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महादेव घोटाले में नया मोड़: जेल में बंद विकास गर्ग की कंपनी ने अमेरिका में गिरवी रखी संपत्ति

महादेव घोटाले का शिकंजा Ebix पर कसने के बीच Eraaya ने अमेरिकी शेयर बाजारों से 12.6 मिलियन डॉलर के मॉर्गेज की जानकारी छिपाई. प्रवर्तन निदेशालय के लिखित आदेश के बावजूद 12.6 मिलियन डॉलर का यह कर्ज कंपनी के चेयरमैन विकास गर्ग की गिरफ्तारी के बाद लिया गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पलक शाह

महादेव सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़ा एक सनसनीखेज नया मामला सामने आया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपत्तियों को स्थानांतरित करने की चौंकाने वाली कार्रवाई की गई है. Ebix Inc. और Eraaya Lifespaces के हाई-प्रोफाइल चेयरमैन विकास गर्ग जब रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं, उसी दौरान उनके कॉर्पोरेट साम्राज्य ने अपनी सबसे कीमती संपत्ति को गुपचुप तरीके से गिरवी रख दिया. अटलांटा के जॉन्स क्रीक में स्थित कंपनी के 17 एकड़ में फैले विशाल कॉर्पोरेट मुख्यालय को 12.6 मिलियन डॉलर के भारी-भरकम कर्ज के लिए गिरवी रखा गया है.

भारत के ED का कहना है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध कंपनी Ebix को महादेव सट्टेबाजी से मिले पैसों का इस्तेमाल करके खरीदा गया था और इसमें शामिल लोगों ने हवाला नेटवर्क के जरिए कॉर्पोरेट साम्राज्य खड़ा किया. Eraaya Lifespaces भारत में सूचीबद्ध कंपनी है, जिसका संबंध गर्ग से है और ED ने इसकी सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है.

सीमा पार संपत्तियों से जुड़ा यह हालिया घटनाक्रम ED की ओर से 5 जून, 2026 को जारी स्पष्ट और प्राथमिकता वाले अनंतिम कुर्की आदेश (संख्या 16/2026) का सीधे उल्लंघन करता है. इस आदेश के तहत 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को फ्रीज किया गया था, जिसमें विशेष रूप से Ebix में Eraaya की हिस्सेदारी को निशाना बनाया गया था. अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस कंपनी का अधिग्रहण पूरी तरह से कुख्यात SkyExchange नेटवर्क से उत्पन्न जुए के अवैध धन से किया गया था, जिसे दुबई के हवाला नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाया गया.

जॉर्जिया में आधी रात को हुआ सौदा

भारतीय एजेंसियों की ओर से लिखित कानूनी आदेश जारी कर Ebix के नेतृत्व को चेतावनी दी गई थी कि वे किसी भी तरह की बिक्री, हस्तांतरण, संपत्ति के अधिकारों में बदलाव या उस पर किसी प्रकार का ग्रहणाधिकार बनाने की अनुमति न दें. इसके बावजूद अमेरिका में कंपनी के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से कार्रवाई की.

4 अगस्त, 2026 को, गर्ग को दिल्ली स्थित उनके आवास से नाटकीय तरीके से गिरफ्तार किए जाने के ठीक तीन सप्ताह बाद, Ebix के अमेरिकी प्रेसिडेंट गगन सेठी ने कैलिफोर्निया स्थित ऋणदाता Velocity Commercial Capital LLC के साथ कानूनी रूप से बाध्यकारी 'Deed to Secure Debt' पर हस्ताक्षर किए.

12 अगस्त को जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में डीड बुक 70417 के तहत दर्ज इन दस्तावेजों से पता चलता है कि Ebix ने अपने प्रतिष्ठित 1 Ebix Way कैंपस को 'अपरिवर्तनीय और बिना किसी शर्त' के मॉर्गेज पर रख दिया. इससे भी गंभीर बात यह है कि Ebix ने अमेरिकी ऋणदाता को भरोसा दिलाया कि उसके पास 'संपत्ति को गिरवी रखने का पूरा अधिकार' है. इस दौरान कंपनी ने भारत में उसके खिलाफ लगाए गए करोड़ों डॉलर के आपराधिक प्रतिबंध का कोई उल्लेख नहीं किया.

जब्ती से पहले संपत्तियों से पैसा निकालने की कोशिश

12.6 मिलियन डॉलर का यह ऋण, जिसके तहत संपत्ति वर्ष 2056 तक गिरवी रहेगी, इमारत से होने वाली किराये की पूरी आय भी कैलिफोर्निया स्थित ऋणदाता को सौंप देता है. इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नई मिली रकम में से 11.5 मिलियन डॉलर का इस्तेमाल तुरंत पहले से मौजूद एक ग्रहणाधिकार को चुकाने में किया गया. यह ग्रहणाधिकार बड़े निवेशकों Watch Hill और Melanie Lane के पास था, जिन्होंने Ebix और Eraaya दोनों में निवेश किया था.

भारतीय जांचकर्ताओं के लिए इस कदम का समय और इसका उद्देश्य बेहद चिंताजनक है. अटलांटा स्थित कैंपस को भारी कर्ज के बदले गिरवी रखकर कंपनी प्रभावी रूप से इस भौतिक संपत्ति का मूल्य कम कर रही है. अमेरिकी मुख्यालय से निकलने वाला हर डॉलर भारतीय सरकार के लिए वसूली की संभावित रकम को कम करता है, यदि अदालतें अंततः संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देती हैं.

मामले को और गंभीर बनाते हुए, इस संपत्ति को बेचने की तैयारी भी तेजी से चल रही है. कैंपस को ब्रोकर Cresa के जरिए चुपचाप बिक्री के लिए सूचीबद्ध किया गया है. बताया जा रहा है कि हेल्थकेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Emory Healthcare इसे खरीदने की प्रतीक्षा कर रही है. उसका जॉन्स क्रीक अस्पताल इस संपत्ति के ठीक बगल में स्थित है.

कॉर्पोरेट सच्चाई छिपाने की कोशिश और जमानत पर संकट

अमेरिका में संपत्ति के दस्तावेज इस लेनदेन को सार्वजनिक रूप से उजागर कर रहे हैं, लेकिन Eraaya Lifespaces ने भारतीय शेयर बाजारों में इस बारे में पूरी तरह चुप्पी साध रखी है. कंपनी ने 12.6 मिलियन डॉलर के मॉर्गेज की जानकारी भारतीय नियामकों और सार्वजनिक शेयरधारकों से छिपाई है और अनिवार्य खुलासे करने में पूरी तरह विफल रही है.

इस छिपे हुए कर्ज में एक गंभीर जोखिम भी है. अमेरिकी मॉर्गेज समझौते में कहा गया है कि अधिकारियों की ओर से किसी भी तरह की 'कुर्की या इसी तरह की प्रक्रिया' तत्काल डिफॉल्ट की स्थिति पैदा करेगी. यदि ED अटलांटा स्थित कैंपस की जब्ती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की कोशिश करता है, तो Velocity Commercial Capital को कर्ज की पूरी रकम तत्काल वापस मांगने का कानूनी अधिकार मिल सकता है. इससे संपत्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल कानूनी लड़ाई छिड़ सकती है.

इस अनधिकृत वित्तीय कार्रवाई के खुलासे से भारतीय अदालतों में बड़ा विवाद खड़ा होने की आशंका है. दिल्ली BJP के आर्थिक प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक गर्ग फिलहाल जमानत पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. हालांकि, जमानत संबंधी दिशानिर्देशों के तहत न्यायाधीशों को यह विचार करना होता है कि क्या आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या अवैध धन से अर्जित संपत्तियों को बेच सकता है.

जेल में रहते हुए उनकी कॉर्पोरेट कंपनियों की ओर से फ्रीज की गई संपत्तियों का मूल्य कम किए जाने के सबूत सामने आने से गर्ग की जमानत की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है. चूंकि भारत का ED का आदेश जॉर्जिया के भूमि रजिस्ट्रार को सीधे तौर पर संपत्ति से जुड़े लेनदेन रोकने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, इसलिए नई दिल्ली को अब इस सौदे को रोकने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (MLAT) को तेजी से सक्रिय करना होगा, ताकि महादेव सट्टेबाजी से हासिल अवैध धन हमेशा के लिए अमेरिकी वित्तीय प्रणाली में गायब न हो जाए.

लंदन की साजिश और इसका मुख्य रणनीतिकार

इस कॉर्पोरेट अधिग्रहण की तकनीकी भाषा के पीछे लंदन में हुई कई गोपनीय और बड़े दांव वाली बैठकों की कहानी छिपी है. यहीं दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग की मुलाकात दुबई स्थित कुख्यात हवाला कारोबारी हरि शंकर तिबरेवाल से हुई थी. आरोप है कि तिबरेवाल महादेव ऑनलाइन बुक साम्राज्य के प्रमुख स्तंभों में से एक था.

तिबरेवाल केवल पैसों का लेनदेन नहीं कर रहा था, बल्कि वह इस पूरी वित्तीय व्यवस्था का मुख्य रणनीतिकार था. ED के रिकॉर्ड में बार-बार समन जारी किए जाने के बाद भी उसके नाम के आगे 'पेश नहीं हुए' दर्ज है. इसके बावजूद जांचकर्ताओं ने कोलकाता में जन्मे इस कारोबारी को सट्टेबाजी ऐप से लेकर कॉर्पोरेट बोर्डरूम तक धन पहुंचाने की प्रक्रिया के केंद्र में रखा है.

लंदन में हुई रणनीतिक बैठकों के दौरान गर्ग और तिबरेवाल ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की. इसके तहत SkyExchange सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से होने वाली भारी अवैध कमाई का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार का विस्तार करना और नैस्डैक में सूचीबद्ध एक प्रतिष्ठित अमेरिकी टेक कंपनी का अधिग्रहण करना था.

SkyExchange का मायाजाल और हवाला नेटवर्क

SkyExchange एक बड़े डिजिटल नेटवर्क की तरह काम करता था, जो छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हजारों सट्टेबाजों से रोजाना करोड़ों रुपये जुटाता था. इस कारोबार का पैमाना बेहद बड़ा था. ED की अभियोजन शिकायतों में इस प्लेटफॉर्म का सह-स्वामित्व और सह-प्रचार तिबरेवाल के साथ घोटाले के मुख्य आरोपियों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के पास बताया गया है.

SkyExchange का कारोबार: इस प्लेटफॉर्म से 178 दर्ज सप्ताहों के दौरान हर सप्ताह 22 करोड़ रुपये की कमाई हुई. इस तरह केवल इसी प्लेटफॉर्म से अपराध की कुल आय 3,916 करोड़ रुपये रही.

Lotus365 के साथ तालमेल: गिरीश तलरेजा द्वारा संचालित इस सहयोगी नेटवर्क ने हर महीने 50 करोड़ रुपये और जोड़े.

कुल मिलाकर, यह छाया अर्थव्यवस्था सालाना 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये का ऐसा कारोबार कर रही थी, जिसका आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था. यह किसी वैध मिड-कैप कंपनी के कारोबार के बराबर था.

दुबई से संचालित शेल कंपनियों, मिरर खातों और ऐसे वित्तीय रिकॉर्ड के जटिल नेटवर्क के जरिए, जिनका पता लगाना मुश्किल था, तिबरेवाल ने इस अवैध धन को वैध कॉर्पोरेट पूंजी में बदल दिया. इस पैसे को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) जैसे जटिल वित्तीय माध्यमों से भारत में वापस लाया गया. इसके बाद इस रकम को गर्ग के नियंत्रण वाली सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश किया गया.

13 रुपये के पेनी स्टॉक से 361 मिलियन डॉलर के वैश्विक साम्राज्य तक

इस वित्तीय कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू Justride Enterprises का तेजी से हुआ उभार था. यह एक लगभग अज्ञात पेनी स्टॉक था, जिसके शेयर की कीमत महज 13 रुपये थी. बाद में इसका नाम बदलकर Eraaya Lifespaces कर दिया गया. इसके बाद कंपनी के शेयरों में एक साल के भीतर करीब 6,000 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई और अगस्त 2024 तक इसका भाव लगभग 800 रुपये प्रति शेयर पहुंच गया. इस दौरान यह कथित तौर पर अवैध धन को वैध बनाने का प्रमुख माध्यम बन गई.

इस तरह कृत्रिम रूप से तैयार की गई वित्तीय ताकत का इस्तेमाल करते हुए Eraaya ने कॉर्पोरेट जगत को तब चौंका दिया, जब उसने अमेरिका की एक दिवालियापन अदालत में 361 मिलियन डॉलर की बोली जीतकर Ebix Inc. का अधिग्रहण कर लिया. Ebix कभी बीमा सॉफ्टवेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी थी, लेकिन बाद में दिवालिया हो गई.

यह कॉर्पोरेट जगत में पर्दे के पीछे की सबसे बड़ी चालों में से एक थी. एक अमेरिकी टेक कंपनी का अधिग्रहण लाखों ऐसे ऑनलाइन सट्टेबाजों के पैसों से किया गया, जिन्हें इस कथित वित्तीय नेटवर्क की वास्तविकता का अंदाजा नहीं था. इस तरह रायपुर की गलियों से लेकर अटलांटा के कांच से बने कॉर्पोरेट बोर्डरूम तक फैले अवैध धन के नेटवर्क की कहानी सामने आई.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)

 

 


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