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द बिग शॉर्ट: एफपीआई ने भारत पर सबसे बड़ी बेयरिश सट्टेबाजी की

रिकॉर्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस शॉर्ट्स के साथ, एफपीआई एक पूरी तरह से भालू-मार्केट सट्टेबाजी का संकेत दे रहे हैं. रिकॉर्ड शॉर्ट पोजिशंस कोविड स्तरों को पार कर गए हैं क्योंकि वैश्विक पूंजी और अधिक नुकसान के लिए तैयार हो रही है. कोई भी सकारात्मक ट्रिगर ऊपर की ओर तेजी से झूल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

पलक शाह

फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआई) भारत के इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में अब तक का सबसे बड़ा नेट शॉर्ट पोजिशन रख रहे हैं, और इस सट्टेबाजी का पैमाना अब तक के किसी भी रिकॉर्ड से आगे है.

Indiacharts और Strike Money के डेटा के अनुसार, एफपीआई के पास 1 फरवरी, 2026 तक 8,87,479 इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स का नेट शॉर्ट पोजिशन है. महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कदम संघीय बजट के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया नहीं थी. इससे पहले के शुक्रवार को ही पोजिशनिंग लगभग इसी स्तर पर थी, जो दिखाता है कि वैश्विक निवेशक किसी एक घटना के प्रति प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारतीय इक्विटीज़ पर गहरे बेयरिश दृष्टिकोण को बनाए और सुरक्षित रख रहे हैं.

यह भारत में एफपीआई द्वारा अब तक रखा गया सबसे आक्रामक शॉर्ट एक्सपोज़र है, जो पहले के चरम से बहुत आगे है. मार्च 2020 में कोविड पैनिक के चरम पर नेट शॉर्ट्स काफी कम थे. 2013 के टेपर टैंट्रम और 2016 के ग्लोबल रिस्क-ऑफ दौर की तुलना में यह पोजिशनिंग अब और भी गहरी लगती है. वर्तमान पोजिशनिंग केवल सतर्कता से अधिक कुछ दर्शाती है, यह दृढ़ विश्वास को दिखाती है.

इस ट्रेड की संरचना इस विश्वास को स्पष्ट करती है. नेट शॉर्ट आंकड़ा इंडेक्स फ्यूचर्स की बिक्री, भारी कॉल राइटिंग और पुट खरीद के संयोजन से निकाला गया है, जो फ्यूचर्स और ऑप्शंस में बहुत छोटे लॉन्ग पोजिशंस के खिलाफ है. ऐसी संरचना आमतौर पर तब देखी जाती है जब निवेशक लगातार गिरावट की उम्मीद करते हैं, न कि केवल अल्पकालिक अस्थिरता से पोर्टफोलियो की सुरक्षा के लिए.

जब ऑप्शंस को हटाया जाता है तब भी बेयरिश संदेश बरकरार रहता है.

केवल इंडेक्स फ्यूचर्स में एफपीआई का नेट शॉर्ट एक्सपोजर जनवरी के अंत में –2,27,533 कॉन्ट्रैक्ट्स तक पहुंच गया और अब भी –2,00,000 कॉन्ट्रैक्ट्स से ऊपर है. केवल कोविड पतन के दौरान ही ऐसी तुलना की जा सकती है, एक ऐसा दौर जो SEBI द्वारा शॉर्ट-सेलिंग बैन लगाने के बाद अचानक समाप्त हो गया, जिससे शॉर्ट्स को एक जोरदार रिकवरी में अनवाइंड करना पड़ा. इस बार कोई ऐसा हस्तक्षेप उम्मीद नहीं है, जिससे बाजार पूरी पोजिशनिंग के प्रभाव के लिए उजागर हैं.

Strike Money और Indiacharts के संस्थापक रोहित श्रीवास्तव के अनुसार, खास बात सिर्फ पैमाने की नहीं बल्कि सट्टेबाजी की लगातार बनी रहने की है.

उन्होंने कहैा “यह प्रतिक्रिया आधारित पोजिशनिंग नहीं है, एफपीआई ये शॉर्ट्स बना रहे हैं और उन्हें बनाए रख रहे हैं. जब पोजिशनिंग रिकॉर्ड स्तर पर बनी रहती है जबकि घरेलू नीति स्पष्ट है, तो यह दर्शाता है कि यह दृष्टिकोण संरचनात्मक है, न कि सामरिक.”

रोहित का कहना है कि यह पोजिशनिंग व्यापक वैश्विक संकेतों के साथ मेल खाती है. जैसे-जैसे वैश्विक तरलता तंग होती है, विकास धीमा होता है और भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, जोखिम की भूख बाजारों में कम होती जा रही है. ऐसे दौर में, उभरते बाजार लंबे दबाव का सामना करते हैं, खासकर जब वैश्विक निवेशक चक्रीय मंदी से कुछ और स्थायी बदलाव की उम्मीद करने लगते हैं.

वह इस क्षण को सामाजिक-आर्थिक सिद्धांत (Socionomic Theory) के संदर्भ में भी देखते हैं. “बड़े बुल मार्केट पैनिक में समाप्त नहीं होते. वे आशावाद और समाधान में समाप्त होते हैं,” वह कहते हैं. “शांति वार्ता, कूटनीतिक breakthroughs और यह विश्वास कि सबसे बुरा समय गुजर गया है, अक्सर बाजार की चोटी के साथ मेल खाता है. असली नुकसान आमतौर पर बाद में आता है.”

इस दृष्टिकोण से, वर्तमान रिकॉर्ड-शॉर्ट पोजिशनिंग बड़े बेयर-मार्केट चक्र की उम्मीद को दर्शा सकती है, जहां सबसे तीव्र मूल्य गिरावट अंत के चरम के करीब आती है, शुरुआत में नहीं.

फिर भी, इस ट्रेड की चरमता एक विरोधाभास पैदा करती है. जब एफपीआई शॉर्ट पक्ष पर इतनी भारी पोजिशनिंग रखते हैं, तो बाजार किसी भी वास्तविक सकारात्मक वैश्विक ट्रिगर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है. वैश्विक मौद्रिक नीति में निर्णायक बदलाव, तरलता में अप्रत्याशित उछाल, या महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक breakthroughs तेजी से शॉर्ट कवरिंग को मजबूर कर सकते हैं, जिससे एक शक्तिशाली, सीधी रैली शुरू हो सकती है. हालांकि, ऐसे मूव्स आमतौर पर तेज, प्रचंड और अक्सर अल्पकालिक बेयर मार्केट की विशेषता होते हैं. 

फिलहाल, डेरिवेटिव्स मार्केट एक स्पष्ट और गंभीर संकेत दे रहा है. एफपीआई केवल भारत पर सतर्क नहीं हैं, वे रिकॉर्ड शॉर्ट, दृढ़ हैं और संभावित नुकसान के लिए पोजिशन में हैं. चाहे इसका परिणाम एक जोरदार शॉर्ट स्क्वीज़ हो या और गहरी गिरावट, संदेश स्पष्ट है: वैश्विक पूंजी मानती है कि भारतीय इक्विटीज के लिए सबसे कठिन दौर अभी भी आना बाकी है.

डेटा स्रोत: Indiacharts, Strike Money.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के निडर लेखक हैं. मुंबई में लगभग दो दशकों की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव के साथ, पालक ने खुद को एक अडिग सच की खोज करने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित किया है, जो पैसे, सत्ता और नियमन के गठजोड़ की तहों में गहराई तक जाते हैं. उनके लेख भारत के सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय अखबारों जैसे The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line में प्रकाशित हुए हैं जहां उनकी तीखी रिपोर्टिंग ने नरेटिव गढ़े और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स को हिला कर रख दिया.

19 साल की उम्र में ही अपराध पत्रकारिता की ओर खिंचाव महसूस करने वाले पालक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के मुंबई के गिरोह युद्ध अब एक और अधिक चिकने, लेकिन कहीं अधिक खतरनाक संगठित अपराध यानी कॉर्पोरेट टावरों में रची जाने वाली सफेदपोश साजिशों में बदल चुके हैं. यह अहसास ही उन्हें फाइनेंशियल जर्नलिज्म की ओर ले गया, जहां उन्होंने भारत की ‘सफेद धन’ अर्थव्यवस्था की जटिल चालों को वर्षों तक समझा और उजागर किया है. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामक खामियों तक, पलक का काम हाई-फाइनेंस की चमक-दमक से पर्दा हटाकर दिखाता है कि असली धागे खींच कौन रहा है.)

 


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