वित्त मंत्री द्वारा 2024 के बजट में सोने पर आयात शुल्क कम करने की एकमात्र नीति ने केरल की सोना तस्करी जीवनरेखा को खत्म कर दिया है, जिससे एक छिपा हुआ नकदी इंजन खत्म हो गया जो चुपचाप नौकरियों, खपत और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
पलक शाह
जुलाई 2024 में, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोने पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करके देश को चौंका दिया, एक ऐसा कदम जिसने सोने के प्रति जुनूनी भारतवासियों को हैरान कर दिया और राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया. केरल के लिए, जो लंबे समय से सोना तस्करी का स्वर्ग माना जाता रहा है, यह नीति बदलाव एक भूचाल की तरह था. जहां यह शुल्क कटौती उस बढ़ती तस्करी को रोकने के उद्देश्य से की गई थी जो एक समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही थी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी, वहीं इसने अनायास ही 2024-25 में केरल की आर्थिक मंदी में योगदान दिया, जिसमें राज्य ने मात्र 6.19 प्रतिशत की धीमी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वृद्धि दर्ज की, जो दक्षिण भारत में सबसे कम रही.
हालांकि अन्य संरचनात्मक मुद्दों जैसे कि राजकोषीय बाधाएं, वैश्विक प्रेषण में गिरावट और कमजोर निजी निवेश ने केरल की मंदी में योगदान दिया, लेकिन तस्करी से होने वाले अवैध पूंजी प्रवाह के अचानक समाप्त हो जाने से खपत और अनौपचारिक नौकरियों को बनाए रखने वाला एक छिपा हुआ तरलता स्तंभ समाप्त हो गया.
आंकड़े दिखाते हैं कि कैसे केरल की सोना तस्करी व्यवस्था, जिसे कभी राज्य तंत्र द्वारा मौन समर्थन प्राप्त था, को खत्म करने से इसकी अर्थव्यवस्था में लहरें उठीं, जिससे राज्य की अवैध व्यापार पर खतरनाक निर्भरता उजागर हो गई.
केरल: सोना तस्करी की राजधानी
केरल का सोने के प्रति प्रेम प्रसिद्ध है, लेकिन इसका काला पक्ष सोना तस्करी लंबे समय से राज्य की छाया अर्थव्यवस्था की एक आधारशिला रहा है. 2020 से 2023 के बीच, राज्य में 3,173 सोना तस्करी के मामले दर्ज किए गए, जिनमें लगभग ₹1,230 करोड़ मूल्य का 2.3 टन तस्करी किया गया सोना जब्त किया गया, जैसा कि केरल पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है. फिर भी, यह केवल हिमखंड का सिरा भर था. राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) का अनुमान है कि भारत में प्रतिवर्ष 200 से 400 टन सोना, जिसकी कीमत $15 बिलियन है, तस्करी के माध्यम से लाया जाता है, जिसमें केरल के चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और कन्नूर प्रमुख द्वार के रूप में कार्य करते हैं.
राज्य की खाड़ी देशों जैसे UAE और सऊदी अरब के निकटता, जहां सोना सस्ते दरों पर उपलब्ध होता है, और इसके विशाल प्रवासी समुदाय ने इसे तस्करों के लिए एक स्वर्ग बना दिया था. वाहक, जो अक्सर सामान्य नागरिक होते थे, को 8 ग्राम सोने के एक ‘सॉवरेन’ को लाने के लिए ₹1,000 से ₹5,000 तक का भुगतान किया जाता था, और वे इस धातु को शरीर में पेस्ट के रूप में या अंडरगारमेंट्स में तार के रूप में लाते थे. यह तस्करी रैकेट मात्र एक मामूली अपराध नहीं था; यह एक परिष्कृत ऑपरेशन था जिसे कथित रूप से राज्य का समर्थन प्राप्त था.
2020 का केरल सोना तस्करी मामला इस गठजोड़ को उजागर करता है जब तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर एक राजनयिक खेप से ₹14.82 करोड़ मूल्य का 30.245 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में पता चला कि ₹46.49 करोड़ मूल्य का 136.828 किलोग्राम सोना राजनयिक चैनलों के माध्यम से कई बार तस्करी किया गया, जिसमें केरल के मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रधान सचिव एम. शिवशंकर सहित शीर्ष राज्य अधिकारियों के नाम सामने आए. मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र में आरोप लगाया कि वरिष्ठ राज्य अधिकारी, जिनमें मुख्यमंत्री का परिवार भी शामिल है, इसमें लिप्त थे, जिससे केरल आतंकवादी फंडिंग का अड्डा बन गया जो इंडियन मुजाहिदीन और दाऊद इब्राहिम के डी-कंपनी जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ था.
यह कथित रूप से राज्य-प्रायोजित तस्करी तंत्र उच्च आयात शुल्क पर आधारित था, जिसने कानूनी सोना आयात महंगा और तस्करी को लाभदायक बना दिया था. एक तस्कर प्रति किलोग्राम सोने पर ₹3.2 लाख तक कमा सकता था, वह भी वाहक की लागत काटने के बाद. केरल के अनलिस्टेड आभूषण ब्रांडों, जिनमें से कुछ के हजारों संदिग्ध “निवेशक” हैं, पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई जाती रही, जिनमें से एक प्रमुख ब्रांड कथित रूप से बिना किसी नियामक निगरानी के 4,000 निवेशकों के साथ काम कर रहा था. राज्य की अर्थव्यवस्था, जो बाहर से मजबूत दिखती थी, इस अवैध व्यापार के सहारे चुपचाप खड़ी थी, जो नकदी को रिटेल, रियल एस्टेट और हवाला नेटवर्क में पहुंचा रही थी.
शुल्क में कटौती: तस्करों पर एक करारा प्रहार
जुलाई 2024 में सीतारमण द्वारा सोने पर आयात शुल्क आधा करने का निर्णय इस समानांतर अर्थव्यवस्था पर एक सोची-समझी चोट था. लंबे समय से उच्च शुल्कों ने तस्करी को प्रोत्साहित किया था, और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की "स्मगलिंग इन इंडिया" रिपोर्ट के अनुसार भारत के सोने के आयात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अवैध चैनलों से आता था. "शुल्क में कटौती ने तस्करी के मुनाफे को ₹9 लाख प्रति किलोग्राम से घटाकर ₹3 लाख कर दिया, जिससे यह व्यापार कई लोगों के लिए अव्यवहार्य हो गया. ऑल केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन के राज्य कोषाध्यक्ष एस. अब्दुल नासर ने 22 अगस्त 2024 को द हिंदू बिजनेस लाइन को बताया: “पिछले महीने तक एक किलोग्राम सोने की तस्करी से ₹9 लाख का मुनाफा होता था और अब यह ₹3 लाख रह गया है, जिससे कई वाहक एजेंट इस अवैध व्यापार से दूर हो गए हैं.” वाहकों को मिलने वाला भुगतान ₹5,000 से घटकर ₹1,000 प्रति सॉवरेन हो गया, और नासर ने यह भी बताया कि भारत द्वारा आयात शुल्क घटाए जाने के कारण खाड़ी देशों में सोने के व्यापार में गिरावट आई है.
केरल की खाड़ी देशों की ओर घटती यात्रा
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अनुसार, केरल के चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से खाड़ी देशों की ओर जाने वाले यात्री यातायात में 2024 में 2022-23 की तुलना में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह गिरावट, शुल्क में कटौती के साथ मिलकर, एक अवरुद्ध तस्करी नेटवर्क को दर्शाती है क्योंकि खाड़ी देशों से जुड़े कम केरलवासी अब वाहक के रूप में उपलब्ध हैं, जिससे यह कार्य कम लाभदायक हो गया है. आंकड़े और भी रोचक हो जाते हैं: गल्फ एयर ने समर 2025 सीजन के लिए केरल, विशेष रूप से कालीकट (कोझिकोड) और कोच्चि (COK) के लिए उड़ानों में कटौती की है. वे 28 मार्च से कालीकट के लिए उड़ानें पूरी तरह बंद कर देंगे और 6 अप्रैल से कोच्चि के लिए उड़ानें सप्ताह में तीन बार कर देंगे. यह निर्णय उनके नेटवर्क की समीक्षा के बाद आया है, जिसमें संचालन को अनुकूलित करने और यात्री मांग के साथ संरेखित करने पर ध्यान दिया गया है, एयरलाइन के अनुसार. यह बस यही दिखाता है कि अब पहले की तुलना में कम यात्री खाड़ी देशों की यात्रा कर रहे हैं. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने इस प्रभाव की पुष्टि की है. CBIC के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने फरवरी 2025 में पीटीआई को बताया: “पिछले साल के बजट में सोने पर शुल्क दर घटाए जाने के बाद, सोने की तस्करी में उल्लेखनीय कमी आई है.” कस्टम्स और DRI अधिकारियों ने 2023-24 में 4,869.6 किलोग्राम तस्करी किया गया सोना जब्त किया, जिसमें से 1,319 किलोग्राम DRI द्वारा जब्त किया गया था, लेकिन DRI अधिकारियों के अनुसार ये आंकड़े अब तेजी से गिर रहे हैं.
शुल्क कटौती ने कानूनी सोना व्यापार को भी बढ़ावा दिया, जिसमें वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 2024 की तीसरी तिमाही में 248.3 टन की कुल बिक्री के साथ साल-दर-साल 18 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो त्योहारी मांग और औपचारिक व्यापार द्वारा प्रेरित है. नासर ने केरल के आभूषण बाजार में पुनरुद्धार को उजागर करते हुए कहा, “सोना व्यापार अब फलने-फूलने लगा है, जिससे केरल के आभूषण बाजार में पुनर्जीवन आया है.” हालांकि, यह बदलाव एक कीमत के साथ आया. राज्य की तस्करी-आधारित नकदी प्रवाह, जो अनधिकृत लेनदेन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को संचालित करती थी, सूख गई. आभूषण रिटेल, निर्माण और अन्य क्षेत्र जो काले धन पर निर्भर थे, तरलता संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे केरल की आर्थिक समस्याएं बढ़ी हैं.
केरल की आर्थिक मंदी: परिणाम
2024-25 के लिए केरल की GSDP वृद्धि 6.19 प्रतिशत रही, जो तमिलनाडु (11.19 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (8.21 प्रतिशत), तेलंगाना (8.08 प्रतिशत), और कर्नाटक (7.37 प्रतिशत) से पीछे थी, जिससे यह दक्षिण भारत की सबसे धीमी गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई, राज्य बजट और RBI के आंकड़ों के अनुसार. यह 2023-24 में 6.73 प्रतिशत की वृद्धि से गिरावट थी, जिसमें नाममात्र GSDP ₹12,48,533 करोड़ रहा, जो बजट अनुमान ₹13,11,437 करोड़ से कम था, PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार. राज्य की आर्थिक मंदी के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सोना तस्करी आधारित अर्थव्यवस्था का पतन एक प्रमुख भूमिका निभाता है, DRI अधिकारियों का कहना है. तस्करी व्यापार ने अनधिकृत आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया, जैसे कि आभूषण फ्रेंचाइज़ी से लेकर रियल एस्टेट सौदों तक. 2023 में गुलाटी इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन ने अनुमान लगाया कि केरल की 30-40 प्रतिशत संपत्ति सौदे ऐसे अप्रतिबंधित धन से जुड़े हुए थे जो तस्करी और हवाला नेटवर्क से जुड़े थे. तस्करी से मिलने वाले मुनाफे के गायब होने से इन क्षेत्रों को नकदी की कमी का सामना करना पड़ा.
केरल रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (K-RERA) ने 2023-24 में आवासीय परियोजनाओं की पूर्णता में 22 प्रतिशत की गिरावट की सूचना दी (1,200 बनाम पिछले वर्ष के 1,540). कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में बिकने के लिए तैयार संपत्तियों की संख्या 15 प्रतिशत बढ़ गई, जिसमें जून 2024 तक 28,000 इकाइयाँ अटकी हुई थीं, Anarock Research के अनुसार. प्रमुख शहरों में संपत्ति लेनदेन 18 प्रतिशत गिरा, और कोच्चि के लग्ज़री सेगमेंट में 25 प्रतिशत तक की कीमतों में सुधार देखा गया, Knight Frank India के अनुसार. निर्माण क्षेत्र की वृद्धि 4.2 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंसेज रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय औसत 7.1 प्रतिशत से कम थी.
गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन के निदेशक के.जे. जोसेफ ने घरेलू राजकोषीय प्रतिबंधों और बाहरी दबावों को उजागर करते हुए The Hindu को बताया कि उधारी सीमाओं के सख्त होने के कारण पूंजीगत व्यय में कटौती से वृद्धि रुक गई. हालांकि, शुल्क में कटौती ने कानूनी सोना बाजार को स्थिर किया, लेकिन इसने केरल की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को बाधित कर दिया, जो भारी रूप से तस्करी किए गए सोने और हवाला लेनदेन पर निर्भर थी.
केरल पुलिस ने पांच वर्षों में 337 हवाला मामलों की सूचना दी, जिसमें ₹123 करोड़ जब्त किए गए, जो इस समानांतर अर्थव्यवस्था के आकार को दर्शाता है. इसके अलावा, केरल की खाड़ी प्रेषणों पर निर्भरता, जो अक्सर तस्करी को सक्षम बनाती थी, को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और 2024 में 10 प्रतिशत की गिरावट से झटका लगा, केरल माइग्रेशन सर्वे के अनुसार. राज्य के उत्पादक क्षेत्रों, जैसे कृषि (3.8 प्रतिशत वृद्धि) और निर्माण, की वृद्धि राष्ट्रीय औसत से कम रही, जिससे मंदी और बढ़ गई. केरल की आर्थिक मंदी राज्य की तस्करी-आधारित समानांतर अर्थव्यवस्था पर निर्भरता को उजागर करती है, जो भ्रष्ट अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण पर आधारित थी.
2020 का राजनयिक चैनल घोटाला, जिसमें राज्य के शीर्ष अधिकारी शामिल थे, कोई अपवाद नहीं बल्कि एक सड़े हुए तंत्र का लक्षण था. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की कथित मिलीभगत, जैसा कि स्वप्ना सुरेश और NIA ने उजागर किया, एक ऐसी राज्य सरकार को दर्शाती है जिसने राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद वित्त पोषण की अनदेखी की. शुल्क कटौती, जो तस्करी पर रोक लगाने के लिए एक साहसिक कदम थी, ने केरल की आर्थिक कमजोरी को उजागर कर दिया है, जो काले धन और अवैध व्यापार की कमजोर नींव पर आधारित थी. वित्त मंत्री का निर्णय एक आपराधिक तंत्र पर आवश्यक प्रहार था, जिसने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को समृद्ध किया और आतंकवादी संगठनों को वित्त पोषित किया. फिर भी, इसने केरल को अपनी ही मिलीभगत के परिणामों से जूझने के लिए छोड़ दिया है.
सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी आईपीओ प्रबंधन, पूंजी जुटाने की सलाह और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं प्रदान कर सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा अब अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने निवेश बैंकिंग कारोबार में प्रवेश के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया है. मंजूरी मिलने के बाद कंपनी आईपीओ प्रबंधन, पूंजी जुटाने की सलाह और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं प्रदान कर सकेगी.
सेबी से मांगी कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेरोधा ने अपनी इकाई 'जेरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स' के जरिए अप्रैल 2026 में सेबी के पास कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. फिलहाल यह आवेदन नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रहा है. कंपनी ने भी इस आवेदन की पुष्टि की है, हालांकि लाइसेंस मिलने तक उसने अपने विस्तृत कारोबारी योजनाओं का खुलासा नहीं किया है.
लाइसेंस मिलने पर क्या कर सकेगी कंपनी?
कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद जेरोधा को निवेश बैंकिंग से जुड़ी कई सेवाएं देने की अनुमति मिल जाएगी. इनमें आईपीओ प्रबंधन, कंपनियों को पूंजी जुटाने संबंधी सलाह, इश्यू मैनेजमेंट, अंडरराइटिंग और अन्य कॉर्पोरेट फाइनेंस सेवाएं शामिल हैं.
तेजी से बढ़ रहा है IPO बाजार
जेरोधा का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का प्राथमिक बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है. बड़ी संख्या में स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी कंपनियां और स्थापित कारोबारी समूह शेयर बाजार के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में देश में आईपीओ गतिविधियां तेज बनी रह सकती हैं, जिससे निवेश बैंकिंग कारोबार में अवसर बढ़ेंगे.
बड़ी कंपनियों को मिलेगी चुनौती
यदि जेरोधा को सेबी से मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी निवेश बैंकिंग क्षेत्र में पहले से मौजूद बड़ी कंपनियों को चुनौती दे सकती है. फिलहाल आईपीओ सलाह और कैपिटल मार्केट कारोबार में JM Financial, Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और ICICI Securities जैसी कंपनियों का दबदबा है.
वित्तीय सेवाओं के विस्तार पर फोकस
पिछले कुछ वर्षों में जेरोधा ने अपनी सेवाओं का लगातार विस्तार किया है. कंपनी निवेश और वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़े कई उत्पाद पेश कर चुकी है. हाल ही में कंपनी ने अपने Coin प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश की सुविधा शुरू की है, जिससे ग्राहक साझेदार बैंकों की एफडी में निवेश कर सकते हैं और एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनका प्रबंधन कर सकते हैं.
टेक्नोलॉजी और निवेशक नेटवर्क का मिलेगा फायदा
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश बैंकिंग कारोबार में प्रवेश से जेरोधा अपनी मजबूत तकनीकी क्षमता और बड़े रिटेल निवेशक आधार का लाभ उठा सकती है. उभरती कंपनियों और स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में सहायता देने के साथ कंपनी अपने कारोबार को नई दिशा दे सकती है.
पूंजी बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारत का आईपीओ बाजार लगातार विस्तार कर रहा है, खासकर नई तकनीक आधारित और स्टार्टअप कंपनियों के बीच. ऐसे में जेरोधा की संभावित एंट्री निवेश बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है और देश के पूंजी बाजार परिदृश्य में नए बदलाव ला सकती है.
सोमवार को सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 फीसदी टूटकर 76,728.37 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 109.75 अंक यानी 0.46 फीसदी गिरकर 23,946.25 अंक पर आ गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज सतर्कता के साथ हो सकती है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी. पिछले कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था और आज भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं.
पिछले कारोबारी सत्र में दबाव में रहा बाजार
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 फीसदी टूटकर 76,728.37 अंक पर बंद हुआ था. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 इंडेक्स 109.75 अंक यानी 0.46 फीसदी गिरकर 23,946.25 अंक पर आ गया था. कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 400 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया था.
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उससे जुड़ी अनिश्चितताएं निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों के संकेत भी आज के कारोबार की दिशा तय कर सकते हैं.
इन शेयरों पर रहा था दबाव
पिछले सत्र में सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए थे. कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई थी. इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली थी. वहीं, इटरनल, ट्रेंट, बीईएल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड और टाटा स्टील के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए थे.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला था. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.37 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो फार्मा, मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में मजबूती रही, जबकि ऑटो, केमिकल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली.
बाजर विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के संकेत और रुपये की चाल पर रहेगी. इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय हो सकती है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
30 जून को शेयर बाजार में कई बड़ी कॉरपोरेट और सेक्टोरल खबरों का असर देखने को मिल सकता है. एक्सिस बैंक और बंधन बैंक के CFO के इस्तीफे, यस बैंक के 16,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की योजना, एसआईएस के 120 करोड़ रुपये के बायबैक प्रस्ताव और जूनिपर होटल्स के CFO के इस्तीफे पर निवेशकों की नजर रहेगी. वहीं RITES और CONCOR के बीच लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर समझौता, जगसनपाल फार्मा द्वारा Aequitas Healthcare में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला, एसबीआई की 30 करोड़ डॉलर की बॉन्ड इश्यू योजना और SJVN के गुजरात को ग्रीन पावर आपूर्ति समझौते भी चर्चा में रहेंगे. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन, पेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में हलचल संभव है, जबकि ONGC और ऑयल इंडिया पर दबाव बन सकता है. Arihant Capital Markets को रेगुलेटरी मंजूरी, Muthoot Capital Services के स्ट्रेस्ड लोन सौदे और GeeCee Ventures के निवेश जैसे घटनाक्रम भी मंगलवार के कारोबार में चुनिंदा शेयरों को प्रभावित कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
राजस्थान देश के नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है. इसी कड़ी में सेरेंटिका रिन्यूएबल्स ने राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना की घोषणा की है. कंपनी इस निवेश के जरिए औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा भंडारण और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी.
कंपनी अब तक राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. कंपनी की कुल सौर ऊर्जा क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा राजस्थान में स्थापित है. बीकानेर और जैसलमेर इसके प्रमुख केंद्र हैं, जबकि अगले चरण में भड़ला तक विस्तार किया जाएगा.
27,000 मेगावाट की पाइपलाइन पर काम
कंपनी की प्रस्तावित 27,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पाइपलाइन में राजस्थान की परियोजनाओं की अहम भूमिका है. वर्तमान में कंपनी के पास 2,500 मेगावाट से अधिक की परिचालन क्षमता है, जबकि 3,000 मेगावाट से ज्यादा की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
बीकानेर में बनेगी बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजना
सेरेंटिका बीकानेर में क्षेत्र की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में से एक विकसित कर रही है. पहले चरण में 200 मेगावाट-घंटा क्षमता स्थापित की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में 800 मेगावाट-घंटा क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके अगले तीन महीनों में चालू होने की उम्मीद है. यह परियोजना उद्योगों को चौबीसों घंटे निर्बाध स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी.
फतेहगढ़ में बढ़ेगी सौर ऊर्जा क्षमता
वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी फतेहगढ़ स्थित अपने सौर ऊर्जा प्लेटफॉर्म का विस्तार करेगी. पहले चरण में 1,270 मेगावाट पीक क्षमता जोड़ी जाएगी. इसके बाद 500 मेगावाट अतिरिक्त सौर क्षमता और 2,500 मेगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी.
सीईओ ने क्या कहा?
सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अक्षय हीरानंदानी ने कहा कि राजस्थान कंपनी की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह राज्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से अग्रणी बन रहा है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को चौबीसों घंटे विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अहम आधार है और बीकानेर की बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
सामाजिक विकास पर भी फोकस
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ कंपनी सामाजिक क्षेत्र में भी निवेश कर रही है. एडइंडिया और 'विकास' कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी ने राजस्थान में शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है.
औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का नया केंद्र बनेगा राजस्थान
देश में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के एकीकृत मॉडल के जरिए सेरेंटिका राजस्थान को स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.
इन निवेशों से न सिर्फ राज्य में ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि राजस्थान औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उभर सकता है.
ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय बाजार की रफ्तार दूसरी तिमाही में कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 90,715 यूनिट रह गई. हालांकि, इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर रियल एस्टेट बाजार पर देखने को मिला.
6 फीसदी घटी घरों की बिक्री
ANAROCK रिसर्च के अनुसार, दूसरी तिमाही में देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 96,285 यूनिट था. तिमाही आधार पर भी बिक्री में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और बेंगलुरु ने कुल बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया. दोनों शहरों में मिलाकर लगभग 43,995 घरों की बिक्री हुई, जो कुल बिक्री का करीब 48 फीसदी है.
सिर्फ तीन शहरों में बढ़ी बिक्री
सालाना आधार पर केवल कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु में ही घरों की बिक्री बढ़ी. कोलकाता में 10 फीसदी, हैदराबाद में 2 फीसदी और बेंगलुरु में 1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं पुणे में सबसे ज्यादा 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. एनसीआर, मुंबई और चेन्नई में भी बिक्री में कमी दर्ज की गई.
नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में बढ़ोतरी
बिक्री में नरमी के बावजूद नई आवासीय परियोजनाओं की लॉन्चिंग में तेजी बनी रही. दूसरी तिमाही में लगभग 1.06 लाख नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी अधिक हैं. हालांकि, तिमाही आधार पर नई सप्लाई में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदारों की कमजोर होती धारणा और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते डेवलपर्स ने नई परियोजनाओं की रफ्तार कुछ धीमी की है.
MMR और बेंगलुरु रहे सबसे आगे
नई सप्लाई के मामले में मुंबई महानगर क्षेत्र और बेंगलुरु सबसे आगे रहे. दोनों शहरों ने कुल नई सप्लाई में 53 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की. मुंबई में 34,555 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जबकि बेंगलुरु में 21,670 यूनिट्स बाजार में आईं. हैदराबाद में नई लॉन्चिंग में सबसे ज्यादा 53 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई.
प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग मजबूत
रिपोर्ट के मुताबिक, 80 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये कीमत वाले घरों की सप्लाई सबसे ज्यादा 27 फीसदी रही. इसके बाद 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट की हिस्सेदारी 25 फीसदी रही. वहीं 2.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों की हिस्सेदारी 22 फीसदी रही. किफायती आवास की हिस्सेदारी घटकर केवल 6 फीसदी रह गई है.
प्रॉपर्टी कीमतों में भी बढ़ोतरी
शीर्ष सात शहरों में औसत आवासीय कीमतों में सालाना आधार पर 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, तिमाही आधार पर कीमतों में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. एनसीआर में सबसे ज्यादा 13 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु में कीमतें 8 फीसदी बढ़ीं.
इन्वेंट्री बढ़ी, बेंगलुरु सबसे आगे
दूसरी तिमाही के अंत तक शीर्ष सात शहरों में उपलब्ध आवासीय इन्वेंट्री बढ़कर 6.16 लाख यूनिट से अधिक हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है. बेंगलुरु में सबसे अधिक 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एनसीआर ऐसा एकमात्र शहर रहा जहां इन्वेंट्री लगभग स्थिर बनी रही.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और आईटी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर खरीदारों के रुख पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अब बाजार पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई दे रहा है, जहां नई सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बन रहा है. प्रीमियम हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर और रोजगार केंद्रों वाले शहरों में मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है.
सेशेल्स में UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लगातार वैश्विक पहचान हासिल कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान हुए समझौते के बाद अब अफ्रीकी देश सेशेल्स में भी भारतीय UPI सेवा शुरू होगी. इसके साथ ही भारत की यह डिजिटल पेमेंट प्रणाली दुनिया के 10 देशों तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों को विदेशों में आसान और सुरक्षित भुगतान की सुविधा मिलेगी.
सेशेल्स में भी शुरू होगी UPI सेवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें सेशेल्स में UPI लागू करने का समझौता भी शामिल है. इस कदम से भारत और सेशेल्स के बीच डिजिटल भुगतान और फिनटेक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सेशेल्स यात्रा के दौरान कई अहम समझौते हुए हैं, जिनमें UPI और जन औषधि से जुड़े समझौते प्रमुख हैं. इसके अलावा दोनों देश जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे.
There are substantive outcomes in this Seychelles visit. Key MoUs have been signed. These include an MoU for the implementation of UPI in Seychelles, MoU on Jan Aushadhi and more.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 29, 2026
We will keep working in futuristic sectors like climate action, green hydrogen, energy, the Blue… https://t.co/moEuVd05At
अब 10 देशों तक पहुंचा भारतीय UPI
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI तेजी से वैश्विक विस्तार कर रही है. सेशेल्स के जुड़ने के बाद अब भारतीय पर्यटक और उपभोक्ता कुल 10 देशों में UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे. इन देशों में सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, फ्रांस, कंबोडिया और अब सेशेल्स शामिल हैं.
भारतीय पर्यटकों को मिलेगा बड़ा फायदा
सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अपने खूबसूरत समुद्र तटों, समुद्री पर्यटन और लक्जरी रिसॉर्ट्स के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. हर साल करीब 15 हजार भारतीय पर्यटक इस द्वीपीय देश की यात्रा करते हैं. UPI सेवा शुरू होने से भारतीय पर्यटक बिना विदेशी मुद्रा की चिंता किए सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान, तेज और सुरक्षित बनेगी.
भारतीयों के लिए वीजा-फ्री है सेशेल्स
भारतीय नागरिकों को सेशेल्स की यात्रा के लिए पहले से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि पर्यटन के उद्देश्य से जाने वाले यात्रियों को हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद विजिटर परमिट लेना होता है. सेशेल्स की कुल आबादी में करीब 5 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी मजबूत हैं.
व्यापारिक रिश्ते भी हो रहे मजबूत
भारत और सेशेल्स के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत से चावल, दवाइयां, कपड़े, वाहन और उनके स्पेयर पार्ट्स, मशीनरी तथा प्लास्टिक उत्पादों का निर्यात सेशेल्स को किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि UPI की शुरुआत से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी.
Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक और नया अवसर आने वाला है. एआई आधारित साइबर सुरक्षा कंपनी Kratikal Tech अपना 39.7 करोड़ रुपये का SME IPO 30 जून से खोलने जा रही है. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 128 से 135 रुपये प्रति शेयर तय किया है. निवेशक 2 जुलाई तक इस आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं. जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने विदेशी कारोबार के विस्तार, नए प्रोडक्ट्स और बिजनेस ग्रोथ पर करेगी.
30 जून से खुलेगा IPO, 2 जुलाई तक निवेश का मौका
Kratikal Tech का SME IPO 30 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक 2 जुलाई तक इसमें बोली लगा सकेंगे. एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू 29 जून को ही खुल जाएगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 29.4 लाख नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है. इससे जुटाई गई पूरी राशि कंपनी के विस्तार और कारोबारी जरूरतों में इस्तेमाल की जाएगी.
7 जुलाई को हो सकती है लिस्टिंग
कंपनी के अनुसार, शेयरों का आवंटन पूरा होने के बाद Kratikal Tech के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 7 जुलाई 2026 को BSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है. इस इश्यू का प्रबंधन Beeline Capital Advisors कर रही है.
विदेशी कारोबार बढ़ाने पर रहेगा फोकस
आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने में करेगी. कंपनी अपनी यूएई स्थित सहायक इकाई Threatcop FZ LLC और अमेरिका स्थित Threatcop AI Inc में निवेश की योजना बना रही है. इसके अलावा, कंपनी बिक्री और मार्केटिंग गतिविधियों को बढ़ाने, नई नियुक्तियां करने, नए उत्पाद विकसित करने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने पर भी खर्च करेगी.
क्या करती है Kratikal Tech?
Kratikal Tech एआई आधारित साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली SaaS कंपनी है. कंपनी अपने ‘Threatcop’ प्लेटफॉर्म के जरिए संस्थानों और कंपनियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े आधुनिक समाधान प्रदान करती है. कंपनी अपने Kratikal ब्रांड के तहत विभिन्न साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है. वर्तमान में कंपनी के पास 677 से अधिक ग्राहकों का मजबूत आधार मौजूद है.
वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है. इस दौरान कंपनी ने 36.72 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जबकि शुद्ध लाभ 6.14 करोड़ रुपये रहा. साइबर सुरक्षा और एआई जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में काम करने वाली इस कंपनी का आईपीओ निवेशकों के लिए एक नया अवसर माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और वैल्यूएशन का आकलन करना जरूरी है.
11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संयुक्त लोन बुक के साथ उभरेगा नया वित्तीय दिग्गज, शेयरधारकों को मिलेगा शेयर-स्वैप का लाभ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख पावर फाइनेंस कंपनियां पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के प्रस्तावित विलय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के बाद 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त लोन बुक वाली देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी अस्तित्व में आएगी. सरकार के पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत हो रहा यह विलय न केवल पावर सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा.
शेयर-स्वैप रेश्यो तय
मर्जर योजना के तहत REC का PFC में विलय किया जाएगा. इसके लिए शेयर-स्वैप रेश्यो भी तय कर दिया गया है. योजना के अनुसार REC के प्रत्येक 100 शेयरों (प्रत्येक मूल्य 10 रुपये) के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर दिए जाएंगे. यदि किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट पर REC के 100 शेयर होंगे, तो विलय के बाद उसे PFC के 88 शेयर मिलेंगे और REC के उसके मौजूदा शेयर समाप्त हो जाएंगे.
सरकार और PFC की हिस्सेदारी
वर्तमान में PFC के पास REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं केंद्र सरकार की PFC में 55.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि REC में सरकार की कोई प्रत्यक्ष हिस्सेदारी नहीं है. सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 के दौरान दोनों कंपनियों के पुनर्गठन का संकेत दिया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में इस दिशा में कदम उठाने की घोषणा की थी.
अभी कई मंजूरियां मिलना बाकी
हालांकि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद भी यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. मर्जर योजना को लागू करने के लिए शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों, सेबी, एनसीएलटी और अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी. इसके अलावा रिकॉर्ड डेट का भी अभी ऐलान नहीं किया गया है. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही विलय प्रभावी होगा.
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
मर्जर की खबर के बाद शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली. आज खबर लिखे जाने तक PFC के शेयरों में 1.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि REC के शेयरों में 0.27 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मर्जर की शर्तों और भविष्य के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, PFC अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में दिखाई देता है. वहीं REC फिलहाल मर्जर-आर्बिट्रेज की स्थिति में है, जहां इवेंट आधारित जोखिम अधिक बना हुआ है. उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों में केवल कमाई ही नहीं, बल्कि कंपनी की संरचना और दीर्घकालिक रणनीति भी निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
पावर सेक्टर को मिल सकती है नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों के विलय से पूंजी की लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी. इससे बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तपोषण देने की क्षमता भी मजबूत होगी. देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी बनने के बाद नई इकाई पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत कर सकती है.
रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए भारत देगा वित्तीय सहायता, हिंद महासागर में चीन को संतुलित करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करते हुए भारत ने सेशेल्स के साथ 1,250 करोड़ रुपये (150 मिलियन डॉलर) के ‘अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट’ समझौते को अंतिम रूप दिया है. इस समझौते के तहत भारत सेशेल्स को रक्षा, समुद्री सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा. विशेषज्ञ इसे भारत की ‘सागर’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक उपलब्धि मान रहे हैं.
क्या है अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट?
अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट एक ऐसा वित्तीय ढांचा है, जिसके तहत सेशेल्स किसी एक परियोजना के बजाय कई क्षेत्रों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इस फंड का उपयोग कर सकेगा. इसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं.
इस वित्तीय सहायता का प्रबंधन भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM Bank) के माध्यम से किया जाएगा. समझौते की एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि सेशेल्स इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा भारत से खरीदेगा, जिससे भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को भी लाभ मिलेगा.
हिंद महासागर में क्यों अहम है यह समझौता?
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और उसकी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के बीच भारत और सेशेल्स के बीच यह समझौता काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सेशेल्स अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों के बेहद करीब स्थित है और यहां भारत की मजबूत मौजूदगी समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जाती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही सेशेल्स की तटीय सुरक्षा और सैन्य ढांचे को भी मजबूत किया जा सकेगा.
रक्षा सहयोग को मिलेगी नई मजबूती
भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है. नए वित्तीय पैकेज के जरिए सेशेल्स की सैन्य और तटीय सुरक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाया जाएगा. इससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समन्वय और सहयोग भी बेहतर होगा.
UPI और डिजिटल सहयोग को बढ़ावा
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लागू करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
इसके अलावा दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं.
AI, साइबर सुरक्षा और हेलीकॉप्टर सहायता की मांग
सेशेल्स ने भारत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा केंद्र स्थापित करने में सहयोग मांगा है. इसके अलावा एक एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने के संकेत दिए हैं.
द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय
भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. नए वित्तीय समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की रणनीतिक स्थिति को भी नई मजबूती प्रदान करेगी.
लावा के एमडी सुनील रैना और मार्केटिंग प्रमुख पुरवंश मैत्रेय ने BW Marketing World से कंपनी की बदलती रणनीति, अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं, मीडिया मिश्रण और 2026 तथा उसके बाद भरोसे को सबसे बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक मानने पर चर्चा की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
17 साल बाद भी लावा इंटरनेशनल 2008-09 के दौर के उन भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों में शामिल है, जो अब भी बाजार में टिके हुए हैं. ऐसे समय में जब समग्र स्मार्टफोन बाजार लगभग स्थिर बना हुआ है, कंपनी का कहना है कि उसने पिछले चार वर्षों में ग्राहक अनुभव, सेवा और दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए 50 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है.
गोवा में आयोजित ‘कम्युनिटी इनसाइडर्स मीट’ के दौरान BW Marketing World ने प्रबंध निदेशक सुनील रैना और मार्केटिंग प्रमुख पुरवंश मैत्रेय से विशेष बातचीत की. इस दौरान लावा की बदलती रणनीति, अंतरराष्ट्रीय योजनाओं, मीडिया मिश्रण और 2026 तथा उसके बाद भरोसे को सबसे बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक मानने पर चर्चा हुई.
लावा की लगातार वृद्धि
स्थिर स्मार्टफोन बाजार में लावा एक निरंतर वृद्धि की कहानी बनकर उभरी है. BW Marketing World से बातचीत में रैना ने कहा, "हमारी पूरी वृद्धि दूसरे ब्रांडों की गिरावट से आ रही है. जब आप एक स्थिर बाजार में बढ़ते हैं, तो आप दूसरों की हिस्सेदारी लेकर बढ़ते हैं. उद्योग खुद नहीं बढ़ रहा है. हर साल हम प्रतिस्पर्धियों से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रहे हैं."
उनके लिए यह केवल स्मार्टफोन का मामला नहीं है, बल्कि लोगों का मामला है. गोवा में आयोजित लावा इनसाइडर्स मीट में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रैना ने कहा, "एक ब्रांड बनाना एक बच्चे को पालने जैसा है. हमारा उद्देश्य खुद का बचाव करना नहीं है. हमारा उद्देश्य खुद को बेहतर बनाना है."
उन्होंने कहा ''बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति सोची-समझी थी और इसे लंबे समय तक कम चर्चा में रखते हुए लागू किया गया. हमें एहसास हुआ कि यह बाजार कीमत और स्पेसिफिकेशन से बहुत अधिक संचालित होता है. मुझे आपको स्पेसिफिकेशन और कीमत में मात देनी है. यही खेल है. यह एक क्लासिक रेड ओशन है."
रैना ने उद्योग के कामकाज में एक मूलभूत कमी की ओर इशारा किया. उनके अनुसार, कंपनियां अपनी लगभग पूरी ऊर्जा दो से तीन महीने की बिक्री अवधि पर खर्च कर देती हैं और उसके बाद उन दो से चार वर्षों के दौरान लगभग मौन हो जाती हैं, जब ग्राहक वास्तव में उस उत्पाद का उपयोग करता है. लावा ने इसी अंतर को सबसे बड़े अवसर के रूप में देखा और खरीद के बाद के अनुभव को अपनी रणनीति का केंद्र बना दिया.
उनके अनुसार, "हमारी लगभग 70 से 80 प्रतिशत सफलता इस अलग रणनीति से आई है और शेष 20 प्रतिशत उन मूलभूत क्षमताओं से, जिन्हें हमने वर्षों में विकसित किया है, जिनमें विनिर्माण, डिजाइन, बिक्री और वितरण शामिल हैं."
सेवा को बनाया हथियार
खरीद के बाद की सेवा पर फोकस का सबसे स्पष्ट उदाहरण लावा की ‘सर्विस एट होम’ पहल है. यह एक डोरस्टेप रिपेयर मॉडल है, जिसकी शुरुआत करीब दो वर्ष पहले हुई थी. रैना ने कहा, "किसी भी ग्राहक को अनावश्यक रूप से सर्विस सेंटर नहीं जाना चाहिए. इसी कारण हमने सर्विस एट होम की शुरुआत की."
उन्होंने एक ऐसे ग्रामीण दैनिक मजदूर ग्राहक का उदाहरण दिया, जो 1,000 रुपये का फीचर फोन खरीदता है.
700 सर्विस सेंटरों के माध्यम से ग्राहकों को भेजने के बजाय, लावा ने अपने एक लाख रिटेलरों के नेटवर्क को त्वरित रिप्लेसमेंट केंद्रों में बदल दिया, जिससे 6.5 लाख गांवों में एक लाख सेवा केंद्र तैयार हो गए.
मैत्रेय ने कहा, "पिछले वर्ष अकेले हमने 70,000 होम सर्विस अनुरोध पूरे किए. हमारी सर्विस टीम ने 28 लाख किलोमीटर की यात्रा की. जिन समस्याओं को तुरंत ठीक किया जा सकता है, उनके लिए हम 24 से 48 घंटे के भीतर सेवा प्रदान करते हैं. 95 प्रतिशत समस्याओं का समाधान 24 से 48 घंटे के भीतर हो जाता है."
ब्लोटवेयर के खिलाफ रुख
यदि सर्विस एट होम लावा की परिचालन विशेषता है, तो ब्लोटवेयर विरोधी रुख उसकी वैचारिक पहचान है. मैत्रेय ने कहा, "ब्लोटवेयर कुछ और नहीं बल्कि अपच भोजन की तरह है. कुछ ऐसा जिसे आप पचा नहीं सकते. कंपनियां विशेष रूप से सस्ते सेगमेंट में अनचाहे ऐप इंस्टॉल करती हैं. कुछ कंपनियां दो साल पहले तक नोटिफिकेशन भी भेजती थीं. इसमें बहुत पैसा शामिल होता है."
लावा ने अपने Agni 2 डिवाइस से ब्लोटवेयर हटाने और इसे सार्वजनिक रूप से घोषित करने का फैसला किया, जिससे तकनीकी समुदाय में व्यापक चर्चा शुरू हो गई.
रैना ने कहा, "हम मानते हैं कि आपको उसी चीज के लिए भुगतान करना चाहिए, जिसे आपने खरीदा है. किसी और को आपसे लाभ कमाने के लिए आपको भुगतान नहीं करना चाहिए. इस ब्रांड के निर्माण में प्रामाणिकता हमारे लिए एक बहुत मजबूत आधार है."
बड़े निवेश की प्रतिबद्धता
दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं को बड़े निवेश का समर्थन प्राप्त है. मैत्रेय ने कहा, "अनुसंधान एवं विकास (R&D) में हम पहले ही 1,100 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता कर चुके हैं. हमने 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीयकरण के साथ एक चार्जर इकोसिस्टम स्थापित किया है और कंपोनेंट निर्माण में निवेश कर रहे हैं."
हाल ही में जुटाए गए 600 करोड़ रुपये के बारे में रैना ने कहा, "इसका बड़ा हिस्सा R&D में जाएगा, क्योंकि यह पूंजीगत संसाधन है. साथ ही हम स्वयं भी लाभ कमा रहे हैं और उस लाभ का उपयोग मार्केटिंग गतिविधियों के लिए भी किया जाएगा."
लावा का स्थानीयकरण स्तर 60 प्रतिशत से अधिक है, जो भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों में सबसे अधिक है.
रैना ने कहा, "कुछ तकनीकें अभी भी भारत में उपलब्ध नहीं हैं. भारत का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुका है, लेकिन वह 28 नैनोमीटर तकनीक के लिए है. स्मार्टफोन चिप तकनीक अभी उससे काफी आगे है."
अंतरराष्ट्रीय विस्तार की तैयारी
लावा की महत्वाकांक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भी पहुंच रही है. कंपनी इस जुलाई में Agni सीरीज को यूनाइटेड किंगडम में Amazon के माध्यम से लॉन्च करने की तैयारी कर रही है.
मैत्रेय ने कहा, "कीमत लगभग 400 से 500 पाउंड के बीच होगी. वैश्विक कंपनियां इसी प्रोसेसर को कहीं अधिक कीमत पर पेश करती हैं. 50 प्रतिशत का अंतर बहुत बड़ा होता है. यही अंतर महत्वपूर्ण है."
तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति
मार्केटिंग के मोर्चे पर रैना ने लावा की रणनीति को तीन स्तंभों विजिबिलिटी, क्रेडिबिलिटी और प्राइड में परिभाषित किया है.
उन्होंने कहा, "विजिबिलिटी इसलिए क्योंकि एक ब्रांड के रूप में हम पर्याप्त दिखाई नहीं देते. दूसरा स्तंभ है क्रेडिबिलिटी. भारतीय ब्रांडों की पिछली कमजोर गुणवत्ता की छवि के कारण भरोसे की कमी है. हमें उस विश्वसनीयता को फिर से बनाना होगा. तीसरा स्तंभ है प्राइड. जब मैं फोन खरीदूं, तो मुझे उसे लेकर गर्व महसूस होना चाहिए क्योंकि आज फोन यह भी बताता है कि आप कौन हैं."
विज्ञापन बजट में पांच गुना वृद्धि
कंपनी की महत्वाकांक्षाओं के साथ उसका मीडिया मिश्रण भी बदल रहा है. मैत्रेय ने खुलासा किया, "2022 की तुलना में 2026 तक हमारे बजट लगभग पांच गुना बढ़ चुके हैं. इस वर्ष कम से कम 30 प्रतिशत निवेश आउटडोर और OTT माध्यमों की ओर बढ़ाया जाएगा."
उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता निर्माण के लिए कंपनी पारंपरिक विज्ञापनों के बजाय टेक क्रिएटर समुदाय पर अधिक ध्यान दे रही है.
रीमा भादुड़ी, BW रिपोर्टर्स
(लेखिका BW Businessworld में सीनियर एडिटोरियल लीड हैं. वह मुख्य रूप से मार्केटिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और रिटेल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं और BW Marketing World के वर्टिकल पर विशेष नजर रखती हैं.)
विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के दिग्गज अरिजीत रे ने रणनीति, रचनात्मकता और उपभोक्ता समझ के दम पर कई बड़े ब्रांड्स को दी नई ऊंचाई
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के अनुभवी पेशेवर अरिजीत रे ने तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में कई बड़े ब्रांड्स को नई दिशा देने और व्यवसायों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्तमान में द अनलॉक कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में वह रणनीतिक सोच, रचनात्मकता और उपभोक्ता व्यवहार की गहरी समझ के जरिए कंपनियों को विकास के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं. आज यानी 29 जून को वह अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो आइए इस खास मौके पर हम उनके करियर की यात्रा पर एक नजर डालते हैं.
ऐसे हुई शुरुआत
अरिजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत अल्फ्रेड एलन एडवरटाइजिंग से की थी. इसके बाद वर्ष 1992 में वह ट्राइटन कम्युनिकेशंस की स्टार्टअप टीम से जुड़े, जहां उन्होंने गीप बैटरियां, सलोरा और फ्लरीज जैसे ब्रांड्स पर काम किया.
वर्ष 1993 में उन्होंने रेडिफ्यूजन डीवाई एंड आर का रुख किया और गॉडफ्रे फिलिप्स, रोथमैन्स, यूनाइटेड एयरलाइंस, एरिक्सन, कैनन और सिंगर जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स की जिम्मेदारी संभाली. मैककैन एरिक्सन में उन्होंने नेस्कैफे ब्रांड का नेतृत्व किया और उसके वैश्विक संचार मंच पर भी काम किया.
बाद में रेडिफ्यूजन में वापसी करते हुए वर्ष 2001 में उन्हें कोलकाता शाखा का प्रमुख बनाया गया. उनके नेतृत्व में कार्यालय ने टाटा स्टील, केओ कार्पिन और बिरला सीमेंट जैसे बड़े ग्राहकों के साथ एक मजबूत बहु-ग्राहक इकाई के रूप में पहचान बनाई.
ओगिल्वी से डेंट्सू तक निभाई अहम जिम्मेदारियां
मुंबई में ओगिल्वी के साथ उन्होंने एजेंसी के स्पेशलिस्ट ऑटो प्रैक्टिस ग्रुप का नेतृत्व किया और बजाज पल्सर, डिस्कवर तथा सीएट टायर्स जैसे प्रमुख ब्रांड्स के साथ काम किया. इसके बाद वह साची एंड साची में बिजनेस हेड बने और बाद में मुद्रा (अब डेंट्सू क्रिएटिव) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं मुद्रा वेस्ट के प्रमुख के रूप में जुड़े. यहां उन्होंने पश्चिमी भारत में एजेंसी के विस्तार और कारोबार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वर्ष 2012 में अरिजीत रे को डेंट्सू कम्युनिकेशंस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया. इस दौरान उन्होंने कंपनी के व्यवसायिक बदलाव, ग्राहकों के विस्तार और टीम विकास का सफल नेतृत्व किया.
द अनलॉक कंपनी के जरिए दे रहे रणनीतिक समाधान
अपने लंबे अनुभव के आधार पर अरिजीत रे ने द अनलॉक कंपनी की स्थापना की, जो एक स्वतंत्र ब्रांड और बिजनेस कंसल्टिंग फर्म है. यह संस्था व्यवसाय और संचार से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों के समाधान पर काम करती है.
उनके नेतृत्व में यह कंपनी विभिन्न क्षेत्रों की संस्थाओं के साथ काम कर रही है और ब्रांड निर्माण, उपभोक्ता जुड़ाव तथा दीर्घकालिक व्यापारिक विकास में मदद कर रही है.
लोगों को प्राथमिकता देने वाली नेतृत्व शैली
अरिजीत रे अपनी नेतृत्व शैली में लोगों और प्रतिभा को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने हमेशा अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक मूल्य सृजन और उद्देश्य आधारित ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया है.
व्यावसायिक समझ और रचनात्मक सोच के संतुलन ने उन्हें ग्राहकों, सहयोगियों और उद्योग जगत के बीच एक विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है.
आज उनका करियर अनुकूलन क्षमता, उद्यमशील सोच और प्रभावशाली ब्रांड निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जाता है. उनके नेतृत्व की यात्रा यह दर्शाती है कि सही रणनीति और दूरदृष्टि के साथ व्यवसायों और ब्रांड्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है.