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स्टील सेक्टर की चाल सुस्त, कंपनियों के मुनाफे पर असर संभव : ICRA

ICRA की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि स्टील उद्योग को आने वाले महीनों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी तिमाही में कीमतों में गिरावट से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

स्टील सेक्टर को लेकर ICRA की हालिया रिपोर्ट कई अहम संकेत दे रही है. दरअसल, स्टील की कीमतों में हालिया सुधार के बावजूद, आगे चलकर इनकी तेज बढ़ोतरी की संभावना कम है. रिपोर्ट में बताया गया है कि दूसरी तिमाही में स्टील स्प्रेड सिकुड़ सकता है, मांग की रफ्तार धीमी हो रही है और वैश्विक कारकों जैसे अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का असर भी बाजार पर दिख रहा है. इसके साथ ही, बढ़ते आयात और धीमे निवेश चक्र के कारण घरेलू स्टील कंपनियों की चुनौतियाँ बढ़ती दिख रही हैं.

Q2 में स्टील स्प्रेड में कमी का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 (FY26) की पहली तिमाही में घरेलू स्टील कंपनियों की शुरुआत मजबूत रही थी. लेकिन दूसरी तिमाही में स्टील कीमतों में तेज गिरावट से स्टील स्प्रेड करीब 25 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक सिकुड़ सकता है.

मांग में सुस्ती

ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में स्टील की मांग की वृद्धि दर घटकर 7 से 8 प्रतिशत रह सकती है. सरकार द्वारा FY21 से FY24 तक स्टील-इंटेंसिव सेक्टर्स में जो भारी कैपेक्स किया गया था, उसकी गति अब धीमी होती दिख रही है.

अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का असर

ICRA ने बताया कि फरवरी 2025 से अमेरिका और चीन के बीच बढ़े ट्रेड वॉर का असर चीनी स्टील कीमतों पर पड़ा. जनवरी 2025 के अंत में जहां एचआरसी (हॉट-रोल्ड कॉइल) का निर्यात ऑफर 475 डॉलर प्रति टन था, वहीं जून 2025 तक यह घटकर 445 डॉलर प्रति टन पर आ गया.

आयात से घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी पर दबाव

रिपोर्ट में कहा गया कि FY2025 में ऊंचे स्तर के स्टील आयात ने घरेलू स्टील कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी को प्रभावित किया. हालांकि, SGD घोषणा के बाद फरवरी 2025 से स्टील आयात में लगातार कमी दर्ज की गई और FY26 की पहली तिमाही में यह साल-दर-साल आधार पर करीब 29% घटा. बढ़े हुए आयात की वजह से FY25 में चार साल बाद पहली बार इंडस्ट्री का क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) 80% से नीचे चला गया.

कर्ज और निवेश की स्थिति

ICRA के मुताबिक, स्टील उद्योग की बड़ी विस्तार योजनाओं ने हाल के वर्षों में कैश फ्लो को कर्ज घटाने (Deleveraging) की बजाय ग्रोथ की ओर मोड़ दिया. FY22 की ऊंचाई से कमाई घटने के बावजूद, मार्च 2025 तक स्टील सेक्टर का बैंक कर्ज 176 अमेरिकी डॉलर प्रति टन स्थापित क्षमता पर रहा, जो कि पिछले उच्चतम स्तर 450 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से काफी कम है.

 


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