प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) के 3,100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित फंड जुटाने पर रोक लगाने के भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के फैसले पर प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण यानी सैट ने सवाल उठाए हैं. सैट ने कहा कि जब सेबी खुद यह मान रहा है कि दो महीने की रोक अवधि समाप्त होने के बाद यह निवेश किया जा सकता है, तो फिलहाल इसे रोकने का तर्क समझ से परे है.
सैट ने शुक्रवार को अंतरिम राहत देते हुए जी को प्रमोटर समूह की इकाई के पक्ष में पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने की अनुमति दे दी. हालांकि, न्यायाधिकरण ने सेबी के पूरे आदेश पर रोक नहीं लगाई है और जी पर प्रतिभूति बाजार तक पहुंच को लेकर लगाई गई व्यापक रोक फिलहाल जारी रहेगी.
दो महीने बाद निवेश की अनुमति तो अभी रोक क्यों?
सुनवाई के दौरान सैट ने सेबी से सीधे सवाल किया था कि क्या दो महीने की रोक अवधि खत्म होने के बाद यह निवेश कंपनी में किया जा सकता है. इस पर सेबी के वकील ने माना कि रोक अवधि समाप्त होने के बाद निवेश किया जा सकता है. यहीं से सैट ने सेबी के तर्क पर सवाल उठाया. न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि प्रस्तावित लेनदेन दो महीने बाद कानूनी रूप से किया जा सकता है और इसके रास्ते में कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो फिलहाल इसे रोकने का आधार स्पष्ट नहीं है.
सेबी ने जी की तत्काल राहत की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि कंपनी ने आवंटन को तुरंत पूरा करने की जरूरत साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की है. हालांकि, सैट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
सार्वजनिक शेयरधारकों का भारी समर्थन
सैट ने अपने आदेश में इस बात को भी काफी महत्व दिया कि प्रस्तावित फंड जुटाने की योजना को बड़ी संख्या में सार्वजनिक शेयरधारकों का समर्थन मिला है. 31 जुलाई को हुई असाधारण आम बैठक में प्रमोटरों को छोड़कर 76.64 प्रतिशत शेयरधारकों ने वारंट जारी करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. वहीं, जी के करीब 96 प्रतिशत शेयरधारक सार्वजनिक श्रेणी के हैं.
न्यायाधिकरण ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने से सार्वजनिक शेयरधारकों को भी फायदा होने की संभावना है. इस वारंट निर्गम के जरिए कंपनी को करीब 3,100 करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है.
प्रतिभूति लेनदेन में धोखाधड़ी का आरोप नहीं
सुनवाई के दौरान सेबी ने एक और अहम बात स्वीकार की. सैट के सवाल पर सेबी ने माना कि उसके आदेश में जी के खिलाफ प्रतिभूतियों के लेनदेन से जुड़े मामले में धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध नियमों के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया गया है. हालांकि, सैट ने इस स्तर पर सेबी के मूल आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की अन्य दलीलों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा.
लेकिन अंतरिम राहत देते समय इस तथ्य को अहम माना गया कि कंपनी पर प्रतिभूति लेनदेन के संबंध में धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप नहीं है, जबकि दूसरी ओर शेयरधारकों की मंजूरी से जुड़ा एक समयबद्ध फंड जुटाने का प्रस्ताव मौजूद है.
फंड जुटाने की अनुमति, लेकिन बाजार प्रतिबंध जारी
सैट ने सेबी के आदेश पर केवल उतनी सीमा तक रोक लगाई है, जिससे जी और पुनीत गोयनका प्रमोटर समूह की इकाई को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी कर सकें. इसके साथ ही अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी जुर्माना राशि जमा करनी होगी. सेबी को इस राशि को ब्याज वाले खाते में रखने का निर्देश दिया गया है.
न्यायाधिकरण ने वारंट जारी करने की समयसीमा भी एक सप्ताह बढ़ा दी है. यह समयसीमा पहले 14 अगस्त को समाप्त हो रही थी. सैट ने कंपनी को सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन करने की भी अनुमति दी है. हालांकि, प्रस्तावित लाभांश के भुगतान सहित अन्य उद्देश्यों के लिए ऐसी अनुमति नहीं दी गई है.
हैदराबाद संपत्ति मामले से जुड़ा है विवाद
सेबी की कार्रवाई जी की हैदराबाद स्थित एक संपत्ति से जुड़े आरोपों के बाद हुई थी. आरोप है कि वर्ष 2016 में प्रमोटरों ने चार समूह कंपनियों के कर्ज के लिए इस संपत्ति को गिरवी रखा था. सेबी का आरोप है कि यह संपत्ति जरूरी बोर्ड या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना गिरवी रखी गई थी. हालांकि, सैट ने अभी इन आरोपों की वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया है.
फिलहाल सैट के अंतरिम आदेश ने यह साफ कर दिया है कि सेबी जी की बाजार तक पहुंच पर प्रतिबंध जारी रख सकता है, लेकिन इसी प्रतिबंध के आधार पर सार्वजनिक शेयरधारकों की मंजूरी वाले 3,100 करोड़ रुपये के वारंट निर्गम को अंतरिम अवधि में रोका नहीं जा सकता.
अब मामले की अंतिम सुनवाई में यह तय होगा कि सेबी के मूल निष्कर्ष और जी पर लगाए गए प्रतिबंध कानूनी जांच की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं. लेकिन फिलहाल सैट ने सेबी के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब निवेश दो महीने बाद कानूनी रूप से स्वीकार्य है, तो इन दो महीनों के दौरान उसे रोकने के लिए और मजबूत आधार की जरूरत है.
विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन के. स्वामी को बीएआरसी बोर्ड के लिए चुना है. हालांकि 2020 के टीआरपी विवाद से जुड़े हंसा रिसर्च के साथ समूह के संबंधों को लेकर इस नियुक्ति ने बीएआरसी की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की टेलीविजन रेटिंग एजेंसी बीएआरसी (BARC) के बोर्ड में श्रीनिवासन के. स्वामी की नियुक्ति ने मीडिया और विज्ञापन उद्योग में नई बहस को जन्म दे दिया है. भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन स्वामी को बीएआरसी बोर्ड में शशि सिन्हा की जगह नामित और निर्वाचित किया है. कागजों पर यह एक सामान्य औद्योगिक नियुक्ति है. श्रीनिवासन स्वामी विज्ञापन जगत के अनुभवी नाम हैं और देश के प्रमुख विज्ञापन समूहों में से एक आरके स्वामी का नेतृत्व करते हैं. लेकिन इस नियुक्ति के साथ हंसा रिसर्च का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जो 2020 के चर्चित टीआरपी विवाद से जुड़ा रहा था.
हंसा रिसर्च कनेक्शन क्यों बना सवाल?
हंसा रिसर्च, आरके स्वामी समूह का हिस्सा है. 2020 के कथित टीआरपी हेरफेर मामले में इस कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे. उस समय हंसा रिसर्च को मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बीएआरसी के दर्शक मापने वाले उपकरण लगाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी.
इन उपकरणों से मिलने वाला डेटा टेलीविजन चैनलों की रेटिंग तय करने में अहम भूमिका निभाता है. यही रेटिंग विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और प्रसारकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है. मुंबई पुलिस की चार्जशीट में हंसा विजन प्राइवेट लिमिटेड, जिसे हंसा रिसर्च की होल्डिंग कंपनी बताया गया था, की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए गए थे. चार्जशीट के अनुसार, कंपनी के कुछ टेलीविजन चैनलों के साथ व्यावसायिक हित थे, जिनकी जानकारी बीएआरसी को नहीं दी गई थी. हालांकि, इन आरोपों को चुनौती दी गई थी और ये आरोप हंसा रिसर्च, उसके समूह या अधिकारियों के खिलाफ दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं.
टीआरपी विवाद के बाद बीएआरसी की साख पर फिर सवाल
2020 के टीआरपी विवाद ने भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. इसके बाद बीएआरसी ने अपनी व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए.
अब श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब बीएआरसी की विश्वसनीयता और उसके प्रशासनिक ढांचे पर पहले से ही नजर बनी हुई है. उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि भले ही श्रीनिवासन स्वामी के खिलाफ किसी तरह की सीधी भूमिका या संलिप्तता का आरोप नहीं है, लेकिन हंसा रिसर्च के साथ उनके समूह के संबंधों के कारण हितों के टकराव की आशंका का सवाल खड़ा हो सकता है.
मीडिया उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कोई वास्तविक हितों का टकराव है या नहीं. बल्कि यह भी है कि क्या बीएआरसी के पास ऐसे मजबूत नियम हैं, जो किसी भी संभावित व्यावसायिक प्रभाव से रेटिंग प्रणाली को अलग और निष्पक्ष रख सकें.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नजर से और संवेदनशील हुआ मामला
बीएआरसी का काम सिर्फ सामान्य बाजार अनुसंधान तक सीमित नहीं है. टेलीविजन रेटिंग के आधार पर विज्ञापन का पैसा, चैनलों का मूल्यांकन, कार्यक्रमों की रणनीति और पूरे टीवी कारोबार के कई अहम फैसले प्रभावित होते हैं. यही वजह है कि बीएआरसी से सामान्य उद्योग संस्था की तुलना में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है.
मौजूदा समय में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्तर पर भी बीएआरसी और भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली के भविष्य को लेकर चर्चा और समीक्षा चल रही है. ऐसे में श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति को केवल एक व्यक्ति की बोर्ड में एंट्री के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बीएआरसी के प्रशासनिक ढांचे की एक नई परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है.
श्रीनिवासन स्वामी ने क्या कहा?
E4M की ओर से भेजे गए सवालों का श्रीनिवासन स्वामी ने सीधे जवाब नहीं दिया. हालांकि, विज्ञापन एजेंसियों के संघ के सदस्यों को भेजे एक ईमेल में उन्होंने कहा कि हंसा रिसर्च समूह ही इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता था और कथित अनियमितताओं को सबसे पहले उसी ने उजागर किया था. स्वामी के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2020 को हंसा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आंतरिक स्तर पर कथित गड़बड़ी का पता लगाया और मुंबई पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी के एक पूर्व फील्ड अधिकारी ने टीआरपी डेटा से छेड़छाड़ की थी और मामले की व्यापक जांच की मांग की गई थी.
उन्होंने कहा कि कंपनी ने केवल संबंधित कर्मचारी को हटाने के बजाय पूरे मामले की जांच कराने का रास्ता चुना और इस प्रक्रिया में कानूनी परेशानियों का भी सामना किया, लेकिन नैतिकता के साथ समझौता नहीं किया.
स्वामी ने यह भी कहा कि हंसा रिसर्च ने मुंबई पुलिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की थी. उनके अनुसार, कंपनी के खिलाफ गलत कार्रवाई के आरोपों को लेकर उसे अदालत से राहत मिली थी और इससे जुड़े तथ्य न्यायिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं.
बीएआरसी के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीएआरसी ने 2020 के टीआरपी विवाद के बाद अपने प्रशासनिक ढांचे को कितना मजबूत किया है. क्या बोर्ड के सभी सदस्यों और उनसे जुड़े समूहों के संभावित व्यावसायिक हितों का पूरा खुलासा किया जाता है? क्या बीएआरसी के पास ऐसे पर्याप्त नियम हैं, जो बोर्ड के फैसलों, सेवा प्रदाताओं, प्रसारकों और रेटिंग प्रणाली को किसी व्यक्ति या समूह के व्यावसायिक हितों से अलग रख सकें?
उद्योग के जानकारों का मानना है कि श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति पर अंतिम बहस उनकी व्यक्तिगत साख या अनुभव से ज्यादा बीएआरसी की संस्थागत पारदर्शिता पर केंद्रित हो सकती है. क्योंकि बीएआरसी की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है और उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी वही है. 2020 के टीआरपी विवाद ने दिखाया था कि रेटिंग प्रणाली में विश्वास कितना संवेदनशील हो सकता है. अब हंसा रिसर्च के पुराने विवाद से जुड़े एक समूह के प्रमुख की बीएआरसी बोर्ड में नियुक्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेटिंग संस्था अपने प्रशासनिक ढांचे को लेकर उद्योग, विज्ञापनदाताओं, प्रसारकों और नियामकों का भरोसा पूरी तरह कायम रख पाएगी.
आने वाले दिनों में यह नियुक्ति बीएआरसी के लिए केवल एक बोर्ड बदलाव नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शिता, हितों के टकराव से निपटने की क्षमता और विश्वसनीयता की एक अहम परीक्षा साबित हो सकती है.
उत्तर प्रदेश और केरल सरकार समेत कई बड़े निवेशकों ने Bluehill.VC के पहले फंड में निवेश किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
चेन्नई स्थित फ्रंटियर-टेक फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म Bluehill.VC ने अपने पहले 400 करोड़ रुपये के फंड का फाइनल क्लोज कर लिया है. इसमें 50 करोड़ रुपये के ग्रीनशू ऑप्शन का सब्सक्रिप्शन भी शामिल है. फंड को SIDBI, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ-साथ भारत और मध्य पूर्व के फैमिली ऑफिस, सफल उद्यमियों और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी UHNIs का समर्थन मिला है.
Bluehill.VC का कहना है कि उसे तय समयसीमा के भीतर फंड में निवेश के लिए कई अन्य संस्थागत निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स से भी रुचि मिली थी. हालांकि, पहले फंड की तय सीमा के कारण सभी निवेश प्रतिबद्धताओं को शामिल नहीं किया जा सका. फर्म अब 2027 में लॉन्च किए जाने वाले अपने अगले फंड के लिए इन निवेशकों के साथ बातचीत करने की योजना बना रही है.
15-16 कंपनियों में निवेश का लक्ष्य
Bluehill.VC सीड से लेकर सीरीज A चरण तक उन स्टार्टअप्स में निवेश करेगी, जो अपनी खुद की तकनीक और बौद्धिक संपदा यानी IP आधारित प्रोडक्ट्स विकसित कर रहे हैं. फंड का लक्ष्य 15 से 16 कंपनियों का एक केंद्रित पोर्टफोलियो तैयार करना है. कंपनी पहली इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड में औसतन 10 लाख से 20 लाख डॉलर तक का निवेश करेगी. Bluehill.VC निवेश के साथ-साथ स्टार्टअप्स को बिजनेस डेवलपमेंट और ग्रोथ में सहयोग देने के अपने 'इन्वेस्ट एंड बिल्ड' मॉडल पर भी काम करेगी. फर्म अब तक अपने पोर्टफोलियो की सात कंपनियों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. अगले छह महीनों में करीब 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना है.
डिफेंस से सेमीकंडक्टर तक कई सेक्टरों पर नजर
Bluehill.VC एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैटेरियल्स, डिफेंस, स्पेस, वाटर टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और IoT जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स में निवेश कर रही है.
Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर मनु अय्यर ने कहा कि पिछले दो दशकों में वेंचर कैपिटल का फोकस मुख्य रूप से कंज्यूमर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट बिजनेस पर रहा है. लेकिन अब अगली बड़ी वैल्यू उन कंपनियों से पैदा होगी, जो इंजीनियरिंग और साइंस से जुड़ी जटिल समस्याओं का समाधान विकसित कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत के पास डिफेंस, सेमीकंडक्टर, स्पेस, एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की कंपनियां बनाने के लिए टैलेंट, पॉलिसी सपोर्ट और एंटरप्रेन्योरियल क्षमता मौजूद है.
इन कंपनियों में लगा चुका है पैसा
Bluehill.VC के मौजूदा पोर्टफोलियो में EtherealX, Zebu Intelligent Systems, Helex, Sophrosyne Technologies और optoML जैसी कंपनियां शामिल हैं. EtherealX अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष परिवहन के लिए दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लॉन्च सिस्टम विकसित कर रही है. Zebu Intelligent Systems काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करती है और iDEX की तीन चुनौतियां जीतने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर काम कर रही है.
Helex जेनेटिक किडनी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एडवांस्ड थेरेपी विकसित कर रही है. Sophrosyne Technologies एक फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है, जो वियरेबल और डिजिटल हेल्थ डिवाइसेज के लिए एडवांस्ड बायोसेंसिंग सिस्टम-ऑन-चिप यानी SoCs तैयार कर रही है. वहीं, optoML एक इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट के साथ FinFET आधारित Analog AI System-on-Chip प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है. कंपनी का दावा है कि इसकी टेक्नोलॉजी AI वर्कलोड के लिए ऊर्जा दक्षता को 50 गुना तक बढ़ा सकती है.
अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये निवेश की तैयारी
Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर श्रीधर पार्थसारथी ने कहा कि फ्रंटियर-टेक कंपनियों को विकसित होने में अधिक समय लगता है और इनमें निवेश के लिए गहरी तकनीकी समझ की जरूरत होती है. हालांकि, सफल होने पर ऐसी कंपनियां ऐसी तकनीक विकसित कर सकती हैं, जिन्हें दोहराना मुश्किल होता है और जो पूरे उद्योग की दिशा बदल सकती हैं.
उन्होंने कहा कि फर्म का फोकस ऐसे फाउंडर्स की पहचान करना है, जो मूल सिद्धांतों के आधार पर वास्तविक तकनीकी सफलता हासिल करने पर काम कर रहे हैं. ऐसे फाउंडर्स केवल बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों से ही नहीं, बल्कि रिसर्च लैब्स, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स, डिफेंस प्रोग्राम्स और देशभर के विश्वविद्यालयों से भी उभर रहे हैं. मजबूत इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन के साथ Bluehill.VC अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य भारत से ऐसी फ्रंटियर टेक कंपनियों को तैयार करना है, जो न केवल वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करें, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की दिशा भी तय करें.
जुलाई में थोक महंगाई दर जून के रिकॉर्ड 9.87% से घटकर 9.78% रह गई. फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी से राहत मिली, लेकिन प्राइमरी आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी बनी रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महंगाई के मोर्चे पर जुलाई में हल्की राहत देखने को मिली है. भारत की थोक महंगाई दर यानी WPI जून के 9.87% से घटकर जुलाई में 9.78% रह गई. हालांकि यह गिरावट मामूली है, लेकिन फ्यूल और बिजली की महंगाई में आई तेज कमी ने थोक मूल्य सूचकांक पर कुछ राहत का असर डाला है. शुक्रवार को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में थोक महंगाई नई WPI सीरीज के तहत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी. नई सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष माना गया है.
फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी
जुलाई में फ्यूल और बिजली बास्केट की महंगाई दर घटकर 20.05% रह गई, जो जून में 27.41% थी. इससे पहले मई में यह दर 30.33% के स्तर पर थी. हाल के महीनों में थोक महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह फ्यूल और बिजली की कीमतों में तेजी रही थी. हालांकि, दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़ी है. जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर जून के 7% से बढ़कर 8.52% हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में महंगाई 7.48% से बढ़कर 8.29% पर पहुंच गई.
खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव
WPI फूड इंडेक्स में जुलाई के दौरान महंगाई दर 6.65% दर्ज की गई, जो जून में 6.14% थी. मई में यह दर 4.49% रही थी. यानी थोक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. प्राइमरी आर्टिकल्स की बास्केट में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.44% रही. वहीं, मिनरल्स की महंगाई 13.28% और खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य वस्तुओं की महंगाई 17.66% दर्ज की गई. मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में खाद्य उत्पादों की महंगाई 8.89%, बेसिक मेटल्स की 12.56% और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की महंगाई 13.12% रही.
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है, जब जुलाई में खुदरा महंगाई दर जून के 4.38% से बढ़कर 4.45% हो गई. खासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों ने कंज्यूमर महंगाई पर दबाव बनाए रखा. सरकार के मुताबिक, जुलाई में थोक महंगाई पर मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड फूड प्रोडक्ट्स और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों का प्रमुख असर रहा.
नई WPI सीरीज में क्या बदला?
जुलाई का आंकड़ा 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई संशोधित WPI सीरीज के तहत तीसरी मासिक रीडिंग है. सरकार ने जून में नई सीरीज लागू की थी, जिसने 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह ली.
नई सीरीज में WPI बास्केट का दायरा 697 से बढ़ाकर 957 वस्तुओं तक कर दिया गया है. इसमें बिजली समूह में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों के साथ परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है. नई सीरीज के तहत फ्यूल और बिजली का वेटेज 14.1%, प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.8% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का 63.1% रखा गया है. सरकार ने मई के लिए अंतिम WPI इंडेक्स को भी 109.9 के शुरुआती अनुमान से संशोधित कर 110.1 कर दिया है. इसके साथ ही मई की थोक महंगाई दर को पहले के 9.68% से बढ़ाकर 9.88% कर दिया गया है.
हिंदुजा ग्रुप तमिलनाडु में रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हिंदुजा ग्रुप ने तमिलनाडु में 2,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में किया जाएगा. राज्य में मैन्युफैक्चरिंग और स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश आकर्षित किए जा रहे हैं और हिंदुजा ग्रुप का यह नया निवेश इसी दिशा में अहम माना जा रहा है.
क्लीन एनर्जी पर होगा बड़ा निवेश
इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा हिंदुजा रिन्यूएबल्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड यानी HREPL के जरिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा. कंपनी सोलर, विंड और बैटरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी 200 मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने की योजना बना रही है. यह पहल तमिलनाडु में क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और भारत के एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में भी अहम होगी.
हिंदुजा ग्रुप ऑफ कंपनीज (इंडिया) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा ने कहा कि यह निवेश तमिलनाडु के औद्योगिक इकोसिस्टम और राज्य की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर ग्रुप के भरोसे को दर्शाता है. उन्होंने राज्य में मजबूत टैलेंट बेस, बेहतर औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में मौजूद अवसरों को निवेश के प्रमुख कारणों में शामिल बताया.
इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
मोबिलिटी सेक्टर में OHM Global Mobility Ltd राज्य में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही कंपनी तमिलनाडु में अपने मोबिलिटी सॉल्यूशंस वैल्यू चेन का विस्तार करेगी.
हिंदुजा ग्रुप अपने व्यापक निवेश रोडमैप के तहत बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल मोबिलिटी सॉल्यूशंस में भी अवसर तलाशेगा. इससे राज्य के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को और मजबूती मिल सकती है.
तमिलनाडु पहले से ही भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है और ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश आकर्षित कर रहा है. हिंदुजा ग्रुप का 2,500 करोड़ रुपये का नया निवेश राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विस्तार को गति देने में भी मददगार साबित हो सकता है.
अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई के बीच भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े संभावित अमेरिकी कानून के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत नियमित रूप से हो रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं.
रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले प्रस्तावित अमेरिकी कानून के भारत पर संभावित असर को लेकर पूछे गए सवाल पर अग्रवाल ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने कहा, "यह अमेरिका की विधायी प्रक्रिया का मामला है, जो अभी जारी है. मुझे नहीं लगता कि हमें इस पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए. यह उनका आंतरिक मामला है."
ट्रेड डील पर जारी है बातचीत
वाणिज्य सचिव ने कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है. दोनों पक्षों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है. अग्रवाल ने कहा, "हम ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं और हमारे संपर्क नियमित हैं. दोनों पक्ष उस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं, जिस पर सहमति बनी है."
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दी थी. इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. हालांकि, इस विधेयक को आगे की विधायी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी विचार के लिए जाना होगा.
BTA के जरिए व्यापार बढ़ाने की तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी Bilateral Trade Agreement (BTA) को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना और व्यापार से जुड़ी प्रमुख बाधाओं को दूर करना है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली के दौरे पर आए थे. इस दौरान उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के कई अहम पहलुओं की समीक्षा की थी. दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती, गैर-टैरिफ बाधाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
भारत और अमेरिका ने कहा है कि दोनों देशों की वार्ता टीमों ने समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की है. दोनों पक्ष एक ऐसे व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के कारोबार, किसानों, कामगारों और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाए.
जून तिमाही में कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार दिखा, लेकिन ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत बनी चिंता. कंपनी के बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये तक जुटाने और JSW One Platforms के IPO में हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जेएसडब्ल्यू (JSW Cement) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 61% बढ़कर 160.64 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ऑपरेशंस से होने वाली आय 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये पहुंच गई. हालांकि, इस दौरान बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग कॉस्ट में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. जून तिमाही के नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए गए. इससे पहले गुरुवार को BSE पर JSW Cement का शेयर 131.05 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ.
पिछले साल हुआ था भारी घाटा
वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में कंपनी को 1,356.17 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. हालांकि, उस तिमाही के नतीजों पर 1,466 करोड़ रुपये के एक असाधारण खर्च का असर पड़ा था. यह खर्च अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयरों के कन्वर्जन से जुड़े वैल्यूएशन इंपैक्ट के कारण हुआ था. अगर इस असाधारण मद को हटा दिया जाए तो पिछले साल की जून तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स करीब 100 करोड़ रुपये था. इस आधार पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी के मुनाफे में करीब 60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तिमाही के दौरान एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा 15.5% बढ़कर 190.2 करोड़ रुपये हो गया.
22% बढ़ी आय, लेकिन खर्च भी बढ़ा
JSW Cement की ऑपरेशंस से आय सालाना आधार पर 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये रही. कंपनी को अधिक बिजनेस वॉल्यूम से आय बढ़ाने में मदद मिली. हालांकि, कुल खर्च आय की तुलना में तेज गति से बढ़ा. डिप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट समेत कंपनी का कुल खर्च 26.49% बढ़कर 1,792.75 करोड़ रुपये हो गया. खर्च बढ़ने की मुख्य वजह बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग लागत में इजाफा रहा.
पावर और फ्यूल एक्सपेंस 43.72% बढ़कर 305.29 करोड़ रुपये पहुंच गया. कच्चे माल की लागत 22.71% बढ़कर 443.72 करोड़ रुपये रही. वहीं, फ्रेट और हैंडलिंग खर्च सालाना आधार पर 14.23% बढ़कर 415.19 करोड़ रुपये हो गया.
मार्च तिमाही के मुकाबले मुनाफे में गिरावट
तिमाही आधार पर कंपनी की आय लगभग स्थिर रही, लेकिन मार्च 2026 तिमाही की तुलना में मुनाफा 56.73% घट गया. इसकी बड़ी वजह पिछली तिमाही का हाई बेस रहा, जब कंपनी के मुनाफे को एकमुश्त टैक्स बेनिफिट से बढ़ावा मिला था. मार्च 2026 तिमाही में JSW Cement ने 371.33 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. इसमें 211.2 करोड़ रुपये का टैक्स बेनिफिट शामिल था. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 से नई टैक्स व्यवस्था अपनाने का फैसला किया था, जिसके बाद नेट डिफर्ड टैक्स देनदारियों में कमी से यह फायदा मिला. एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा भी मार्च तिमाही के 219 करोड़ रुपये से घटकर जून तिमाही में करीब 190 करोड़ रुपये रह गया.
500 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी
JSW Cement के बोर्ड ने अलग से 500 करोड़ रुपये तक की फंडरेजिंग को मंजूरी दी है. कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर रेटेड और लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके यह राशि जुटाएगी. इससे कंपनी को अपने सीमेंट कारोबार के विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन मिलेगा.
इसके अलावा बोर्ड ने JSW One Platforms के प्रस्तावित IPO में प्रमोटर सेलिंग शेयरहोल्डर के तौर पर JSW Cement की भागीदारी को भी मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव के तहत कंपनी JSW One Platforms में अपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाली इक्विटी हिस्सेदारी में से कुल 123 करोड़ रुपये तक के शेयर IPO के जरिए बेच सकती है.
केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग को नीति आयोग ने भारत के औद्योगिक विस्तार, रोजगार और निर्यात के लिए अहम सेक्टर बताया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सामने 2047 तक दुनिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने का बड़ा लक्ष्य है. इस दिशा में केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर फोटोवोल्टिक यानी सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग जैसे चार सेक्टर अहम भूमिका निभा सकते हैं. नीति आयोग ने गुरुवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर तेजी से बढ़ने की जरूरत होगी.
नीति आयोग की रिपोर्ट 'Key Sectors to Position India as a Global Manufacturing Hub' में इन चार सेक्टरों को औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने की बड़ी क्षमता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है.
भारत के पास कई बड़े फायदे
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं. इनमें बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, लगातार बेहतर होता इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार किया जा रहा नीतिगत माहौल शामिल है.
वैश्विक स्तर पर कंपनियों द्वारा अपनी सप्लाई चेन को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश भी भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई नेटवर्क में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा.
आयात निर्भरता और स्किल की कमी बड़ी चुनौती
हालांकि, नीति आयोग ने साफ कहा कि सिर्फ इन फायदों के आधार पर भारत दुनिया की अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता. महत्वपूर्ण कच्चे माल और इनपुट के लिए आयात पर निर्भरता, बिखरी हुई सप्लाई चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की कमियां, घरेलू स्तर पर सीमित वैल्यू एडिशन, तकनीकी बाधाएं और कुशल श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियां भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही हैं.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, वित्तीय संस्थाओं और इनोवेशन इकोसिस्टम को मिलकर काम करना होगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को केवल असेंबली आधारित उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय ग्लोबल वैल्यू चेन में गहरी भागीदारी बढ़ानी होगी.
केमिकल सेक्टर में बढ़ानी होगी घरेलू क्षमता
नीति आयोग ने केमिकल सेक्टर में घरेलू स्तर पर फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ाने, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने और डाउनस्ट्रीम वैल्यू एडिशन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है. इसी तरह अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
एक नीति नहीं, लंबे समय की रणनीति जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं के अनुभव से पता चलता है कि औद्योगिक विकास किसी एक नीति या कदम से संभव नहीं है. इसके लिए नीतियों में निरंतरता, औद्योगिक क्लस्टर, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, लक्षित प्रोत्साहन, तकनीक और कौशल विकास में लगातार निवेश जरूरी होगा.
भारतीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया गया है. ग्लोबल वैल्यू चेन में ज्यादा भागीदारी से भारतीय कंपनियों को नई तकनीक तक पहुंच, निर्यात बढ़ाने और घरेलू स्तर पर ज्यादा वैल्यू एडिशन का अवसर मिल सकता है.
'विकसित भारत @2047' में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका
रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य के तहत देश के आर्थिक और औद्योगिक बदलाव में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की केंद्रीय भूमिका होगी.
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग निवेश, इनोवेशन और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा कर सकता है, उत्पादकता बढ़ा सकता है और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत कर सकता है.
लाहिड़ी के मुताबिक, भारत की युवा आबादी भी देश के लिए बड़ी ताकत है. करीब 28 साल की औसत आयु वाले कार्यबल के जरिए भारत अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है. नीति आयोग का मानना है कि सही नीतियों, बेहतर कौशल, मजबूत सप्लाई चेन और तकनीकी क्षमता के साथ मैन्युफैक्चरिंग भारत को 2047 तक वैश्विक आर्थिक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत में ही 60 नए सैन्य परिवहन विमान बनाए जाने का प्रस्ताव है. अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और ब्राजील की एम्ब्रेयर के बीच इस प्रोजेक्ट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है.
टाटा, अडानी, महिंद्रा और HAL को बुलावा
रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोग्राम के लिए टाटा समूह, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, महिंद्रा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL समेत प्रमुख भारतीय कंपनियों को शामिल किया है. ये कंपनियां किसी वैश्विक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर के साथ साझेदारी कर भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बोली लगाएंगी. चयन प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन, एयरक्राफ्ट ट्रायल और टेक्नो-कमर्शियल प्रस्तावों को आधार बनाया जाएगा. प्रोजेक्ट के बड़े आकार और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए अंतिम चयन में दो साल से ज्यादा का समय लग सकता है.
C-130J और C-390 के बीच हो सकता है मुकाबला
भारतीय वायुसेना की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए इस दौड़ में मुख्य मुकाबला लॉकहीड मार्टिन के C-130J और एम्ब्रेयर के C-390 मिलेनियम एयरक्राफ्ट के बीच होने की संभावना है. लॉकहीड मार्टिन ने भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को अपना साझेदार बनाया है. टाटा समूह पहले से ही एयरबस के साथ मिलकर वडोदरा में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण कर रहा है.
दूसरी ओर, एम्ब्रेयर ने पहले इस प्रोग्राम के लिए महिंद्रा के साथ साझेदारी की घोषणा की थी. हालांकि, कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ भी संभावित साझेदारी पर विचार कर सकती है. एम्ब्रेयर और अडानी ने हाल ही में नागरिक यात्री विमानों के निर्माण से जुड़े सहयोग की भी घोषणा की है.
AN-32 और IL-76 बेड़े की लेंगे जगह
नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना के पुराने AN-32 और IL-76 विमानों के बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे. इनका इस्तेमाल सैन्य बलों की रणनीतिक, सामरिक और ऑपरेशनल एयरलिफ्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा.
C-295 प्रोग्राम के बाद यह भारत में स्थापित होने वाली दूसरी बड़ी मिलिट्री एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग लाइन हो सकती है. करीब 1 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है, बल्कि देश में एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी बड़ा बढ़ावा मिल सकता है.
जुलाई में आयात 76.22 अरब डॉलर के 9 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा. कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की भारी खरीदारी से व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, हालांकि निर्यात में करीब 20% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी व्यापार मोर्चे पर जुलाई में आयात का दबाव बढ़ता नजर आया. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, उर्वरक और कोयले की खरीद में तेज बढ़ोतरी के चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. जुलाई में भारत का कुल आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जो 9 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि राहत की बात यह रही कि वस्तु निर्यात में भी करीब 20% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
31.98 अरब डॉलर पर पहुंचा व्यापार घाटा
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया. जून में यह 30.42 अरब डॉलर और जुलाई 2025 में 27.88 अरब डॉलर था. इस तरह एक महीने और एक साल, दोनों आधार पर व्यापार घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में वस्तुओं का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आयात पर हुआ यह खर्च अक्टूबर 2025 के 76.73 अरब डॉलर के बाद दूसरा सबसे अधिक है.
कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात तेजी से बढ़ा
जुलाई में कच्चे तेल का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 18.31 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 46% की तेज वृद्धि के साथ 14.37 अरब डॉलर पहुंच गया. इसके अलावा उर्वरक आयात 55% बढ़कर 2.48 अरब डॉलर और कोयले का आयात 29% बढ़कर 3.05 अरब डॉलर रहा. सोने का आयात भी जुलाई में बढ़कर 4.16 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 5% अधिक है. इन प्रमुख वस्तुओं की आयात मांग बढ़ने से देश का कुल आयात बिल काफी ऊंचा रहा.
निर्यात में करीब 20% की मजबूत बढ़त
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद जुलाई में वस्तु निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा. भारत का वस्तु निर्यात करीब 20% बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया. यह मई में दर्ज 45.42 अरब डॉलर के बाद अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है. वाणिज्य विभाग के मुताबिक, निर्यात में वृद्धि के पीछे ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के बाद वहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ना प्रमुख कारण रहा. इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी जुलाई में 18% बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया.
सेवाओं से मिला सहारा
जुलाई में सेवा निर्यात करीब 6% बढ़कर 35.89 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि सेवा आयात करीब 10% बढ़कर 18.94 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इससे सेवाओं का व्यापार अधिशेष करीब 16.95 अरब डॉलर रहा.
भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने के अंत में सेवा व्यापार से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी कर सकता है. ऐसे में वस्तुओं के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के बावजूद सेवा क्षेत्र का मजबूत अधिशेष देश के समग्र बाहरी व्यापार संतुलन को कुछ राहत दे सकता है.
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15% की तेजी के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 40.10 अंक यानी 0.16% की गिरावट के साथ 24,395.85 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स आखिरी घंटे की खरीदारी से हरे निशान में लौट आया, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुआ. अब आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और कॉरपोरेट खबरों पर रहेगी. SBI के 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड इश्यू से लेकर L&T के बड़े ऑर्डर, UltraTech Cement और Urban Company में हुई ब्लॉक डील तथा MSCI India Index में बदलाव तक कई ऐसे ट्रिगर हैं, जिनसे चुनिंदा शेयरों में आज जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है.
सेंसेक्स 113 अंक चढ़ा, निफ्टी 40 अंक फिसला
पिछले कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15% की तेजी के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 40.10 अंक यानी 0.16% की गिरावट के साथ 24,395.85 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के ज्यादातर हिस्से में दोनों प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे, लेकिन आखिरी घंटे में खरीदारी से सेंसेक्स हरे निशान में लौट आया. इस दौरान रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.1% गिरकर 95.44 पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.33 के स्तर पर बंद हुआ था.
सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में तेजी
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 बढ़त के साथ बंद हुए. इंडिगो में सबसे ज्यादा 2.86% की तेजी रही. इसके अलावा एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इटरनल, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स और ट्रेंट के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस और टाटा स्टील दबाव में रहे.
मेटल शेयरों पर दबाव, केमिकल सेक्टर में तेजी
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और ग्रासिम इंडस्ट्रीज निफ्टी50 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे. वहीं, निफ्टी केमिकल इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.15% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.27% की तेजी के साथ बंद हुए.
आज इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कॉरपोरेट खबरों के चलते चुनिंदा शेयरों में जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है. SBI की लंदन ब्रांच ने 5.25% कूपन दर पर बॉन्ड जारी कर 50 करोड़ डॉलर जुटाए हैं, जबकि Piramal Pharma में करीब 6% हिस्सेदारी की 1,750 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील की संभावना है. Saatvik Green Energy की सहायक कंपनी को 476 करोड़ रुपये का सोलर PV मॉड्यूल ऑर्डर मिला है, वहीं Aditya Birla Real Estate की सब्सिडियरी Birla Estates ने नवी मुंबई के वाशी में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में एंट्री की है, जिससे करीब 2,600 करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है. BHEL ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए नॉर्वे की Hystar AS के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. Urban Company में भी SBI Mutual Fund समेत कई बड़े निवेशकों के बीच करोड़ों रुपये के शेयरों की खरीद-बिक्री हुई है. वहीं MSCI की अगस्त समीक्षा में Adani Energy Solutions, Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, Laurus Labs और Lenskart Solutions को MSCI India Index में शामिल किया गया है, जबकि Balkrishna Industries, SBI Cards और Astral को बाहर किया जाएगा. L&T को 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के बीच का बड़ा AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मिला है, जबकि UltraTech Cement में प्रमोटर इकाई Pilani Investment and Industries Corporation ने करीब 2,896 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं. इसके अलावा Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
आज बाजार के लिए क्या होंगे अहम संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले असर पर रहेगी. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण होगी. पिछले सत्र में सेंसेक्स में आखिरी घंटे की रिकवरी ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की दिलचस्पी दिखाई, लेकिन निफ्टी का गिरावट के साथ बंद होना बाजार में अभी भी सतर्कता का संकेत देता है. ऐसे में आज बैंकिंग, मेटल, आईटी के साथ-साथ SBI, L&T, UltraTech Cement, Urban Company और MSCI से जुड़े शेयरों में खास हलचल देखने को मिल सकती है. निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ इन कॉरपोरेट ट्रिगर्स पर भी बनी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)