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TVS ग्रुप में उत्तराधिकार की जंग, कारोबारी परिवारों में पहले भी बंट चुकी हैं कंपनियां
वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर विवाद ने फिर चर्चा में लाए कारोबारी घरानों के पारिवारिक झगड़े, रैनबैक्सी से लेकर दूसरे बड़े उद्योग समूहों तक ऐसे विवादों ने बदली कंपनियों की कमान और कारोबार की दिशा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के बड़े कारोबारी घरानों में उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है. कई परिवारों में कारोबार की कमान किसके हाथ में होगी और संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा, इस सवाल पर मतभेद सामने आते रहे हैं. अब मल्टी-बिलियन डॉलर TVS ग्रुप के प्रमुख वेणु श्रीनिवासन के परिवार में उत्तराधिकार को लेकर विवाद चर्चा में है. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि कारोबारी परिवारों में पारिवारिक मतभेद कंपनियों के नियंत्रण और भविष्य को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं.
TVS ग्रुप: परिवार में दो पक्षों के बीच मतभेद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TVS ग्रुप के प्रमुख वेणु श्रीनिवासन के परिवार में उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद सामने आया है. इस मामले में एक ओर वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन वेणु हैं, जबकि दूसरी ओर उनकी पत्नी मल्लिका श्रीनिवासन, जो TAFE की चेयरपर्सन हैं, और बेटी लक्ष्मी वेणु हैं, जो सुंदरम-क्लेटन की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. इस विवाद का आगे क्या असर होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. हालांकि, भारतीय कारोबारी इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब परिवार के भीतर नियंत्रण को लेकर मतभेदों ने कंपनियों के नेतृत्व और कारोबार की संरचना को प्रभावित किया.
रैनबैक्सी: पिता और बेटे के बीच नियंत्रण की लड़ाई
रैनबैक्सी का इतिहास भी कारोबारी परिवार में उत्तराधिकार और कंपनी के नियंत्रण को लेकर हुए विवाद का उदाहरण है. 1980 के दशक में मोहन सिंह ने अपना कारोबार अपने तीन बेटों- परविंदर, मंजीत और अनलजीत- के बीच बांट दिया था. रैनबैक्सी की जिम्मेदारी परविंदर सिंह को मिली. उनके दोनों छोटे भाइयों की इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी की चर्चा रही, हालांकि यह खुलकर सामने नहीं आई.
बाद में मोहन सिंह और उनके बेटे परविंदर के बीच रैनबैक्सी के नियंत्रण को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो गए. 1999 में कंपनी के बोर्ड स्तर पर हुए घटनाक्रम के बाद परविंदर सिंह ने कंपनी की कमान अपने हाथ में ले ली.
परविंदर सिंह के बेटे शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह भी आगे चलकर रैनबैक्सी के कारोबार से जुड़े. इस तरह कंपनी का इतिहास दिखाता है कि पारिवारिक कारोबार में उत्तराधिकार का सवाल केवल संपत्ति के बंटवारे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कंपनी के नियंत्रण और नेतृत्व को भी प्रभावित कर सकता है.
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