TCS को हुआ 12 हजार करोड़ से ज्‍यादा का मुनाफा, निवेशकों की हुई बल्‍ले-बल्‍ले

टीसीएस भारत की अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसने अपने इन नतीजों के बाद निवेशकों के लिए डिविडेंड देने का ऐलान किया है. 

Last Modified:
Thursday, 11 July, 2024
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टाटा समूह की सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विसेज ने अपनी पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी के द्वारा जारी किए नतीजों के अनुसार, कंपनी को पहली तिमाही में 12078 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ है. हालांकि कंपनी की आय में थोड़ा कमी देखने को मिली है और EBITDA में भी कमी देखने को मिली है.कंपनी का EBITDA पिछले साल 15918  करोड़ रुपये था जबकि इस साल ये 15442 करोड़ रुपये रहा है. 

क्‍या कह रहे हैं कंपनी के तिमाही आंकड़े? 
सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम कर रही टाटा समूह की अग्रणी कंपनी की आय का आंकलन अगर तिमाही आधार पर करें तो ये 2.2 प्रतिशत तक बढ़ी है. चौथे तिमाही से तुलना करें तो उसमें कंपनी की आय 62613 करोड़ रुपये थी जबकि इस बार ये 62280 करोड़ रुपये रही है. वहीं कंपनी की वित्तिय स्थिति को दिखाने वाला EBITDA पर अनुमान 15280 करोड़ रुपये था जो लेकिन इसमें तीन प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है और ये 15442 करोड़ रुपये रहा है. वहीं अगर कंपनी के मार्जिन पर नजर डालें तो उसमें भी गिरावट हुई है. Q4FY24 में ये 26 प्रतिशत पर था जो अब 24.7 प्रतिशत पर आ गया है. हालांकि जानकारों ने इसके 24.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. वहीं अगर कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्‍स (PAT) यानी नेट प्रॉफिट 12,040 करोड़ रहा है, जोकि Q4FY24 के 12,434 करोड़ से 3% घटा है. जानकारों ने इसे लेकर अनुमान 12,050 करोड़ का लगाया गया था.

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निवेशकों की हुई बल्‍ले-बल्‍ले 
कंपनी ने 12000 करोड़ के मुनाफे के बाद निवेशकों की भी बल्‍ले बल्‍ले हो गई है. कंपनी ने सभी निवेशकों के लिए 1 रुपये के फेस वैल्‍यू पर प्रति शेयर 10 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है. इस ऐलान के साथ वर्ष 2024-25 में टीसीएस पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसने डिविडेंड का ऐलान किया है. TCS डिविडेंड के लिए 20 जुलाई रिकॉर्ड डेट रखी गई है जबकि 5 अगस्‍त पेमेंट डेट रहेगी. 

क्‍या शेयर पर दिखा असर? 
कंपनी का शेयर गुरुवार को 3931 रुपये पर खुला जबकि 3902 रुपये पर बंद हुआ. कंपनी के शेयर में बंद होने पर 0.18 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. क्‍योंकि कंपनी के नतीजे बाजार बंद होने के बाद आए ऐसे में माना जा रहा है कि हफ्ते के आखिरी दिन शेयरों पर इसका असर देखने को मिलेगा. कंपनी के शेयर का 52 हफ्तों का हाई 4254.75 रुपये है तो वहीं 52 हफ्तों का लो 3250.10 रुपये है. 


कमजोर मॉनसून से बढ़ सकती है महंगाई की मार, आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी मंडरा रहा खतरा: RBI

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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देश में कमजोर पड़ते मॉनसून ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा अर्थव्यवस्था स्थिति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर और महंगाई के अनुमान पर पड़ सकता है. हालांकि, आरबीआई ने यह भी कहा है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद, नियंत्रित चालू खाता घाटा और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है.

बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 जून तक देश में बारिश की कमी 28.4 प्रतिशत थी, जो 21 जून तक बढ़कर 42.2 प्रतिशत हो गई. आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.

विकास दर और महंगाई पर पड़ सकता है असर

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 प्रतिशत के शुरुआती अनुमान से कम है. वहीं, खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मॉनसून इन अनुमानों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.

वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में अधिक मजबूत है. पिछले कुछ वर्षों में देश ने मजबूत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई, राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखा है.

निजी खपत और निवेश से मिली अर्थव्यवस्था को ताकत

आरबीआई के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसका मुख्य आधार निजी खपत और स्थिर निवेश रहा. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों के संकेतक भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं.

खाद्य और ईंधन कीमतों से बढ़ी महंगाई

महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.5 प्रतिशत थी. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और खाद्य वस्तुओं की महंगाई जून में भी बनी रहने के संकेत मिले हैं.

विदेशी मुद्रा भंडार और एफडीआई से मिला सहारा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बाह्य क्षेत्र भी मजबूत बना हुआ है. चालू खाता घाटा नियंत्रित है और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में तेजी आई है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में कुछ निकासी देखने को मिली है. आरबीआई का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले कदमों से आने वाले समय में पूंजी प्रवाह को समर्थन मिल सकता है.
 


क्रेड के संस्थापक कुणाल शाह मेटा से जुड़े, व्हाट्सऐप के ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी संभालेंगे

Meta ने CRED में किया बड़ा निवेश, कंपनी की वैल्यू 4.5 अरब डॉलर पहुंची

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Tuesday, 23 June, 2026
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फिनटेक स्टार्टअप क्रेड (CRED) के संस्थापक कुणाल शाह अब मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मेटा ने क्रेड में करीब 90 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और इसी के साथ कुणाल शाह को व्हाट्सऐप (WhatsApp) के नए ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस समझौते के तहत मेटा, क्रेड में लगभग 20 प्रतिशत अल्पांश हिस्सेदारी खरीदेगी. इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग 43,239 करोड़ रुपये आंका गया है. फंडिंग राउंड में प्राथमिक पूंजी निवेश के साथ सेकेंडरी शेयरों की खरीद भी शामिल है.

व्हाट्सऐप के अगले चरण की ग्रोथ का नेतृत्व करेंगे शाह

कुणाल शाह व्हाट्सऐप के विकास के अगले चरण का नेतृत्व करेंगे. उनकी प्राथमिकता विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन आधारित राजस्व मॉडल को बढ़ाना तथा प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एजेंट्स की तैनाती को तेज करना होगी. नेतृत्व परिवर्तन के तहत कुणाल शाह क्रेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद से हट जाएंगे और मेटा की वैश्विक नेतृत्व टीम में शामिल होंगे. वह विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्हें कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं.

मितेन संपत बने अंतरिम CEO

क्रेड में वर्ष 2020 से रणनीति और वित्त का नेतृत्व कर रहे मितेन संपत को तत्काल प्रभाव से अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. कंपनी फिलहाल दीर्घकालिक प्रबंधन ढांचे पर काम कर रही है और संभावित आईपीओ की तैयारियों में जुटी है.

17 मिलियन से अधिक सक्रिय सदस्य

वर्ष 2018 में स्थापित क्रेड क्रेडिट योग्य उपभोक्ताओं के लिए भुगतान, ऋण, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और लाइफस्टाइल सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी के अनुसार, उसके 1.7 करोड़ मासिक सक्रिय सदस्य हैं और भारत के 40 प्रतिशत से अधिक क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान उसके प्लेटफॉर्म के माध्यम से होते हैं. कंपनी का लेंडिंग कारोबार पार्टनर वित्तीय संस्थानों के लिए लगभग 24,000 करोड़ रुपये की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट तक पहुंच चुका है. क्रेड ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व और लाभप्रदता हासिल करने का भी दावा किया है.

भारत के फिनटेक सेक्टर पर मेटा का बड़ा दांव

मेटा का यह निवेश भारत के फिनटेक क्षेत्र में उसके सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है. कंपनी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना चाहती है.

कुणाल शाह ने इस बदलाव पर कहा कि क्रेड एक साधारण रिवॉर्ड प्लेटफॉर्म से विकसित होकर लाखों सदस्यों की सेवा करने वाला लाभदायक मंच बन चुका है और मौजूदा नेतृत्व टीम कंपनी को अगले चरण तक ले जाने के लिए पूरी तरह सक्षम है.
 


सोमवार की तेजी के बाद आज कैसा रहेगा बाजार का मूड? जानें किन स्टॉक्स पर रखें नजर

सोमवार को BSE सेंसेक्स 291 अंक की बढ़त के साथ 77,094 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 24,100 के ऊपर 24,103 अंक पर बंद हुआ.

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Tuesday, 23 June, 2026
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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 291 अंक की बढ़त के साथ 77,094 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,100 के ऊपर 24,103 अंक पर बंद हुआ. आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी, विदेशी निवेशकों की सक्रियता और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार को मजबूती मिली थी. पिछले सप्ताह आईटी शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को बाजार में रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ. तो चलिए जानते हैं आज कौन-से शेयर फोकस में रहने वाले हैं.

कल किन शेयरों ने दिखाई तेजी, किन पर रहा दबाव

सोमवार के कारोबारी सत्र में आईटी, फार्मा और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. टेक महिंद्रा और सन फार्मा निफ्टी के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक ने भी बाजार को मजबूती दी. 

वहीं, कुछ आईटी और मेटल शेयरों में दबाव बना रहा. विप्रो में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चुनिंदा धातु शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली. निवेशकों का रुख फिलहाल मजबूत फंडामेंटल, नए ऑर्डर, पूंजी जुटाने की योजनाओं और सकारात्मक कॉरपोरेट अपडेट वाली कंपनियों की ओर बना हुआ है. 

आज इन शेयरों पर रखें नजर
आज शेयर बाजार में कई कंपनियां अपने कारोारी अपडेट्स, नए ऑर्डर, निवेश योजनाओं और विस्तार रणनीतियों के कारण निवेशकों के रडार पर रहेंगी, ऐसे में बाजार की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद है.  हिंदुस्तान जिंक ने ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए नई साझेदारी की है, जबकि इन्फो एज ने एआई और डीपटेक स्टार्टअप्स में अपने बड़े निवेश से बाजार का ध्यान खींचा है. लेमन ट्री होटल्स ने नेपाल के जनकपुर में नए होटल की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय विस्तार को गति दी है. वहीं, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने 290.35 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर अपना क्यूआईपी लॉन्च किया है. वोडाफोन आइडिया को आदित्य बिड़ला समूह की इकाई से प्रमोटर निवेश मिलने जा रहा है, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को 1,081 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा, बाजार स्टाइल रिटेल में हिस्सेदारी बिक्री और इलेक्ट्रॉनिक्स मार्ट इंडिया के नए स्टोर विस्तार जैसे घटनाक्रम भी निवेशकों की नजर में रहेंगे. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

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Monday, 22 June, 2026
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पलक शाह  

राज ठाकरे उस समय कोहिनूर सौदे में शामिल हुए जब पैसा आ रहा था. नुकसान होने और घाटा सामने आने से पहले वह बाहर निकल गए. ED ने उनसे 8.5 घंटे तक पूछताछ की. महाराष्ट्र अब भी एक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है. राज ठाकरे की कोहिनूर कहानी महाराष्ट्र के सबसे कम जांचे गए वित्तीय रहस्यों में से एक बनी हुई है.

राज ठाकरे

कल्पना कीजिए कि यह दुनिया के किसी और हिस्से में हुआ होता.

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है. और फिर, यहीं पर दिमाग रुक जाता है, वही संस्था उसी कंपनी को, जिसमें वह अभी-अभी नुकसान उठा चुकी है, और अधिक पैसा उधार देती है. कुल जोखिम बढ़कर ₹860 करोड़ तक पहुंच जाता है. राजनेता इस लेन-देन से बाहर निकल जाता है. वर्षों बाद कंपनी ढह जाती है. संस्था भी संकट में आ जाती है. भारत भर के निवेशक नुकसान झेलते हैं.

किसी को भी कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं मिलता.

यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है.

यह राज ठाकरे की कोहिनूर कहानी है. यह मुंबई में हुई. इसमें वास्तविक धन शामिल था. इसमें IL&FS शामिल थी, एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी, जिसके शेयरधारकों में LIC भी शामिल है. इस सौदे के केंद्र में मौजूद व्यक्तियों में से एक, महाराष्ट्र की सबसे पहचान योग्य राजनीतिक हस्तियों में से एक, ने आज तक सार्वजनिक रूप से कभी नहीं बताया कि आखिर हुआ क्या था.

एक बार भी नहीं. कभी नहीं.

प्रमुख जमीन, सार्वजनिक धन और राजनीतिक नाम

अगस्त 2005. मुंबई में Kohinoor CTNL Infrastructure Company Private Limited नामक कंपनी का गठन हुआ. इसके संस्थापक थे: राज ठाकरे, जो मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इसमें शामिल हुए, पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री मनोहर जोशी के पुत्र उन्मेष जोशी, और बिल्डर राजन शिरोडकर, जिन्हें उस समय की हर रिपोर्ट में ठाकरे का "करीबी सहयोगी" बताया गया.

इस समूह ने दादर पश्चिम में स्थित बंद पड़ी कोहिनूर मिल की 4.8 एकड़ जमीन के लिए बोली लगाई. स्थान: शिवसेना भवन के सामने. शिवाजी पार्क से पैदल दूरी पर. दादर स्टेशन से कुछ ही मिनट की दूरी पर. भारत की सबसे मूल्यवान शहरी जमीनों में से एक.

उन्होंने नीलामी जीत ली. कीमत थी: ₹421 करोड़.

योजना एक शॉपिंग मॉल बनाने की थी. इसके वित्तीय समर्थक थे IL&FS, Infrastructure Leasing & Financial Services, एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी, जिसके शेयरधारकों में भारतीय जीवन बीमा निगम भी शामिल है. IL&FS ने ₹225 करोड़ की इक्विटी का चेक जारी किया.

इस सौदे के पहले दिन से ही इसमें राजनीतिक रूप से जुड़े संस्थापक, सार्वजनिक संस्थागत धन और मुंबई की प्रमुख रियल एस्टेट शामिल थी.

पैसा आ चुका था. परियोजना शुरू हो चुकी थी.

IL&FS ने लगाए ₹225 करोड़

IL&FS रियल एस्टेट परियोजनाओं को यूं ही ₹225 करोड़ नहीं देती. यह एक अवसंरचना वित्तीय संस्था है. इसका धन अंततः सार्वजनिक व्यवस्था से आता है, सरकारी हिस्सेदारी, आम भारतीयों द्वारा चुकाए गए LIC प्रीमियम और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए गए ऋण.

उसी धन में से ₹225 करोड़ वर्ष 2005 में Kohinoor CTNL में लगाए गए. दादर की सबसे मूल्यवान मिल भूमि पर दो प्रमुख राजनीतिक नामों वाले समूह का समर्थन किया गया. शॉपिंग मॉल की योजना आगे बढ़ी. निर्माण शुरू हुआ. परियोजना जीवित थी.

IL&FS को ₹135 करोड़ का नुकसान और बाहर निकलना

तीन साल बाद. मॉल की योजना विफल हो गई, बाजार गिर चुका था, खुदरा किराए बुरी तरह नीचे आ गए थे. परियोजना अपनी मूल अवधारणा के अनुसार अब काम नहीं कर रही थी. IL&FS ने Kohinoor CTNL में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी से बाहर निकलने का फैसला किया.

उसे वापस मिले: ₹90 करोड़.

उसने लगाए थे: ₹225 करोड़.

सार्वजनिक धन का प्रबंधन करने वाली एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी IL&FS ने दादर की प्रमुख रियल एस्टेट पर ₹135 करोड़ का नुकसान दर्ज किया. उसी जमीन पर जहां बाद में लग्जरी अपार्टमेंट ₹46,000 प्रति वर्ग फुट की दर से बिके. मुंबई की ऐसी जमीन, जहां इतिहास में कभी स्थायी गिरावट नहीं देखी गई.

₹135 करोड़. चले गए. नुकसान के रूप में दर्ज किए गए.

इस निकासी से उठने वाले सवालों के जवाब आज तक नहीं मिले. IL&FS द्वारा बेची गई इक्विटी किसने खरीदी? किस कीमत पर? किन शर्तों पर? क्या मूल संस्थापकों से जुड़े किसी व्यक्ति ने इस हिस्सेदारी को रियायती दर पर वापस खरीदा? ये सार्वजनिक MCA रिकॉर्ड हैं. लेकिन इन्हें कभी प्राप्त कर प्रकाशित नहीं किया गया.

इसी दौरान राज ठाकरे ने भी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से Kohinoor CTNL से बाहर निकल गए.

वह बाहर थे.

IL&FS की वापसी

अब ध्यान दीजिए. क्योंकि घटनाक्रम का यही हिस्सा कहीं अधिक गहन जांच की मांग करता है.

अपनी इक्विटी निकासी पर ₹135 करोड़ का नुकसान दर्ज करने के बाद IL&FS फिर से Kohinoor CTNL में लौटी. एक इक्विटी निवेशक के रूप में नहीं. बल्कि एक ऋणदाता के रूप में. उसी कंपनी को नया ऋण दिया गया जिसमें वह अभी-अभी ₹135 करोड़ गंवा चुकी थी. वही परियोजना. वही कॉर्पोरेट इकाई. वही लोग जो इसे चला रहे थे.

इस लेन-देन का क्रम ऐसे सवाल खड़े करता है जिन्हें सामान्य व्यावसायिक तर्क से समझाना कठिन है.

कोई भी क्रेडिट समिति इसे मंजूरी नहीं देती. कोई जोखिम अधिकारी इस पर हस्ताक्षर नहीं करता. किसी कंपनी की इक्विटी पर ₹135 करोड़ का नुकसान उठाने के बाद उसी कंपनी को फिर से ऋण देना तब तक समझ में नहीं आता, जब तक कि कुछ ऐसे कारण न हों जो सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट नहीं होते.

Kohinoor CTNL में IL&FS की कुल हिस्सेदारी, इक्विटी और बाद के सभी ऋणों सहित अंततः ₹860 करोड़ तक पहुंच गई. ₹135 करोड़ गंवाने से लेकर ₹860 करोड़ के कुल जोखिम तक. उसी कंपनी में.

इस पूरे क्रम को केवल एक सामान्य निवेश निर्णय या मानक ऋण मूल्यांकन के रूप में समझाना कठिन है. संस्थागत वित्त इस तरह काम नहीं करता. दोबारा प्रवेश करने का निर्णय, पहले से नौ अंकों का नुकसान दे चुकी संरचना में लगातार पैसा भेजते रहने का निर्णय, कुछ विशेष लोगों द्वारा लिया गया था जिन्होंने इन लेन-देन को मंजूरी दी.

वे लोग कौन थे? उन्हें क्या बताया गया? उनसे यह करने को किसने कहा?

इन सवालों के जवाब IL&FS के आंतरिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं. लेकिन उन्हें कभी सार्वजनिक नहीं किया गया.

राज ठाकरे की हिस्सेदारी के पीछे छोटी कॉरपोरेट इकाई

राज ठाकरे के बाहर निकलने से पहले, उनकी हिस्सेदारी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, CIN U45203MH2007PTC173437 के माध्यम से रखी गई थी.

कागजों पर मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर कुछ इस तरह दिखाई देती है.

चुकता पूंजी: ₹1 लाख.

एक लाख रुपये.

₹1 लाख की चुकता पूंजी वाली एक कंपनी वह माध्यम थी जिसके जरिए राज ठाकरे उस सौदे में हिस्सेदार थे, जिसमें IL&FS ने ₹225 करोड़ लगाए थे और केवल जमीन अधिग्रहण की लागत ₹421 करोड़ थी. मातोश्री का गठन 2007 में हुआ, उस समय जब Kohinoor CTNL पहले से ही दो वर्षों से सक्रिय थी. उसने प्रवेश किया. उसने हिस्सेदारी रखी. वह 2008 में बाहर निकल गई.

इसकी अंतिम दाखिल बैलेंस शीट: मार्च 2020. इसकी अंतिम AGM: दिसंबर 2020. तब से यह निष्क्रिय है. MCA21 के अनुसार वर्तमान निदेशक: राजन गणेश शिरोडकर, आशुतोष गुणवंत अभ्यंकर, शिरीष गुणवंत सावंत. दाखिल रिकॉर्ड में कहीं भी राज ठाकरे का नाम दिखाई नहीं देता.

2008 में Kohinoor CTNL से बाहर निकलते समय मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्या प्राप्त हुआ? वह राशि कहां गई? वह किन खातों में जमा की गई?

ये जटिल प्रश्न नहीं हैं. 2008, 2009 और 2010 की बैलेंस शीट इनके उत्तर दे सकती हैं. वे बैलेंस शीट MCA के सार्वजनिक रिकॉर्ड हैं. लेकिन उन पर कभी रिपोर्ट नहीं की गई.

कंपनी का क्षरण

2008 के बाद, जब IL&FS ₹135 करोड़ का नुकसान सह चुकी थी, ऋणदाता के रूप में दोबारा प्रवेश कर चुकी थी, कुल जोखिम ₹860 करोड़ की ओर बढ़ रहा था और राज ठाकरे बाहर निकल चुके थे, परियोजना लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ती रही.

मॉल की योजना दो टावरों की योजना में बदल गई. एक 203 मीटर ऊंचा व्यावसायिक टावर. एक 135 मीटर ऊंचा आवासीय टावर. BMC ने सार्वजनिक पार्किंग मंजिलों के लिए अतिरिक्त FSI प्रदान की. डेवलपर्स ने प्रस्तावित 13 मंजिलों में से सात का निर्माण किया. फिर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 2011 में पार्किंग नीति समाप्त कर दी. BMC ने काम रोकने और ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए. अदालतों में मामले बढ़ते गए.

मार्च 2015 तक Kohinoor CTNL ने ऋणों का भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया. कंपनी संस्थागत धन का उपयोग कर रही थी, जो अंततः ₹860 करोड़ तक पहुंच गया और अब वह अपने दायित्वों का भुगतान करने में सक्षम नहीं थी.

2017 में, आंध्रा बैंक से एक ऋण खरीदने वाली Edelweiss Asset Reconstruction Company ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण में दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन किया. केवल उस एक ऋण पर बकाया राशि: ₹50.97 करोड़. NCLT ने मामले को स्वीकार कर लिया.

जनवरी 2019 तक एक अंतरिम समाधान पेशेवर ने सिफारिश की कि पूरी परियोजना को वास्तुशिल्प फर्म Sandeep Shirke & Associates को हस्तांतरित कर दिया जाए. उन्मेष जोशी ने नियंत्रण खो दिया. राजनीतिक रूप से जुड़े समूह द्वारा बनाई गई परियोजना अब समाधान प्रक्रिया के हाथों में थी.

MCA21 के अनुसार Kohinoor CTNL के वर्तमान निदेशक हैं: दीपक अरुण लाडे, शीतल गणेश नाइक, संदीप माधव शिकरे, मोना मनुभाई शाह. किसी भी संस्थापक का नाम नहीं. जब तक वित्तीय संकट सामने आया, मूल प्रवर्तक कंपनी की परिचालन संरचना से जुड़े नहीं रहे थे.

IL&FS का पतन, आम भारतीयों ने चुकाई कीमत

सितंबर 2018. IL&FS अपने ऋण दायित्वों का भुगतान करने में विफल रही. समूह का कुल जोखिम: ₹91,000 करोड़.

इसका असर तत्काल और गंभीर था. IL&FS के कागजात रखने वाले डेट म्यूचुअल फंडों ने रातोंरात अपनी NAV में 3-5 प्रतिशत की कटौती की. लाखों सामान्य निवेशकों ने, जिन्होंने तथाकथित "सुरक्षित" डेट फंडों में पैसा लगाया था, अपने खातों में ऐसे नुकसान देखे जिनकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी और जिन्हें वे समझ नहीं सके. पेंशन फंड प्रभावित हुए. सेंसेक्स एक ही सत्र में 1,000 से अधिक अंक गिर गया. NBFC शेयरों में भारी गिरावट आई.

Kohinoor CTNL में जोखिम: इक्विटी और ऋण मिलाकर ₹860 करोड़. Kohinoor CTNL सहित बड़े रियल एस्टेट मामलों में वसूली दर: लगभग 60 प्रतिशत. केवल इस एक कंपनी में अनुमानित मूलधन हानि: ₹340 करोड़.

₹340 करोड़ हवा में गायब नहीं हुए. यह राशि अंततः समाधान प्रक्रिया के भीतर नुकसान के रूप में समाहित हो गई. यह उन संस्थानों के पोर्टफोलियो में मौजूद थी जिनका वित्तपोषण आम भारतीयों द्वारा किया जाता है. बचत खातों के माध्यम से. बीमा प्रीमियम के माध्यम से. भविष्य निधि अंशदानों के माध्यम से.

यह नुकसान चुपचाप उस व्यवस्था द्वारा वहन किया गया और उससे जुड़े लोगों द्वारा जिन्हें यह भी नहीं पता था कि यह कंपनी अस्तित्व में थी या इसके भीतर क्या हुआ था.

संस्थापक वे लोग जिन्होंने 2005 में यह ढांचा तैयार किया, जो उस समय मौजूद थे जब IL&FS का पैसा आया, और जो पतन से कई वर्ष पहले इस व्यवस्था का हिस्सा थे, उन्होंने इसका कोई बोझ नहीं उठाया.

साढ़े आठ घंटे, पूर्ण चुप्पी

22 अगस्त 2019. राज ठाकरे सुबह 11:25 बजे प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई कार्यालय पहुंचे. उनसे 2005-2012 की लेन-देन श्रृंखला इक्विटी निवेश, बाजार से कम कीमत पर निकासी और बाद के ऋण के संबंध में पूछताछ की गई, जो ED की जांच के दायरे में थी.

वे रात 8:15 बजे बाहर निकले.

साढ़े आठ घंटे.

इसके बाद क्या हुआ: कुछ नहीं. कोई आरोप नहीं. कोई FIR नहीं. कोई और समन नहीं. ED की ओर से यह भी नहीं बताया गया कि क्या स्थापित हुआ, क्या पूछा गया, क्या उत्तर मिला या जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी.

राज ठाकरे ने कभी भी उन सवालों के मूल विषय पर बात नहीं की जो ED ने उनसे पूछे थे. उन्होंने कभी IL&FS की इक्विटी निकासी की व्याख्या नहीं की. उन्होंने कभी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर की भूमिका स्पष्ट नहीं की. उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि ₹135 करोड़ के नुकसान के बाद IL&FS उसी कंपनी में फिर से पैसा देने क्यों लौटी. उन्होंने ₹340 करोड़ के लेनदार नुकसान पर भी कभी टिप्पणी नहीं की.

न किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में. न किसी इंटरव्यू में. न किसी बयान में. कभी नहीं.

चुप्पी

इस एक कॉरपोरेट ढांचे के भीतर जो कुछ हुआ, उसका पूरा लेखा-जोखा यहां है.

भूमि अधिग्रहण पर ₹421 करोड़. शुरुआत में IL&FS की ₹225 करोड़ की इक्विटी. उस इक्विटी की बिक्री पर ₹135 करोड़ का नुकसान. उसी कंपनी को अधिक ऋण देने के लिए IL&FS की वापसी. IL&FS का कुल जोखिम ₹860 करोड़. 2015 में डिफॉल्ट. 2017 में दिवालियापन. 2018 में IL&FS का पतन. ₹340 करोड़ का लेनदार नुकसान. 2019 में ED द्वारा 8.5 घंटे की पूछताछ. कोई आरोप नहीं. कोई स्पष्टीकरण नहीं.

अब वह प्रश्न पूछिए जिसे पर्याप्त जोर से नहीं पूछा गया.

यदि यही लेन-देन क्रम, इक्विटी निवेश, नुकसान दर्ज होना, ऋणदाता के रूप में पुनः प्रवेश, जोखिम का तीन गुना होना, राजनीतिक रूप से जुड़े संस्थापकों का पतन से पहले बाहर निकल जाना और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा नुकसान वहन करना, राज ठाकरे के अलावा किसी और से जुड़ा होता, तो महाराष्ट्र इसे कैसे देखता?

क्या इसे एक असफल रियल एस्टेट परियोजना कहा जाता?

या फिर इसे वही कहा जाता जैसा यह दिखाई देता है?

इन सवालों के जवाब देने वाले दस्तावेज मौजूद हैं. Kohinoor CTNL का MCA21 शेयरहोल्डिंग रजिस्टर. 2008 से 2011 तक की मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर की बैलेंस शीट. NCLT की समाधान योजना. 2005-2012 की अवधि को कवर करने वाला IL&FS का फॉरेंसिक ऑडिट. अगस्त 2019 की पूछताछ से जुड़े ED के आंतरिक निष्कर्ष.

इनमें से हर एक सार्वजनिक या उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड है.

इनमें से किसी को भी प्राप्त नहीं किया गया. इनमें से किसी को भी प्रकाशित नहीं किया गया. इनमें से किसी को भी राज ठाकरे के सामने रखकर जवाब नहीं मांगा गया.

यह कहानी का अंत नहीं है. इस घटनाक्रम के सबसे असामान्य हिस्से के लिए कभी कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. आखिर एक वित्तीय संस्था ने पहले इस सौदे में पैसा क्यों गंवाया और फिर उसी ढांचे में और अधिक पैसा भेजने का फैसला क्यों किया?

जब तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता, कोहिनूर की कहानी महाराष्ट्र के सबसे कम जांचे गए वित्तीय रहस्यों में से एक बनी रहेगी.

स्रोत: ThePrint, मानसी फडके, 21 अगस्त 2019- Kohinoor CTNL और ED समन का मूल विस्तृत विवरण. The Quint, 22 अगस्त 2019 - ED पूछताछ की समयरेखा. Moneylife - IL&FS-Kohinoor ED जांच. Business Standard, अगस्त 2024 - IBBI रियल एस्टेट समाधान डेटा और Kohinoor CTNL वसूली आंकड़े. M&A Critique- Edelweiss की NCLT याचिका. MCA21- Kohinoor CTNL (CIN: U45200MH2005PTC155800), Matoshree Infrastructure (CIN: U45203MH2007PTC173437). Financial Express अभिलेखागार - Kohinoor Mills नीलामी, ₹421 करोड़ की बोली. Square Yards -  Kohinoor Square Phase 2 मूल्य निर्धारण, Q1 2026. Groww / VRD Nation - IL&FS संकट का बाजार पर प्रभाव.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

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Monday, 22 June, 2026
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ट्रूहोम फाइनेंस लिमिटेड (Truhome Finance- पूर्व में श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) को अपने प्रस्तावित 3,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है. कंपनी के 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ में 1,500 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का नया निर्गम और 1,500 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है. प्रमोटर शेयरधारक मैंगो क्रेस्ट इन्वेस्टमेंट लिमिटेड द्वारा 1,500 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों की बिक्री की जाएगी.

कंपनी ने कहा कि आईपीओ से प्राप्त शुद्ध आय का उपयोग पूंजी आधार को मजबूत करने, भविष्य की पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने, सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों और ऋण वितरण को बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा, यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित पूंजी पर्याप्तता संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित करने में भी उपयोग होगी. कंपनी वित्त वर्ष 2027 और 2028 के दौरान इन निधियों का उपयोग करेगी.

साल 2010 में स्थापित ट्रूहोम फाइनेंस एक खुदरा-केंद्रित किफायती आवास वित्त कंपनी है. पहले यह श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी. दिसंबर 2024 में न्यूयॉर्क स्थित वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फर्म वारबर्ग पिंकस ने इसका अधिग्रहण किया था.

कंपनी हाउसिंग लोन, प्रॉपर्टी के विरुद्ध ऋण और अन्य सुरक्षित ऋण उत्पादों की व्यापक श्रृंखला उपलब्ध कराती है. 31 दिसंबर 2025 तक इसका औसत टिकट आकार 21.3 लाख रुपये था. कंपनी मुख्य रूप से स्वरोजगार करने वाले ग्राहकों को लक्षित करती है और 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में फैली 216 शाखाओं के नेटवर्क के माध्यम से सेवाएं प्रदान करती है.

भौगोलिक रूप से विविध पोर्टफोलियो

31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में किसी भी एक राज्य की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से अधिक नहीं थी. महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु कंपनी के सबसे बड़े बाजार हैं, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 49.70 प्रतिशत रही.

कंपनी 1.10 लाख से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे चुकी है. इसके कुल एयूएम में 76.96 प्रतिशत योगदान स्वरोजगार करने वाले ग्राहकों का है. इसके अलावा, 85.32 प्रतिशत एयूएम ऐसे ग्राहकों से संबंधित है जिनका सिबिल स्कोर 700 या उससे अधिक है. वहीं, 94.78 प्रतिशत ऋणों में महिलाएं आवेदक या सह-आवेदक के रूप में शामिल हैं.

देश की तीसरी सबसे बड़ी किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनी

31 दिसंबर 2025 तक 21,124.32 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ ट्रूहोम फाइनेंस भारत की तीसरी सबसे बड़ी किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है. वित्त वर्ष 2023 से 2025 के दौरान 48.58 प्रतिशत की एयूएम सीएजीआर के साथ यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में शामिल रही है. कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

ऋण वितरण और परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत

वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कंपनी ने 6,382.45 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए. इस अवधि में कंपनी की ग्रॉस स्टेज-3 परिसंपत्तियां 1.60 प्रतिशत और नेट स्टेज-3 परिसंपत्तियां 1.09 प्रतिशत रहीं. 30 दिन से अधिक की देयता (डीपीडी) 3.15 प्रतिशत दर्ज की गई.

कंपनी का सोर्सिंग नेटवर्क 3,000 से अधिक इन-हाउस बिक्री कर्मियों, 6,600 कनेक्टर्स और 821 डीएसए पर आधारित है. 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी ने 48 ऋणदाताओं से फंड जुटाया, जिनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक तथा वित्तीय संस्थान शामिल हैं.

मुनाफे में मजबूत वृद्धि

दिसंबर 2025 तक समाप्त नौ महीनों में कंपनी का कर पश्चात लाभ (पीएटी) 333.53 करोड़ रुपये रहा. इस अवधि में परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) 2.66 प्रतिशत और इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) 11.62 प्रतिशत रहा.

कंपनी की कुल आय वित्त वर्ष 2023 में 780.50 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,905.48 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, कर पश्चात लाभ 137.75 करोड़ रुपये से बढ़कर 286.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

हाल ही में कंपनी ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा को पांच वर्ष के लिए अपना नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है. कंपनी का नेतृत्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि सुब्रमणियन कर रहे हैं, जिन्हें वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है.

जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड इस आईपीओ के बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं.
 


सीएम विजय का बड़ा दांव, ₹1 लाख करोड़ के निवेश से तमिलनाडु में 93 हजार नौकरियां

विजय सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में शुरुआती महीनों में कई बड़े निवेश समझौते किए गए हैं.

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Monday, 22 June, 2026
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार ने राज्य में बड़े निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं. करीब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के चार बड़े औद्योगिक और बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स से राज्य में 93 हजार से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. सरकार का दावा है कि ये परियोजनाएं तमिलनाडु को विनिर्माण, हरित ऊर्जा और समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी.

मुख्यमंत्री बनने के बाद निवेश पर बड़ा फोकस

अभिनेता से नेता बने और फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य में निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा किया था. सरकार बनने के बाद उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. राज्य सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में शुरुआती महीनों में कई बड़े निवेश समझौते किए गए हैं.

L&T के साथ 18,600 करोड़ रुपये की मेगा डील

विजय सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी शुरुआती औद्योगिक डील इंजीनियरिंग कंपनी L&T के साथ हुई है. राज्य सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये के निवेश वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस निवेश के तहत तीन प्रमुख परियोजनाएं विकसित की जाएंगी:

1. कांचीपुरम में 15,000 करोड़ रुपये का हाइपरस्केल और एज एआई डेटा सेंटर.
2. कोयंबटूर में 2,500 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम मैन्युफैक्चरिंग प्लांट.
3. तिरुवल्लुर के कट्टुपल्ली में 1,100 करोड़ रुपये की लागत से शिपबिल्डिंग और ऑफशोर विंड इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार.

इन परियोजनाओं से 8,200 से अधिक स्थानीय रोजगार सृजित होने की संभावना है.

थूथुकुडी में बनेगा 38 हजार करोड़ का शिपबिल्डिंग हब

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण कोरियाई कंपनी HD हुंडई ने थूथुकुडी में लगभग 38,000 करोड़ रुपये की लागत से मेगा शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है. तमिलनाडु की नई शिपबिल्डिंग नीति 2026 के तहत प्रस्तावित इस परियोजना से करीब 15,000 रोजगार मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट राज्य के दक्षिणी तट को वैश्विक समुद्री उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है.

ग्रीन एनर्जी और पावर सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

औद्योगिक विकास के लिए बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 231 बिजली परियोजनाओं के लिए 15,032 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है. इसके अलावा चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली में पांच नवीकरणीय ऊर्जा जोन विकसित किए जाएंगे. इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा. इन परियोजनाओं से लगभग 15,058 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है.

शिपयार्ड परियोजनाओं से मिल सकते हैं 55 हजार रोजगार

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की ओर से तमिलनाडु में दो ग्रीनफील्ड कमर्शियल शिपयार्ड स्थापित करने की योजना है. इन परियोजनाओं में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. हालांकि इन परियोजनाओं से जुड़े समझौते पूर्व सरकार के दौरान हुए थे, लेकिन वर्तमान सरकार इन्हें आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रही है. इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 55,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है.

निवेशकों को मिलेगी सिंगल विंडो सुविधा

निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन के गठन की घोषणा की है. इस आयोग की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे. सरकार के अनुसार, 200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली या 5,000 से अधिक स्थानीय रोजगार देने वाली कंपनियों को सिंगल विंडो फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान की जाएगी.

राज्य को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी

सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर, शिपबिल्डिंग, हरित ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में होने वाले ये बड़े निवेश तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे. साथ ही रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में शामिल करने में मदद करेंगे.
 


देश और अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त हैं शहरी भारतीय, इप्सोस रिपोर्ट में सामने आई सकारात्मक तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोगों की प्रमुख चिंताओं में बेरोजगारी, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, शिक्षा, गरीबी तथा सामाजिक असमानता शामिल हैं.

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Monday, 22 June, 2026
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इप्सोस की ‘व्हाट वरीज द वर्ल्ड’ रिपोर्ट (मई 2026) के अनुसार, शहरी भारतीयों का देश की दिशा और अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है. रिपोर्ट में 73 फीसदी शहरी भारतीयों ने माना कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि 78 फीसदी लोगों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक राय व्यक्त की.

यह आंकड़े भारत को दुनिया के सबसे आशावादी देशों में शामिल करते हैं. सिंगापुर में 81 फीसदी, मलेशिया में 70 फीसदी और हंगरी में 62 फीसदी लोगों ने अपने देशों की दिशा और आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया. इन देशों को भविष्य को लेकर मजबूत विश्वास रखने वाले देशों के समूह में देखा जा रहा है.

वैश्विक तस्वीर से अलग दिखा भारत

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 30 देशों में औसतन केवल 39 फीसदी लोगों का मानना है कि उनका देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि सिर्फ 37 फीसदी लोग अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक हैं.

दुनिया के कई हिस्सों में निराशावाद बढ़ता दिखाई दे रहा है. फ्रांस इस सूची में सबसे नीचे रहा, जहां 88 फीसदी लोगों ने माना कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है. यह विकसित देशों में बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाता है.

शासन और अर्थव्यवस्था पर भरोसा

इप्सोस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश रामालिंगम ने कहा कि शहरी भारतीयों में शासन व्यवस्था और आर्थिक दिशा को लेकर लगातार भरोसा दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा, "ये निष्कर्ष न केवल संस्थागत स्थिरता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि नागरिक जटिल वैश्विक परिस्थितियों के बीच खुद को ढालने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं. लोग सतर्क जरूर हैं, लेकिन उन्हें अपने हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भरोसा है."

भारत की प्रमुख चिंताएं

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोगों की प्रमुख चिंताओं में बेरोजगारी, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, शिक्षा, गरीबी तथा सामाजिक असमानता शामिल हैं. रोजगार को लेकर चिंता पर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और उनके रोजगार बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव का भी असर दिखाई देता है.

दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बनी महंगाई

वैश्विक स्तर पर महंगाई लोगों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. इसके बाद अपराध और हिंसा, बेरोजगारी, गरीबी और सामाजिक असमानता तथा वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि भारत की चिंताएं मुख्य रूप से रोजगार और आर्थिक दबावों से जुड़ी हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत लोगों को सबसे अधिक प्रभावित कर रही है. सुरेश रामालिंगम ने कहा, "भारत में लोगों की चिंताएं उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ी हुई हैं. रोजगार, भ्रष्टाचार और वित्तीय दबाव लोगों की प्रमुख चिंताएं हैं. हालांकि ये स्थानीय चुनौतियां हैं, लेकिन इन पर वैश्विक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ रहा है."

सर्वे में 30 देशों के लोगों को किया गया शामिल

यह सर्वेक्षण इप्सोस के ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच किया गया. भारत में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 500 लोगों से बातचीत की गई. सर्वे में कुल 30 देशों के लोगों को शामिल किया गया. भारत सहित कई विकासशील देशों के नमूने मुख्य रूप से शहरी, शिक्षित और अपेक्षाकृत समृद्ध वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए इन देशों के परिणामों को अधिक जुड़े हुए और जागरूक आबादी के दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए.

भारत के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद शहरी भारतीयों का देश की आर्थिक दिशा और भविष्य को लेकर भरोसा कायम है. हालांकि रोजगार, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियां अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं, लेकिन नागरिकों में भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है.
 


ऋषिकेश में शुरू होगा पहला कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट

यह ऋषिकेश का पहला समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट होगा, जिसमें सॉना, आइस बाथ और गर्म पानी के पूल का अनुभव एक क्रमबद्ध थर्मल यात्रा के रूप में दिया जाएगा.

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Monday, 22 June, 2026
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योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध ऋषिकेश को जल्द ही एक नई वेलनेस सुविधा मिलने जा रही है. आव्या राइज (Aavya Rise) 4 जुलाई को ‘तपस: फायर एंड आइस’ नामक कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट लॉन्च करने जा रहा है. यह ऋषिकेश का पहला समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट होगा, जिसमें सॉना, आइस बाथ और गर्म पानी के पूल का अनुभव एक क्रमबद्ध थर्मल यात्रा के रूप में दिया जाएगा.

अपर तपोवन के जंगलों के बीच विकसित इस सर्किट का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है. ऋषिकेश में पहले से ही सैकड़ों योग स्कूल, आश्रम और आयुर्वेद केंद्र मौजूद हैं, लेकिन अब तक यहां कोई समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट उपलब्ध नहीं था.

‘तपस’ शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘ऊष्मा’ या ‘ताप’ होता है. व्यापक रूप से यह निरंतर साधना और तीव्रता के माध्यम से होने वाले परिवर्तन का प्रतीक है. इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए इस सर्किट को तैयार किया गया है.

आव्या राइज के संस्थापक आशीष खंडेलवाल ने कहा, "यह बिल्कुल स्वाभाविक लगा कि ऋषिकेश में इस तरह की सुविधा होनी चाहिए. यहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग फिटनेस, योग और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आते हैं. कॉन्ट्रास्ट थेरेपी उस कड़ी की तरह है, जिसकी यहां कमी महसूस की जा रही थी."

यह सर्किट 5 जुलाई से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. इसका लाभ आव्या राइज में ठहरने वाले रिट्रीट मेहमानों के साथ-साथ पूर्व बुकिंग कराने वाले डे विजिटर्स भी उठा सकेंगे.

जो लोग इस अनुभव को अधिक गहराई से लेना चाहते हैं, उनके लिए 9 जुलाई 2026 से ‘इनॉगरल फायर एंड आइस तपस रिट्रीट’ की शुरुआत होगी. यह बहुदिवसीय कार्यक्रम पूरी तरह से थर्मल सर्किट अनुभव पर आधारित होगा.

जुलाई में आयोजित होंगे ये कार्यक्रम

1. 2-3 जुलाई : मूवर्स एंड शेकर्स (वेलनेस समुदाय और चुनिंदा पत्रकार)
2. 4 जुलाई : उद्घाटन समारोह
3. 5 जुलाई : आम लोगों के लिए शुरुआत
4. 9 से 13 जुलाई : इनॉगरल फायर एंड आइस तपस रिट्रीट

कैसा होगा अनुभव

यह सर्किट पारंपरिक कॉन्ट्रास्ट थेरेपी क्रम का पालन करेगा. इसमें पहले शरीर को गर्मी के माध्यम से खोला जाएगा, फिर ठंडे पानी के जरिए शरीर की अनुकूलन क्षमता को सक्रिय किया जाएगा और अंत में गर्म पानी में विश्राम कराया जाएगा.

हर चरण को सांस, एकाग्रता और जागरूकता के अभ्यास के साथ जोड़ा गया है. यह सुविधा आव्या राइज की अपर तपोवन स्थित वन क्षेत्र की संपत्ति में विकसित की गई है, जहां योगशाला, स्पा, पॉटरी स्टूडियो, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और कैफे जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.


100% के दावे पर CCPA का सख्त एक्शन, दो फूड कंपनियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना

CCPA ने स्टोरिया फूड्स के उन विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' और '100% अनार', '100% आम', '100% मिक्स्ड फ्रूट' जैसे दावे किए गए थे.

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Monday, 22 June, 2026
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उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सख्ती दिखाते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने दो प्रमुख फूड कंपनियों पर कार्रवाई की है. अथॉरिटी ने स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड और मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. CCPA ने पाया कि दोनों कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में '100%' शब्द का इस्तेमाल इस तरह कर रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक संरचना और गुणवत्ता को लेकर भ्रमित किया जा रहा था.

भ्रामक विज्ञापनों पर CCPA की सख्ती

मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली अथॉरिटी ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने उत्पादों की पैकेजिंग, वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऐसे सभी दावे तुरंत हटाएं. यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश, 2022 के तहत की गई है.

स्टोरिया के '100% नारियल पानी' दावे पर उठे सवाल

CCPA ने स्टोरिया फूड्स के उन विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' और '100% अनार', '100% आम', '100% मिक्स्ड फ्रूट' जैसे दावे किए गए थे. ये दावे कंपनी की वेबसाइट, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट, ब्लिंकिट, जियोमार्ट और जेप्टो पर भी दिखाई दिए.

जांच के दौरान पाया गया कि उत्पाद में केवल 9.6 प्रतिशत कोकोनट वॉटर कंसंट्रेट था, जिसे पानी के साथ मिलाकर तैयार किया गया था. 'रीकॉन्स्टिट्यूटेड' शब्द को पैकेजिंग पर बेहद छोटे अक्षरों में लिखा गया था. इसके अलावा उत्पाद में प्रिजर्वेटिव INS 202 का इस्तेमाल भी किया गया था, जिससे '100% नेचुरल' होने का दावा कमजोर पड़ गया.

इंग्लिश ओवन ब्रेड के दावों पर भी कार्रवाई

CCPA ने 'इंग्लिश ओवन' ब्रांड की ब्रेड के विज्ञापनों की भी जांच की. इनमें '100% आटा ब्रेड', '100% होल व्हीट ब्रेड' और '100% होल-व्हीट आटे से भरपूर' जैसे दावे किए गए थे. इन विज्ञापनों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 50 लाख से अधिक बार देखा गया था.

सुनवाई के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके ब्रेड उत्पादों में केवल 87 प्रतिशत होल व्हीट आटा इस्तेमाल किया गया था. अथॉरिटी ने पाया कि यह आंकड़ा '100%' के दावे से मेल नहीं खाता.

'जीरो मैदा' और '100% होल व्हीट' के दावे पर आपत्ति

CCPA ने पैकेजिंग पर '100% होल व्हीट ब्रेड' और 'जीरो मैदा' जैसे दावों के एक साथ इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया. अथॉरिटी का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा बन सकती है कि उत्पाद पूरी तरह गेहूं के आटे से बना है.

कंपनी ने सुनवाई के दौरान यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की दोहरी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकती है.

तकनीकी दलीलों को CCPA ने किया खारिज

मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज ने तर्क दिया कि '100% आटा' का आशय केवल यह बताना था कि उत्पाद में उपयोग किया गया अनाज गेहूं है. हालांकि CCPA ने इस दलील को खारिज कर दिया.

अथॉरिटी ने कहा कि किसी भी विज्ञापन का मूल्यांकन एक सामान्य और समझदार उपभोक्ता के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए. यदि कोई दावा उपभोक्ता को भ्रमित करता है, तो बाद में दी गई तकनीकी व्याख्याएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं.

उपभोक्ताओं को गुमराह करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई

CCPA ने स्पष्ट किया कि उत्पाद की गुणवत्ता, संरचना, पोषण या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को तथ्यात्मक, प्रमाणित और भ्रामकता से मुक्त होना चाहिए. अथॉरिटी ने कहा कि यदि किसी भी उत्पाद के बारे में उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है, तो भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

 


अमेरिका में बढ़ा भारत में बने स्मार्टफोन का दबदबा, Apple के दम पर 47% उछला निर्यात

भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
BWHindia

भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. अप्रैल 2026 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात सालाना आधार पर 47.24 फीसदी बढ़कर 2.43 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. इस वृद्धि में एप्पल (Apple) की अहम भूमिका रही है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला आयात शुल्क लाभ समाप्त हो चुका है.

अमेरिकी बाजार में मजबूत हुई भारत की हिस्सेदारी

अप्रैल 2025 में भारत ने अमेरिका को 1.65 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात किए थे, जो एक साल बाद बढ़कर 2.43 अरब डॉलर से अधिक हो गए. अप्रैल 2026 में अमेरिका को भारत के कुल 8.47 अरब डॉलर के निर्यात में अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 29 फीसदी रही. वहीं, अमेरिका के कुल स्मार्टफोन आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है.

Apple की रणनीति ने बढ़ाई निर्यात की रफ्तार

अमेरिकी बाजार के लिए भारत से स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने में एप्पल की रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. पिछले कुछ महीनों से यह आशंका जताई जा रही थी कि चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला शुल्क लाभ खत्म होने के बाद कंपनी की उत्पादन शिफ्टिंग की गति धीमी पड़ सकती है. हालांकि, ताजा आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अब भी भारत को अपने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

वित्त वर्ष 2025-26 में 86 फीसदी बढ़ा निर्यात

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात 10.56 अरब डॉलर से बढ़कर 19.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह सालाना आधार पर 86.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है. इस अवधि में भारत में निर्मित iPhone के कुल निर्यात मूल्य का लगभग 78 फीसदी हिस्सा अमेरिका भेजा गया. एप्पल के अलावा लेनेवो (Lenovo) जैसी कंपनियां भी अमेरिका को भारत से स्मार्टफोन निर्यात कर रही हैं.

ड्यूटी लाभ खत्म होने के बाद भी बनी बढ़त

ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में चीन से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर 20 फीसदी शुल्क लगाया गया था, जबकि भारत से आने वाले स्मार्टफोन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं था. इससे भारत को बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ मिला. हालांकि बाद में अमेरिका और चीन के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत शुल्क में कटौती की गई और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस शुल्क को अवैध करार दे दिया. इसके बाद भारत और चीन दोनों से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर शुल्क का अंतर समाप्त हो गया.

इसके बावजूद भारत लागत और सरकारी प्रोत्साहनों के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र बना हुआ है.

भारत में उत्पादन बढ़ाने पर कायम है एप्पल

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एप्पल अपने वैश्विक iPhone उत्पादन का 30 फीसदी से अधिक हिस्सा भारत में तैयार कर सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह हिस्सेदारी 25 फीसदी थी.

वित्त वर्ष 2026-27 तक कंपनी के भारत में विदेशी मुद्रा के लिहाज से नेट पॉजिटिव होने की संभावना भी जताई जा रही है. इसके लिए कंपनी को भारत में बनने वाले iPhone उत्पादन का करीब 85 फीसदी निर्यात करना होगा. वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 83 फीसदी रहा था.

अगले कुछ वर्षों में दोगुना हो सकता है उत्पादन

विश्लेषकों का मानना है कि यदि एप्पल मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखता है, तो अगले तीन वित्त वर्षों में भारत में उसका उत्पादन मूल्य दोगुना हो सकता है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच भारत में करीब 70 अरब डॉलर का उत्पादन मूल्य हासिल किया है. भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है.