निफ्टी बैंक 3 नवंबर 2021 के बाद आज 40,000 के पार पहुंचा है, मार्केट की ब्रेड्थ काफी अच्छी है, रुपया भी काफी स्टेबल दिख रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
मुंबई: भारतीय शेयर बाजारों की आज मजबूती के साथ हुई है, सेंसेक्स 150 अंक की मजबूती के साथ 59400 के ऊपर खुली है, निफ्टी में भी 70 अंकों की मजबूती के साथ 17700 के ऊपर खुला है, बैंक निफ्टी 3 नवंबर 2021 के बाद पहली बार 40,000 के पार पहुंचा है. खुलने के बाद बाजार में तेजी बढ़ रही है, सेंसेक्स 290 अंक मजबूत हो चुका है.
निफ्टी के 50 शेयरों में से 46 शेयरों में तेजी है, बाकी 4 शेयर हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं. सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सारे के सारे सेक्टर्स हरे निशान में हैं. सभी सेक्टर आधा परसेंट से ज्यादा मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं, बैंक, ऑटो, ऑयल एंड गैस, रियल्टी शेयरों में अच्छी मजबूती है, आज आईटी शेयरों में भी चौथाई परसेंट की तेजी दिख रही है.
निफ्टी में चढ़ने वाले
काफी समय के बाद आज Apollo Hospitals में तेजी दिखाई दी है, ये 2 परसेंट मजबूत हुआ है. PowerGrid, HDFC, NTPC, Tata Motors, Bajaj Auto, Reliance में करीब 1 परसेंट की मजबूती दिखाई दे रही है. Coal India, Indusind Bank, Bharti Airtel, Cipla, Adani Ports, Tata Consumers, L&T, Hero Motocorp, Maruti, Shree Cement, SBI Life में आधा परसेंट से ज्यादा की तेजी है.
निफ्टी में गिरने वाले
आज निफ्टी में गिरने वाले शेयरों की संख्या बहुत कम है. ITC, Nestle, ONGC, Wipro, TCS में बहुत हल्की कमजोरी है.
रुपया आज भी स्थिर
डॉलर के मुकाबले रुपया काफी स्थिर है, आज भी रुपया 4 पैसे की मजबूती के साथ 79.80 पर खुला है, जबकि क्लोजिंग 79.84 पर हुई थी. हालांकि डॉलर इंडेक्स में मजबूती अब भी कायम है ये 110 के ऊपर बना हुआ है.
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RBI MPC मिनट्स में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता का असर भारतीय वित्तीय परिस्थितियों पर भी पड़ेगा. इससे आर्थिक विकास की संभावनाओं पर दबाव बन सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले वर्ष में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स के अनुसार, वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता, ऊंची ऊर्जा कीमतें और कमोडिटी की बढ़ती लागत 2026-27 में घरेलू उत्पादन और विकास दर पर दबाव डाल सकती है.
वैश्विक अस्थिरता से बढ़ेगा जोखिम
MPC मिनट्स में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता का असर भारतीय वित्तीय परिस्थितियों पर भी पड़ेगा. इससे आर्थिक विकास की संभावनाओं पर दबाव बन सकता है. विशेष रूप से यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो इसका असर व्यापार और निवेश दोनों पर देखने को मिल सकता है.
ऊर्जा और कमोडिटी कीमतें बड़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी की बढ़ती लागत घरेलू उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं. साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा से सप्लाई शॉक का खतरा भी बना हुआ है, जिससे उत्पादन और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है.
निर्यात पर भी दबाव संभव
MPC ने संकेत दिया है कि यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. शिपिंग रूट्स में बाधा और फ्रेट व इंश्योरेंस लागत बढ़ने से निर्यात महंगा हो सकता है.
घरेलू मांग से मिल रहा सपोर्ट
चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था को कुछ मजबूत कारक समर्थन दे रहे हैं. इनमें सर्विस सेक्टर की मजबूत गति, GST सुधारों का प्रभाव, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ती क्षमता उपयोगिता, कॉरपोरेट और फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत बैलेंस शीट शामिल हैं.
महंगाई का अनुमान और जोखिम
मिनट्स के अनुसार 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है. तिमाही आधार पर यह इस प्रकार रह सकती है:
- Q1: 4.0%
- Q2: 4.4%
- Q3: 5.2%
- Q4: 4.7%
हालांकि कोर महंगाई 4.4% के आसपास रहने का अनुमान है, जो यह संकेत देता है कि बुनियादी महंगाई दबाव सीमित रह सकते हैं.
गवर्नर का बयान और सतर्कता की जरूरत
संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लगातार निगरानी और सतर्कता की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है, लेकिन बाहरी झटकों का असर फिर भी देखने को मिल सकता है.
RBI के MPC मिनट्स संकेत देते हैं कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों में तेजी आने वाले समय में भारत की विकास गति और महंगाई दोनों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक बुनियाद इन चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है.
Amazon India अपने फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और डिलीवरी स्टेशनों के विस्तार और अपग्रेड पर फोकस कर रही है. इससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिलीवरी तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में ई-कॉमर्स प्रतिस्पर्धा के बीच Amazon India ने बड़ा निवेश ऐलान किया है. कंपनी अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने और कर्मचारियों की सुरक्षा व सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 2,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी. यह निवेश कंपनी के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वह 2030 तक भारत में टेक्नोलॉजी, AI, एक्सपोर्ट और रोजगार के क्षेत्र में भारी निवेश करने की योजना बना रही है.
लॉजिस्टिक्स नेटवर्क होगा और मजबूत
Amazon India अपने फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और डिलीवरी स्टेशनों के विस्तार और अपग्रेड पर फोकस कर रही है. इससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिलीवरी तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी. कंपनी अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon Now का भी विस्तार कर रही है, जो कुछ ही मिनटों से लेकर कुछ दिनों में डिलीवरी की सुविधा देता है.
पहले भी किया था बड़ा निवेश
कंपनी ने 2025 में भी करीब ₹2,000 करोड़ का निवेश किया था, जिसके तहत 17 फुलफिलमेंट सेंटर, 6 सॉर्टेशन सेंटर, 75 डिलीवरी स्टेशन और 300 से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर स्थापित किए गए थे. इससे भारत में डिलीवरी नेटवर्क को काफी मजबूती मिली थी.
कर्मचारियों की सुरक्षा पर खास ध्यान
Amazon India ने कहा है कि उसके लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत उसके कर्मचारी हैं. इसलिए इस निवेश का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा. वेयरहाउस में बेहतर वेंटिलेशन, तापमान नियंत्रण, आराम क्षेत्र, साफ पानी और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है.
AI और टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल
कंपनी अपने ऑपरेशन्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ा रही है. इससे डिलीवरी रूट प्लानिंग, ड्राइवर सेफ्टी और काम की दक्षता में सुधार होगा. ड्राइवर ऐप को भी अपग्रेड किया जा रहा है ताकि नेविगेशन आसान हो और कमाई की जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके.
भारत का ई-कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है
भारत में Amazon को Flipkart, JioMart और BigBasket जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. साथ ही क्विक कॉमर्स सेक्टर में Blinkit, Instamart और Zepto जैसी कंपनियां भी तेजी से विस्तार कर रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्तमान में 120 से 140 अरब डॉलर का है, जो 2030 तक 280 से 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
Amazon India का यह निवेश न सिर्फ उसके लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार में उसकी पकड़ को भी और मजबूत बनाएगा. कंपनी का फोकस अब तेजी, टेक्नोलॉजी और बेहतर ग्राहक अनुभव पर साफ दिखाई दे रहा है.
इस बड़े फंडिंग राउंड के साथ LightFury Games ने भारत के गेमिंग स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत पहचान बनाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गेमिंग स्टार्टअप LightFury Games ने प्री-सीरीज़ ए फंडिंग राउंड में 11 मिलियन डॉलर (करीब ₹90 करोड़) जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड में भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी समेत कई बड़े क्रिकेटरों ने निवेश किया है. कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने नए हाई-एंड क्रिकेट गेम “eCricket” के विकास और वैश्विक लॉन्च की तैयारी के लिए करेगी.
धोनी समेत कई क्रिकेटर्स का निवेश
इस फंडिंग राउंड में एमएस धोनी के साथ-साथ मौजूदा भारतीय क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या ने भी बतौर स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर हिस्सा लिया है. इनके अलावा श्रेयस अय्यर, रवींद्र जडेजा, तिलक वर्मा और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ियों ने भी निवेश किया है.
बड़े निवेशकों की भागीदारी
इस राउंड में केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कई बड़े वेंचर कैपिटल और ग्लोबल निवेशक भी शामिल रहे. इनमें Blume Ventures, V3 Ventures, जापान की MIXI और Times Internet जैसे नाम शामिल हैं.
eCricket गेम पर फोकस
LightFury Games एक 100 लोगों की टीम के साथ हाई-एंड “AAA” गेम डेवलपमेंट पर काम कर रही है. कंपनी का प्रमुख प्रोडक्ट “eCricket” होगा, जो एक मोबाइल आधारित क्रिकेट गेम है और इसे 2026 में वैश्विक स्तर पर लॉन्च करने की योजना है. कंपनी इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से गेम के डेवलपमेंट को पूरा करने और लॉन्च के बाद लाइव-ऑपरेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी.
क्रिकेट फैनबेस को टारगेट करने की रणनीति
कंपनी का फोकस क्रिकेट के वैश्विक फैनबेस पर है, जो 2.5 अरब से अधिक माना जाता है. LightFury का मानना है कि इस बड़े मार्केट में अभी तक तकनीकी रूप से एडवांस्ड गेमिंग प्रोडक्ट्स की कमी है.
टेक्नोलॉजी और फीचर्स
eCricket को Unreal Engine 5 पर विकसित किया जा रहा है. यह एक लाइव-सर्विस गेम होगा, जिसमें फिजिक्स-बेस्ड गेमप्ले और AI आधारित कमेंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी ने पहले ही 600 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लाइसेंसिंग अधिकार हासिल करने का दावा किया है.
LightFury Games के को-फाउंडर और CEO करण श्रॉफ ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गेमिंग बाजारों में से एक है, लेकिन अभी तक कोई विश्वस्तरीय AAA स्पोर्ट्स गेम नहीं बना है. उनका लक्ष्य भारत से एक ग्लोबल लेवल का क्रिकेट गेम तैयार करना है.
अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत संकेत दिए हैं. अप्रैल 2026 में प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई है और कॉम्पोजिट PMI बढ़कर 58.3 पर पहुंच गया है. बढ़ती मांग, नए ऑर्डर और उत्पादन में इजाफे ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती साफ दिखाई दे रही है.
प्राइवेट सेक्टर में तेज़ी के संकेत
HSBC फ्लैश इंडिया कॉम्पोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स अप्रैल में 58.3 रहा, जो मार्च में 57.0 था. यह डेटा S&P Global द्वारा जारी किया गया है. PMI का 50 से ऊपर रहना आर्थिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है. मौजूदा स्तर लंबे समय के औसत से ऊपर है, जो मजबूत बिजनेस ग्रोथ का संकेत देता है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का इंजन
अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था. हालांकि सर्विस सेक्टर में भी बढ़त जारी रही, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार ज्यादा तेज रही, जिसने कुल ग्रोथ को आगे बढ़ाया.
आउटपुट और नए ऑर्डर में उछाल
HSBC की चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मार्च में पश्चिम एशिया तनाव से आई रुकावट के बाद अब बिजनेस गतिविधियों में फिर तेजी आई है. कंपनियों को नए ऑर्डर तेजी से मिल रहे हैं और उत्पादन भी बढ़ा है. सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कंपनियां कच्चे माल और तैयार उत्पाद का स्टॉक भी बढ़ा रही हैं.
लागत दबाव बरकरार, कीमतों में बढ़ोतरी
हालांकि मांग मजबूत है, लेकिन कंपनियों पर लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है. इस दबाव का कुछ हिस्सा कंपनियों ने कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाला है.
रोजगार में तेज बढ़त
अप्रैल में प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं. यह पिछले 10 महीनों की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है. इसका कारण बिजनेस विस्तार योजनाएं, बढ़ती मांग, भविष्य को लेकर सकारात्मक नजरिया है.
आगे का आउटलुक कैसा?
कंपनियां आने वाले 12 महीनों को लेकर आशावादी बनी हुई हैं. हालांकि मार्च के मुकाबले भरोसे में हल्की कमी आई है, लेकिन यह अभी भी पिछले 18 महीनों के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है.
अप्रैल के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत मांग और उत्पादन के दम पर नई रफ्तार पकड़ रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती आने वाले महीनों में ग्रोथ को और गति दे सकती है.
नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए कानून के तहत प्रशासनिक नियमों को अधिसूचित कर दिया है. ये नियम 1 मई 2026 से लागू होंगे. इसके तहत अब गेमिंग कंपनियों को यूजर्स की सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार गेमिंग सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानकों का पालन करना होगा.
सरकार ने जारी किए नए नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे जो वित्तीय, मानसिक, सामाजिक और सामग्री संबंधी नुकसान से उपयोगकर्ताओं की रक्षा कर सकें. नए नियमों का उद्देश्य जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देना और यूजर्स, खासकर बच्चों को किसी भी तरह के जोखिम से बचाना है.
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन
सरकार ने इस सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण का गठन किया है. इसमें कुल छह सदस्य होंगे.
इसमें शामिल होंगे:
- आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अध्यक्ष)
- गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव
- वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारी
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी
- युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी
- विधि विभाग के अधिकारी
पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव
नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो. साथ ही सभी ई-स्पोर्ट्स को अब अनिवार्य रूप से प्राधिकरण में रजिस्टर करना होगा.
शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य
सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी, ताकि यूजर्स की समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके.
यह व्यवस्था हर गेमिंग कंपनी के लिए अनिवार्य होगी और इसे सक्रिय रूप से संचालित करना होगा.
सरकार का रुख: सख्ती कम, सुरक्षा ज्यादा
आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि सरकार ऑनलाइन गेमिंग को जरूरत से ज्यादा रेगुलेट नहीं करना चाहती, लेकिन यूजर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
1 मई से लागू होने वाले ये नए नियम भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं. इससे जहां इंडस्ट्री को स्पष्ट गाइडलाइन मिलेगी, वहीं यूजर्स की सुरक्षा भी मजबूत होगी.
कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और जर्मनी की एलियांज ने भारत में 50:50 हिस्सेदारी के साथ एक प्राथमिक बीमा संयुक्त उद्यम बनाने के लिए बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह पहल देश के तेजी से बढ़ते सामान्य और स्वास्थ्य बीमा बाजार को लक्ष्य बनाएगी.
डिजिटल ताकत और वैश्विक विशेषज्ञता का संगम
कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा. सभी वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस संयुक्त उद्यम का संचालन शुरू होगा.
तकनीक आधारित बीमा उत्पादों पर जोर
दोनों साझेदारों ने बताया कि यह उद्यम व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए व्यापक और तकनीक-आधारित बीमा उत्पाद उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखेगा. यह पहल भारत के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के नीति लक्ष्य के अनुरूप होगी.
भारत में बीमा क्षेत्र की बड़ी संभावनाएं
भारत दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां बीमा कवरेज अभी भी कम है. हालांकि, बढ़ती आय, डिजिटल अपनाने और सरकारी नीतियों के समर्थन से बीमा की मांग में तेज वृद्धि देखी जा रही है.
जीवन बीमा क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी
कंपनियों ने यह भी संकेत दिया कि वे भारत के जीवन बीमा क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक अलग बाध्यकारी समझौते पर काम कर रही हैं. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि यह साझेदारी समूह के उस सिद्धांत को दर्शाती है जिसमें आवश्यक सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि जियो की डिजिटल पहुंच और एलियांज की वैश्विक विशेषज्ञता का संयोजन बेहद प्रभावशाली है और इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ते और आसान बीमा उत्पाद उपलब्ध कराना होगा.
एलियांज की दीर्घकालिक रणनीति
एलियांज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर बाटे ने कहा कि कंपनी, जो वर्ष 2000 से भारत में सक्रिय है, इस साझेदारी को सुरक्षा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता मजबूत करने के अवसर के रूप में देखती है. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के लिए एक अधिक सुरक्षित और वित्तीय रूप से मजबूत भविष्य बनाने में मदद करेगी.
वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि
भारत का बीमा क्षेत्र वैश्विक बीमा कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. नियामकीय सुधार और डिजिटल वितरण के विस्तार से दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में नए विकास अवसर खुल रहे हैं.
कंपनी के अनुसार, चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ बढ़कर 1,354 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, राजस्व सालाना आधार पर 7.2 प्रतिशत बढ़कर 56,815 करोड़ रुपये रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टेक महिंद्रा ने मार्च 2026 तिमाही के लिए अपने समेकित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. मजबूत डील जीत और मार्जिन में सुधार के चलते कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा. साथ ही, कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 36 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है.
मुनाफा और राजस्व में बढ़ोतरी
कंपनी के अनुसार, चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ बढ़कर 1,354 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, राजस्व सालाना आधार पर 7.2 प्रतिशत बढ़कर 56,815 करोड़ रुपये रहा. ब्याज और कर से पहले की आय (EBIT) में 39.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई और यह 7,152 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
पूरे साल का प्रदर्शन भी मजबूत
पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कर पश्चात लाभ 13.2 प्रतिशत बढ़कर 4,811 करोड़ रुपये हो गया.
डील विन में बड़ी छलांग
चौथी तिमाही में कंपनी की नई डील्स का कुल मूल्य 1.096 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 47 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 34.3 प्रतिशत अधिक है.
एआई आधारित रणनीति पर जोर
टेक महिंद्रा के सीईओ और प्रबंध निदेशक मोहित जोशी ने कहा कि कंपनी तेजी से एआई-आधारित संगठन बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सेवाओं में एआई को शामिल करते हुए ग्राहकों के लिए बेहतर वैल्यू देने पर फोकस किया जा रहा है और कंपनी वित्त वर्ष 2027 के लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है.
मार्जिन में लगातार सुधार
मुख्य वित्तीय अधिकारी रोहित आनंद ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 कंपनी के स्थिरीकरण चरण का अंत रहा. चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद लगातार 10वीं तिमाही में मार्जिन में सुधार दर्ज किया गया. उन्होंने कहा कि पूरे साल में कुल 51 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया गया, जो कंपनी के इतिहास में सबसे अधिक है.
कर्मचारियों की संख्या में कमी
मार्च के अंत तक कंपनी का कुल हेडकाउंट 1,47,623 रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 1,108 कम है. तिमाही आधार पर कर्मचारियों की संख्या में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई. पिछले 12 महीनों में आईटी सेवाओं में एट्रिशन दर घटकर 12.1 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 12.3 प्रतिशत थी.
नकदी स्थिति मजबूत
तिमाही के अंत में कंपनी के पास 8,456 करोड़ रुपये की नकदी और नकदी समकक्ष उपलब्ध थे. ब्रोकरेज फर्म इक्विरस रिसर्च के अनुसार, टेक महिंद्रा का चौथी तिमाही का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप रहा. हालांकि, उन्होंने मांग के रुझान, विकास रणनीति और मार्जिन को लेकर प्रबंधन से और स्पष्टता का इंतजार जताया.
शेयर में गिरावट
परिणाम घोषित होने के बाद दोपहर के कारोबार में टेक महिंद्रा का शेयर 2.5 प्रतिशत गिरकर 1,463.30 रुपये पर कारोबार करता देखा गया.
इन प्रोजेक्ट्स से MSME को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महाराष्ट्र की औद्योगिक तस्वीर तेजी से बदलने वाली है. राज्य सरकार ने एक साथ 2.56 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश वाले 18 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. यह फैसला न सिर्फ औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा.
सरकार की बैठक में बड़ा फैसला
देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनन से जुड़ी कैबिनेट उप-समिति की 14वीं बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकारी बयान के अनुसार इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹2,56,137.01 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है.
किन सेक्टर्स में होगा निवेश?
यह निवेश कई रणनीतिक और हाई-टेक क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
1. सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल
2. ग्रीन स्टील और ग्रीन अमोनिया
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल
4. लिथियम-आयन बैटरी
5. स्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी
6. गैस-टू-केमिकल्स इंडस्ट्री
सरकार का लक्ष्य इन सेक्टर्स के जरिए राज्य को इंडस्ट्रियल हब के रूप में और मजबूत करना है.
कई बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश
इस मेगा प्लान के तहत देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां महाराष्ट्र में भारी निवेश करेंगी.
1. Virtuoso Compressors (नासिक): ₹800 करोड़, 500 नौकरियां
2. Tembo Defence (अमरावती): ₹1,000 करोड़
3. Jabil Circuit (पुणे): ₹1,500 करोड़, 3,000 नौकरियां
4. Ashok Leyland (भंडारा): ₹10,000 करोड़
5. ACME Cleantech (नागपुर व रायगढ़): ₹22,400 करोड़ से अधिक
6. Solar Defence and Aerospace (नागपुर): ₹12,780 करोड़
7. Godavari New Energy (छत्रपति संभाजीनगर): ₹27,515 करोड़
8. Rashmi Metallurgical Industries (गढ़चिरोली): ₹40,000 करोड़, 20,000 नौकरियां
9. Essar Exploration and Production (रायगढ़): ₹56,852 करोड़, 25,000 नौकरियां
रोजगार और स्थानीय विकास पर जोर
सरकारी अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से 1 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी. इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश कोंकण, विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को तेज करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा.
MSME और स्किल डेवलपमेंट को फायदा
इन प्रोजेक्ट्स से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.
महाराष्ट्र का यह मेगा निवेश पैकेज राज्य को औद्योगिक विकास के नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है. सरकार का दावा है कि यह कदम न सिर्फ निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय विकास की गति को भी कई गुना बढ़ा देगा.
ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी डिजिटल वॉलेट और कार्ड्स के नियमों में बड़े बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्ताव के मुताबिक अब किसी भी वॉलेट में ₹2 लाख से ज्यादा बैलेंस रखने की अनुमति नहीं होगी. इस मसौदे पर 22 मई 2026 तक स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं.
RBI ने डिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित बनाने के लिए PPI फ्रेमवर्क में व्यापक बदलाव की तैयारी की है. PPI ऐसे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं. जिनमें पहले पैसे लोड किए जाते हैं और फिर उसी बैलेंस का उपयोग खरीदारी या ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है. ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है. अब महीने में ₹10,000 से ज्यादा कैश लोड नहीं किया जा सकेगा.
RBI ने PPI को अलग अलग कैटेगरी में बांटा है. जिनमें जनरल पर्पज, गिफ्ट PPI, ट्रांजिट PPI (मेट्रो/बस कार्ड) और NRI PPI शामिल हैं. प्रस्ताव के मुताबिक.
1. गिफ्ट PPI की अधिकतम सीमा ₹10,000 होगी
2. ट्रांजिट PPI की सीमा ₹3,000 तय की गई है
कौन जारी कर सकेगा PPI?
ड्राफ्ट में कहा गया है कि वे बैंक जिन्हें डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति मिली है. वे RBI के पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम विभाग (DPSS) को सूचना देकर PPI जारी कर सकते हैं. इसके अलावा गैर बैंकिंग कंपनियां भी RBI की मंजूरी के बाद PPI जारी कर सकेंगी. हालांकि गैर बैंकिंग संस्थाओं के लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹5 करोड़ होना जरूरी होगा. और उन्हें अपने वैधानिक ऑडिटर से प्रमाण पत्र भी देना होगा.
सुरक्षा और कस्टमर प्रोटेक्शन पर फोकस
इस नए ड्राफ्ट में ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी को मजबूत करने. रिफंड प्रोसेस को स्पष्ट बनाने और शिकायतों के तेजी से निपटारे के लिए भी नियम शामिल किए गए हैं. RBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित बनाना है. अब इस ड्राफ्ट पर 22 मई तक इंडस्ट्री से फीडबैक लिया जाएगा. जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते हैं.
बुधवार को BSE सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है. पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया है. पिछले सत्र की तेज गिरावट का असर आज भी जारी है और साप्ताहिक एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है. बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट का असर गुरुवार की शुरुआत में भी देखने को मिल रहा है.
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. एचसीएल टेक के शेयर 10% से अधिक टूटे, जिससे कंपनी के मार्केट कैप में करीब 40,000 करोड़ रुपये की कमी आई. वहीं इंफोसिस और टीसीएस में भी लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई.
दिग्गज शेयरों में कमजोरी
महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में दबाव रहा. हालांकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट में हल्की खरीदारी देखने को मिली.
मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त
आईटी के साथ-साथ फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो शेयरों में भी गिरावट रही. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सीमित बढ़त दर्ज की गई. इस दौरान रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93.79 पर पहुंच गया.
पश्चिम एशिया तनाव बना मुख्य वजह
गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख कारण रही. सीजफायर बढ़ने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने कमजोरी को और गहरा किया.
आज साप्ताहिक एक्सपायरी
गुरुवार को साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव संभव है. गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं.
इन शेयरों पर रखें नजर
आज इंफोसिस, टाटा कैपिटल, आदित्य बिरला सन लाइफ एएमसी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, ब्लूस्टोन ज्वैलरी एंड लाइफस्टाइल, सीआईई ऑटोमोटिव इंडिया, साइएंट, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX), महिंद्रा लॉजिस्टिक्स, स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी.
मंथली डेटा के अनुसार मार्च में रिलायंस जियो ने 32.27 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े, जबकि भारती एयरटेल ने 50.94 लाख और वोडा आइडिया ने 1.02 लाख यूजर्स जोड़े, जो सेक्टर में मजबूती का संकेत है. क्वांट म्यूचुअल फंड ने ब्लैकबक में हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मुफिन ग्रीन फाइनेंस में खरीद-बिक्री के सौदे हुए. इसके अलावा आज क्रिसिल, हुहतामाकी इंडिया और शेफलर इंडिया एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे, वहीं सेल में एफएंडओ की नई पोजिशन पर रोक रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)