सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन इन शेयरों में बन रहा है कमाई का मौका, दांव लगाकर भर लें झोली!

शेयर बाजार के लिए आज सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन है और आज कुछ शेयरों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं.

Last Modified:
Friday, 20 October, 2023
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शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करने वालों के चेहरे पर खुशी से ज्यादा उदासी दिखाई दे रही है. मार्केट में लगातार गोते लग रहे हैं. गुरुवार को भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. इस दौरान, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 247 अंक फिसलकर 65,629 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 46 अंक गिरकर 19,624 पर पहुंच गया. कल के कारोबार में कई हैवीवेट शेयरों में मंदी देखने को मिली. आज भी बाजार से मिलीजुली प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है. चलिए देखते हैं कि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी आज कौनसे शेयर ट्रेंड में रह सकते हैं. 

MACD के ये हैं संकेत
सबसे पहले बात करते हैं मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) के संकेतों की. MACD ने आज Advanced Research, IRB Infrastructure Developers, Bajaj Auto, New India Assurance, Crisil, HLE Glasscoat और Sun Pharma में तेजी के संकेत दिए हैं. यानी इन शेयरों में आज उछाल की सम्भावना है और मुनाफा कमाने का मौका भी बन रहा है. हालांकि, BW हिंदी आपको सलाह देता है कि शेयर बाजार में निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से परामर्श जरूर कर लें, अन्यथा आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसी तरह, MACD ने कुछ शेयरों में मंदी के भी संकेत दिए हैं, जिसका मतलब है कि इन शेयरों में गिरावट आ सकती है. इस लिस्ट में IndusInd Bank, Indus Towers, KSB, Infibeam Avenues, Kaynes Technology India और Jyothy Labs का नाम शामिल है. लिहाजा इन शेयरों में निवेश को लेकर सावधान रहें.

इन पर भी रखें नजर
अब जानते हैं कि किन शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. Hero MotoCorp, Bajaj Auto, Tata Motors, Maruti Suzuki, Nestle India, Power Grid और Coal India ऐसे शेयर हैं, जिनमें निवेशक पैसा लगा रहे हैं. यानी निवेशकों का इन स्टॉक्स पर विश्वास कायम है. इनमें से कुछ शेयरों ने अपना 52 वीक का हाई लेवल पार कर लिया है और कुछ तेजी से उस तरफ बढ़ रहे हैं. इसी तरह, कुछ शेयरों में बिकवाली का दबाव भी नजर आ रहा है. जिसका मतलब है कि निवेशक इन शेयरों का साथ छोड़ रहे हैं और उनमें गिरावट आ रही है. इस लिस्ट में Adani Gas, Navin Fluorine, Delta Corp और V Mart Retail का नाम शामिल है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है).


अडानी एनर्जी का मुनाफा 148% उछला, रेवेन्यू 10,076 करोड़ रुपये के पार; कर्ज में भी बढ़ोतरी

कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे और रेवेन्यू की मजबूत वृद्धि के साथ खर्च और कर्ज में बढ़ोतरी भी अहम पहलू हैं. निवेशकों के लिए कंपनी की आय में आगे होने वाली वृद्धि, खर्च पर नियंत्रण और कर्ज के स्तर में बदलाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
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अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (Adani Energy Solutions) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 148 फीसदी बढ़कर 1,323 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल की समान अवधि में कंपनी ने 534 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू भी 53 फीसदी बढ़कर 10,076 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, मुनाफे और आय में बढ़ोतरी के साथ कंपनी के कुल खर्च और बकाया कर्ज में भी इजाफा हुआ है.

पिछली तिमाही के मुकाबले भी बढ़ा मुनाफा

अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का प्रदर्शन पिछली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर रहा. जून 2026 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 1,149 करोड़ रुपये था, जो सितंबर तिमाही में करीब 15 फीसदी बढ़कर 1,323 करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में ऑपरेशन से रेवेन्यू करीब 4 फीसदी बढ़कर 9,711 करोड़ रुपये से 10,076 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर करीब 51 फीसदी बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये रही. पिछले साल की समान तिमाही में यह 6,767 करोड़ रुपये थी. वहीं, कंपनी का टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) 746 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,767 करोड़ रुपये हो गया.

कंपनी का कुल खर्च 54% बढ़ा

कंपनी की आय और मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ खर्च भी तेजी से बढ़ा है. सितंबर तिमाही में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का कुल खर्च सालाना आधार पर 54 फीसदी बढ़कर 8,756 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की समान अवधि में यह 5,688 करोड़ रुपये था.

बिजली खरीदने पर कंपनी का खर्च दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,244 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 1,601 करोड़ रुपये था. वहीं, निर्माण से जुड़े खर्च में भी बढ़ोतरी हुई. यह 1,625 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,256 करोड़ रुपये हो गया.

इसके अलावा, कंपनी का ब्याज खर्च 35 फीसदी बढ़कर 1,180 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल की सितंबर तिमाही में यह 872 करोड़ रुपये था. डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन का खर्च भी 509 करोड़ रुपये से बढ़कर 601 करोड़ रुपये हो गया.

पहली छमाही में मुनाफा 136% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की. इस अवधि में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 136 फीसदी बढ़कर 2,472 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का मुनाफा 1,046 करोड़ रुपये था.

पहली छमाही में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 47 फीसदी बढ़कर 19,787 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 13,415 करोड़ रुपये था. इस दौरान कुल आय 13,793 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,092 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, टैक्स से पहले का मुनाफा 1,404 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,208 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

छह महीने में 2,622 करोड़ रुपये बढ़ा कर्ज

अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के बकाया कर्ज में भी बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2026 के अंत तक कंपनी पर कुल बकाया कर्ज 51,520 करोड़ रुपये था. मार्च 2026 के अंत में यह 48,898 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था. इस तरह छह महीने में कंपनी के कुल बकाया कर्ज में 2,622 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई.

कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे और रेवेन्यू की मजबूत वृद्धि के साथ खर्च और कर्ज में बढ़ोतरी भी अहम पहलू हैं. निवेशकों के लिए कंपनी की आय में आगे होने वाली वृद्धि, खर्च पर नियंत्रण और कर्ज के स्तर में बदलाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.
 


AI एजेंट्स से बैंकों पर साइबर हमले का खतरा, RBI ने जारी की सख्त गाइडलाइंस; जानें क्या बदलेंगे नियम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने के बीच केंद्रीय बैंक ने एडमिन एक्सेस, पासवर्ड, API और रियल-टाइम निगरानी को लेकर सख्ती बरतने को कहा है.

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और पेमेंट कंपनियों को साइबर सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. अब पासवर्ड लीक होने या सिस्टम में अनधिकृत पहुंच का पता चलने पर फॉरेंसिक जांच पूरी होने तक संबंधित टेक्नोलॉजी सिस्टम को असुरक्षित मानना होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने के बीच केंद्रीय बैंक ने एडमिन एक्सेस, पासवर्ड, API और रियल-टाइम निगरानी को लेकर सख्ती बरतने को कहा है.

AI एजेंट्स से बढ़ा साइबर हमलों का खतरा

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऑटोनॉमस टूल्स का इस्तेमाल कर सिस्टम की कमजोरियां तलाशने और उनका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. ये टूल्स अपने स्तर पर कमांड चला सकते हैं और सुरक्षा खामियों की पहचान करने से लेकर संवेदनशील डेटा तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं.

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने 15 अक्टूबर को जारी चेतावनी में साइबर हमलों में AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर आगाह किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, AI टूल्स की मदद से साइबर अपराधियों के लिए हमले की तैयारी और उसे अंजाम देने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है. पहले जिन गतिविधियों में कई दिन लगते थे, उन्हें अब कुछ ही घंटों में पूरा करने का खतरा बढ़ गया है.

करीब 20 वित्तीय संस्थान बने निशाना

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में करीब 20 वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं. इन हमलों में कथित तौर पर पार्टनर बैंकों के चोरी किए गए पासवर्ड और पेमेंट से जुड़े एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) की कमजोरियों का फायदा उठाया गया.

चिंता की बात यह है कि कुछ कंपनियों को अपने सिस्टम में हुई घुसपैठ की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी. रिपोर्ट में बताया गया है कि AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों ने भी ऐसे मामलों की जानकारी दी, जिनमें AI सिस्टम ने निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर लाइव बिजनेस रिकॉर्ड, निजी जानकारियों और गोपनीय डेटा तक पहुंच बनाई.

RBI ने 19 अक्टूबर को जारी की एडवाइजरी

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे के बीच RBI ने 19 अक्टूबर को बैंकों, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स और अपने नियामकीय दायरे में आने वाली अन्य वित्तीय संस्थाओं के लिए एडवाइजरी जारी की. इसमें कहा गया है कि किसी सिस्टम के क्रेडेंशियल्स लीक होने या अनधिकृत पहुंच की पुष्टि होने पर उसे तब तक कॉम्प्रोमाइज्ड यानी असुरक्षित माना जाए, जब तक फॉरेंसिक जांच से उसकी सुरक्षा को लेकर संतोषजनक पुष्टि न हो जाए.

केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों को अपने आंतरिक सिस्टम के साथ थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स की साइबर सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करने को कहा है. इसका उद्देश्य संभावित कमजोरियों की पहचान कर डेटा चोरी और अनधिकृत वित्तीय लेनदेन के जोखिम को कम करना है.

बैंकों को लागू करने होंगे ये सुरक्षा उपाय

RBI की एडवाइजरी के तहत वित्तीय संस्थानों को कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी.

1. एडमिन इंटरफेस की इंटरनेट तक पहुंच होगी सीमित: बैंकों और वित्तीय कंपनियों को अपने मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेटिव इंटरफेस को सार्वजनिक इंटरनेट की सीधी पहुंच से हटाना होगा, ताकि बाहरी हमलावर इनका आसानी से फायदा न उठा सकें.

2. एडमिन एक्सेस पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन: एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सेस के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) लागू करना होगा. क्लाउड और बैकएंड सिस्टम तक पहुंच केवल अधिकृत कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप दी जानी चाहिए.

3. लीक हुए पासवर्ड की पहचान और बदलाव: संस्थानों को सोर्स कोड, कोड रिपॉजिटरी, कॉन्फिगरेशन फाइल्स, क्लाइंट ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज की जांच करनी होगी. जहां भी लीक हुए पासवर्ड या अन्य क्रेडेंशियल्स मिलें, उन्हें तुरंत बदलने या हटाने की व्यवस्था करनी होगी.

4. पुराने और गैर-जरूरी API बंद करने होंगे: सभी API की सूची तैयार कर उनकी समीक्षा करनी होगी. पुराने, अप्रयुक्त और केवल टेस्टिंग के लिए बनाए गए API या अकाउंट्स को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इनके जरिए सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश का खतरा कम किया जा सके.

API की रियल-टाइम निगरानी पर जोर

RBI ने वित्तीय संस्थानों को API की निगरानी मजबूत करने को भी कहा है. इसके लिए ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे, जो असामान्य ऑटोमेटेड रिक्वेस्ट, बड़े पैमाने पर डेटा निकाले जाने और संदिग्ध अकाउंट रजिस्ट्रेशन जैसी गतिविधियों का समय रहते पता लगा सकें.

रियल-टाइम मॉनिटरिंग से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर संभावित नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की जानकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर RBI के केंद्रीय कार्यालय और संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को देनी होगी. संस्थानों को CERT-In की सलाह का पालन करने और अपने साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है.

बैंकों और ग्राहकों के लिए क्यों अहम हैं ये निर्देश?

डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और API आधारित वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. किसी बैंक या पेमेंट कंपनी के सिस्टम में सेंध लगने से ग्राहकों की निजी जानकारी, वित्तीय डेटा और लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं.

RBI के इन निर्देशों का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों को संभावित साइबर हमलों के प्रति अधिक सतर्क बनाना, सुरक्षा खामियों को समय रहते दूर करना और डेटा ब्रीच की स्थिति में जवाबदेही सुनिश्चित करना है. AI आधारित हमलों के बढ़ते खतरे के बीच बैंकों के लिए केवल सुरक्षा सॉफ्टवेयर लगाना ही नहीं, बल्कि एक्सेस कंट्रोल, पासवर्ड प्रबंधन और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी करना भी जरूरी होगा.
 


बाजार में आज लौटेगी रौनक या जारी रहेगी गिरावट? गिफ्ट निफ्टी उछला, क्रूड $113 पार; इन शेयरों पर रखें नजर

गुरुवार, 22 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 फीसदी गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 123.70 अंक यानी 0.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,687.65 पर बंद हुआ.

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को तीन दिन से जारी गिरावट के बाद रिकवरी की उम्मीद है. गिफ्ट निफ्टी करीब 160 अंकों की तेजी के साथ 22,850 के पार पहुंच गया है, जो घरेलू बाजार में बढ़त के साथ कारोबार शुरू होने का संकेत दे रहा है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. आज बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय हो सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, JSW स्टील समेत कई शेयरों पर रहेगी.

गुरुवार को सेंसेक्स 460 अंक टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे बंद

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई. भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों ने बिकवाली की. कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 फीसदी गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 123.70 अंक यानी 0.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,687.65 पर बंद हुआ.

कारोबार के दौरान निफ्टी 22,600 के स्तर से भी नीचे फिसल गया था. हालांकि, दिन के निचले स्तर 22,554.85 से कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा.

गिफ्ट निफ्टी में तेजी, बाजार को मिल सकता है सहारा

शुक्रवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 160 अंकों की तेजी के साथ 22,850 के ऊपर कारोबार करता नजर आया. इससे घरेलू बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ होने की उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इस तेजी को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ रहा है. ऐसे में निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं और कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में बिकवाली

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कंपनियों के बढ़ते खर्च को लेकर चिंता और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के कारण गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. नैस्डैक कंपोजिट 2.6 फीसदी और S&P 500 करीब 1.2 फीसदी गिरकर बंद हुआ. इंटेल, AMD, माइक्रॉन और एनवीडिया जैसे प्रमुख टेक शेयरों में भी दबाव देखने को मिला.

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही. शुरुआती कारोबार में चीन का शंघाई कंपोजिट 1.47 फीसदी, जापान का निक्केई करीब 1.7 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे थे. वैश्विक बाजारों में यह कमजोरी भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है.

ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर के पार, निवेशकों की बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. सुबह के कारोबार में यह 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी उछला. महंगे कच्चे तेल का असर भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. इससे बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित होने की आशंका है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्रवार को इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और JSW स्टील के शेयरों में तिमाही नतीजों के चलते हलचल देखने को मिल सकती है. इसके अलावा कोफोर्ज, इंडसइंड बैंक और जिंदल स्टील भी फोकस में रहेंगे. वहीं, कोलगेट-पामोलिव के उम्मीद से कमजोर नतीजों, स्विगी के तिमाही घाटे और HPCL के घाटे से मुनाफे में लौटने का असर संबंधित शेयरों पर पड़ सकता है. सैजिलिटी के मुनाफे में 13 फीसदी की बढ़त भी निवेशकों के लिए अहम रहेगी. बाजार की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के IPO पर भी होगी, जिसमें बोली लगाने का शुक्रवार को आखिरी दिन है.

Jio Platforms IPO को दूसरे दिन 5.57 गुना सब्सक्रिप्शन

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को गुरुवार को बोली के दूसरे दिन तक कुल 5.57 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी में इश्यू 13.29 गुना सब्सक्राइब हुआ. आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी के बीच शुक्रवार को भी इस पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है.

FII की बिकवाली, DII ने खरीदे शेयर

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अक्टूबर को 3,458 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 2,891 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


हरि शंकर तिबरेवाल: ED की चार्जशीट में आरोपी नंबर 24 ने विदेश से BW Businessworld को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया

पहले ईमेल में हरि शंकर तिबरेवाल ने कहा कि उन्हें ईडी की फाइलिंग पर रिपोर्टिंग से कोई आपत्ति नहीं है, फिर उन्होंने लेख हटाने की मांग की. अप्रैल 2024 में पहली बार समन जारी होने के बाद से वह ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं. BW के पास उनसे पूछने के लिए कुछ सवाल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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पलक शाह 

ईडी के दो समन पर पेश नहीं हुए, BW को दी समयसीमा

हरि शंकर तिबरेवाल अप्रैल 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पहली बार समन जारी किए जाने के बाद से उसके सामने पेश नहीं हुए हैं. एजेंसी ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में मनी लॉन्ड्रिंग अभियोजन में उन्हें आरोपी नंबर 24 बताया है. ईडी ने तिबरेवाल को "सिंडिकेट का सरगना श्री हरि शंकर तिबरेवाल (HST), स्काईएक्सचेंज का मालिक" कहा है. ईडी का कहना है कि HST का स्काईएक्सचेंज और महादेव ऐप साझेदारी में चलाए जाते थे और ये "एक ही आपराधिक उद्यम का हिस्सा" थे.

48 घंटे के भीतर उन्होंने BW Businessworld को एक समयसीमा दी, मांगों की सूची भेजी और ईडी की चार्जशीट तथा अन्य कानूनी दस्तावेजों पर मीडिया की वैध रिपोर्टिंग को लेकर दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की धमकी दी.

इसका निशाना BW की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट "हरि, शंकर, महादेव: स्काईएक्सचेंज के पीछे का रहस्य" है, जिसमें उन दस्तावेजों के आधार पर बताया गया था कि ईडी ने उनके बारे में क्या कहा है, जिन्हें एजेंसी ने अदालत में दाखिल किया है.

समयसीमाएं

तिबरेवाल का पहला ईमेल लेख प्रकाशित होने की दोपहर को आया. इसमें BW को पांच अंश हटाने या दोबारा लिखने, पेज के सर्च प्रीव्यू को ठीक करने, सुधार नोट प्रकाशित करने और उठाए गए कदमों की "लिखित पुष्टि" करने के लिए 48 घंटे दिए गए. उन्होंने लिखा कि ये मांगें "दुनिया भर में लेख के हर संस्करण" पर लागू होती हैं.

पूरा लेख ईडी की चार्जशीट पर आधारित है और BW इसे नहीं हटाएगा. BW ने तिबरेवाल का पक्ष बिना किसी संपादन के पूरी तरह प्रकाशित किया है. इसके बाद BW ने ईडी के दस्तावेजों में शामिल मामलों पर उनसे विस्तृत सवाल भी पूछे.

19 अक्टूबर को आए उनके दूसरे ईमेल में मांगें और सख्त हो गईं. उन्होंने BW से लेख को पूरी तरह हटाने की मांग की, जिसमें उसका सर्च प्रीव्यू, सोशल मीडिया प्रीव्यू और "हर कॉपी तथा सिंडिकेटेड संस्करण" शामिल था. उन्होंने इसकी लिखित पुष्टि भी मांगी. उन्होंने एक बयान तैयार किया, जिसके बारे में कहा कि भविष्य में किसी भी रिपोर्ट में BW को इसे "बिना किसी संपादन के पूरी तरह प्रकाशित करना होगा". उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य के किसी लेख में यह बयान शामिल नहीं किया गया या यह कहा गया कि उन्होंने जवाब नहीं दिया, तो उसे "बिना किसी और सूचना के अदालत के सामने रखा जाएगा". उन्होंने लिखा कि वह "BW, उसके संपादकों और लेखक के खिलाफ अपने सभी दीवानी और आपराधिक अधिकार सुरक्षित रखते हैं".

रिपोर्टिंग से नहीं, सिर्फ लेख से आपत्ति

तिबरेवाल के दोनों ईमेल एक-दूसरे के विपरीत हैं.

17 अक्टूबर को उन्होंने लिखा था, "मैं आपसे प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी फाइलिंग में जो कहा है, उसकी रिपोर्टिंग रोकने के लिए नहीं कह रहा हूं." दो दिन बाद उन्होंने लेख हटाने की मांग की.

दोनों में से किसी भी ईमेल में BW की उस रिपोर्ट में किसी तथ्यात्मक गलती की पहचान नहीं की गई है, जिसमें ईडी के दस्तावेजों में कही गई बातों का विवरण दिया गया है. वह इस बात से इनकार नहीं करते कि ईडी ने उन्हें आरोपी नंबर 24 बताया है, उन्हें "सिंडिकेट का सरगना" और "स्काईएक्सचेंज का मालिक" कहा है या स्काईएक्सचेंज को महादेव ऑनलाइन बुक के साथ "एक ही आपराधिक उद्यम का हिस्सा" बताया है.

वह इस बात से भी इनकार नहीं करते कि एजेंसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 22 अप्रैल और 25 अप्रैल 2024 को जारी समन पर पेश नहीं हुए. वह ईडी की ओर से बताए गए आंकड़ों, विदेशों में मौजूद धन और गवाहों के बयानों पर भी सवाल नहीं उठाते. उनकी आपत्ति लेख की प्रस्तुति को लेकर है, न कि ईडी के दस्तावेजों में मौजूद सामग्री को लेकर.

जवाब देने को तैयार, लेकिन शर्तों के साथ

BW के सवाल इन विषयों पर थे:

- स्काईएक्सचेंज के कथित स्वामित्व को लेकर.
- ईडी की ओर से उनसे जुड़ी बताई गई विदेशी फंडिंग, जिसमें टैनो इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज फंड भी शामिल है, जिसे मॉरीशस के वित्तीय नियामक ने सेबी को उनका लाभकारी स्वामित्व वाला फंड बताया था.
- ईडी के उस दावे के बारे में कि जिन कंपनियों में उनके फंड ने निवेश किया, उनके प्रमोटरों ने 30-40 फीसदी रकम नकद "कैशबैक" के रूप में वापस की.
- जेल में बंद ईबिक्स के चेयरमैन विकास गर्ग के साथ लंदन में उनकी कथित मुलाकातों को लेकर.
- ईडी के दो समन पर पेश नहीं होने के बारे में.

तिबरेवाल ने कहा कि वह "सवालों से डरते नहीं हैं" और "अगर आप सौ सवाल पूछेंगे, तो भी हर सवाल का जवाब देंगे". लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी: BW को पहले लेख हटाना होगा और उन्हें "नई प्रश्नावली" भेजनी होगी. तब तक उन्होंने लिखा कि वह "BW को लेख सही ठहराने में मदद करने वाले सवालों" का जवाब नहीं देंगे.

उन्होंने आपत्ति जताई है कि BW ने लेख प्रकाशित करने से पहले उनसे सवाल नहीं पूछे. ईडी के रिकॉर्ड बताते हैं कि अप्रैल 2024 के बाद से वह भारत में एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं. ईडी का कहना है कि वह दुबई में रहते हैं. BW की जानकारी के मुताबिक, वह फिलहाल लंदन में हैं. BW से उनका पहला संपर्क लेख प्रकाशित होने के बाद विदेश से ईमेल के जरिए हुआ.

अदालत की आड़

तिबरेवाल के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी ओर से दिल्ली की अदालतों में मानहानि के दो मुकदमे लंबित हैं. इन मुकदमों में अंतरिम आदेशों के जरिए कुछ मीडिया संस्थानों को उनके बारे में विशिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करने से रोका गया है. अदालतों ने जांचकर्ताओं और अदालतों की ओर से कही गई बातों की रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगाई है और तिबरेवाल ने खुद अपने ईमेल में इस बात को स्वीकार किया है.

दिल्ली के एक प्रमुख समाचार संगठन के वकील ने पहले BW से कहा था, "सफेदपोश अपराधों के आरोपी मीडिया को चुप कराने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उन्हें आड़ मिलती है और उस मीडिया को डराया जाता है, जो उनकी रक्षा करने वाली व्यवस्था पर दबाव डाल सकता है."

तिबरेवाल का बयान

BW ने मूल रिपोर्ट में उनका बयान पूरा प्रकाशित किया है.

एक बार फिर, उनके अनुरोध पर BW उनका बयान पूरा प्रकाशित कर रहा है:

"मैं अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार करता हूं. मुझे किसी भी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है और किसी अदालत ने मुझे फरार या भगोड़ा घोषित नहीं किया है. दिल्ली की अदालतों ने उन दावों के प्रकाशन पर रोक लगाई है कि मैं फरार या भगोड़ा हूं (सिविल मुकदमा संख्या 4242/2024, दिनांक 14.11.2024 का आदेश) और यह भी कहा है कि मुझे 'हवाला कारोबारी' कहना अपने आप में मानहानिकारक है (सिविल मुकदमा DJ ADJ 1212/2025, दिनांक 17.08.2026 का आदेश). BW ने लेख प्रकाशित करने से पहले मुझसे एक भी सवाल नहीं पूछा. मैंने BW से कहा है कि लेख हटाने और नई प्रश्नावली भेजने के बाद मैं उसके सभी सवालों के जवाब दूंगा."

BW का पक्ष

BW अपनी रिपोर्ट पर कायम है, जो ईडी की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेजों पर आधारित है, और इसे नहीं हटाएगा. अपने ईमेल में तिबरेवाल ने कहा है कि BW ने पत्रकारिता के बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया. BW का कहना है कि उसे ईडी की चार्जशीट में आरोपी नंबर 24 से पत्रकारिता का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है.

तिबरेवाल से BW के सवाल अब भी खुले हैं. जब भी वह जवाब देंगे, उन्हें पूरा प्रकाशित किया जाएगा.

तिबरेवाल के खिलाफ ईडी के किसी भी आरोप की सुनवाई के दौरान जांच नहीं हुई है, क्योंकि उन्होंने ईडी के समन का पालन नहीं किया है और वह विदेश में रह रहे हैं, भारत की अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर.

सवाल

1\) ईडी ने आपको पीएमएलए की धारा 50 के तहत 22 अप्रैल 2024 और 25 अप्रैल 2024 को समन जारी किया था. उसके रिकॉर्ड के मुताबिक, आप दोनों ही बार पेश नहीं हुए. क्यों?

आप कहते हैं कि आप निर्दोष हैं और आपको दोषी नहीं ठहराया गया है. आप भारत लौटकर ईडी के सामने अपना बयान देने और सीधे उसके आरोपों का जवाब देने क्यों नहीं आए? आप ईडी के समन से क्यों बच रहे हैं?

2\) आप अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए दिल्ली की भारतीय अदालतों में वादी के रूप में मुकदमे कर रहे हैं, लेकिन रायपुर में भारतीय जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए. आप इस अंतर को कैसे समझाते हैं?

3\) आप फिलहाल कहां रहते हैं और क्या भारत लौटने का इरादा रखते हैं? अगर हां, तो कब? क्या अप्रैल 2024 के बाद से आपको ईडी, पुलिस या किसी अदालत की ओर से कोई और समन, नोटिस या वारंट मिला है? आपने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

4\) ईडी का कहना है कि आप स्काईएक्सचेंज के मालिक थे और इसे महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटरों के साथ "साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार" के तहत चलाया जाता था. क्या आप स्काईएक्सचेंज में किसी भी स्वामित्व, हित या भूमिका से इनकार करते हैं?

5\) प्रशांत बागरी ने ईडी को बताया कि वह 2017 से आपके कर्मचारी हैं. क्या यह सही है? वह आपके लिए क्या काम करते हैं?

6\) क्या आप सौरभ चंद्राकर या रवि उप्पल को जानते हैं? क्या आपने उनके साथ कोई कारोबारी लेन-देन किया है?

7\) मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग ने सेबी को बताया कि टैनो इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज फंड के लाभकारी मालिक आप हैं. क्या यह सही है? अगर नहीं, तो इसका मालिक कौन है?

8\) ईडी का कहना है कि समन जारी होते ही आपने टैनो का लाभकारी स्वामित्व "तुरंत बदल दिया". क्या आपने ऐसा किया और क्यों?

9\) क्या आपके पास AG Dynamic Funds, Forbes EMF, Coeus Global, Ebisu Global, Oyster Bay, Plutus, Zenith Multi Trading DMCC या Ecotek General Trading LLC का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व या नियंत्रण है?

10\) एक गवाह ने ईडी को बताया कि इकोटेक का दर्ज मालिक आपका "बेनामीदार" है. आप इस पर क्या कहेंगे?

11\) ईडी का कहना है कि जेनिथ मल्टी ट्रेडिंग DMCC का पंजीकृत ईमेल पता आपका है. क्या यह सही है?

12\) इन फंड्स ने भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में जिस धन का निवेश किया, वह कहां से आया?

13\) ईडी का कहना है कि आपके संस्थानों से निवेश पाने वाली कंपनियों ने 30-40 फीसदी रकम नकद वापस की. क्या आपको कभी किसी ऐसी कंपनी के प्रमोटरों से सीधे या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए नकद मिला है, जिसमें आपके संस्थानों ने निवेश किया हो?

14\) क्या आपको सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग या टाइगर लॉजिस्टिक्स के प्रमोटरों से नकद मिला था?

15\) गगन गुप्ता के साथ आपका क्या संबंध है? ईडी का कहना है कि वह आपके नकद का प्रबंधन करते थे.

16\) क्या आप 2024 में लंदन में विकास गर्ग और रॉबिन रैना से मिले थे? दो गवाहों ने एक तस्वीर देखकर आपकी पहचान "मुख्य निवेशक" के रूप में की थी. क्या आप मुख्य निवेशक थे?

17\) क्या आपसे जुड़ी संस्थाओं ने एराया लाइफस्पेसेज, विकास लाइफकेयर या श्री गर्ग की अन्य कंपनियों में निवेश किया था? किन शर्तों पर?

18\) श्री गर्ग को "हरि भाई" कहते हुए दर्ज किया गया है. क्या वह आप हैं?

19\) ईडी ने उन प्रतिभूतियों में ₹580.78 करोड़ की राशि फ्रीज की है, जिनका लाभकारी मालिक वह आपको बताता है. क्या आपने इस फ्रीज को चुनौती दी है? अगर ये होल्डिंग्स आपकी हैं, तो आपने इन्हें कैसे हासिल किया?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)


हरि, शंकर, महादेव: स्काईएक्सचेंज के पीछे का रहस्य

सिंडिकेट के कथित सरगना हरि शंकर तिबरेवाल (HST), स्काईएक्सचेंज के मालिक, ED का कहना है कि HST का स्काईएक्सचेंज और महादेव ऐप साझेदारी में संचालित होते थे और ये “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
BWHindia

पलक शाह

दिल्ली की निचली अदालतों में HST ने मीडिया पर पाबंदियां लगवाईं, लेकिन ED की रायपुर की फाइलें एक अलग कहानी बताती हैं. उनके नाम में दो देवताओं के नाम हैं. हरि विष्णु हैं, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं. शंकर शिव हैं, जिन्हें भक्त महादेव भी कहते हैं.

भारत की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की फाइलों में, जो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने वाली एजेंसी है, तीसरा नाम भी इनके पीछे-पीछे आता है.

ED का कहना है कि हरि शंकर तिबरेवाल का सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज, महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटरों के साथ “साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार” के तहत चलाया जाता था. एजेंसी के शब्दों में, इस वजह से यह “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” था. महादेव उस ऐप का नाम है, जो भारत की सबसे बड़ी सट्टेबाजी जांचों में से एक के केंद्र में है. ED का अनुमान है कि इस ऐप से 75,000–80,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ.

उनके आसपास के लोग उन्हें सिर्फ “हरि भाई” कहते थे. एक जेल में बंद कारोबारी के फोन से बरामद ज्योतिषी के व्हाट्सऐप चैट में उनका नाम सिर्फ तीन अक्षरों और जन्मतिथि के रूप में दर्ज है: “HST”. ED की चार्जशीट में वह आरोपी नंबर 24 हैं. ED ने उन्हें दो बार रायपुर बुलाया और दोनों बार रिकॉर्ड में दर्ज है: “पेश नहीं हुए” और 23 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत में उन्होंने ऐसा अदालती आदेश हासिल किया, जिसने मीडिया द्वारा उन्हें संबोधित करने के तरीके पर पाबंदी लगा दी.

रहस्य

दिल्ली की अदालतों ने कुछ समाचार संस्थानों को उनके लिए कुछ विशेष उपाधियों का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. लेकिन ED के अपने दस्तावेज, जिन पर कोई रोक नहीं है, उस व्यक्ति का विस्तार से वर्णन करते हैं, जिसे एजेंसी “HST” कहती है.

एक जज ने HST के दीवानी मानहानि मुकदमे में अंतरिम निषेधाज्ञाओं की पुष्टि की. जज ने पाया कि उन्हें “हवाला कारोबारी”, “शेयर बाजार में हेरफेर की योजना की अहम कड़ी” और “वित्तीय अंडरवर्ल्ड का रहस्यमय दिग्गज” कहने वाले प्रकाशनों ने प्रथम दृष्टया एक ऐसे व्यक्ति को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा, जिसे किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है. अदालत ने यह भी पाया कि बाद में प्रकाशित लेखों में “फरार”, “भगोड़ा” और “भारतीय न्याय से भागा हुआ” जैसे शब्दों का इस्तेमाल उस सामग्री की श्रेणी में आता है, जिसे पहले ही हटाने का आदेश दिया जा चुका था.

तिबरेवाल के लिए यह अपने पक्ष में फैसला था. लेकिन बढ़ती संख्या में समाचार संस्थानों के लिए यह कुछ और बन गया है: एक ऐसा कानूनी औजार, जो उनके बारे में लिखने की कोशिश करने वाले किसी भी मीडिया संस्थान पर मंडराता है.

दिल्ली की एक प्रमुख समाचार एजेंसी के वकील ने BW से कहा, “व्हाइट-कॉलर अपराधों के आरोपी मीडिया की आवाज दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उन्हें संरक्षण मिलता है और उस मीडिया को डराया जाता है, जो उनकी रक्षा करने वाली व्यवस्था पर दबाव बना सकता है.”

HST के मामले में यह आदेश खबर बताने से नहीं रोकता. अदालत ने तिबरेवाल पर रिपोर्टिंग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया. जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, अदालत ने किसी व्यक्ति को अपराधी करार देने और जांचकर्ताओं तथा अदालतों ने जो कहा है, उसकी निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने के बीच अंतर किया और दूसरे विकल्प को नहीं रोका. यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि जांचकर्ताओं ने काफी कुछ कहा है.

फाइलों में दर्ज व्यक्ति

ED ने इस साल महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में दो दस्तावेज दाखिल किए हैं. पहला 5 जून का अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 है. दूसरा सितंबर में रायपुर में दाखिल 375 पन्नों की पूरक अभियोजन शिकायत है. इनमें से कोई भी दस्तावेज तिबरेवाल को कोई मामूली या हाशिये की भूमिका वाला व्यक्ति नहीं बताता.

कुर्की आदेश में उन्हें “HST” कहा गया है.

इसमें कहा गया है कि सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज कोलकाता से हरि शंकर तिबरेवाल द्वारा “संचालित” किया जाता था और इसका “महादेव के प्रमोटरों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के साथ साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार” किया जाता था. इस वजह से यह “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” था. ED के पास तिबरेवाल के खिलाफ पहला सुराग कोलकाता के बर्टोला पुलिस स्टेशन में 2020 में दर्ज FIR थी.

चार्जशीट में उनका नाम आरोपी नंबर 24 के रूप में है और उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया है, जो “कोलकाता का रहने वाला है, लेकिन फिलहाल दुबई में रह रहा है”. ईजमाईट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी से जुड़े हिस्से में एजेंसी ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें दिल्ली की किसी अदालत ने ED की फाइलिंग से नहीं हटाया है: “सिंडिकेट के सरगना श्री हरि शंकर तिबरेवाल (स्काईएक्सचेंज के मालिक).”

दो बार समन, एक बार भी पेश नहीं हुए

दोनों दस्तावेजों में एक ही बात दर्ज है. ED ने PMLA की धारा 50 के तहत तिबरेवाल को 22 अप्रैल 2024 और फिर 25 अप्रैल 2024 को समन भेजा. दोनों बार रिकॉर्ड में लिखा है: “पेश नहीं हुए.”

दस्तावेजों के अनुसार, इसके बाद से भी वह पेश नहीं हुए हैं. तब से एजेंसी ने ऐसी प्रतिभूतियों में 580.78 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं, जिन पर उसका कहना है कि तिबरेवाल का लाभकारी स्वामित्व है. उन्हें आरोपी बनाया गया है, एक कथित कारोबारी साझेदार से जुड़ी 940 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं और छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसके लगभग हर महत्वपूर्ण पन्ने पर उनका नाम है. सूत्रों के मुताबिक, अब उनके लंदन में होने की जानकारी है.

हर हफ्ते 22 करोड़ रुपये

ED ने स्काईएक्सचेंज के कारोबार का अनुमान एक ऐसे लेजर के आधार पर लगाया है, जिसे प्रशांत बागरी से जब्त किया गया था. चार्जशीट के मुताबिक, बागरी 2017 से “श्री हरि शंकर तिबरेवाल के कर्मचारी” थे. इस लेजर में प्लेटफॉर्म के सुपर-एडमिन और एक सप्ताह की कमाई दर्ज थी, जो करीब 22 करोड़ रुपये थी. 2016 से अनुमान लगाते हुए ED ने स्काईएक्सचेंज से हुई कमाई 11,000–12,000 करोड़ रुपये आंकी है. वहीं, महादेव से 75,000–80,000 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया गया है.

एजेंसी का कहना है कि महादेव के प्रमोटरों के पास स्काईएक्सचेंज पर एडमिन आईडी थीं और वे “मास्टर और सुपर आईडी” बना सकते थे. ED के शब्दों में, वे साझेदार थे और “दोनों ऐप्लिकेशन को समान कार्यप्रणाली के साथ समानांतर रूप से चला रहे थे.”

उसी चार्जशीट में इस धन से जुड़ी दुनिया का भी वर्णन है:

- रास अल खैमाह में चंद्राकर की 200 करोड़ रुपये की शादी, जिसका भुगतान नकद में किया गया.
- नागपुर से निजी जेट और एक इवेंट कंपनी को हवाला के जरिए भेजे गए 112 करोड़ रुपये.
- दुबई के अल बरशा इलाके में विला से संचालित कॉल सेंटर, जिनमें हर जगह 50 से 70 लोग रहते थे.

30% कैशबैक

सबसे गंभीर आरोप उन अंशों में हैं, जिनमें ED बताती है कि उसके मुताबिक सट्टेबाजी से आया पैसा शेयर बाजार में कैसे पहुंचा. चार्जशीट में कहा गया है कि तिबरेवाल “भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटरों के साथ सौदे करने के बाद उनमें बड़ी रकम निवेश करते हैं और बदले में संबंधित कंपनियों को कुल निवेश के 30% से 40% तक की राशि नकद कैशबैक के रूप में देनी होती है.” ED के अनुसार, यह नकदी दिल्ली में उनके सहयोगी गगन गुप्ता (“गगन भाई”) और उसके लोगों द्वारा एकत्र की जाती थी.

ED ने इन सौदों के नाम बताए:

सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग: 2022 में 81.9 करोड़ रुपये और 2024 में करीब 130 करोड़ रुपये का निवेश. ED का कहना है कि प्रमोटरों ने “नकद और हवाला चैनलों” के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये और 40 करोड़ रुपये वापस किए.

टाइगर लॉजिस्टिक्स: एक बिचौलिए ने ED को बताया कि उसने प्रमोटर से 5–6 करोड़ रुपये नकद “कैशबैक (कुल निवेश का 30%)” के रूप में लिए और गुप्ता के सहयोगियों को सौंप दिए.

ईजमाईट्रिप: आरोप है कि तिबरेवाल के फ्रंट फंड AG Dynamic Funds ने पिट्टी के साथ पहले से तय सौदे के बाद 59.6 करोड़ रुपये मूल्य के 1.51 करोड़ शेयर खरीदे. पिट्टी ने इन आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया है.

टोयम स्पोर्ट्स: जब्त की गई एक ट्रैकिंग शीट में “हरि” नाम के तहत शेयरों की हिस्सेदारी दर्ज है.

विकास गर्ग की कंपनियां: कथित तौर पर 765.77 करोड़ रुपये गर्ग की कंपनियों में लगाए गए. दिल्ली के कारोबारी गर्ग की इन कंपनियों ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स को खरीदने के लिए इस रकम का इस्तेमाल किया.

फंडों का जाल

सिर्फ अवैध नकदी जमा करने के बजाय, तिबरेवाल ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) मार्ग का इस्तेमाल करते हुए सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को भारतीय शेयर बाजार में डालने के लिए एक व्यवस्था बनाई. छोटे, मिड-कैप और SME में सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इस मार्ग का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया.

ED ने उनसे जुड़ी कई विदेशी कंपनियों और निवेश माध्यमों की सूची दी है:

- फंड: AG Dynamic Funds, Forbes EMF, Coeus Global, Ebisu Global, Oyster Bay, Plutus और मॉरीशस में Tano Investment Opportunities.
- दुबई की कंपनियां: Zenith Multi Trading DMCC, Plus Commodities, Ecotek General Trading, Caterfiled Global और JE Impex.

ED ने इन कंपनियों के पीछे छिपी पहचान का भी ब्योरा दिया है:

इकोटेक: एक गवाह ने ED को बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज 100% मालिक “सिर्फ हरि शंकर तिबरेवाल का बेनामीदार था.”

जेनिथ: ED के मुताबिक, कंपनी का पंजीकृत ईमेल पता तिबरेवाल का है.

टानो: कुर्की आदेश के अनुसार, उन्होंने “समन जारी होने के तुरंत बाद, जांच के बीच में ही लाभकारी स्वामित्व बदल दिया.”

जब ED ने टानो से उसके मालिक की पहचान बताने को कहा, तो उसने चार संस्थाओं के नाम दिए. इन सभी ने समन को नजरअंदाज किया. इसके बाद मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग ने सेबी को पत्र लिखकर तिबरेवाल को लाभकारी मालिक बताया. ED ने उल्लेख किया कि यह पत्र “हर उस कोशिश के बाद आया, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई थी कि हरि शंकर तिबरेवाल लाभकारी मालिक नहीं हैं.”

ताज में “हरि भाई”

चार्जशीट HST को एबिक्स के अधिग्रहण के केंद्र में भी रखती है. दो गवाहों के मुताबिक, 2024 के मध्य में तिबरेवाल लंदन के ताज होटल में विकास गर्ग के साथ बैठकों में शामिल हुए थे. उनकी तस्वीर दिखाए जाने पर उनकी पहचान “सभी संस्थाओं की ओर से मुख्य निवेशक” के रूप में की गई. ED का कहना है कि यात्रा रिकॉर्ड भी इन बयानों का समर्थन करते हैं.

एक अन्य आरोपी सुनील भंडारी ने जांचकर्ताओं को बताया कि गर्ग और तिबरेवाल “साझेदार हैं और स्काईएक्सचेंज से प्राप्त धन का इस्तेमाल करके कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में हेरफेर करने में शामिल हैं.”

गर्ग, जो गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों में से अब भी हिरासत में रहने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं, ने शुरुआत में ED को बताया था कि उन्हें पता था कि तिबरेवाल अवैध सट्टेबाजी में शामिल थे. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कहा कि वह उन्हें नहीं जानते. ED का कहना है कि गर्ग के जब्त आईफोन में फरवरी 2025 की एक कॉल है, जिसमें वह गगन गुप्ता के साथ पैसे पर चर्चा करते हुए “हरि, हरि भाई” का जिक्र करते हैं. फोन में एक ज्योतिषी के साथ “HST” के बारे में व्हाट्सऐप बातचीत भी है, जिसमें जन्मतिथि दर्ज है. ED का कहना है कि यह तिबरेवाल की जन्मतिथि से मेल खाती है.

कोलकाता का नेटवर्क

दुबई से पहले कोलकाता था. ED के कुर्की आदेश के अनुसार, स्काईएक्सचेंज “कोलकाता से श्री हरि शंकर तिबरेवाल द्वारा संचालित” किया जाता था. इस मामले के तार भी इसी शहर से जुड़ते हैं. उनसे जुड़ा पहला मामला 24 सितंबर 2020 को उत्तर कोलकाता के पुराने व्यापारिक इलाके के केंद्र में स्थित बर्टोला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR था. कोलकाता पुलिस ने 29 अक्टूबर 2024 को IPC और पश्चिम बंगाल जुआ एवं पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम के तहत इस मामले में चार्जशीट दाखिल की. (चार्जशीट, बर्टोला FIR का विवरण; कुर्की आदेश.)

ED का कहना है कि पैसा शहर की शेल-कंपनियों के नेटवर्क से होकर गुजरता था.

बैंक में नकद के बदले एंट्री: कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर अमित सरावगी (A-37) ने ED को बताया कि उसने Ability Games Ltd, Swamim Vanijya और Nischaya Trading को “नकद के बदले 150 करोड़ रुपये की बैंक एंट्री” उपलब्ध कराई. चार्जशीट में इन कंपनियों को “हरि शंकर तिबरेवाल की कंपनियां” बताया गया है. उसने कहा कि यह काम उसने संजीव बेरा के निर्देश पर किया, जिसे ED तिबरेवाल का कर्मचारी बताती है. (चार्जशीट, सरावगी का बयान.)

200 करोड़ रुपये की अन्य एंट्री: इसी तरह 200 करोड़ रुपये की अन्य एंट्री सूरज चोखानी (A-25) की कंपनियों में गईं. ED के मुताबिक, चोखानी वह व्यक्ति हैं, जो “हरि शंकर तिबरेवाल की भारतीय कंपनियों का संचालन संभालते हैं.” (चार्जशीट, सरावगी का बयान; गगन गुप्ता के कॉल रिकॉर्ड.)

शेल कंपनियों का नेटवर्क: सरावगी की कंपनियां डमी निदेशकों का इस्तेमाल करती थीं. उनके बयान की रिपोर्टों के मुताबिक, वह 40–50 शेल कंपनियां चलाते थे, डमी निदेशकों को हर महीने 1,500–3,000 रुपये देते थे और 1.25% कमीशन कमाते थे. (चार्जशीट; edatabook, मई 2024.)

फोन रिकॉर्ड: गगन गुप्ता के कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि वह तिबरेवाल, सरावगी, चोखानी और बागरी के लगातार संपर्क में थे. ED इसे स्काईएक्सचेंज के आसपास का अंदरूनी समूह बताती है. (चार्जशीट.)

पैसे का रास्ता: चार्जशीट में बार-बार कहा गया है कि विकास गर्ग की कंपनियों और सुनील भंडारी की फर्मों तक पहुंचा पैसा मूल रूप से “कोलकाता स्थित शेल कंपनियों” से आया था, जिसकी व्यवस्था तिबरेवाल ने की थी.

कैसिनो का सौदा: ED की जांच के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, Ability Games Ltd (A-26), जिसे चार्जशीट में तिबरेवाल की कंपनियों में शामिल किया गया है, ने सूचीबद्ध गेमिंग कंपनी डेल्टा कॉर्प के नेपाल स्थित कैसिनो कारोबार को खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. (edatabook/Free Press Journal; इस्तेमाल से पहले डेल्टा कॉर्प की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग से इसकी पुष्टि करें.)

वे सवाल जिनके जवाब भारत को अब तक नहीं मिले

ED का कहना है कि तिबरेवाल दो बार उसके सामने पेश होने से इनकार कर चुके हैं. एजेंसी उन्हें 11,000 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का मालिक बताती है और मनी लॉन्ड्रिंग के अभियोजन मामले में आरोपी के रूप में सूचीबद्ध करती है. इससे ऐसे सवाल उठते हैं, जिनका एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिया है.

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम: 2018 का कानून ED को विशेष अदालत से किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग करने की अनुमति देता है, बशर्ते उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ हो, अपराध 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो और वह भारत छोड़कर चला गया हो तथा लौटने से इनकार कर रहा हो. क्या ED ने तिबरेवाल के खिलाफ ऐसा आवेदन दिया है?

वारंट: क्या उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट है? नई चार्जशीट में गगन गुप्ता और दो अन्य लोगों के खिलाफ वारंट की मांग की गई है, लेकिन तिबरेवाल का नाम उनमें नहीं है. ऐसा क्यों?

प्रत्यर्पण: भारत का UAE के साथ प्रत्यर्पण समझौता है और दूसरे मामलों में इसका इस्तेमाल भी किया गया है. क्या भारत ने उनके प्रत्यर्पण या रेड नोटिस की मांग की है? विदेश मंत्रालय और ED को इस पर जवाब देना चाहिए.

यदि वह ब्रिटेन में हैं, तो भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण की कार्यवाही धीमी है. नीरव मोदी और विजय माल्या के मामले इसके उदाहरण हैं. क्या यही वजह है कि HST जैसे मामलों में वांछित लोग लंदन चले जाते हैं?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, रिकॉर्ड एक विरोधाभास दिखाता है. जिस व्यक्ति को ED “सिंडिकेट का सरगना” कहती है, वह रायपुर में उसके समन का जवाब नहीं दे पाया है, जबकि दिल्ली में उसने अपने बारे में लिखने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ निषेधाज्ञा हासिल की है.

भारत से भागा हुआ एक ऐसा व्यक्ति, जिसे अब तक भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है. दिल्ली की निचली अदालतों को ED के मामलों और समन को ध्यान में रखने की जरूरत है.

तिबरेवाल ने महादेव ऐप या स्काईएक्सचेंज में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया है. किसी भी आरोप की सुनवाई के दौरान अभी तक पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि, वह भारत से बाहर हैं और ED के सामने पेश नहीं हुए हैं.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)


भारत-जापान के बीच 50 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर BW Businessworld की खास पेशकश

31 अक्टूबर के विशेष अंक में निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक और नेतृत्व के जरिए द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के अगले चरण की संभावनाओं पर फोकस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
BWHindia

BW Businessworld के 31 अक्टूबर, 2026 के अंक में भारत और जापान के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी और दशकों से कायम रणनीतिक विश्वास को गहरे कारोबारी सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की गई है. पत्रिका की इस विशेष पेशकश में बताया गया है कि किस तरह जापान की पूंजी, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञता भारत के बड़े बाजार, प्रतिभा और उद्यमशीलता के साथ मिलकर विभिन्न उद्योगों में नए अवसर पैदा कर रही है.

इस विशेष कवरेज में एसोचैम (Assocham) के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है. इसके साथ ही इस वृद्धि को गति देने के लिए जरूरी निवेश और क्षमताओं पर भी फोकस किया गया है. इसमें ऑटोमोबाइल क्षेत्र में पहले से स्थापित साझेदारियों से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा और नई पीढ़ी की मोबिलिटी तक सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है.

27.5 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर रहा. वहीं, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में जापान से कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का इक्विटी प्रवाह 48.14 अरब डॉलर रहा. इसके साथ जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत बन गया है.

दोनों देशों ने 2035 तक के दशक में भारत में 10 लाख करोड़ येन के जापानी निजी निवेश का लक्ष्य भी निर्धारित किया है. यह लक्ष्य भारत में जापानी कंपनियों की दीर्घकालिक कारोबारी संभावनाओं और निवेश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

भारत में 1,500 जापानी कंपनियों की मौजूदगी

भारत में लगभग 1,500 जापानी कंपनियां और करीब 5,000 कारोबारी प्रतिष्ठान मौजूद हैं. इन कंपनियों के नेटवर्क में सप्लायर, इंजीनियर, कुशल कर्मचारी और वितरण से जुड़े साझेदार शामिल हैं. BW Businessworld की विशेष रिपोर्ट में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि ये कंपनियां भारत में स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने के साथ देश को मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और निर्यात के केंद्र के रूप में विकसित करने में किस तरह योगदान दे रही हैं.

ऑटोमोबाइल सेक्टर में सहयोग पर विशेष फोकस

ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट में मारुति सुजुकी, टोयोटा, ब्रिजस्टोन, इसुजु और निसान के विचारों को शामिल किया गया है. इसमें स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन, सप्लायर नेटवर्क के विकास, बदलती मोबिलिटी जरूरतों और गुणवत्ता व ग्राहक विश्वास की भूमिका पर चर्चा की गई है.

यह कवरेज बताता है कि किस तरह मजबूत कारोबारी साझेदारियां लंबे समय तक टिकाऊ व्यवसाय खड़े करने में मदद करती हैं. साथ ही, स्थानीय उत्पादन और वैश्विक मानकों के बीच तालमेल स्थापित करने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया है.

मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च में बढ़ता सहयोग

ऑटोमोबाइल क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए इस अंक में डाइकिन के मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च संबंधी निवेश, पैनासोनिक की जापानी गुणवत्ता को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप काम करने की क्षमता के साथ जोड़ने की रणनीति और हिताची एनर्जी के इंजीनियरिंग व प्रतिभा विकास पर जोर का विश्लेषण किया गया है.

इन कंपनियों से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि भारत-जापान साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में भारतीय टीमों की जिम्मेदारियां और भूमिका भी मजबूत हो रही हैं.

वैश्विक कारोबार में भारतीय नेतृत्व की बढ़ती भूमिका

इस विशेष पेशकश का एक प्रमुख विषय भारतीय नेतृत्व है. इसमें बताया गया है कि किस तरह भारतीय अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी वैश्विक विशेषज्ञता को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाल रहे हैं. वे उत्पादों और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के साथ ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के बाहर के बाजारों में भी किया जा सकता है.

साझेदारी की राह में चुनौतियां भी अहम

भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए नियामकीय व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और स्थिरता, परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना, मजबूत सप्लायर नेटवर्क तैयार करना और कौशल विकास में लगातार निवेश करना जरूरी होगा. जापान के साथ भारत का बड़ा व्यापार घाटा भी इस बात की ओर इशारा करता है कि भारतीय निर्यात में विविधता लाने और जापानी बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने की जरूरत है.

BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा, “अंततः इस साझेदारी की सफलता का आकलन इससे पैदा होने वाली नौकरियों की गुणवत्ता, विकसित होने वाली विशेषज्ञता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनने वाले व्यवसायों के आधार पर किया जाएगा.”

भारत-जापान साझेदारी पर विशेष कवरेज के अलावा, 31 अक्टूबर के इस अंक में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार को प्रभावित करने वाले रुझानों पर विशेषज्ञों के लेख और विस्तृत रिपोर्ट भी शामिल हैं


भारत में फ्रीज, विदेश में कर्ज: Ebix ने अपने ऑस्ट्रेलियाई कारोबार को 271 करोड़ रुपये में गिरवी रखा

भारत के प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Ebix को अपनी संपत्तियों पर कोई भी लियन (ग्रहणाधिकार) बनाने से मना किया था. BW की जांच से पता चला है कि अब Ebix की ऑस्ट्रेलियाई इकाई ने इन्हीं संपत्तियों के बदले 4.1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का कर्ज लिया है. फ्रीज किए जाने के बाद गिरवी रखी गई Ebix की यह दूसरी संपत्ति है, जिसकी जानकारी सामने आई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
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Thursday, 22 October, 2026
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पलक शाह

कल्पना कीजिए कि अदालत ने आपके घर को फ्रीज कर दिया है. जब तक आपके मामले पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक आप उसे बेच नहीं सकते, किसी को उपहार में नहीं दे सकते और न ही गिरवी रख सकते हैं. अब कल्पना कीजिए कि आप इसके बावजूद किसी कर्जदाता के कार्यालय जाते हैं, घर को गिरवी रखते हैं और नकदी लेकर लौट आते हैं. यदि आप मुकदमा हार जाते हैं, तो सरकार घर अपने कब्जे में ले लेती है. लेकिन सबसे पहले कर्जदाता को भुगतान मिलता है. सरकार को जो बचता है, वही मिलता है.

सरल शब्दों में कहें तो महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों के साथ अब दो बार ऐसा हो चुका है. ED ने दावा किया है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध कंपनी Ebix को महादेव बेटिंग घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग या हवाला के पैसे से खरीदा गया था.

नया कर्ज

अमेरिका स्थित Ebix Inc की सहायक कंपनी Ebix Australia Pty Ltd ने सिडनी की निजी ऋण देने वाली कंपनी iPartners से 4.1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 271 करोड़ रुपये) का वरिष्ठ सुरक्षित कर्ज लिया है. इससे पहले इस कर्ज की जानकारी सामने नहीं आई थी.

iPartners ने अपने निवेशक पोर्टल पर इस सौदे को “EBIX Australia Secured Corporate Loan (EBIX02)” के नाम से सूचीबद्ध किया है. लिस्टिंग के अनुसार:

यह कर्ज तीन साल के लिए है, जिसमें 34 महीने शेष हैं. इससे संकेत मिलता है कि इसकी शुरुआत अगस्त 2026 के आसपास हुई.

इसमें कर्जदाता को संपत्तियों पर “पहली प्राथमिकता” का अधिकार दिया गया है.

कर्ज और संपत्ति के मूल्य का अनुपात 30 प्रतिशत से कम है.

इस पर एक महीने की BBSW दर के साथ सालाना 5.50 प्रतिशत ब्याज दिया जाता है. iPartners के अनुसार, प्रभावी ब्याज दर 9.82 प्रतिशत है.

निवेशकों के लिए इस कर्ज की पेशकश बंद हो चुकी है.

सरल शब्दों में इसका क्या मतलब है?

“पहली प्राथमिकता” का मतलब है कि Ebix Australia की संपत्तियों पर दावा करने वालों की कतार में कर्जदाता सबसे आगे है. कर्ज और संपत्ति के मूल्य का अनुपात 30 प्रतिशत से कम होने का अर्थ है कि उन संपत्तियों का मूल्य कर्ज की रकम से तीन गुना से भी अधिक है. इससे कर्जदाता को काफी सुरक्षा मिलती है. भारतीय सरकार समेत किसी अन्य पक्ष का दावा उसके बाद आता है.

iPartners ने अपने निवेशकों के सामने कर्ज लेने वाली कंपनी को “एक परिपक्व, अत्यधिक नकदी प्रवाह वाला और बाजार में दबदबा रखने वाला InsurTech कारोबार” बताया. दूसरे शब्दों में, यह समूह के पास बची सबसे अच्छी संपत्तियों में से एक है.

ED ने क्या आदेश दिया था

5 जून, 2026 को ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 16/2026 जारी किया. इसके तहत ₹893 करोड़ मूल्य की उस शेयर हिस्सेदारी को कुर्क किया गया, जो विकास गर्ग की सूचीबद्ध कंपनी Eraaya Lifespaces (जिसका नाम बाद में बदलकर Ebix Ltd कर दिया गया) के पास Ebix Inc में है. इस आदेश में कंपनी के शेयरों के साथ-साथ “उक्त कंपनी की सभी संपत्तियों और निवेशों” को भी शामिल किया गया था.

इस आदेश की एक प्रति Ebix Inc के प्रमोटर और प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई थी. इसमें निर्देश दिया गया था कि वे “M/s EBIX Inc और उसकी सहायक कंपनियों की संपत्तियों के संबंध में किसी भी बिक्री, हस्तांतरण, स्वामित्व में बदलाव, संशोधन या लियन बनाने आदि की अनुमति न दें.”

Ebix Australia, Ebix Inc की सहायक कंपनी है. उसकी संपत्तियों पर पहली प्राथमिकता वाला सुरक्षा अधिकार बनाना एक लियन है.

ED को इस तरह की आशंका पहले से थी. उसके आदेश में चेतावनी दी गई थी कि संपत्तियों को “तीसरे पक्ष के हित बनाने के लिए बेचा, हस्तांतरित या भारग्रस्त किया जा सकता है.” आदेश में Ebix की शेयर हिस्सेदारी को “तेजी से एक कंपनी से दूसरी कंपनी में हस्तांतरित किए जाने, गिरवी रखे जाने या उस पर भार बनाए जाने की आशंका वाला” बताया गया था.

यह सिलसिला

गर्ग को 14 जुलाई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था. इसके तीन सप्ताह बाद, 4 अगस्त को Ebix Inc ने जॉर्जिया के जॉन्स क्रीक स्थित अपने 17 एकड़ के मुख्यालय, 1 Ebix Way, को 1.26 करोड़ अमेरिकी डॉलर के कर्ज के बदले Velocity Commercial Capital के पास गिरवी रख दिया था, जैसा कि BW ने पहले रिपोर्ट किया था. इस संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में डीड बुक 70417 के तहत दर्ज है.

ऑस्ट्रेलिया में कर्ज की यह सुविधा भी इसी महीने शुरू हुई.

यह पूरा खेल कैसे काम करता है, इसे समझिए. भारत ने समूह के शीर्ष स्तर पर मौजूद शेयरों को फ्रीज कर दिया, जो भारत की सूचीबद्ध कंपनी के पास हैं. लेकिन वास्तविक संपत्तियां, इमारतें, सॉफ्टवेयर कारोबार और नकदी प्रवाह समूह की निचली इकाइयों में हैं, जो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं. भारत का फ्रीज करने का आदेश अपने आप जॉर्जिया के भूमि रजिस्ट्रार या सिडनी के किसी कर्जदाता पर लागू नहीं होता. विदेश में इसे लागू कराने के लिए भारत को संधियों के माध्यम से लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

इस अंतराल में नीचे मौजूद संपत्तियों को एक-एक करके गिरवी रखकर कर्ज लिया जा सकता है. फ्रीज किए गए शेयर कागजों पर अब भी मौजूद रहते हैं. लेकिन पहली प्राथमिकता वाले हर नए कर्ज का मतलब है कि उन शेयरों से जुड़े कारोबार का मूल्य उन सभी के लिए कम हो जाता है, जो कर्जदाता के बाद दावा करते हैं. इसमें वह सरकार भी शामिल है, जो इन संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश कर रही है.

सितंबर में रायपुर में दायर अपनी पूरक अभियोजन शिकायत में ED ने अदालत को बताया कि कुर्की आदेश के बाद गर्ग ने ब्रोकर Cresa के जरिए जॉर्जिया स्थित परिसर को “बेचने की कोशिश की” और इसे “अपराध से अर्जित आय को ठिकाने लगाने” का जानबूझकर किया गया प्रयास बताया. इस शिकायत में अमेरिका में संपत्ति पर लिए गए कर्ज या ऑस्ट्रेलिया के कर्ज का उल्लेख नहीं है.

पैसा कहां जा रहा है

Ebix Australia लंबे समय से समूह की अपेक्षाकृत मजबूत इकाइयों में से एक रही है. जब Eraaya ने 2024 में इसका अधिग्रहण पूरा किया था, तब इसके तत्कालीन प्रबंध निदेशक दिवंगत लियोन डी'एपिस ने कहा था, “ऑस्ट्रेलियाई कारोबार लाभदायक और मजबूत बना हुआ है.” अब इसका नेतृत्व फिलिप फूरी कर रहे हैं.

मूल कंपनी की स्थिति कहीं अधिक खराब है. Eraaya ने सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए 326 करोड़ रुपये का समेकित घाटा दर्ज किया था और उसकी समेकित नेटवर्थ नकारात्मक हो गई थी.

कंपनी के वित्तीय मामलों की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने BW को बताया कि यह कर्ज ऑस्ट्रेलियाई कर कार्यालय (ATO) के बकाया भुगतान को चुकाने के लिए लिया गया था. ये बकाया एक कर समझौते के तहत चुकाए जाने थे. उस समझौते ने यह सीमा तय कर दी थी कि Ebix Australia विदेश में स्थित समूह की अन्य कंपनियों को कितना पैसा भेज सकती है. व्यक्ति के अनुसार, ATO को भुगतान किए जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया से नकदी Ebix की भारत और अमेरिका में घाटे में चल रही इकाइयों तक पहुंच सकती थी.

शॉर्ट सेलर Viceroy Research ने 2018 में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ATO कम से कम 2016 से Ebix का ऑडिट कर रहा था.

यदि यह जानकारी सही है, तो समूह के सबसे मजबूत कारोबार को गिरवी रखकर कर्ज लिया गया, ताकि उसकी नकदी कमजोर इकाइयों तक पहुंचाई जा सके. समूह के भीतर इस तरह पैसे का हस्तांतरण रोकना ही ED के आदेश का उद्देश्य था.

चुप्पी

BW को सूचीबद्ध मूल कंपनी Ebix Ltd की ओर से Ebix Australia के इस कर्ज के संबंध में कोई सार्वजनिक खुलासा नहीं मिला. ED ने शेयरों को फ्रीज कर दिया. लेकिन उनके नीचे मौजूद संपत्तियों को एक-एक करके अलग-अलग देशों में गिरवी रखा जा रहा है.


पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री तथा द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के निडर लेखक हैं. उनकी चर्चित खोजपरक रिपोर्टिंग ने भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पक्ष को उजागर किया है.

मुंबई में करीब दो दशकों तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल करके अपनी पहचान बनाई है. उनकी रिपोर्टें भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों और प्रकाशनों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुई हैं. उनकी पैनी रिपोर्टिंग ने कई अहम मुद्दों पर विमर्श को आकार दिया है और कॉरपोरेट जगत में हलचल पैदा की है.

19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई में होने वाले गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक आधुनिक और जटिल रूप ने ले ली है. अब कॉरपोरेट इमारतों के भीतर सफेदपोश अपराध की योजनाएं बनाई जा रही थीं. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' वाली अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए.

शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, पलक का काम उच्च वित्तीय जगत की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को उजागर करता है, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज बनाती है. वे यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले लोगों को बेनकाब करने से नहीं हिचकते.)


अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 15.5% बढ़ा, 9.97 अरब डॉलर पर पहुंचा

भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 27-28% है. वहीं, देश से निर्यात होने वाले कुल विनिर्मित उत्पादों में इसका योगदान लगभग 40% है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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अमेरिका के भारी टैरिफ के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में मजबूती बनी हुई है. अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 15.5% बढ़कर 9.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. अगस्त में निर्यात में 31% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के साथ चीन, ब्रिटेन और यूरोप के दूसरे बाजारों में भी कारोबार बढ़ाया है.

भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की 28% हिस्सेदारी

भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 27-28% है. वहीं, देश से निर्यात होने वाले कुल विनिर्मित उत्पादों में इसका योगदान लगभग 40% है. इस सेक्टर में स्टील, धातु उत्पाद, मशीनरी, वाहन, ऑटो पार्ट्स, रक्षा उपकरण और विमान के पुर्जे शामिल हैं.

पिछले साल अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद इस सेक्टर के निर्यात पर दबाव पड़ा था. सितंबर-अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि, भारतीय कंपनियों ने नए कारोबारी रास्ते तलाशने और अमेरिकी ग्राहकों के साथ मिलकर लागत का बोझ उठाने जैसी रणनीतियों के जरिए स्थिति को संभाला.

अमेरिकी सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की मजबूत पकड़

स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है. स्टील फोर्जिंग के निर्यातक अविनाश गुप्ता के मुताबिक, यह शुल्क दूसरे देशों पर भी लागू होता है. ऐसे में अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय उत्पादों के विकल्प तलाशना हमेशा आसान नहीं होता.

कोरोना स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार गड़ोदिया के अनुसार, अमेरिकी सप्लाई चेन में जगह बना चुकी कंपनियों को बदलना आसान नहीं है. किसी नए देश से सामान मंगाने के लिए सप्लाई सिस्टम, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी प्रक्रियाओं को नए सिरे से तैयार करना पड़ता है. यही वजह है कि ग्राहक केवल टैरिफ के आधार पर अपने पुराने सप्लायर को नहीं बदलते.

अमेरिकी ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट, 1962 की धारा 232 के तहत ऑटो पार्ट्स और तांबे के उत्पादों पर भी 50% टैरिफ लगाया गया है. इसके बावजूद इन उत्पादों की मांग में बड़ी गिरावट नहीं आने की बात कही गई है.

बाजार बचाने के लिए निर्यातकों ने घटाया मुनाफा

अमेरिकी बाजार में कारोबार बनाए रखने के लिए भारतीय निर्यातकों और वहां के खरीदारों ने टैरिफ का बोझ साझा किया. कुछ मामलों में निर्यातकों ने अपने उत्पादों पर छूट देकर या कम मुनाफे पर सामान भेजकर बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखी.

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन और ज्योति स्टील इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग पार्टनर पंकज चड्ढा के मुताबिक, अमेरिका से लगातार मांग मिल रही है. उन्हें उम्मीद है कि पिछले पांच महीनों के दौरान दिखी वृद्धि आगे भी जारी रह सकती है.

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष और श्री टूल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एससी रल्हन के अनुसार, कई भारतीय कारोबारियों ने अमेरिकी आयातकों के साथ मिलकर 50% टैरिफ का बोझ उठाया. कुछ निर्यातकों ने अमेरिकी सप्लाई चेन में बने रहने के लिए नुकसान सहकर भी कारोबार जारी रखा.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इन टैरिफ के रिफंड की प्रक्रिया शुरू होने से भारतीय निर्यातकों को भी राहत की उम्मीद है. उन्हें आशा है कि अमेरिकी आयातक रिफंड में मिलने वाली राशि का उचित हिस्सा उन्हें देंगे. हालांकि, यह प्रक्रिया अभी धीमी है.

चीन और यूरोप के बाजारों में भी बढ़ा निर्यात

भारतीय इंजीनियरिंग सेक्टर को अमेरिका के अलावा दूसरे बाजारों में बढ़ते कारोबार से भी सहारा मिला है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग उत्पादों का कुल वैश्विक निर्यात 4.9% बढ़कर 122.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात 32.4% बढ़ा. इसी अवधि में ब्रिटेन में 18.2%, इटली में 16% और जर्मनी में 14.6% की वृद्धि दर्ज की गई. दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील और नीदरलैंड जैसे बाजारों में भी दोहरे अंकों की वृद्धि देखने को मिली.

भारतीय कंपनियां अब यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं. इससे किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने और वैश्विक मांग में बदलाव के जोखिम को संभालने में मदद मिल सकती है.

यूरोपीय संघ से स्टील निर्यात के लिए 19 लाख टन का कोटा

भारतीय स्टील निर्यातकों के लिए यूरोपीय संघ (EU) का बाजार भी महत्वपूर्ण बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को यूरोपीय बाजार में स्टील उत्पादों के निर्यात के लिए 19 लाख टन का विशेष कोटा मिला है. इस सीमा के भीतर भेजे जाने वाले उत्पादों पर शून्य शुल्क का लाभ मिलता है, जबकि कोटे से अधिक निर्यात पर 50% टैरिफ लागू होने की बात कही गई है.

कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात में आई तेजी इस सेक्टर की बाजार में बनी पकड़ और नए बाजारों में विस्तार की रणनीति को दर्शाती है. हालांकि, आगे निर्यात की रफ्तार कितनी बनी रहती है, यह वैश्विक मांग, टैरिफ नीतियों, माल ढुलाई की लागत और अमेरिकी बाजार में रिफंड की प्रक्रिया जैसे कारकों पर निर्भर करेगा.
 


क्या Skydance में 10 अरब डॉलर तक निवेश कर सकती है SpaceX? जॉन मेलोन ने जताई संभावना

मीडिया निवेशक जॉन मेलोन ने बुधवार को न्यूयॉर्क में आयोजित पैली सेंटर फॉर मीडिया के इंटरनेशनल काउंसिल समिट के दौरान SpaceX और Skydance के बीच संभावित निवेश को लेकर अटकलें लगाईं.

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Published - Thursday, 22 October, 2026
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Thursday, 22 October, 2026
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एलन मस्क की कंपनी SpaceX मीडिया कंपनी Skydance में 8 से 10 अरब डॉलर तक का निवेश कर सकती है. मीडिया जगत के दिग्गज निवेशक जॉन मेलोन ने यह संभावना जताई है. हालांकि, Skydance और मस्क की ओर से इस तरह के किसी निवेश या बातचीत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अगर यह सौदा होता है, तो इससे टेक्नोलॉजी और मनोरंजन उद्योग के बीच कारोबारी संबंधों को नई दिशा मिल सकती है.

पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के विलय के बाद चर्चा

मीडिया निवेशक जॉन मेलोन ने बुधवार को न्यूयॉर्क में आयोजित पैली सेंटर फॉर मीडिया (Paley Center for Media) के इंटरनेशनल काउंसिल समिट के दौरान SpaceX और Skydance के बीच संभावित निवेश को लेकर अटकलें लगाईं.

उन्होंने कहा कि एलन मस्क और Oracle के संस्थापक लैरी एलिसन के बीच कारोबारी संबंध काफी मजबूत हैं. लैरी एलिसन के बेटे डेविड एलिसन Skydance के चेयरमैन और सीईओ हैं.

Skydance इस महीने की शुरुआत में पैरामाउंट (Paramount) और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros Discovery) के 111 अरब डॉलर के विलय के बाद अस्तित्व में आई नई मीडिया कंपनी है. मेलोन के मुताबिक, SpaceX इस कंपनी में बड़ा निवेश कर सकती है. हालांकि, उन्होंने इसे किसी घोषित सौदे के बजाय अपनी संभावना के तौर पर पेश किया.

कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन समझौते की भी संभावना

मेलोन ने संभावित निवेश के साथ Skydance के कंटेंट के वैश्विक वितरण से जुड़े समझौते की संभावना भी जताई. इसमें मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की भूमिका हो सकती है. हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. Skydance ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि मस्क के प्रतिनिधि ने भी इस मामले पर पूछे गए सवाल का जवाब नहीं दिया.

अगर निवेश के साथ कंटेंट वितरण का समझौता भी होता है, तो इससे मनोरंजन जगत की प्रमुख बौद्धिक संपदा (IP), बड़े निवेश और मस्क के नियंत्रण वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच साझेदारी का नया मॉडल सामने आ सकता है.

Skydance पर कर्ज घटाने का दबाव

Skydance के संभावित निवेश की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के विलय के बाद कंपनी पर वित्तीय दबाव भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, विलय के बाद Skydance पर करीब 80 अरब डॉलर का नेट डेट यानी शुद्ध कर्ज है. कंपनी अगले तीन वर्षों में लागत में 6 अरब डॉलर की बचत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

इसके अलावा, कंपनी 2029 के अंत तक नेट डेट और एडजस्टेड EBITDA के अनुपात को करीब सात गुना से घटाकर तीन गुना करने की योजना बना रही है. ऐसे में SpaceX जैसे बड़े निवेशक की संभावित भागीदारी कंपनी की वित्तीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित निवेश को लेकर दोनों कंपनियों के बीच कोई बातचीत चल रही है या नहीं.

मस्क और एलिसन परिवार के पहले से कारोबारी संबंध

मस्क और एलिसन परिवार के बीच पहले भी वित्तीय संबंध रहे हैं. 2022 में जब मस्क ने 44 अरब डॉलर में ट्विटर का अधिग्रहण किया था, तब लैरी एलिसन ने इसमें करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया था. मेलोन ने SpaceX और Skydance के बीच संभावित निवेश की चर्चा के दौरान इस पुराने संबंध का भी उल्लेख किया.

इस बीच, मस्क के कारोबारी समूह में अन्य संभावित विलय की चर्चाएं भी चल रही हैं. SpaceX और Tesla ने दोनों कंपनियों के संभावित विलय की पड़ताल के लिए समितियां बनाई हैं. हालांकि, मस्क ने इसी सप्ताह स्पष्ट किया कि इन कंपनियों का विलय होना तय नहीं है.

फिलहाल, SpaceX और Skydance के बीच संभावित निवेश की चर्चा शुरुआती अटकलों तक सीमित है. किसी आधिकारिक घोषणा या पुष्टि के अभाव में इसे प्रस्तावित सौदा नहीं माना जा सकता.
 


फ्लिपकार्ट की त्योहारी सेल में छोटे शहरों का दबदबा, 60% खरीदार टियर-2 और छोटे शहरों से

इस साल की सेल में युवा ग्राहकों और छोटे शहरों के खरीदारों की भागीदारी उल्लेखनीय रही. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कुल खरीदारों में करीब आधे Gen Z यानी युवा पीढ़ी के ग्राहक थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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फ्लिपकार्ट (Flipkart) की बिग बिलियन डेज सेल में इस साल ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की. कंपनी के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले ऑर्डर्स, बेची गई यूनिट्स और खरीदारों की संख्या में 20-22% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सेल के दौरान भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 10 में से करीब 9 ग्राहकों ने फ्लिपकार्ट पर विजिट किया. ब्यूटी, ग्रूमिंग और जनरल मर्चेंडाइज जैसी कैटेगरी में खरीदारों की संख्या 40% बढ़ी, जबकि कुल खरीदारों में करीब 60% टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आए.

यूनिक विजिटर्स की संख्या में 10% का इजाफा

फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज सेल 9 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई थी. कंपनी के अनुसार, सेल के पहले घंटे में ही भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 15 में से करीब एक ग्राहक ने प्लेटफॉर्म पर विजिट किया. अगले 11 दिनों के दौरान देश में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 10 में से करीब 9 ग्राहकों ने फ्लिपकार्ट का रुख किया.

इस दौरान पिछले साल की तुलना में यूनिक विजिटर्स की संख्या में करीब 10% की वृद्धि हुई. वहीं, ऑर्डर्स, बेची गई यूनिट्स और खरीदारों की संख्या में 20-22% तक का इजाफा दर्ज किया गया. कंपनी के मुताबिक, यह वृद्धि अलग-अलग शहरों, आयु वर्गों और प्रोडक्ट कैटेगरी में देखने को मिली.

Gen Z और छोटे शहरों के ग्राहकों की अहम भूमिका

इस साल की सेल में युवा ग्राहकों और छोटे शहरों के खरीदारों की भागीदारी उल्लेखनीय रही. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कुल खरीदारों में करीब आधे Gen Z यानी युवा पीढ़ी के ग्राहक थे. वहीं, लगभग 60% खरीदार टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आए.

यह रुझान दिखाता है कि ऑनलाइन खरीदारी अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों में भी ग्राहक रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों जैसे उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं.

ब्यूटी और ग्रूमिंग से लेकर महंगे उत्पादों तक बढ़ी मांग

फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज सेल के दौरान ब्यूटी, ग्रूमिंग और जनरल मर्चेंडाइज कैटेगरी में खरीदारों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ी. वहीं, लाइफस्टाइल कैटेगरी में खरीदारों की संख्या में 12.5% का इजाफा हुआ.

सेल के शुरुआती घंटे में बड़े घरेलू उपकरणों (लार्ज अप्लायंसेज) की कैटेगरी में सालाना आधार पर 30% की वृद्धि दर्ज की गई. कंपनी के मुताबिक, पूरी सेल के दौरान महंगे उत्पादों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले करीब नौ गुना रही.

त्योहारी खरीदारी के दौरान ग्राहकों ने पर्सनल केयर और फैशन से जुड़े उत्पादों के साथ बड़े और महंगे सामान में भी दिलचस्पी दिखाई. इससे संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी की मांग कई तरह की प्रोडक्ट कैटेगरी में बढ़ी.

Flipkart Minutes पर नए ग्राहकों की संख्या बढ़ी

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट मिनट्स पर भी नए ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर नए ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले 1.7 गुना रही.

टियर-2 और उससे छोटे शहरों में छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर, जबलपुर और मेरठ तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल रहे. इन शहरों के ग्राहकों ने रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के अलावा लैपटॉप, गेमिंग टैबलेट और एयर फ्रायर जैसे उत्पाद भी खरीदे.

छोटे शहरों के सेलर्स के कारोबार में 2.15 गुना वृद्धि

बिग बिलियन डेज सेल का फायदा प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वाले विक्रेताओं को भी मिला. कंपनी के मुताबिक, सेल के दौरान लेनदेन करने वाले 31% सेलर्स के कारोबार में सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई.

टियर-2 और उससे छोटे शहरों के सेलर्स के कारोबार में 2.15 गुना इजाफा हुआ. शहरों के आधार पर देखें तो भिवाड़ी के विक्रेताओं के कारोबार में 2.6 गुना, पानीपत में 2.5 गुना, तिरुपुर में 2.1 गुना और हिसार में दो गुना वृद्धि दर्ज की गई.

कंपनी के अनुसार, सेल के शुरुआती घंटों में सामने आए रुझान अगले 11 दिनों तक भी जारी रहे. इस दौरान ग्राहकों की खरीदारी, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी की मांग और छोटे शहरों के विक्रेताओं के कारोबार में बढ़ोतरी देखने को मिली.