इस साल की सेल में युवा ग्राहकों और छोटे शहरों के खरीदारों की भागीदारी उल्लेखनीय रही. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कुल खरीदारों में करीब आधे Gen Z यानी युवा पीढ़ी के ग्राहक थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
फ्लिपकार्ट (Flipkart) की बिग बिलियन डेज सेल में इस साल ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की. कंपनी के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले ऑर्डर्स, बेची गई यूनिट्स और खरीदारों की संख्या में 20-22% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सेल के दौरान भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 10 में से करीब 9 ग्राहकों ने फ्लिपकार्ट पर विजिट किया. ब्यूटी, ग्रूमिंग और जनरल मर्चेंडाइज जैसी कैटेगरी में खरीदारों की संख्या 40% बढ़ी, जबकि कुल खरीदारों में करीब 60% टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आए.
यूनिक विजिटर्स की संख्या में 10% का इजाफा
फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज सेल 9 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई थी. कंपनी के अनुसार, सेल के पहले घंटे में ही भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 15 में से करीब एक ग्राहक ने प्लेटफॉर्म पर विजिट किया. अगले 11 दिनों के दौरान देश में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले हर 10 में से करीब 9 ग्राहकों ने फ्लिपकार्ट का रुख किया.
इस दौरान पिछले साल की तुलना में यूनिक विजिटर्स की संख्या में करीब 10% की वृद्धि हुई. वहीं, ऑर्डर्स, बेची गई यूनिट्स और खरीदारों की संख्या में 20-22% तक का इजाफा दर्ज किया गया. कंपनी के मुताबिक, यह वृद्धि अलग-अलग शहरों, आयु वर्गों और प्रोडक्ट कैटेगरी में देखने को मिली.
Gen Z और छोटे शहरों के ग्राहकों की अहम भूमिका
इस साल की सेल में युवा ग्राहकों और छोटे शहरों के खरीदारों की भागीदारी उल्लेखनीय रही. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कुल खरीदारों में करीब आधे Gen Z यानी युवा पीढ़ी के ग्राहक थे. वहीं, लगभग 60% खरीदार टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आए.
यह रुझान दिखाता है कि ऑनलाइन खरीदारी अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों में भी ग्राहक रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों जैसे उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं.
ब्यूटी और ग्रूमिंग से लेकर महंगे उत्पादों तक बढ़ी मांग
फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज सेल के दौरान ब्यूटी, ग्रूमिंग और जनरल मर्चेंडाइज कैटेगरी में खरीदारों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ी. वहीं, लाइफस्टाइल कैटेगरी में खरीदारों की संख्या में 12.5% का इजाफा हुआ.
सेल के शुरुआती घंटे में बड़े घरेलू उपकरणों (लार्ज अप्लायंसेज) की कैटेगरी में सालाना आधार पर 30% की वृद्धि दर्ज की गई. कंपनी के मुताबिक, पूरी सेल के दौरान महंगे उत्पादों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले करीब नौ गुना रही.
त्योहारी खरीदारी के दौरान ग्राहकों ने पर्सनल केयर और फैशन से जुड़े उत्पादों के साथ बड़े और महंगे सामान में भी दिलचस्पी दिखाई. इससे संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदारी की मांग कई तरह की प्रोडक्ट कैटेगरी में बढ़ी.
Flipkart Minutes पर नए ग्राहकों की संख्या बढ़ी
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट मिनट्स पर भी नए ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर नए ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले 1.7 गुना रही.
टियर-2 और उससे छोटे शहरों में छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर, जबलपुर और मेरठ तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल रहे. इन शहरों के ग्राहकों ने रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के अलावा लैपटॉप, गेमिंग टैबलेट और एयर फ्रायर जैसे उत्पाद भी खरीदे.
छोटे शहरों के सेलर्स के कारोबार में 2.15 गुना वृद्धि
बिग बिलियन डेज सेल का फायदा प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वाले विक्रेताओं को भी मिला. कंपनी के मुताबिक, सेल के दौरान लेनदेन करने वाले 31% सेलर्स के कारोबार में सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई.
टियर-2 और उससे छोटे शहरों के सेलर्स के कारोबार में 2.15 गुना इजाफा हुआ. शहरों के आधार पर देखें तो भिवाड़ी के विक्रेताओं के कारोबार में 2.6 गुना, पानीपत में 2.5 गुना, तिरुपुर में 2.1 गुना और हिसार में दो गुना वृद्धि दर्ज की गई.
कंपनी के अनुसार, सेल के शुरुआती घंटों में सामने आए रुझान अगले 11 दिनों तक भी जारी रहे. इस दौरान ग्राहकों की खरीदारी, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी की मांग और छोटे शहरों के विक्रेताओं के कारोबार में बढ़ोतरी देखने को मिली.
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ उद्योग जगत के अनुभवों को समझने का अवसर मिला. ऐसे संवाद विद्यार्थियों को अपने करियर की संभावनाओं को पहचानने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद कर सकते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने 21 अक्टूबर को दुबई स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी (Amity University) में मास्टरक्लास आयोजित की. इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के साथ नेतृत्व, उद्यमिता और तेजी से बदलते मीडिया जगत से जुड़े अपने अनुभव और विचार साझा किए.
विद्यार्थियों को उद्योग के अनुभवों से रूबरू कराने की पहल
इस मास्टरक्लास का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग जगत के अनुभवों से परिचित कराना और उन्हें विशेषज्ञों के साथ विचारों के आदान-प्रदान का अवसर देना था. डॉ. अनुराग बत्रा ने अपने अनुभवों के जरिए विद्यार्थियों को कारोबारी दुनिया और मीडिया इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को समझने का मौका दिया.
नेतृत्व और उद्यमिता पर हुई चर्चा
सत्र के दौरान नेतृत्व की भूमिका, उद्यमिता की चुनौतियों और बदलते कारोबारी माहौल जैसे विषयों पर चर्चा हुई. विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नेतृत्व क्षमता, नए विचारों और व्यावहारिक समझ की कितनी अहमियत है.
बदलते मीडिया जगत पर भी रखे विचार
मास्टरक्लास में तेजी से बदलते मीडिया जगत और उससे जुड़ी संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए. मीडिया और कारोबार के बदलते स्वरूप के बीच विद्यार्थियों के लिए उद्योग की जरूरतों, चुनौतियों और नए अवसरों को समझना इस सत्र का एक अहम हिस्सा रहा.
विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक समझ बढ़ाने का अवसर
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ उद्योग जगत के अनुभवों को समझने का अवसर मिला. ऐसे संवाद विद्यार्थियों को अपने करियर की संभावनाओं को पहचानने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद कर सकते हैं.
जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भारी नुकसान उठाते हुए 29.20 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर कर्ज को शेयरों में बदला, वहीं प्रमोटर परिवार ने 5.62 रुपये प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया और अब कर्जमुक्त कंपनी में पहले से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ बाहर आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
प्रमोटर्स को फायदा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नुकसान
पीसी ज्वैलर के कर्ज को इक्विटी में बदलने के समझौते की पूरी कहानी
पीसी ज्वैलर का कहना है कि वह कर्जमुक्त हो गई है. कंपनी की ओर से दाखिल दस्तावेज बताते हैं कि ऐसा कैसे हुआ. एसबीआई के नेतृत्व में 14 कर्जदाताओं, जिनमें ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक थे, ने करीब 1,510 करोड़ रुपये के कर्ज को शेयरों में बदल दिया, जबकि उस समय उन शेयरों का बाजार मूल्य लगभग आधा था. इस बीच, प्रमोटर परिवार ने बैंकों की कीमत के पांचवें हिस्से पर भुगतान करके अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली.
25 सितंबर, 2026 को पीसी ज्वैलर ने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि उसने एसबीआई के नेतृत्व वाले कर्जदाता समूह के सभी 14 बैंकों का भुगतान कर दिया है और उन्हें उनके 'अनापत्ति सह बकाया-मुक्ति सह रिहाई' पत्र मिल गए हैं. कंपनी ने इसे अपने कारोबार में बदलाव और सुधार की कहानी बताया. हालांकि, कंपनी के दस्तावेज बताते हैं कि कर्जदाताओं को किस तरह भुगतान किया गया.
2023 तक कंपनी पर बैंकों का 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था और करीब 3,466 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट की खबर सामने आई थी. दिसंबर 2023 में एसबीआई ने नई दिल्ली स्थित पीसी ज्वैलर की दो संपत्तियों पर कब्जा कर लिया. इसी वित्त वर्ष के दौरान एसबीआई ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में दिवाला याचिका भी दायर की. दिवाला प्रक्रिया के तहत डिफॉल्ट करने वाले प्रमोटर कंपनी का नियंत्रण खो सकते हैं, क्योंकि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की धारा 29A ऐसे प्रमोटर्स को कंपनी को दोबारा खरीदने के लिए बोली लगाने से रोकती है.
एसबीआई ने मामले को उसके अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंचाया. मार्च 2024 में उसने कंपनी के एकमुश्त निपटान प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. 30 अप्रैल, 2024 को एनसीएलटी ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.
सबसे बड़ा सवाल
30 सितंबर, 2024 को हुए समझौते के दो हिस्से थे: किस्तों में नकद भुगतान और कर्ज के एक हिस्से को शेयरों में बदलना. 17 मार्च, 2025 को 14 बैंकों को 29.20 रुपये प्रति शेयर की दर से 51.71 करोड़ शेयर आवंटित किए गए. इसके जरिए 1,509.97 करोड़ रुपये का कर्ज निपटाया गया.
बैंक शेयरों के जरिए निपटाया गया कर्ज
भारतीय स्टेट बैंक 515.81 करोड़ रुपये
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 242.35 करोड़ रुपये
पंजाब नेशनल बैंक 204.30 करोड़ रुपये
इंडियन बैंक 101.47 करोड़ रुपये
बैंक ऑफ इंडिया 86.82 करोड़ रुपये
इंडियन ओवरसीज बैंक 85.16 करोड़ रुपये
केनरा बैंक 81.69 करोड़ रुपये
शेयर आवंटन के समय इस शेयर का भाव करीब 14.40 रुपये बताया गया था. इस कीमत पर बैंकों को मिले शेयरों का मूल्य लगभग 745 करोड़ रुपये था. यानी निपटाए गए कर्ज और उस दिन बाजार में शेयरों के मूल्य के बीच करीब 765 करोड़ रुपये का अंतर था. यह अंतर केवल कर्ज को शेयरों में बदलने की कीमत के कारण था. इसमें निपटान के नकद हिस्से में किसी भी तरह की कटौती शामिल नहीं है.
कंपनी की ओर से दाखिल दस्तावेज में केवल इतना कहा गया है कि 29.20 रुपये की कीमत सेबी के पूंजी निर्गम संबंधी नियमों के अध्याय V के तहत निर्धारित कीमत से कम नहीं थी.
दस्तावेज यह नहीं बताते कि जिन कर्जदाताओं ने कर्ज लेने वाली कंपनी को दिवाला अदालत तक पहुंचाया था, उन्होंने बाजार भाव से लगभग दोगुनी कीमत पर शेयर क्यों स्वीकार किए.
प्रमोटर्स ने किस कीमत पर खरीदे शेयर
बैंकों ने 29.20 रुपये प्रति शेयर चुकाए. प्रमोटर परिवार ने 5.62 रुपये प्रति शेयर का भुगतान किया.
जुलाई 2024 में, निपटान समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले, कंपनी के बोर्ड ने 56.20 रुपये प्रति शेयर की दर से 2,705 करोड़ रुपये के शेयर वारंट को मंजूरी दी थी. एक के बदले 10 शेयर के स्टॉक स्प्लिट के बाद यह कीमत 5.62 रुपये प्रति शेयर रह गई. रिपोर्टों के अनुसार, प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी करीब 850 करोड़ रुपये थी. जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच प्रमोटर समूह से जुड़े तीन शेयरधारकों ने वारंट को करीब 82 करोड़ शेयरों में बदला. इनमें बलराम गर्ग (HUF), पूजा गर्ग और न्यू ट्रैक गारमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे.
उन्होंने कितना भुगतान किया: करीब 463 करोड़ रुपये
बैंकों की कीमत पर इन्हीं शेयरों को खरीदने में कितना खर्च होता: करीब 2,404 करोड़ रुपये.
जनवरी में वारंट को शेयरों में बदलने की प्रक्रिया से ही प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 36.85% से बढ़कर 40.94% हो गई. मार्च के अंत तक यह करीब 41% पहुंच गई. बाद में अन्य निवेशकों को शेयर आवंटित होने के बाद अब समूह के पास 39.10% हिस्सेदारी है. 17 अक्टूबर को 16.28 रुपये के बंद भाव के आधार पर इसका मूल्य 6,200 करोड़ रुपये से अधिक है. जिस एसबीआई ने कंपनी को दिवाला अदालत तक पहुंचाया था, उसके पास मार्च 2025 तक कंपनी की 2.70% हिस्सेदारी थी.
प्रमोटर समूह के अलावा 31 अन्य निवेशकों को भी 5.62 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए थे.
बैंकों ने क्या छोड़ा
कर्ज चुकाए जाने के बाद कर्जदाताओं ने गिरवी रखी गई संपत्तियों और अन्य प्रतिभूतियों को मुक्त कर दिया है. अब कर्ज की किसी भी कमी की भरपाई उन संपत्तियों से नहीं की जा सकती. पीसी ज्वैलर ने यह खुलासा नहीं किया है कि समझौते के तहत कुल कितना नकद भुगतान किया गया, बैंकों के बीच इसका बंटवारा कैसे हुआ या किस्तों का भुगतान किस समय-सारणी के अनुसार किया गया. बैंकों ने भी यह नहीं बताया है कि उन्होंने कितनी रकम को बट्टे खाते में डाला. कंपनी के कर्ज का ज्यादातर हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास था.
ऑडिट में अब भी उठाए गए सवाल
पीसी ज्वैलर के ऑडिटरों ने कंपनी के खातों पर कुछ आपत्तियां दर्ज की हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात ग्राहकों को दी गई 513.65 करोड़ रुपये की छूट में से 183.16 करोड़ रुपये के लिए विदेशी मुद्रा लेनदेन संभालने वाले बैंक की मंजूरी नहीं है. निर्यात ग्राहकों से लंबे समय से बकाया रकम पर संभावित नुकसान के लिए कुल 281.40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. ऑडिटरों ने कहा है कि वे इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते कि यह प्रावधान पर्याप्त है या नहीं.
कंपनी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत आवेदन किया है, ताकि निर्यात से प्राप्त रकम को वापस लाने में हुई देरी को माफ किया जा सके. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने करीब 710 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया. यह वह साल था, जब निपटान के कारण कंपनी को ब्याज लागत से काफी हद तक राहत मिली.
कंपनी का पक्ष
जुलाई 2024 में शेयर वारंट की घोषणा के समय प्रबंध निदेशक बलराम गर्ग ने कहा था कि जुटाई गई रकम का करीब 75% हिस्सा बैंक कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा. 5.62 रुपये प्रति शेयर की कीमत सेबी के तय फॉर्मूले के आधार पर निर्धारित की गई थी, जब शेयर का कारोबार काफी निचले स्तर पर हो रहा था. यदि समझौता नहीं होता, तो दिवाला प्रक्रिया के तहत कर्जदाताओं को इससे भी कम रकम मिल सकती थी.
हालांकि, इनमें से कोई भी बात इस सवाल का जवाब नहीं देती कि कर्जदाताओं ने प्रमोटर्स की कीमत से पांच गुना अधिक कीमत क्यों चुकाई.
जिन सवालों के जवाब नहीं मिले
अब इन सवालों के जवाब एसबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को देने हैं:
- 29.20 रुपये प्रति शेयर की कीमत को किसने मंजूरी दी और किस मूल्यांकन के आधार पर?
- कर्जदाता समूह को वास्तव में कितना नकद भुगतान मिला?
- प्रत्येक बैंक ने कितनी रकम बट्टे खाते में डाली?
- क्या जारी की गई प्रतिभूतियों में प्रमोटर्स की कोई व्यक्तिगत गारंटी भी शामिल थी, जिसे बाद में मुक्त कर दिया गया? कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में केवल उसकी सहायक कंपनी लग्जरी प्रोडक्ट्स ट्रेंडसेटर की कॉरपोरेट गारंटी का उल्लेख है.
पीसी ज्वैलर अब कर्जमुक्त है और उसके प्रमोटर्स के पास डिफॉल्ट से पहले की तुलना में कंपनी की अधिक हिस्सेदारी है. बैंकों के पास कर्ज से मुक्ति के पत्र, कंपनी में छोटी अल्पांश हिस्सेदारी और कागजों पर दर्ज ऐसी कमी रह गई है, जिसका उन्होंने अब तक खुलासा नहीं किया है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री तथा द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के निडर लेखक हैं. उनकी चर्चित खोजपरक रिपोर्टिंग ने भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पक्ष को उजागर किया है.
मुंबई में करीब दो दशकों तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल करके अपनी पहचान बनाई है. उनकी रिपोर्टें भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों और प्रकाशनों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुई हैं. उनकी पैनी रिपोर्टिंग ने कई अहम मुद्दों पर विमर्श को आकार दिया है और कॉरपोरेट जगत में हलचल पैदा की है.
19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई में होने वाले गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक आधुनिक और जटिल रूप ने ले ली है. अब कॉरपोरेट इमारतों के भीतर सफेदपोश अपराध की योजनाएं बनाई जा रही थीं. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' वाली अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए.
शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, पलक का काम उच्च वित्तीय जगत की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को उजागर करता है, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज बनाती है. वे यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले लोगों को बेनकाब करने से नहीं हिचकते.)
दो साल तक रिटेल निवेशकों ने अपने ब्रोकरों के पैसे से शेयर खरीदे. अब उसका असर सामने आ रहा है. बिकवाली सट्टेबाजी वाले छोटे हिस्से से निकलकर बाजार के बाकी हिस्सों में भी फैल गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
रिटेल निवेशकों की बिकवाली
1.56 लाख करोड़ रुपये का लीवरेज और बिकवाली शुरू
बुधवार सुबह दलाल स्ट्रीट को देखकर लग रहा था कि बाजार ने खुद को संभाल लिया है. प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले और करीब 1% तक चढ़ गए. लेकिन दोपहर होते-होते सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से 1,300 अंकों से ज्यादा नीचे आ गया और निवेशकों की 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खत्म हो गई. निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.37% की गिरावट आई. मिडकैप 100 भी 1.58% टूट गया. इससे भी अहम बात यह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों, दोनों ने बाजार में शुद्ध खरीदारी की, इसके बावजूद बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई.
गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में फिर 800 अंकों की गिरावट आई, जबकि निफ्टी करीब 240 अंक नीचे आ गया.
110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुके कच्चे तेल ने संकट की चिंगारी भड़काई. उधार के पैसे ने इस आग को फैलाने का काम किया.
अब दबाव मार्जिन खातों से निकलकर उन शेयरों तक पहुंच रहा है, जिन्हें लोगों ने अपने पैसे से खरीदा था और वर्षों से अपने पास रखा हुआ था. यही बाजार में संक्रमण जैसी स्थिति है. इसका मतलब केवल किसी एक शेयर का गिरना नहीं है, बल्कि बाजार के एक हिस्से में हुए नुकसान के कारण दूसरे हिस्सों में भी बिकवाली शुरू हो जाना है.
1.56 लाख करोड़ रुपये की बुक
19 अक्टूबर को भारत की मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) बुक 1,56,150 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. वित्त वर्ष 2022-23 में यह 24,920 करोड़ रुपये थी. यानी करीब तीन साल में इसमें छह गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.
बाजार के आकार के मुकाबले यह बुक अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. यह एनएसई के बाजार मूल्य का करीब 0.32% है, जो अब तक का रिकॉर्ड है. आमतौर पर यह अनुपात 0.03% से 0.16% के बीच रहता था.
सबसे चिंताजनक बात इसका समय है. इस उधारी का ज्यादातर हिस्सा उस दौरान आया, जब बाजार में कोई खास तेजी नहीं थी या बाजार गिर रहा था. जनवरी के उच्चतम स्तर से निफ्टी 8 अक्टूबर के निचले स्तर तक करीब 16% गिर गया. विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों से 3.08 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. रिटेल निवेशकों ने विदेशी निवेशकों के बेचे हुए शेयर खरीदे और इसके लिए उधार के पैसे का इस्तेमाल किया.
नीतिगत फैसलों ने भी उन्हें इस दिशा में धकेलने में भूमिका निभाई. केंद्रीय बजट 2026-27 में डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार से बाहर हुए ट्रेडर्स ने सट्टेबाजी बंद नहीं की. वे कैश मार्केट में चले गए और अपने साथ लीवरेज भी ले आए. यानी उधारी खत्म नहीं हुई, बल्कि बाजार के ऐसे हिस्से में पहुंच गई, जिस पर अपेक्षाकृत कम निगरानी रहती है.
कैसे फैलती है यह आग
जब मार्जिन पर खरीदा गया कोई शेयर गिरता है, तो ब्रोकर ग्राहक से अतिरिक्त पैसे जमा करने के लिए कहता है. अगर ग्राहक ऐसा नहीं कर पाता, तो ब्रोकर उसके शेयर बेच देता है. यह सामान्य प्रक्रिया है.
लेकिन बाजार में संक्रमण जैसी स्थिति तब पैदा होती है, जब ग्राहक नुकसान से बचने के लिए दूसरे शेयर बेचने लगता है. जी बिजनेस के संपादक अनिल सिंघवी ने कहा कि मार्जिन कॉल का सामना कर रहे ट्रेडर्स दूसरे शेयरों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुनाफे वाले निवेश और डिलीवरी वाले शेयर बेच रहे थे. इस तरह लीवरेज पर खरीदे गए किसी स्मॉलकैप शेयर में आई गिरावट एक मजबूत कंपनी के शेयरों में भी बिकवाली का कारण बन जाती है, जिसे निवेशक वास्तव में पसंद करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसके पास बेचने के लिए वही शेयर बचे होते हैं.
ब्रोकर भी कर्ज देना बंद करके इस दबाव को बढ़ा रहे हैं. मोरपेन लैबोरेटरीज के शेयर चार कारोबारी सत्रों में करीब 18% गिर गए, क्योंकि कई ब्रोकरों ने इसमें फंडिंग बंद कर दी. इस शेयर को एक्सचेंज की सबसे सख्त निगरानी श्रेणी में भी डाल दिया गया, जहां खरीदारों को पूरी रकम यानी 100% भुगतान पहले करना होता है. 12 से 19 अक्टूबर के बीच मार्जिन फंडिंग वाले दर्जनों अन्य शेयर भी एक्सचेंज की निगरानी के दायरे में आ गए. इनमें से हर शेयर पर लगाई गई पाबंदी अगले लीवरेज वाले खरीदार के लिए रास्ता बंद कर देती है.
एक्सचेंज के आंकड़े बताते हैं कि यह रुझान अब पलट गया है. अक्टूबर के शुरुआती 12 कारोबारी दिनों में 45,840 करोड़ रुपये की मार्जिन पोजीशन बंद की गईं, जबकि 43,270 करोड़ रुपये की नई पोजीशन खोली गईं. इंफोसिस में मार्जिन एक्सपोजर करीब 31%, टीसीएस में 34% और विप्रो में 30% घट गया. ये आंकड़े 19 अक्टूबर तक के हैं, इसलिए बुधवार को हुए नुकसान इनमें शामिल नहीं हैं. जो लोग कह रहे हैं कि स्थिति अभी नियंत्रण में है, वे ऐसे आंकड़ों पर भरोसा कर रहे हैं, जो बाजार की ताजा स्थिति को अभी पूरी तरह नहीं दिखाते.
किसे हुआ फायदा
ब्रोकरों को इससे कमाई हुई और अब भी हो रही है. अनुमान है कि निवेशक एमटीएफ पर हर साल करीब 19,500 करोड़ रुपये ब्याज चुकाते हैं. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने सितंबर के अंत में 25,553 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड एमटीएफ बुक की जानकारी दी. ग्रो ने भी 4,351 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड एमटीएफ बुक दर्ज की. मार्जिन फंडिंग अब उस उद्योग के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बन गई है, जहां कभी ब्रोकर शून्य ब्रोकरेज की पेशकश के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते थे.
इसे एक सुविधा के तौर पर पेश किया गया था: अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें और अपने पैसे से चार गुना तक निवेश करें. द केन ने इसकी तुलना शेयरों में लागू बाय-नाउ-पे-लेटर कर्ज से की थी. हालांकि, इसमें एक बड़ा अंतर है. किस्तों पर खरीदे गए फोन की कीमत बनी रह सकती है, लेकिन मार्जिन पर खरीदा गया कोई स्मॉलकैप शेयर एक सप्ताह में अपनी कीमत का पांचवां हिस्सा गंवा सकता है.
नियामक ने इस मामले में धीरे कदम उठाए. सेबी ने रिटेल निवेशकों के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस कारोबार पर सख्ती की, लेकिन सट्टेबाजी मार्जिन खातों में चली गई. एमटीएफ पर जून 2026 में जारी सेबी के परामर्श पत्र का मुख्य जोर कोलेटरल के नियमों में एकरूपता लाने और परिचालन संबंधी अड़चनों को कम करने पर था. इसमें एमटीएफ बुक की बढ़ती रफ्तार को धीमा करने की कोशिश नहीं की गई.
अब चुकानी होगी इसकी कीमत
एमटीएफ बुक सितंबर के अंत में करीब 1.59 लाख करोड़ रुपये के अपने उच्चतम स्तर से केवल 1.6% नीचे है. यानी ज्यादातर लीवरेज अब भी बाजार में मौजूद है और अगले खराब कारोबारी दिन का इंतजार कर रहा है.
बाजार पहले भी ऐसी स्थिति देख चुका है. मार्च 2026 में एमटीएफ बुक एक महीने में करीब 8% सिकुड़ गई थी और इसके बाद बाजार में रिकवरी आ गई थी. लेकिन इस बार परिस्थितियां ज्यादा खराब हैं. कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, विदेशी निवेशक अब भी बिकवाली कर रहे हैं और लगभग हर दिन स्मॉलकैप शेयर एक्सचेंज की निगरानी के दायरे में आ रहे हैं.
रिटेल निवेशकों को इसकी दोहरी कीमत चुकानी पड़ रही है. शेयर बढ़े या नहीं, उन्हें हर दिन ब्याज देना पड़ता है. और जब शेयर गिरते हैं, तो उन्हें सबसे खराब कीमत पर मजबूरी में बिकवाली करनी पड़ती है.
भारत में दो साल तक छोटे निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया कि शेयर बाजार उनका है. फिर उन्हें इसमें निवेश करने के लिए पैसे उधार दिए गए. अब बाजार यह पता लगा रहा है कि उस भरोसे का कितना हिस्सा वास्तव में उधार के पैसों पर टिका हुआ था.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री तथा द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के निडर लेखक हैं. उनकी चर्चित खोजपरक रिपोर्टिंग ने भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पक्ष को उजागर किया है.
मुंबई में करीब दो दशकों तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल करके अपनी पहचान बनाई है. उनकी रिपोर्टें भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों और प्रकाशनों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुई हैं. उनकी पैनी रिपोर्टिंग ने कई अहम मुद्दों पर विमर्श को आकार दिया है और कॉरपोरेट जगत में हलचल पैदा की है.
19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई में होने वाले गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक आधुनिक और जटिल रूप ने ले ली है. अब कॉरपोरेट इमारतों के भीतर सफेदपोश अपराध की योजनाएं बनाई जा रही थीं. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' वाली अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए.
शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, पलक का काम उच्च वित्तीय जगत की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को उजागर करता है, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज बनाती है. वे यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले लोगों को बेनकाब करने से नहीं हिचकते.)
FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नेस्ले के शिशु आहार उत्पाद 'लैक्टोजेन प्रो 1' में व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने के दावे, जबकि कॉम्प्लान के '2X तेजी से विकास' के दावे पर नियामक ने सवाल उठाए हैं. दोनों कंपनियों से अपने दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण पेश करने को कहा गया है. यह कार्रवाई खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की जांच के तहत की गई है.
लैक्टोजेन के पाचन संबंधी दावे पर सवाल
FSSAI ने नेस्ले इंडिया को उसके शिशु आहार उत्पाद लैक्टोजेन प्रो 1 को लेकर नोटिस भेजा है. नियामक के अनुसार, उत्पाद की पैकेजिंग या विज्ञापन सामग्री में दावा किया गया है कि इसमें मौजूद व्हे प्रोटीन आसानी से पच जाता है.
व्हे प्रोटीन दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन है. FSSAI ने नेस्ले से इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और जरूरी दस्तावेज मांगे हैं. कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब और संबंधित सबूत जमा करने को कहा गया है.
कॉम्प्लान के '2X तेजी से विकास' के दावे की जांच
कॉम्प्लान बनाने वाली कंपनी जायडस वेलनेस को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस उत्पाद के '2X तेजी से विकास' के दावे को लेकर है. नियामक ने कंपनी से इस दावे को प्रमाणित करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य पेश करने को कहा है.
FSSAI की कार्रवाई का उद्देश्य यह जांचना है कि खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जा रहे दावे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं या नहीं. नियामक ने खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों को नियमों के अनुरूप लेबलिंग और विज्ञापन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है.
भ्रामक विज्ञापनों पर FSSAI की सख्ती
खाद्य नियामक की यह कार्रवाई पैकेटबंद खाद्य और पेय उत्पादों की लेबलिंग तथा विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की निगरानी बढ़ाने के बीच हुई है. FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने इस महीने की शुरुआत में 'द इकोनॉमिक टाइम्स' को बताया था कि नियामक ने हाल के महीनों में खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली 150 से अधिक कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं.
ये नोटिस उत्पादों की सामग्री के बारे में भ्रामक दावों से लेकर लेबलिंग संबंधी नियमों का पालन नहीं करने जैसे मामलों में दिए गए हैं. नियामक का मानना है कि बड़ी खाद्य कंपनियों को नियमों का पालन करने और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावों से बचने के मामले में उदाहरण पेश करना चाहिए.
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी नियम सख्त करने की तैयारी
FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है. इसके तहत उत्पादों की निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बैच नंबर जैसी जानकारियां उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है.
इस पहल का उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के बारे में जरूरी जानकारी देना और उन्हें सोच-समझकर खरीदारी करने में मदद करना है.
नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को जारी किए गए नोटिस के बाद अब इन कंपनियों के जवाब और दावों के समर्थन में पेश किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे. फिलहाल, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित दावे नियामक की जांच में अंतिम रूप से भ्रामक साबित हो चुके हैं.
RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. हालांकि, अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार के बीच महंगाई का बढ़ता दबाव केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के कार्यवृत्त में कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ने से आर्थिक विकास की संभावनाओं पर जोखिम पैदा हो सकता है. वहीं, कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है.
चार साल बाद RBI ने बढ़ाई ब्याज दर
RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार था, जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के मौजूदा माहौल के बीच RBI के लिए मौद्रिक नीति में पर्याप्त अंतर बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
महंगाई का दायरा बढ़ने से बढ़ी चिंता
RBI गवर्नर ने अपने वक्तव्य में महंगाई के व्यापक होने के संकेतों पर चिंता जताई. बैठक के कार्यवृत्त के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी में शामिल 37% वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में 4% से अधिक थी. मार्च में ऐसी वस्तुओं का अनुपात केवल 20% था.
यह आंकड़ा संकेत देता है कि महंगाई का दबाव पहले की तुलना में अधिक वस्तुओं तक फैल रहा है. ऐसे में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ महंगाई को नियंत्रित करना केंद्रीय बैंक के लिए अहम चुनौती बन गया है.
मजबूत अर्थव्यवस्था से RBI को भरोसा
वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है. इसी आधार पर RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान अगस्त में लगाए गए 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. यह पिछले अनुमान से 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि के कारण वह विकास दर पर बड़ा नकारात्मक असर पड़े बिना कुछ हद तक मौद्रिक सख्ती को सहन कर सकती है. हालांकि, महंगाई के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर आगे का फैसला आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगा.
दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट
आने वाले महीनों में रेपो रेट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अनुमान जताया है कि महंगाई का दबाव जारी रहने पर RBI दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर सकता है. कुछ विश्लेषकों को फरवरी की बैठक में भी इतनी ही बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है.
अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो लगातार तीन मौद्रिक नीति बैठकों में कुल 0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, यह फिलहाल विश्लेषकों का अनुमान है, RBI की ओर से भविष्य की ब्याज दरों को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं की गई है.
आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, आर्थिक विकास की गति और वैश्विक परिस्थितियां RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगी. केंद्रीय बैंक के सामने अब आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और महंगाई पर काबू पाने के बीच संतुलन साधने की चुनौती है.
बुधवार को सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 फीसदी गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 फीसदी टूटकर 22,811.35 पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत कमजोर रहने की आशंका है. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच GIFT Nifty करीब 50 अंक गिरकर 22,690 के आसपास पहुंच गया, जो 22,700 के अहम स्तर से नीचे है. बुधवार को घरेलू बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे. ऐसे में गुरुवार को बाजार में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखने को मिल सकती है. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के कारण भी कारोबार में उतार-चढ़ाव रहने की आशंका है.
पिछले कारोबारी सत्र में कैसा रहा बाजार?
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन कारोबार के दौरान मुनाफावसूली हावी हो गई. सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 फीसदी गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 फीसदी टूटकर 22,811.35 पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 1,400 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई, जबकि निफ्टी 22,700 के नीचे तक फिसल गया था.
बाजार में बिकवाली के कारण BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 6.13 लाख करोड़ रुपये घटकर 461.80 लाख करोड़ रुपये रह गया. सोमवार को बाजार बंद होने के बाद यह 467.93 लाख करोड़ रुपये था.
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो IT शेयरों को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में दबाव रहा. निफ्टी के 34 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि बजाज फाइनेंस करीब 3.2 फीसदी टूटकर प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा. दूसरी ओर, इंफोसिस, HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और TCS जैसे IT शेयरों में 2-3 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. IT शेयरों की मजबूती के बावजूद दूसरे सेक्टरों में बिकवाली ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा.
क्रूड ऑयल 110 डॉलर के पार, बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हैं. ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि WTI क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा कंपनियों की लागत, मुनाफे और रुपये की चाल भी प्रभावित हो सकती है.
भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.43 फीसदी तक पहुंच गई है, जो 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी की लागत बढ़ सकती है और शेयरों के मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है.
एशियाई बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं. शुरुआती कारोबार में जापान का निक्केई 225 करीब 0.30 फीसदी नीचे था, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी एक फीसदी से ज्यादा गिरा. महंगे तेल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं.
निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर अहम
टेक्निकल विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा. बुधवार को आखिरी आधे घंटे में आई रिकवरी के कारण इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा था. अब इस स्तर को बनाए रखना बाजार के लिए अहम होगा. ऊपर की ओर 23,000 के आसपास निफ्टी को प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, जहां बिकवाली बढ़ने की आशंका है.
बैंक निफ्टी के लिए 54,500 से 55,500 की रेंज महत्वपूर्ण मानी जा रही है. विश्लेषकों के मुताबिक, लगातार 56,000 के ऊपर बंद होने पर ही इसमें तेजी की मजबूती का संकेत मिल सकता है. बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगी.
जियो प्लेटफॉर्म्स IPO को पहले दिन अच्छा रिस्पॉन्स
बाजार में कमजोरी के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को पहले दिन निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू कुल 2.8 गुना सब्सक्राइब हुआ. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की कैटेगरी 8.4 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों की कैटेगरी 1.4 गुना सब्सक्राइब हुई. रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में करीब 60 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला, जबकि कर्मचारियों की कैटेगरी 1.2 गुना और पात्र शेयरधारकों की कैटेगरी 1.3 गुना भरी. गुरुवार को IPO का दूसरा दिन है और निवेशकों की नजर सब्सक्रिप्शन के नए आंकड़ों पर रहेगी.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुवार को Eternal (जोमैटो), महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, NHPC, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाटा कम्युनिकेशंस, ओला इलेक्ट्रिक, KEI इंडस्ट्रीज और PC ज्वेलर के शेयर चर्चा में रह सकते हैं. Eternal का सितंबर तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 92 फीसदी बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन से राजस्व 78 फीसदी बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये पहुंच गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज का स्टैंडअलोन मुनाफा 54.8 फीसदी बढ़कर 881.5 करोड़ रुपये और शुद्ध ब्याज आय 13.2 फीसदी बढ़कर 2,391.4 करोड़ रुपये रही. NHPC ने सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की 250 मेगावॉट क्षमता वाली पांचवीं यूनिट का व्यावसायिक संचालन शुरू किया है. BEL को 13 अक्टूबर के बाद से 1,011 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं. टाटा कम्युनिकेशंस की स्पेन स्थित सहायक कंपनी को अदालत से राहत मिली है. अदालत ने 1.55 करोड़ यूरो की वैट मांग और 1.81 करोड़ यूरो का जुर्माना रद्द कर दिया है. ओला इलेक्ट्रिक का राइट्स इश्यू 22 अक्टूबर से खुल रहा है. कंपनी 27 रुपये प्रति शेयर की दर से करीब 999.54 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.
KEI इंडस्ट्रीज का सितंबर तिमाही में राजस्व सालाना आधार पर 38.5 फीसदी बढ़कर 3,776 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 28.7 फीसदी बढ़कर 262 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, कंपनी का एबिटा और मुनाफा बाजार के अनुमानों से कम रहा. PC ज्वेलर का शुद्ध मुनाफा 58 फीसदी बढ़कर 331.1 करोड़ रुपये और राजस्व 27.8 फीसदी बढ़कर 1,054.5 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके अलावा HD फायर प्रोटेक्ट में एलियांज ग्लोबल इन्वेस्टर्स की ओर से 55.73 करोड़ रुपये की शेयर खरीदारी हुई है.
आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे
गुरुवार को स्विगी, कोलगेट-पामोलिव इंडिया, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी टोटल गैस, ब्लूस्टोन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल, चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण, साएजिलिटी, हैवेल्स इंडिया और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इनके अलावा जम्मू एंड कश्मीर बैंक, जिंदल स्टेनलेस, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट, नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन, रैलिस इंडिया, सैफायर फूड्स इंडिया और टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.
कुल मिलाकर, गुरुवार को बाजार की दिशा ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों से तय हो सकती है. निवेशकों के लिए निफ्टी का 22,800 का स्तर अहम रहेगा, जबकि 23,000 के आसपास तेजी को प्रतिरोध मिल सकता है. ऐसे माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव और चुनिंदा शेयरों में हलचल बने रहने की आशंका है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल 28 अक्टूबर को लॉन्च हो सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसके प्रोडक्ट और बिजनेस मॉडल को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
Eternal के वाइस चेयरमैन दीपिंदर गोयल ने बुधवार, 21 अक्टूबर को अपनी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल Dark.ai का संकेत दिया. Zomato और Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal की यह पहल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और कदम मानी जा रही है. कंपनी ने संकेत दिया है कि यह वेंचर जल्द ही लॉन्च होगा.
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब गोयल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार की संभावनाएं तलाश रहे हैं. हालांकि, Eternal ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि Dark.ai के तहत कौन-सा प्रोडक्ट या सेवा पेश की जाएगी, इसके संभावित ग्राहक कौन होंगे और कंपनी इससे कमाई कैसे करेगी. ऐसे में समूह के कारोबार में इसकी भूमिका फिलहाल स्पष्ट नहीं है.
Dark.ai: अब तक क्या पता चला है?
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नई पहल की जानकारी दी. उन्होंने इसे “Eternal के घर से” बताते हुए लिखा, “Coming soon”. पोस्ट में कंप्यूटर मॉनिटर और लैपटॉप पर “DARK BY ETERNAL” की ब्रांडिंग दिखाई गई, लेकिन इसके पीछे की तकनीक या संभावित इस्तेमाल के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai एक AI मॉडल होगा, सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट होगा, उपभोक्ताओं के लिए कोई सेवा होगी या कंपनियों के इस्तेमाल के लिए टेक्नोलॉजी समाधान होगा. Eternal ने इस वेंचर में निवेश, इसके नेतृत्व या बिजनेस मॉडल से जुड़ी जानकारी भी साझा नहीं की है.
डिलीवरी से आगे गोयल के टेक्नोलॉजी निवेश
Dark.ai, गोयल की टेक्नोलॉजी से जुड़ी पहल Temple के बाद सामने आया है. Temple एक हेल्थ-टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट है, जिसके तहत मस्तिष्क में रक्त प्रवाह (सेरेब्रल ब्लड फ्लो) की निगरानी करने वाला एक पहनने योग्य डिवाइस विकसित किया जा रहा है. यह पहल Temple Private Limited के माध्यम से विकसित की जा रही है और Eternal के मुख्य उपभोक्ता कारोबार से अलग है.
Eternal के अंतर्गत Zomato, Blinkit, Hyperpure और District जैसे कारोबार आते हैं. Dark.ai की लॉन्चिंग से समूह के टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो का विस्तार हो सकता है, लेकिन इसका मौजूदा कारोबार से क्या संबंध होगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.
यह भी स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai Eternal के मौजूदा कारोबार को तकनीकी सहायता देने के लिए विकसित किया जाएगा या इसे एक स्वतंत्र प्रोडक्ट के रूप में पेश किया जाएगा.
Eternal के तिमाही नतीजों के दिन आया ऐलान
Dark.ai को लेकर यह संकेत ऐसे दिन आया है, जब Eternal को 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं. कंपनी के लिए यह पहल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने की दिशा में एक और कदम हो सकती है. हालांकि, इसके वास्तविक कारोबारी प्रभाव का आकलन प्रोडक्ट, बिजनेस मॉडल और कंपनी की आगे की योजनाओं की जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा.
इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 92.3% बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 65 करोड़ रुपये था. हालांकि, कंपनी का मुनाफा बाजार के 304 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा.
कंपनी का परिचालन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 77.6% बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 13,590 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA भी बढ़कर 752 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 239 करोड़ रुपये था.
हालांकि, कंपनी के कुल खर्च में भी तेज बढ़ोतरी हुई. दूसरी तिमाही में कुल खर्च 75% बढ़कर 24,166 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 13,813 करोड़ रुपये था.
Eternal के क्विक कॉमर्स कारोबार Blinkit का रेवेन्यू तिमाही के दौरान लगभग दोगुना हो गया. इसके एडजस्टेड EBITDA में भी सुधार हुआ और यह 156 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया.
फूड डिलीवरी कारोबार की ग्रोथ 21.5% रही
Eternal के फूड डिलीवरी कारोबार Zomato ने दूसरी तिमाही में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में सालाना आधार पर 21.5% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 11,445 करोड़ रुपये हो गई. कंपनी के मुताबिक, लगातार पांच तिमाहियों से इस कारोबार की ग्रोथ में तेजी आ रही है.
इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.
कंपनी के औसत मासिक लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या सालाना आधार पर 16% बढ़कर 2.8 करोड़ हो गई. कंपनी के संस्थापक और CEO दीपिंदर गोयल ने कहा कि हालिया ग्रोथ की मुख्य वजह अधिक ग्राहकों का खाना ऑर्डर करना और मौजूदा ग्राहकों द्वारा ज्यादा बार ऑर्डर देना है.
गोयल ने फूड डिलीवरी कारोबार में सालाना 20% से अधिक ग्रोथ की कंपनी की दीर्घकालिक उम्मीद को दोहराया. उन्होंने कहा कि इस कारोबार की NOV वित्त वर्ष 2021-22 के 18,160 करोड़ रुपये से दोगुने से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 37,993 करोड़ रुपये हो गई. इस दौरान इसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 20% रही.
Blinkit मुनाफे में आया
Eternal के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 79.3% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 20,940 करोड़ रुपये हो गई. पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 22.2% की वृद्धि हुई. कंपनी ने तिमाही के दौरान 308 नए स्टोर जोड़े. इसके साथ ही Blinkit के कुल स्टोर की संख्या बढ़कर 2,751 हो गई.
Blinkit का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन लगातार छठी तिमाही में बेहतर हुआ और NOV का 0.9% रहा. इसका एडजस्टेड EBITDA 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में 156 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.
District और Hyperpure के प्रदर्शन में सुधार
Eternal के आउटिंग कारोबार District ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 58% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 3,259 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले इसकी ग्रोथ 1.3% तक सीमित रही.
District का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के लगभग बराबर 64 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -3.1% से सुधरकर NOV का -2% हो गया.
Eternal के बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सप्लाई कारोबार Hyperpure ने 1,154 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. समान आधार पर इसमें 22.7% की वृद्धि हुई. Hyperpure का एडजस्टेड EBITDA भी 5 करोड़ रुपये के नुकसान से सुधरकर 10 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया. इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -0.5% से सुधरकर 0.9% हो गया.
ग्रोथ के लिए निवेश जारी रखेगी कंपनी
Eternal के अन्य कारोबारों, जिनमें Bistro और Nugget शामिल हैं, ने 132 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह 95 करोड़ रुपये था. इन कारोबारों का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के 94 करोड़ रुपये से घटकर 91 करोड़ रुपये रह गया.
दीपिंदर गोयल ने कहा कि कंपनी अपने प्रदर्शन का आकलन करते समय किसी एक तिमाही के नतीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देती. उन्होंने कहा कि ऐप खुलने की संख्या, नए ग्राहकों को जोड़ने और बाजार हिस्सेदारी जैसे संकेतक सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. गोयल के मुताबिक, कंपनी उन क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी, जहां उसे आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक की व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने का आरोप
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गोपनीय व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संभावित संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के प्रमुख कारोबार और कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले इन अधिकारियों ने बाहरी पक्षों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी. हालांकि, दोनों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने संभावित सूचना लीक को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद यह जांच शुरू की गई. HDFC बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि साझा की गई जानकारी का बाद में किसी ने गलत इस्तेमाल तो नहीं किया. जांच अभी जारी है.
HDFC बैंक ने आंतरिक समीक्षा जारी होने की पुष्टि की है, लेकिन जांच में सामने आए कथित निष्कर्षों या संबंधित अधिकारियों के बारे में टिप्पणी नहीं की है. बैंक ने कहा है कि वह मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन कर रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई करेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जांच के निष्कर्ष बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड के कुछ सदस्यों के सामने रखे गए थे. दोनों अधिकारियों को भी इन निष्कर्षों के बारे में औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है. हालांकि, उनके खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
HDFC बैंक में नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव
यह जांच ऐसे समय में सामने आई है, जब HDFC बैंक के शीर्ष नेतृत्व में बड़े बदलाव हो रहे हैं. ICICI समूह के अनुभवी अधिकारी अनूप बागची 27 अक्टूबर को बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद संभालने वाले हैं.
मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन छह साल तक इस पद पर रहने के बाद पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया है. बैंक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों में शामिल डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा ने भी दिसंबर के अंत में पद छोड़ने की इच्छा जताई है.
इस साल की शुरुआत में तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने व्यक्तिगत मूल्यों और बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों के बीच मतभेदों का हवाला दिया था. इसके बाद HDFC बैंक की ओर से कराई गई स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पाया गया कि उनकी चिंताओं की पुष्टि नहीं हुई.
बाजार में बैंक की स्थिति पर भी नजर
ये घटनाक्रम भारत के बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़े बैंक के लिए महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं. HDFC बैंक का बाजार पूंजीकरण लगभग 115 अरब डॉलर है. बैंक ने ऐतिहासिक रूप से अपने सतर्क प्रबंधन, मजबूत आंतरिक नियंत्रण और लगातार लाभप्रदता के आधार पर अपनी पहचान बनाई है. हालांकि, इस साल अब तक बैंक के शेयरों में लगभग 28% की गिरावट आई है.
1994 में भारत के वित्तीय क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद स्थापित HDFC बैंक आज देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है. अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी यह बैंक एक प्रमुख निवेश विकल्प रहा है, जो भारत के उपभोक्ता और ऋण बाजारों में निवेश करना चाहते हैं.
कुनाल ललानी, के. श्रीनिवास और प्रियंका चटर्जी संभालेंगे उत्तर, दक्षिण और पूर्वी क्षेत्र की कमान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडवरटाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने विज्ञापन क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर, दक्षिण और पूर्वी भारत में तीन नए क्षेत्रीय चैप्टर शुरू किए हैं. इनका उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विज्ञापन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप काम करना और स्थानीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है.
इन क्षेत्रीय चैप्टर का नेतृत्व विज्ञापन एजेंसियों के CEO करेंगे. इन सभी को ब्रांड निर्माण और विज्ञापन सेवाओं के क्षेत्र में कई दशकों का अनुभव है. उन्होंने सरकार, वित्तीय संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और विभिन्न क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं के लिए काम किया है.
प्रत्येक चैप्टर अपने क्षेत्र के बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्यशालाओं, विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्रों और सहकर्मियों के बीच सीखने-सिखाने के कार्यक्रमों का आयोजन करेगा.
तीनों क्षेत्रीय चैप्टर की जिम्मेदारी किसे मिली?
उत्तर भारत के चैप्टर की अध्यक्षता क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड के कुनाल ललानी करेंगे. इसके सह-अध्यक्ष इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के संतोष कुमार और पैम एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के सुनील छाबड़ा होंगे.
दक्षिण भारत के चैप्टर की जिम्मेदारी स्लोका एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के के. श्रीनिवास को अध्यक्ष के रूप में सौंपी गई है. मैत्री एडवरटाइजिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के सी. मुथु सह-अध्यक्ष होंगे. पूर्वी भारत के चैप्टर की अध्यक्षता स्टैंडर्ड पब्लिसिटी प्राइवेट लिमिटेड की प्रियंका चटर्जी करेंगी.
राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन उद्योग को मजबूत करने की पहल
AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि भारत में विज्ञापन उद्योग को अधिक मजबूत और आपस में बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ बनाने के लिए क्षेत्रीय चैप्टर महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, "कुनाल, संतोष, सुनील, सी. मुथु, के. श्रीनिवास और प्रियंका के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्थानीय अनुभव और प्रतिभाएं राष्ट्रीय मानकों को आकार दें. इसका उद्देश्य एजेंसियों के नेतृत्वकर्ताओं को उन महत्वपूर्ण चर्चाओं के करीब लाना है, जो उद्योग के भविष्य को प्रभावित करती हैं."
ये क्षेत्रीय चैप्टर AAAI के राष्ट्रीय ढांचे के तहत काम करेंगे, लेकिन उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की स्वायत्तता भी होगी.