कहा कि प्रस्तावित ढांचा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2004 के बाद टाटा संस को गैर-बैंकिंग, गैर-वित्तीय कंपनी के रूप में दिए गए वर्गीकरण के अनुरूप होगा.
निसान मोटर इंडिया ने सितंबर 2026 में घरेलू बाजार में 3,300 वाहनों की थोक बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 100 प्रतिशत अधिक है. कंपनी ने घरेलू और निर्यात बाजारों को मिलाकर सितंबर में कुल 10,025 वाहनों की थोक बिक्री की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
निसान मोटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने सितंबर 2026 के बिक्री आंकड़े जारी किए हैं. कंपनी के अनुसार, सितंबर में घरेलू बाजार में 3,300 वाहनों की थोक बिक्री हुई, जबकि 6,725 वाहनों का निर्यात किया गया. इस तरह कंपनी की कुल थोक बिक्री 10,025 यूनिट रही.
घरेलू बाजार में निसान की बिक्री सितंबर 2025 में दर्ज 1,652 यूनिट के मुकाबले इस साल सितंबर में 100 प्रतिशत बढ़ी है. कंपनी ने कहा कि बिक्री में यह वृद्धि उसके बढ़ते एसयूवी पोर्टफोलियो और देशभर में डीलर नेटवर्क के विस्तार के बीच दर्ज की गई है.
निसान के मौजूदा पोर्टफोलियो में मैग्नाइट और ग्रेवाइट के साथ नई निसान टेकटन भी शामिल है. कंपनी के अनुसार, इन उत्पादों के जरिए वह भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के अलग-अलग सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर ध्यान दे रही है.
निसान मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक सौरभ वत्स ने कहा कि सितंबर में घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर करीब दोगुनी वृद्धि कंपनी की उत्पाद-केंद्रित रणनीति और डीलर नेटवर्क की क्षमता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि भारत में बढ़ती घरेलू बिक्री कंपनी को आगे विस्तार करने के लिए आधार दे रही है.
उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रदर्शन में उसके वित्तीय और कारोबारी साझेदारों के साथ भारतीय ग्राहकों का बढ़ता भरोसा भी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निसान के निर्यात प्रदर्शन में सहयोग के लिए विदेशी डीलरों, वितरकों और ग्राहकों के योगदान का उल्लेख किया.
6,725 वाहनों का निर्यात
सितंबर 2026 में निसान मोटर इंडिया ने 6,725 वाहनों का निर्यात किया. कंपनी भारत में निर्मित वाहनों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजती है. निसान की 'वन कार. वन वर्ल्ड.' रणनीति के तहत भारत और विदेशों के बाजारों के लिए वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप वाहनों का उत्पादन किया जाता है.
कंपनी के मुताबिक, भारत उसके वैश्विक परिचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और यहां से होने वाला निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसकी मौजूदगी को मजबूत करता है.
एसयूवी पोर्टफोलियो पर फोकस
निसान ने भारतीय बाजार में एसयूवी सेगमेंट पर अपना फोकस बढ़ाया है. कंपनी के पोर्टफोलियो में मैग्नाइट और ग्रेवाइट के साथ नई टेकटन शामिल है. कंपनी का कहना है कि टेकटन को निसान की एसयूवी पहचान को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है और इसमें तकनीक, प्रदर्शन तथा रोजमर्रा की उपयोगिता पर जोर दिया गया है.
निसान के अनुसार, इन मॉडलों के जरिए कंपनी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के प्रमुख सेगमेंट में अपनी पहुंच बढ़ाने और घरेलू कारोबार में आगे विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजीगत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े सामान का उत्पादन निवेश गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वित्त मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि के मुकाबले रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है. वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और व्यापार मार्गों से जुड़े जोखिमों के बीच घरेलू मांग और निवेश अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं.
पहली तिमाही में 7.8% रही थी GDP ग्रोथ
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी. यह मौजूदा श्रृंखला में पहली तिमाही की सबसे अधिक वृद्धि दर थी. अब दूसरी तिमाही के लिए 7.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां जारी रहीं, हालांकि वृद्धि की गति में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं. ई-वे बिल जारी होने और विनिर्माण क्षेत्र के खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) की वृद्धि दर में कमी आई है. वहीं, अगस्त में नई मांग और रोजगार में मजबूती के चलते सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखा गया.
GST कलेक्शन और बैंक क्रेडिट से मिल रहा सहारा
मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, दूसरी तिमाही की शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों को कई उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से समर्थन मिला है. इनमें निर्यात और GST संग्रह प्रमुख हैं. बिजली और ईंधन की खपत में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि बैंक ऋण की वृद्धि मजबूत बनी हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजीगत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े सामान का उत्पादन निवेश गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहा है. इसके अलावा ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में वाहन बिक्री की गति अच्छी बनी हुई है. इससे घरेलू खपत का आधार व्यापक रहने का संकेत मिलता है.
बेहतर मॉनसून से ग्रामीण मांग को समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मॉनसून की स्थिति शुरुआती अनुमान से बेहतर रही है. कई प्रमुख फसलों की खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर के आसपास रही है. इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग की संभावनाओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है. हालांकि, आगे रबी फसल के प्रदर्शन पर नजर रखना जरूरी होगा.
वैश्विक जोखिम अब भी चुनौती
घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतकों के बावजूद वैश्विक स्तर पर कई जोखिम बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रणनीतिक बदलाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बाहरी जोखिमों के बीच आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए वृहद आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना और अर्थव्यवस्था की बुनियाद को और मजबूत करना जरूरी होगा.
भारत की साख में सुधार
रिपोर्ट में भारत की क्रेडिट रेटिंग में हालिया सुधार को भी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद का संकेत बताया गया है. जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने सितंबर 2026 में भारत की रेटिंग को ‘BBB प्लस’ से बढ़ाकर ‘A माइनस’ कर दिया था.
इस तरह दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि पहली तिमाही के मुकाबले कुछ धीमी रहने का अनुमान है, लेकिन घरेलू मांग, निवेश, बैंक क्रेडिट, सरकारी राजस्व और बेहतर मॉनसून जैसे कारक अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं.
इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कानूनी व्यवस्था को विकसित करने से लेकर एक नई लॉ फर्म की संस्थागत नींव तैयार करने तक, डॉ. शार्दुल के करियर में संस्थानों को बदलते समय के अनुरूप तैयार करने पर जोर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के दिवालियापन कानून के विकास और देश की प्रमुख कानूनी संस्थाओं में से एक के निर्माण से डॉ. शार्दुल एस. श्रॉफ का पेशेवर सफर जुड़ा रहा है. इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कानूनी व्यवस्था को विकसित करने से लेकर एक नई लॉ फर्म की संस्थागत नींव तैयार करने तक, उनके करियर में संस्थानों को बदलते समय के अनुरूप तैयार करने पर जोर रहा है.
मई 2015 में अमरचंद मंगलदास एंड सुरेश ए. श्रॉफ एंड कंपनी का विभाजन हुआ और इसके बाद दो स्वतंत्र लॉ फर्म अस्तित्व में आईं. इनमें शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी और सिरिल अमरचंद मंगलदास शामिल थीं. डॉ. शार्दुल एस. श्रॉफ के लिए यह उनके पेशेवर जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत थी. उन्हें एक पुरानी कानूनी विरासत को आगे बढ़ाते हुए एक अलग संस्थान की पहचान और दिशा तय करनी थी.
मई 2026 में BW Legal World के साथ बातचीत में श्रॉफ ने उस शुरुआती दौर को “एक सदी पुरानी विरासत वाला स्टार्टअप” बताया था. उन्होंने बताया कि उस समय टीम में करीब 300 लोग थे और फर्म से जुड़े रहने या इसमें शामिल होने वाले लोगों के पहले साल के भुगतान की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी ली थी. उनके अनुसार, चुनौती एक कठिन बदलाव को पूरी टीम के साझा प्रयास में बदलने की थी.
फर्म के संचालन में गवर्नेंस पर जोर
इस प्रक्रिया में संस्थागत गवर्नेंस को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई. श्रॉफ ने नौ सदस्यीय प्रबंधन बोर्ड के गठन का उल्लेख किया. साथ ही, पार्टनर्स के मूल्यांकन में केवल तकनीकी विशेषज्ञता और कारोबारी प्रदर्शन के बजाय लोगों के विकास, फर्म के निर्माण और संस्थागत संस्कृति जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया.
उन्होंने फर्म के देशभर में काम करने के तरीके को “एक साझेदारी, एक बैलेंस शीट और एक लाभ-हानि खाता” के रूप में वर्णित किया था.
आईबीसी और दिवालियापन कानून में भूमिका
संस्थानों के निर्माण पर यह जोर उनके दिवालियापन कानून से जुड़े काम में भी दिखाई देता है. श्रॉफ ने फर्म की इंसॉल्वेंसी और रिस्ट्रक्चरिंग प्रैक्टिस की स्थापना की. वह भारत सरकार की इंसॉल्वेंसी लॉ कमेटी और कंपनी लॉ कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं.
इसके अलावा, वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण दिवालियापन मामलों से जुड़ी कानूनी कार्यवाही में शामिल रहे हैं. उन्होंने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत मध्यस्थता के इस्तेमाल की संभावनाओं की जांच करने वाली भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) की विशेषज्ञ समिति में भी काम किया है.
सिर्फ समयसीमा तय करने से नहीं सुलझेगी देरी
दिसंबर 2025 में BW Legal World के साथ एक बातचीत में आईबीसी से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए श्रॉफ ने कहा था कि केवल कानून में समयसीमा तय कर देने से मामलों में देरी खत्म नहीं होगी.
उनके मुताबिक, समयबद्ध प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए ट्रिब्यूनल का बुनियादी ढांचा, पर्याप्त स्टाफ, रजिस्ट्री की क्षमता और तकनीक भी जरूरी हैं. यानी दिवालियापन प्रक्रिया की प्रभावशीलता केवल कानूनी प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसे लागू करने वाले संस्थागत ढांचे की क्षमता भी महत्वपूर्ण है.
मई 2026 में अपनी लॉ फर्म के भविष्य पर बात करते हुए श्रॉफ ने इसका आकलन मानवीय स्तर पर करने की बात कही थी. उनके अनुसार, ग्राहकों को यह महसूस होना चाहिए कि जरूरत के समय फर्म उनके साथ खड़ी है, जबकि युवा पार्टनर्स को यह भरोसा और अवसर मिलना चाहिए कि वे विकसित हो सकते हैं और जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं.
डॉ. शार्दुल एस. श्रॉफ के जन्मदिन के मौके पर उनके करियर के ये दोनों पहलू सामने आते हैं—भारत में दिवालियापन कानून के विकास में योगदान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक कानूनी संस्थान को तैयार करने की प्रक्रिया
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार 7.19 फीसदी बढ़ा. इस दौरान पंजीकृत विनिर्माण प्रतिष्ठानों की संख्या भी बढ़कर 2.67 लाख हो गई, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA), पूंजी निवेश और औद्योगिक उत्पादन में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 में रोजगार, उत्पादन, निवेश और मूल्य वर्धन समेत प्रमुख आर्थिक संकेतकों में वृद्धि दर्ज की है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2024-25 के अनुसार, इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार 7.19 फीसदी बढ़कर 2.10 करोड़ हो गया. वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 1.96 करोड़ था. यानी एक साल में 14 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला.
पंजीकृत विनिर्माण इकाइयों की संख्या भी बढ़ी
सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में पंजीकृत विनिर्माण प्रतिष्ठानों की संख्या 2.64 फीसदी बढ़कर 2.67 लाख हो गई. वित्त वर्ष 2023-24 में इनकी संख्या 2.60 लाख थी. इसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन में 7.81 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. विनिर्माण क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को दिए गए कुल पारिश्रमिक में भी 12.08 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
पांच राज्यों में 56 फीसदी रोजगार
विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार का बड़ा हिस्सा कुछ राज्यों में केंद्रित है. तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने मिलकर वित्त वर्ष 2024-25 में कुल विनिर्माण रोजगार में करीब 56 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की.
पंजीकृत विनिर्माण प्रतिष्ठानों की संख्या के मामले में तमिलनाडु 41,221 इकाइयों के साथ सबसे आगे रहा. इसके बाद गुजरात में 33,084 और महाराष्ट्र में 27,379 प्रतिष्ठान रहे. उत्तर प्रदेश में 24,964 और कर्नाटक में 15,629 पंजीकृत विनिर्माण प्रतिष्ठान दर्ज किए गए.
विनिर्माण GVA बढ़कर 26.94 लाख करोड़ रुपये
सर्वेक्षण के अनुसार, पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) वित्त वर्ष 2024-25 में 9.59 फीसदी बढ़कर 26.94 लाख करोड़ रुपये हो गया. वित्त वर्ष 2023-24 में यह 24.58 लाख करोड़ रुपये था.
GVA में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 15.92 फीसदी रही. इसके बाद गुजरात की 14.10 फीसदी और तमिलनाडु की 10.90 फीसदी हिस्सेदारी रही. कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी क्रमशः 7.31 फीसदी और 6.64 फीसदी रही.
महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने मिलकर देश के कुल विनिर्माण GVA में 54 फीसदी से ज्यादा का योगदान दिया.
पूंजी निवेश में भी तेज बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2024-25 में विनिर्माण क्षेत्र में पूंजी निवेश भी बढ़ा. सर्वेक्षण के मुताबिक, स्थिर पूंजी 10.54 फीसदी बढ़कर 51.12 लाख करोड़ रुपये हो गई. वहीं, स्थिर पूंजी और भौतिक कार्यशील पूंजी को मिलाकर कुल निवेशित पूंजी 11.10 फीसदी बढ़कर 75.56 लाख करोड़ रुपये रही. इसी दौरान शुद्ध आय में 9.68 फीसदी और शुद्ध लाभ में 7.73 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
विनिर्माण उत्पादन बढ़कर 165.24 लाख करोड़ रुपये
मौजूदा कीमतों पर विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 165.24 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 153.27 लाख करोड़ रुपये था. इसी अवधि में इनपुट 128.69 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 138.30 लाख करोड़ रुपये हो गया. वित्त वर्ष 2024-25 में शुद्ध आय 20.55 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 11.56 लाख करोड़ रुपये रहा.
इन उद्योगों का GVA में सबसे बड़ा योगदान
सर्वेक्षण के मुताबिक, बेसिक मेटल, मोटर वाहन, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद, फार्मास्युटिकल उत्पाद और खाद्य उत्पाद विनिर्माण GVA में सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे. इन पांच उद्योगों ने मिलकर वित्त वर्ष 2024-25 में कुल विनिर्माण GVA में 45 फीसदी से ज्यादा का योगदान दिया.
रोजगार के लिहाज से खाद्य उत्पाद उद्योग सबसे आगे रहा, जिसमें करीब 23.61 लाख लोग कार्यरत थे. इसके बाद कपड़ा उद्योग में 17.57 लाख, बेसिक मेटल में 15.82 लाख, मोटर वाहन उद्योग में करीब 14.80 लाख और परिधान क्षेत्र में करीब 14.60 लाख लोग कार्यरत रहे.
परिचालन में कारखानों की संख्या भी बढ़ी
वित्त वर्ष 2024-25 में परिचालन कर रहे कारखानों की संख्या बढ़कर 2,18,543 हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में यह संख्या 2,12,990 थी. यह वृद्धि विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत देती है.
पांच राज्यों का दबदबा रोजगार के साथ-साथ विनिर्माण प्रतिष्ठानों और मूल्य वर्धन में भी दिखाई दिया. महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने मिलकर कुल पंजीकृत विनिर्माण प्रतिष्ठानों में 53.30 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की.
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण में क्या शामिल है?
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के दायरे में फैक्ट्री अधिनियम के तहत पंजीकृत कारखाने, कुछ बीड़ी और सिगार विनिर्माण इकाइयां, बिजली प्रतिष्ठान और राज्य के बिजनेस रजिस्टर में दर्ज 100 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली इकाइयां शामिल हैं. सर्वेक्षण में उत्पादन, मूल्य वर्धन, रोजगार, पूंजी निर्माण, मजदूरी और विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े अन्य संकेतकों का प्रतिष्ठान स्तर पर आंकड़ा जुटाया जाता है.
अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक के आंकड़े
एएसआई 2024-25 के आंकड़े अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि से संबंधित हैं. सर्वेक्षण के लिए फील्डवर्क अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच किया गया. MoSPI ने कहा है कि ये अनुमान नमूना सर्वेक्षण पर आधारित हैं. इसलिए आंकड़ों का इस्तेमाल आवश्यक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए.
गोयल ने अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में भारत में उच्च-मूल्य वाली क्षमताओं के निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने से जुड़े अवसरों को भी रेखांकित किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका की प्रमुख विनिर्माण और प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें भारत में निवेश और कारोबार का विस्तार करने का न्योता दिया है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों के बीच हुई इस बैठक में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सप्लाई चेन के क्षेत्र में कारोबारी अवसरों पर जोर रहा.
अमेरिकी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील
गोयल ने अमेरिका में नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स (NAM) की ओर से आयोजित कारोबारी गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया. बैठक में अमेरिकी कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में हो रहे बदलाव और दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, गोयल ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में अपने परिचालन, विनिर्माण क्षमता और निवेश का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार कंपनियों के लिए देश में कारोबार बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार है.
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में बड़े अवसर
बैठक के दौरान भारत में विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से रखा गया. इसके साथ ही वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के तौर पर विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
मंत्रालय के मुताबिक, भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध अब केवल वस्तुओं के पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और लचीली सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ाने पर फोकस
वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध और लचीला बनाने पर जोर दे रही हैं. ऐसे में भारत विनिर्माण और सप्लाई चेन के लिए एक प्रमुख विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
गोयल ने अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में भारत में उच्च-मूल्य वाली क्षमताओं के निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने से जुड़े अवसरों को भी रेखांकित किया.
अमेरिकी कंपनियों ने भी साझा किए कारोबारी अनुभव
बैठक में शामिल अमेरिकी कंपनियों के अधिकारियों ने भारत में उभरते कारोबारी अवसरों को लेकर अपने विचार साझा किए. चर्चा में भारत में कारोबार के विस्तार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा शुल्क से जुड़े मुद्दों को लेकर बातचीत जारी है. ऐसे में निवेश और विनिर्माण पर जोर दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में व्यापार के साथ-साथ निवेश को भी महत्वपूर्ण आधार बनाने की कोशिश को दर्शाता है.
रूस से ऊर्जा खरीद पर अतिरिक्त शुल्क का मुद्दा
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के बीच शुल्क का मुद्दा भी अहम बना हुआ है. अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर भारत पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए अधिकृत करने वाला कानून पारित किया है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी शुल्क की अंतिम दर और इसके दायरे को लेकर अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है.
ऐसे कारोबारी माहौल में गोयल की अमेरिकी कंपनियों के साथ बैठक का फोकस निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और दीर्घकालिक कारोबारी सहयोग पर रहा.
जी-20 बैठक के लिए अमेरिका में हैं गोयल
गोयल जी-20 देशों के वाणिज्य मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका की एक सप्ताह की यात्रा पर हैं. जी-20 वाणिज्य मंत्रियों की बैठक बुधवार और गुरुवार को मिल्वॉकी में आयोजित की जा रही है.
अमेरिकी कंपनियों के साथ उनकी बैठक को भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में निवेश तथा विनिर्माण के महत्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारोबारी पहल के तौर पर देखा जा रहा है.
बुधवार सेंसेक्स 48.78 अंक यानी 0.07 फीसदी गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 95.75 अंक यानी 0.42 फीसदी की गिरावट रही और यह 22,620.45 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र दबाव बने रहने के संकेत हैं. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जबकि आज सुबह गिफ्ट निफ्टी कमजोर संकेत दे रहा है. एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है. ऐसे में घरेलू बाजार की शुरुआत नरम रह सकती है. कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख कंपनियों से जुड़ी खबरों पर रहेगी.
बुधवार को कैसी रही बाजार की चाल?
बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में कुछ समय के लिए तेजी देखने को मिली, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई. कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 48.78 अंक यानी 0.07 फीसदी गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 95.75 अंक यानी 0.42 फीसदी की गिरावट रही और यह 22,620.45 पर बंद हुआ.
सेंसेक्स के 30 शेयरों में 13 बढ़त और 17 गिरावट के साथ बंद हुए. निफ्टी के 50 शेयरों में 17 शेयर चढ़े, 32 गिरे, जबकि एक शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ. सेंसेक्स में कोटक महिंद्रा बैंक 2.86 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा चढ़ा. आईसीआईसीआई बैंक में 2.31 फीसदी और इंडिगो में 2.05 फीसदी की तेजी रही. एक्सिस बैंक 1.41 फीसदी और अल्ट्राटेक सीमेंट 1.18 फीसदी मजबूत हुआ.
दूसरी ओर, इटरनल 2.31 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा कमजोर रहा. सन फार्मा में 2.15 फीसदी, टाइटन में 2.01 फीसदी, अडानी पोर्ट्स में 1.76 फीसदी और टाटा स्टील में 1.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी में कोटक महिंद्रा बैंक 2.71 फीसदी, इंडिगो 2.30 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 2.28 फीसदी, अल्ट्राटेक सीमेंट 1.17 फीसदी और एक्सिस बैंक 1.15 फीसदी चढ़े. वहीं, अपोलो हॉस्पिटल्स 5.70 फीसदी, मैक्स हेल्थकेयर 5.33 फीसदी और बीएसई 3.38 फीसदी गिरकर बंद हुए.
आज बाजार के लिए क्या संकेत?
गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख है, जबकि गिफ्ट निफ्टी घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत दे रहा है. ऐसे में बाजार की शुरुआती चाल महत्वपूर्ण रहेगी. पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के बीच आज भी चुनिंदा शेयरों में खरीदारी और व्यापक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेतों के बीच कई कंपनियों से जुड़ी खबरों के चलते उनके शेयरों में हलचल रह सकती है. इन्फोसिस ने नीदरलैंड के बैंक एबीएन एमरो के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाई है, जिसके तहत बैंक के कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद की जाएगी. एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड-लीगल और ग्रुप जनरल काउंसल सुधीर कुमार झा 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो गए. टेक महिंद्रा का निदेशक मंडल 15 अक्टूबर को अंतरिम लाभांश और बोनस शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर विचार करेगा. एसीएमई सोलर की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई ने राजस्थान में एफडीआरई परियोजना के बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली वाले पहले चरण की शुरुआत की है. ब्लू डार्ट एक्सप्रेस 1 जनवरी 2027 से घरेलू सेवाओं की कीमतों में 9-12 फीसदी तक बढ़ोतरी करेगी. एनटीपीसी ग्रीन राजस्थान में 200 मेगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा राउंड-द-क्लॉक परियोजना के तहत 50 मेगावॉट की चौथी सौर क्षमता का वाणिज्यिक परिचालन 2 अक्टूबर से शुरू करेगी. मुथूट कैपिटल सर्विसेज ने दो डायरेक्ट असाइनमेंट सौदों के जरिए कुल 140.31 करोड़ रुपये जुटाए हैं. आईआरएफसी को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बिहार में 396.9 करोड़ रुपये का कारण बताओ नोटिस मिला है. जिंदल स्टेनलेस ने साधना भवन की संरचनात्मक मजबूती के लिए 160 टन से अधिक ग्रेड 304एल स्टेनलेस स्टील की आपूर्ति की है. एनसीसी ने सितंबर में 500.22 करोड़ रुपये के दो ठेके हासिल किए हैं और आंध्र प्रदेश में 1,076.71 करोड़ रुपये की जलापूर्ति परियोजना भी मिली है. वहीं, क्यूपिड ने वित्त वर्ष 2026-27 में 800 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व और 250 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ हासिल करने का अनुमान जताया है. कंपनी का शेयर बुधवार को 8.21 फीसदी की बढ़त के साथ 311.65 रुपये पर बंद हुआ था.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, छह प्रमुख रबी फसलों की सरकारी खरीद और किसानों को किए गए MSP भुगतान में भी पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं समेत छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. सरकार के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है. छह फसलों में गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम शामिल हैं. कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.
किस फसल का MSP कितना बढ़ा?
सरकार ने रबी सीजन 2027-28 के लिए सभी छह अनिवार्य रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बढ़ोतरी इस प्रकार है:
1. कुसुम: ₹675 प्रति क्विंटल
2. रेपसीड-सरसों: ₹413 प्रति क्विंटल
3. मसूर: ₹390 प्रति क्विंटल
4. जौ: ₹136 प्रति क्विंटल
5. चना: ₹83 प्रति क्विंटल
6. गेहूं: ₹25 प्रति क्विंटल
कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी इस फैसले में सबसे अधिक है.
MSP बढ़ाने के पीछे क्या है सरकार का तर्क?
सरकार के अनुसार, MSP तय करने की नीति 2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने का प्रावधान किया गया है. CACP की सिफारिशों के आधार पर सरकार हर साल 22 अनिवार्य कृषि फसलों के MSP तय करती है, जिनमें छह रबी फसलें शामिल हैं.
सरकार का कहना है कि रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने के साथ फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा. खास तौर पर दाल और तिलहन वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य है.
दाल और तिलहन की खेती पर जोर
गेहूं जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसल के साथ सरकार मसूर, चना और रेपसीड-सरसों जैसी दाल एवं तिलहन फसलों को भी बढ़ावा दे रही है. MSP में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी के जरिए किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की नीति पर जोर दिया गया है. सरकार के मुताबिक, MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य सिर्फ कीमत बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को अलग-अलग फसलों के बीच बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना भी है.
पिछले वर्षों में भी बढ़ा है रबी फसलों का MSP
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2026-27 के बीच छह प्रमुख रबी फसलों के MSP में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. 2014-15 में गेहूं का MSP ₹1,400 प्रति क्विंटल था, जो 2026-27 के लिए बढ़कर ₹2,585 हो चुका था. इसी अवधि में मसूर का MSP ₹3,075 से बढ़कर ₹7,000 और रेपसीड-सरसों का MSP ₹3,100 से बढ़कर ₹6,200 प्रति क्विंटल हुआ.
सरकारी खरीद और MSP भुगतान भी बढ़ा
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, छह प्रमुख रबी फसलों की सरकारी खरीद और किसानों को किए गए MSP भुगतान में भी पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है. RMS 2025-26 के दौरान इन छह फसलों की कुल खरीद करीब 310 लाख मीट्रिक टन रही और इनकी MSP खरीद का मूल्य करीब ₹79,267 करोड़ रहा.
सरकार के अनुसार, MSP पर सरकारी खरीद किसानों को तब बाजार मूल्य से सुरक्षा देने का एक माध्यम है, जब संबंधित कृषि उपज के बाजार भाव MSP से नीचे चले जाएं. हालांकि, कुल उत्पादन का केवल बाजार योग्य हिस्सा ही सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होता है.
कुल मिलाकर, रबी सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के MSP में बढ़ोतरी से सरकार ने किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने और दाल-तिलहन समेत विभिन्न फसलों की खेती को बढ़ावा देने की अपनी नीति को आगे बढ़ाया है.
ईडी की जांच में 22 ऐसी ग्रुप कंपनियों का भी पता चलने की बात कही गई है, जिनमें कोई कर्मचारी नहीं था और न ही कोई स्वतंत्र कारोबारी गतिविधि दिखाई दी. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल जमीन से जुड़े लेनदेन, कॉरपोरेट गारंटी और जमीन गिरवी रखने जैसे कामों के लिए किया जाता था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वाटिका ग्रुप के ₹260 करोड़ के प्लॉट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है. दोनों को 29 सितंबर को गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया. यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज कई FIR से जुड़ा है.
2010 से 2012 के बीच लिए गए थे करीब ₹260 करोड़
ईडी के मुताबिक, मामला वाटिका ग्रुप के गुरुग्राम स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है. 2010 से 2012 के बीच सात अलग-अलग खरीदार संस्थाओं ने सेक्टर 84, 85 और सेक्टर 88A में रेजिडेंशियल प्लॉट बुक किए थे. खरीदारों ने इन प्लॉट्स की पूरी कीमत, करीब ₹260 करोड़, एडवांस में चुका दी थी. इसके बाद 2014-15 में एग्रीमेंट भी किए गए.
जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया और पहले से आवंटित प्लॉट्स के नंबर और लोकेशन में बदलाव कर उन्हें दूसरे खरीदारों को बेच दिया गया. ईडी के अनुसार, करीब 14 साल बीतने के बाद भी वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में लगभग ₹90 करोड़ मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी नहीं हुई, जबकि वाटिका इंडिया नेक्स्ट में करीब ₹140.73 करोड़ मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी लंबित है.
22 ग्रुप कंपनियों के जरिए पैसों के ट्रांसफर का आरोप
ईडी की जांच में 22 ऐसी ग्रुप कंपनियों का भी पता चलने की बात कही गई है, जिनमें कोई कर्मचारी नहीं था और न ही कोई स्वतंत्र कारोबारी गतिविधि दिखाई दी. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल जमीन से जुड़े लेनदेन, कॉरपोरेट गारंटी और जमीन गिरवी रखने जैसे कामों के लिए किया जाता था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से मिले पैसे को संबंधित प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय ऐसी दूसरी ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनका संबंधित प्रोजेक्ट से सीधा संबंध नहीं था. ईडी ने इससे पहले भी वाटिका ग्रुप और उसके प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई की है. नवंबर 2025 में एजेंसी ने करीब ₹108 करोड़ मूल्य की एक कमर्शियल जमीन को अस्थायी रूप से अटैच किया था. इससे पहले करीब ₹68.59 करोड़ की संपत्तियां भी अटैच की गई थीं.
स्केलर वेंचर्स से जुड़े लेनदेन की भी जांच
जांच के दौरान 2024 के एक अन्य लेनदेन की भी जांच की गई. ईडी के मुताबिक, स्केलर वेंचर्स ने सेल एग्रीमेंट और बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत वाटिका को ₹473.18 करोड़ दिए थे. एजेंसी का आरोप है कि 165 प्लॉट में से 15 प्लॉट वापस खरीदे गए, जबकि शेष 150 में से 14 प्लॉट स्केलर वेंचर्स की जानकारी के बिना तीसरे पक्ष को करीब ₹13.62 करोड़ में बेच दिए गए. ईडी ने अब तक की जांच में अपराध से संबंधित रकम को ₹154.36 करोड़ आंका है.
तलाशी में कार, सोना और ज्वेलरी जब्त
ईडी ने अगस्त 2026 में वाटिका लिमिटिड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर्स से जुड़े दिल्ली-NCR के सात ठिकानों पर तलाशी ली थी. इस कार्रवाई में करीब ₹33 करोड़ की संपत्तियां जब्त या फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जिसमें लग्जरी वाहन, ज्वेलरी, बैंक खाते और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल थीं.
एजेंसी की पिछली कार्रवाई में 1.3 किलोग्राम से अधिक सोना और हीरे की ज्वेलरी भी जब्त किए जाने की बात कही गई थी. इसके अलावा करीब ₹3.04 करोड़ के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज किया गया था.
मामले की जांच अभी जारी है और ईडी की रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से कथित लेनदेन और ग्रुप कंपनियों के बीच फंड ट्रांसफर को लेकर पूछताछ की जा रही है. गौरतलब है कि ईडी ने 2025 में अदालत के समक्ष वाटिका लिमिटिड, अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और अन्य के खिलाफ PMLA के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की थी.