कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
राजस्थान देश के नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है. इसी कड़ी में सेरेंटिका रिन्यूएबल्स ने राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना की घोषणा की है. कंपनी इस निवेश के जरिए औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा भंडारण और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी.
कंपनी अब तक राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. कंपनी की कुल सौर ऊर्जा क्षमता का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा राजस्थान में स्थापित है. बीकानेर और जैसलमेर इसके प्रमुख केंद्र हैं, जबकि अगले चरण में भड़ला तक विस्तार किया जाएगा.
27,000 मेगावाट की पाइपलाइन पर काम
कंपनी की प्रस्तावित 27,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पाइपलाइन में राजस्थान की परियोजनाओं की अहम भूमिका है. वर्तमान में कंपनी के पास 2,500 मेगावाट से अधिक की परिचालन क्षमता है, जबकि 3,000 मेगावाट से ज्यादा की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी का लक्ष्य हर साल 67 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली की आपूर्ति करना है, जिससे लगभग 4.7 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी.
बीकानेर में बनेगी बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजना
सेरेंटिका बीकानेर में क्षेत्र की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में से एक विकसित कर रही है. पहले चरण में 200 मेगावाट-घंटा क्षमता स्थापित की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में 800 मेगावाट-घंटा क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसके अगले तीन महीनों में चालू होने की उम्मीद है. यह परियोजना उद्योगों को चौबीसों घंटे निर्बाध स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगी.
फतेहगढ़ में बढ़ेगी सौर ऊर्जा क्षमता
वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी फतेहगढ़ स्थित अपने सौर ऊर्जा प्लेटफॉर्म का विस्तार करेगी. पहले चरण में 1,270 मेगावाट पीक क्षमता जोड़ी जाएगी. इसके बाद 500 मेगावाट अतिरिक्त सौर क्षमता और 2,500 मेगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी.
सीईओ ने क्या कहा?
सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अक्षय हीरानंदानी ने कहा कि राजस्थान कंपनी की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह राज्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से अग्रणी बन रहा है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को चौबीसों घंटे विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अहम आधार है और बीकानेर की बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
सामाजिक विकास पर भी फोकस
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ कंपनी सामाजिक क्षेत्र में भी निवेश कर रही है. एडइंडिया और 'विकास' कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी ने राजस्थान में शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है.
औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का नया केंद्र बनेगा राजस्थान
देश में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के एकीकृत मॉडल के जरिए सेरेंटिका राजस्थान को स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.
इन निवेशों से न सिर्फ राज्य में ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि राजस्थान औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उभर सकता है.
## वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की आय 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, शुद्ध मुनाफा 27.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 653 करोड़ रुपये रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG) ने लिस्टिंग के बाद अपनी सबसे मजबूत तिमाही वृद्धि दर्ज की है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुंच गई. प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी.
कंपनी का मुनाफा आय की तुलना में तेज गति से बढ़ा. पहली तिमाही में ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय यानी एबिट्डा 26.2 प्रतिशत बढ़कर 904 करोड़ रुपये हो गया. एबिट्डा मार्जिन 106 आधार अंक बढ़कर 12.5 प्रतिशत पहुंच गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 11.4 प्रतिशत था. वहीं, कंपनी का कर के बाद शुद्ध मुनाफा 27.2 प्रतिशत बढ़कर 653 करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 513 करोड़ रुपये था. कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन का श्रेय प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी, अधिक बिक्री से मिलने वाले परिचालन लाभ और लागत नियंत्रण को दिया है.
हर श्रेणी में दोहरे अंकों की वृद्धि
एलजी इंडिया के मुताबिक, तिमाही के दौरान उसके सभी प्रमुख उत्पादों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई. टेलीविजन और वॉशिंग मशीन की बिक्री मजबूत रही, जबकि गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर की मांग ने भी कंपनी के कारोबार को बढ़ावा दिया.
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक होंग जू जिऑन ने कहा कि भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार तेजी से प्रीमियम, तकनीक आधारित और ऊर्जा दक्ष उत्पादों की ओर बढ़ रहा है और कंपनी का उत्पाद पोर्टफोलियो इस बदलाव के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि कंपनी का मुनाफा आय की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ा है और हर उत्पाद श्रेणी ने इसमें योगदान दिया है. इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी की वृद्धि केवल मौसमी नहीं, बल्कि व्यापक और टिकाऊ है.
घरेलू उपकरण कारोबार से 5,577 करोड़ रुपये की आय
होम अप्लायंसेज और एयर सॉल्यूशन कारोबार से कंपनी की आय सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत बढ़कर 5,577 करोड़ रुपये रही. इस वृद्धि में एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर की प्रमुख भूमिका रही. गर्मी के चरम मौसम के दौरान इन उत्पादों की मांग मजबूत रही. वहीं, मौसमी मांग बढ़ने से पहले वॉशिंग मशीन की बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
फ्रेंच डोर और साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर, बड़ी क्षमता वाली वॉशिंग मशीन और डिशवॉशर जैसे प्रीमियम उत्पादों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा. कंपनी की एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में भी जारी रहा. इस खंड का परिचालन लाभ 13.8 प्रतिशत बढ़कर 642 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि परिचालन लाभ मार्जिन 11.5 प्रतिशत रहा.
कंपनी ने कहा कि अधिक बिक्री से मिलने वाले लाभ, कीमतों में नियंत्रित बढ़ोतरी और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने से उसे कच्चे माल की ऊंची कीमतों और मुद्रा से जुड़ी चुनौतियों का असर कम करने में मदद मिली.
टेलीविजन कारोबार सबसे तेज बढ़ा
होम एंटरटेनमेंट कारोबार कंपनी का सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाला खंड रहा. इस खंड की आय सालाना आधार पर 22.3 प्रतिशत बढ़कर 1,657 करोड़ रुपये पहुंच गई. टेलीविजन की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई. उपभोक्ताओं की बड़ी स्क्रीन वाले टीवी की ओर बढ़ती रुचि के साथ प्रीमियम ओएलईडी और क्यूएनईडी मॉडल की बिक्री में भी मजबूती रही. खेल आयोजनों के दौरान बढ़ी दर्शक संख्या ने भी नए और बड़े टेलीविजन खरीदने की मांग को समर्थन दिया.
इस खंड का परिचालन लाभ 48.5 प्रतिशत बढ़कर 315 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, परिचालन लाभ मार्जिन 336 आधार अंक बढ़कर 19 प्रतिशत पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 15.7 प्रतिशत था.
कंपनी के अनुसार, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती बिक्री, प्रचार खर्च में कमी, बेहतर उत्पाद मिश्रण और सूचना प्रदर्शन कारोबार में लागत ढांचे में सुधार से मार्जिन बेहतर हुआ.
श्री सिटी से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
कंपनी ने भारत में उत्पादन, भारत के लिए उत्पादन और भारत से वैश्विक बाजारों तक पहुंच की अपनी रणनीति पर काम जारी रखा है. एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार बड़े बाजारों में किया जा रहा है, जबकि प्रमुख वैश्विक बाजारों को निर्यात भी बढ़ रहा है.
कंपनी को उम्मीद है कि श्री सिटी में नई उत्पादन क्षमता शुरू होने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. कंपनी बड़े आकार के रेफ्रिजरेटर को वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रही है, जबकि एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में किया जा रहा है.
त्योहारी सीजन से उम्मीदें
एलजी इंडिया को उम्मीद है कि ओणम, दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे आगामी त्योहारों के दौरान बड़ी स्क्रीन वाले टेलीविजन, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर की मांग मजबूत बनी रहेगी. कंपनी प्रीमियम उत्पादों के पोर्टफोलियो का विस्तार करने के साथ-साथ एलजी एसेंशियल श्रृंखला को भी मजबूत करेगी. इसके अलावा, भारत में बुनियादी ढांचे और संस्थागत निवेश से जुड़े कारोबार से कंपनी को व्यवसाय से व्यवसाय क्षेत्र में भी वृद्धि के अवसर मिलने की उम्मीद है.
कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के अपने वृद्धि लक्ष्य को हासिल करने को लेकर भरोसा जताया है. हालांकि, उसने कहा कि वह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और उनके कच्चे माल की कीमतों, मुद्रा तथा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर बनाए रखेगी. कंपनी के मुताबिक स्थानीयकरण, नियंत्रित मूल्य वृद्धि और परिचालन दक्षता आगे भी मार्जिन को सुरक्षित रखने के प्रमुख साधन बने रहेंगे.
जुलाई में नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार 12.1 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट में निवेशकों की बाजार भागीदारी कमजोर रहने की बात कही गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 23.44 करोड़ हो गई. यह जून के मुकाबले 1.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की स्थिति में सुधार के चलते नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार में तेजी आई है. जुलाई में करीब 29 लाख नए डीमैट खाते जुड़े, जो पिछले महीने के मुकाबले 12.1 प्रतिशत अधिक है. इससे नए निवेशकों के बाजार से जुड़ने की रफ्तार में सुधार का संकेत मिलता है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नए खातों के जुड़ने की औसत रफ्तार अभी वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के स्तर से नीचे बनी हुई है.
सीडीएसएल के खाते बढ़कर 18.83 करोड़
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड यानी सीडीएसएल के डीमैट खातों की संख्या जुलाई में बढ़कर 18.83 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई के दौरान सीडीएसएल में 23 लाख नए खाते जुड़े, जो जून के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है. हालांकि, नए डीमैट खातों में सीडीएसएल की हिस्सेदारी 40 आधार अंक घटकर 81 प्रतिशत रह गई. इसके बावजूद जुलाई में पिछले पांच महीनों की तुलना में सबसे अधिक नए खाते सीडीएसएल से जुड़े. वहीं, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड यानी एनएसडीएल के डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 4.62 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
एनएसडीएल में जुलाई के दौरान करीब 5.5 लाख नए खाते जुड़े. नए खातों की संख्या में पिछले महीने की तुलना में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इससे कुल नए डीमैट खातों में एनएसडीएल की हिस्सेदारी बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई.
डीमैट खाते बढ़े, लेकिन सक्रिय निवेशक घटे
रिपोर्ट में सबसे अहम बात यह सामने आई कि डीमैट खातों की संख्या बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या 2026 के पहले सात महीनों में करीब 4.55 करोड़ के आसपास बनी रही. दिसंबर 2025 में यह संख्या करीब 4.48 करोड़ के निचले स्तर तक पहुंच गई थी.
जुलाई में एनएसई के सक्रिय ग्राहकों की संख्या महीने-दर-महीने करीब 1.8 प्रतिशत और साल-दर-साल 3.6 प्रतिशत घट गई. जून 2026 में सक्रिय ग्राहकों और कुल डीमैट खातों का अनुपात 19.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 25 आधार अंक कम है. इसका मतलब है कि डीमैट खाते खुलने की रफ्तार सक्रिय निवेशकों की वृद्धि से कहीं अधिक है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग डीमैट खाते तो खोल रहे हैं, लेकिन यह अभी नियमित रूप से शेयर बाजार में निवेश या कारोबार करने वाले निवेशकों की संख्या में उसी अनुपात में बदलाव नहीं दिखा रहा है.
ग्रो ने बढ़ाई बाजार हिस्सेदारी
डिस्काउंट ब्रोकिंग बाजार में जुलाई के दौरान तीन प्रमुख कंपनियों की स्थिति बनी रही, लेकिन ग्रो ने अपनी बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की. ग्रो की बाजार हिस्सेदारी 16 आधार अंक बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई. वहीं, जेरोधा की हिस्सेदारी 8 आधार अंक घटकर 14.9 प्रतिशत रही. एंजेल वन की हिस्सेदारी 14.6 प्रतिशत पर बनी रही.
एंजेल वन के कुल ग्राहकों की संख्या जुलाई में महीने-दर-महीने 1.14 प्रतिशत बढ़कर 3.9 करोड़ हो गई. हालांकि, एनएसई पर कंपनी के सक्रिय ग्राहकों का अनुपात जून के 17.2 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत रह गया. पिछले 12 महीनों में ग्रो ने करीब 270 आधार अंक की बाजार हिस्सेदारी हासिल की है. वहीं, एंजेल वन की हिस्सेदारी में करीब 66 आधार अंक की गिरावट दर्ज की गई है.
बाजार में सुधार से बढ़ सकती है निवेशकों की भागीदारी
360 वन कैपिटल रिसर्च का मानना है कि बाजार की स्थिति में लगातार सुधार होने पर निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है. इससे नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार और तेज हो सकती है, साथ ही ब्रोकरेज कंपनियों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या में भी सुधार देखने को मिल सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, डिपॉजिटरी के साथ पंजीकृत सक्रिय कंपनियों की संख्या भी जुलाई में बढ़कर 1,66,757 हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. सीडीएसएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 50,228 हो गई, जबकि एनएसडीएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,16,529 पहुंच गई.
कुल मिलाकर जुलाई में डीमैट खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन सक्रिय निवेशकों की संख्या में गिरावट यह संकेत देती है कि नए खाते खुलने के बावजूद बाजार में नियमित भागीदारी अभी कमजोर बनी हुई है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया को 9,020 कार्टन मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दी है. हालांकि कंपनी को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से उत्पाद हटाना होगा और 30 सितंबर के बाद बचा हुआ स्टॉक वापस लेना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया को अपने कूल किंग ठंडा तेल के मौजूदा स्टॉक की बिक्री को लेकर सीमित राहत दी है. अदालत ने कंपनी को 30 सितंबर तक 9,020 कार्टन पुराने स्टॉक को बेचने की अनुमति दी है. यह राहत डाबर और इमामी के बीच पैकेजिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच दी गई है.
विवाद कूल किंग ठंडा तेल की पैकेजिंग को लेकर है. इमामी का आरोप है कि डाबर के कूल किंग की पैकेजिंग उसके नवरत्न आयुर्वेदिक तेल की पहचान, रंग संयोजन और समग्र स्वरूप से भ्रामक रूप से मिलती-जुलती है. इससे पहले अदालत ने डाबर को विवादित पैकेजिंग में कूल किंग ठंडा तेल बेचने से रोक दिया था. 22 मई को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था.
इमामी ने लगाए थे ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप
इमामी ने डाबर पर ट्रेडमार्क उल्लंघन, अपनी पहचान का अनुचित इस्तेमाल और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के आरोप लगाए थे. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों उत्पादों का समग्र स्वरूप, डिजाइन और रंग संयोजन उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है. इसके बाद डाबर ने अदालत से उस स्टॉक को बेचने की अनुमति मांगी थी, जिसका उत्पादन निषेधाज्ञा लागू होने से पहले किया जा चुका था.
19 जून को एकल पीठ ने कुछ शर्तों के साथ डाबर को पुराने स्टॉक की बिक्री की अनुमति दे दी थी. इनमें बिक्री का पूरा ब्योरा देने और 30 सितंबर के बाद बचा हुआ स्टॉक वापस लेने की शर्त शामिल थी.
इमामी ने फैसले को दी चुनौती
इमामी ने एकल पीठ के इस आदेश को चुनौती दी थी. कंपनी का तर्क था कि जब खंडपीठ पहले ही निषेधाज्ञा को बरकरार रख चुकी है, तो एकल पीठ उस आदेश में बदलाव नहीं कर सकती. खंडपीठ ने इमामी की इस कानूनी दलील से सहमति जताई. अदालत ने कहा कि खंडपीठ द्वारा बरकरार रखे गए आदेश में किसी तरह की राहत या बदलाव पर केवल खंडपीठ या उससे उच्च अदालत ही विचार कर सकती है. हालांकि, बाद में इमामी की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताए जाने के बाद अदालत ने पहले से तय सुरक्षा शर्तों के साथ दाबर को मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दे दी.
ऑनलाइन बिक्री पर रोक, केवल दुकानों से बिकेगा स्टॉक
अदालत के आदेश के मुताबिक, डाबर को कूल किंग ठंडा तेल को सभी ई-कॉमर्स मंचों से हटाना होगा. कंपनी को अमेजन और बिगबास्केट सहित ऑनलाइन मंचों से उत्पाद की सूची और तस्वीरें हटाने के लिए भी कदम उठाने होंगे. बचा हुआ स्टॉक केवल थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के भौतिक दुकानों के माध्यम से बेचा जा सकेगा. ऑनलाइन बिक्री की अनुमति नहीं होगी.
30 सितंबर के बाद यदि कोई स्टॉक बिना बिके बचता है तो डाबर को उसे बाजार से वापस लेना होगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनी इस अनुमति का लाभ तभी उठा सकेगी, जब वह बचे हुए स्टॉक को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करने में सक्षम हो. यदि डाबर स्टॉक को वापस लेने में सफल नहीं होती है तो उसे विवादित पैकेजिंग में कूल किंग ठंडा तेल की बिक्री जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ऐसी स्थिति में कंपनी को इमामी के नवरत्न आयुर्वेदिक तेल से स्पष्ट रूप से अलग पैकेजिंग का इस्तेमाल करना होगा. फिलहाल, अदालत द्वारा लगाया गया मूल प्रतिबंध बरकरार है, यानी डाबर भविष्य में ऐसी पैकेजिंग या उत्पाद पहचान के साथ कूल किंग ठंडा तेल नहीं बेच सकेगी, जो इमामी के नवरत्न आयुर्वेदिक तेल से भ्रामक रूप से मिलती-जुलती हो.
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) के 3,100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित फंड जुटाने पर रोक लगाने के भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के फैसले पर प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण यानी सैट ने सवाल उठाए हैं. सैट ने कहा कि जब सेबी खुद यह मान रहा है कि दो महीने की रोक अवधि समाप्त होने के बाद यह निवेश किया जा सकता है, तो फिलहाल इसे रोकने का तर्क समझ से परे है.
सैट ने शुक्रवार को अंतरिम राहत देते हुए जी को प्रमोटर समूह की इकाई के पक्ष में पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने की अनुमति दे दी. हालांकि, न्यायाधिकरण ने सेबी के पूरे आदेश पर रोक नहीं लगाई है और जी पर प्रतिभूति बाजार तक पहुंच को लेकर लगाई गई व्यापक रोक फिलहाल जारी रहेगी.
दो महीने बाद निवेश की अनुमति तो अभी रोक क्यों?
सुनवाई के दौरान सैट ने सेबी से सीधे सवाल किया था कि क्या दो महीने की रोक अवधि खत्म होने के बाद यह निवेश कंपनी में किया जा सकता है. इस पर सेबी के वकील ने माना कि रोक अवधि समाप्त होने के बाद निवेश किया जा सकता है. यहीं से सैट ने सेबी के तर्क पर सवाल उठाया. न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि प्रस्तावित लेनदेन दो महीने बाद कानूनी रूप से किया जा सकता है और इसके रास्ते में कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो फिलहाल इसे रोकने का आधार स्पष्ट नहीं है.
सेबी ने जी की तत्काल राहत की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि कंपनी ने आवंटन को तुरंत पूरा करने की जरूरत साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की है. हालांकि, सैट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
सार्वजनिक शेयरधारकों का भारी समर्थन
सैट ने अपने आदेश में इस बात को भी काफी महत्व दिया कि प्रस्तावित फंड जुटाने की योजना को बड़ी संख्या में सार्वजनिक शेयरधारकों का समर्थन मिला है. 31 जुलाई को हुई असाधारण आम बैठक में प्रमोटरों को छोड़कर 76.64 प्रतिशत शेयरधारकों ने वारंट जारी करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. वहीं, जी के करीब 96 प्रतिशत शेयरधारक सार्वजनिक श्रेणी के हैं.
न्यायाधिकरण ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने से सार्वजनिक शेयरधारकों को भी फायदा होने की संभावना है. इस वारंट निर्गम के जरिए कंपनी को करीब 3,100 करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है.
प्रतिभूति लेनदेन में धोखाधड़ी का आरोप नहीं
सुनवाई के दौरान सेबी ने एक और अहम बात स्वीकार की. सैट के सवाल पर सेबी ने माना कि उसके आदेश में जी के खिलाफ प्रतिभूतियों के लेनदेन से जुड़े मामले में धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध नियमों के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया गया है. हालांकि, सैट ने इस स्तर पर सेबी के मूल आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की अन्य दलीलों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा.
लेकिन अंतरिम राहत देते समय इस तथ्य को अहम माना गया कि कंपनी पर प्रतिभूति लेनदेन के संबंध में धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप नहीं है, जबकि दूसरी ओर शेयरधारकों की मंजूरी से जुड़ा एक समयबद्ध फंड जुटाने का प्रस्ताव मौजूद है.
फंड जुटाने की अनुमति, लेकिन बाजार प्रतिबंध जारी
सैट ने सेबी के आदेश पर केवल उतनी सीमा तक रोक लगाई है, जिससे जी और पुनीत गोयनका प्रमोटर समूह की इकाई को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी कर सकें. इसके साथ ही अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी जुर्माना राशि जमा करनी होगी. सेबी को इस राशि को ब्याज वाले खाते में रखने का निर्देश दिया गया है.
न्यायाधिकरण ने वारंट जारी करने की समयसीमा भी एक सप्ताह बढ़ा दी है. यह समयसीमा पहले 14 अगस्त को समाप्त हो रही थी. सैट ने कंपनी को सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन करने की भी अनुमति दी है. हालांकि, प्रस्तावित लाभांश के भुगतान सहित अन्य उद्देश्यों के लिए ऐसी अनुमति नहीं दी गई है.
हैदराबाद संपत्ति मामले से जुड़ा है विवाद
सेबी की कार्रवाई जी की हैदराबाद स्थित एक संपत्ति से जुड़े आरोपों के बाद हुई थी. आरोप है कि वर्ष 2016 में प्रमोटरों ने चार समूह कंपनियों के कर्ज के लिए इस संपत्ति को गिरवी रखा था. सेबी का आरोप है कि यह संपत्ति जरूरी बोर्ड या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना गिरवी रखी गई थी. हालांकि, सैट ने अभी इन आरोपों की वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया है.
फिलहाल सैट के अंतरिम आदेश ने यह साफ कर दिया है कि सेबी जी की बाजार तक पहुंच पर प्रतिबंध जारी रख सकता है, लेकिन इसी प्रतिबंध के आधार पर सार्वजनिक शेयरधारकों की मंजूरी वाले 3,100 करोड़ रुपये के वारंट निर्गम को अंतरिम अवधि में रोका नहीं जा सकता.
अब मामले की अंतिम सुनवाई में यह तय होगा कि सेबी के मूल निष्कर्ष और जी पर लगाए गए प्रतिबंध कानूनी जांच की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं. लेकिन फिलहाल सैट ने सेबी के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब निवेश दो महीने बाद कानूनी रूप से स्वीकार्य है, तो इन दो महीनों के दौरान उसे रोकने के लिए और मजबूत आधार की जरूरत है.
विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन के. स्वामी को बीएआरसी बोर्ड के लिए चुना है. हालांकि 2020 के टीआरपी विवाद से जुड़े हंसा रिसर्च के साथ समूह के संबंधों को लेकर इस नियुक्ति ने बीएआरसी की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की टेलीविजन रेटिंग एजेंसी बीएआरसी (BARC) के बोर्ड में श्रीनिवासन के. स्वामी की नियुक्ति ने मीडिया और विज्ञापन उद्योग में नई बहस को जन्म दे दिया है. भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन स्वामी को बीएआरसी बोर्ड में शशि सिन्हा की जगह नामित और निर्वाचित किया है. कागजों पर यह एक सामान्य औद्योगिक नियुक्ति है. श्रीनिवासन स्वामी विज्ञापन जगत के अनुभवी नाम हैं और देश के प्रमुख विज्ञापन समूहों में से एक आरके स्वामी का नेतृत्व करते हैं. लेकिन इस नियुक्ति के साथ हंसा रिसर्च का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जो 2020 के चर्चित टीआरपी विवाद से जुड़ा रहा था.
हंसा रिसर्च कनेक्शन क्यों बना सवाल?
हंसा रिसर्च, आरके स्वामी समूह का हिस्सा है. 2020 के कथित टीआरपी हेरफेर मामले में इस कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे. उस समय हंसा रिसर्च को मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बीएआरसी के दर्शक मापने वाले उपकरण लगाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी.
इन उपकरणों से मिलने वाला डेटा टेलीविजन चैनलों की रेटिंग तय करने में अहम भूमिका निभाता है. यही रेटिंग विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और प्रसारकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है. मुंबई पुलिस की चार्जशीट में हंसा विजन प्राइवेट लिमिटेड, जिसे हंसा रिसर्च की होल्डिंग कंपनी बताया गया था, की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए गए थे. चार्जशीट के अनुसार, कंपनी के कुछ टेलीविजन चैनलों के साथ व्यावसायिक हित थे, जिनकी जानकारी बीएआरसी को नहीं दी गई थी. हालांकि, इन आरोपों को चुनौती दी गई थी और ये आरोप हंसा रिसर्च, उसके समूह या अधिकारियों के खिलाफ दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं.
टीआरपी विवाद के बाद बीएआरसी की साख पर फिर सवाल
2020 के टीआरपी विवाद ने भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. इसके बाद बीएआरसी ने अपनी व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए.
अब श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब बीएआरसी की विश्वसनीयता और उसके प्रशासनिक ढांचे पर पहले से ही नजर बनी हुई है. उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि भले ही श्रीनिवासन स्वामी के खिलाफ किसी तरह की सीधी भूमिका या संलिप्तता का आरोप नहीं है, लेकिन हंसा रिसर्च के साथ उनके समूह के संबंधों के कारण हितों के टकराव की आशंका का सवाल खड़ा हो सकता है.
मीडिया उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कोई वास्तविक हितों का टकराव है या नहीं. बल्कि यह भी है कि क्या बीएआरसी के पास ऐसे मजबूत नियम हैं, जो किसी भी संभावित व्यावसायिक प्रभाव से रेटिंग प्रणाली को अलग और निष्पक्ष रख सकें.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नजर से और संवेदनशील हुआ मामला
बीएआरसी का काम सिर्फ सामान्य बाजार अनुसंधान तक सीमित नहीं है. टेलीविजन रेटिंग के आधार पर विज्ञापन का पैसा, चैनलों का मूल्यांकन, कार्यक्रमों की रणनीति और पूरे टीवी कारोबार के कई अहम फैसले प्रभावित होते हैं. यही वजह है कि बीएआरसी से सामान्य उद्योग संस्था की तुलना में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है.
मौजूदा समय में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्तर पर भी बीएआरसी और भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली के भविष्य को लेकर चर्चा और समीक्षा चल रही है. ऐसे में श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति को केवल एक व्यक्ति की बोर्ड में एंट्री के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बीएआरसी के प्रशासनिक ढांचे की एक नई परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है.
श्रीनिवासन स्वामी ने क्या कहा?
E4M की ओर से भेजे गए सवालों का श्रीनिवासन स्वामी ने सीधे जवाब नहीं दिया. हालांकि, विज्ञापन एजेंसियों के संघ के सदस्यों को भेजे एक ईमेल में उन्होंने कहा कि हंसा रिसर्च समूह ही इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता था और कथित अनियमितताओं को सबसे पहले उसी ने उजागर किया था. स्वामी के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2020 को हंसा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आंतरिक स्तर पर कथित गड़बड़ी का पता लगाया और मुंबई पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी के एक पूर्व फील्ड अधिकारी ने टीआरपी डेटा से छेड़छाड़ की थी और मामले की व्यापक जांच की मांग की गई थी.
उन्होंने कहा कि कंपनी ने केवल संबंधित कर्मचारी को हटाने के बजाय पूरे मामले की जांच कराने का रास्ता चुना और इस प्रक्रिया में कानूनी परेशानियों का भी सामना किया, लेकिन नैतिकता के साथ समझौता नहीं किया.
स्वामी ने यह भी कहा कि हंसा रिसर्च ने मुंबई पुलिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की थी. उनके अनुसार, कंपनी के खिलाफ गलत कार्रवाई के आरोपों को लेकर उसे अदालत से राहत मिली थी और इससे जुड़े तथ्य न्यायिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं.
बीएआरसी के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीएआरसी ने 2020 के टीआरपी विवाद के बाद अपने प्रशासनिक ढांचे को कितना मजबूत किया है. क्या बोर्ड के सभी सदस्यों और उनसे जुड़े समूहों के संभावित व्यावसायिक हितों का पूरा खुलासा किया जाता है? क्या बीएआरसी के पास ऐसे पर्याप्त नियम हैं, जो बोर्ड के फैसलों, सेवा प्रदाताओं, प्रसारकों और रेटिंग प्रणाली को किसी व्यक्ति या समूह के व्यावसायिक हितों से अलग रख सकें?
उद्योग के जानकारों का मानना है कि श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति पर अंतिम बहस उनकी व्यक्तिगत साख या अनुभव से ज्यादा बीएआरसी की संस्थागत पारदर्शिता पर केंद्रित हो सकती है. क्योंकि बीएआरसी की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है और उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी वही है. 2020 के टीआरपी विवाद ने दिखाया था कि रेटिंग प्रणाली में विश्वास कितना संवेदनशील हो सकता है. अब हंसा रिसर्च के पुराने विवाद से जुड़े एक समूह के प्रमुख की बीएआरसी बोर्ड में नियुक्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेटिंग संस्था अपने प्रशासनिक ढांचे को लेकर उद्योग, विज्ञापनदाताओं, प्रसारकों और नियामकों का भरोसा पूरी तरह कायम रख पाएगी.
आने वाले दिनों में यह नियुक्ति बीएआरसी के लिए केवल एक बोर्ड बदलाव नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शिता, हितों के टकराव से निपटने की क्षमता और विश्वसनीयता की एक अहम परीक्षा साबित हो सकती है.
उत्तर प्रदेश और केरल सरकार समेत कई बड़े निवेशकों ने Bluehill.VC के पहले फंड में निवेश किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
चेन्नई स्थित फ्रंटियर-टेक फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म Bluehill.VC ने अपने पहले 400 करोड़ रुपये के फंड का फाइनल क्लोज कर लिया है. इसमें 50 करोड़ रुपये के ग्रीनशू ऑप्शन का सब्सक्रिप्शन भी शामिल है. फंड को SIDBI, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ-साथ भारत और मध्य पूर्व के फैमिली ऑफिस, सफल उद्यमियों और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी UHNIs का समर्थन मिला है.
Bluehill.VC का कहना है कि उसे तय समयसीमा के भीतर फंड में निवेश के लिए कई अन्य संस्थागत निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स से भी रुचि मिली थी. हालांकि, पहले फंड की तय सीमा के कारण सभी निवेश प्रतिबद्धताओं को शामिल नहीं किया जा सका. फर्म अब 2027 में लॉन्च किए जाने वाले अपने अगले फंड के लिए इन निवेशकों के साथ बातचीत करने की योजना बना रही है.
15-16 कंपनियों में निवेश का लक्ष्य
Bluehill.VC सीड से लेकर सीरीज A चरण तक उन स्टार्टअप्स में निवेश करेगी, जो अपनी खुद की तकनीक और बौद्धिक संपदा यानी IP आधारित प्रोडक्ट्स विकसित कर रहे हैं. फंड का लक्ष्य 15 से 16 कंपनियों का एक केंद्रित पोर्टफोलियो तैयार करना है. कंपनी पहली इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड में औसतन 10 लाख से 20 लाख डॉलर तक का निवेश करेगी. Bluehill.VC निवेश के साथ-साथ स्टार्टअप्स को बिजनेस डेवलपमेंट और ग्रोथ में सहयोग देने के अपने 'इन्वेस्ट एंड बिल्ड' मॉडल पर भी काम करेगी. फर्म अब तक अपने पोर्टफोलियो की सात कंपनियों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. अगले छह महीनों में करीब 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना है.
डिफेंस से सेमीकंडक्टर तक कई सेक्टरों पर नजर
Bluehill.VC एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैटेरियल्स, डिफेंस, स्पेस, वाटर टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और IoT जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स में निवेश कर रही है.
Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर मनु अय्यर ने कहा कि पिछले दो दशकों में वेंचर कैपिटल का फोकस मुख्य रूप से कंज्यूमर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट बिजनेस पर रहा है. लेकिन अब अगली बड़ी वैल्यू उन कंपनियों से पैदा होगी, जो इंजीनियरिंग और साइंस से जुड़ी जटिल समस्याओं का समाधान विकसित कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत के पास डिफेंस, सेमीकंडक्टर, स्पेस, एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की कंपनियां बनाने के लिए टैलेंट, पॉलिसी सपोर्ट और एंटरप्रेन्योरियल क्षमता मौजूद है.
इन कंपनियों में लगा चुका है पैसा
Bluehill.VC के मौजूदा पोर्टफोलियो में EtherealX, Zebu Intelligent Systems, Helex, Sophrosyne Technologies और optoML जैसी कंपनियां शामिल हैं. EtherealX अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष परिवहन के लिए दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लॉन्च सिस्टम विकसित कर रही है. Zebu Intelligent Systems काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करती है और iDEX की तीन चुनौतियां जीतने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर काम कर रही है.
Helex जेनेटिक किडनी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एडवांस्ड थेरेपी विकसित कर रही है. Sophrosyne Technologies एक फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है, जो वियरेबल और डिजिटल हेल्थ डिवाइसेज के लिए एडवांस्ड बायोसेंसिंग सिस्टम-ऑन-चिप यानी SoCs तैयार कर रही है. वहीं, optoML एक इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट के साथ FinFET आधारित Analog AI System-on-Chip प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है. कंपनी का दावा है कि इसकी टेक्नोलॉजी AI वर्कलोड के लिए ऊर्जा दक्षता को 50 गुना तक बढ़ा सकती है.
अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये निवेश की तैयारी
Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर श्रीधर पार्थसारथी ने कहा कि फ्रंटियर-टेक कंपनियों को विकसित होने में अधिक समय लगता है और इनमें निवेश के लिए गहरी तकनीकी समझ की जरूरत होती है. हालांकि, सफल होने पर ऐसी कंपनियां ऐसी तकनीक विकसित कर सकती हैं, जिन्हें दोहराना मुश्किल होता है और जो पूरे उद्योग की दिशा बदल सकती हैं.
उन्होंने कहा कि फर्म का फोकस ऐसे फाउंडर्स की पहचान करना है, जो मूल सिद्धांतों के आधार पर वास्तविक तकनीकी सफलता हासिल करने पर काम कर रहे हैं. ऐसे फाउंडर्स केवल बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों से ही नहीं, बल्कि रिसर्च लैब्स, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स, डिफेंस प्रोग्राम्स और देशभर के विश्वविद्यालयों से भी उभर रहे हैं. मजबूत इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन के साथ Bluehill.VC अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य भारत से ऐसी फ्रंटियर टेक कंपनियों को तैयार करना है, जो न केवल वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करें, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की दिशा भी तय करें.
जुलाई में थोक महंगाई दर जून के रिकॉर्ड 9.87% से घटकर 9.78% रह गई. फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी से राहत मिली, लेकिन प्राइमरी आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी बनी रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महंगाई के मोर्चे पर जुलाई में हल्की राहत देखने को मिली है. भारत की थोक महंगाई दर यानी WPI जून के 9.87% से घटकर जुलाई में 9.78% रह गई. हालांकि यह गिरावट मामूली है, लेकिन फ्यूल और बिजली की महंगाई में आई तेज कमी ने थोक मूल्य सूचकांक पर कुछ राहत का असर डाला है. शुक्रवार को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में थोक महंगाई नई WPI सीरीज के तहत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी. नई सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष माना गया है.
फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी
जुलाई में फ्यूल और बिजली बास्केट की महंगाई दर घटकर 20.05% रह गई, जो जून में 27.41% थी. इससे पहले मई में यह दर 30.33% के स्तर पर थी. हाल के महीनों में थोक महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह फ्यूल और बिजली की कीमतों में तेजी रही थी. हालांकि, दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़ी है. जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर जून के 7% से बढ़कर 8.52% हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में महंगाई 7.48% से बढ़कर 8.29% पर पहुंच गई.
खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव
WPI फूड इंडेक्स में जुलाई के दौरान महंगाई दर 6.65% दर्ज की गई, जो जून में 6.14% थी. मई में यह दर 4.49% रही थी. यानी थोक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. प्राइमरी आर्टिकल्स की बास्केट में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.44% रही. वहीं, मिनरल्स की महंगाई 13.28% और खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य वस्तुओं की महंगाई 17.66% दर्ज की गई. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में खाद्य उत्पादों की महंगाई 8.89%, बेसिक मेटल्स की 12.56% और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की महंगाई 13.12% रही.
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है, जब जुलाई में खुदरा महंगाई दर जून के 4.38% से बढ़कर 4.45% हो गई. खासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों ने कंज्यूमर महंगाई पर दबाव बनाए रखा. सरकार के मुताबिक, जुलाई में थोक महंगाई पर मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड फूड प्रोडक्ट्स और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों का प्रमुख असर रहा.
नई WPI सीरीज में क्या बदला?
जुलाई का आंकड़ा 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई संशोधित WPI सीरीज के तहत तीसरी मासिक रीडिंग है. सरकार ने जून में नई सीरीज लागू की थी, जिसने 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह ली.
नई सीरीज में WPI बास्केट का दायरा 697 से बढ़ाकर 957 वस्तुओं तक कर दिया गया है. इसमें बिजली समूह में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों के साथ परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है. नई सीरीज के तहत फ्यूल और बिजली का वेटेज 14.1%, प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.8% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का 63.1% रखा गया है. सरकार ने मई के लिए अंतिम WPI इंडेक्स को भी 109.9 के शुरुआती अनुमान से संशोधित कर 110.1 कर दिया है. इसके साथ ही मई की थोक महंगाई दर को पहले के 9.68% से बढ़ाकर 9.88% कर दिया गया है.
हिंदुजा ग्रुप तमिलनाडु में रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हिंदुजा ग्रुप ने तमिलनाडु में 2,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में किया जाएगा. राज्य में मैन्युफैक्चरिंग और स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश आकर्षित किए जा रहे हैं और हिंदुजा ग्रुप का यह नया निवेश इसी दिशा में अहम माना जा रहा है.
क्लीन एनर्जी पर होगा बड़ा निवेश
इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा हिंदुजा रिन्यूएबल्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड यानी HREPL के जरिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा. कंपनी सोलर, विंड और बैटरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी 200 मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने की योजना बना रही है. यह पहल तमिलनाडु में क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और भारत के एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में भी अहम होगी.
हिंदुजा ग्रुप ऑफ कंपनीज (इंडिया) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा ने कहा कि यह निवेश तमिलनाडु के औद्योगिक इकोसिस्टम और राज्य की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर ग्रुप के भरोसे को दर्शाता है. उन्होंने राज्य में मजबूत टैलेंट बेस, बेहतर औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में मौजूद अवसरों को निवेश के प्रमुख कारणों में शामिल बताया.
इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
मोबिलिटी सेक्टर में OHM Global Mobility Ltd राज्य में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही कंपनी तमिलनाडु में अपने मोबिलिटी सॉल्यूशंस वैल्यू चेन का विस्तार करेगी.
हिंदुजा ग्रुप अपने व्यापक निवेश रोडमैप के तहत बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल मोबिलिटी सॉल्यूशंस में भी अवसर तलाशेगा. इससे राज्य के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को और मजबूती मिल सकती है.
तमिलनाडु पहले से ही भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है और ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश आकर्षित कर रहा है. हिंदुजा ग्रुप का 2,500 करोड़ रुपये का नया निवेश राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विस्तार को गति देने में भी मददगार साबित हो सकता है.
अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई के बीच भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े संभावित अमेरिकी कानून के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत नियमित रूप से हो रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं.
रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले प्रस्तावित अमेरिकी कानून के भारत पर संभावित असर को लेकर पूछे गए सवाल पर अग्रवाल ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने कहा, "यह अमेरिका की विधायी प्रक्रिया का मामला है, जो अभी जारी है. मुझे नहीं लगता कि हमें इस पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए. यह उनका आंतरिक मामला है."
ट्रेड डील पर जारी है बातचीत
वाणिज्य सचिव ने कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है. दोनों पक्षों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है. अग्रवाल ने कहा, "हम ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं और हमारे संपर्क नियमित हैं. दोनों पक्ष उस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं, जिस पर सहमति बनी है."
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दी थी. इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. हालांकि, इस विधेयक को आगे की विधायी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी विचार के लिए जाना होगा.
BTA के जरिए व्यापार बढ़ाने की तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी Bilateral Trade Agreement (BTA) को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना और व्यापार से जुड़ी प्रमुख बाधाओं को दूर करना है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली के दौरे पर आए थे. इस दौरान उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के कई अहम पहलुओं की समीक्षा की थी. दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती, गैर-टैरिफ बाधाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
भारत और अमेरिका ने कहा है कि दोनों देशों की वार्ता टीमों ने समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की है. दोनों पक्ष एक ऐसे व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के कारोबार, किसानों, कामगारों और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाए.
जून तिमाही में कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार दिखा, लेकिन ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत बनी चिंता. कंपनी के बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये तक जुटाने और JSW One Platforms के IPO में हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जेएसडब्ल्यू (JSW Cement) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 61% बढ़कर 160.64 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ऑपरेशंस से होने वाली आय 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये पहुंच गई. हालांकि, इस दौरान बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग कॉस्ट में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. जून तिमाही के नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए गए. इससे पहले गुरुवार को BSE पर JSW Cement का शेयर 131.05 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ.
पिछले साल हुआ था भारी घाटा
वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में कंपनी को 1,356.17 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. हालांकि, उस तिमाही के नतीजों पर 1,466 करोड़ रुपये के एक असाधारण खर्च का असर पड़ा था. यह खर्च अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयरों के कन्वर्जन से जुड़े वैल्यूएशन इंपैक्ट के कारण हुआ था. अगर इस असाधारण मद को हटा दिया जाए तो पिछले साल की जून तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स करीब 100 करोड़ रुपये था. इस आधार पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी के मुनाफे में करीब 60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तिमाही के दौरान एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा 15.5% बढ़कर 190.2 करोड़ रुपये हो गया.
22% बढ़ी आय, लेकिन खर्च भी बढ़ा
JSW Cement की ऑपरेशंस से आय सालाना आधार पर 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये रही. कंपनी को अधिक बिजनेस वॉल्यूम से आय बढ़ाने में मदद मिली. हालांकि, कुल खर्च आय की तुलना में तेज गति से बढ़ा. डिप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट समेत कंपनी का कुल खर्च 26.49% बढ़कर 1,792.75 करोड़ रुपये हो गया. खर्च बढ़ने की मुख्य वजह बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग लागत में इजाफा रहा.
पावर और फ्यूल एक्सपेंस 43.72% बढ़कर 305.29 करोड़ रुपये पहुंच गया. कच्चे माल की लागत 22.71% बढ़कर 443.72 करोड़ रुपये रही. वहीं, फ्रेट और हैंडलिंग खर्च सालाना आधार पर 14.23% बढ़कर 415.19 करोड़ रुपये हो गया.
मार्च तिमाही के मुकाबले मुनाफे में गिरावट
तिमाही आधार पर कंपनी की आय लगभग स्थिर रही, लेकिन मार्च 2026 तिमाही की तुलना में मुनाफा 56.73% घट गया. इसकी बड़ी वजह पिछली तिमाही का हाई बेस रहा, जब कंपनी के मुनाफे को एकमुश्त टैक्स बेनिफिट से बढ़ावा मिला था. मार्च 2026 तिमाही में JSW Cement ने 371.33 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. इसमें 211.2 करोड़ रुपये का टैक्स बेनिफिट शामिल था. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 से नई टैक्स व्यवस्था अपनाने का फैसला किया था, जिसके बाद नेट डिफर्ड टैक्स देनदारियों में कमी से यह फायदा मिला. एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा भी मार्च तिमाही के 219 करोड़ रुपये से घटकर जून तिमाही में करीब 190 करोड़ रुपये रह गया.
500 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी
JSW Cement के बोर्ड ने अलग से 500 करोड़ रुपये तक की फंडरेजिंग को मंजूरी दी है. कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर रेटेड और लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके यह राशि जुटाएगी. इससे कंपनी को अपने सीमेंट कारोबार के विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन मिलेगा.
इसके अलावा बोर्ड ने JSW One Platforms के प्रस्तावित IPO में प्रमोटर सेलिंग शेयरहोल्डर के तौर पर JSW Cement की भागीदारी को भी मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव के तहत कंपनी JSW One Platforms में अपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाली इक्विटी हिस्सेदारी में से कुल 123 करोड़ रुपये तक के शेयर IPO के जरिए बेच सकती है.