बदलता शक्ति संतुलन: अंबानी बंधु, एक प्रतिद्वंद्वी और नया शक्ति समीकरण

जैसे-जैसे विवाद बढ़ते हैं और प्रवर्तन कार्रवाई तेज होती है, भारत का सबसे शक्तिशाली व्यावसायिक वंश एक असहज प्रश्न का सामना कर रहा है: आज की राजनीतिक अर्थव्यवस्था में वास्तविक पकड़ किसके हाथ में है?

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Wednesday, 04 March, 2026
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पलक शाह

भारत के वित्तीय जंगल में रिपोर्टिंग करते हुए मैंने जल्दी ही सीख लिया था कि इस देश में शक्ति की अपनी एक व्याकरण होती है. कुछ नाम दरवाज़े खोलते हैं. कुछ नाम फाइलें बंद कर देते हैं. और कुछ नाम नीति और राजनीति की उथल-पुथल से ऊपर तैरते हुए प्रतीत होते हैं. लगभग तीन दशकों तक अंबानी उपनाम भारत में कॉर्पोरेट शक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक रहा है. सरकारें बदलीं. नियामक बदले. बाज़ार ऊपर-नीचे हुए. लेकिन साम्राज्य कायम रहा.

फिर भी, हाल के समय में भारत के कॉर्पोरेट परिदृश्य में कुछ असामान्य घटित हो रहा है. दो भाई, जिन्होंने लगभग दो दशकों तक व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता में समय बिताया मुकेश और अनिल अंबानी, अब एक साथ गहन नियामकीय, जांच और नीतिगत निगरानी का सामना कर रहे हैं. यह संयोग इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि वे विवादों से अपरिचित नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि दोनों के इर्द-गिर्द कार्रवाई का पैमाना, समय और संस्थागत विस्तार भारत में हाल के समय में अभूतपूर्व है.

इन समानांतर घटनाओं के ऊपर भारतीय कॉर्पोरेट शक्ति की बदलती ज्यामिति भी परत दर परत जुड़ी हुई है. पिछले एक दशक में गौतम अडानी ऐसे एकमात्र उद्योगपति के रूप में उभरे हैं जिनका पैमाना मुकेश अंबानी की बराबरी करता है. अडानी ने बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, मीडिया और रक्षा विनिर्माण साझेदारियों में तेज़ विस्तार किया है.

मूक मुकदमेबाजी का युद्ध

मुकेश अंबानी के लिए दबाव के बिंदु शोरगुल वाले शीर्षक नहीं, बल्कि लंबी छाया वाले विवाद हैं. केंद्र में केजी-डी6 बेसिन की तेल और गैस विरासत है. भारत सरकार का दावा, जो अरबों डॉलर में है, पूंजीगत व्यय को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और राजस्व साझाकरण से जुड़े प्रश्नों के आरोपों से संबंधित है. पन्ना–मुक्ता–ताप्ती क्षेत्रों में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओएनजीसी की गैस के कथित प्रवासन और विचलन से जुड़े विवाद में रिलायंस के खिलाफ फैसला दिया. मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है. मध्यस्थता में झटकों और लंबित अपीलों के साथ मिलाकर, इन पेट्रोलियम विवादों से जुड़ा संचयी वित्तीय जोखिम कई अरब डॉलर आंका गया है.

केजी-डी6 प्रकरण के बीच, दिसंबर 2025 में रिपोर्टें सामने आईं कि सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और बीपी से लगभग 30 अरब डॉलर (लगभग ₹2.7 लाख करोड़) की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने अनुबंधित गैस उत्पादन पूरा नहीं किया और भंडार प्रबंधन में चूक की. रिलायंस ने इसे तुरंत “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताते हुए खारिज किया और स्पष्ट किया कि वास्तविक सरकारी दावा मात्र 247 मिलियन डॉलर है. अलग से, मार्च 2025 तक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ओएनजीसी के पड़ोसी ब्लॉक से गैस प्रवासन के आरोपों पर लगभग 2.81 अरब डॉलर (₹24,490 करोड़) का मांग नोटिस जारी किया, जो अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित पन्ना-मुक्ता-ताप्ती विवादों की प्रतिध्वनि है. अब तक सरकार की ओर से कुल दावों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है.

लेकिन ये बहुस्तरीय दावे, मध्यस्थता में झटकों और लंबित अपीलों के साथ मिलकर, रिलायंस की पेट्रोलियम विवादों में संचयी जोखिम को अरबों डॉलर तक बढ़ा देते हैं. याचिकाएं निजी वादियों द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा दायर की गई हैं, यह दर्शाता है कि यह राज्य बनाम कॉर्पोरेट के पैमाने की लड़ाई है.

इसके समानांतर सेबी के समक्ष लंबित एक अंदरूनी व्यापार मामला है, जहां कार्यवाही वर्षों से चल रही है और संबंधित सर्वोच्च न्यायालय वाद में आदेश सुरक्षित बताया जाता है. भारत की सबसे बड़ी बाजार पूंजीकरण वाली कंपनी के लिए लंबित नियामकीय अनिश्चितता कोई फुटनोट नहीं, यह एक संरचनात्मक चर है.

नीतिगत मोड़

नीतिगत बदलावों ने भी असहजता बढ़ाई है. रिलायंस के कंसोर्टियम को उन्नत बैटरी निर्माण के लिए सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत स्वीकृति मिली थी, जिसे बाद में प्रगति के अभाव का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया. फिर, नवीनतम केंद्रीय बजट में पशु और पक्षी आयात से संबंधित आयात रियायतें वापस ले ली गईं और शुल्क लगाए गए, ऐसे विकास जो समूह की उच्च-प्रोफ़ाइल वंतारा पशु संरक्षण पहल से जुड़ते हैं. बड़े डिजिटल और दूरसंचार उपक्रमों से संबंधित पूर्व कर संरचनाएं और प्रोत्साहन भी विकसित हुए हैं. इनमें से कोई भी कार्रवाई अकेले शत्रुता का संकेत नहीं देती. सामूहिक रूप से वे उस नीति रुख की ओर संकेत करती हैं जो समूह को पहले प्राप्त था, उससे अधिक सतर्क है.

यदि मुकेश अंबानी की चुनौतियां जटिल मुकदमों और नीतिगत पुनर्संतुलन में निहित हैं, तो अनिल अंबानी की स्थिति कहीं अधिक गतिशील है.

प्रवर्तन की बाढ़: अनिल की संपत्ति कुर्की

पिछले छह महीनों में, कई एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, सेबी, और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ने उनसे जुड़ी संस्थाओं के संबंध में समानांतर जांच शुरू की है. चार एजेंसियों की ये समवर्ती जांच एक “दुर्लभ अभिसरण” है.

लगभग ₹12,000 करोड़ मूल्य की संपत्तियां कथित रूप से ईडी द्वारा कुर्क की गई हैं, जो एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाइयों में से एक है. तलाशी, समन और लुक-आउट नोटिस तेजी से जारी हुए हैं. अनिल की पत्नी टीना को ईडी कार्यालय में बुलाया गया. उनके बच्चे भी प्रवर्तन एजेंसी की जांच के दायरे में हैं.

एक उल्लेखनीय विकास सर्वोच्च न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सीलबंद लिफाफे में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करना था, एक प्रक्रियात्मक उपाय जिसने हाल के वर्षों में पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया पर बहस को जन्म दिया है. कई ईसीआईआर इन मामलों की आधारशिला हैं, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस और संबंधित वित्तीय संरचनाओं से जुड़े मामले शामिल हैं. जांच जारी है. कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकला है. लेकिन संस्थागत समन्वय का यह विस्तार अंबानी परिवार के कॉर्पोरेट इतिहास में अभूतपूर्व है.

अनिल के पास क्या है?

दशकों तक, अनिल अंबानी के व्यवसाय समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उनके कॉर्पोरेट पोर्टफोलियो का आधार संभाला है. इसकी सबसे प्रमुख विरासत परिसंपत्तियों में दिल्ली में बीएसईएस बिजली वितरण फ्रेंचाइज बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर शामिल हैं, जिन्हें 2025 में सर्वोच्च न्यायालय से लगभग ₹21,400–₹28,400 करोड़ के लंबे समय से लंबित नियामकीय परिसंपत्तियों की चार वर्षों में वसूली की मंजूरी मिली. इसे नियामकीय निगरानी के तहत टैरिफ के माध्यम से वसूल किया जा सकता है. वर्षों के वित्तीय तनाव और विनिवेश के बाद ये कुछ शेष प्रमुख आय स्रोतों में हैं.

रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड, रिलायंस पावर की सहायक कंपनी, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के निकट रोज़ा में 1,200 मेगावाट का कोयला-आधारित तापीय विद्युत संयंत्र संचालित करती है. यह संयंत्र, जिसने 2024 के अंत में वार्डे पार्टनर्स को ऋण पूर्व-भुगतान के बाद शून्य-ऋण स्थिति प्राप्त की, राज्य को प्रमुख विद्युत आपूर्तिकर्ता है.

बिजली वितरण से परे, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर मुंबई मेट्रो वन परियोजना संचालित करता है. यह एक प्रमुख शहरी परिवहन परिसंपत्ति है और इसमें स्टेशनों तथा ट्रांजिट-उन्मुख विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण अचल संपत्ति शामिल है. हालांकि इसका वित्तीय प्रदर्शन मिश्रित रहा है और हालिया न्यायालय तथा मध्यस्थता कार्यवाहियों के अधीन रहा है. रक्षा क्षेत्र में, कंपनी की एयरोस्पेस और रक्षा शाखा फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के साथ संयुक्त उद्यम के माध्यम से भारत में विमान घटकों और फाल्कन 2000 बिजनेस जेट के निर्माण के प्रयासों का हिस्सा है. यह रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण सहयोगों में से एक है. इस साझेदारी के नवीनतम मोड़ में, डसॉल्ट ने उद्यम में अपनी हिस्सेदारी बहुमत तक बढ़ा दी है. यह रणनीतिक नियंत्रण में बदलाव को रेखांकित करता है, जबकि रिलायंस महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक हिस्सेदारी बनाए हुए है.

इनमें से अधिकांश प्रमुख परिसंपत्तियां, जिन्हें लंबे समय से अनिल अंबानी की वापसी का आधार माना जाता था, नियामकीय और प्रवर्तन जांच के दायरे में आ गई हैं. बीएसईएस और मुंबई मेट्रो में हिस्सेदारी भी शामिल है, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा चल रही जांच में अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है.

शक्ति की तीसरी धुरी: गौतम अडानी

दोनों भाइयों की कानूनी यात्राओं के ऊपर भारत की कॉर्पोरेट शक्ति संरचना में एक तीसरी धुरी है: गौतम अडानी. पिछले दशक में अडानी ऐसे भारतीय उद्योगपति के रूप में उभरे हैं जिनकी संपत्ति वैश्विक धनकुबेर सूचियों में मुकेश अंबानी की बराबरी करती रही है. बाज़ार प्रतिस्पर्धा बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, रियल एस्टेट, हवाई अड्डों, रक्षा साझेदारियों और मीडिया परिसंपत्तियों तक फैल गई है. एक खेमे को दूसरे के खिलाफ नियामकीय दबाव से जोड़ने वाले आरोप, प्रति-आरोप और अटकलें अक्सर प्रसारित होती हैं. अदालत में इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है. फिर भी, भारत के दो सबसे बड़े समूहों के बीच शक्ति संतुलन के बदलने की धारणा बनी हुई है.

एनडीटीवी जैसे मीडिया परिसंपत्तियों का अधिग्रहण, रक्षा विनिर्माण साझेदारियों में बदलाव, शहरी बुनियादी ढांचे की परिसंपत्तियों के लिए प्रतिस्पर्धा, और नवीकरणीय ऊर्जा तथा पेट्रोकेमिकल संक्रमण में स्थिति निर्धारण, इन सभी ने भारत के सबसे बड़े व्यावसायिक घरानों और राजनीतिक प्रतिष्ठान के बीच संबंधों की जांच को तीव्र किया है. सार्वजनिक विमर्श ने कभी इन्हें संरेखण, कभी प्रतिद्वंद्विता, या दोनों के रूप में प्रस्तुत किया है. जो सत्यापित है वह सरल है: कॉर्पोरेट मानचित्र पुनः खींचा जा रहा है जबकि दोनों अंबानी भाइयों के विरुद्ध मुकदमे और प्रवर्तन कार्रवाई न्यायिक चैनलों से आगे बढ़ रही हैं.

इन घटनाक्रमों के पीछे की संस्थागत संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. जांच एजेंसियों में वरिष्ठ नियुक्तियां और विस्तारित कार्यकाल कुछ प्रवर्तन कार्रवाइयों के साथ मेल खाते हैं. आलोचक इसे अधिकार का केंद्रीकरण मानते हैं. सरकार का कहना है कि यह आर्थिक अपराध जांच में निरंतरता और प्रभावशीलता को दर्शाता है. जो निर्विवाद है वह यह कि आज भारतीय राज्य की जांच की गति और संपत्ति फ्रीज करने की क्षमता एक दशक पहले की तुलना में कहीं अधिक है. यह स्पष्ट रूप से प्रवर्तन निदेशालय की बढ़ी हुई शक्तियों में परिलक्षित होता है. 2019 के संशोधनों के बाद, ईडी स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट या एफआईआर की प्रतीक्षा किए बिना तलाशी और गिरफ्तारी शुरू कर सकता है. संपत्ति कुर्की तथा तलाशी और छापे की उसकी शक्तियां विशेष रूप से व्यापक हैं. मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत जमानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन है. सर्वोच्च न्यायालय ने यह बरकरार रखा है कि आरोपी को यह सिद्ध करना होगा कि वह दोषी नहीं है और दोबारा अपराध करने की संभावना नहीं है. क्या इससे प्रारंभिक चरण में न्यायिक निगरानी में उल्लेखनीय कमी आई है, यह अभी भी बहस का विषय है, क्योंकि इस युग में अपराधों की प्रकृति भी अधिक जटिल हो गई है.

वैश्विक शक्ति की ज्यामिति

वैश्विक परिप्रेक्ष्य ने भारत के कॉर्पोरेट शक्ति समीकरण में एक और परत जोड़ दी है. संयुक्त राज्य अमेरिका में, संघीय अभियोजकों और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने गौतम अडानी से जुड़ी संस्थाओं के विरुद्ध दीवानी और आपराधिक कार्यवाहियां शुरू की हैं. यह प्रतिभूति प्रकटीकरण से संबंधित आरोपों के बाद हुआ है, जिन पर अदालत में विवाद जारी है और उद्योगपति को समन जारी किए गए हैं.

इसके विपरीत, मुकेश अंबानी ने वर्षों में अमेरिकी राजनीतिक और व्यावसायिक अभिजात वर्ग के साथ दृश्यमान संबंध विकसित किए हैं. अपने मुंबई स्थित निवास पर अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों और यहां तक कि ट्रम्प परिवार के सदस्यों की उपस्थिति वाले उच्च-प्रोफ़ाइल कार्यक्रमों की मेजबानी की है. और अमेरिकी कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहयोग में रिलायंस को एक रणनीतिक भागीदार के रूप में स्थापित किया है. यह तुलना उल्लेखनीय है: एक भारतीय समूह वाशिंगटन में नियामकीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि दूसरा अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कूटनीति को गहरा कर रहा है.

राज्य की नई ताकत

तो भारत में दोनों अंबानी भाई एक ही समय में दबाव में क्यों हैं?

एक व्याख्या संरचनात्मक है: तेल और गैस के विरासत विवाद निर्णय के चरण में परिपक्व हुए हैं. ठीक उसी समय दूरसंचार और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण से जुड़े वित्तीय तनाव के मामले प्रवर्तन समीक्षा के लिए तैयार हुए हैं.

दूसरी राजनीतिक अर्थव्यवस्था से जुड़ी है: जैसे-जैसे भारत उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाओं, बजटीय तर्कसंगठन और राजकोषीय सख्ती के माध्यम से औद्योगिक नीति का पुनर्संतुलन करता है, उसके सबसे बड़े समूह भी अनुपालन मानकों से अछूते नहीं हैं. तीसरी संभावना प्रतिस्पर्धी पूंजीवाद ही हो सकती है, जब कॉर्पोरेट साम्राज्य विनियमित क्षेत्रों में फैलते हैं, तो राज्य के साथ टकराव सांख्यिकीय रूप से अपरिहार्य हो जाता है.

अब तक कोई दस्तावेजी साक्ष्य समन्वित लक्ष्यीकरण स्थापित नहीं करता. न ही किसी न्यायिक निष्कर्ष ने किसी भी भाई के विरुद्ध राज्य की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का संकेत दिया है. मुकेश अंबानी से जुड़े मामले विचाराधीन हैं. अनिल अंबानी से जुड़े मामले जांच के अधीन हैं. विधिसम्मत प्रक्रिया जारी है. लेकिन दृश्य स्पष्ट है: भारत की सबसे सशक्त व्यावसायिक विरासत के दो उत्तराधिकारी संप्रभु सत्ता के साथ समानांतर टकराव का सामना कर रहे हैं.

एक ऐसे देश में जहां कॉर्पोरेट पैमाना अक्सर कथित प्रतिरक्षा में अनुवादित होता है, शक्ति के शिखर पर नियामकीय अभिसरण का यह दृश्य ऐतिहासिक है. क्या यह पूंजी और राज्य शक्ति के बीच भारत के संबंधों के गहरे पुनर्गठन का संकेत है या केवल लंबे समय से लंबित कानूनी विवादों का स्वाभाविक निष्कर्ष, इसका निर्धारण टीवी स्टूडियो या बाज़ार अटकलों में नहीं, बल्कि अदालतों में होगा.

फिलहाल, यह प्रश्न दलाल स्ट्रीट और दिल्ली दोनों पर मंडरा रहा है: क्या यह अछूत उद्योगपतियों के युग का संध्या काल है, या केवल एक परिपक्व गणराज्य में उच्च-दांव का उतार-चढ़ाव, जहां अंततः सबसे शक्तिशाली लोगों को भी अपनी किस्मत सार्वजनिक दृष्टि में मुकदमेबाज़ी के माध्यम से तय करनी होती है?

अंबानी की कहानी पतन के बारे में नहीं हो सकती. लेकिन यह अधिक एक नए संतुलन के बारे में है, जहां सबसे बड़े साम्राज्य भी निर्देश नहीं देते, बल्कि बातचीत करते हैं.

व्यापारिक गलियारों में संरेखण, प्रतिद्वंद्विता और प्रभाव को लेकर अटकलें स्वतंत्र रूप से घूमती रहती हैं. साक्ष्य, हालांकि, बाज़ार की चालों और घोषित लेन-देन तक सीमित हैं. जो निर्विवाद है वह यह कि भारत के अरबपतियों की श्रेणी अब स्थिर नहीं रही.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के निडर लेखक हैं. मुंबई में लगभग दो दशकों की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव के साथ, पालक ने खुद को एक अडिग सच की खोज करने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित किया है, जो पैसे, सत्ता और नियमन के गठजोड़ की तहों में गहराई तक जाते हैं. उनके लेख भारत के सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय अखबारों जैसे The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line में प्रकाशित हुए हैं जहां उनकी तीखी रिपोर्टिंग ने नरेटिव गढ़े और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स को हिला कर रख दिया.

19 साल की उम्र में ही अपराध पत्रकारिता की ओर खिंचाव महसूस करने वाले पालक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के मुंबई के गिरोह युद्ध अब एक और अधिक चिकने, लेकिन कहीं अधिक खतरनाक संगठित अपराध यानी कॉर्पोरेट टावरों में रची जाने वाली सफेदपोश साजिशों में बदल चुके हैं. यह अहसास ही उन्हें फाइनेंशियल जर्नलिज्म की ओर ले गया, जहां उन्होंने भारत की ‘सफेद धन’ अर्थव्यवस्था की जटिल चालों को वर्षों तक समझा और उजागर किया है. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामक खामियों तक, पलक का काम हाई-फाइनेंस की चमक-दमक से पर्दा हटाकर दिखाता है कि असली धागे खींच कौन रहा है.)

 


AABL का केरल में बड़ा विस्तार, SDF इंडस्ट्रीज का ₹30.85 करोड़ में अधिग्रहण

कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.

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Monday, 04 May, 2026
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अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर की प्रमुख कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड (Associated Alcohols & Breweries Limited)  ने केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्लूनल (National Company Law Tribunal) की कोच्चि बेंच से SDF इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है. यह सौदा ₹30.85 करोड़ में पूरा किया जाएगा.

NCLT से मिली औपचारिक स्वीकृति

कंपनी के अनुसार 16 अप्रैल 2026 को पारित आदेश के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस अधिग्रहण को मंजूरी दी है. अधिग्रहण पूरा होने के बाद SDF Industries Ltd, AABL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी.

केरल बाजार में मजबूत होती पकड़

एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज़ लिमिटेड ने साल 2018 में केरल बाजार में एंट्री की थी और तब से यह कंपनी के लिए एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट बन गया है. वर्तमान में कंपनी राज्य के शीर्ष 3 निजी खिलाड़ियों में शामिल है और हर महीने लगभग 1.5 लाख केस की बिक्री दर्ज करती है.

इन-हाउस बॉटलिंग से बढ़ेगी दक्षता

इस अधिग्रहण के जरिए कंपनी केरल में अपनी बॉटलिंग ऑपरेशंस को इन-हाउस लाने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन पर बेहतर नियंत्रण, लागत में कमी और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार की उम्मीद है.

कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसन्न केडिया ने कहा कि केरल में कंपनी को खासकर White Brandy से शानदार सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि यह अधिग्रहण ऑपरेशनल कंट्रोल बढ़ाने और नए प्रोडक्ट लॉन्च करने में मदद करेगा, साथ ही भविष्य में निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे.

ग्रोथ और नए अवसरों पर फोकस

कंपनी का मानना है कि इस अधिग्रहण से ऑपरेटिंग लीवरेज का फायदा मिलेगा, जिससे मार्जिन में सुधार होगा और लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, अतिरिक्त बॉटलिंग क्षमता का उपयोग कर कंपनी नए राजस्व स्रोत भी तलाशेगी.

सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है नई यूनिट

अधिग्रहण के बाद कंपनी इस यूनिट को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करेगी, ताकि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन किया जा सके. नई सुविधाओं के साथ संचालन सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है.

एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड का यह कदम केरल बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा. SDF इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण से कंपनी को उत्पादन, गुणवत्ता और विस्तार योजनाओं में नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे वह देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगी.


दिल्ली मेट्रो का मेगा विस्तार: ₹48 हजार करोड़ में 7 नए रूट, 65 स्टेशन बनेंगे

यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है.

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Monday, 04 May, 2026
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दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राजधानी में ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी की परेशानी को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने मेट्रो नेटवर्क के बड़े विस्तार को मंजूरी दे दी है. करीब ₹48,204 करोड़ की लागत से दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के तहत 7 नए मेट्रो रूट बनाए जाएंगे, जिनमें 97 किलोमीटर लंबी नई लाइन और 65 स्टेशन शामिल होंगे. इस परियोजना का लक्ष्य 2029 तक प्रमुख कॉरिडोर शुरू करना है.

फेज V-B के तहत शुरू होगा नया विस्तार

यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है और अब अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा.

प्रमुख रूट्स पर सबसे ज्यादा फोकस

इतने बड़े प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. सात में से चार रूट्स को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए दिल्ली मेट्रो रेल निगम विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अलग-अलग चरणों में लागू करेगा.

आउटर दिल्ली को मिलेगी बड़ी राहत

इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा बाहरी इलाकों को होगा. नरेला, नजफगढ़, खेड़ा कलां और मिठापुर जैसे क्षेत्रों के लोगों को अब बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का समय बचेगा और सफर ज्यादा आसान और सुरक्षित होगा.

इंटरचेंज और कनेक्टिविटी होगी मजबूत

नई योजना में अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों तरह के ट्रैक शामिल होंगे. कई नए इंटरचेंज स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन में बदलना आसान होगा. यह प्रोजेक्ट “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” को बेहतर बनाने पर भी खास ध्यान देगा.

ये हैं प्रस्तावित 7 नए मेट्रो रूट

नई योजना के तहत सात नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जो राजधानी के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ेंगे:

1. धंसा बस स्टैंड से नांगलोई (11.859 किमी)
2. सेंट्रल सेक्रेटेरिएट से किशनगढ़ (15.969 किमी)
3. समयपुर बादली से नरेला (12.89 किमी)
4. कीर्ति नगर से पालम (9.967 किमी)
5. जोर बाग से मिठापुर (16.991 किमी)
6. शास्त्री पार्क से मयूर विहार फेज-3 (13.197 किमी)
7. केशवपुरम से रोहिणी सेक्टर-34 (16.285 किमी)

इन रूट्स के जरिए शहर के कई अहम और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.

दिल्ली मेट्रो का यह विस्तार राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव लाने वाला है. दिल्ली मेट्रो रेल निगम के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद न सिर्फ ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि यात्रा का अनुभव भी ज्यादा सुविधाजनक और तेज होगा. आने वाले वर्षों में यह योजना दिल्ली को वैश्विक स्तर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के करीब ले जाएगी.
 


CHOSEN ने जुटाए 5 मिलियन डॉलर: भारतीय स्किनकेयर में साइंस आधारित इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा

इस फंडिंग के साथ CHOSEN भारत के स्किनकेयर बाजार में साइंस-आधारित और डर्मेटोलॉजिस्ट-ड्रिवन इनोवेशन को नई दिशा देने की तैयारी में है. आने वाले समय में कंपनी के विस्तार और नए प्रोडक्ट्स पर बाजार की नजर रहेगी.

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Monday, 04 May, 2026
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भारत की पहली एक्सपोज़ोम आधारित स्किनकेयर ब्रांड CHOSEN ने सीरीज A फंडिंग राउंड में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं. इस निवेश का नेतृत्व Fireside Ventures ने किया, जबकि BOLD, L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड और Alkemi Growth Capital ने भी इसमें भागीदारी की.

निवेशकों का मजबूत भरोसा, डॉक्टरों की भी भागीदारी

इस फंडिंग राउंड में एंजेल निवेशक अवनीश आनंद के साथ कई प्रसिद्ध त्वचा विशेषज्ञों, डॉ. चंदन असोकन, डॉ. केसी निश्‍चल, डॉ. पुनीत सराओगी, डॉ. निशिता रांका और डॉ. मिक्की सिंह ने भी निवेश किया. इससे कंपनी की क्लिनिकल विश्वसनीयता और मजबूत होती है.

R&D और प्रोडक्ट इनोवेशन पर फोकस

कंपनी इस फंड का उपयोग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करने, नए क्लिनिकली वैलिडेटेड प्रोडक्ट्स विकसित करने, और अपने “Centre of Excellence” को विस्तार देने में करेगी. इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में टैलेंट हायरिंग पर भी जोर दिया जाएगा.

भारतीय त्वचा के लिए साइंस आधारित समाधान

CHOSEN एक्सपोजोम साइंस पर आधारित स्किनकेयर प्रोडक्ट्स विकसित करती है, जो खासतौर पर भारतीय त्वचा के लिए डिजाइन किए गए हैं. कंपनी पिग्मेंटेशन, स्किन टेक्सचर, कंटूर और हेयर एजिंग जैसे चार प्रमुख पहलुओं पर काम करती है.

इसका पोर्टफोलियो टॉपिकल फॉर्मुलेशंस और न्यूट्रास्यूटिकल्स दोनों को कवर करता है, जो “क्लिनिक-टू-कंज्यूमर” मॉडल पर आधारित है.

फाउंडर का बयान

कंपनी की संस्थापक और सीईओ डॉ. रेनिता रंजन ने कहा कि भारतीय त्वचा के लिए वैज्ञानिक और डर्मेटोलॉजिस्ट-आधारित स्किनकेयर की कमी को पूरा करने के लिए CHOSEN की शुरुआत की गई थी. उन्होंने कहा कि यह निवेश उनके साइंस-आधारित अप्रोच की पुष्टि करता है और इससे R&D को और मजबूत किया जाएगा.

निवेशकों को दिखा ग्रोथ का बड़ा अवसर

वरुण वर्मा ने कहा कि CHOSEN क्लिनिकल रिसर्च और उपभोक्ता भरोसे का एक अनोखा संयोजन है. वहीं, समंथा ने इसे साइंस और डर्मेटोलॉजी नेटवर्क का मजबूत मेल बताया. अल्का गोयल के अनुसार, कंपनी तेजी से बढ़ते डर्माकोस्मेटिक बाजार में मजबूत स्थिति में है और लंबे समय में वैल्यू क्रिएशन की क्षमता रखती है.

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और पहचान

कंपनी के प्रमुख प्रोडक्ट्स में SAFESCREEN® NEXGEN सनस्क्रीन और CHOSEN Sculpt प्रोटोकॉल शामिल हैं, जो क्लिनिकली वैलिडेटेड समाधान प्रदान करते हैं. डॉ. रेनिता राजन स्किनकेयर और लेजर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रमुख विशेषज्ञ मानी जाती हैं और “Sunscreens for Skin of Colour” पुस्तक की लेखिका भी हैं.

 


दमदार नतीजों से BHEL में उछाल: Q4 में 156% मुनाफा बढ़ा, शेयर 13% तक चढ़ा

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी.

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Monday, 04 May, 2026
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सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स (Bharat Heavy Electricals Limited) ने मार्च 2026 तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी के मुनाफे में जोरदार उछाल और मजबूत राजस्व वृद्धि के चलते शेयर बाजार में भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां शेयर 13 प्रतिशत तक उछलकर नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया.

मुनाफे में 156% की जबरदस्त बढ़ोतरी

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 156 प्रतिशत बढ़कर 1290.47 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 504.45 करोड़ रुपये था. यह उछाल कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूत सुधार को दर्शाता है.

रेवेन्यू में भी शानदार ग्रोथ

तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर 12,310.37 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 8,993.37 करोड़ रुपये था. हालांकि, इस दौरान खर्च भी बढ़कर 10,842.69 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 8,448.14 करोड़ रुपये था. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का कुल रेवेन्यू 33,782.18 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 1,600.26 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड का तोहफा

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी. मंजूरी मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाएगा.

शेयर में जबरदस्त तेजी, नया हाई छुआ

नतीजों के बाद भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर बीएसई पर करीब 13 प्रतिशत चढ़कर 398.95 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर है. पिछले 3 महीनों में शेयर करीब 40 प्रतिशत और एक महीने में 50 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुका है. वहीं एक साल में 68 प्रतिशत और तीन साल में 340 प्रतिशत का रिटर्न दे चुका है.

मार्केट कैप और हिस्सेदारी

तेजी के चलते कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये हो गया है. मार्च 2026 तक कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 58.17 प्रतिशत रही.

मजबूत तिमाही नतीजों, बढ़ते ऑर्डर और बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन के दम पर Bharat Heavy Electricals Limited ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है. आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन और ऑर्डर बुक पर बाजार की नजर बनी रहेगी.
 


मनरेगा मजदूरों के लिए बड़ी राहत: केंद्र सरकार ने ₹17,744 करोड़ की पहली किस्त जारी की

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है.

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Monday, 04 May, 2026
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ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त के रूप में ₹17,744.19 करोड़ जारी किए हैं. इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्धता और मजदूरी भुगतान व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है.

समय पर भुगतान और रोजगार उपलब्धता पर जोर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि मजदूरी मद के तहत जारी की गई है ताकि काम की मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा सके और भुगतान समय पर किया जा सके. इसके साथ ही प्रशासनिक और सामग्री मद के लिए अब तक ₹3,478 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी जारी किए जा चुके हैं.

नई योजना की ओर बदलाव की तैयारी

सूत्रों ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस योजना को नए नाम से बदला जा सकता है. सरकार “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” यानी विकसित भारत एवं रोजगार आजीविका मिशन (Gramin) लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे संक्षेप में VB-G RAM G भी कहा जा रहा है.

रोजगार में गिरावट पर सरकार का स्पष्टीकरण

हाल ही में मनरेगा रोजगार में लगभग 35.3% मासिक गिरावट दर्ज की गई थी, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना मांग आधारित है. इसलिए रोजगार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. अधिकारियों के अनुसार मौसम, स्थानीय आजीविका के अवसर और क्षेत्रीय जरूरतें रोजगार मांग को प्रभावित करती हैं.

रोजगार बजट में बढ़ोतरी के संकेत

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है. यह वित्त वर्ष की पहली छमाही में रोजगार मांग में बढ़ोतरी का संकेत देता है.

नए और पुराने ढांचे का साथ-साथ संचालन

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई योजना पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक MGNREGA जारी रहेगी. बजट में भी दोनों योजनाओं के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं.

वित्त वर्ष 2027 के बजट में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ और मनरेगा के लिए ₹30,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पुराने भुगतान और संक्रमण अवधि के खर्च पूरे किए जा सकें.

कुल मिलाकर सरकार का यह कदम ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को स्थिर रखने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. साथ ही नई रोजगार योजना की तैयारी से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में ग्रामीण विकास मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
 


अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 54.7 पर, लेकिन पश्चिम एशिया संकट का दबाव जारी

अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.

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Monday, 04 May, 2026
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भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रैल महीने के दौरान सुधार देखने को मिला है. हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. निर्यात में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया, लेकिन लागत और महंगाई का दबाव भी लगातार बना हुआ है.

PMI में सुधार, लेकिन रफ्तार अब भी धीमी

पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. यह डेटा S&P Global और HSBC की रिपोर्ट में जारी किया गया है. हालांकि यह पिछले महीने के फ्लैश अनुमान 55.9 से कम रहा. PMI का 50 से ऊपर रहना विस्तार (growth) को दर्शाता है. यह लगातार 54वां महीना है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विस्तार के क्षेत्र में बना हुआ है.

पश्चिम एशिया संकट का असर जारी

अर्थशास्त्रियों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब महंगाई और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव बढ़ा है, जिससे उत्पादन लागत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है.

नए ऑर्डर और उत्पादन में हल्का सुधार

अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.

हालांकि, निर्यात ऑर्डर में तेज उछाल देखने को मिला और यह सात महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

लागत और महंगाई में तेज बढ़ोतरी

अप्रैल में एल्यूमिनियम, केमिकल्स, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनपुट कॉस्ट में तेज इजाफा हुआ. सर्वे में इसे सीधे तौर पर पश्चिम एशिया संकट से जोड़ा गया है.

इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी, जबकि आउटपुट कीमतों में भी पिछले छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई.

महंगाई 2022 के बाद उच्चतम स्तर पर

सर्वे के अनुसार कुल महंगाई दर अगस्त 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके चलते कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी की है. उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में लागत में थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन कुल मिलाकर दबाव अभी भी बना हुआ है.

रोजगार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रोजगार सृजन की दर 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. कंपनियां विस्तार योजनाओं के तहत नई भर्ती कर रही हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है.

कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार विस्तार के रास्ते पर बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी महंगाई और लागत का दबाव इसकी रफ्तार को प्रभावित कर रहा है. निर्यात में मजबूती फिलहाल इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है.
 


भू-राजनीतिक तनाव के बीच ओपेक+ ने तेल उत्पादन बढ़ाने पर लगाई मुहर

ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है.

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Monday, 04 May, 2026
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वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी अहम खबर में तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक (OPEC+) ने जून महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन लक्ष्य में मामूली बढ़ोतरी पर सहमति जताई है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण इसका वास्तविक सप्लाई पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं होगा.

1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी

ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है. यह लगातार तीसरा महीना है जब समूह उत्पादन बढ़ा रहा है. यह बढ़ोतरी मई में तय किए गए समान स्तर के अनुरूप है, हालांकि इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का हिस्सा शामिल नहीं है, जिसने 1 मई को समूह से अलग होने की घोषणा की थी.

भू-राजनीतिक तनाव से सीमित रहेगा असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम दिखाता है कि ओपेक+ मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद सामान्य स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. लेकिन सप्लाई में वास्तविक वृद्धि तब तक सीमित रहेगी जब तक शिपिंग स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं.

ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य, जो खाड़ी देशों के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है, वहां आवागमन बाधित बना हुआ है. इससे अतिरिक्त उत्पादन के बावजूद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ नहीं पा रही है.

सऊदी अरब का उत्पादन लक्ष्य बढ़ा

नई व्यवस्था के तहत प्रमुख उत्पादक देश साउदी अरब का उत्पादन लक्ष्य जून में बढ़कर 10.291 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा. हालांकि वास्तविक उत्पादन इससे काफी कम है. ओपेक के अनुसार, मार्च में सऊदी अरब का वास्तविक उत्पादन लगभग 7.76 मिलियन बैरल प्रतिदिन था.

बाजार को संतुलित रखने की रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक+ का यह फैसला इस बात का संकेत है कि समूह भविष्य में आपूर्ति तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन फिलहाल स्थिति को संतुलित बनाए रखना चाहता है. साथ ही यह भी संदेश दिया जा रहा है कि हाल के बदलावों के बावजूद समूह की एकजुटता और प्रभाव बरकरार है.

कुल मिलाकर, OPEC+ का यह निर्णय बाजार में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखाता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि भू-राजनीतिक हालात सामान्य होने पर उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक तेल आपूर्ति पर सबसे बड़ा असर डाल रही है.
 


1.65 अरब डॉलर की बड़ी डील: मित्तल परिवार और अदार पूनावाला खरीदेंगे राजस्थान रॉयल्स

यह डील भारतीय क्रिकेट और स्पोर्ट्स बिजनेस के इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में से एक मानी जा रही है. इससे न केवल Rajasthan Royals की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि IPL की ब्रांड वैल्यू को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है.

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Monday, 04 May, 2026
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खेल और कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. मित्तल परिवार ने इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) की फ्रेंचाइजी राजस्थाैन रॉयल्स (Rajasthan Royals) को खरीदने के लिए अदार पूनावाला के साथ मिलकर लगभग 1.65 अरब डॉलर की डील पर सहमति बना ली है. कंपनी के बयान के अनुसार, यह सौदा नियामकीय मंजूरी के अधीन है और इसके 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.

डील में शामिल फ्रेंचाइज़ियों का बड़ा पोर्टफोलियो

यह सौदा मौजूदा मालिक मनोज बडाले और उनके कंसोर्टियम के साथ किया गया है. इस डील में केवल राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन की बार्बाडोस रॉयल्स जैसी टीमें भी शामिल हैं.

हिस्सेदारी का गणित क्या रहेगा

डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूमावालालगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगे. बाकी करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही रहेगी, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं. बडाले टीम के साथ एक “ब्रिजिंग रोल” में जुड़े रहेंगे, ताकि पुराने और नए मालिकों के बीच संतुलन बना रहे.

मंजूरी के बाद ही पूरी होगी प्रक्रिया

इस डील को पूरा करने के लिए कई अहम संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी, जिनमें बीसीसीआई,सीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल शामिल हैं. सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने के बाद यह सौदा 2026 की तीसरी तिमाही में पूरा होने की उम्मीद है.

बोर्ड में शामिल होंगे बड़े नाम

डील पूरी होने के बाद लक्ष्मी एन मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले, सभी राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे.

लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि उन्हें क्रिकेट से बेहद लगाव है और उनका परिवार राजस्थान से जुड़ा है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स से बेहतर कोई टीम उनके लिए नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि बचपन से ही क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा रहा है और वह टीम के साथ जुड़कर भविष्य की सफलताओं का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं.

टीम की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर

आदित्य मित्तल ने कहा कि IPL बहुत कम समय में दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स लीग्स में शामिल हो गया है और राजस्थान रॉयल्स इसकी सबसे प्रतिष्ठित टीमों में से एक है. उन्होंने टीम की युवा प्रतिभाओं को निखारने की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई और “हल्ला बोल” के साथ टीम के उज्ज्वल भविष्य की बात कही.

पूनावाला और बडाले की प्रतिक्रिया

अदार पूनावाला ने इस निवेश को लेकर खुशी जताई और आदित्य मित्तल के साथ साझेदारी को लेकर उत्साह व्यक्त किया. वहीं, मनोज बडाले ने नए मालिकों का स्वागत करते हुए कहा कि वह आगे भी टीम का समर्थन करते रहेंगे.

 


GIFT निफ्टी में तेजी, चुनावी नतीजों की गूंज से बाजार की दिशा में आ सकता है बड़ा बदलाव

आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया.

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Monday, 04 May, 2026
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हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों में मजबूती और GIFT निफ्टी में तेज बढ़त से यह उम्मीद जताई जा रही है कि घरेलू बाजार की शुरुआत मजबूत रह सकती है. हालांकि, निवेशकों की नजर आज कई अहम ट्रिगर्स जैसे चुनावी नतीजे, तिमाही नतीजे (Q4) और IPO गतिविधियों पर टिकी हुई है.

GIFT निफ्टी से मजबूत शुरुआत के संकेत

आज सुबह GIFT निफ्टी में 100 से अधिक अंकों की तेजी देखी गई और यह 24,236 के करीब कारोबार करता नजर आया. यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 इंडेक्स हरे निशान में खुल सकता है. निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक है, लेकिन वे वैश्विक संकेतों और घरेलू घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.

चुनावी नतीजों पर टिकी बाजार की नजर

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में जारी मतगणना का असर बाजार की दिशा तय कर सकता है. राजनीतिक स्थिरता और आने वाली आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है. चुनावी नतीजों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

एशियाई बाजारों में मजबूती

एशिया-प्रशांत बाजारों में आज तेजी का माहौल देखने को मिला. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया और इसमें लगभग 3.5% की उछाल दर्ज हुई. जापान का निक्केई 225 भी करीब 0.38% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. इन सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.

US वॉल स्ट्रीट से मिले सकारात्मक संकेत

अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले सत्र में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन कुल मिलाकर माहौल सकारात्मक रहा. S&P 500 और नैस्डैक में बढ़त देखने को मिली. मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का असर सीमित रहा.

कच्चे तेल और कमोडिटी बाजार की चाल

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. शुरुआती गिरावट के बाद यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हुआ. वहीं, सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जो निवेशकों के बदलते रुख को दर्शाती है.

आज आएंगे बड़ी कंपनियों के Q4 नतीजे

आज कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिनमें अंबुजा सीमेंट्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), पेट्रोनेट LNG, गोदरेज प्रॉपर्टीज, टाटा टेक्नोलॉजीज, जिंदल स्टेनलेस, एथर एनर्जी, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एक्साइड इंडस्ट्रीज, सोभा, ज्योति लैब्स और कैश मैनेजमेंट सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों का असर उनके शेयरों की चाल पर साफ देखने को मिल सकता है.

IPO बाजार में बढ़ी हलचल

प्राइमरी मार्केट में भी आज गतिविधि तेज बनी हुई है. OnEMI टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस IPO दूसरे दिन में पहुंच गया है, लेकिन पहले दिन इसे केवल 0.25 गुना सब्सक्रिप्शन मिला और कंपनी करीब 925 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है. Value 360 कम्युनिकेशंस IPO आज सब्सक्रिप्शन का अंतिम दिन है. Bagmane प्राइम ऑफिस IPO आज खुल गया है, जिसका इश्यू साइज करीब 3,405 करोड़ रुपये है. Recode स्टूडियोज IPO भी आज निवेश के लिए खुला है और इसका साइज लगभग 44.59 करोड़ रुपये है.

कुल मिलाकर, आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए कई मायनों में अहम रहने वाला है. GIFT निफ्टी की तेजी और वैश्विक संकेत जहां सकारात्मक माहौल बना रहे हैं, वहीं चुनावी नतीजे और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है.
 


अगले हफ्ते IPO की बहार, 3,491 करोड़ जुटाने आएंगे तीन बड़े इश्यू; निवेशकों की नजरें टिकीं

आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं.

रितु राणा by
Published - Saturday, 02 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 02 May, 2026
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प्राइमरी मार्केट में कुछ समय की सुस्ती के बाद अब हलचल तेज होने जा रही है. अगले सप्ताह 3,491 करोड़ रुपए के तीन नए IPO बाजार में दस्तक देने वाले हैं, जिनमें एक बड़ा मेनबोर्ड REIT इश्यू भी शामिल है. हाल के IPO की शानदार लिस्टिंग और निवेशकों के उत्साह को देखते हुए इन इश्यूज को भी मजबूत प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है.

4 से 7 मई के बीच खुलेंगे तीन पब्लिक इश्यू

आने वाले सप्ताह में 4 मई से 7 मई के बीच कुल तीन पब्लिक ऑफर सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेंगे. इनमें एक मेनबोर्ड सेगमेंट का बड़ा इश्यू और दो SME सेगमेंट के IPO शामिल हैं. कुल मिलाकर कंपनियां इन इश्यूज के जरिए 3,491 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही हैं.

सबसे बड़ा दांव

इस हफ्ते का सबसे बड़ा और प्रमुख इश्यू बैगमेन प्राइम ऑफिस (Bagmane Prime Office REIT) का होगा. इसका सब्सक्रिप्शन 5 मई से 7 मई तक खुला रहेगा. कंपनी इस इश्यू के जरिए 3,405 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है, जिसमें 2,390 करोड़ रुपए का फ्रेश इश्यू और 1,015 करोड़ रुपए का ऑफर फॉर सेल शामिल है. इसकी प्राइस बैंड 95 से 100 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है.

प्रीमियम ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेश का मौका

यह REIT निवेशकों को बेंगलुरु की प्रीमियम कमर्शियल ऑफिस प्रॉपर्टीज में निवेश का अवसर देता है. इसके पोर्टफोलियो में 20.3 मिलियन वर्ग फीट में फैले 6 ग्रे A+ बिजनेस पार्क शामिल हैं, जिनमें जून 2025 तक करीब 97.9 प्रतिशत स्पेस लीज पर दिया जा चुका है. इसके प्रमुख किरायेदारों में गूगल (Google), अमेजन (Amazon) और एनवीडिया (Nvidia) जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जो इसकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती हैं.

कमाई और विस्तार पर फोकस

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में ट्रस्ट ने 829 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जबकि कुल आय 1,960 करोड़ रुपए रही. इस इश्यू से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा नई ऑफिस प्रॉपर्टीज खरीदने में लगाया जाएगा, जिससे किराये से होने वाली आय और स्थिरता बढ़ेगी.

SME सेगमेंट में भी हलचल

मेनबोर्ड के अलावा SME सेगमेंट में भी दो कंपनियां बाजार में उतरेंगी. वैल्यू 360 कम्यूनिकेशन्स (Value 360 Communications) का IPO 4 से 6 मई के बीच खुलेगा. कंपनी 41.7 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है, जिसकी प्राइस बैंड 95-98 रुपए प्रति शेयर है.

इसके बाद रिकोड स्टूडियोज (Recode Studios) का IPO 5 से 7 मई तक खुलेगा. कंपनी 44.6 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है और इसकी प्राइस बैंड 150-158 रुपए प्रति शेयर तय की गई है. दोनों SME इश्यू मिलकर 86 करोड़ रुपए से अधिक की फंडरेजिंग करेंगे.

निवेशकों की नजर मेनबोर्ड इश्यू पर

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो स्थिर रिटर्न और नियमित आय प्रदान कर सकें. ऐसे में REIT इश्यू में संस्थागत और खुदरा निवेशकों की खास दिलचस्पी देखने को मिल सकती है.

IPO बाजार में फिर लौट रही रौनक

हालिया IPO की मजबूत लिस्टिंग और बढ़ते निवेशक भरोसे के बीच यह सप्ताह प्राइमरी मार्केट के लिए अहम माना जा रहा है. अगर इन इश्यूज को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो आने वाले महीनों में IPO बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है.